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                <title>addicts - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का : एमबीएस अस्पताल में नशेड़ियों के अड्डे बने 17 खंडहर क्वार्टर ढहाने का काम शुरू, 14 जमींदोज</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने खबर प्रकाशित  कर जर्जर  इमारतों से होने वाले खतरों पर आगाह किया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--demolition-work-begins-on-17-dilapidated-quarters-at-mbs-hospital%E2%80%94which-had-become-dens-for-drug-addicts%E2%80%94with-14-already-razed-to-the-ground/article-151936"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/asar-khabar-ka--mbs-aspatal-mein-nashediyon-k-adde-bane-17-khandahar-kvaartar-dhahaane-ka-kam-shuru,-14-jamendoj...kota-news-28.04.2026.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल परिसर में सालों से सुरक्षा और स्वच्छता के लिए सिरदर्द बने खंडहर सरकारी आवासों (सर्वेन्ट क्वार्टर्स) पर आखिरकार प्रशासन का डंडा चल गया है। लंबे समय से चल रही खींचतान और फाइलों के चक्कर के बाद, अस्पताल प्रशासन द्वारा बजट जारी करते ही सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इन खतरनाक ढांचों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। दैनिक नवज्योति के 21 फरवरी को प्रकाशित अंक में ''सर्वेन्ट क्वार्टर्स खाली, कंटकों ने आबाद कर डाला'' शीर्षक से प्रकाशित खबर में जर्जर व खाली पड़ी इमारतों से होने वाले खतरों पर आगाह किया था। जिसके तुरन्त बाद 24 फरवरी को ही अस्पताल प्रशासन ने 5लाख 70 हजार राशि का चैक पीडब्ल्यूडी को सौप दिया था। जिसके बाद पीडब्ल्यूडी ने प्रकिया के तहत इन्हे हटाने का काम चालू कर दिया।</p>
<p><strong>खतरें से मुक्ति, भूमि विकास के लिये</strong><br />अस्पताल प्रशासन ने बताया कि अस्पताल लगातार विकसीत हो रहा है। जर्जर भवनों के हटने के बाद खाली हुई जमीन को अस्तपताल की भावी जरूरतों के लिये इस्तेमाल किया जा सकेगा। साथ यहां होने वाली गंदगी से भी निजात मिलेंगी। साथ ही किसी भी प्रकार की संभावित जान माल के खतरा भी समाप्त हो गया।</p>
<p><strong>17 में से 14 क्वार्टर गिराए गए</strong><br />सर्वे के अनुसार, परिसर में कुल 17 आवास ऐसे चिह्नित किए गए थे जो पूरी तरह रहने लायक नहीं थे और ढहने की कगार पर थे। ताजा जानकारी के अनुसार, अब तक इनमें से 14 क्वार्टर्स को सफलतापूर्वक गिरा दिया गया है बाकी बचे 3 ढांचों को भी जल्द ध्वस्त करने की तैयारी है।</p>
<p><strong>15 दिन पहले शुरू हुआ एक्शन</strong><br />अस्पताल प्रशासन ने इन खंडहरों को हटाने के लिए 5 लाख 70 हजार की राशि पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित की। प्रशासन का उद्देश्य इन असुरक्षित ढांचों को खत्म कर परिसर को असामाजिक तत्वों से मुक्त कराना है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारीयों ने बताया कि साल भर पहले ही इन्हे गिराने का प्रस्ताव मिला था। जिसके बाद हमारी तरफ से एस्टीमेट बनाया गया था। 24 फरवरी को हमे आंकलित राशि का चैक मिलने के बाद इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी अप्रेल के पहले सप्ताह से ठेकेदार ने इन्हे गिराने का काम शुरू कर दिया है। पिछले 15 दिनों से इन जर्जर मकानों को गिराने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।</p>
