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                <title>football ground - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>श्रीनाथपुरम स्टेडियम बना खिलाड़ियों की पहली पसंद, आधुनिक सुविधाओं से संवर रहा खेल भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[आमजन के लिए अलग वॉकिंग ट्रैक, केडीए लागू करेगा एसओपी,  मैदान और सिंथेटिक ट्रैक पर केवल खिलाड़ियों को मिलेगी एंट्री।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shrinathpuram-stadium-emerges-as-the-top-choice-for-athletes--modern-facilities-are-shaping-a-bright-future-for-sports/article-161422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(5)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कभी सीमित सुविधाओं के कारण संघर्ष करने वाले खिलाड़ियों के लिए आज श्रीनाथपुरम स्टेडियम उम्मीदों का नया केंद्र बन चुका है। आधुनिक खेल सुविधाओं, सुव्यवस्थित मैदान, सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक और बेहतर रखरखाव के कारण यह स्टेडियम शहर के खिलाड़ियों की पहली पसंद बनता जा रहा है। फुटबॉल, एथलेटिक्स, ताइक्वांडो सहित कई खेलों के खिलाड़ी यहां नियमित अभ्यास कर रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी भी इसी मैदान पर कर रहे हैं।</p>
<p><strong>कुछ खेल गतिविधियां शुल्क आधारित भी</strong><br />स्टेडियम परिसर में संचालित कुछ विशेष खेल गतिविधियां निर्धारित शुल्क पर उपलब्ध हैं। इनका संचालन कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) द्वारा लीज पर दिए गए संस्थानों के माध्यम से किया जा रहा है। इसके बावजूद खिलाड़ियों का मानना है कि स्टेडियम की मूलभूत सुविधाएं और व्यवस्थाएं उत्कृष्ट हैं तथा नियमित रखरखाव के कारण यहां अभ्यास करना सुविधाजनक और सुरक्षित महसूस होता है।</p>
<p><strong>खिलाड़ियों के लिए बना प्रोफेशनल अभ्यास केंद्र</strong><br />स्टेडियम का सबसे बड़ा आकर्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया फुटबॉल मैदान और उसके साथ विकसित सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक है। यह ट्रैक विशेष रूप से खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए बनाया गया है, जहां धावक और अन्य एथलेटिक्स खिलाड़ी बिना किसी व्यवधान के नियमित ट्रेनिंग कर रहे हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि इस तरह की सुविधा पहले शहर में सीमित थी, लेकिन अब बेहतर माहौल मिलने से प्रदर्शन में भी सकारात्मक बदलाव आ रहा है।</p>
<p>स्टेडियम की योजना इस तरह तैयार की गई है कि खिलाड़ियों के अभ्यास में किसी प्रकार की बाधा न आए। मैदान के भीतर बना सिंथेटिक ट्रैक केवल खिलाड़ियों के उपयोग के लिए है, जबकि सुबह-शाम घूमने और फिटनेस के लिए आने वाले लोगों के लिए स्टेडियम के बाहरी हिस्से में अलग वॉकिंग ट्रैक विकसित किया गया है। इससे एक ओर खिलाड़ियों को निर्बाध अभ्यास का अवसर मिल रहा है तो दूसरी ओर आमजन भी सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में मॉर्निंग एवं ईवनिंग वॉक का आनंद ले रहे हैं।</p>
