<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/spirituality/tag-52759" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>spirituality - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/52759/rss</link>
                <description>spirituality RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रेमानंद महाराज के दर्शन कर लिया आशीर्वाद: आध्यात्मिक उपदेशों से हुईं अभिभूत, सुरक्षा के कड़े इंतजाम</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मथुरा प्रवास के दौरान वृंदावन में विख्यात संत प्रेमानंद महाराज से भेंट की। उन्होंने 'राधा केली कुंज' आश्रम में सत्संग सुना और राष्ट्र की प्रगति के लिए आशीर्वाद लिया। इस मुलाकात ने भारतीय संस्कृति में सत्ता और संत के अटूट जुड़ाव तथा भक्ति मार्ग की महिमा को रेखांकित किया है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/president-draupadi-murmu-had-darshan-of-premanand-maharaj-and-took/article-147184"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/dropdi.png" alt=""></a><br /><p>मथुरा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने मथुरा दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को वृंदावन के परिक्रमा मार्ग स्थित श्री हित राधा केली कुंज आश्रम पहुँचीं। यहाँ उन्होंने प्रख्यात संत श्री प्रेमानंद महाराज जी से शिष्टाचार भेंट की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। आश्रम पहुंचने पर राष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया गया। इसके उपरांत, उन्होंने पूज्य महाराज जी के साथ एकांत में बातचीत किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने महाराज जी के द्वारा दिए जा रहे सत्संग और मानवता के कल्याण के लिए उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति ने महाराज जी के उपदेशों और प्रवचनों को अत्यंत ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने महाराज जी से भक्ति मार्ग, मानसिक शांति और सेवा भाव जैसे विषयों पर चर्चा की।</p>
<p>भेंट के दौरान राष्ट्रपति की सादगी और महाराज जी के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा स्पष्ट दिखाई दी। महाराज जी ने राष्ट्रपति को राधा नाम की महिमा और निस्वार्थ कर्म के महत्व के बारे में बताया। पूज्य प्रेमानंद महाराज, जो अपने प्रखर विचारों और राधा वल्लभ संप्रदाय की भक्ति परंपरा के लिए विश्वभर में जाने जाते हैं, ने राष्ट्रपति जी को मंगलमय जीवन और राष्ट्र की प्रगति के लिए अपना आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
<p>राष्ट्रपति द्रोपदी के आगमन को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। परिक्रमा मार्ग पर यातायात को कुछ समय के लिए डाइवर्ट किया गया था। इस भेंट के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह मुलाकात न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि इसने भारतीय संस्कृति में सत्ता और संत के बीच के गहरे जुड़ाव को भी रेखांकित किया।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/president-draupadi-murmu-had-darshan-of-premanand-maharaj-and-took/article-147184</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/president-draupadi-murmu-had-darshan-of-premanand-maharaj-and-took/article-147184</guid>
                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 13:28:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/dropdi.png"                         length="1408995"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम मंदिर का वैभव सात समंदर पार, 20 फरवरी को मॉस्को में होगी भव्य रामलीला </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[रूस की राजधानी मॉस्को में 20 फरवरी को रूसी कलाकारों द्वारा भव्य रामलीला का मंचन किया जाएगा। अयोध्या के दीपोत्सव से प्रेरित यह आयोजन भारत-रूस सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-glory-of-ram-temple-will-cross-the-seven-seas/article-143277"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(26)1.