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                <title>bhawanipur - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : दूसरे चरण का मतदान बुधवार को ; BJP-TMC के लिए परीक्षा की घड़ी, इन दिग्गजों की साख दांव पर</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल चुनाव अब अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर है। बुधवार को 8 जिलों की 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। पीएम मोदी की रैलियों और ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी के भवानीपुर मुकाबले ने इस चरण को हाई-प्रोफाइल बना दिया है। सीएए, नागरिकता और शरणार्थी मुद्दों के बीच भाजपा और तृणमूल में कांटे की टक्कर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-second-phase-voting-on-wednesday-a/article-151945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)53.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पहले चरण में 93 प्रतिशत से अधिक के रिकॉर्ड मतदान और तृणमूल कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दावों के साथ, पश्चिम बंगाल चुनाव अब अपने सबसे निर्णायक चरण में पहुँच गया है, जहाँ बुधवार को आठ जिलों के 142 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा। कोलकाता और दक्षिण बंगाल पारंपरिक रूप से तृणमूल का मजबूत गढ़ माने जाते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा छह जनसभाएं और दो रोड शो करने के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा इस रूझान को तोड़ने के लिए बेताब है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस चरण में एक करोड़, 64 लाख ,35 हजार, 627 पुरुष, एक करोड़, 57 लाख, 37 हजार, 418 महिलाएं और 792 तीसरे लिंग के मतदाताओं सहित कुल तीन करोड़, 21 लाख, 73 हजार, 837 मतदाता 41,001 मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इन सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग निगरानी की व्यवस्था होगी।</p>
<p>इन जिलों की सामाजिक संरचना, मतदाताओं की संख्या और विविधता इस चरण को न केवल संख्यात्मक बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाती है। निर्वाचन क्षेत्र आठ प्रमुख जिलों- उत्तर कोलकाता (7 सीटें), दक्षिण कोलकाता (4), उत्तर 24 परगना (33), दक्षिण 24 परगना (31), हावड़ा (16), नदिया (17), हुगली (18) और पूर्व बर्धमान (16) में फैले हुए हैं, जिनमें तीन जिलों में अंतरराष्ट्रीय और नदी सीमाएं इसे न केवल राजनीतिक रूप से बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।</p>
<p>जनसांख्यिकीय रूप से, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा और दक्षिण कोलकाता के बड़े हिस्सों में महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक आबादी है, जबकि नदिया और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में पर्याप्त मतुआ और शरणार्थी समुदाय शामिल हैं, जहां पहचान और नागरिकता का मुद्दा प्रमुख है। उल्लेखनीय है कि 2021 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा के आक्रामक प्रचार के बावजूद, तृणमूल ने इन क्षेत्रों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी थी और 142 में से 123 सीटों पर जीत हासिल की थी।</p>
<p>भाजपा ने हालांकि पूरे बंगाल में 77 सीटें हासिल की थीं, जो राज्य में अब तक की उसकी सबसे अधिक सीटें हैं, लेकिन इस क्षेत्र में भगवा खेमा केवल 18 सीटें सुरक्षित करने में सफल रहा, जिससे इस बार श्री मोदी और उनकी ब्रिगेड के लिए यह सबसे कठिन लड़ाइयों में से एक बन गई है। भाजपा के लिए कठिनाई अंकगणित और जनसांख्यिकी दोनों में निहित है। पिछले कुछ वर्षों में, पार्टी मतुआ और शरणार्थी आबादी के बीच, विशेष रूप से नदिया और उत्तर 24 परगना में, अपना समर्थन मजबूत करने में सफल रही थी, लेकिन हाल के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण शरणार्थी मतदाताओं के एक वर्ग के चुनावी सूची से बाहर होने से इन वर्गों में बेचैनी पैदा हुई है, जो भाजपा के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रही है।</p>
<p>इस चरण के महत्व को पहचानते हुए, पीएम मोदी ने केवल चार दिनों में छह रैलियां और दो रोड शो करके एक गहन प्रचार अभियान चलाया है, जिसमें दो मतुआ बहुल कृष्णानगर और बनगांव इलाके भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री के साथ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन जैसे हाई-प्रोफाइल नेताओं ने धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए लोगों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के माध्यम से नागरिकता अधिकार देने का लगातार वादा किया है, हालांकि यह देखना बाकी है कि पार्टी तृणमूल के इस गढ़ में कितनी सेंध लगा पाती है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए भी दांव उतने ही अहम हैं, क्योंकि इस चरण में कुछ हाई-प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्र दांव पर हैं, जिनमें सबसे उल्लेखनीय भवानीपुर है, जहाँ सुश्री बनर्जी का नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के साथ सीधा मुकाबला है। एसआईआर प्रक्रिया के बाद लगभग 51,000 मतदाताओं (लगभग 21 प्रतिशत) के नाम हटने के बाद इस सीट ने अतिरिक्त ध्यान आकर्षित किया है, जो संभावित रूप से चुनावी समीकरणों को बदल सकता है। भवानीपुर के अलावा, कई प्रमुख नेता मैदान में हैं, जिनमें फिरहाद हकीम (कोलकाता पोर्ट), चंद्रिमा भट्टाचार्य (दमदम उत्तर), शशि पांजा (श्यामपुकुर), अरूप विश्वास (टॉलीगंज), ब्रात्य बसु (दमदम) और सुजीत बसु (बिधाननगर) शामिल हैं।</p>