<p>हमने 17 गिराने योग्य क्वार्टर्स में से 14 को अब तक हटा दिया है। इस सप्ताह के भीतर बाकी बचा काम भी पूरा कर लिया जाएगा। पीडब्ल्यूडी इन निर्माणों को गिराने के बाद पूरी जमीन को समतल करके अस्पताल प्रशासन को सौंप देगी।<br /><strong>-अशोक सनाढ्य, अधिशाषी अभियंता (प्रोजेक्ट खंड), पीडब्ल्यूडी कोटा</strong></p>
<p> भवनों की उम्र पुरी हाे चुकी थी इसिलिये पीडब्ल्यूडी के द्वारा इन्हें हटवाया गया है। आगे जाे भी आवश्यकता पड़ेगी उस हिसाब से काम करवाया जायेगा।<br /><strong>-डॉ. धर्मराज मीणा अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:30:46 +0530</pubDate>
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                <title>बेखौफ स्कूल, कॉलेज व गलियों में आसानी से मिल रहा नशा</title>
                                    <description><![CDATA[जिम्मेदार हैंडलरों को पकड़ रहे, बड़े तस्कर पकड़ से बाहर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/drugs-are-easily-available-in-schools--colleges-and-streets-without-any-fear/article-122719"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne551ws.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोटा शहर में नशे का कारोबार लगातार बढ़ता ही जा रहा है। नारकोटिक्स व पुलिस की कार्रवाई पर नशे के कारोबारी भारी पड़ रहे हैं। नशे की लत को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में युवा शहर में चोरियां तक करने लगे हैं। नशा करने वाले अब घरों तक सीमित न रहकर सार्वजनिक सम्पतियों तक को नुकसान पहुंचाने लगे हैं।  शहर में कोचिंग एरिया के आस-पास ही नहीं स्कूलों के पास और बस्तियों में सरेआम स्मैक, एमडी व गांजा आसानी से बच्चों को मिल रहा है। </p>
<p><strong>पुलिस ने  5719 किलो मादक पदार्थ  जब्त, 825 को भेजा जेल</strong><br />शहर पुलिस की ओर से मादक पदार्थो की तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वर्ष 2021 से 31 मई 2025 तक 595  मुकदमे दर्ज कर 825 आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 5719 किलो मादक पदार्थ जब्त किया है। इसमें 5.324 किलोग्राम अफीम व 14.17 किलो ग्राम चरस, 2.846 किलो ग्राम स्मैक, 1008.03 किलो ग्राम गांजा  व 4688.612 किलोग्राम डोडाचूरा और  0.327 किलोग्राम एमडी है। </p>
<p><strong>नारकोटिक्स ने 184 मुकदमें दर्ज कर 207 आरोपी पकड़े</strong><br />केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की ओर से पिछले सवा तीन साल में वर्ष 2020 से मार्च 2025 तक मादक पदार्थ तस्करी के 184 मुकदमें दर्ज किए। जिनमें कुल 207 आरोपी तस्करों को गिरफ्तार किया गया। वहीं बड़ी मात्रा में स्मैक, गांजा, डोडा चूरा व एमडी भी जब्त किया है। जिसकी कीमत लाखों-करोड़ों रुपए है। </p>
<p><strong>पुलिस कार्रवाई</strong><br /><strong>वर्ष     अफीम    आरोपी    मुकदमे</strong><br />2022    4.359    142    93 <br />2023    0.129    205    157 <br />2024    0.810    223    156 <br />2025    0.230    124    109 <br /><strong>चरस    स्मैक    गांजा    डोडाचूरा    एमडी</strong><br />14.17    2.846    1008    4688    0.327  </p>
<p><strong>नारकोटिक्स कार्रवाई</strong><br /><strong>वर्ष    मुकदमे    आरोपी</strong><br />2022    26    26 <br />2023    37    42 <br />2024    87    107 <br />2025    34    32 </p>
