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                <title>कर्नाटक में नई सरकार की कवायद: सोनिया-राहुल से मिले सिद्दारमैया और शिवकुमार, कैबिनेट फेरबदल पर मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इस्तीफे के बाद दिल्ली में राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मुलाकात की। डीके शिवकुमार के नेतृत्व में नई सरकार के गठन और चार उप-मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति पर गहन चर्चा हुई। राज्यपाल ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, और नए बदलावों के तहत कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/siddaramaiah-meets-gandhi-family-amid-change-of-power-in-karnataka/article-155343"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(2)86.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। उनके इस्तीफे के बाद राज्य में अगली सरकार के गठन को लेकर गहन चर्चा हुई। सिद्दारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला के साथ, राजधानी में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले। सूत्रों के अनुसार, बैठक में नई सरकार के गठन पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल, राज्यसभा नामांकन और विधान परिषद में नियुक्तियां शामिल थीं।</p>
<p>दोनों नेताओं के शुक्रवार अपराह्न बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से भी मुलाकात करने की उम्मीद है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, निवर्तमान सिद्दारमैया मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों को शिवकुमार के नेतृत्व वाली प्रस्तावित सरकार में जगह नहीं मिल सकती है। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए चार उप मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति की संभावना पर भी चर्चा हुई। इस बीच कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने आज सिद्दारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया और मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया।</p>
<p>लोकभवन से जारी एक आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक सिद्धारमैया कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे। पद छोड़ने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सिद्दारमैया ने कांग्रेस नेतृत्व और कर्नाटक की जनता को दो बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्दलीय विधायकों के समर्थन से कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है और उन्होंने विश्वास जताया कि अगले मुख्यमंत्री की नियुक्ति में संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:12:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>क्या कांग्रेस के हाथों से फिसल रहा कर्नाटक? दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक रूप से उचित;  सिर्फ नेतृत्व नहीं, नियंत्रण भी</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी कलह तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को दिल्ली आलाकमान ने तलब किया है। 136 विधायकों के स्पष्ट बहुमत के बावजूद दोनों गुटों में नेतृत्व परिवर्तन और रोटेशन फॉर्मूले को लेकर रस्साकशी जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/is-karnataka-slipping-from-the-hands-of-congress-the-claims/article-155038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/karnataka.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति को एक बार फिर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच शक्ति संघर्ष के रूप में देखा जा रहा है और यह मुद्दा केवल मुख्यमंत्री पद को लेकर व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता का नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राज्य में सत्ता संतुलन, महत्वाकांक्षाओं और संगठनात्मक अनुशासन को संभालने की संरचनात्मक चुनौती का है। सिद्दारमैया और शिवकुमार को दिल्ली तलब किये जाने तथा पार्टी आलाकमान के साथ उनकी बैठकों के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। यह सवाल कांग्रेस सरकार के 2023 में गठन के समय से ही मौजूद हैं। </p>
<p>फर्क सिर्फ इतना है कि अब दोनों खेमों की ओर से संकेत अधिक स्पष्ट हो गये हैं और पार्टी के कुछ वर्गों में अधीरता बढ़ी है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में एक राजनीतिक विरोधाभास है। कर्नाटक में कांग्रेस संख्यात्मक रूप से मजबूत है, लेकिन आंतरिक रूप से पूरी तरह एकजुट नहीं है। 224 सदस्यीय विधानसभा में 136 विधायकों के साथ पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत है। इसके बावजूद यह मजबूती स्थिर नेतृत्व सहमति में तब्दील नहीं हो सकी है। स्थिति को अब तक अनौपचारिक समझौतों, परस्पर अपेक्षाओं और समय-समय पर आलाकमान के हस्तक्षेप के जरिए संभाला जाता रहा है। सिद्दारमैया अनुभव, जनाधार आधारित राजनीति और 'अहिंदा' सामाजिक समीकरण का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसने लंबे समय से कर्नाटक में कांग्रेस के आधार को मजबूत किया है। उनके समर्थक उन्हें ऐसा स्थिर नेता मानते हैं जिसने चुनावी सफलता दिलायी और जो अब भी विधायकों के बीच प्रभाव बनाए हुए हैं।</p>
<p>दूसरी ओर, शिवकुमार संगठनात्मक क्षमता, चुनावी रणनीति और 2023 की जीत में अपनी भूमिका के आधार पर दावेदारी पेश करते हैं। उनका खेमा संख्या बल के साथ-साथ योगदान, समय और पार्टी संगठन पर पकड़ को भी अपनी ताकत मानता है। कांग्रेस आलाकमान के सामने चुनौती यह है कि दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक रूप से उचित हैं, लेकिन लंबे समय तक दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं है। एक पक्ष को संतुष्ट करने से दूसरे पक्ष में असंतोष बढ़ने का जोखिम बना रहता है। इसी कारण समाधान की जगह संतुलन साधने की राजनीति जारी है।</p>
<p>यही वजह है कि कर्नाटक की राजनीति बार-बार "रोटेशन", "मंत्रिमंडल फेरबदल" और "आलाकमान चर्चा" जैसे शब्दों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। ये स्थायी समाधान नहीं, बल्कि दबाव को अस्थायी रूप से नियंत्रित करने के उपाय हैं, जो सरकार के भीतर दो शक्ति केंद्रों की मूल समस्या को टालते रहे हैं। हाल के दिनों में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा भी इसी पृष्ठभूमि में देखी जा रही है। विभागों में बदलाव या मंत्रिमंडल विस्तार से अस्थायी संतुलन जरूर बनाया जा सकता है, लेकिन इससे नेतृत्व अधिकार का मूल प्रश्न हल नहीं होता। इससे केवल मौजूदा व्यवस्था को कुछ समय के लिए आगे बढ़ाया जाता है।</p>
