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                <title>स्मार्ट सिटी में लापरवाही की तस्वीर! करोड़ों के डिवाइडर हुए बैरंग, टाइलें चोरी और सूखे पौधों ने खोली व्यवस्था की पोल</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासन के साथ नागरिकों की जिम्मेदारी भी बनी अहम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-picture-of-negligence-in-the--smart-city---multi-crore-rupee-dividers-have-lost-their-sheen--stolen-tiles-and-withered-plants-expose-the-state-of-the-system/article-160460"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)82.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे कोटा शहर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए डिवाइडर आज अपनी ही बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। कभी आकर्षण का केंद्र रहे ये डिवाइडर अब जगह-जगह से टूटी टाइलों, सूखे पौधों और चोरी हुए लाइट के केबलों के कारण बदरंग नजर आ रहे हैं। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए प्रशासन लगातार योजनाएं बना रहा है, लेकिन यदि सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण नहीं हुआ और नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना विकसित नहीं हुई तो स्मार्ट सिटी का सपना केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।</p>
<p><strong>करोड़ों खर्च, लेकिन सुंदरता पर ग्रहण</strong><br />शहर की प्रमुख सड़कों पर आकर्षक डिवाइडर बनाकर उन पर महंगी टाइल्स लगाई गई थीं। हरियाली बढ़ाने के लिए पौधारोपण किया गया और आधुनिक लाइटिंग व्यवस्था भी विकसित की गई। उद्देश्य था कि कोटा की पहचान एक आधुनिक और व्यवस्थित शहर के रूप में बने, लेकिन कुछ ही समय में इन विकास कार्यों की चमक फीकी पड़ने लगी। रखरखाव की कमी और चोरी की घटनाओं ने करोड़ों रुपये की इस सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। शहर के जेडीबी कॉलेज रोड पर लगे विद्युत पोलों से लाइटें चोरी हो चुकि हैं, जिससे रात के समय अंधेरा छाया रहता है। वहीं सर्किट हाउस से रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग पर बने डिवाइडर अपनी रंगत खो चुके हैं। कई स्थानों पर रंग उखड़ चुका है और रखरखाव के अभाव में वे बदहाल दिखाई देते हैं। दूसरी ओर गुमानपुरा रोड पर डिवाइडरों पर लगी महंगी टाइलें चोरी हो चुकी हैं। कई जगह टाइलें उखड़ी हुई हैं, जिससे पूरे मार्ग की सुंदरता प्रभावित हो रही है। आश्चर्य की बात यह है कि यह सब लंबे समय से हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों का ध्यान अब तक इस ओर नहीं गया।</p>
<p><strong>स्मार्ट सिटी से पहले बनना होगा स्मार्ट नागरिक</strong><br />सार्वजनिक संपत्ति केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे शहर की होती है। यदि कुछ लोग टाइलें और केबल चोरी करेंगे तथा पौधों को नुकसान पहुंचाएंगे और बाकी लोग मूकदर्शक बने रहेंगे तो किसी भी शहर को स्मार्ट नहीं बनाया जा सकता। जरूरत इस बात की है कि नागरिक सार्वजनिक संपत्तियों को अपनी संपत्ति समझें और किसी भी प्रकार की चोरी या तोड़फोड़ की सूचना तत्काल प्रशासन और पुलिस को दें। शहर की पहचान को सुरक्षित रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।</p>
