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                <title>parwan river - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>parwan river RSS Feed</description>
                
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                <title>असर खबर का - परवन नदी एनीकट पर ग्रामीणों ने 13 गेट लगाए </title>
                                    <description><![CDATA[ दैनिक नवज्योति ने खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी उसके बाद चार गांव के ग्रामीणों ने मिलकर एनीकट के 13 गेट लगा दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/effect-of-the-news---villagers-installed-13-gates-on-parwan-river-anicut/article-94581"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee2.png" alt=""></a><br /><p>मनोहरथाना। परवन नदी में बने एनीकट के 13 गेट चार गांव के ग्रामीणों ने मिलकर लगाए। इससे एनीकट का पानी व्यर्थ होने से बच जाएगा।  दैनिक नवज्योति ने खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी उसके बाद चार गांव के ग्रामीणों ने मिलकर एनीकट के 13 गेट लगा दिए। वही प्रत्येक गेट में करीबन 3 टन भी अधिक  वजन है।  ग्रामीणों ने बताया कि एनीकट  के गेट हर साल पीएचडी विभाग द्वारा दशहरे के आस पास लगाए जाते थे जिससे करीबन 15 गांव के ग्रामीणों को पीएचडी विभाग द्वारा गांवों में सार्वजनिक नलों के माध्यम से पीने का पानी दिया जाता था साथ ही करीबन 20 गांव के लोगों के खेतों में सिंचाई के लिए पानी काम में लेते थे। लेकिन इस साल पीएचईडी विभाग द्वारा एनीकट  के गेट नहीं लगाए। वही पीएचईडी विभाग के अधिकारियों का कहना था कि एनीकट  हमारे कोई काम नहीं आ रहा है एनीकट का पानी खेतों में  सिंचाई  के लिए काम में लिया जाता है तो सिंचाई विभाग वाले ही इस बार एनीकट  के गेट लगाएंगे या फिर ग्राम पंचायत लगाएगी लेकिन उधर सिंचाई विभाग के कर्मचारियों का कहना था कि यह एनीकट पीएचईडी विभाग के अधीन है तो पीएचईडी विभाग ही एनीकट के गेट लगाएगा। वही इस खबर को दैनिक नवज्योति प्रमुखता से प्रकाशित की उसके बाद बांसखेड़ा, जावरी, मोग्याबह, ढाबा गांव  के ग्रामीण एकत्रित हुए और एक नई पहल कर अपने स्तर पर स्वयं के खर्चे पर एनीकट  के गेट लगाए । परवन नदी में बने एनीकट में ग्रामीणों ने 13 गेट लगाकर लाखों लीटर व्यर्थ बह रहे पानी को रुक दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Nov 2024 15:19:45 +0530</pubDate>
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                <title>परवन नदी में बने एनीकट पर नहीं लग रहा गेट</title>
                                    <description><![CDATA[सिंचाई विभाग व जलदाय विभाग की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/gate-not-being-installed-on-the-anicut-built-in-the-parwan-river/article-94465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(1).png" alt=""></a><br /><p>मनोहरथाना। मनोहरथाना क्षेत्र की परवन नदी में जावर में बना एनीकट दो विभागों के मंझदार में फंस गया है। लापरवाही यह है कि अब तक एनीकट में गेट नहीं लग सके है, जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ सकता है। वही अक्टूबर के महीने में लगाए जाते थे। एनीकट के गेट को लेकर ग्रामीणों की माने तो परवन नदी में बने एनीकट को करीबन 18 से 19 साल हो गए, तब से ही ये पीएचईडी विभाग के अधीन में थे, तब से ही पीएचईडी विभाग ही एनीकट के गेट लगा कर पानी को रोकते थे। एनीकट के गेट लगने के बाद करीबन 6 महीने तक ग्रामीण पानी को काम के लेते थे, वहीं करीबन 15 गांव के लोगों के लिए नल के माध्यम से गांवों में पानी पहुंचता था। साथ ही करीबन 20 गांव के लोग एनीकट के पानी को खेत में फसल के लिए भी काम में लेते हैं, जिससे किसानों के लिए वरदान साबित होता है, लेकिन इस साल एनीकट के गेट नहीं लगने से परवन नदी में दिनों दिन पानी को आवक कम होती जा रही है। जिससे आने वाले समय परवन नदी में पानी सूख जाएगा। जिससे ग्रामीणों इलाकों के लोगों को पानी के लिए भटकने को मजबूर होना पड़ेगा, लेकिन इस साल भी सिंचाई विभाग व जलदाय विभाग की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ सकता है।  