<p>असल सवाल यह नहीं है कि सिद्दारमैया अपना कार्यकाल पूरा करेंगे या शिवकुमार भविष्य में मुख्यमंत्री बनेंगे। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या कांग्रेस के पास ऐसी कोई स्थायी व्यवस्था है, जिसके तहत उस राज्य में दोहरे नेतृत्व को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके, जहां चुनावी सफलता ने कई दावेदार पैदा कर दिये हैं, लेकिन आलाकमान के अलावा कोई स्पष्ट निर्णायक व्यवस्था नहीं है। दल-बदल, विधानसभा अंकगणित या विपक्षी समीकरणों को लेकर लगायी जा रही अटकलों की अब तक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल किसी भी गुट के पास सरकार की स्थिरता को प्रभावित करने का स्पष्ट रास्ता नहीं दिखता और संख्या बल अब भी कांग्रेस के पक्ष में है। ऐसे में आलाकमान केवल दर्शक नहीं, बल्कि संतुलन बनाए रखने वाली प्रमुख शक्ति है। </p>
<p>हालांकि, उसकी क्षमता भी सीमित है। निर्णयों में देरी से अटकलें बढ़ती हैं, अस्पष्ट संकेतों से गुटीय व्याख्याओं को बल मिलता है और समझौता आधारित समाधान अक्सर उत्तराधिकार के सवाल को हल करने के बजाय टाल देते हैं। कर्नाटक की स्थिति भारतीय राजनीति के व्यापक स्वरूप को भी दर्शाती है, जहां मजबूत क्षेत्रीय नेताओं, व्यक्तिगत नेटवर्क और केंद्रीकृत पार्टी नियंत्रण के कारण चुनावी सफलता के बाद टकराव की स्थिति पैदा होती है, खासकर तब जब नेतृत्व पहले से स्पष्ट नहीं किया गया हो।</p>
<p>मंत्रिमंडल संतुलन, विभिन्न गुटों को आश्वस्त करने और नियंत्रित राजनीतिक संदेशों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। फिलहाल राजनीतिक हित निरंतरता के पक्ष में हैं, इसलिए किसी बड़े टकराव की संभावना कम मानी जा रही है।हालांकि सरकार संख्या बल के लिहाज से स्थिर है, लेकिन आंतरिक रूप से अस्थिर बनी हुई है। इसके पीछे वह मूल प्रश्न अब भी अनसुलझा है, जिससे पार्टी 2023 से बचती रही है; जब जीत सामूहिक हो, लेकिन नेतृत्व विवादित हो, तब अधिकार का निर्धारण कौन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:13:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>समान नागरिक संहिता से आदिवासी समुदाय को कोई नुकसान नहीं, हर व्यक्ति को आत्म-सम्मान के साथ जीने का अधिकार : अमित शाह</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रामलीला मैदान में आदिवासियों को आश्वस्त किया कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। मोदी सरकार ने गुजरात और उत्तराखंड में आदिवासियों को इससे बाहर रखा है। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित इस समागम में धर्मांतरण और आरक्षण जैसे मुद्दे भी उठे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uniform-civil-code-causes-no-harm-to-tribal-community-every/article-154921"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/amit-shah.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आदिवासी समुदाय के लोगों से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) नहीं डरने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें इससे कोई नुकसान नहीं होगा। शाह ने यहां के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 'तू-मैं एक रक्त, वनवासी-ग्रामवासी-नगरवासी, हम सब भारतवासी' नाम से आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम को संबोधित करते हुए कहा, "यह समागम आने वाले वर्षों तक जनजातियों के 'महाकुंभ' के रूप में जाना जाएगा। आप देश के दूर-दराज के इलाकों से, पारंपरिक वेशभूषा में, अपने वाद्य यंत्रों के साथ और अपनी संस्कृति के गीत गाते हुए यहाँ आए हैं, तो मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूँ कि मैंने अपने जीवन में कभी भगवान बिरसा मुंडा को नहीं देखा, लेकिन आज भगवान बिरसा मुंडा साक्षात मेरे सामने प्रकट हुए हैं। मैं आप सभी को नमन करता हूँ। "</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारे संविधान निर्माताओं ने हर व्यक्ति को अपने मूल धर्म में आत्म-सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया है। लोगों को लालच देकर किसी का धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। अब हमें दिल्ली की इस धरती से अपने धर्म की रक्षा करने की शपथ लेनी चाहिए और यह हमें हमारी संस्कृति और हमारे देश से जोड़े रखेगी।" केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, "मैं मध्य प्रदेश और गुजरात से आए अपने सभी भाइयों और बहनों का, मध्य प्रदेश और गुजरात के भील और मुंडा समुदायों का, छत्तीसगढ़ के गोंड और कोलाम समुदायों का, झारखंड और ओडिशा के संथाल और उरांव समुदायों का, पूर्वोत्तर के बोडो, कार्बी, दिमासा, खासी, गारो और चकमा समुदायों का, और आंध्र प्रदेश के चेंचु समुदायों का तहे दिल से स्वागत करता हूँ। मैं दोनों संगठनों का गहरा आभार व्यक्त करना चाहता हूँ कि उन्होंने मुझे अपने जीवनकाल में इस अद्भुत आयोजन का साक्षी बनने का यह अवसर दिया।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई जा रही है। यह जल, यह वन और ये पहाड़ हमारे आदिवासी भाइयों की आजीविका का स्रोत हैं और एक अभेद्य दुर्ग हैं जो उनकी पहचान और संस्कृति की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा, "आज यदि दुनिया में कोई ऐसा मॉडल है जो सबसे अधिक टिकाऊ है, तो वह हमारे जनजातीय समुदायों द्वारा बनाया गया मॉडल है और हम इसकी रक्षा के लिए आगे आए हैं। सभी जनजातियों ने बिना किसी लिखित नियम के 'अनेकता में एकता' और 'एकता में अनेकता' के मंत्र को साकार करने का काम किया है।"</p>
<p>शाह ने कहा, "हज़ारों साल पहले त्रेता युग में भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाकर हमें बहुत साफ़ तौर पर यह समझाया था कि हम सब एक हैं। जो लोग हमें बाँटना चाहते हैं, वे यह नहीं जानते कि जब निषाद राज ने मदद का हाथ बढ़ाया, तो भगवान राम ने उन्हें अपना परम मित्र बनाकर वनवासियों का सम्मान किया था। आज का यह सम्मेलन और यहाँ मौजूद लाखों आदिवासी लोग उन लोगों के लिए एक बड़ा संदेश हैं, जो फूट डालने का काम कर रहे हैं।"</p>
