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                <title>astrologer - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>27 मई को रखा जाएगा कमला एकादशी व्रत, पद्मिनी एकादशी का मिलेगा विशेष पुण्य </title>
                                    <description><![CDATA[ज्येष्ठ अधिक मास में आने वाली पद्मिनी (कमला) एकादशी का व्रत 27 मई 2026 को रखा जाएगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, उदया तिथि के आधार पर यह दुर्लभ व्रत सुख-समृद्धि लाएगा। भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी पर विधि-विधान से पूजा और मंत्र जप करने से दोगुना पुण्य फल प्राप्त होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/kamala-ekadashi-fast-will-be-observed-on-27th-may-padmini/article-154659"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ekadashi.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अधिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी, कमला एकादशी अथवा पुरुषोत्तमी एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष यह व्रत 27 मई को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में आने वाली यह एकादशी अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी मानी जाती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि पंचांग के अनुसार कमला एकादशी तिथि का आरंभ 27 मई को प्रातः 6:22 बजे होगा तथा 28 मई को सुबह 7:22 बजे तक एकादशी तिथि रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 27 मई को ही रखा जाएगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। डॉ. व्यास के अनुसार अधिक मास के स्वामी भगवान श्रीहरि विष्णु हैं और एकादशी तिथि भी उन्हें समर्पित है। ऐसे में पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से दोगुना पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस एक व्रत से वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य मिलता है। उन्होंने बताया कि इस दिन प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। श्रद्धालु निर्जल व्रत रखकर विष्णु पुराण का पाठ या श्रवण करें। रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण करना शुभ माना गया है। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा देने के बाद व्रत का पारण करना चाहिए। पद्म पुराण में भी कमला एकादशी के महत्व का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करने से अनेक गुना फल प्राप्त होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 14:53:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होली के खेल में रंगों के चुनाव को लेकर ज्योतिषियों ने दी सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[हिन्दू धर्म में होली महापर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/astrologers-advised-for-the-choice-of-colors-in-the-game/article-107013"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(1)39.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि को रंग वाली होली खेली जाती है। इस साल होलिका दहन 13 मार्च को होगा, जबकि रंग वाली होली 14 मार्च को खेली जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा 13 मार्च को होगा। इसके अगले दिन 14 मार्च को रंगों का पर्व धुलंडी मनाई जाएगी। होली खेलने के लिए सभी रंगों का अपना-अपना महत्व है। ज्योतिष की दृष्टि से देखें तो कई रंग हमारे लिए बहुत भाग्यशाली होते हैं, तो कई रंग परेशानी का कारण बनते हैं। होली खेलते समय यदि अपनी राशि के अनुसार रंगों का सही चुनाव करते हैं तो इससे खुद को और अपने परिवार को स्वस्थ, खुशहाल और नकारत्मकता से दूर रख सकते है। हिन्दू धर्म में होली महापर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। </p>