<p><strong>उप नारकोटिक्स आयुक्त नरेश बुंदेल से सवाल-जवाब</strong><br /><strong>सवाल :</strong> कोटा शहर में नशे का कारोबार नहीं थमने का क्या कारण है।<br />बुंदेल : सीबीएन द्वारा तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पिछले कुछ समय में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त कर तस्करों को पकड़ा है। फिर भी चोरी-छिपे आ रहा है। लेकिन कार्रवाई होने से इसमें काफी हद तक कमी आई है। <br /><strong>सवाल :</strong> नशा सबसे अधिक युवाओं को गिरफ्त में ले रहा है। इस पर रोक क्यों नहीं लग रही।<br />बुंदेल : हर व्यक्ति की फितरत  होती है कि वह अच्छाई की तरफ देर से व बुराई की तरफ जल्दी आकर्षित होता है। युवा अपनी मित्रों की संगत में आकर नशे  की लत में पड़ रहे है। इसके लिए सीबीएन ने ऑपरेशन युवा और नशा मुक्त कोटा अभियान चलाया हुआ है। जिसमें युवाओं को नशे की दुष्परिणाम बताकर इससे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।<br /><strong>सवाल :</strong> सीबीएन ने जो भी कार्रवाई की है। उनमें अधिकतर बिचौलिये या हैंडलर ही पकड़े गए हैं। बड़े तस्कर पकड़ में नहीं आने का क्या कारण है।<br />बुंदेल : मादक पदार्थ की तस्करी करने वाले काफी होशियार होते हैं। वे कभी सामने नहीं आते और जिनके माध्यम से वे इस कारोबार को करते हैं उन्हें भी उन तस्करों के बारे में जानकारी नहीं होती। वे चंद रुपयों के लालच में इस काम में फंस जाते है। पकड़े गए लोगों से पूछताछ व विभागीय स्तर पर तस्करों तक भी पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। <br /><strong>सवाल :</strong> पादक पदाथों की तस्करी पर रोक नहीं लगने का कारण कहीं विभागीय मिलीभगत या रिश्वत का खेल तो नहीं है।<br />बुंदेल : ऐसा नहीं है। विभाग के स्तर पर हर संभव प्रयास कर तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। केन्द्र सरकार द्वारा अफीम नीति में बदलाव करने से बाजार में आने वाला मादक पदार्थ सरकार के पास पहुंचा है। जिससे इसमें काफी कमी आई है। <br /><strong>सवाल : </strong>नशा करने वाले शहर में सरकारी सम्पतियों को नुकसान पहुंचा रहे है। इसे कैसे रोका जा सकता है।<br />बुंदेल : वर्तमान में अधिकतर घरों व मौहल्लों में सीसीटीवी कैमरे लगे होने से वहां चोरियां कम हो गई है। जबकि सरकारी सम्पति को टारगेट करना आसान हो रहा है।  इसे रोकने के लिए विभाग द्वारा नशा करने वालों के खिलाफ भी पुलिस व अन्य संगठनों के सहयोग से कार्य करने की जरूरत है।<br /><strong> सवाल :</strong> सीबीएन के द्वारा चलाए गए नशा मुक्त कोटा अभियान का कितना असर हुआ है।<br />बुंदेल : नशा मुक्त कोटा अभियान के तहत युवाओं को स्कूल व कॉलेज में कार्यक्रम व प्रतियोगिताओं के माध्यम से जागरूक करने का प्रयास किया गया है। इसका परिणाम तुरंत नजर नहीं आएगा लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम देखने को मिलेंगे। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Aug 2025 16:53:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अब नशेड़ियों का शिकार हुआ एरोड्राम चौराहे का टॉवर ऑफ लिबर्टी, बैसेमेंट में लगी केबल व पैनल चोरी</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से करोड़ों रुपए की लागत से शहर में विकास व सौन्दर्यीकरण के कार्य करवाए गए थे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-tower-of-liberty-of-aerodrome-square-has-become-the-victim-of-drug-addicts/article-108605"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news45.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में नशेडियों का इतना अधिक आतंक हो गया है कि वे बीच चौराहा व पुलिस थानों के नजदीक तक चोरी करने से नहीं चूक रहे है। अब नशेड़ियों ने शहर के बीच एरोड्राम चौराहे की टावर्स आॅफ लिबर्टी को अपना शिकार बनाया है। चोर लाखों की केबल, पैनल, लाइटें व फव्वारे तक चोरी कर ले गए।  