<p>शहरवासियों ने कहा कि नगर निगम और संबंधित विभागों को नियमित निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त डिवाइडरों की मरम्मत करानी चाहिए। चोरी हुए केबल और टाइलों को तत्काल बदलना चाहिए तथा पौधों का दोबारा रोपण कर उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही प्रमुख मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी बढ़ाई जाए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।</p>
<p><strong>शहरवासियों ने कहा आखिर करोड़ों की संपत्ति की जिम्मेदारी किसकी?</strong><br />स्मार्ट सिटी पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा नहीं हो रही। टाइलें और केबल चोरी होना बेहद गंभीर मामला है। प्रशासन को नियमित निगरानी करनी चाहिए।<br /><strong>- शादाब खान, युवा</strong></p>
<p>डिवाइडरों पर लगे पौधे शहर की खूबसूरती बढ़ाते थे। अब अधिकांश पौधे सूख गए हैं या चोरी हो गए हैं। प्रशासन के साथ हमें भी सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करनी होगी।<br /><strong>- तीरथ सांगा, फुटबॉल कोच</strong></p>
<p>स्मार्ट सिटी का सपना तभी पूरा होगा जब लोग खुद जिम्मेदार बनेंगे। चोरी और तोड़फोड़ करने वालों की सूचना देना हर नागरिक का कर्तव्य है।<br /><strong>- बीटा स्वामी, एडवोकेट</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सूख चुके और चोरी हुए पौधों की जगह जल्द ही नए पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए विभाग की टीम पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती पौधों और डिवाइडरों पर लगी महंगी टाइलों की लगातार हो रही चोरी है। इस संबंध में कई बार संबंधित थानों को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। इतना ही नहीं, कई मामलों में केडीए अधिकारियों ने खुद चोरों का पीछा कर उनके वीडियो बनाए, उन्हें पकड़कर पुलिस के हवाले भी किया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से चोरी की घटनाएं थम नहीं रही हैं। यदि शहर की सुंदरता और सरकारी संपत्ति को बचाना है तो पुलिस को भी अधिक सतर्क और प्रभावी भूमिका निभानी होगी, तभी करोड़ों रुपये की लागत से किए गए सौंदर्यीकरण कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।<br /><strong>-रवि माथुर, निदेशक अभियांत्रिकी कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 14:16:14 +0530</pubDate>
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                <title>अब नशेड़ियों का शिकार हुआ एरोड्राम चौराहे का टॉवर ऑफ लिबर्टी, बैसेमेंट में लगी केबल व पैनल चोरी</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से करोड़ों रुपए की लागत से शहर में विकास व सौन्दर्यीकरण के कार्य करवाए गए थे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-tower-of-liberty-of-aerodrome-square-has-become-the-victim-of-drug-addicts/article-108605"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news45.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में नशेडियों का इतना अधिक आतंक हो गया है कि वे बीच चौराहा व पुलिस थानों के नजदीक तक चोरी करने से नहीं चूक रहे है। अब नशेड़ियों ने शहर के बीच एरोड्राम चौराहे की टावर्स आॅफ लिबर्टी को अपना शिकार बनाया है। चोर लाखों की केबल, पैनल, लाइटें व फव्वारे तक चोरी कर ले गए।  जिससे दस दिन से टावर्स की लाइटें बंद पड़ी थी। जिन्हें सोमवार को सही कर शाम को फिर से चालुू किया गया है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से करोड़ों रुपए की लागत से शहर में विकास व सौन्दर्यीकरण के कार्य करवाए गए थे। जिनमें चौराहों को भी विकसित किया गया था। उसी के तहत शहर के बीच स्थित एरोड्राम चौराहे पर टावर्स आॅफ लिबर्टी का निर्माण कराया गया था। जिस पर आकर्षक लाटिें लगाई गई थी। रात के समय ये रंग बिरंगी और बदलती लाइटें लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। लेकिन हालत यह है कि पिछले करीब दस दिन से इन टावर्स की लाइटें बंद पड़ी हुई थी। इसका कारण नशेडियों द्वारा की गई चोरी है। </p>
