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                <title> maha kumbh - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> maha kumbh RSS Feed</description>
                
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                <title>माघी पूर्णिमा पर महाकुंभ में आस्था का जनसैलाब : एक करोड़ से अधिक ने लगाई डुबकी, श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा </title>
                                    <description><![CDATA[महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगाने वालों की संख्या 46 करोड़ 25 लाख से अधिक हो चुकी है, जबकि महाकुंभ के समापन को अभी एक पखवारा शेष है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-maghi-purnima-more-than-one-crore-people-took-a/article-104027"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer47.png" alt=""></a><br /><p>महाकुंभ नगर। माघ पूर्णिमा के अवसर पर महाकुंभ में संगम के तट पर आस्था का जनसैलाब हिलोरें मारता दिखायी दिया। सुबह आठ बजे तक ही एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगा चुके थे। सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम के बीच कुंभ मेला क्षेत्र समेत समूचा प्रयागराज श्रद्धालुओं की भीड़ से सराबोर हो चुका है। संगम क्षेत्र में हेलीकाप्टर के जरिये श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की जा रही है। प्रयागराज को स्नान पर्व के मौके पर नो व्हीकल जोन पहले ही घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद संगम नगरी की सड़कें श्रद्धालुओं से ठसाठस भरी हुयी हैं। पुलिस कर्मी श्रद्धालुओं को निकटतम में स्नान की सलाह दे रहे हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार सुबह आठ बजे तक एक करोड़ दो लाख लोग स्नान कर चुके थे, जिनमें दस लाख कल्पवासी भी शामिल हैं। </p>
<p>इसके साथ ही महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगाने वालों की संख्या 46 करोड़ 25 लाख से अधिक हो चुकी है, जबकि महाकुंभ के समापन को अभी एक पखवारा शेष है। सरकार ने इससे पहले महाकुंभ में 45 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान का अनुमान जताया था। माघी पूर्णिमा के साथ ही संगम की रेती पर अराधना में लीन करीब दस लाख श्रद्धालुओं के कल्पवास की समाप्ति हो जायेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2025 14:14:29 +0530</pubDate>
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                <title>महाकुंभ का संयोग और पुष्य नक्षत्र का योग</title>
                                    <description><![CDATA[मकर संक्रान्ति के अवसर पर आन्ध्र प्रदेश और तेलंगण में विशेष भोजनम् का आयोजन किया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/combination-of-maha-kumbh-and-combination-of-pushya-nakshatra/article-100674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(10)7.png" alt=""></a><br /><p>पतंगबाजी का एक खास मामला ये जरूर है इसने कौमी त्योहार बना दिया है। जी हां पतंगबाजी मकर संक्रांति के दिन हिन्दू, मुसलमान, सिख और ईसाई सभी सम्प्रदायों में की जाती है। राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएं अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। मकर संक्रांति का त्योहार आज देश में हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। इस बार मकर संक्रांति पर पुष्य नक्षत्र का भी शानदार संयोग आ रहा है। ऐसे में धर्म, दान और पूजा पाठ का विशेष फल मिलने वाला है। मकर संक्रांति भारत में धर्म आस्था का त्योहार है। इस दिन तीर्थ स्थलों पर स्रान करने का भी प्रावधान है और दान पुण्य का भी महत्व है। पतंग का मकर संक्रांति पर कोई उल्लेख नहीं है ये तो कालान्तर में आमोद प्रमोद के हिसाब से इसमें जुड़ गई है। दरअसल मकर संक्रांति पुण्य कमाने का त्योहार है न की पतंगबाजी का है। हालांकि पिछले कई दशकों से युवा पीढ़ी इसे पतंगबाजी का ही त्योहार ही मानती है। पतंगबाजी का एक खास मामला ये जरूर है इसने कौमी त्योहार बना दिया है। जी