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                <title>असर खबर का : वेयरहाउस में गाड़ियां समय पर खाली करने के दिए निर्देश, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[जिला कलक्टर ने की एमएसपी पर गेहूं खरीद व्यवस्थाओं की समीक्षा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---directives-issued-to-ensure-timely-unloading-of-vehicles-at-warehouses/article-149858"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिला कलक्टर पीयूष समारिया गुरुवार शाम को भामाशाह कृषि उपजमंडी पहुंचे और समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की व्यवस्थाओं के संबंध में वहां समीक्षा बैठक ली। समारिया ने एफसीआई अधिकारियों से मंडियों में हुई गेहूं की खरीद तथा वेयरहाउस पर गाड़ियां खाली करने की व्यवस्थाओं के बारे में पूछा। उन्होंने वर्तमान में संचालित विभिन्न एजेंसियों के कुल खरीद केन्द्रों के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि गुरुवार को कितने पंजीकृत किसान अपने गेहूं की तुलाई के लिए आए। जिला कलक्टर ने मंडियों से गेहूं का उठाव समय पर करने, पंजीकृत किसानों के गेहूं की तुलाई की गति बढ़ाने और एफसीआई के वेयरहाउस में गाड़ियां समय पर खाली करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एफसीआई के वेयरहाउस के बाहर गाड़ियों की कतारें नहीं लगें यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने एफसीआई अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी वेयरहाउस के बाहर गाड़ियां अधिक हों तो उन्हें दूसरे वेयरहाउस की तरफ डायवर्ट कर वहां खाली करने की व्यवस्था करें।</p>
<p><strong>रसद विभाग करे गाड़ियां खाली करने की मॉनिटरिंग</strong><br />जिला कलक्टर ने मंडियों में गेहूं तुलाई की गति बढ़ाने, मंडियों एवं क्रय केन्द्रों पर आए गेहूं का समय पर उठाव करने और किसानों को बायोमेट्रिक सत्यापन के संबंध में आ रही समस्याओं का समाधान करने के भी निर्देश दिए। जिला कलक्टर ने भामाशाहमंडी प्रशासक एवं अतिरिक्त जिला कलक्टर राजस्व वीरेंद्र सिंह यादव एवं जिला रसद अधिकारी कार्तिकेय मीणा को मंडियों एवं क्रय केन्द्रों पर गेहूं खरीद की व्यवस्था एवं वेयरहाउस में गाड़ियां खाली करने की व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने तथा वेयरहाउस का मौके पर जाकर भौतिक निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए। बैठक में एफसीआई अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को भामाशाह कृषि उपज मंडी में 90 हजार कट्टों की तुलाई हुई। जिला कलक्टर ने इस गति को बरकरार रखने और सभी क्रय केन्द्रों पर अधिक से अधिक तुलाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में एफसीआई, राजफैड, तिलम संघ सहित अन्य क्रय एजेंसियों के अधिकारी उपस्थित थे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />कोटा संभाग में गेहूं की खरीद शुरू होने के बाद वेयरहाउस के बाहर ट्रकों की कतारें लगने के सम्बंध में 9 अप्रैल को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि कोटा संभाग में समर्थन मूल्य (एसएसपी) पर गेहूं खरीद ने जोर पकड़ लिया है। खरीदे गए गेहूं को ट्रकों के जरिए विभिन्न वेयरहाउस और गोदामों तक पहुंचाया जा रहा है, लेकिन गोदामों में सीमित संसाधन और अनलोडिंग की धीमी प्रक्रिया के कारण परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। गोदामों में माल खाली करने की प्रक्रिया में देरी के चलते ट्रक चालकों को 3 से 4 दिन तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। डीसीएम रोड स्थित गोदाम के बाहर ट्रकों की लंबी कतारें लगी हुई है। ट्रक चालकों का कहना है कि उन्हें समय पर माल खाली नहीं होने के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस मामले को जिला कलक्टर ने गम्भीरता से लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 15:09:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का .... एमएसपी पर अधिकतम गेहूं की खरीद होगी सुनिश्चित : बिरला</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश व ओलावृष्टि से प्रभावित उपज की गुणवत्ता को देखते हुए मानकों में छूट के निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news----maximum-wheat-procurement-at-msp-to-be-ensured--birla/article-149248"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल खरीद में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को कोटा सर्किट हाउस में भारतीय खाद्य निगम, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, राजफेड, सहकारिता विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने खरीद व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश देते हुए कहा कि बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित गेहूं की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए मानकों में आवश्यक छूट दी जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी किसान को परेशानी न हो और एफसीआई द्वारा किसानों का शत-प्रतिशत गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए। बैठक में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, शासन सचिव (सहकारिता) डॉ. समित शर्मा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सचिव अंबरिश कुमार, राजफेड के प्रबंध निदेशक सौरभ स्वामी और जिला कलक्टर पीयूष समारिया सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि दाने के रिजेक्शन मानकों में छूट के लिए भारत सरकार से बातचीत हो चुकी है और अगले तीन दिनों में इसके आदेश जारी होने की संभावना है, जिससे किसानों की उपज कम से कम अस्वीकृत हो। साथ ही खरीद का आवंटन दोगुना करने और सोमवार से सभी केंद्र पूरी क्षमता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>अवकाश के दिनों में भी खोलें वेयरहाउस और गोदाम</strong><br />लॉजिस्टिक और भंडारण व्यवस्था पर बिरला ने कहा कि कोटा-बूंदी में बारदाने की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। अगले सात दिनों में अतिरिक्त बारदाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि अवकाश के दिनों में भी वेयरहाउस और गोदाम खुले रहें तथा माल के सुचारू परिवहन के लिए रेलवे रैक की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। एमएसपी पर खरीद में अंतर और एफसीआई गोदामों में राजफेड द्वारा भेजे गए गेहूं के रिजेक्शन से जुड़े मामलों का भी शीघ्र समाधान करने को कहा। बिरला ने स्लॉट बुकिंग और बायोमेट्रिक से जुड़ी समस्याओं के समाधान के निर्देश देते हुए कहा कि सोमवार तक सभी किसानों को स्लॉट मिलना सुनिश्चित किया जाए। किसानों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए भामाशाह मंडी में कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए।</p>
<p><strong>ऊर्जा मंत्री ने गेहूं खरीद के लक्ष्य बढ़ाने के दिए निर्देश</strong><br />बैठक में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने बूंदी जिले में हाल ही में हुई वर्षा के कारण प्रभावित कम गुणवत्ता वाले गेहूं के सैंपल दिखाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से जल्द से जल्द रिलेक्सेशन प्राप्त कर कम गुणवत्ता वाला गेहूं खरीदने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने समर्थन मूल्य पर कोटा संभाग में गेहूं खरीद के तय लक्ष्य को बढ़ाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 6 लाख मीट्रिक टन खरीद के लक्ष्य को बढ़ाकर दुगुना करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा जाए और इसके अनुसार खरीद की तैयारियां रखी जाएं। बैठक में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सचिव अम्बरीश कुमार ने बताया कि सोमवार से कोटा एवं बूंदी जिलों के सभी क्रय केन्द्रों पर खरीद प्रांरभ हो जाएगी। जितने किसानों ने पंजीयन कराया है उनके पास स्लॉट बुकिंग का मैसेज पहुंच जाएगा।</p>
<p><strong>4 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का बारदाना उपलब्ध</strong><br />उन्होंने बताया कि संभाग में वर्तमान में 4 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद के लिए बारदाना उपलब्ध है। बारदाने के लिए रेट कान्ट्रेक्ट किया जा चुका है। तय लक्ष्य की खरीद पूरी होते ही अतिरिक्त गेहूं की खरीद के लिए बारदाने की व्यवस्था कर ली जाएगी। बैठक में शासन सचिव सहकारिता डॉ. समित शर्मा ने सहकारिता विभाग के कोटा संभाग स्थित क्रय केन्द्रों पर की गई गेहूं खरीद की तैयारियों के बारे में जानकारी दी। एमडी राजफैड सौरभ स्वामी ने बताया कि कोटा संभाग में राजफैड के क्रय केन्द्रों पर सभी तैयारियां पूरी हैं और सोमवार से सभी केन्द्रों पर खरीद शुरू कर दी जाएगी। तिलम संघ के अधिकारियों ने जानकारी दी कि उनके 35 केन्द्रों पर खरीद की तैयारियां पूरी हैं। बैठक में संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल, जिला कलक्टरपीयूष समारिया सहित एफसीआई, राजफैड, तिलम संघ, सहकारिता, रसद विभाग आदि के अधिकारी उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />किसानों को सरकारी केन्द्रों पर गेहूं बेचने में किसानों को रही परेशानी के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 4 अप्रैल को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि जिले में गेहूं खरीद का सीजन इस बार किसानों के लिए राहत के बजाय संकट बनता जा रहा है। हाल ही में हुई बारिश के कारण गेहूं की फसल में नमी का स्तर बढ़ गया है, जिसके चलते सरकारी खरीद केंद्रों पर 14 प्रतिशत से अधिक नमी वाले गेहूं को लेने से साफ इनकार किया जा रहा है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं और अंतत: उन्हें बाजार में कम कीमत पर गेहूं बेचना पड़ रहा है। बारिश के कारण खेतों में खड़ी और कटी हुई फसल दोनों ही प्रभावित हुई हैं, जिससे अधिकांश किसानों की उपज निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतर पा रही। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 14:55:24 +0530</pubDate>