<p><strong>बैसेमेंट में लगी केबल व पैनल चोरी</strong><br />एरोड्राम चौराहे पर बने टावर्स ऑफ लिबर्टी पर लगी लाइटों को जलाने के लिए इसके बेसमेंट में बिजली की केबल डाली हुई है। साथ ही यहां उसे कंट्रोल करने के लिए पैनल बॉक्स लगा हुआ  है। लेकिन हालत यह है कि वहां न तो केबल है और न ही पैनल बॉक्स। एक बॉक्स तो टूटकर नीचे पड़ा हुआ था और दूसरा खाली है। जिसके अंदर से बिजली के महंगे उपकरण नशेड़ी चोरी कर ले गए। यहां लगी लाइटें, फव्वारे की टोटियां, बॉक्स का गेट समेत सामान चोरी हो गए। जिससे लाखों रुपए का सामान चोरी होने से टावर्स की लाइटें ही बंद हो गई।</p>
<p><strong>लम्बे समय बाद तो हुई भी चालू</strong><br />टावर्स की लाइटें महीने में कुछ ही दिन चल पाती है। जबकि अधिकतर समय बंद रहती है। अभी काफी समय तक लाइटें बंद थी। टावर्स के ऊपर तकनीकी खराबी होने से बनद लाइटों को चालू करने के लिए लाखों रुपए का पेड़ा महीनों तक बांधकर लाइटों को सही किया गया। कई दिन ट्रायल के बाद कुछ समय पहले ही ये लाइटें चालू हुई थी। उसके बाद नशेडियों द्वारा केबल व पैनल चोरी करने से फिर से दस दिन तक बंद रही।</p>
<p><strong>सुरक्षा गार्ड तक नहीं</strong><br />कांग्रेस सरकार के समय में जब इन चौराहों का विकास व सौन्दर्यीकरण कराया गया था। उस समय यहां सफाई के लिए कर्मचारी से लेकर सुरक्षा के लिए गार्ड तक लगाए गए थे। हालांकि गार्ड तो अभी भी लगे हुए बताए जा रहे हैं लेकिन कहीं नजर नहीं आते। यही कारण है कि नशेड़ियों को यहां से बिजली के कीमती सामान चोरी करने का मौका मिल गया। इतना ही नहीं यहां केबल व पैनल की सुरक्षा के लिए रैलिंग या जाली तक लगी हुई नहीं है। नीचे की तरफ रात में सुनसान व सन्नाटा होने से नशेड़ियों के लिए चोरी करना सुविधाजनक हो रहा है</p>
<p><strong>दस दिन बाद चालू हुई लाइटें</strong><br />केडीए के अधिशाशी अभियंता(विद्युत) पवन शर्मा ने बताया कि टावर्स आॅफ लिबर्टी की केबल व पैनल बॉक्स नशेड़ी चोरी करके ले गए थे। जिससे ये लाइटें बंद थी। उन्हें संवेदक के माध्यम से कहकर फिर से सही कराया है। दस दिन बाद सोमवार देर शाम को लाइटों को फिर से चालू किया गया है। यह काम संवेदक के ओ एंड एम के तहत ही कराया गया है। इसमें केडीए का कोई खर्चा नहीं हुआ है। शर्मा ने बताया कि स्मैकचियों व नशेड़ियों के कारण काफी परेशानी बढ़ गई है। कई बार थानों में चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। वहां भी इतनी अधिक औपचारिकताएं पूरी करने पड़ती है कि रिपोर्ट करवाने में ही थानों में पूरा दिन लग जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Mar 2025 16:43:25 +0530</pubDate>
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                <title>खंभों पर झूलते अवैध तारों का जाल बना जंजाल </title>