<p>उन्होंने " समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर एक साजिश शुरू हुई है कि इसके जरिये आदिवासी लोगों को उनकी संस्कृति, उनकी परंपराओं, उनके रीति-रिवाजों और उनके जीने के अधिकार से वंचित कर देगा। आज, नरेन्द्र मोदी सरकार के गृह मंत्री के तौर पर मैं इस मंच से यह साफ़ कर देना चाहता हूँ कि यूसीसी की कोई भी पाबंदी आदिवासी समुदाय या आदिवासी व्यक्तियों पर नहीं लगाई जाएगी। यूसीसी किसी भी आदिवासी अधिकार का उल्लंघन नहीं करेगा। हमने दो राज्यों में यूसीसी लागू किया है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है विशेषकर गुजरात और उत्तराखंड विशेष प्रावधान करके नरेन्द्र मोदी सरकार ने सभी आदिवासी समुदायों को यूसीसी से बाहर रखा है। इस संदेश के साथ अपने गाँवों, पहाड़ों, जंगलों में जाएँ और सभी आदिवासी समुदायों को जागरूक करें कि यूसीसी से डरने की कोई ज़रूरत नहीं है।"</p>
<p>आयोजकों ने इस आयोजन को आदिवासी पहचान और 'राष्ट्रीय एकता' की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के रूप में पेश किया है, जिसका नारा है 'तू मैं एक रक्त, वनवासी-ग्रामवासी-नगरवासी, हम सब भारतवासी.' जेएसएम के एक पदाधिकारी ने बताया कि प्रतिभागियों से देश के विभिन्न हिस्सों से पारंपरिक परिधानों में आने की उम्मीद है, जबकि दिल्ली में स्वयंसेवकों ने 20 अलग-अलग समितियों के माध्यम से आवास, भोजन, परिवहन और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की है. भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा में देश के कोने-कोने से जनजाति समाज के लोग राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे और लोक संस्कृति के साथ शोभा यात्रा निकाली। इस समागम का आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े 'वनवासी कल्याण आश्रम' ने किया था, जिसमें कई संवेदनशील मुद्दे उठाये गये। इस समागम का सबसे बड़ा मुद्दा धर्मांतरण का रहा। </p>
<p>समागम में आये जनजातीय समाज के लोगों का कहना था कि धर्म परिवर्तन के बाद भी कुछ लोग आदिवासी आरक्षण का लाभ ले रहे हैं, जिससे मूल जनजातीय समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। इसके अलावा फर्जी अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र, आदिवासियों की जमीनों पर कब्ज़ा और तथाकथित 'लव जिहाद' और 'लैंड जिहाद' जैसे मुद्दे उठाये। समागम के आयोजकों का कहना था कि कुछ विदेशी ताकतें और मिशनरी संगठन आदिवासियों को उनकी सांस्कृतिक पहचान से अलग करने की कोशिश कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 13:19:22 +0530</pubDate>
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                <title>यूपी चुनाव 2027 की तैयारी : भाजपा का विधायकों पर 'परफॉर्मेंस टेस्ट' शुरू, सर्वे में खराब निकले तो कटेगा टिकट</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने मौजूदा विधायकों का 'रिपोर्ट कार्ड' बनाना शुरू कर दिया है। दो बाहरी एजेंसियों द्वारा कराए जा रहे इस सर्वे में जनता की नाराजगी झेल रहे विधायकों की जगह नए और जिताऊ चेहरों की तलाश की जा रही है। मुरादाबाद मंडल पर पार्टी का विशेष ध्यान है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mission-2027-bjps-performance-test-on-mlas-begins-if-they/article-154532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/bjp-kerala.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के क्रम में भारतीय जनता पार्टी ने 2022 में जीते अपने विधायकों का 'रिपोर्ट कार्ड' तैयार करना शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों की मानें तो पार्टी यह परख रही है कि क्षेत्र में विधायक की जमीनी पकड़ कैसी है और जनता के बीच उनकी सक्रियता कितनी है। जिन विधायकों से जनता नाराज है, उनकी जगह नए और जिताऊ चेहरों की तलाश तेज कर दी गई है।</p>
<p>पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि, “हाईकमान ने पूरे सर्वे की जिम्मेदारी दो बाहरी एजेंसियों को दी है जिनकी टीमें पिछले कई दिनों से शहरी और ग्रामीण इलाकों में घूमकर लोगों से सीधा संवाद कर रही हैं। विधायकों के काम, व्यवहार और क्षेत्र में मौजूदगी पर जनता की राय ली जा रही है। इसके अलावा संभावित नए दावेदारों की लोकप्रियता और जातीय-सामाजिक प्रभाव का भी आकलन किया जा रहा है। भाजपा यह तय करना चाहती है कि 2027 में किस चेहरे पर दांव लगाने से जीत की गारंटी मिलेगी।”</p>
<p>सर्वे पूरे प्रदेश में मंडलवार कराया जा रहा है। ज्यादातर मंडलों में भाजपा की स्थिति मजबूत है, लेकिन मुरादाबाद मंडल पार्टी के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। 2017 के चुनाव में भाजपा को यहां 27 में से 14 सीटें मिली थीं, जो 2022 में घटकर सिर्फ 10 रह गईं। इसी नुकसान की भरपाई के लिए पार्टी इस मंडल में खास सतर्कता बरत रही है और हर सीट पर मजबूत उम्मीदवार खोज रही है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक संगठन अपने स्तर पर जिला और क्षेत्रवार संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट बना रहा है। इसमें स्थानीय सांसदों और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राय को भी महत्व दिया जाएगा। बाहरी एजेंसियों की रिपोर्ट और संगठन की सूची का मिलान किया जाएगा।</p>
<p>भाजपा के वरिष्ठ नेता ने बताया कि जो नाम दोनों जगह कॉमन होंगे और जिन पर सहमति बनेगी, उनका टिकट लगभग पक्का माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार एजेंसियों की रिपोर्ट जल्द ही दिल्ली हाईकमान को सौंप दी जाएगी। सूत्रों ने बताया कि इस सर्वे में सिर्फ विधायकों का ही नहीं, बल्कि योगी सरकार की योजनाओं और नौ साल के कामकाज को लेकर भी जनता का मूड भांपा जा रहा है। पार्टी यह जानना चाहती है कि किस इलाके में सरकार की ब्रांडिंग मजबूत है और कहां एंटी-इनकंबेंसी है। नेतृत्व का मानना है कि अभी से मिली जमीनी फीडबैक से 2027 की रणनीति को धार दी जा सकेगी। साफ संकेत हैं कि जो विधायक काम में फिसड्डी साबित हुए, उनका पत्ता अगले चुनाव में कटना तय है।</p>
<p>गौरतलब है कि इसी तरह कांग्रेस ने पश्चिमी यूपी की सीटों पर प्राइवेट एजेंसियों से संभावित चेहरों की लिस्ट बनवानी शुरू कर दी है। सपा भी अंदरखाने सर्वे के जरिए उम्मीदवार छांट रही है। मायावती की बसपा कई सीटों पर प्रभारी और संभावित प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। आजाद की आजाद समाज पार्टी दूसरे दलों के मजबूत नेताओं को तोड़कर अपने पाले में लाने में जुटी है। कुल मिलाकर 2027 का चुनावी दंगल शुरू होने से पहले ही सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं। टिकट का गणित, जातीय समीकरण और सर्वे रिपोर्ट ही तय करेंगे कि अगली बार लखनऊ की सत्ता किसके हाथ आएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 18:03:17 +0530</pubDate>