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                <title>गांव का नाम बदला तो एमएसपी पोर्टल पर अटका पंजीयन, किसान परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[खेड़ारसूलपुर से खेड़ारामपुर होने के बाद आ रही तकनीकी दिक्कत, समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने से वंचित किसान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-village-renaming-stalls-registration-on-msp-portal--farmers-distressed/article-148550"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/12200-x-60-px)-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>खेड़ारामपुर। खेड़ारामपुर गांव के किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण में तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। गांव का नाम बदलने के बाद रिकॉर्ड और पोर्टल में अंतर होने से सैकड़ों किसान परेशान हैं। खेड़ारामपुर गांव के किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य गेहूं खरीद केंद्र पर फसल बेचने के लिए एमएसपी पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। इसका मुख्य कारण गांव के नाम में बदलाव बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार द्वारा कुछ समय पहले ग्राम खेड़ारसूलपुर का नाम बदलकर खेड़ारामपुर कर दिया गया। इसके बाद भू-राजस्व रिकॉर्ड, जमाबंदी और गिरदावरी में नया नाम दर्ज हो गया है, लेकिन सरकारी खरीद केंद्र और एमएसपी पोर्टल पर अभी भी पुराने नाम खेड़ारसूलपुर से ही डाटा संचालित हो रहा है। किसान विष्णु अजमेरा और चंदन गहलोत ने बताया कि इस समस्या को लेकर राजफैड सहित संबंधित विभागों और अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>किसानों ने जिला कलेक्टर से लगाई गुहार</strong><br />किसानों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि एमएसपी पोर्टल और खरीद केंद्रों पर गांव के नाम में सुधार कर जल्द से जल्द ऑनलाइन पंजीकरण शुरू कराया जाए, ताकि किसान अपनी फसल समर्थन मूल्य पर बेच सकें।</p>
<p>जब वे पंजीकरण के लिए एमएसपी पोर्टल पर गिरदावरी अपलोड करते हैं, तो गांव के नाम में अंतर के कारण दस्तावेज अपलोड नहीं हो पाते और तकनीकी त्रुटि सामने आ जाती है। इससे खेड़ारामपुर के सैकड़ों किसान पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं और समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने से वंचित हो रहे हैं।<br /><strong>- सुरेश गुर्जर, किसान, खेड़ारामपुर</strong></p>
<p>एमएसपी पोर्टल पर गांव का नाम बदलने से आ रही पंजीकरण की समस्या को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और शीघ्र समाधान किया जाएगा।<br /><strong>- विष्णु शर्मा, राजफैड अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 15:28:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - किसानों को मिला अब बोनस का तोहफा, 16 मार्च से शुरू होगी गेहूं की एमएसपी पर खरीद</title>
                                    <description><![CDATA[ किसानों को गेहूं बेचने के लिए विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---farmers-now-receive-a-bonus--wheat-procurement-at-msp-will-begin-from-the-16th/article-146172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार ने किसानों को राहत देते हुए इस वर्ष एमएसपी के साथ अतिरिक्त बोनस देने की भी घोषणा की है। सरकार की ओर से गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसके अलावा किसानों को 150 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा। इस प्रकार पंजीकृत किसानों को गेहूं बेचने पर कुल 2735 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान उनके जनाधार से जुड़े बैंक खातों में किया जाएगा। हाड़ौती के किसान काफी समय बोनस की घोषणा होने का इंतजार कर रहे थे। इस कारण अधिकांश किसान विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण कराने से कतरा रहे थे। अब बोनस की घोषणा होने से ऑनलाइन पंजीकरण के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>गेहूं खरीद की तारीख बदली</strong><br />राजस्थान सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने रबी विपणन सीजन 2026-27 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद को लेकर संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के