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                <title>makar sankranti festival - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>makar sankranti festival RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुख्यमंत्री ने उड़ाई पतंग : लोक परंपराओं को सहेजने का दिया संदेश, कहा- सूर्य के उत्तरायण होने पर मनाए जाने वाला यह पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री निवास पर पतंग उड़ाकर मकर संक्रांति का पर्व मनाया और लोक परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए इन्हें सहेजने का संदेश दिया ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-flew-kites-and-gave-a-message-to-save/article-139556"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/0254.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर पतंग उड़ाकर मकर संक्रांति का पर्व मनाया और लोक परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए इन्हें सहेजने का संदेश दिया ।</p>
<p>इस अवसर पर उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सूर्य के उत्तरायण होने पर मनाए जाने वाला यह पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है तथा यह हम सभी के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 15:16:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खड़गे और राहुल गांधी ने दी मकर संक्रांति की दी शुभकामनाएं, कहा- ये पर्व हमारी विविधता और प्रकृति से गहरे प्रेम के प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तथा पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने देशवासियों को मकर संक्रांति, पोंगल, सुग्गी हब्बा, माघी, भोगली बिहू, खिचड़ी, पौष, उत्तरायण और मकरविलक्कु पर्व की शुभकामनाएं देते हुए सबकी खुशहाली की कामना की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kharge-and-rahul-gandhi-wished-makar-sankranti-and-said/article-139547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(2)23.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तथा पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने देशवासियों को मकर संक्रांति, पोंगल, सुग्गी हब्बा, माघी, भोगली बिहू, खिचड़ी, पौष, उत्तरायण और मकरविलक्कु पर्व की शुभकामनाएं देते हुए सबकी खुशहाली की कामना की है। खड़गे ने सोशल मीडिया एक्स पर एक संदेश में कहा कि जीवंत फसल परंपराओं को एकजुट होकर मनाने के इस पर्व पर कामना है कि वातावरण कृतज्ञता, आनंद और एकता से भरा हो। इस पर्व पर हम सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। मकर संक्रांति, पोंगल, सुग्गी हब्बा, माघी, भोगली बिहू, खिचड़ी, पौष पर्व, उत्तरायण और मकरविलक्कु के उत्सव सभी के लिए असीम खुशियाँ, अच्छा स्वास्थ्य और स्थायी समृद्धि लेकर आएं।</p>
<p>गांधी ने कहा कि मकर संक्रांति, पोंगल, सुग्गी हब्बा, माघी, भोगली बिहू, खिचड़ी, पौष पर्व, उत्तरायण और मकरविलक्कु की शुभकामनाएं। ये फसल उत्सव नई शुरुआत, आशा, खुशियाँ लेकर आएं और आपके जीवन को आनंद और समृद्धि से भर दें। वाड्रा ने कहा कि भगवान सूर्य के उत्तरायण होने एवं नई फसलों के स्वागत के महापर्व मकर संक्रांति और माघ बिहू की हार्दिक शुभकामनाएं। ये सभी पर्व हमारी विविधता और प्रकृति से गहरे प्रेम के प्रतीक हैं, जो हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को और समृद्ध बनाते हैं। ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि ये त्यौहार समस्त देशवासियों के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का संचार करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 15:04:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिन में पतंगों का आसमां से संवाद, शाम को लालटेन उत्सव : राजस्थान पर्यटन विभाग के आयोजन में 14 जनवरी को लोक संस्कृति, पतंगबाज़ी और आतिशबाज़ी का अनूठा संगम</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और पर्यटन पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और सशक्त करने वाला काइट फेस्टिवल 2026 इस वर्ष भी अपने भव्य और आकर्षक स्वरूप में आयोजित किया जा रहा। पर्यटन आयुक्त रूकमणी रियाड़ के अनुसार इस अवसर पर भजनलाल शर्मा एवं दिया कुमारी भी कार्यक्रम में सहभागिता करेंगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/kites-communicate-with-the-sky-during-the-day-lantern-festival/article-139313"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(22).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और पर्यटन पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और सशक्त करने वाला काइट फेस्टिवल 2026 इस वर्ष भी अपने भव्य और आकर्षक स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है। पर्यटन आयुक्त रूकमणी रियाड़ के अनुसार इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी भी कार्यक्रम में सहभागिता करेंगी। उनकी उपस्थिति आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान करेगी और यह राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाएगी, जिसके तहत राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर, लोक परंपराओं और पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यटन आयुक्त ने कहा कि दो दशकों से भी अधिक समय से निरंतर आयोजित हो रहा यह उत्सव आज केवल एक पारंपरिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह राजस्थान के इवेंट-बेस्ड टूरिज़्म का प्रमुख और विश्वसनीय ब्रांड बन चुका है। विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार 14 जनवरी को आयोजित होने वाले इस उत्सव का एक दिवसीय कार्यक्रम सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक जलमहल की पाल, आमेर रोड, जयपुर पर आयोजित किया जाएगा। ऐतिहासिक जलमहल, शांत झील और खुले आसमान के बीच रंग-बिरंगी पतंगों की उड़ान पर्यटकों और शहरवासियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रचेगी।</p>
<p>कार्यक्रम के अंतर्गत लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, पतंगों की प्रदर्शनी, पतंग निर्माण का लाइव प्रदर्शन तथा फैंसी पतंग उड़ाने का विशेष डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किया जाएगा। पर्यटकों के आकर्षण के लिए पारंपरिक व्यंजनों का निःशुल्क वितरण, विदेशी सैलानियों के लिए निःशुल्क पतंगें तथा निःशुल्क ऊँटगाड़ी सवारी जैसी विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। शेखावत ने बताया की दिनभर के सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्सव के बाद शाम 6.30 बजे से आयोजन का दूसरा चरण प्रारंभ होगा। इस दौरान लालटेन उड़ाने का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, इसे लालटेन उत्सव का का नाम दिया गया है। इसके बाद हवामहल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में आतिशबाज़ी की जाएगी। गुलाबी शहर के आसमान में रोशनी और रंगों से सजी यह आतिशबाज़ी काइट फेस्टिवल का प्रमुख आकर्षण होगी, जो उत्सव को यादगार समापन प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि  काइट फेस्टिवल 2026 एक बार फिर यह संदेश देता है कि राजस्थान केवल देखने की जगह नहीं, बल्कि दिन से रात तक जीने और महसूस करने वाला अनुभव है जहां दिन में आसमान पतंगों से संवाद करता है और रात में ऐतिहासिक धरोहरें रोशनी में नहाकर उत्सव की साक्षी बनती हैं।</p>
