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                <title>putins - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ट्रंप से मुलाकात से पहले पुतिन की जंगी तैयारी : दुनिया की सबसे शक्तिशाली मिसाइल का परीक्षण करेगा रूस</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन शांति वार्ता के लिए अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने वाले हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/putins-warship-preparation-before-meeting-trump-russia-will-test-the/article-123428"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer2.jpg" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन शांति वार्ता के लिए अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने वाले हैं। दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच यह मुलाकात 15 अगस्त को होने जा रही है। इस बीच ट्रंप ने मुलाकात से पहले रूस को लेकर ऐसे बयान दिए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तल्खियां बढ़ सकती हैं। ट्रंप ने रूस की अर्थव्यवस्था को संकट में बताया है और कहा है कि इसी कारण उन्हें पुतिन की ओर से मुलाकात के लिए फोन आया था। ऐसे में रूस ने भी अपनी सैन्य ताकत दिखाने की तैयारियों को शुरू कर दिया है। कई रिपोर्टों में बताया गया है कि रूस दुनिया की सबसे शक्तिशाली मिसाइलों में शुमार 9एम730 बुरेवेस्टनिक के नए परीक्षणों की तैयारी कर रहा है। यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाली क्रूज मिसाइल है।</p>
<p><strong>बुरेवेस्टनिक मिसाइल से रूस को कैसे मिलेगी बढ़त</strong><br />सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर 9एम730 बुरेवेस्टनिक का परीक्षण सफल होता है तो रूस दुनिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा, जिसके पास परमाणु शक्ति से चलने वाली और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम एक क्रूज मिसाइल होगी। इसकी रेंज असीमित होगी। ऐसे में यह पृथ्वी के किसी भी हिस्से में आसानी से हमला करने में सक्षम होगी। डिफेंस रोमानिया के अनुसार, ऐसे संकेत हैं कि रूस अपनी विवादास्पद परमाणु ऊर्जा चालित क्रूज मिसाइल 9एम730 बुरेवेस्टनिक (नाटो कोड: एसएससी-एक्स-9 स्काईफॉल) का आर्कटिक द्वीपसमूह नोवाया जेमल्या के पैनकोवो रेंज से एक नया परीक्षण करने वाला है।</p>
<p><strong>रूस ने जारी किया है नोटम </strong><br />हालांकि मास्को ने इस मिसाइल के परीक्षण को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन कई संकेत इस ओर इशारा करते हैं। दरअसल, रूस ने 7 अगस्त से 12 अगस्त तक नोवाया जेमल्या के 40,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करते हुए एक नोटम (नोटिस टू एयरमैन) चेतावनी जारी की है। इसके अलावा, कम से कम चार रूसी जहाज, जो पहले पैनकोवो मिसाइल टेस्टिंग रेंज के पास लंगर डाले हुए थे, उन्हें पूर्वी बैरेंट्स सागर में निगरानी चौकियों पर तैनात किया गया है। यह किसी बड़े मिसाइल परीक्षण के दौरान लिया जाने वाला एक मानक सुरक्षा उपाय है।</p>
<p><strong>नोवाया जेमल्या में टेस्ट की तैयारियां </strong><br />इसके अलावा, दो रोसाटॉम विमान वर्तमान में रोगचेवो हवाई अड्डे पर तैनात हैं। यह भी पता चला है कि रूस अपने मालवाहक जहाजों से नोवाया जेमल्या में कई बार रुककर रसद संचालन कर रहा है। नॉर्वे के द बैरेंट्स आॅब्जर्वर की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी आर्कटिक में नोवाया जेमल्या स्थित पैनकोवो टेस्टिंग रेंग में हफ्तों से तैयारियां चल रही हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि रूस आखिर क्या टेस्ट करने जा रहा है, लेकिन तैयारियों को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि यह 9एम730 बुरेवेस्टनिक मिसाइल हो सकती है। रूस के रोसाटॉम ने 1950 के दशक के उत्तरार्ध से ही परमाणु हथियारों और संबंधित तकनीक के परीक्षण के लिए नोवाया जेमल्या द्वीपसमूह को चुना है।</p>
<p><strong>9एम730 बुरेवेस्टनिक मिसाइल की ताकत</strong><br />बुरेवेस्टनिक अपनी तरह की एक क्रांतिकारी मिसाइल है। इसकी खास बात परमाणु शक्ति से उड़ान भरना और परमाणु हमला करने की क्षमता है। इससे मिसाइल को असीमित रेंज मिलती है और दुनिया के बेहतरीन एयर डिफेंस को चकमा देने की क्षमता प्राप्त होती है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे अजेय हथियार बताया है। यह मिसाइल अपने रास्ते को जब चाहे तब बदल सकती है। ऐसे में दुश्मन के एयर डिफेंस के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल हो सकता है। अमेरिकी वायु सेना के राष्ट्रीय वायु एवं अंतरिक्ष खुफिया केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह मिसाइल रूसी सेना में शामिल होती है तो इससे पुतिन को एक अनूठी ताकत मिल जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Aug 2025 11:24:06 +0530</pubDate>