हां पतंगबाजी मकर संक्रांति के दिन हिन्दू,  मुसलमान, सिख और ईसाई सभी सम्प्रदायों में की जाती है। राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएं अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। साथ ही महिलाएं किसी भी सौभाग्यसूचक वस्तु का चौदह की संख्या में पूजन एवं संकल्प कर चौदह ब्राह्मणों को दान देती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं। पुष्य के साथ आने वाली मकर संक्रांति पर तीन विशेष उपाय करने चाहिए। थोड़ी सी केसर युक्त चावलों की खीर बनाइए और भगवान लक्ष्मीनारायण जी के मंदिर में उसका भोग लगाकर स्वयं भी उस प्रसादी को ग्रहण करें और उसे वितरित भी करें। इसी दिन थोड़ा तिल और गुड़ एक डिस्पोजल कटोरी में रखकर भगवान शिव के मंदिर में उनके चरणों में अर्पित कर आएं और उनसे अपने सभी कष्टों के निवारण की प्रार्थना कर आएं। तीसरा और महत्वपूर्ण उपाय ये है कि इस दिन एक चांदी का सिक्का खरीदें और थोड़ से चावल खरीदें तथा ये दोनों चीजें एक सफेद कपड़े में बांधकर इशान कोण या अपनी तिजोरी में रख दें और फिर इसका फायदा देखें। भारत के साथ ही नेपाल में भी अलग-अलग नाम व भांति-भांति के रीति-रिवाजों द्वारा भक्ति एवं उत्साह के साथ मकर संक्रांति का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन किसान अपनी अच्छी फसल के लिए भगवान को धन्यवाद देकर अपनी अनुकम्पा को सदैव लोगों पर बनाए रखने का आशीर्वाद मांगते हैं। इसलिए मकर संक्रांति के त्योहार को फसलों एवं किसानों के त्योहार के नाम से मनाया जाता है। मकर संक्रान्ति के अवसर पर आन्ध्र प्रदेश और तेलंगण में विशेष भोजनम् का आयोजन किया जाता है।</p>
<p>जम्मू में यह पर्व उत्तरैन और माघी संगरांद के नाम से विख्यात है। उधमपुर की देविका नदी के तट पर हीरानगर के धगवाल में और जम्मू के अन्य पवित्र स्थलों पर जैसे कि पुरमण्डल और उत्तरबैह्नी पर इस दिन मेले लगते हैं। प्रयागराज में गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम पर प्रत्येक वर्ष एक माह तक माघ मेला लगता है जिसे माघ मेले के नाम से जाना जाता है। 14 जनवरी से ही प्रयागराज में हर साल माघ मेले की शुरूआत होती है। 14 दिसम्बर से 14 जनवरी तक का समय खर मास के नाम से जाना जाता है। 14 जनवरी यानी मकर संक्रान्ति से पृथ्वी पर अच्छे दिनों की शुरूआत होती है। माघ मेले का पहला स्रान मकर संक्रान्ति से शुरू होकर शिवरात्रि के आखिरी स्रान तक चलता है। बागेश्वर में बड़ा मेला होता है। इस दिन गंगा स्रान करके तिल के मिष्ठान आदि को ब्राह्मणों व पूज्य व्यक्तियों को दान दिया जाता है। इस पर्व पर क्षेत्र में गंगा एवं रामगंगा घाटों पर बड़े मेले लगते है। समूचे उत्तर प्रदेश में इस व्रत को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है तथा इस दिन खिचड़ी खाने एवं खिचड़ी दान देने का अत्यधिक महत्व होता है। इसी प्रकार बिहार में मकर संक्रान्ति को खिचड़ी नाम से जाना जाता है। इस दिन उड़द, चावल, तिल, चिवड़ा, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि दान करने का अपना महत्व है। महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएं अपनी पहली संक्रान्ति पर कपास, तेल व नमक आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं। तिल-गूल नामक हलवे के बांटने की प्रथा भी है। इस दिन पूरे बिहारवासी दिन में दही चुरा खाकर और रात के समय उरद दाल और चावल की खिचड़ी बनाकर यह पर्व को मनाते हैं। बंगाल में इस पर्व पर स्रान के पश्चात तिल दान करने की प्रथा है। गंगासागर में प्रति वर्ष विशाल मेला लगता है। मान्यता यह भी है कि इस दिन यशोदा ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए व्रत किया था। <br />-रोशनलाल शर्मा<br />यह लेखक के अपने विचार हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jan 2025 11:32:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>महाकुंभ के लिए रेलवे की परियोजनाओं का शुभारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[कुंभ के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए 1176 सीसीटीवी कैमरों से लाइव मॉनिटरिंग होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/railway-projects-launched-for-maha-kumbh/article-100603"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(20)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने महाकुंभ-2025 के लिए प्रयागराज क्षेत्र में रेलवे की तैयारियों को एक नया आयाम देते हुए कई प्रमुख परियोजनाओं और सुविधाओं का शुभारंभ किया। वैष्णव ने कुंभवार रूम का उद्घाटन और रेलवे बोर्ड में कुंभवार रूम का शुभारंभ किया। इसमें सीसीटीवी कैमरों से प्राप्त लाइव फीड की मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म स्तर से लेकर रेलवे बोर्ड स्तर तक की जाएगी। इस वार रूम के माध्यम से जिला प्रशासन और रेलवे के बीच समन्वय को मजबूत किया जाएगा। जिससे यात्रियों को तत्काल सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके। रेलमंत्री ने घोषणा प्रणाली और यात्री पुस्तिका का विमोचन किया। प्रयागराज, नैनी, छिवकी और सुबेदारगंज स्टेशनों पर 12 भाषाओं में उद्घोषणा प्रणाली की शुरुआत व यात्रियों को उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 22 भाषाओं में तैयार की गई विशेष पुस्तिका का विमोचन किया गया। </p>
<p><strong>प्रयागराज क्षेत्र में यात्री सुविधाएं</strong><br />रेलवे नेटवर्क में विस्तार और सुधार, कुल 13 हजार ट्रेनों का संचालन, 10 हजार नियमित ट्रेनें, 3134 विशेष ट्रेनें (पिछले कुंभ से 4.5 गुना अधिक), 1869 शॉर्ट डिस्टेंस ट्रेनें, 706 लॉन्ग डिस्टेंस ट्रेनें, 559 रिंग ट्रेनें, मालगाड़ियों को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर डायवर्ट किया गया। महाकुंभ के लिए बीते 3 वर्षों में 5000 करोड़ का निवेश व यात्री सुविधाओं का विस्तार किया गया। इनमें 48 प्लेटफॉर्म, 21 फुट ओवर ब्रिज, 23 स्थायी होल्डिंग एरिया (जिनकी क्षमता 1 लाख से अधिक), 554 टिकटिंग काउंटर, सड़कों और रेलवे की सुगम आवाजाही के लिए 21 आरओबी-आरयूबी का निर्माण किया गया। वहीं 3700 करोड़ की लागत से परियोजनाएं जिसमें बनारस-प्रयागराज डबलिंग (गंगा ब्रिज सहित), फाफामऊ-जंघई डबलिंग कार्य शामिल है। </p>
<p><strong>कुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या और तैयारियां</strong><br />महाकुंभ में करीब 40 करोड़ श्रद्धालु भाग लेंगे। मौनी अमावस्या के दिन 5 करोड़ श्रद्धालुओं की उपस्थिति की उम्मीद है। कुंभ के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए 1176 सीसीटीवी कैमरों से लाइव मॉनिटरिंग होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 14:40:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>महाकुंभ : आज से प्रयागराज की गागर में सनातनियों का सागर </title>
                                    <description><![CDATA[ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन महाकुंभ सोमवार को प्रयागराज में शुरू होने जा रहा है। प्रयाग रूपी गागर में दुनियाभर के सनातनियों का सागर समाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/maha-kumbh-starts-from-today-a-sea-of-%E2%80%8B%E2%80%8Bsanatanis-in/article-100573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(19)2.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन महाकुंभ सोमवार को प्रयागराज में शुरू होने जा रहा है। प्रयाग रूपी गागर में दुनियाभर के सनातनियों का सागर समाएगा। कुंभ के दौरान श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में पावन डुबकी लगाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि महाकुंभ में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप मिट जाते हैं और पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। कहते हैं कि महाकुंभ के दौरान अगर प्रयागराज में व्यक्ति तीन दिन भी नियमपूर्वक स्नान कर लेता है तो उसे एक सहस्र अश्वमेघ यज्ञों को करने के बराबर पुण्य प्राप्त हो जाता है। महापर्व के दौरान कभी भी स्नान-दान कर पुण्य फल पा सकते हैं लेकिन शाही स्नान के दिन संगम में डुबकी लगाने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है। </p>
<p><strong>महाकुंभ 2025 शाही स्नान की तिथियां</strong></p>