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राम मंदिर से जुड़े विकास कार्यों और दीपोत्सव जैसे भव्य आयोजनों की गूंज अब सात समंदर पार तक पहुंच गई है। इसी सांस्कृतिक प्रेरणा के तहत रूस की राजधानी मॉस्को में 20 फरवरी को भव्य रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन भारत-रूस सांस्कृतिक संबंधों के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>रूस में भारत के दूतावास और जवाहरलाल नेहरू सांस्कृतिक केंद्र (जेएनसीसी) के सहयोग से आयोजित इस रामलीला में रूसी कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। राम की भूमिका एवगेनी, सीता का किरदार दारिया, लक्ष्मण की भूमिका मुरात और हनुमान के रूप में दिमित्री मंच पर भारतीय आस्था की सजीव प्रस्तुति देंगे। भव्य मंच सज्जा, पारंपरिक वेशभूषा और संगीत के माध्यम से रामकथा को जीवंत किया जाएगा।</p>
<p>इस आयोजन की मुख्य संचालक रूसी-भारतीय मैत्री संस्था दिशा है, जो डॉ. रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में वर्षों से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य कर रही है। आयोजकों के अनुसार रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सत्य, मर्यादा और आदर्श जीवन का सार्वभौमिक संदेश देती है, जिस कारण रूसी दर्शकों में भी इसके प्रति विशेष उत्सुकता देखी जा रही है।    </p>
<p>उल्लेखनीय है कि योगी सरकार पहले ही रूस के कलाकारों को अयोध्या दीपोत्सव में मंच उपलब्ध करा चुकी है। अयोध्या की आध्यात्मिक आभा और दीपोत्सव की भव्यता से प्रभावित होकर ही रूसी कलाकारों और आयोजकों ने मॉस्को में इसी भाव के साथ रामलीला मंचन का निर्णय लिया। 20 फरवरी को होने वाला यह आयोजन न केवल भारतीय संस्कृति का उत्सव होगा, बल्कि भारत और रूस के बीच भावनात्मक व सांस्कृतिक रिश्तों को नई गति भी देगा।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/the-glory-of-ram-temple-will-cross-the-seven-seas/article-143277</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/the-glory-of-ram-temple-will-cross-the-seven-seas/article-143277</guid>
                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 17:32:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/%2812200-x-600-px%29-%2826%291.png"                         length="1017551"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा,  हर मास-एक उपवास आत्मसंयम और स्वास्थ्य की जीवन साधना, आचार्य प्रसन्न सागर के सान्निध्य में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी हुए शामिल</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आचार्य प्रसन्न सागर जी से आशीर्वाद लिया। ‘हर माह-एक उपवास’ अभियान को आध्यात्मिक, स्वास्थ्यवर्धक और लोकमंगलकारी बताया गया।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/governor-haribhau-bagde-said-every-month-one-fast-a/article-142306"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(3)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शनिवार को अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में पहुंचकर उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर उन्होंने आचार्य श्री की प्रेरणा से चलाए जा रहे श्हर मास-एक उपवास जैसे लोकमंगलकारी प्रकल्प को जीवन साधना बताते हुए इसकी सराहना की। राज्यपाल ने कहा कि उपवास न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। राज्यपाल बागडे ने भारत की प्राचीन संयम परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मसंयम, नागरिक स्वास्थ्य और अध्यात्म से जुड़ा यह अभियान समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री ने लिया आशीर्वाद</strong></p>
<p>इसी क्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी के सानिध्य में आयोजित हर माह-एक उपवास कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने आचार्य श्री से आत्मीय भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि संतों और मुनियों का समाज को आध्यात्मिक दिशा देने में अहम योगदान है </p>
<p><strong>कविओं ने बांधा समां</strong></p>
<p>इस मौके पर हुए कवि सम्मेलन में विनीत चौहान सहित अन्य कविओं ने अपनी कविताओं से लोगों का जमकर मनोरंजन किया। </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/governor-haribhau-bagde-said-every-month-one-fast-a/article-142306</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/governor-haribhau-bagde-said-every-month-one-fast-a/article-142306</guid>