                                    <description><![CDATA[एक तरफ करंट से हादसों का डर तो दूसरी ओर बिजली गुल होने से परेशानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-network-of-illegal-wires-hanging-on-the-poles-has-become-a-mess/article-96772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के अंदरुनी इलाकों में बिजली के खंभों पर झूलते तार व केबलों का जाल लोगों के लिए अब जी-जंजाल बन गया है। जिम्मेदारों की लापरवाही से क्षेत्रवासियों को दोहरी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गली-मोहल्लों व कॉलोनियों में बिजली के तार व केबलें इतने नीचे की ओर झूल रहे हैं कि आए दिन लोडिंग वाहनों में उलझकर टूट रहे हैं। जिससे करंट का खतरा तो बढ़ ही रहा है, साथ ही बिजली गुल होने से दिनचर्या प्रभावित हो रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है, निजी बिजली कम्पनी व जेवीवीएनएल से शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं हो रहा। </p>
<p><strong>बिजली खंभों पर अवैध तारों का जाल</strong><br />विज्ञान नगर छत्रपुरा तालाब, गांधी नगर, संजय नगर, दोस्तपुरा, सकतपुरा, सब्जीमंडी, छावनी सहित विभिन्न इलाकों में लगे बिजली के खंभों पर विद्युत तारों के अलावा अन्य कम्पनियों के अवैध रूप से केबलें डाल रखी है, जिनकी ऊंचाई जमीन से 6 से 7 फीट तक है, ऐसे में लोडिंग वाहनों के आवागमन के दौरान तार उलझकर टूट जाते हैं। इनमें बिजली के तार भी टूट कर सड़कों पर गिर जाते हैं। जिससे बिजली गुल होने व करंट का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, शिकायत पर निजी बिजली कम्पनी के कर्मचारी मौके पर पहुंच समाधान कर जाते हैं लेकिन अवैध रूप से लगे अन्य कम्पनियों के तारों के जाल से बिजली के खंभे मुक्त नहीं हो पा रहे। </p>
<p><strong>लोडिंग वाहन में फंसकर टूटा तार</strong><br />विज्ञान नगर स्थित छत्रपुरा तालाब मुख्य मार्ग पर बिजली के खंभों पर विभिन्न तरह के तार लटक रहे हैं। गत सप्ताह शाम के वक्त लोडिंग वाहनों के गुजरने के दौरान तार उलझकर टूट गए। इसके साथ बिजली का तार भी टूट गया। जिससे इलाके की बिजली गुल होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं क्षेत्रवासी</strong><br />संजय नगर निवासी सुलेमान अहमद, मोहम्मद शाहरुख,  कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि क्षेत्र में बिजली के तार काफी नीचे तक झूले हुए हैं। इलाके में दुकानों पर माल सप्लाई करने आते लोडिंग वाहनों में उलझकर तार टूट कर सड़क पर पड़े रहते हैं। बिजली गुल होने से सड़क पर अंधेरा रहता है, ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है।  छत्रपुरा तालाब व गांधी नगर निवासी रघुवीर सैन, रईस खान, मुख्तार अंसारी का कहना है, खंभों पर बिजली के तार के अलावा बड़ी संख्या में अन्य कम्पनियों के तार अवैध रूप से लगे हुए हैं। जिनका मेंटिनेंस नहीं होता। यह लटके रहते हैं। बरसात के दौरान हादसे का खतरा अधिक रहता है। नगर निगम व जेवीवीएनएल में भी शिकायत की थी लेकिन कोई सुनने वाला ही नहीं है। समस्या जस की तस बनी हुई है। </p>
<p> मामला संज्ञान में आया है। कहीं ऐसे हालात हैं तो टीम भेजकर दिखवाएं और जिन कम्पनियों के तार झूल रहे हैं, उनसे दुरुस्त करवाएंगे।<br /><strong>- शिवचरण सिंह, एसई जेवीवीएनएल</strong></p>
<p>बिजली के खंभों पर विद्युत तारों की नियमित देखरेख की जाती है। यदि, अनुमति प्राप्त कम्पनी के तार लटके हुए मिलते हैं तो उसकी शिकायत जेवीएनएनएल से करते हैं, अन्य कम्पनियों के तारों व केबलों को हम काट देते हैं। <br /><strong>-अनोमित्रो डोली, तकनीकी हैड केईडीएल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Dec 2024 15:36:31 +0530</pubDate>
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