<p>भाजपा ने अपनी ओर से स्वपन दासगुप्ता और रूपा गांगुली जैसे चर्चित चेहरों को मैदान में उतारा है और पानीहाटी से आरजी कर अस्पताल की पीड़िता की मां को नामांकित करके भावनात्मक मुद्दों का लाभ उठाने का प्रयास किया है। दोनों दल पहले चरण के भारी मतदान की व्याख्या अपने लाभ के लिए कर रहे हैं। जहाँ पीएम मोदी ने दावा किया है कि मतदान 'परिवर्तन की लहर' को दर्शाता है, वहीं अभिषेक बनर्जी सहित तृणमूल नेतृत्व ने दावा किया है कि यह सत्तारूढ़ दल के लिए मजबूत समर्थन और एनआरसी तथा नागरिकता के इर्द-गिर्द भाजपा के खिलाफ प्रतिरोध का संकेत देता है।</p>
<p>भाजपा के लिए, यह एक परीक्षा है कि क्या उसका आक्रामक प्रचार और लक्षित पहुँच उस क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ में बदल सकती है जहाँ उसने ऐतिहासिक रूप से संघर्ष किया है। तृणमूल के लिए, यह अपने किले की रक्षा करने और अपने पारंपरिक प्रभुत्व को एक नए जनादेश में बदलने के बारे में है। 142 सीटों के दांव पर होने के साथ, इस चरण का परिणाम पश्चिम बंगाल में अंतिम चुनावी फैसले को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 16:12:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : अमित शाह की मौजूदगी में भवानीपुर से शुवेंदु अधिकारी ने किया नामांकन, टीएमसी पर लगाया भ्रष्टाचार, सिंडिकेट राज और बढ़ती घुसपैठ का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भवानीपुर में रोड शो कर ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे राज्य की सत्ता बदलने की 'चाबी' बताते हुए शुवेंदु अधिकारी की जीत का आह्वान किया। शाह ने भ्रष्टाचार और घुसपैठ को मुद्दा बनाते हुए 'सोनार बांग्ला' के विजन के साथ टीएमसी को उखाड़ फेंकने का संकल्प दोहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-shuvendu-adhikari-filed-nomination-from-bhawanipur/article-148859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में सियासी बदलाव के लिए भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र को निर्णायक रणभूमि बताया और कहा कि पूरे राज्य को बदलने की चाबी भवानीपुर के मतदाताओं के हाथों में है। रोड शो से पहले दक्षिण कोलकाता के हाजरा में एक रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर हमला बोला।  उन्होंने व्यापक भ्रष्टाचार, 'सिंडिकेट राज' और बढ़ती घुसपैठ का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे राज्य की पहचान खतरे में पड़ गयी है। उन्होंने मतदाताओं से भवानीपुर में भाजपा उम्मीदवार शुवेंदु अधिकारी की निर्णायक जीत पक्की करने की अपील की। यह चुनाव क्षेत्र एक बड़ी लड़ाई के लिए तैयार हो रहा है, क्योंकि मौजूदा विधायक और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी भी इस बार यहीं से चुनाव लड़ रही हैं। इससे पहले दिन में श्री अधिकारी ने इस चुनाव क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उनके साथ श्री शाह भी मौजूद थे, जो भाजपा के चुनाव अभियान को मज़बूत करने के लिए नयी दिल्ली से आये हैं।</p>
<p>पार्टी ने पड़ोसी निर्वाचन क्षेत्रों में भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें रासबिहारी से स्वपन दासगुप्ता, बालीगंज से सतरूपा बोस और चौरंगी से संतोष पाठक शामिल हैं। इन नेताओं ने बाद में संयुक्त रोड शो में हिस्सा लिया, जिसमें भारी भीड़ उमड़ी। रोड शो के दौरान कुछ तनावपूर्ण पल भी देखे गये, जब भाजपा और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान चुनाव क्षेत्र के कई हिस्सों में 'जय श्री राम' और 'जय बांग्ला' के नारे गूंजते रहे।</p>
<p>अपने संबोधन में शाह ने कहा कि 2014 के बाद से भाजपा शासित राज्यों में उल्लेखनीय विकास हुआ है और 'अब बंगाल की बारी है'। उन्होंने मतदाताओं से गुजारिश की कि वे न केवल भवानीपुर में, बल्कि पूरे राज्य में 'परिवर्तन' लायें, ताकि स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसी महान हस्तियों के विजन को साकार किया जा सके। अमित शाह ने कहा कि पूरे बंगाल के लोग 'जबरन वसूली, राजनीतिक हिंसा, महिलाओं की असुरक्षा और बेरोजगारी' से तंग आ चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया और उनकी हत्या की गयी है। उन्होंने वादा किया कि यदि पार्टी सत्ता में आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जायेगी।</p>