<p>गौरतलब  है कि काइट फेस्टिवल वर्षों से शहरवासियों, देशी पर्यटकों और विदेशी सैलानियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहा है। हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक इस उत्सव के माध्यम से राजस्थान की जीवंत संस्कृति, लोक कला और आतिथ्य परंपरा का अनुभव करते हैं। यह आयोजन राजस्थान पर्यटन विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसे जिला प्रशासन जयपुर, जयपुर नगर निगम एवं पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का सहयोग प्राप्त है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 15:00:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मकर संक्राति के अवसर पर पतंगबाजी को लेकर जिलों को एडवायजरी जारी, पशु-पक्षियों की सुरक्षा के लिए सरकार के प्रयासों के साथ-साथ जनसहयोग भी आवश्यक </title>
                                    <description><![CDATA[चाइनीज मांझे के अवैध उपयोग से पशु-पक्षियों को हो रही चोटों पर चिंता जताते हुए शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने जिलों को सख्त एडवाइजरी जारी की। मकर संक्रांति पर प्रतिबंधित मांझे के खिलाफ प्रवर्तन, जब्ती, दंडात्मक कार्रवाई और जनजागरूकता के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही घायल पक्षियों के इलाज के लिए विशेष चिकित्सा शिविर और हेल्पलाइन शुरू करने को कहा गया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/advisory-issued-to-districts-regarding-kite-flying-on-the-occasion/article-136831"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px35.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शासन सचिव, पशुपालन, गोपालन एवं मत्स्य डॉ. समित शर्मा ने चाइनीज मांझे (नायलॉन/सिंथेटिक पतंग डोर) के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद इसके अवैध उपयोग से पशु-पक्षियों को हो रही गंभीर चोटों एवं मृत्यु की घटनाओं को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए प्रदेश के जिलों को एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति के पर्व पर पतंगबाजी में नायलॉन/सिंथेटिक सामग्री से निर्मित ’चायनीज मांझे’ और कांच/लोहे के चूर्ण से लेपित धागों के प्रयोग से आमजन और मूक पक्षियों के जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न होता है।</p>
<p>एडवाइजरी में डॉ शर्मा ने कहा है कि एनजीटी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिबंधात्मक आदेशों की पालना में इस वर्ष एक प्रभावी रणनीति के तहत सख्त प्रवर्तन, दंडात्मक कार्यवाही, जनजागरूकता और पक्षी चिकित्सा एवं बचाव की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सख्त प्रवर्तन के तहत पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन के माध्यम से सघन तलाशी अभियान चलाकर प्रतिबंधित मांझे के स्टॉक को तत्काल जब्त कर इसके निर्माण, भंडारण और विक्रय पर पूर्ण रोक की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित की जाए।</p>
<p>शर्मा ने कहा कि जन जागरूकता अभियान चलाकर स्कूलों/कॉलेजों में विद्यार्थियों को प्रतिबंधित मांझा उपयोग न करने की शपथ दिलाने तथा सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से आमजन को केवल सूती धागे के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए तथा व्यापार संघों के साथ बैठक कर उन्हें इसके विक्रय के बहिष्कार हेतु प्रोत्साहित किया जाए।</p>
<p>डॉ शर्मा ने कहा कि सभी जिलों में घायल पक्षियों के त्वरित उपचार हेतु पशुपालन विभाग एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के समन्वय से विशेष पक्षी चिकित्सा शिविर’ आयोजित किए जाएं। हेल्पलाइन नंबर जारी कर उसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी सुनिश्चित किया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 18:23:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराजा रामसिंह पतंगबाजी करते समय तुक्कल उड़ाया करते थे, कटने पर वापस लाने के लिए दौड़ाए जाते थे घुड़सवार</title>