अनुसार अब एमएसपी पर गेहूं की सरकारी खरीद 16 मार्च 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक की जाएगी। पहले यह खरीद 10 मार्च से शुरू करने का कार्यक्रम तय किया गया था, लेकिन प्रशासनिक कारणों से इसमें संशोधन किया गया है। विभाग की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि रबी विपणन सीजन 2026-27 में किसानों से एमएसपी पर गेहूं खरीद का कार्य राज्यभर में निर्धारित खरीद एजेंसियों के माध्यम से किया जाएगा। संशोधित निदेर्शों के अनुसार किसानों को गेहूं बेचने के लिए विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा और उसी के आधार पर खरीद केंद्रों पर उनकी उपज की खरीद की जाएगी।</p>
<p><strong>खरीद केंद्रों की तैयारियां शुरू</strong><br />विभाग के अधिकारियों के अनुसार खरीद प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए प्रदेशभर में खरीद केंद्रों की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण, तौल व्यवस्था और परिवहन की व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि बोनस की घोषणा से किसानों को गेहूं बेचने में प्रोत्साहन मिलेगा और सरकारी खरीद केंद्रों पर आवक बढ़ने की संभावना है। वहीं खरीद की तारीख आगे बढ़ने से किसानों को फसल की कटाई और मंडियों में लाने के लिए भी अतिरिक्त समय मिल सकेगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />दैनिक नवज्योति में किसानों की इस पीड़ा को लेकर 9 फरवरी को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था, जिसमें बताया था कि सरकारी समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अब तक बोनस की घोषणा नहीं होने से किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी कारण जिले में पंजीयन अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है और किसान फिलहाल इंतजार की रणनीति अपनाए हुए हैं। हर साल इस समय तक बड़ी संख्या में किसान पंजीयन करा लेते थे, लेकिन इस बार आंकड़े अपेक्षा से काफी कम हैं।</p>
<p>सरकार की ओर से गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसके अलावा किसानों को 150 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा। पंजीकृत किसानों को गेहूं बेचने पर कुल 2735 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान उनके जनाधार से जुड़े बैंक खातों में किया जाएगा।<br /><strong>- पूनम प्रसाद सागर, अतिरिक्त खाद्य आयुक्त</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 14:00:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भारत-अमेरिका समझौते को लेकर कांग्रेस ने बोला केंद्र सरकार पर हमला, कहा-कपास किसानों को होगा बड़ा नुकसान </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसान विरोधी बताया है। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अमेरिकी कपास के सस्ते आयात से भारतीय कपड़ा उद्योग और करोड़ों कपास किसानों को खरबों का नुकसान होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-attacked-the-central-government-regarding-the-india-us-agreement-and/article-143364"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(11)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने भारत-अमेरिका के बीच हाल में हुए व्यापार समझौते पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने देश के किसानों के हितों को नजरअंदाज कर यह समझौता किया है और इससे खासकर कपास किसानों को बड़ा नुकसान होने की संभावना है। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में इस समझौते से देश के कपड़ा उद्योग पर गंभीर प्रभाव पडऩे की आशंका जताई है। उनका कहना था कि इस समझौते से वस्त्र क्षेत्र को खरबों रुपये तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है और इससे किसानों से लेकर निर्यातकों तक पूरी श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।</p>
<p>सुरजेवाला के अनुसार यदि अमेरिकी कपास और संबंधित कृषि उत्पादों का आयात शुल्क मुक्त या कम शुल्क पर बढ़ता है तो इसका भारतीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों पर दबाव पड़ेगा। अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी देता है, जिससे वहां की कपास अपेक्षाकृत सस्ती होती है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में भारतीय कपास उत्पादकों की जिनिंग इकाइयों यानी कपास की पहली प्रोसेसिंग यानी कपास को रेशों को बीजों से अलग करने की प्रक्रिया वाली इकाइयाँ तथा स्पिनिंग मिलें यानी कताई मिलें जहां कपास के रेशों से कताई करके सूत तैयार करने वाली मिलों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>उन्होंने आशंका जताई है कि यदि अमेरिका के साथ बंगलादेश जैसे देशों के व्यापारिक प्रबंध और मजबूत