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                <title>theater drama - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>theater drama RSS Feed</description>
                
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                <title>गैरजिम्मेदारी और अव्यवस्था पर कटाक्ष करता नाटक जामुन का पेड़</title>
                                    <description><![CDATA[यह नाटक दर्शकों को गहरे विचार करने पर मजबूर कर देता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/drama-berries-trees-on-irresponsibility-and-chaos/article-108009"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(3)32.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर कला केंद्र जयपुर की ओर से जयपुर नाट्य समारोह के अंतर्गत नाटक जामुन का पेड़ का मंचन हुआ। कृष्ण चंदर द्वारा लिखित यह नाटक गुरमिंदर सिंह पुरी रोमी के निर्देशन में हुआ, जिसका नाट्य रूपांतरण नीरज गोस्वामी ने किया है। यह कहानी प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के चलते होने वाले संघर्षों की है जिसके बोझ तले एक निर्दोष व्यक्ति ने अपनी जान गंवा दी। मंच पर कहानी की शुरुआत सचिवालय के लॉन में गिरे जामुन के पेड़ के ईर्द गिर्द खड़ी भीड़ के साथ होती है जिसका दुख वहां खड़े बहुत से सरकारी कर्मचारी मना रहे हैं। वह याद करते हैं कि इसके जामुन कितने मीठे हैं और यह पेड़ कितना छायादार। तभी एक व्यक्ति की नजर उस पेड़ के नीचे दबे शख्स पर पड़ती है। जिंदा हो? मर गया शायद? पूछने पर जवाब आता है कि मैं जिंदा हूं मुझे बाहर निकालो।</p>
<p>मालूम पड़ता है कि पेड़ के नीचे दबा यह शख्स शायर है। दरख्त को काटकर शायर को बचाया जा सकता है लेकिन यह फैंसला सरकारी अनुमति का मोहताज है। ऐसे में यह बात एक महकमे से दूसरे महकमे तक पहुंचती है जिसमें फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट सभी शामिल होते गए लेकिन कोई फैंसला नहीं हो पाता। नाटक के आखिर में दर्शाए दृश्य ने लोगों को अवाक कर दिया, सुनते हो? आज तुम्हारी फाइल मुकम्मल हो गई! सुपरिटेंडेंट ने शायर के बाजू को हिलाकर कहा। मगर शायर का हाथ सर्द था। आंखों की पुतलियां बेजान थीं और चींटियों की एक लंबी कतार उसके मुंह में जा रही थी। नाटक की प्रस्तुति में हास्य और व्यंग्य के माध्यम से गंभीर सामाजिक मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया गया। सरकारी प्रक्रियाओं की जटिलता और प्रशासनिक लापरवाही पर कटाक्ष करते हुए, यह नाटक दर्शकों को गहरे विचार करने पर मजबूर कर देता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Mar 2025 10:03:31 +0530</pubDate>
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                <title>सुसाइड समस्या का हल नहीं, खुद करनी होगी अपनी मदद</title>
                                    <description><![CDATA[कोई राजनीतिक प्रतिनिधि है तो कोई धर्मगुरु तो कोई सामाजिक संगठन का व्यक्ति सब सैम की मौत को भुनाने की सोचते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/you-will-have-to-help-yourself-not-the-solution-to/article-101337"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/555461.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर कला केंद्र की पाक्षिक नाट्य योजना के अंतर्गत हास्य नाटक द सुसाइड खेला गया। युवा नाट्य निर्देशक सैफ अंसारी के निर्देशन में होने वाले नाटक की कहानी निकोलाई एर्डमन ने लिखी है जिसका नाट्य रुपांतरण मैड वन थिएटर ट्रस्ट ने किया है। यह नाटक ऐसे महत्वाकांक्षी युवा की कहानी पर आधारित है जो अपने सपने पूरा करना चाहता है, हताशा मिलने पर वह आत्महत्या का विचार करता है लेकिन जब लोग उसकी मौत का भी फायदा उठाने की सोचते है तो वह संतोष पूर्ण जीवन की ओर बढ़ता है। नाटक में हास्यात्मक व्यंग के जरिए लोगों के स्वार्थपूर्ण रवैये पर कटाक्ष किया गया है। जयपुर में पहली बार हुए इस नाटक का मुख्य पात्र सैम जो अपनी पत्नी और सास के साथ रहता है। दोनों ही महिलाएं कामकाजी है, अपने भविष्य और काम को लेकर सैम अभी भी चिंतित है। इसी बीच म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट टुबा बजाने की इच्छा उसके मन में प्रकट होती है। इस काम में भी असफल होना उसे इस कदर अखरता है कि वह सुसाइड करने की सोचता है। पत्नी और सास के ताने आग में घी का काम करते हैं। मुझे सिर्फ  सत्ता नहीं सताती, तुम भी सताती हो, मेरी मौत का तुम्हें बड़ा अफसोस होगा, मेरी कब्र की एक झलक पाने को तुम्हें लंबी-लंबी कतारों से गुजरना होगा। सैम सोचता है कि सभी समस्याओं का अंत अब सुसाइड ही है। सैम का पड़ोसी एलेक्स इस बात का फायदा उठाता है और अलग-अलग वर्ग के लोगों से सैम की जान का सौदा कर बैठता है।</p>
<p>कोई राजनीतिक प्रतिनिधि है तो कोई धर्मगुरु तो कोई सामाजिक संगठन का व्यक्ति सब सैम की मौत को भुनाने की सोचते हैं। इसके बदले में एलेक्स सभी से धन भी ले लेता है। यह सभी लोग सैम को अपने लिए जान देने को उकसाते है जिससे वह उसकी मौत का खुद के लिए महिमा मंडन कर सके। सैम स्थिति को भांपते हुए मरने का नाटक करता है। सभी लोग सैम की आलोचना करते हैं और अपनी योजना पर पानी फिरने से माथा पीटते हैं। सभी की सच्चाई सैम के सामने आती है तो उसे जिंदगी का महत्व पता लगता है, सुसाइड नहीं मुझे खुद ही करनी होगी अपनी मदद इसी भावना के साथ वह सामान्य जीवन की ओर अग्रसर होता है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jan 2025 09:55:48 +0530</pubDate>