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                <title>सीरिया से बोरिया-बिस्तर समेट रही रूसी सेना, अब लीबिया पर पुतिन की निगाह, बनाएंगे नया मिलिट्री बेस</title>
                                    <description><![CDATA[सीरिया से बशर अल-असद की सत्ता के पतन के बाद रूस ने अपने सैन्य ठिकाने को समेटना शुरू कर दिया है। रूसी सैन्य टुकड़ियां अब अफ्रीका के एक दूसरे देश में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-army-withdrawing-from-syria-now-putins-eyes-on-libya/article-97976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(5)3.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। सीरिया से बशर अल-असद की सत्ता के पतन के बाद रूस ने अपने सैन्य ठिकाने को समेटना शुरू कर दिया है। रूसी सैन्य टुकड़ियां अब अफ्रीका के एक दूसरे देश में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। जिस देश में रूसी सैन्य उपस्थिति में बढ़ोत्तरी देखी गई है, उसका नाम लीबिया है। लीबिया अफ्रीका का एक देश है, जहां पहले मुअम्मर गद्दाफी का शासन था। गद्दाफी से रूस के संबंध काफी मजबूत थे, लेकिन उनके तख्तापलट और हत्या के बाद हालात एकदम बदल गए। हालांकि, इसके बावजूद रूस ने लीबिया में अपना सैन्य अड्डा बनाए रखा। भले ही रूस लीबिया में एक बड़ा सैन्य अड्डा बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इस बात का कोई संकेत नहीं है कि वह सीरिया में अपने दो सैन्य ठिकानों को खाली कर रहा है।</p>
<p><strong>सीरिया में रूसी सैन्य अड्डे से पुतिन को था फायदा</strong></p>
<p>बशर अल-असद ने सीरियाई गृहयुद्ध में सहायता के बदले रूस को मुफ्त में 49 साल की लीज पर दो सैन्य अड्डों को दिया था। दशकों से सीरिया पश्चिम एशिया और अफ्रीका में रूस का कमांड सेंटर रहा है। सीरिया के पश्चिम में टार्टस और लताकिया में अपने दो सैन्य ठिकानों के माध्यम से रूस ने न केवल सीरियाई गृहयुद्ध में बशर अल-असद का समर्थन किया, बल्कि इस क्षेत्र में अपनी खुद की सैन्य उपस्थिति बनाए रखी। टार्टस नौसैनिक अड्डे ने नाटो के दक्षिणी किनारे पर रूस की सैन्य मौजूदगी को बनाए रखा और काला सागर और भूमध्य सागर के माध्यम से पश्चिम एशिया और यूक्रेन के मोर्चे के बीच एक संबंध भी स्थापित किया। चूंकि रूस ने सीरिया से अपने सैनिकों और सैन्य उपकरणों को वापस लेना शुरू कर दिया है, ऐसे संकेत हैं कि रूस इस क्षेत्र में एक नए केंद्र के रूप में लीबिया की ओर देख रहा है। रूस सीरिया में असद के शासन के दौरान जो पकड़ रखता था, उसे फिर से नहीं बना सकता। हालांकि अगर वह लीबिया में बंदरगाह या एक बड़ा सैन्य अड्डा हासिल कर लेता है, तो वह नुकसान की भरपाई कर सकता है।</p>
<p><strong>असद की हार रूस के लिए बड़ा झटका</strong><br />सीरिया में भले ही असद की हार हुई हो, लेकिन नुकसान मूल रूप से रूस का हुआ है। इसका कारण यह है कि 2015 में शुरू हुए सीरियाई गृहयुद्ध में रूसी सैन्य हस्तक्षेप ने असद के शासन को सहारा दिया था। यूक्रेन में ध्यान भटकने के कारण असद की स्थिति को मजबूत करने की रूस की क्षमता कम हो गई। सीरिया का दूसरा प्रमुख सहयोगी ईरान भी मदद करने में असमर्थ था। ऐसे में हयात तहरीर अल-शाम के नेतृत्व वाली विपक्षी ताकतों ने इस अवसर का लाभ उठाया। डिफेंस वेबसाइट द वॉरजोन के अनुसार, अब इस बात के सबूत बढ़ रहे हैं कि लीबिया, सीरिया से रूसी सैन्य वापसी का समर्थन कर रहा है। </p>
<p>ळहे ने बताया कि रूस ने टार्टस में नौसैनिक अड्डे से कम से कम कुछ रूसी नौसैनिक संपत्ति को लीबिया में स्थानांतरित कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसी खबरों के बीच हुआ है कि रूस लीबियाई राष्ट्रीय सेना के प्रमुख खलीफा हफ्तार को लीबिया के शहर बेंगाजी में रूस को एक बंदरगाह सौंपने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p><strong>सीरिया में नुकसान की भरपाई करेगा रूस</strong><br />सैन्य विशेषज्ञ थॉमस न्यूडिक का मानना है कि रूस के लिए ऐसा करना उचित होगा क्योंकि यह टार्टस में बंदरगाह के नुकसान की भरपाई करेगा। यदि रूस बंदरगाह हासिल करने में सफल हो जाता है, तो लीबिया रूसी सेना के लिए भूमध्य सागर तक पहुंच प्रदान करने और अफ्रीका में अन्य रूसी हितों के लिए एक ट्रांसशिपमेंट पॉइंट के रूप में एक वैकल्पिक केंद्र बन सकता है। कम से कम एक सीरियाई कैंडिड कार्गो विमान ने सीरिया और लीबिया और अफ्रीका के अन्य स्थानों के बीच बार-बार उड़ान भरी है, जिससे पता चलता है कि रूस इन स्थानों पर उपकरण और कर्मियों को ट्रांसफर कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 12:00:09 +0530</pubDate>
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