होते हैं, तो भारतीय परिधान निर्यात को अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ सकती है। भारत पहले से वैश्विक बाजार में तीखी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है, ऐसे में कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता और निर्यात ऑर्डर में कमी आने से कपड़ा उद्योग के लिए नयी चुनौती बन सकता है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत का कपड़ा और परिधान उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में से एक है। यह क्षेत्र लाखों किसानों, बुनकरों, श्रमिकों और लघु एवं मध्यम उद्यमों से जुड़ा हैऔर यदि सस्ते आयात के कारण घरेलू कीमतों में गिरावट आती है और मिलों का लाभांश घटेगा और इसका सीधा असर रोजगार और ग्रामीण आय पर पड़ सकता है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में कपास उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और इनकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था वस्त्र उद्योग से गहराई से जुड़ी है। पार्टी का कहना है कि किसी भी बड़े आयात झटके से इन राज्यों में किसानों और छोटे उद्योगों की आय पर व्यापक असर पड़ सकता है।</p>
<p>सुरजेवाला ने कहा कि विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि विदेशी कृषि उत्पाद आयात करने और इसके बढऩे से घरेलू कीमतों में गिरावट आना स्वाभाविक है और इससे निर्यात प्रतिस्पर्धा कमजोर होती है और इससे किसानों और मिल मालिकों को खरबों रुपये की आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है। यह पूछने पर कि अमेरिका के साथ इस समझौते से किसानों को कितना नुकसान हो सकता है, सुरजेवाला ने कहा कि यह मामला आंकड़ों का नहीं, बल्कि देश के किसानों के हित का है जिसे नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उनका कहना था कि सरकार किसानों के लिए एमएसपी की घोषणा करती है लेकिन देती नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 17:23:16 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रबी फसल 2025-26 के लिए MSP में वृद्धि : गेहूं 2425 रुपए, सरसों-मूंग 300 रुपए तक बढ़ोतरी; किसानों को 105% लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने रबी फसल वर्ष 2026 -27 के लिए गेहूं सहित चुनींदा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दे दी है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/msp-increase-in-msp-for-rabi-crop-2025-26-rs-2425/article-128436"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रबी फसल वर्ष 2026 -27 के लिए गेहूं सहित चुनींदा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दे दी है।<br />प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी देते हुए कहा कि गेहूं की एमएसपी 2585 रुपए प्रति कि्वंटल तय किया गया है।</p>
<p>इसके अलावा जौ का एमएसपी 2150 रुपये प्रति कि्वंटल, चना 5875 रुपए प्रति कि्वंटल, मसूर 7000 रुपए प्रति कि्वंटल, सरसों या रेपसीड 6200 रुपए प्रति कि्वंटल और सैफफ्लवार 6540 रुपए प्रति कि्वंटल रखा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Oct 2025 16:47:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाजरे की एमएसपी खरीद पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, किरोड़ी लाल मीना ने कहा- लक्ष्य के मुताबिक पर खरीद नहीं हो पाती है</title>
                                    <description><![CDATA[राजफेड द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीद का मामला सोमवार को सदन में गूंजा। बाजरे की खरीद के मुद्दे पर पक्ष विपक्ष में जमकर बहस हुई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/on-the-purchase-of-msp-of-bajra-the-opposition-surrounded/article-126219"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(2).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजफेड द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीद का मामला सोमवार को सदन में गूंजा। बाजरे की खरीद के मुद्दे पर पक्ष विपक्ष में जमकर बहस हुई। प्रश्नकाल में विधायक रामकेश मीना ने सवाल करते हुए कहा कि गंगापुर मंडी में सरसों की खरीद केवल 1024 क्विंटल की। चने में कम खरीद की। बाजरे का फिगर दिया नहीं है। बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में बड़े-बड़े वादे लिए थे। एमएसपी के नाम पर ऊंट के नाम पर जीरा है।</p>