जिससे दस दिन से टावर्स की लाइटें बंद पड़ी थी। जिन्हें सोमवार को सही कर शाम को फिर से चालुू किया गया है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से करोड़ों रुपए की लागत से शहर में विकास व सौन्दर्यीकरण के कार्य करवाए गए थे। जिनमें चौराहों को भी विकसित किया गया था। उसी के तहत शहर के बीच स्थित एरोड्राम चौराहे पर टावर्स आॅफ लिबर्टी का निर्माण कराया गया था। जिस पर आकर्षक लाटिें लगाई गई थी। रात के समय ये रंग बिरंगी और बदलती लाइटें लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। लेकिन हालत यह है कि पिछले करीब दस दिन से इन टावर्स की लाइटें बंद पड़ी हुई थी। इसका कारण नशेडियों द्वारा की गई चोरी है। </p>
<p><strong>बैसेमेंट में लगी केबल व पैनल चोरी</strong><br />एरोड्राम चौराहे पर बने टावर्स ऑफ लिबर्टी पर लगी लाइटों को जलाने के लिए इसके बेसमेंट में बिजली की केबल डाली हुई है। साथ ही यहां उसे कंट्रोल करने के लिए पैनल बॉक्स लगा हुआ  है। लेकिन हालत यह है कि वहां न तो केबल है और न ही पैनल बॉक्स। एक बॉक्स तो टूटकर नीचे पड़ा हुआ था और दूसरा खाली है। जिसके अंदर से बिजली के महंगे उपकरण नशेड़ी चोरी कर ले गए। यहां लगी लाइटें, फव्वारे की टोटियां, बॉक्स का गेट समेत सामान चोरी हो गए। जिससे लाखों रुपए का सामान चोरी होने से टावर्स की लाइटें ही बंद हो गई।</p>
<p><strong>लम्बे समय बाद तो हुई भी चालू</strong><br />टावर्स की लाइटें महीने में कुछ ही दिन चल पाती है। जबकि अधिकतर समय बंद रहती है। अभी काफी समय तक लाइटें बंद थी। टावर्स के ऊपर तकनीकी खराबी होने से बनद लाइटों को चालू करने के लिए लाखों रुपए का पेड़ा महीनों तक बांधकर लाइटों को सही किया गया। कई दिन ट्रायल के बाद कुछ समय पहले ही ये लाइटें चालू हुई थी। उसके बाद नशेडियों द्वारा केबल व पैनल चोरी करने से फिर से दस दिन तक बंद रही।</p>
<p><strong>सुरक्षा गार्ड तक नहीं</strong><br />कांग्रेस सरकार के समय में जब इन चौराहों का विकास व सौन्दर्यीकरण कराया गया था। उस समय यहां सफाई के लिए कर्मचारी से लेकर सुरक्षा के लिए गार्ड तक लगाए गए थे। हालांकि गार्ड तो अभी भी लगे हुए बताए जा रहे हैं लेकिन कहीं नजर नहीं आते। यही कारण है कि नशेड़ियों को यहां से बिजली के कीमती सामान चोरी करने का मौका मिल गया। इतना ही नहीं यहां केबल व पैनल की सुरक्षा के लिए रैलिंग या जाली तक लगी हुई नहीं है। नीचे की तरफ रात में सुनसान व सन्नाटा होने से नशेड़ियों के लिए चोरी करना सुविधाजनक हो रहा है</p>
<p><strong>दस दिन बाद चालू हुई लाइटें</strong><br />केडीए के अधिशाशी अभियंता(विद्युत) पवन शर्मा ने बताया कि टावर्स आॅफ लिबर्टी की केबल व पैनल बॉक्स नशेड़ी चोरी करके ले गए थे। जिससे ये लाइटें बंद थी। उन्हें संवेदक के माध्यम से कहकर फिर से सही कराया है। दस दिन बाद सोमवार देर शाम को लाइटों को फिर से चालू किया गया है। यह काम संवेदक के ओ एंड एम के तहत ही कराया गया है। इसमें केडीए का कोई खर्चा नहीं हुआ है। शर्मा ने बताया कि स्मैकचियों व नशेड़ियों के कारण काफी परेशानी बढ़ गई है। कई बार थानों में चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। वहां भी इतनी अधिक औपचारिकताएं पूरी करने पड़ती है कि रिपोर्ट करवाने में ही थानों में पूरा दिन लग जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Mar 2025 16:43:25 +0530</pubDate>
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                <title>नशा जब्त नहीं होता तो क्या होता!</title>