<p>सिंथेटिक ट्रैक और बेहतर मैदान के कारण खिलाड़ी नियमित और गुणवत्तापूर्ण अभ्यास कर पा रहे हैं। यदि इसी प्रकार रखरखाव जारी रहा तो यहां से राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी तैयार होंगे।<br /><strong>-तीरथ सांगा, फुटबॉल कोच</strong></p>
<p>मैदान के अंदर बना सिंथेटिक ट्रैक खिलाड़ियों के लिए बेहद उपयोगी है। यदि इसका उपयोग केवल खिलाड़ी ही करें तो इसकी गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहेगी ।अभ्यास का अवसर मिलता रहेगा।<br /><strong>-विशाल मीणा, एथलेटिक्स कोच</strong></p>
<p>ताइक्वांडो अभ्यास के लिए भी यहां अच्छी व्यवस्था है, लेकिन बारिश के मौसम में परेशानी से बचाने के लिए इंडोर सुविधा विकसित की जानी चाहिए, ताकि खिलाड़ी पूरे साल निर्बाध अभ्यास कर सकें।<br /><strong>-कमलेश बैरवा, ताइक्वांडो कोच</strong></p>
<p><strong>खिलाड़ियों का कहना</strong><br />पहले अभ्यास के दौरान कई परेशानियां आती थीं, लेकिन अब मैदान, पेयजल और अन्य सुविधाएं बेहतर होने से नियमित ट्रेनिंग आसान हो गई है। यहां का माहौल प्रतियोगी खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।<br /><strong>-रियांश, खिलाड़ी</strong></p>
<p>सिंथेटिक ट्रैक पर अभ्यास करने से प्रतियोगिताओं की बेहतर तैयारी होती है। बाहर अलग वॉकिंग ट्रैक होने से भीड़ नहीं रहती और हम बिना किसी व्यवधान के ट्रेनिंग कर पाते हैं।<br /><strong>-तन्नू बैरवा, इंटरनेशनल खिलाड़ी</strong></p>
<p><strong>एसओपी से सुरक्षित रहेगा सिंथेटिक ट्रैक</strong><br />मैदान के अंदर बनाया गया सिंथेटिक ट्रैक केवल खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए तैयार किया गया है। इसके संरक्षण और बेहतर उपयोग के लिए जल्द ही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की जाएगी। स्टेडियम परिसर में जिम के ऊपर एक हॉल का निर्माण पूरा हो चुका है। आवश्यक तैयारियों के बाद इसे खेल प्रशिक्षण शिविर और विभिन्न खेल गतिविधियों के लिए शुरू किया जाएगा।<br /><strong>- मुकेश चौधरी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>
<p><strong>हाड़ौती का प्रमुख स्पोर्ट्स हब बनने की ओर</strong><br />लगातार विकसित हो रही सुविधाएं, सुव्यवस्थित रखरखाव और खिलाड़ियों के अनुकूल वातावरण श्रीनाथपुरम स्टेडियम को हाड़ौती क्षेत्र के सबसे आधुनिक खेल परिसरों में शामिल कर रहे हैं। प्रस्तावित एसओपी प्रभावी ढंग से लागू होगी, और नई सुविधाएं ज्लद शुरू होगी, आने वाले वर्षों में यह स्टेडियम न केवल कोटा बल्कि पूरे हाड़ौती के खिलाड़ियों के लिए एक प्रमुख स्पोर्ट्स हब के रूप में स्थापित हो सकता है।<br /><strong>-वाई बी सिंह, जिला खेल अधिकारी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 15:08:19 +0530</pubDate>
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                <title>3 साल से गड्ढ़ों में फुटबॉल मैदान, प्रेक्टिस को भटक रहे खिलाड़ी </title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती का एकमात्र राजकीय फुटबॉल छात्रावास वाकेशनल स्कूल का खेल मैदान जिम्मेदारों की उपेक्षा का दंश झेल रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/football-ground-in-potholes-for-3-years--players-wandering-for-practice/article-99800"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(24).