<p>मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने जवाब दिया कि पिछले कांग्रेस राज में एक भी बाजरे का दाना कांग्रेस ने एमएसपी पर नहीं खरीदा। सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने कहा कि एमएसपी पर प्रतिबद्धता के साथ खरीद होती है। जींस बेचने को लेकर तारीख भी देते है। लक्ष्य के मुताबिक पर खरीद नहीं हो पाती है तो किसान बाजार में बेचने के लिए स्वतंत्र है। विधायक रामकेश मीना ने कहा कि मंत्री गलत कह रहे हैं। क्या आप आने वाले समय में खरीद करेंगे। मंत्री गौतम कुमार दक ने कहा समय पर खरीद प्रारंभ कर दी थी। अगली बार डिमांड पहले आ जाएगी तो समय पर खरीद शुरू कर देंगे। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा संकल्प पत्र के अनुसार कब करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 14:13:23 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एमएसपी पर खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप खारिज : सीधे किसानों के खाते में जाती है धनराशि,  प्रह्लाद जोशी ने कहा -  खामियां की सूचना मिलने पर होगी कार्रवाई </title>
                                    <description><![CDATA[मोदी सरकार में जनधन, आधार और मोबाइल पर आधारित भुगतान प्रणाली से लाभार्थियों के खाते में पूरा एक रुपया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/allegations-of-corruption-in-procurement-on-msp-dismissed-directly-into/article-103119"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/6622-copy22.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अनाजों की खरीद में भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अब प्रत्यक्ष हस्तातंरण के तहत सीधे किसानों के खाते में धनराशि जाती है। जोशी ने राज्यसभा में प्रश्नकाल में पूरक प्रश्न पूछे जाने के दौरान इसको लेकर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह द्वारा लगाये गये आरोपों पर कहा कि अब सीधे किसानों के खाते में धनराशि दी जाती है। इसलिए भ्रष्टाचार का सवाल नहीं है। अब वह जमाना नहीं है कि जब एक रुपया में से मात्र 15 पैसे लोगों तक पहुंचता था।</p>
<p>मोदी सरकार में जनधन, आधार और मोबाइल पर आधारित भुगतान प्रणाली से लाभार्थियों के खाते में पूरा एक रुपया जाता है। उन्होंने कहा कि जहां तक खरीदी कम होने का सवाल है, तो संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के 2004 से 2014 तक के कार्यकाल में 4,40,498 करोड़ रुपये के धान और 2,26,817 करोड़ रुपये के गेहूं की खरीद हुई थी, जबकि मोदी सरकार को कार्यक्रम में 2014 से अब तक 12,51,403 करोड़ रुपये धान और 5,44,324 करोड़ रुपये के गेंहू की खरीद हुई है।</p>
<p>एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने कहा कि यदि कहीं एमएसपी पर खरीद में कोई शिकायत या खामियां मिलती है और उसकी सूचना दी जाये, तो कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन एमएसपी से कम पर खरीद नहीं की जा रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि एमएसपी के अतिरिक्त कुछ राज्य विशेषकर महाराष्ट्र, हरियाणा  आदि में किसानों को प्रति हेक्टेयर बोनस भी दिया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Feb 2025 16:52:40 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गोविन्द डोटासरा का भजनलाल सरकार पर निशाना : बाजरे की खरीद एमएसपी पर नहीं होना किसानों के साथ कुठाराघात, अधिकारों को छीनना भाजपा की नीति </title>
                                    <description><![CDATA[बाजरे की खरीद एमएसपी पर नहीं होने के मुद्दे पर पीसीसी चीफ गोविन्द डोटासरा ने भजनलाल सरकार पर निशाना साधा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bajra-procurement-not-at-msp-dotasara-is-at-loggerheads-with/article-101740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/dotasra.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बाजरे की खरीद एमएसपी पर नहीं होने के मुद्दे पर पीसीसी चीफ गोविन्द डोटासरा ने भजनलाल सरकार पर निशाना साधा है। डोटासरा ने कहा कि किसानों को 'झटका' देना, प्रताड़ित करना एवं उनके अधिकारों को छीनना भाजपा सरकारों की अघोषित नीति रही है। राजस्थान में सत्ता में आने से पहले भाजपा ने एमएसपी पर बाजरा खरीद का वादा किया था लेकिन अब वादाखिलाफी करके उन्हें धोखा दे रही है। भाजपा का दोहरा मापदंड देखिए एक तरफ केंद्र सरकार श्रीअन्न योजना में मोटे अनाज को बढ़ावा देने का दावा कर रही है जबकि दूसरी ओर राज्य की भाजपा सरकार बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने से इनकार कर रही है। </p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री कहते हैं कि वो राज्य सरकार की मंशा पर उनके सहयोग से खरीद की व्यवस्था करते हैं, तो फिर बाजरा का एमएसपी देने से डबल इंजन की सरकार को कौन रोक रहा है? राजस्थान बाजरे का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है लेकिन फिर भी प्रदेश में बाजरे की खरीद एमएसपी पर नहीं होना किसानों से कुठाराघात है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jan 2025 18:57:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>बाजरा उत्पादन में राजस्थान टॉप, एमएसपी पर खरीद की केन्द्र से नहीं मिली अनुमति</title>