                                    <description><![CDATA[करोड़ों का नशा जब्त नहीं होता तो यह युवाओं का शरीर खोखला कर देता ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-would-have-happened-if-the-drugs-were-not-confiscated/article-96770"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नशा नाश का कारण होता है। यह सभी जानते हैं। उसके बाद भी कई लोग नशे का सेवन कर रहे है। हाड़ौती में सबसे अधिक नशा युवाओं की नसों में घुल रहा है। नारकोटिक्ट व पुलिस विभाग द्वारा कार्रवाई कर यदि करोड़ों रुपए का नशा जब्त नहीं किया जाता तो यह युवाओं के शरीर को और अधिक खोखला कर देता। कोटा शिक्षा नगरी के साथ ही पर्यटन नगरी के रूप में भी विकसित हो रहा है।यहां स्थानीय लोगों के अलावा बड़ी संख्या में युवा बाहर से आकर भी रह रहे है। कई नौकरी पेशा हैं तो कई विद्यार्थी के रूप में रह रहे है। हालत यह है कि कोटा में राजस्थान के कई जिलों के अलावा मध्य प्रदेश तक से नशा पहुंच रहा है। स्मैक, अफीम, गांजा, डोडा पोस्त के रूप में नशा युवाओं के शरीर में पहुंचाया जा रहा है। स्मैक की छोटी-छोटी पुड़ियाएं, नशे की सिगरेट और अन्य तरह से नशा युवाओं को अपनी गिरफ्त में जकड़ रहा है। जिस तरह से पुलिस और नारकोटिक्स विभाग द्वारा पिछले सालों में मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उससे अंदाजा लगाया जा सकता है। जिस बड़ी मात्रा में नशा जब्त किया गया है वह तो बहुत कम है। उससे कहीं अधिक नशा समाज में पहुंच चुका होगा। यदि यह मादक पदार्थ भी जब्त नहीं होता तो यह उस मात्रा को बढ़ाने में काफी अधिक सहायक होता। कोटा शहर में वैसे तो हर क्षेत्र में नशे का कारोबार हो रहा है। लेकिन सबसे अधिक कोचिंग क्षेत्र में  युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे है। एनर्जी ड्रिंक्स व स्मरण शक्ति बढ़ाने समेत कई तरह से युवाओं को नशा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से दिया जा रहा है। पुलिस और नारकोटिक्स विभाग द्वारा की गई यह कार्रवाई तो नाम मात्र की है। इसके अलावा न जाने कितना नशा युवाओं की नसों में पहुंच चुका होगा। </p>
<p><strong>मध्य प्रदेश की टीम ने किया था 900 किलो डोडा चूरा जब्त</strong><br />हाल ही में मध्य प्रदेश की नारकोटिक्स टीम करीब 900 किलो से अधिक मादक पदार्थ डोडा चूरा जब्त कर आरोपियों को गिरफ्तार कर ले जा रही थी। जिसे कोटा के आस-पास तस्करों ने छुड़ाने का प्रयास किया था। हालांकि तस्कर इसमें सफल नहीं हो सके। इस तरह की घटना पूर्व में भी कई बार हो चुकी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नशे को समाज में पहुंचाने का किस हद तक साजिश रची जा रही है। इससे पहले बांसवाड़ा में भी कोचिंग क्षेत्र में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किया गया था। कोटा में भी शहर पुलिस की ओर से समय-समय पर नशा करने वालों व मादक पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती रही है। जिसमें स्मैक, चरस व गांजा जब्त कर आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया। वहीं नारकोटिक्स विभाग द्वारा भी लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिसमें पिछले सालकी तुलना में अधिक कार्रवाई की गई है। साथ ही करोड़ों  रुपए का मादक पदार्थ जब्त किया गया है। </p>