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                <title>7वें राजरंगम में नाटक ‘काल पुरुष: क्रांतिकारी वीर सावरकर’ का मंचन </title>
                                    <description><![CDATA[प्रकाश परिकल्पना पवन शर्मा, चित्र निर्माण संयोजक संदीप महेन्द्र सहित अन्य भी नाटक में अपना योगदान दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-play-%E2%80%98kaal-purush-krantikari-veer-savarkar%E2%80%99-staged-in-the/article-99442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(4)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को सलाम करने के साथ 7वें राजरंगम् (राजस्थान रंग महोत्सव) का गुरुवार को आगाज हुआ। संस्कृति मंत्रालय और एक्टर्स थिएटर एट राजस्थान की ओर से 5 दिवसीय महोत्सव का आयोजन जवाहर कला केन्द्र में किया जा रहा है। पहले दिन महोत्सव के निर्देशक चन्द्रदीप हाडा के निर्देशन में नाटक ‘कालपुरुष : क्रांतिकारी वीर सावरकर’ का मंचन हुआ। जिसकी कहानी जयवर्धन ने लिखी है। नाटक में वीर सावरकर की जीवन गाथा को मंच पर साकार किया गया। शाम 6.30 बजे योगेन्द्र सिंह के निर्देशन में ‘एनिमी ऑफ  द पीपल’ नाटक खेला जाएगा।</p>
<p>नाटक में निर्देशक डॉ.चन्द्रदीप हाडा ने वीर सावरकर की भूमिका निभाई। अन्य कलाकारों में मोनिका भार्गव सिंह, दिलीप सिंह, देवांश गोधा, सुरूची शर्मा, देवेंद्र सिंह शेखावत, प्रकाश चन्द्र सैनी, संजय व्यास, नितेश कुमार जोसफ सहित अन्य शामिल रहे। प्रकाश परिकल्पना पवन शर्मा, चित्र निर्माण संयोजक संदीप महेन्द्र सहित अन्य भी नाटक में अपना योगदान दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jan 2025 09:27:45 +0530</pubDate>
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                <title>पार्वती को दिया वचन नहीं निभा सका नरेन, दहेज के लोभियों से हार गया </title>
                                    <description><![CDATA[वह पार्वती को दिए वादे को तोड़ने के लिए मजबूर हो जाता है ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/naren-could-not-keep-his-promise-to-parvati-and-lost/article-98054"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(14)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दो दिवसीय नाट्य फेस्टिवल के तहत नाटक ‘नरेन अकेला’ का मंचन रविन्द्र मंच पर हुआ। लेखक नरेन्द्र बबल द्वारा लिखित तथा महेश महावर द्वारा निर्देशित इस नाटक में मुख्य पात्र नरेन को समाज में फैली कुरीतियों से संघर्ष करते दिखाया गया। मुख्य पात्र नरेन मध्यम परिवार से होता है, जो अपने परिवार और समाज की परवाह किए बिना अंतरजातीय विवाह करता है। नरेन की पत्नी पार्वती विवाह से पहले ही नरेन से वायदा लेती है कि कभी भी रिश्वत नहीं लोगे और पूर्ण ईमानदारी से नौकरी करोगे। नरेन ऐसा ही करता है।</p>
<p>बिटिया को जन्म देने के कुछ समय बाद पार्वती की मृत्यु हो जाती है। नरेन जब अपनी बिटिया के लिए काबिल वर की तलाश में निकलता है तो उसे दहेज के लोभी ही मिलते हैं। अपनी तनख्वाह से उनकी मांग पूरी नहीं कर पाता है। वह पार्वती को दिए वादे को तोड़ने के लिए मजबूर हो जाता है ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Dec 2024 13:10:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नाटक ने राजस्थानी परंपराओं को खूबसूरती से प्रदर्शित किया</title>
                                    <description><![CDATA[नाटक ने आज के प्रगतिशील समाज में महिलाओं की स्थिति पर चिंतन करने के लिए प्रेरित किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-drama-beautifully-showcased-rajasthani-traditions/article-97748"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(9).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल द्वारा चल रहे नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन माई री मैं का से कहूं नाटक ने राजस्थान की जनता को अपनी अद्भुत प्रस्तुति और भव्य दृश्यों से मंत्रमुग्ध कर दिया। यह नाटक विजयदान देथा की कहानी पहेली पर आधारित रहा और इसका निर्देशन अजय कुमार ने किया। इस नाटक ने राजस्थानी परंपराओं को खूबसूरती से प्रदर्शित किया और दर्शकों को अपने प्रदर्शन और डिजाइन से मोहित किया।</p>
<p>नाटक ने आज के प्रगतिशील समाज में महिलाओं की स्थिति पर चिंतन करने के लिए प्रेरित किया। नाटक इस बात पर सवाल उठाता है कि विज्ञान और बुद्धि में प्रगति का दावा करने वाले समाज में भी, महिलाएं अपने स्वयं के चुनाव करने की स्वतंत्रता से वंचित क्यों हैं। जन्म से लेकर विवाह तक, उनके अधिकार माता-पिता के पास होते हैं और विवाह के बाद, उनके पति और बच्चों के पास। नाटक इन्हीं पहलुओं के ईद-गिर्द रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 10:48:05 +0530</pubDate>
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