                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 10:36:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/11-%28700-x-400-px%29-%28630-x-400-px%29-%283%297.png"                         length="1888509"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>90 की उम्र में दलाई लामा मिला पहला ग्रैमी अवार्ड, जानें आखिर क्यों मिला इनको ये अवार्ड ?</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[दलाई लामा ने ऑडियोबुक “Meditations” के लिए ग्रैमी अवॉर्ड जीता। उन्होंने इसे शांति, करुणा और वैश्विक जिम्मेदारी की मान्यता बताया, व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं कहा।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/dalai-lama-received-his-first-grammy-award-at-the-age/article-141671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>लॉस एंजिल्स। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु, दलाई लामा को यहां रविवार देर रात संपन्न हुए 68वें ग्रैमी अवाड्र्स में 'बेस्ट ऑडियोबुक, नरेशन एंड स्टोरीटेलिंग रिर्काडिंग श्रेणी में विजेता चुना गया। इस श्रेणी के लिए चार अन्य लेखक भी दौड़ में थे लेकिन दलाई लामा को पुरस्कार के लिए चुना गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान उनके ऑडियोबुक प्रोजेक्ट'मेडिटेशंस : द रिफलेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा के लिए मिला है। उनके अलावा इस श्रेणी में मशहूर कॉमेडियन और लेखक ट्रेवर नोआ ( इंटू द अनकट ग्रास), केतनजी ब्राउन जैक्सन (लवली वन) और कैथी गार्वर (एल्विस रॉकी एडं मी) जैसे नाम शामिल थे।</p>
<p>पुरस्कार की घोषणा के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आध्यात्मिक संत दलाई लामा ने अपनी चिर-परिचित सादगी और विनम्रता का परिचय दिया। उन्होंने कहा, मैं इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूँ। मैं इसे किसी व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की पहचान के रूप में देखता हूँ। मेरा मानना है कि शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और मानवता की एकता को समझना आज दुनिया के आठ अरब लोगों की भलाई के लिए अनिवार्य है।</p>
<p>दलाई लामा की कृति मेडिटेशंस महज एक किताब का पाठ नहीं, बल्कि यह आत्म-चिंतन और शांति की एक यात्रा है। इसमें उनके गहरे आध्यात्मिक चिंतन और प्रवचनों का संग्रह है। इसमें उनके द्वारा 'निर्देशित ध्यान और करुणा के दर्शन को आवाज दी गई है। इस ऑडियो नैरेशन का उद्देश्य भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शांति प्रदान करना है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/dalai-lama-received-his-first-grammy-award-at-the-age/article-141671</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/dalai-lama-received-his-first-grammy-award-at-the-age/article-141671</guid>
                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 13:15:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/11-%28700-x-400-px%29-%28630-x-400-px%29-%285%291.png"                         length="980635"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकुंभ : अध्यात्म और आस्था की डुबकी, भव्य और दिव्य है महाकुंभ, सबसे पहले स्रान करते हैं नागा साधु</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और आस्था का प्रतीक है महाकुंभ। हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाला यह मेला न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि भारत की पौराणिक परम्पराओं और आध्यात्मिक विरासत का उत्सव है]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mahakumbh-the-dip-of-spirituality-and-faith-is-grand-and/article-100579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और आस्था का प्रतीक है महाकुंभ। हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाला यह मेला न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि भारत की पौराणिक परम्पराओं और आध्यात्मिक विरासत का उत्सव है। प्रयागराज, जहां तीन नदियों- गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है, इस दिव्य आयोजन का केंद्र होता है। हर 12 वर्ष में प्रयागराज में संगम