<p>मतदाताओं को डराने-धमकाने के आरोपों पर उठाये गये पत्रकारों के सवालों का जिक्र करते हुए अमित शाह ने जोर दिया कि किसी को भी नागरिकों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोकने की इजाजत नहीं दी जायेगी। उन्होंने कहा कि इस बार लोगों को निडर होकर मतदान करना चाहिए। भाजपा का मकसद केवल तृणमूल कांग्रेस को हराना नहीं, बल्कि उसे 'पूरी तरह उखाड़ फेंकना' है। एक रणनीतिक दांव चलते हुए श्री शाह ने कहा कि श्री अधिकारी ने पहले नंदीग्राम से चुनाव लड़ने पर विचार किया था, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उन्हें उनके गढ़ में ही ममता बनर्जी को चुनौती देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने के बावजूद सुश्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम में श्री अधिकारी के हाथों व्यक्तिगत हार का सामना करना पड़ा था।</p>
<p>अमित शाह ने आगे तर्क दिया कि केवल भवानीपुर में भाजपा की जीत राज्य में व्यापक राजनीतिक बदलाव की शुरुआत कर सकती है। उन्होंने कहा, "इस एक सीट को जीत लीजिए, और पूरे बंगाल में बदलाव आ जायेगा।" इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के लिए विधानसभा की 170 सीटें जीतने का कुल लक्ष्य रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनाने का आह्वान करते हुए अमित शाह ने राज्य की सीमाओं को सील करने और अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने मतदाताओं से वर्तमान मुख्यमंत्री को विदाई देने और 'सोनार बांग्ला' के भाजपा के विजन का समर्थन करने की गुजारिश करते हुए अपनी बात खत्म की। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वह पार्टी के अभियान की निगरानी के लिए अगले पखवाड़े तक पश्चिम बंगाल में ही रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 18:16:52 +0530</pubDate>
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                <title>ममता की जीत</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में तीन विधानसभा सीटों भवानीपुर, समसेरगंज और जंगीपुर में तृणमूल कांग्ररेस को शानदार जीत हासिल हुई है। इस जीत से यह जाहिर होता है कि इस राज्य में ममता बनर्जी का दबदबा कायम है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/615bf6c939190/article-1432"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/mamta-banrji.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पश्चिम बंगाल</strong> में तीन विधानसभा सीटों भवानीपुर, समसेरगंज और जंगीपुर में तृणमूल कांग्ररेस को शानदार जीत हासिल हुई है। इस जीत से यह जाहिर होता है कि इस राज्य में ममता बनर्जी का दबदबा कायम है और उनका मुकाबला करने में कोई भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल सक्षम नहीं है। पांच माह पहले भी राज्य के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी को प्रचण्ड बहुमत मिला था। भवानीपुर उपचुनाव वाली सीट से तो ममता बनर्जी ही उम्मीदवार थी। विधानसभा चुनाव में नंदीग्र्राम सीट से चुनाव हार गई थी। उनका विधायक बनना काफी जरूरी था ताकि वे मुख्यमंत्री पद पर बनी रह सकें। भवानीपुर से जीत हासिल करके अब वे विधानसभा की सदस्य बन गई हैं। ममता ने इस सीट से भाजपा की उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल को 58,835 मतों से हराया। मुर्शिदाबाद के समशेरगंज और जंगीपुर विधानसभा क्षेत्रों में भी तृणमूल कांग्र्रेस के निकटतम प्रतिद्वंद्वियों को करारी मात दी। जंगीपुर से तो तृणमूल के प्रत्याशी जाकिर हुसैन को 70 फीसदी से अधिक वोट मिले। जबकि जंगीपुर को तो कांग्र्रेस का गढ़ माना जाता है। फिर भी कांग्र्रेस ने इस सीट पर अपना कोई प्रत्याशी ही मैदान में नहीं उतारा। यहां भाजपा दूसरे स्थान पर रही जबकि समसेरगंज में कांग्र्रेस दूसरे स्थान पर रही। भवानीपुर सीट पर भाजपा की प्रत्याशी प्रियंका ने ममता के सामने बखूबी चुनाव लड़ा। हर वार्ड में जाकर प्रचार किया। उन्हें 24 हजार से अधिक मत मिले। सर्वाधिक वोटर बंगाली थे और 20 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता थे। दोनों समुदायों पर ममता का काफी प्रभाव है, तो ममता की जीत पहले से ही पक्की मानी जा रही थी। ममता की इस जीत ने भाजपा के इस दावे को नकार दिया है कि पश्चिम बंगाल में यह पार्टी अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों की तरह अपना वर्चस्व जमा सकती है। विधानसभा चुनाव और इन उपचुनावों में जीत से ममता की राष्ट्रीय छवि में प्रभाव बनना स्वाभाविक है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि ममता की लोकप्रियता देश के अन्य राज्यों में भी प्रभावी हो सकती है। ममता राष्ट्रीय राजनीति में चेहरा बनकर उभरने की महत्वाकांक्षा जरूर रखती है, लेकिन फिलहाल वह दूर की कौड़ी ही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Oct 2021 13:58:05 +0530</pubDate>
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