                                    <description><![CDATA[चीन में शुरू हुआ पतंगबाजी का दौर वक्त के साथ जापान, कोरिया, थाईलैंड, बर्मा, भारत, अरब, उत्तर अफ्रीका तक हुआ। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-craze-for-kites-was-so-great-that-one-of/article-100659"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(5)11.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर में पतंगबाजी की शुरुआत महाराजा रामसिंह द्वितीय 1835-1880 ने की थी, जिन्होंने लखनऊ से जयपुर लाई गई तुक्कल उड़ाई थी। तब यह पतंग कपड़े से विशेष तरीके से बनाई जाती थी। महाराजा रामसिंह द्वितीय पतंगबाजी करते समय तुक्कल उड़ाया करते थे तो उसके दूर तक जाने के बाद कटने या टूटने पर वापस लाने के लिए पहले से तैयार घुड़सवारों को दौड़ाया जाता था। महाराजा रामसिंह की पतंगों को लेकर इस कदर दीवानगी थी कि उन्होंने जयपुर रियासत में 36 कारखानों में से एक और कारखाना पतंगखाना भी जोड़ दिया था। आज भी उनकी पतंगें, तुक्कल और चरखियां जयपुर के सिटी पैलेस म्यूजियम में सुरक्षित हैं, जो मकर संक्रान्ति पर यहां आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। जयपुर की पतंगबाजी दुनिया भर के आकर्षण का विषय है। आज भी उनकी पतंगें, तुक्कल और चरखियां जयपुर के सिटी पैलेस म्यूजियम में सुरक्षित हैं, जो मकर संक्रान्ति पर यहां आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं।</p>
<p>मकर संक्रांति गुलाबी नगरी का पर्याय बन कर दुनियाभर में मशहूर है। पतंगों का यह पर्व जयपुर की पहचान बन गया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि सबसे पहले जयपुर में पतंग किसने उड़ाई और यह सिलसिला कैसे चल निकला। दरअसल पतंगबाजी लखनऊ की प्रसिद्ध रवायत थी। इसलिए जब पतंग उड़ती है तो उसकी डोर भले यहां किसी हाथ में हो, लेकिन पतंग की रूह में कोई लखनवी अंदाज भी सामने आता है।</p>
<p><strong>पतंग कपड़े की बनती थी, कटने या टूटने पर घुड़सवार दौड़ाए जाते थे</strong><br />सवाई रामसिंह द्वितीय लखनऊ गए तो उन्हें वहां की पतंगबाजी इतनी पसंद आई कि उन्होंने जयपुर रियासत में 36 कारखानों में एक और कारखाना पतंगखाना जोड़ दिया था। शुरू में यहां तितली के आकार की विशाल पतंगें बनती थीं, जिन्हें तुक्कल कहा जाता था। लखनऊ से कुछ पतंग बनाने वाले और डोर सूतने वाले महाराजा रामसिंह के जमाने से बराबर यहां आते रहते थे। तब विशाल चरखियां और आदमकद के तुक्कल उड़ाए जाते थे। महाराजा रामसिंह ने पतंगबाजों और पतंगकारों को अपने राज में आश्रय दिया। तब जयपुर के कई मोहल्लों में पतंग बनाने का काम शुरू हुआ। गुलाबी नगरी की पतंगबाजी देश और दुनिया में अलग ही मुकाम रखती है। विदेशी पर्यटक भारत घूमने का कार्यक्रम बनाते समय यह भी ध्यान रखते हैं कि भारत भ्रमण के दौरान 14 जनवरी भी हो ताकि वे जयपुर में पतंगबाजी का लुत्फ उठा सकें। दरअसल, जयपुर की पतंगबाजी करीब 150 साल से अधिक पुरानी है।</p>
<p><strong>जलमहल और लालडूंगरी पर होती थी पतंगबाजी</strong><br />आजादी से पहले तक आमेर रोड स्थित जलमहल, लालडूंगरी के मैदान और चौगान स्टेडियम में पतंगबाजी के मुकाबले होते थे। कई राज्यों से पतंगबाज इसमें हिस्सा लेते थे। महाकवि बिहारी और सवाई जयसिंह के कवि बखतराम ने भी आमेर में पतंग उड़ाने का वर्णन किया है। </p>
<p><strong>दुनिया में कहां से आगाज हुआ पतंगबाजी का</strong><br />माना जाता है कि दुनिया में पतंगबाजी की शुरूआत सबसे पहले चीन में हुई और चीन के दार्शनिक दुआंग थेग ने सबसे पहले पतंग बनाकर उड़ाई थी। चीन में रेशम के कपड़े से पतंग बनाई जाती थी और उसमें रेशम का ही धागा उपयोग में लिया जाता था। पतले मजबूत बांस के सहारे पतंग बनती थी। चीन में शुरू हुआ पतंगबाजी का दौर वक्त के साथ जापान, कोरिया, थाईलैंड, बर्मा, भारत, अरब, उत्तर अफ्रीका तक हुआ। </p>