के किनारे महाकुंभ का आयोजन होता है। हम आज आपको महाकुंभ की वो कहानी बता रहें हैं, जिसका इतिहास और धार्मिक महत्व इसे दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे खास उत्सव बनाता है। देवों की पवित्र भूमि प्रयागराज, जहां मान्यता है कि जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। मान्यता है कि प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी संगम में स्नान करने से पुण्यों की प्राप्ति होती है और पापों का प्रायश्चित। महाकुंभ सिर्फ पाप से प्रायश्चित का अवसर ही नहीं है, बल्कि आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग भी है।</p>
<p><strong>नागा साधु शुद्धता और साधना की मिसाल</strong></p>
<p>संगम नगरी प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन 13 जनवरी, 2025 से शुरू होकर, 26 फरवरी चलेगा। श्रद्धालुओं के साथ-साथ कुंभ में लाखों की संख्या में साधु-संत पहुंचते हैं और उनके लिए भी खास तैयारी की जाती है। इस पावन अवसर पर देश-दुनिया से आए करोड़ों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाएंगे। कुंभ मेले में बाबाओं के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। कोई पेशवाई में अपने अनूठे करतब से अभिभूत कर रहा है तो कोई अपने अनूठे संकल्पों और प्रणों के कारण चर्चा में है। हर बार कुंभ में जुटने वाले नागा साधुओं की चर्चा सबसे ज्यादा होती है। इसका कारण है उनकी जीवन शैली, पहनावा और भक्ति। नागा साधुओं के बिना कुंभ की कल्पना तक नहीं की जा सकती। धर्म रक्षा के मार्ग पर चलने के दौरान नागा साधु अपने जीवन को इतना कठिन बना लेते हैं कि आम आदमी के लिए सोचना भी मुश्किल है। नागा साधु उन्हें कहा जाता है जो पूरी तरह से सांसारिक मोह माया से मुक्त होकर भगवान भोलेनाथ की आराधना में लिप्त रहते हैं। नागा साधु तपस्वी जीवन जीते हैं। ये संसार की सभी चीजों का त्याग कर शुद्धता और साधना की मिसाल पेश करते हैं।</p>
<p><strong>17 शृंगार करते हैं, और अखाड़ों में लौट जाते हैं साधु  </strong><br />हिंदू धर्म के 16 श्रृंगारों के बारे में तो सब जानते हैं, जो सुहागन महिलाएं करती हैं। लेकिन नागा साधु 17 शृंगार करते हैं और इसके बाद ही संगम में शाही स्नान के लिए डुबकी लगाते हैं। नागा साधुओं के यह 17 शृंगार हैं- भभूत, लंगोट, चंदन, पांव में चांदी या लोहे के कड़े, पंचकेश यानी जटा को पांच बार घुमाकर सिर में लपेटना। रोली का लेप, अंगूठी, फूलों की माला, हाथों में चिमटा, डमरू, कमंडल, जटाएं, तिलक, काजल, हाथों में कड़ा, विभूति का लेप और गले में रुद्राक्ष। नागा साधु 17 श्रृंगार के अलावा अक्सर त्रिशूल लेकर चलते हैं और अपने शरीर को भस्म से ढकते हैं। कपड़े के नाम पर वे सिर्फ लंगोट और कमर से नीचे व घुटने के ऊपर कुछ लपेटकर रहते हैं। महाकुंभ या कुंभ में सबसे पहले नागा साधु ही स्नान करते हैं, इसके बाद ही अन्य श्रद्धालुओं को स्नान करने की अनुमति होती है। महाकुंभ और कुंभ के आयोजन के दौरान तिथि और महत्व के हिसाब से शाही स्नान के लिए कुछ विशेष दिन निर्धारित होते हैं। इन सभी मौकों पर सबसे पहले नागा साधु ही संगम में स्नान करते हैं। महाकुंभ और कुंभ की समाप्ति के बाद सभी नागा साधु अपनी-अपनी रहस्यमयी दुनिया में लौट जाते हैं।</p>
<p>महाकुंभ के बाद नागा साधु कहीं नजर नहीं आते। लोगों के मन में सवाल रहता है कि ये कहां चले जाते हैं और हर कुंभ, महाकुंभ में नजर आते हैं। दरअसल, नागा साधु महाकुंभ के बाद देश के अलग-अलग हिस्से में बने अखाड़ों में लौट जाते हैं। इनमें से कुछ हिमालय की गुफाओं और कंदराओं और कुछ देश के अन्य पहाड़ी इलाकों में चले जाते हैं। नागा साधुओं के दो सबसे बड़े अखाड़े, वाराणसी में महापरिनिर्वाण अखाड़ा और पंच दशनाम जूना अखाड़ा हैं। ज्यादातर नागा साधु यहीं से आते हैं।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/mahakumbh-the-dip-of-spirituality-and-faith-is-grand-and/article-100579</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/mahakumbh-the-dip-of-spirituality-and-faith-is-grand-and/article-100579</guid>
                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 12:10:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-01/5554-%282%2919.png"                         length="575427"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        