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                <title>केरल की 16वीं विधानसभा का सत्र शुरू, नवनिर्वाचित विधायकों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली  </title>
                                    <description><![CDATA[केरल की 16वीं विधानसभा की पहली बैठक में नवनिर्वाचित विधायकों ने पद की शपथ ली। इस सत्र में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और पिनराई विजयन मौजूद रहे। भाजपा के तीन विधायकों के शपथ ग्रहण के साथ पार्टी ने इसे ऐतिहासिक बताया और बी.बी. गोपाकुमार को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार घोषित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/draft-add-your-title-session-of-16th-kerala-assembly-begins/article-154522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/kerala.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा की 16वीं विधानसभा की पहली बैठक गुरुवार सुबह नौ बजे यहां विधानसभा परिसर में शुरू हुई, जिसमें नवनिर्वाचित विधायकों ने अस्थायी अध्यक्ष जी. सुधाकरन की देखरेख में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। विधायकों को वर्णक्रम के अनुसार शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन, विपक्ष के नेता पिनराई विजयन तथा सत्तारूढ़ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ), वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सदस्य उपस्थित थे। वर्ष 2026 केरल विधानसभा चुनाव के बाद नयी विधानसभा के गठन को औपचारिक रूप देने के लिए यह बैठक आयोजित की गयी।</p>
<p>बैठक शुरू होने से पहले सत्तापक्ष के वरिष्ठतम विधायक जी. सुधाकरन ने राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से शपथ लेने के बाद अस्थायी अध्यक्ष का कार्यभार संभाला। पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और अन्य वरिष्ठ नेताओं के उनसे पहले शपथ लेने को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि उनकी ऐसी बहसों में कोई रुचि नहीं है और वह सभी विधायकों को समान दृष्टि से देखते हैं। नयी विधानसभा की पहली बैठक केवल शपथ ग्रहण के लिए बुलाई गई थी। सदन की शुक्रवार को पुनः बैठक होगी, जिसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होगा। राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर का अभिभाषण 29 मई को होगा, जबकि अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा एक से तीन जून तक चलेगी।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनिर्वाचित तीन विधायक राजीव चंद्रशेखर, वी. मुरलीधरन और बी. बी. गोपाकुमार पलायम स्थित शहीद स्तंभ पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद विधानसभा पहुंचे। भाजपा ने अपने विधायकों के शपथ ग्रहण को केरल की राजनीति में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए राज्यभर में समारोह आयोजित करने की भी योजना बनायी है। भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन वर्ष 2026 विधानसभा चुनाव में विजय प्राप्त करने वाले प्रमुख भाजपा नेताओं में शामिल हैं। श्री बी. बी. गोपाकुमार की चथन्नूर से जीत कोल्लम जिले में भाजपा की पहली विधानसभा सीट मानी जा रही है। इस बीच, भाजपा ने शुक्रवार को होने वाले अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए चथन्नूर विधायक बी. बी. गोपाकुमार को अपना उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 16:21:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राजस्थान विधानसभा के 75वें वर्ष की शुरुआत: नए प्रतीक चिन्ह का विमोचन, 13 द्वारों को मिले ऐतिहासिक नाम</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विधानसभा के 75वें वर्ष पर राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने नए प्रतीक चिन्ह का विमोचन किया। प्रतीक चिन्ह में खेजड़ी, गोडावण और ऊंट जैसी सांस्कृतिक आकृतियां शामिल हैं। इसके साथ ही विधानसभा के 13 द्वारों का नामकरण कर अमृत महोत्सव कार्यक्रमों की औपचारिक शुरुआत की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/beginning-of-75th-year-of-rajasthan-legislative-assembly-release-of/article-154279"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rera2.pdf-(1200-x-600-px)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विधानसभा के 75वें वर्ष पर प्रतीक चिन्ह का विमोचन, 13 द्वारों का हुआ नामकरण विधानसभा लोकतंत्र का पवित्र सदन, नया प्रतीक चिन्ह राजस्थान की संस्कृति का द्योतक” राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े राजस्थान विधानसभा के 75वें वर्ष के अवसर पर सोमवार को राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा के नए प्रतीक चिन्ह का विमोचन किया तथा विधानसभा भवन के 13 द्वारों के नामकरण पट्टिका का अनावरण किया। इसके साथ ही विधानसभा के अमृत महोत्सव कार्यक्रमों की औपचारिक शुरुआत हुई।</p>
<p>राज्यपाल ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का पवित्र सदन है और राजस्थान विधानसभा का गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि नया प्रतीक चिन्ह राजस्थान की संस्कृति, परंपरा और जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। प्रतीक चिन्ह में शामिल खेजड़ी, गोडावण, ऊंट और विधानसभा भवन की आकृतियां राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और संघर्षशील जीवनशैली को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि खेजड़ी राजस्थान का कल्पवृक्ष है और यह त्याग तथा पर्यावरण संरक्षण की परंपरा का प्रतीक है। राज्यपाल ने शिक्षा व्यवस्था पर भी जोर देते हुए कहा कि देश शिक्षा से आगे बढ़ता है और व्यवहारिक शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत है। “विधानसभा करोड़ों नागरिकों की आशाओं का केंद्र” — वासुदेव देवनानी विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि राजस्थान विधानसभा का नया प्रतीक चिन्ह लोकतांत्रिक परंपराओं, जनआकांक्षाओं और संवैधानिक मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विधानसभा भवन करोड़ों नागरिकों की आशाओं का पावन केंद्र है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:54:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केरल में नई सरकार का आगाज़ : 6 बार विधायक रह चुके वी. डी. सतीशन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, मंत्रीमंड़ल की टीम में 20 मंत्री शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[केरल को आखिरकार अपना नया मुख्यमंत्री मिल गया है। कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में सीएम पद की शपथ ली। इस भव्य समारोह में मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई शीर्ष नेता मौजूद रहे। उनके साथ एम लिजू और केएम शाजी सहित अन्य नेताओं ने भी कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kerala-gets-new-cm-6-time-mla-vd-satheesan-takes-oath/article-154202"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/kerala-cm.png" alt=""></a><br /><p>केरल। कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने सोमवार को केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके साथ 20 अन्य विधायकों को भी मंत्री पद की शपथ दिलायी गयी।इन सभी को यहां सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने गोपनीयता की शपथ दिलायी। मंत्री पद की शपथ लेने वालों में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला तथा के मुरलीधरन, केपीसीसी प्रमुख सनी जोसेफ, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेता पीके कुन्हालीकुट्टी शामिल हैं। इनके अलावा पीके बशीर, एन समसुद्दीन, केएम शाजी और वीई अब्दुल गफूर, एम. जोसेफ, शिबू बेबी जॉन, अनूप जैकब, सीपी जॉन, एपी अनिल कुमार, टी सिद्दीकी, पीसी विष्णुनाथ, रोजी एम जॉन, बिंदू कृष्णा, एम लिजू, केए थुलसी और ओ जे जनीश ने भी मंत्री पद की शपथ ली।</p>
<p>शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इनके अलावा समाराेह में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नेता पिनाराई विजयन तथा भारतीय जनता पार्टी के केरल प्रदेश राजीव चन्द्रशेखर तथा कुछ अन्य दलों के नेता भी मौजूद थे। कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) दस वर्ष के बाद सत्ता में आया है। विधानसभा चुनाव में यूडीएफ को 140 सीटों में से 102 पर विजय मिली है। इनमें से अकेले कांग्रेस ने 63 सीटें जीती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/kerala-gets-new-cm-6-time-mla-vd-satheesan-takes-oath/article-154202</link>
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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 11:45:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तमिलनाडु में विजय सरकार ने हासिल किया विश्वास मत: फ्लोर टेस्ट में टीवीके को मिले 144 वोट, विरोध में केवल 22 मत</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेता से राजनेता बने विजय थलापति की पार्टी (TVK) ने विधानसभा में भारी बहुमत से विश्वास मत हासिल कर लिया है। फ्लोर टेस्ट में सरकार के पक्ष में 144 वोट पड़े, जबकि विरोध में केवल 22 रहे। कांग्रेस और वामदलों के समर्थन से विजय ने अपनी राजनीतिक ताकत साबित कर सूबे में मजबूत पकड़ बना ली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/vijay-government-wins-trust-vote-in-tamil-nadu-tvk-government/article-153642"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)51.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार ने बुधवार को 234 सदस्यीय विधानसभा में सहयोगी दलों और अखिल भारतीय अन्न द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के बागी विधायकों के समर्थन के साथ आसानी से विश्वास मत जीतकर बहुमत साबित कर दिया। विजय को यह सफलता तब मिली जब 59 सदस्यीय मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने सदन से बर्हिगमन किया, जबकि अन्नाद्रमुक की सहयोगी चार सदस्यीय पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।</p>
<p>सीएम विजय द्वारा अपनी सरकार में विश्वास व्यक्त करने का प्रस्ताव पेश करने और विभिन्न दलों के नेताओं के बोलने के बाद प्रस्ताव पर मतदान कराया गया। हालांकि दो विकल्प थे लेकिन अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने ध्वनि मत के बजाय सरकार का समर्थन करने वालों की गिनती करने का विकल्प चुना। सदन के 232 सदस्यों में से 171 सदस्य मौजूद रहे। विजय ने एक सीट से इस्तीफा दिया था और मद्रास उच्च न्यायालय ने एक टीवीके विधायक को विश्वास मत में भाग लेने से रोक दिया था। सदन में विजय ने अन्नाद्रमुक के बागी विधायकों सहित 144 सदस्यों के समर्थन के साथ आसानी से शक्ति परीक्षण जीत लिया, जबकि इसके विरोध में 22 सदस्यों ने मतदान किया और पांच तटस्थ रहे।<br />प्रस्ताव का समर्थन करने वाले 144 विधायकों में टीवीके के 104 विधायक (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अदालत द्वारा रोके गए एक विधायक को छोड़कर), पांच समर्थक दलों के 13 सदस्य, अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) का एक और शेष अन्नाद्रमुक के बागी विधायक शामिल थे।</p>
<p>सीएम विजय के नेतृत्व वाली चार दिन पुरानी सरकार के लिए यह पहली और शानदार जीत है, जिनकी पार्टी 108 विधायकों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी लेकिन बहुमत से पीछे थी। राज्यपाल आर. वी. अर्लेकर द्वारा सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किए जाने के बाद उन्होंने निर्देशानुसार आवश्यक संख्या जुटाकर अपनी शक्ति साबित की। विजय द्वारा प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद, कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), विदुथलाई चिरूथैगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) सहित समर्थक दलों के नेताओं ने मुख्यमंत्री के पक्ष में बोलते हुए अपना समर्थन दिया ताकि भाजपा को दूर रखा जा सके।</p>
<p>अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के सहयोगी एएमएमके के निष्कासित एकमात्र विधायक कामराज ने कुछ बाधाओं के बीच विजय को अपना समर्थन देने का संकल्प लिया। इसके बाद एक अन्य सहयोगी पीएमके की नेता सौम्या अंबुमणि ने मुख्यमंत्री द्वारा दो सप्ताह के भीतर राज्य के स्वामित्व वाली 717 शराब दुकानों को बंद करने के आदेश सहित कुछ उपायों की सराहना की और घोषणा की कि पीएमके के चार विधायक मतदान से दूर रहे हैं।</p>