<p><strong>करीब तीन गुना अधिक डोडा चूरा जब्त</strong><br />नारकोटिक्स विभाग द्वारा मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ लगातार और बड़ी कार्रवाई की जा रही है। जिसमें गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष करीब तीन गुना अधिक डोडा चूरा जब्त किया गया है।  विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में7855.37 किलो डोडा चृूरा जब्त किया गया था। वह इस साल नवम्बर तक ही 20341.12 किलो जब्त किया गया। इसी तरह से गत वर्ष 218.31किलो अफीम, 1 किलो हेरोइन,145.56 किलो गांजा समेत अन्य मादक पदार्थ जब्त किया था। वहीं इस साल 86.761किलो अफीम,1.354 किलो हेरोइन और 37.51 किलो गांजा समेत अन्य मादक पदार्थ जब्त किया गया था। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जब्त किए गए मादक पदार्थ की बाजार कीमत करोड़ों रुपए है। </p>
<p><strong>गत वर्ष से दोगुनी कार्रवाई</strong><br />नारकोटिक्स विभाग कोटा ने वर्ष 2023 में मादक पदार्थ जब्त करने के खिलाफ जितनी कार्रवाई की थी उससे दो गुनी से अधिक कार्रवाई इस साल के 11 महीने में ही की जा चुकी है। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार गत वर्ष कुल 35 मामले दर्ज हुए थे। वहीं इस साल अभी तक 80 मामले दर्ज हो चुके हैं। गत वर्ष कुल 45 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। वहीं इस बार आरोपियों की संख्या भी दो गुनी से अधिक 101 रही है। यदि ये आरोपी गिरफ्तार नहीं होते तो ये समाज में युवाओं को नशा पहुंचाने में  अधिक भागीदार बनते। लेकिन तस्करों के खिलाफ की गई कार्रवाई से उसे किसी हद तक कम किया गया है। </p>
<p><strong>जेल में आधे स्मैक ची</strong><br />इधर जानकारी के अनुसार कोटा की जेल में वर्तमान में जितने आरोपी व बंदी है। उनमें से करीब आधे बंदी स्मैकची व नशे के आदी वाले हैं। पुलिस भी नशा करने वालों को पकड़ने से कतराने लगी है। इसका कारण नशा करने वालों को पकड़कवर उन्हें संभालना व उनके लिए नशे की व्यवस्था कर पाना उनके लिए किसी सिर दर्द से कम नहीं है। </p>
<p><strong>शरीर को खोखला कर शहर की बिगाड़ रहे सूरत</strong><br />नशा युवाओं के शरीर को खोखला तो कर ही रहा है। साथ ही नशा करने वाले अपराधी बन रहे हैं। नशेड़ी शहर में आए दिन चोरियां करके शहर की सृूरत बिगाड़ रहे हैं। कहीं लोहे की रैलिंग चोरी कर रहे हैं तो कहीं घरों से साइकिल, बाइक, पानी व बिजली के मीटर और मेन रोड से डेकोरेटिव लाइटें तक चोरी कर रहे हैं। </p>
<p><strong>युवा पीढ़ी को नशे से बचाना आवश्यक</strong><br />युवा वर्ग देश का भविष्य है। उसमें देश के लिए बहुत कुछ करने की क्षमता है। उसका सही जगह पर उपयोग होना चाहिए। लेकिन वर्तमान में जिस तरह से युवा नशे की गिरफ्त में जकड़ रहा है उसे इससे बचाने की आवश्यकता है। नशा ही युवा पीढ़ी को उसकी दिशा से भटकाने के साथ ही परिवारों के टृटने का कारण भी बन रहा है।नशे के खिलाफ संबंधित विभागों को लगातार कार्रवाई करते रहना होगा। यदि करोड़ों का नशा जब्त नहीं होता तो यह युवाओं की नसों में ही पहुंचता।  <br /><strong>-बल्लभ पोरवाल, छावनी</strong></p>
<p>मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ विभाग द्वारा समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। पिछले दो साल में ही कार्रवाई करते हुए सवा सौ से अधिक मामले दर्ज हुए। डेढ़ सौ से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक कार्रवाई कर मादक पदार्थ व नशे की सामग्री को समाज में पहुंचने से रोका जा सके। विभाग का प्रयास है कि कोटा को नशा मुक्त बनाया जाए। इसके लिए छोटे-छोटे तस्करों की जगह बड़े सप्लायरों को पकड़ने की कार्ययोजना बनाई जाएगी। <br /><strong>-नरेश बुंदेल, आयुक्त, नारकोटिक्स विभाग कोटा </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Dec 2024 14:15:47 +0530</pubDate>
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