<p>जयपुर में पतंगबाजी की शुरुआत महाराजा रामसिंह द्वितीय के शासनकाल में शुरू हुई थी, किस सन् से हुई, इसका कोई प्रामाणिक दस्तावेज नहीं हैं। लेकिन बाद में उनके कार्यकाल के साथ ही पतंगबाजी धीरे-धीरे विस्तार पाती रही।’<br />-डॉ.जयन्ती लाल खण्डेलवाल, इतिहासकार, जयपुर </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jan 2025 09:18:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>19 साल बाद पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र का दुर्लभ संयोग में कल मनेगी मकर संक्रांति</title>
                                    <description><![CDATA[14 जनवरी को प्रात 10:17 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र और इसके पश्चात पूरे दिन पुष्य नक्षत्र रहेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/after-19-years-makar-sankranti-will-be-celebrated-tomorrow-in/article-100558"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(14)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। इस बार मकर संक्रांति पर 19 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब भगवान सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने के समय पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र का युग्म संयोग बन रहा है। सूर्य इस दिन धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसलिए मकर संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य देव 14 जनवरी को अपने पुत्र शनि की स्वामित्व वाली मकर राशि में आ रहे हैं। इस दिन ही सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में आ जाते हैं। उत्तरायण को देवता का दिन कहा जाता है। मकर संक्रांति के साथ खरमास समाप्त हो जाता है और शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। इस दिन तिल और गुड़ का सेवन खासतौर पर किया जाता है। इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। </p>
<p><strong>पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र का संयोग</strong><br />इस बार पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र के युग्म संयोग में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। 14 जनवरी को प्रात 10:17 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र और इसके पश्चात पूरे दिन पुष्य नक्षत्र रहेगा। </p>
<p><strong>स्नान, दान के लिए शुभ मुहूर्त</strong><br />मकर संक्रांति का पुण्यकाल 14 जनवरी को सुबह 9.3 मिनट से शुरू होगा जबकि समाप्त शाम 5.46 मिनट पर होगा। महापुण्यकाल 14 जनवरी को सुबह 9.3 मिनट से सुबह 10.4 मिनट तक रहेगा। ये दोनों ही समय स्नान और दान के लिए शुभ हैं। </p>
<p><strong>कुंडली दोष दूर करने के लिए उपाय </strong><br />मकर संक्रांति के दिन पानी में काली तिल और गंगाजल मिला कर स्नान करना चाहिए। इससे सूर्य की कृपा होती है और कुंडली के ग्रह दोष दूर होते हैं। ऐसा करने से सूर्य और शनि दोनों की कृपा मिलती है क्योंकि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इस बार पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र के युग्म संयोग में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। 14 जनवरी को प्रात 10:17 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र और इसके पश्चात पूरे दिन पुष्य नक्षत्र रहेगा। मकर संक्रांति का पुण्यकाल 14 जनवरी को सुबह 9.3 मिनट से शुरू होगा जबकि समाप्त शाम 5.46 मिनट पर होगा।      <br />-डॉ. अनीष व्यास, भविष्यवक्ता एवं कुण्डली विश्लेषक, जोधपुर </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 12:55:13 +0530</pubDate>
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                <title>पतंग बाजार सजा, पुष्पा-2 की थीम का आसमान में दिखेगा क्रेज</title>