वहीं जानकारी अनुसार 2005 में परवन नदी में जावर के यहां एनीकट का करोड़ों रुपए से सरकार द्वारा निर्माण करवाए गया, उसके बाद से ही पीएचईडी विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के करीबन 15 गांवो में सार्वजनिक नलों के माध्यम से गांव के मोहल्लों में पानी पहुंचता था। साथी करीबन 20 गांवों के लोगों के खेतों में फसल के लिए पानी काम में लिया जाता था, वहीं एनीकट में गेट लगने के बाद एनीकट में बारिश तक पानी भरा रहता है, जिससे जानवर पानी पीते हैं, एनीकट में मत्स्य पालन भी किया जाता है जिससे लोगों को रोजगार मिलता है। वही लोगों से मिली जानकारी के अनुसार जब से एनीकट का निर्माण हुआ था, तब से पहली बार बीते साल परवन नदी सुख गई थी जिससे आस पास के गांवों के लोगों को पानी कि समस्या से जूझना पड़ा था। वही पानी के लिए मजबूर होना पड़ा था साथ ही ग्रामीणों का कहना  है कि पिछले साल भी विभाग द्वारा ही एनीकट के गेट निकलवाए गए थे जो आज भी जावर विभाग के कार्यालय में पड़े हुए हैं लेकिन अभी तक एनीकट के गेट नहीं लगवाए जा रहा रहे हैं दिनों दिन परवन नदी में  पानी को आवक कम होती जा रही है जिससे ग्रामीणों के चेहरे पर चिंता की लकीरें मंडराने लगी हैं। </p>
<p><strong>दशहरे तक लगा दिए जाते थे गेट</strong><br />ग्रामीणों की माने तो अक्टूबर के महीने में एनीकट के गेट विभाग द्वारा लगवाया दिए जाते थे, जिससे एनीकट पूरा भरा जाता था, जिससे बारिश तक एनीकट में पर्याप्त मात्रा में पानी भरा रहता था लेकिन इस बार 1 महीने बाद भी एनीकट के गेट नहीं लगे है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बात सिंचाई विभाग और पीएचडी विभाग को अवगत करवा  दिया गया लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। </p>
<p>इस एनीकट से पीने का पानी भी 15 गांव में जाता है, अब विभाग वाले कह रहे है कि हमारे तो बड़गांव से पानी आ रहा है अब यह एनीकट के गेट सिंचाई विभाग वाले लगाएंगे। लेकिन पहले गेट पीएचईडी विभाग वाले लगाते थे, पहले गेट दशहरे के समय लग जाया करते थे लेकिन इस बार एक महीना से ज्यादा हो गया लेकिन अभी तक गेट नहीं लगाए। <br /><strong>-  जगन्नाथ ग्रामीण जावरी </strong></p>
<p> इस एनीकट से पीने का पानी 15 गांवो में पहुंचाया जा रहा है, पहले गेट दशहरे से पहले नवरात्रा में लग जाया करते थे लेकिन इस बार अभी तक नहीं लगे। अगर गेट नहीं लगा तो ग्रामीणों के साथ जानवरों को भी पानी की समस्या सामना करना पड़ेगा। <br /><strong>- मुकेश ग्रामीण जावरी</strong></p>
<p>एनीकेट के गेट को लेकर पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। पानी की समस्या से ग्रामीणों के साथ साथ फसलों व मवेशियों के लिए भी काफी समस्या खड़ी हो गई है। <br /><strong> - बजरंग ग्रामीण जावरी</strong></p>
<p>एनीकट में अभी तक गेट नहीं लगे हैं जिससे कि पानी की समस्या उत्पन्न हो रही है, पहले यह गेट 1 महीने पहले लग जाते थे, अभी नदी में आधे फीट पर पानी रह गया है, यही मांग है कि जल्दी से गेट लगवाया जाए।<br /><strong>- राधेश्याम लोधा ग्रामीण जावरी</strong></p>
<p>2005 से इस एनीकट की देखरेख और मेंटेनेंस और एनीकट के पानी को पीएचईडी विभाग ही काम में लेता है यह एनीकट पीएचईडी विभाग के अंतर्गत आता है यह हमारे अधीन नहीं आता है। <br /><strong>- मंशाराम कनिष्ठ अभियंता सिंचाई विभाग</strong></p>
<p>पीएचईडी विभाग तो पहले एनीकट का पानी कम में लेते थे, उसे समय गेट लगवाने का टेंडर होता था लेकिन इस बार ना तो कोई टेंडर हुआ, साथ ही अब हम पानी काम में भी नहीं ले रहे है, यह सिंचाई विभाग का मामला है। सिंचाई वालों को जरूरत पड़ती है। एनीकट के गेट की सिंचाई वालों को जरूरत है, अभी तो उसमें गेट सिंचाई वाले लगाए या फिर ग्राम पंचायत लगाए।  <br /><strong>- रामनाथ मीणा सहायक अभियंता पीएचईडी विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Nov 2024 15:10:30 +0530</pubDate>
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