<p>विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने सरकार से सभी वर्गों के कल्याण के लिए काम करने का आग्रह किया और कहा कि द्रमुक के 59 सदस्य विधानसभा से बाहर इसलिए बाहार जा रहे हैं कि 'मुझे पता है कि यह सरकार जीत जाएगी'। उन्होंने सरकार से जनता के विश्वास को पूरा करने का आह्वान किया और अपने पार्टी सदस्यों के साथ सदन से बाहर चले गए। विजय ने अपना संगठन बनाने के दो साल के भीतर चुनावी राजनीति में पहली बार 108 सीटें जीतकर शानदार प्रवेश किया, जिससे द्रविड़ क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हुई और द्रमुक तथा अन्नाद्रमुक के छह दशक पुराने वर्चस्व का अंत हुआ। अभिनेता से नेता बने विजय ने स्वयं दो सीटों पर जीत हासिल की थी।</p>
<p>वर्तमान 107 विधायकों में से, विजय के एक सीट छोड़ने के बाद, मद्रास उच्च न्यायालय ने उनके एक विधायक श्रीनिवास सेतुपति को मतदान में भाग लेने से रोक दिया है। उनके निर्वाचन को पूर्व द्रमुक मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन ने चुनौती दी थी और डाक मतपत्रों की गिनती में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री ने हालांकि द्रमुक के सहयोगियों से संपर्क साधा था और पांच दल अपना समर्थन देने के लिए आगे आ गये थे। कांग्रेस ने द्रमुक से अलग होकर टीवीके के साथ गठबंधन किया और अपने पांच विधायकों का समर्थन दिया, जबकि भाकपा, माकपा, वीसीके और आईयूएमएल ने दो-दो विधायकों के साथ बिना शर्त बाहर से समर्थन दिया, जिससे संख्या 119 तक पहुंच गई।</p>
<p>इस संदर्भ में विजय की जीत की संभावनाओं को तब बड़ा बढ़ावा मिला जब अन्नाद्रमुक के बागी विधायकों ने टीवीके सरकार का समर्थन करने के अपने निर्णय की घोषणा की। अन्नाद्रमुक के कुल 47 विधायकों में से 22 सदस्यों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया जबकि 25 बागी विधायकों ने इसका समर्थन किया, हालांकि दूसरे गुट का कहना था कि सभी विधायकों को पार्टी सचेतक के आदेश का पालन करना चाहिए।<br />तमिलनाडु के राज्यपाल आर. वी. अर्लेकर ने इससे पहले उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हुए तीन दिनों के भीतर अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था। रविवार को उनके शपथ लेने के साथ ही 1967 के बाद पहली बार राज्य में गैर-द्रमुक और गैर-अन्नाद्रमुक शासन की शुरुआत हुई है।</p>
<p>कार्यभार संभालने के एक दिन बाद सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों ने सदन के सदस्यों के रूप में शपथ ली और अगले दिन अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुए, जिसके बाद आज सदन में बहुमत साबित करने के लिए विश्वास प्रस्ताव लाया गया। विश्वास मत से पहले सत्तारूढ़ टीवीके ने अपने विुगामबक्कम के विधायक आर. सबरीनाथन को सरकार का सचेतक चुना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 12:11:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तमिलनाडु की राजनीति में नया दौर शुरू: 17वीं विधानसभा का पहला सत्र आरम्भ, विजय थलापति, उदयनिधि और ईपीएस ने ली सदस्य पद की शपथ, सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु की 17वीं विधानसभा में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधायक पद की शपथ ली। टीवीके नेता ने राजनीति में कदम रखने के दो वर्षों में 108 सीटें जीतकर द्रमुक-अन्नाद्रमुक के दशकों पुराने वर्चस्व को खत्म किया। कांग्रेस और अन्य दलों के समर्थन से तमिलनाडु अब अपनी पहली गठबंधन सरकार की ओर बढ़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/a-new-era-begins-in-the-politics-of-tamil-nadu/article-153389"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tvk-3.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु की 17वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार को शुरू हुआ, जिसमें नवनिर्वाचित विधायकों को सदस्य के रूप में शपथ दिलाई गई। इस दौरान मुख्यमंत्री और तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) के संस्थापक सी. जोसेफ विजय ने भी सदन के सदस्य के रूप में शपथ ली। पूर्वाह्न 9:30 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रोटेम स्पीकर एम. वी. करुप्पैया ने एक तिरुक्कुरल का पाठ किया और विधानसभा रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए। जिन्हें रविवार शाम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने शपथ दिलाई थी।</p>
<p>इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री, उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों, विपक्ष के नेता, डीएमके के उधयनिधि स्टालिन, पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पडी के. पलानीस्वामी और ओ. पन्नीरसेल्वम सहित अन्य सदस्यों को चुनाव प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया। अन्य विधायकों ने वर्णमाला क्रम में एक-एक कर शपथ ली। नौ नए मंत्रियों में से आठ ने शपथ ली, जबकि एकमात्र महिला विधायक एस. कीर्तन अपना प्रमाणपत्र लाना भूल गईं, इसलिए उन्हें बाद में शपथ दिलाई जाएगी।</p>
<p>234 सदस्यीय विधानसभा में 233 विधायकों ने शपथ ली। एक सीट खाली रही क्योंकि सीएम विजय ने दो सीटों से जीतने के बाद तिरुचि पूर्व सीट से इस्तीफा देकर पेरंबूर सीट बरकरार रखी। शपथ प्रक्रिया शाम तक जारी रहने के बाद सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया जाएगा। कार्यवाही मंगलवार को फिर शुरू होगी, जब स्पीकर और उपाध्यक्ष के चुनाव होंगे। इसके बाद 13 मई को मुख्यमंत्री विजय सदन में अपना बहुमत साबित करेंगे, जैसा कि राज्यपाल ने सरकार गठन के समय निर्देश दिया था।</p>
<p>सीएम विजय ने राजनीति में उतरने के महज दो वर्षों के भीतर 108 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की और तमिलनाडु की राजनीति में एक नया दौर शुरू किया। इससे द्रमुक और अन्नाद्रमुक के छह दशकों पुराने वर्चस्व का अंत हुआ। हालांकि टीवीके के पास तकनीकी रूप से 107 विधायक हैं और बहुमत से 11 सीटें कम थीं लेकिन द्रमुक के कुछ सहयोगी दलों के समर्थन से विजय ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया, जिससे एक सप्ताह से चला राजनीतिक गतिरोध समाप्त हुआ। कांग्रेस ने द्रमुक से अलग होकर टीवीके को समर्थन दिया और अपने पांच विधायकों का समर्थन दिया। वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), वीसीके और आईयूएमएल ने बाहरी समर्थन दिया और सरकार में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया।</p>