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती का एकमात्र राजकीय फुटबॉल छात्रावास वाकेशनल स्कूल का खेल मैदान जिम्मेदारों की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। छात्रावास का फुटबॉल ग्राउंड पिछले 3 सालों से गड्ढ़ों में तब्दील है, जबकि इसके डवलपमेंट के लिए बजट भी मिला हुआ है। इसके बावजूद खेल और खिलाड़ियों के प्रति  जिम्मेदारों ने लापरवाहपूर्ण रवैया अपनाया हुआ है। हालात यह है कि इस छात्रावास में प्रदेशभर से खिलाड़ी आते हैं, जिन्हें खेलने के लिए मैदान नहीं मिलता। ऐसे में प्रेक्टिस के लिए उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है।  </p>
<p><strong>97 लाख का बजट कराया था उपलब्ध</strong><br />नयापुरा स्थित राजकीय फुटबॉल छात्रावास में खेल मैदान है, जो वर्तमान में खेलने लायक नहीं है। मैदान में जगह-जगह गड्ढ़े हो रहे हैं। जिसकी वजह से हॉस्टल के फुटबॉल खिलाड़ी अपने ही मैदान में पिछले तीन साल से प्रेक्टिस नहीं कर पा रहे। जबकि, तत्कालीन सरकार ने  हॉस्टल डवलपमेंट के लिए 97 लाख का बजट केडीए (पूर्व में यूआईटी) को उपलब्ध करवा दिया था। इसके बावजूद मैदान को डवलप नहीं किया गया। हालांकि, गत वर्ष हॉस्टल में नए कमरे बनाए गए थे और मैदान में मिट्टी भरवाकर समतलीकरण किया जाना था, जो अब तक नहीं करवाया गया। </p>
<p><strong>हर रोज ग्राउंड पहुंचने के लिए  होती है मशक्कत</strong><br />शारीरिक शिक्षक प्रवीण विजय ने बताया कि पिछले तीन साल से छात्रावास का मैदान में गड्ढ़े हो रहे हैं। जिसमें खिलाड़ियों का प्रेक्टिस करना संभव नहीं है। ऐसे में उन्हें स्टेडियम जाना पड़ता है, जहां कई बार खेलने के लिए जगह नहीं मिल पाती, क्योंकि वहां पहले से ही कई अकेडमियों की टीमें प्रेक्टिस कर रही होती है। ऐसे में टीम को खेलने से पहले हर रोज ग्राउंड ढूंढने की मशक्कत करनी पड़ती है। जबकि, खिलाड़ियों को हर रोज दो से ढाई घंटे प्रेक्टिस करनी होती है, जो ग्राउंड के अभाव में नहीं हो पाती। समस्या से अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया लेकिन समाधान नहीं हुआ।</p>
<p><strong>खिलाड़ियों के पैदल स्टेडियम जाने-आने में हादसे का खतरा</strong><br />संभाग का एकलौता राजकीय फुटबॉल छात्रावास नयापुरा जेकेलोन अस्पताल के सामने वोकेशनल स्कूल में है।   यहां खेल मैदान नहीं होने से 20 खिलाड़ियों को करीब 500 मीटर स्टेडियम में पैदल-पैदल जाना-आना पड़ता है। जबकि, इस रोड पर ट्रैफिक अधिक रहता है। ऐसे में हादसे की आशंका बनी रहती है। वहीं, अव्यवस्थाओं का असर उनके खेल पर भी पड़ता है। जबकि, राज्य के विभिन्न जिलों से खिलाड़ी अच्छी खेल सुविधा के भरोसे में कोटा आते हैं। ऐसे में उन्हें अव्यवस्थाओं से जूझना पड़े तो प्रदेश में कोटा की छवि पर गलत प्रभाव पड़ेगा। </p>
<p><strong>मैदान में झाड़-झाड़ियों </strong><br />का लगा ढेरफुटबॉल छात्रावास का खेल मैदान करीब 100 गुना 100 साइज का है। जिसमें से प्रेक्टिस एरिया 100 गुना 80 है। जिसमें झाड़-झाड़ियों उगी होने से जंगल हो रहा है। जिसमें जहरीले जीव जंतुओं की मौजूदगी बनी रहती है। वहीं, जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। हॉस्टल के नवनिर्मित कमरों के निर्माण के बाद मैदान में मिट्टी भरवाकर जमीन समतलीकरण की जानी थी, जो अब तक पूरा नहीं हो सका। हालांकि, मैदान में केवल सीढ़ियां ही बनी है। </p>