<p>पहला शाही स्नान- 14 जनवरी 2025, मकर संक्रांति<br />दूसरा शाही स्नान- 29 जनवरी 2025, मौनी अमावस्या<br />तीसरा शाही स्नान- 3 फरवरी 2025, सरस्वती पूजा, बसंत पंचमी</p>
<p><strong>24 घंटे प्रयागराज की निगरानी</strong><br />डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि इसके साथ ही 113 होमगार्ड व बीआरडी जवान, 11 कंपनी केंद्रीय रिजर्व पुलिस और 15 कंपनी पीएसी को तैनात किया गया है। साथ ही जल मार्ग की निगरानी के लिए एक कंपनी दो प्लाटून पीएसी भी लगाई गई है। इसके अलावा 10 वज्रवाहन, 15 ड्रोन, 5 बम निरोधक दस्ता के जरिये 24 घंटे प्रयागराज में प्रवेश करने पर निगरानी रखी जा रही है। डीजीपी ने कहा कि महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए यूपी पुलिस कृत संकल्पित है।</p>
<p><strong>वीआईपी प्रोटोकॉल नहीं</strong><br />महाकुंभ मेला क्षेत्र के डीआईजी वैभव कृष्ण और महाकुंभ मेला क्षेत्र के एसएसपी राजेश द्विवेदी ने सुबह तड़के महाकुंभ क्षेत्र का निरीक्षण किया था।  मुख्य स्नान से एक दिन पहले और एक दिन बाद नो व्हीकल जोन बनाया है, वहां कोई वाहन नहीं जाने दिया जाएगा। कोई वीआईपी प्रोटोकॉल नहीं है। मेला क्षेत्र में किसी भी 2 पहिया या 4 पहिया वाहन को जाने की अनुमति नहीं होगी। मल्टी लेयर बैरियर लगाए हैं।</p>
<p><strong>यूपी सरकार की तैयारी पूरी</strong><br />उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ 2025 को लेकर योगी सरकार पूरी तरह से अलर्ट है। प्रदेश सरकार कुंभ को दिव्य और भव्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए हैं। महाकुंभ की सुरक्षा को लेकर यूपी पुलिस की ओर से विशेष इंतजाम किए गए हैं। इसके साथ ही न केवल प्रयागराज बल्कि उससे जुड़ने वाले 7 रास्तों और 8 जिलों की सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद कर दी गई है।</p>
<p><strong>शाही स्नान का महत्व  </strong><br />शाही स्नान यानि वह स्नान जिसको करने से मन की अशुद्धियां भी दूर हो जाती है। 14 जनवरी 2025 को महाकुंभ का पहला शाही स्नान किया जाएगा। शाही स्नान के दौरान सबसे पहले नागा साधु स्नान करते हैं। इसके बाद ही आम जनता स्नान कर सकती है। शाही स्नान के दिन संगम में स्नान करने से कई गुना अधिक पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं शाही स्नान के दिन स्नान करने से जातक को इस जन्म के साथ ही पिछले जन्म के पापों से भी मुक्ति मिलती है। महाकुंभ में शाही स्नान के दिन स्नान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।</p>
<p><strong>महाकुंभ मेला 12 साल में एक बार </strong><br />बता दें कि महाकुंभ पूरे 12 वर्षों बाद लगता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत से भरा कुंभ यानी कलश बाहर आया था तब देवताओं और राक्षस के बीच बारह दिन तक भयंकर युद्ध हुआ था। युद्ध के दौरान देवताओं के संकेत पर इंद्र देव के पुत्र जयंत अमृत से भरा कलश लेकर बड़े ही तीव्र गति से भागने लगे तब दैत्यगण जयंत का पीछा करने लगे। इस युद्ध के दौरान जिन-जिन स्थानों पर कलश से अमृत की बूंदें गिरी थी, वे स्थान प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक है।  जहां-जहां अमृत की बूंदे गिरी वहां-वहां कुंभ मेला का आयोजन किया जाता है।</p>
<p><strong>8 जिलों में 102 मोर्चे</strong><br />यूपी के डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि महाकुंभ को लेकर सीएम योगी ने प्रयागराज को जोड़ने वाले 7 मार्गों व उन मार्गो पर पड़ने वाले जिलों के साथ ही सीमावर्ती जिलों सहित प्रयागराज के चारों ओर अभेद्य सुरक्षा का एक चक्रव्यूह बनाये जाने के निर्देश दिए थे। इस निर्देश पर प्रयागराज को जोड़ने वाले सभी 7 सड़क मार्गों और उन मार्गों पर पड़ने वाले 8 जिलों में आने-जाने वाले वाहनों और व्यक्तियों की चेकिंग के लिए 102 मोर्चे बनाए गए हैं। सड़क मार्गों पर अचूक सुरक्षा व्यवस्था के लिए कुल 1026 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसमें 71 निरीक्षक, 234 उपनिरीक्षक, 645 आरक्षी व मुख्य आरक्षी और 76 महिला आरक्षी शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 11:48:51 +0530</pubDate>
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