<p>कांग्रेस के भी सरकार में शामिल होने की संभावना है और उसके दो विधायकों को मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान शामिल किया जा सकता है। इससे तमिलनाडु में पहली बार गठबंधन सरकार बनेगी। साथ ही, 1967 के बाद पहली बार कांग्रेस राज्य की सरकार का हिस्सा बन सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 12:26:32 +0530</pubDate>
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                <title>असम सीएम सरमा ने राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा: कार्यवाहक के रूप में करेंगे काम ; शपथ ग्रहण की तारीख पर सस्पेंस खत्म, जानें कब होगा शपथ ग्रहण ?</title>
                                    <description><![CDATA[असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने नई विधानसभा चुनाव के बाद राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राज्यपाल ने उन्हें नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने का निर्देश दिया है। राज्य में जल्द ही नई मंत्रिपरिषद के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/assam-cm-sarma-submits-resignation-to-governor-will-work-as/article-152871"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/assam-cm.png" alt=""></a><br /><p>गुवाहाटी। असम में नई विधानसभा के लिए चुनाव संपन्न होने के बाद के बाद मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को बुधवार को अपने मंत्रिपरिषद का इस्तीफा सौंपा। राज्यपाल ने उन्हें नयी सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में शासन का दायित्व संभाले रहने को कहा है। मुख्यमंत्री सरमा ने राज्यपाल से मुलाकात से निकलने के बाद संवाददाताओं से कहा," मैंने असम के मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा असम के राज्यपाल को सौंप दिया है और साथ ही उनसे मौजूदा विधानसभा को भंग करने का अनुरोध किया है।</p>
<p>असम के राज्यपाल ने मेरा इस्तीफा और मौजूदा विधानसभा को भंग करने का सुझाव स्वीकार कर लिया है ।" राज्यपाल ने कहा," उन्होंने असम में नयी सरकार सरकार के गठन तक कार्यवाहक मंत्रिपरिषद के रूप में मंत्रालय को काम जारी रखने का निर्देश दिया है।" मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि नयी सरकार जल्द ही बन जाएगी। इस दौरान वह कार्यवाहक सरकार का संचालन करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 14:27:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पुड्डुचेरी विधानसभा चुनाव परिणाम LIVE : राज्य में BJP बहुमत के आंकड़ें के पार, जीत की ओर अग्रसर NDA, मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी जीते</title>
                                    <description><![CDATA[पुड्डुचेरी विधानसभा चुनाव परिणाम की तस्वीर साफ। भाजपा नीत गठबंधन NDA को बहुमत। मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने चुनाव जीता। उन्होंने 4441 वोटों से जीत हासिल की। निकटतम प्रतिद्वंदी एनएमके पार्टी के ई विनयागम को चुनावी मैदान में शिकस्त दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/puducherry-assembly-election-result-ainrc-leading-on-8-seats-bjp-admk/article-152585"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/puducherry.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पुड्डुचेरी विधानसभा चुनाव के परिणाम को लेकर मतगणना कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह 8 बजे शुरू हुई। सबसे पहले पोस्टल बैलेट और उसके बाद ईवीएम की मतगणना की गई। </span>मतगणना के बाद रुझान भी लगभग सभी सीटों के सामने आ चुके हैं। रूझानों को देखते हुए भाजपा नीत गठबंधन NDA बहुमत के आंकड़े के करीब है, जिससे सत्ता को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने थट्टनचावडी विधानसभा सीट जीत ली है। उन्होंने 4441 वोटों से जीत हासिल की। रंगासामी को कुल 10024 वोट मिले है।</span></span>ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (एआईएनआरसी) के उम्मीदवार रंगासामी को 10,024 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ई. विनायगम (नेयम मक्कल कझगम) को 5,583 वोट मिले। </p>
<p><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चुनाव आयोग के अनुसार मतगणना के लिए सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गयी थी। सभी मतगणना केन्द्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राष्ट्रव्यापी बहस के बीच विधानसभा के चुनावों में मतदाताओं ने मतदान में बढ़चढ़कर भाग लिया था। </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पुड्डुचेरी में वहां 30 सीटों के लिए 294 उम्मीदवार अपनी चुनावी किस्मत आजमाई। पुड्डुचेरी में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्षी गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला रहा। </span></p>
<p> </p>
<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>                                   कुल सीट : 30                          बहुमत : 16</strong></span></p>
<table style="border-collapse:collapse;width:100%;" border="1"><colgroup><col style="width:25%;" /><col style="width:25%;" /><col style="width:25%;" /><col style="width:25%;" /></colgroup>
<tbody>
<tr>
<td><strong>पार्टी</strong></td>
<td><strong>आगे</strong></td>
<td><strong>जीते</strong></td>
<td><strong>कुल</strong></td>
</tr>
<tr>
<td><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>एनडीए</strong></span></td>
<td><strong>5</strong></td>
<td><strong>12</strong></td>
<td><strong>17</strong></td>
</tr>
<tr>
<td><span style="color:rgb(53,152,219);"><strong>कांग्रेस</strong></span></td>
<td><strong>1</strong></td>
<td><strong>2</strong></td>
<td><strong>3</strong></td>
</tr>
<tr>
<td><span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>अन्य</strong></span></td>
<td><strong>2</strong></td>
<td><strong>3</strong></td>
<td><strong>5</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<ul>