                                    <description><![CDATA[रंग बिरगी झालर, स्पाइडरमैन व कार्टून वाली पतंगों की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kite-market-decorated--craze-for-pushpa-2-theme-will-be-seen-in-the-sky/article-97604"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer30.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दिसंबर का प्रथम पखवाड़ा शुरू होते ही शहर में मकर संक्रांति पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इन दिनों बाजार में रंग बिरंगी पतंगों का बाजार सजने लगा है। इस बार पुष्पा -2 झुकेगा नहीं वाली पतंगे बाजार में डिमांड में है। इसके अलावा छोटा भीम, मोटू पतलू और डोरेमोन पतंगे बच्चों को लुभाने आ गई है। इस बार डोरेमोन व छोटा भीम पुष्पा -2 से मुकाबला करेंगी। इसके अलावा इस बार रंग बिरगी झालर वाली पतंगों के साथ कई नए कार्टून कैरेक्टर और नववर्ष 2025 के स्वागत की पतंगें बाजार में आई है। शहर के गुमानपुरा, रामपुरा, चौथमाता बाजार में पतंग बाजार सजने लगे हैं। आसमान में शाम के समय अब पतंगे दिखाई देनी शुरू हो गई हैं।  </p>
<p><strong>5 रुपए से लेकर 50 रुपए तक की पतंगें उपलब्ध</strong><br /> इस बार बाजार में कई तरह की नई पतंगे आई है। पतंग विक्रेता मनीष जैन ने बताया कि  दो फीट की पतंग 50 रुपए में बिक रही है। इसके अलावा कार्टून केरेक्टर छोटा भीम, स्पाइडरमैन, बाहुबली, डोरेमोन, जादू वाली पतंगे बाजार में मौजूद है। बाजार में मांझा 10 रुपए से लेकर 500 रुपए तक मौजूद है। इस बार पतंगों में मुख्य आकर्षण राम मंदिर, छोटू पतलू, एग्री बर्ड, तिरंगा, घर तिरंगा पतंग भी आई हुए है। तीन रुपए से लेकर 50 रुपए तक पतंगे बाजार में उपलब्ध है। पतंगबाजी सुबह 6 बजे से 8 बजे तक और शाम को 5 से 7 बजे तक नहीं उड़ाएं। इन दोनों समय में पक्षियों का आसमान में विचरण समय होता है। </p>
<p><strong>प्रिंटेड पतंगों का भी क्रेज</strong><br />बच्चों में कार्टून किरदार वाले पतंगों की खूब मांग है। पतंगों पर बेन टेन, बार्बी, छोटा भीम, स्पाइडर मैन, शिवा, कृष्णा कार्टून के चित्र बने हुए हैं। बाजार में  जयपुर, रामपुर की प्रिंटेड पतंगों का क्रेज सबसे अधिक है। पिछली बार के मुकाबले दाम में बहुत अंतर नहीं है। पांच रुपए से लेकर 50 रुपए तक की पतंगे बाजार में हैं।  </p>
<p><strong>बरेली का मांझा की  डिमांड ज्यादा</strong><br />पंतग विक्रेता मनीष जैन ने बताया कि इस बार बाजार में बरेली का मांझा ज्यादा बिक रहा है।  बरेली का मांझा 250 रुपए से लेकर 500 रुपए तक बिक रहा है। वहीं इस बार कई फैन्सी चरखी आई है। इसके साथ  तिरंगा यात्रा वाली पतंग, स्वच्छता के संदेश वाली पतंगे ज्यादा आई है। </p>
<p><strong>नायलोन और चाइनीज मांझा रोज चार से पांच पक्षियों को कर रहा घायल</strong><br />इस बार बाजार में चाइनीज मांझा धड़ल्ले से बिक रहा है।  जिसके कारण रोज चार से पक्षी घायल हो रहे है। दुकानदारों के पास स्पेशल मांग पर ये नायलोन व चाइनीज माझा उपलब्ध  रहा है। लेकिन इस बार दुकानदार धातु निर्मित मांझे की बिक्री लेकर सावचेत नजर आ रहे हैं। स्वयंसेवी संस्थाओं ने लोगों से अपील की है कि पतंगबाजी सुबह 6 बजे से 8 बजे तक और शाम को 5 से 7 बजे तक नहीं उड़ाएं। इन दोनों समय में पक्षियों का आसमान में विचरण समय होता है। </p>
<p><strong>एक साल में 1200 से ज्यादा पक्षी हो चुके घायल</strong><br />मनोज आदिनाथ ने बताया कि रोज तीन चार पक्षी रोज घायल होकर आ रहे है। पूरे साल घायल पक्षी आ रहे है। पिछले साल मकर संक्राति के दौरान 170 पक्षी घायल हुए थे। पूरे साल भर में 1200 से अधिक पक्षी घायल हो चुके है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मकर संक्रांति पर पर्व पक्षी घायल होकर ज्यादा आते है। वैसे तो पूरे साल ही रोज तीन चार पक्षी घायल होकर आ  रहे है। पतंगबाजी के दौरान पक्षी ज्यादा घायल होते है। उनके विचरण के समय ध्यान रखा जाए तो इनको घायल होने से बचाया जा सकता है।<br /><strong>- डॉ. अखिलेश पांडेय, उपनिदेशक पशु चिकित्सालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Dec 2024 17:28:17 +0530</pubDate>
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