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                <title>medical news - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>medical news RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चिकित्सा शिक्षा विभाग का अहम निर्णय : घर पर फीस लेकर निजी तौर पर मरीजों को देखने पर प्रतिबंध, आदेश का उद्देश्य जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के अस्पतालों में व्यवस्थागत सुधार के लिए एक अहम निर्णय लिया है। उच्च स्तरीय समिति की मंजूरी के बाद विभाग ने आदेश जारी करते हुए चिकित्सा शिक्षा के मेडिकल कॉलेजों और अटैच अस्पतालों के प्रशासनिक पदों पर कार्यरत डॉक्टरों के लिए नॉन प्रैक्टिस अलाउंस को अनिवार्य कर दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/important-decision-of-the-medical-education-department-ban-on-seeing/article-132277"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/doctor.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के अस्पतालों में व्यवस्थागत सुधार के लिए एक अहम निर्णय लिया है। उच्च स्तरीय समिति की मंजूरी के बाद विभाग ने आदेश जारी करते हुए चिकित्सा शिक्षा के मेडिकल कॉलेजों और अटैच अस्पतालों के प्रशासनिक पदों पर कार्यरत डॉक्टरों के लिए नॉन प्रैक्टिस अलाउंस को अनिवार्य कर दिया है। नए आदेश के अनुसार, जो भी डॉक्टर प्रशासनिक पदों जैसे प्राचार्य, अधीक्षक, या अन्य उच्च प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर नियुक्त होंगे, वे अब घर पर फीस लेकर निजी तौर पर मरीजों को नहीं देख सकेंगे। उन्हें पूर्णतः प्रशासनिक कार्यों में ही संलग्न रहना होगा।</p>
<p>इस आदेश का उद्देश्य अस्पतालों की कार्यप्रणाली को अधिक सुचारु बनाना और जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। पहले कई बार यह शिकायतें सामने आई थीं कि उच्च पदों पर तैनात डॉक्टर प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ निजी रूप से मरीज देखने का काम भी करते थे, जिससे अस्पताल प्रबंधन पर नकारात्मक असर पड़ता था। विभाग ने इसके साथ ही सभी मेडिकल कॉलेजों मेंअतिरिक्त अधीक्षक  पदों की संख्या भी निर्धारित की है, ताकि प्रशासनिक जिम्मेदारियां संतुलित ढंग से बंटी रहें और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों। यह कदम राज्य में चिकित्सा शिक्षा और अस्पताल प्रबंधन में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Nov 2025 17:24:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध सभी अस्पतालों में जल्द लागू होगा क्यू मैनेजमेंट सिस्टम</title>
                                    <description><![CDATA[पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कांवटिया एवं जयपुरिया अस्पताल में सफलतापूर्वक लागू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/q-management-system-will-be-implemented-soon-in-all-hospitals/article-116717"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(3)14.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चिकित्सा शिक्षा सचिव अम्बरीष कुमार ने शनिवार को जयपुरिया एवं कांवटिया अस्पताल पहुंचकर क्यू मैनेजमेंट सिस्टम सहित अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल परिसर में ओपीडी काउंटर पर पहुंचकर क्यू मैनेजमेंट सिस्टम से होने वाली रोगी पंजीकरण की प्रक्रिया को देखा। साथ ही चिकित्सकों एवं रोगियों से बातचीत कर नई व्यवस्था के बारे में फीडबैक लिया।</p>
<p><strong>चिकित्सकों को भी परामर्श में सुगमता</strong><br />चिकित्सकों ने बताया कि क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू होने से उन्हें भी उपचार एवं परामर्श में काफी सुगमता हुई है। अब रूम के बाहर भीड़ एकत्र नहीं होती, इससे एकाग्रता के साथ रोगी को देखना आसान होता है। साथ ही रोगियों की बारी एवं उपचार प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता बनी रहती है। इस तकनीकी पहल से रोगियों का डाटा भी संधारित करने में आसानी होती है।</p>
<p><strong>जल्द एसएमएस में भी होगा लागू</strong><br />चिकित्सा शिक्षा सचिव ने कहा कि जयपुरिया एवं कांवटिया अस्पताल से इस तकनीकी नवाचार को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया गया है। दोनों अस्पतालों में सफलतापूर्वक लागू होने के बाद अब मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सभी अस्पतालों में क्यू मैनेजमेंट सिस्टम प्रारंभ किया जाएगा। सवाई मानसिंह अस्पताल में भी जल्द ही यह सिस्टम लागू हो जाएगा। इसके लिए तैयारियों जोरशोर से चल रही हैं। उन्होंने एसएमएस अस्पताल में चल रही तैयारियों की गहन समीक्षा भी की।</p>
<p><strong>अब लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ता</strong><br />रोगियों ने बताया कि पहले उन्हें पर्ची के लिए लंबे समय तक लाइनों में खड़ा होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था। अब क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू होने से बहुत कम समय में उनका पंजीकरण हो जाता है और जिस डॉक्टर को दिखाना होता है, उनके रूम के बाहर इंतजार करने के बजाय वे प्रतीक्षाकक्ष में आराम से बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। एलईडी स्क्रीन पर अपना टोकन नंबर दिखाई देने पर चिकित्सक से परामर्श ले लेते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Jun 2025 10:47:19 +0530</pubDate>
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                <title>शिशुओं में सबसे ज्यादा समस्या हृदय रोग की</title>
                                    <description><![CDATA[इससे पहले वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें इमेजिंग की नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-biggest-problem-in-babies-is-heart-disease/article-98409"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(1)40.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गर्भावस्था के दौरान होने वाली एडवांस सोनोग्राफी टेस्ट से अब जन्म से पूर्व शिशुओं में होने वाली समस्याओं के बारे पता करना संभव हो सका है। टेस्टिंग बढ़ने से शिशुओं की समस्याओं के बारे में आए नए आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा समस्या जन्मजात हृदय रोग से जुड़ी हैं। देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक एक हजार में से आठ शिशुओं को जन्मजात हृदय रोग सामने आ रहा है। जयपुर फीटल मेडिसिन एंड रिसर्च सेंटर, नार्ची राजस्थान चैप्टर और सोनोलॉजिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान की ओर से आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस फीटल मेडिसिन अपडेट 2024 के एक्सपर्ट्स ने कुछ ऐसी ही विचार व्यक्त किए। कॉन्फ्रेंस के ऑर्गनाइजिंग सेके्रटरी डॉ.सीके गर्ग ने बताया कि कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन डॉ. एसएस अग्रवाल और आरएमसी के रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोयल ने किया। इससे पहले वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें इमेजिंग की नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई। </p>
<p>इस दौरान डॉ. चिन्मयी राठा ने स्पाइन एंड स्केलेटल सिस्टम के स्कैन, डॉ. प्रिया देशपांडे ने फीटल हार्ट स्कैन की बेसिक गाइडलाइन की जानकारी साझा की। हैदराबाद से आई डॉ.चिन्मयी राठा ने बताया कि गर्भावस्था के पांचवें महीने से पहले ही अब एडवांस अल्ट्रासाउंड से शिशु के हृदय की गहन जांच की जा सकती है। उसे दिल की क्या बीमारी हो सकती है और उसका इलाज संभव है कि नहीं, कितना खर्च आ सकता है, इसकी काउंसिलिंग करके पेरेंट्स को आगामी निर्णय लेने में मदद मिलती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2024 11:56:34 +0530</pubDate>
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