<p><strong>जातकों को किस रंग से खेलनी चाहिए होली</strong><br /><strong>मेष राशि-</strong> मेष राशि को लाल और पीले रंग से होली का त्योहार मनाना चाहिए। इन रंगों से होली खेलने से आपके जीवन में प्यार और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहेगा।<br /><strong>वृषभ राशि-</strong>  होली के दिन सफेद कपड़े पहनकर नारंगी और बैंगनी रंग से होली खेलनी चाहिए। <br /><strong>मिथुन राशि-</strong> जातकों को हरे रंग से होली खेलनी चाहिए। ऐसा करने से इनके मान-सम्मान में वृद्धि होगी। <br /><strong>कर्क राशि-</strong> सफेद कपड़े पहनकर होली खेलनी चाहिए। ऐसा करने से उन्हें धन, यश के साथ बेहद सुकून भी मिलेगा।<br /><strong>सिंह राशि-</strong> गोल्डन, पीले, लाल और नारंगी रंग से होली खेल सकते हैं। <br /><strong>कन्या राशि-</strong> हरे, भूरे और नारंगी रंग से होली खेलनी चाहिए। इन रंगों से होली खेलने से इस राशि के लोगों का आर्थिक संकट दूर होता है।<br /><strong>तुला राशि-</strong> तुला राशि के जातक सफेद और हल्के गुलाबी रंग के कपड़े पहनकर होली खेलें। <br /><strong>वृश्चिक राशि-</strong> वृश्चिक राशि के लोगों को लाल, मैरून और पीले रंग से होली खेलने जाना चाहिए। <br /><strong>धनु राशि-</strong> धनु राशि के जातकों को होली खेलने के लिए लाल और पीले रंग का इस्तेमाल करना चाहिए। <br /><strong>मकर राशि-</strong> मकर राशि के लोगों को होली जरूर खेलनी चाहिए, इसके लिए इन्हें नीले, काले रंग का इस्तेमाल करना चाहिए। <br /><strong>कुंभ राशि-</strong> कुंभ राशि के जातकों को होली खेलने के लिए काला, बैंगनी और लाल रंग के गुलाल का इस्तेमाल करना चाहिए। <br /><strong>मीन राशि- </strong>मीन राशि के लोगों को पीले रंग से होली खेलनी चाहिए। इस राशि के लोगों को होली के दिन पीला रंग शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद ही होली खेलने जाना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Mar 2025 11:17:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>ज्योतिषि बने भारतीय सनातन संस्कृति के वाहक-देवनानी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने ज्योतिषियों का आह्वान किया है कि वे भारतीय सनातन संस्कृति के वाहक बनना चाहिए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने ज्योतिषियों का आह्वान किया है कि वे भारतीय सनातन संस्कृति के वाहक बनना चाहिए। देवनानी गुरुवार को यहां सर्वशक्तिमान अन्तरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। देवनानी ने स्वस्ति वाचन के गुंजायमान के साथ दीप प्रज्जवलित कर सम्मेलन का शुभारम्भ किया। सम्मेलन में अन्तरराष्ट्रीय स्तर के ज्योतिष विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि ज्योतिष विद्या भारत में ही उत्पन्न हुई और यहीं से सम्पूर्ण विश्व में इस विद्या का प्रचार- प्रसार हुआ है। यह विद्या अपने आप में शुद्ध गणित है। इसके अध्ययन के लिए अन्य देशी के लोग भारतीय विद्ववानों से सम्पर्क करते है। यह भारत के लिए गौरव है। </p>
<p>देवनानी ने गृह नक्षत्रों की चाल से सटिक भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिषों को वंदन करते हुए कहा कि भारत में विकसित हुई गृह नक्षत्रों की गणना पद्धति से ब्राह्माण्ड की रीति-नीति के साथ पंचांग की रचना विशेषज्ञों द्वारा की जाती है। भारत के शून्य के अविष्कारक आर्यभट्ट जैसे विद्वान के द्वारा आर्यभट्टीयम के माध्यम से गणना सिखाई तो प्रख्यात खगोलविद वराहमिहिर ने अपनी कृति'सिद्धान्तपंचिका के माध्यम से कालगणना की विधि लोगों को सिखाई थी। उन्होंने कहा कि इनके अलावा ब्रह्मगुप्त की कृति'ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त, अल्स का शिष्यधीवृद्धदि, श्रीपति का सिद्धान्तशेखर, भास्कराचार्य का सिद्धान्तशिरोमणि, गणेश का ग्रहलाघव तथा कमलाकर भट्ट का सिद्धान्त-तत्व-विवेक भारतीय ज्योतिष एवं गणित की असाधरण कृतियां है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं से वास्तु के वैज्ञानिक स्वरूप और योग के साथ जीवनशैली का भारतीय सनातन परम्परा के अनुसार लोगों को बताये। उन्होंने कहा कि गीता के कर्म के सिद्धान्त को लोगों को सदैव याद रखना होगा। उन्होंने कहा कि ज्योतिषि कुण्डली, हस्तरेखा और कर्म की त्रिवेणी का संगम बने और अनुयाइयों को जीवन में कर्म की प्रधानता से सफलता का मार्ग समझायें। देवनानी ने कहा कि छोटी काशी में हो रहे सम्मेलन के सार्थक परिणामों का लाभ सम्पूर्ण मानव जाति को मिले इसके लिए सभी मिल-जुलकर प्रयास करें। समारोह में ज्योतिष के जाने माने विशेषज्ञ सतीश शर्मा, अजय भाम्बी, के.ए.दुबे, पुरुषोत्तम  गौड और सुरेश मिश्रा मौजूद थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Nov 2024 16:06:02 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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