                                    <description><![CDATA[हर सीजन में राज्य में करीब 50 लाख मीट्रिक टन बाजरे का हो रहा है उत्पादन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-did-not-get-permission-from-the-center-to-purchase/article-92278"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान का देश में बाजरा, सरसों, कुल तिलहन एवं ग्वार फसलों के उत्पादन में पहला स्थान है अर्थात करीब 50 लाख मेट्रिक टन बाजरा उत्पादन होता है, लेकिन इस बार भी एमएसपी पर बाजरे की खरीद नहीं होगी। राज्य सरकार की ओर से केन्द्र को इस संबंध में पत्र लिखा गया, लेकिन अभी तक इसका कोई जवाब नहीं मिला है।</p>
<p>ऐसे में इस बार भी किसानों से बाजरे की सरकारी खरीद नहीं हो सकेगी। साथ ही खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र परिवारों को तीन माह गेहूं की जगह नि:शुल्क बाजरा वितरण की मंशा भी धरी रह गई है।</p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में खरीफ का सर्वाधिक उत्पादन</strong><br />बाजरा, मोठ एवं तिल का शुष्क पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में शामिल जोधपुर, जोधपुर ग्रामीण, फलौदी, बाड़मेर एवं बालोतरा, उत्तरी पश्चिमी सिंचित मैदानी क्षेत्र श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ एवं अनूपगढ़ में कपास एवं ग्वार, अतिशुष्क आंशिक सिंचित पश्चिमी मैदानी क्षेत्र बीकानेर, जैसलमेर एवं चूरू में बाजरा, मोठ एवं ग्वार, अंत: स्थलीय जलोत्सरण के अंतवर्ती मैदानी क्षेत्र के सीकर, नीमकाथाना, चूरू के कुछ हिस्से को छोड़कर, झुंझुनूं, नागौर, डीडवाना एवं कुचामन में बाजरा, ग्वार एवं दलहन, लूनी नदी का अंतवर्ती मैदानी क्षेत्र के जालोर, सांचौर, सिरोही, पाली, ब्यावर, में बाजरा, ग्वार एवं तिल, अर्द्ध शुष्क पूर्वी मैदानी क्षेत्र के अजमेर, जयपुर, दौसा, टोंक, दूदू, केकड़ी, तिजारा, कोटपूतली में में बाजरा, ग्वार एवं ज्वार का उत्पादन होता हैं।</p>
<p><strong>प्रदेश के कुल क्षेत्रफल की स्थिति<br /></strong>राज्य का कुल प्रतिवेदित क्षेत्रफल वर्ष 2022-23 में 342.81 लाख हेक्टेयर है। इसमें से 8.09 प्रतिशत क्षेत्रफल वानिकी के अन्तर्गत, 5.92 प्रतिशत कृषि के अतिरिक्त अन्य उपयोगी भूमि के अन्तर्गत, 6.89 प्रतिशत क्षेत्रफल ऊसर तथा कृषि अयोग्य भूमि के अन्तर्गत, 4.82 प्रतिशत क्षेत्रफल स्थायी चारागाह तथा अन्य गोचर भूमि के अन्तर्गत, 0.09 प्रतिशत क्षेत्रफल वृक्षों के झुण्ड तथा बाग के अन्तर्गत, 10.39 प्रतिशत क्षेत्रफल बंजर भूमि के अन्तर्गत, 5.68 प्रतिशत क्षेत्रफल अन्य चालू पड़त भूमि के अन्तर्गत, 4.38 प्रतिशत क्षेत्रफल चालू पड़त के अन्तर्गत एवं 53.74 प्रतिशत क्षेत्रफल बोए गए क्षेत्रफल के अन्तर्गत आता है।</p>
<p>वर्तमान में बाजरे की स्थितिखरीफ की फसल कटने के बाद बाजरे का बाजार में आना शुरू हो गया है। राजस्थान में एमएसपी पर बाजरा खरीद नहीं होने से कई किसान हरियाणा में बाजरे का बेचान करते है। बाजरे की एमएसपी 2625 रुपए प्रति क्विंटल है। अगर सरकार खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल करीब साढेÞ चार करोड़ लोगों को तीन माह बाजरे का वितरण करती है तो आठ से दस लाख मीट्रिक टन बाजरा किसानों से खरीदना पडेÞगा। मोटे अनाज के प्रति लोगों में इस बार खास रूचि नजर आ रही है। ऐसे में बाजार में बाजरे का किसानों को उचित भाव मिलने की उम्मीद है।<br /><br />प्रदेश में बाजरे का सर्वाधिक उत्पादन होता है, एमएसपी पर खरीद के लिए केन्द्र को पत्र लिखा गया है। सरकार इसके लिए लगातार प्रयासरत है कि किसानों से बाजरे की एमएसपी पर खरीद शुरू होनी चाहिए। उम्मीद है जल्द ही इस ओर कदम बढेंगे।<br /><strong>-सुमित गोदारा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Oct 2024 12:04:09 +0530</pubDate>
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                <title>FICCI Rajasthan: MSP बढ़ाने से किसानों की आय में हुआ सुधार: भागीरथ चौधरी  </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान मिलेट कॉन्क्लेव के दूसरे संस्करण का आयोजन हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ficci-rajasthan-farmers-income-improved-due-to-increase-in-msp/article-91731"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/ficci.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। फिक्की राजस्थान द्वारा आयोजित 'राजस्थान मिलेट कॉन्क्लेव' के दूसरे संस्करण में कृषि एवं किसान कल्याण, राज्य मंत्री, भागीरथ चौधरी ने किसानों की आय में मिलेट्स की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वृद्धि ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 2014 में बाजरे की एमएसपी 1250 रुपए थी, जो 2024 में बढ़कर 2625 रुपए हो गई है। राजस्थान पूरे देश में मिलेट्स का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, और मिलेट्स की खेती में तकनीकी सुधार के साथ इसे और भी बढ़ाया जा सकता है।</p>