<p><strong>अभावों के बावजूद उप विजेता रही टीम </strong><br />शारीरिक शिक्षक प्रवीण विजय ने बताया कि छात्रावास की फुटबॉल टीम गत वर्ष सितम्बर माह में बारां में आयोजित हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उप विजेता रही है। वहीं, नेशनल टीम में एक बच्चे का चयन हुआ है। इसके अलावा 17 व 19 वर्षीय फुटबॉल स्टेट टूर्नामेंट इसी साल होना है। जिसमें अधिकतर खिलाड़ी छात्रावास के ही होंगे। ऐसे में इनकी नियमित प्रेक्टिस जरूरी है। अधिकारियों को हस्तक्षेप कर ग्राउंड विकसित करवाया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>कैसे निखरेगी प्रतिभाएं</strong><br />प्रदेशभर के अलग-अलग जिलों से चयनित खिलाड़ी कोटा आते हैं। लेकिन छात्रावास में खेलने के लिए मैदान ही नहीं है। रोजाना पैदल-पैदल स्टेडियम जाना होता है, फिर वहां खेलने के लिए जगह ढूंढनी पड़ती है। इतनी मशक्कत के बाद कभी जगह मिलती हो तो प्रेक्टिस हो पाती है, कई बार तो बैरंग लौटना पड़ता है। अभावों में खेल प्रतिभाएं कैसे निखरेगी।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं खिलाड़ी</strong><br />खुद के ही कैम्पस में खेल नहीं पा रहे। मैदान में इतने गड्ढ़े हैं कि प्रेक्टिस करने की सोच भी नहीं सकते। जबकि, बोर्ड परीक्षा के बाद स्टेट टूर्नामेंट होने वाला है, ऐसे में प्रेक्टिस की सख्त आवश्यकता है लेकिन स्टेडियम में भी कई बार जगह नहीं मिल पाती। जिसकी वजह से पे्रक्टिस नहीं हो पाती। अधिकारियों को खेल सुविधाएं विकसित करनी चाहिए।<br /><strong>- सुरेंद्र गोयल (परिवर्तित नाम) खिलाड़ीं</strong></p>
<p> यह बहुत पुराना फुटबॉल ग्राउंड है, जो मरम्मत के अभाव में खेलने लायक नहीं बचा है। इस एरिया में फुटबॉल खेलना बंद सा हो गया है। जिम्मेदार अधिकारियों को इसके विकास पर ध्यान देना चाहिए ताकि, प्रतिभाएं निखर सके। क्योंकि शहर में पहले ही खेल मैदानों की कमी है, ज्यादा मैदान होंगे तो कोटा को ज्यादा खिलाड़ी मिल सकेगी।<br /><strong>- तीरथ सांगा, सचिव, जिला फुटबॉल संघ कोटा</strong></p>
<p>स्कूल खुलने पर जिला शिक्षाधिकारी की मौजूदगी में प्रिंसिपल व कोच की बैठक कर समस्या क्या है, मैदान डवलप क्यों नहीं हो पा रहा, इसकी जानकारी करेंगे और मिलकर समाधान करवाएंगे।<br /><strong>- शिवराज सिंह चौधरी, उप जिला शिक्षाधिकारी, शारीरिक शिक्षा</strong></p>
<p>आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है। मंगलवार को स्कूल खुलने पर मैं स्वयं खेल मैदान का निरीक्षण करुंगा। यदि, मैदान डवलपमेंट के लिए बजट आया हुआ है फिर भी काम नहंी करवाया गया तो गंभीर बात है। मामले की पूरी जानकारी कर प्राथमिकता से समाधान करवाएंगे।<br /><strong>- केके शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक कोटा </strong></p>
<p>राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा दे रही है। छात्रावास के फुटबॉल ग्राउंड को डवलप करवाने व समस्या के समाधान के लिए जिला शिक्षाधिकारी व एडीपीसी को निर्देशित किया है। <br /><strong>- सतीश गुप्ता, विशेषाधिकारी शिक्षा मंत्री</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2025 17:33:55 +0530</pubDate>
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