<li><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>थट्टनचावड़ी विधानसभा सीट से एन रंगास्वामी 4441 मतों से आगे</strong></span></li>
</ul>
<p>पुड्डुचेरी के थट्टनचावड़ी विधानसभा सीट से एआईएनआरकांग्रेस के उम्मीदवार एवं मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी अपने निकटतम प्रतिद्वंदी एनएमके पार्टी के ई विनयागम से 4441 मतों से आगे चल रहे हैं। </p>
<ul>
<li><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>एआईएनआरसी को बढ़त, मुख्यमंत्री रंगास्वामी विजयी</strong></span></li>
</ul>
<p>पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की मतगणना में अब तक के चुनाव परिणाम के मुताबिक ऑल इंडिया एन. आर. कांग्रेस (एआईएनआरसी) ने चार सीटों पर विजय हासिल कर ली है और पांच सीटों पर बढ़त बनाये हुये है। चुनाव आयोग के अनुसार केन्द्रशासित प्रदेश की 30 सीटों में से 17 सीटों के रूझान प्राप्त हुये है जहां एआईएनआरसी ने चार सीटों पर जीत हासिल की है और पांच पर बढ़त बनाये हुये है। थट्टनचावड़ी विधानसभा सीट से एआईएनआरसी उम्मीदवार एवं मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी विजयी हुये है। रंगास्वामी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी नेयम मक्कल कषगम (एनएमके) के ई विनयागम को 4441 मतों के अंतर से हराया। इसके अलावा एआईएनआरसी ने मुथियालपेट, एरियनकौप्पम और एमबलेम सीट पर भी विजय हासिल की है। वहीं भारतीय जनता पार्टी भी एक सीट जीत गयी है और एक पर बढ़त बनाये हुये है। भाजपा ने मन्नादिपेट सीट जीत ली है और नेरावी-टी.आर.पट्टिनम सीट पर बढ़त बनाये हुये है। इसके अलावा कांग्रेस, अन्नाद्रमुक और द्रमुक ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की है। तीन अन्य सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार बढ़त बनाये हुये हैं। </p>
<ul>
<li><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>अनबाझगन उप्पलम सीट से हुए विजयी</strong></span></li>
</ul>
<p>पुडुचेरी में अन्नाद्रमुक राज्य सचिव ए अनबाझगन ने सोमवार को उप्पलम सीट से टीवीके के एस शिवा को 1,026 वोटों के अंतर से हराया। गौरतलब है कि 09 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में अनबाझगन ने सत्तारूढ़ एआईएनआरसी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी के रूप में चुनाव लड़ा। पिछले चुनाव में उन्हें द्रमुक उम्मीदवार अनिबल कैनेडी ने हराया था, जो इस बार तीसरे स्थान पर रहे। अन्नाद्रमुक ने इस बार उप्पलम और ओरलियनपेट सीटों से चुनाव लड़ा था। अनबाझगन ने उप्पलम सीट से विजय के नेतृत्व वाली टीवीके के अपने प्रतिद्वंद्वी शिवा को हराकर जीत हासिल की। अनबाझगन ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी टीवीके के एस शिवा को 1026 मतों के अंतर से हराया। अनबाझगन को कुल 9099 मत पड़े जबकि शिवा ने 8073 मत हासिल किये। तीसरे स्थान पर द्रमुक के ए. केन्नेडी रहे जिन्हे 5327 मत पड़े। इसके अलावा नोटा में 151 वोट डाले गये। इस बार अन्नाद्रमुक ने द्रमुक से यह सीट छीन ली है।</p>
<ul>
<li><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">मन्नादिपेट विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार ए नमशिवायम जीते</span></strong></li>
</ul>
<p>पुड्डुचेरी की मन्नादिपेट विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार ए नमशिवायम ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार टीपीआर सेल्वामे को 6110 मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की।</p>
<ul>
<li><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>नेल्लिथोपे विधानसभा सीट से द्रमुक उम्मीदवार वी. कार्तिझुएयाने जीते </strong></span></li>
</ul>
<p>पुड्डुचेरी की नेल्लिथोपे विधानसभा सीट से द्रमुक उम्मीदवार वी. कार्तिझुएयाने ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी निर्दलीय उम्मीदवार ओम शक्ति शेखर को 850 वोट से हराकर दर्ज की ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 11:25:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस के पूर्व विधायक बाबूलाल बैरवा का निधन : 73 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, गहलोत बोले-उनका निधन  क्षेत्र की राजनीति और सामाजिक जीवन में अपूरणीय क्षति </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के कठूमर से चार बार विधायक रहे वरिष्ठ नेता बाबूलाल बैरवा का 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय के रूप में विधानसभा पहुंचे थे। जयपुर के SMS अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से अलवर और राजस्थान की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/former-congress-mla-babulal-bairwa-passed-away-at-the-age/article-152512"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/babulal.png" alt=""></a><br /><p>अलवर। राजस्थान में अलवर जिले की कठूमर आरक्षित सीट से चार बार विधायक रहे बाबूलाल बैरवा का रविवार तड़के तीन बजे जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे और कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। बैरवा 1980-85 तक सातवीं राजस्थान विधान सभा , 1985-90 आठवीं राजस्थान विधान सभा , 2008-13 तक तेरहवीं राजस्थान विधान सभा एवं 2018-23 तक पंद्रहवीं राजस्थान विधान सभा के सदस्य रहे। वह 1977 से लेकर 2023 तक विधानसभा की कई समितियां के सदस्य रहे। वह दो बार कांग्रेस विधायक ,एक बार निर्दलीय और एक बार भारतीय जनता पार्टी से विधायक रहे हैं। बैरवा का जन्म पांच नवम्बर 1953, रोनीजाथान, तहसील कठूमर, जिला अलवर में हुआ था।</p>
<p><strong>गहलोत ने व्यक्त किया दु:ख</strong></p>
<p>कठूमर (अलवर) से कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक श्री बाबूलाल बैरवा के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उनके निधन से क्षेत्र की राजनीति और सामाजिक जीवन में अपूरणीय क्षति हुई है। एक लंबे अरसे तक विधायक के रूप में उनका अनुभव और क्षेत्र के विकास में उनकी सक्रिय भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी। इस कठिन समय में शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ईश्वर उन्हें यह आघात सहने की शक्ति दें एवं दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 12:46:18 +0530</pubDate>
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