<p><strong>मिलेट्स: पोषण और सस्टेनेबिलिटी का स्रोत</strong><br />राज्य मंत्री ने अपने संबोधन में मिलेट्स के पोषण मूल्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मिलेट्स न केवल पोषण सुरक्षा प्रदान करते हैं बल्कि इनमें किसी प्रकार के कीटनाशकों या खाद की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह प्राकृतिक खेती के लिए उपयुक्त हैं। उन्होंने कहा कि मिलेट्स की फसल जलवायु परिवर्तन के प्रति भी अत्यधिक सहिष्णु होती है, जिससे यह कठोर परिस्थितियों में भी फल-फूल सकती है।</p>
<p><strong>मिलेट्स पर विशेष जोर</strong><br />फिक्की के सलाहकार और पूर्व सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय,  सिराज हुसैन ने मिलेट्स की विविधता और महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाजरा जैसे प्रमुख मिलेट्स के अलावा कुट्टू, सावां, कुटकी जैसे छोटे मिलेट्स भी अपने उच्च पोषण मूल्य के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने इन कम-ज्ञात मिलेट्स को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p><strong>मिलेट्स से सस्टेनेबल भविष्य</strong><br />फिक्की टास्क फोर्स ऑन मिलेट्स के चेयरमैन,  जितेंद्र जोशी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष 2023 के बाद से मिलेट्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। मिलेट्स जलवायु-स्मार्ट फसलों के रूप में जाने जाते हैं, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करते हैं और संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डवलपमेंट गोल्स में से छह में योगदान देते हैं।</p>
<p><strong>फिक्की मिलेट स्टार्टअप अवार्ड्स</strong><br />कॉन्क्लेव में फिक्की मिलेट स्टार्टअप अवार्ड्स के विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिसमें खाद्यम स्पेशियलिटी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड (प्रथम), एग्रोजी ऑर्गेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (द्वितीय), और विजयंजलि न्यूट्री सी-रियल्स एलएलपी (तृतीय) शामिल थे।</p>
<p><strong>प्लैनरी सेशंस में नवाचार और शोध पर चर्चा</strong><br />कार्यक्रम के अंत में दो प्लैनरी सेशंस का आयोजन किया गया। पहला सेशन 'मिलेट फार्मिंग एंड बियॉन्ड' विषय पर हुआ, जिसमें कृषि में नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वहीं दूसरा सेशन 'एम्पावरिंग मिलेट फार्मर्स विथ रिसर्च-ड्रिवन सॉल्यूशंस' विषय पर आयोजित हुआ।</p>
<p>इस आयोजन से स्पष्ट है कि मिलेट्स न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हैं, बल्कि यह पोषण और सस्टेनेबिलिटी के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Sep 2024 16:12:17 +0530</pubDate>
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                <title>PDS में मिलेगा तीन माह बाजरा, किसानों से दस लाख मीट्रिक टन बाजरे की एमएसपी पर होगी खरीद</title>
                                    <description><![CDATA[इसके बाद राजस्थान देश का दूसरा राज्य होगा, जहां किसानों से बाजरे की खरीद की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/millet-will-be-available-for-three-months-in-pds-one/article-82707"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/bhajanlal-sharma-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के करीब एक करोड़ परिवारों को पीडीएस के तहत तीन माह गेहूं की जगह बाजरा मिलेगा। इसके लिए पहले एमएसपी पर राज्य सरकार किसानों से बाजरे की खरीद करेगी। राज्य सरकार इसकी बजट में घोषणा करने की तैयारी कर रही है।</p>
<p>राज्य में करीब 50 लाख मेट्रिक टन बाजरे का उत्पादन होता है। इसमें से 10 लाख मेट्रिक टन बाजरे की राज्य सरकार किसानों से एमएसपी पर खरीद करेगी। इसमें करीब साढ़े सात लाख मेट्रिक टन बाजरा पीडीएस के पात्र परिवारों को निशुल्क बांटा जाएगा। इसका वितरण नवम्बर, दिसंबर और जनवरी में वितरण होगा। फिलहाल देश मे केवल हरियाणा में ही एमएसपी पर बाजरे की खरीद हो रही है। इसके बाद राजस्थान देश का दूसरा राज्य होगा, जहां किसानों से बाजरे की खरीद की जाएगी।</p>
<p>खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि मुख्यमंत्री से इस बारे में चर्चा की है। जल्द ही इसके परिणाम आएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Jun 2024 20:14:06 +0530</pubDate>
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