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                <title>modern technology - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>नवाचार: अब स्मार्ट तरीके से होगी फसल की निगरानी</title>
                                    <description><![CDATA[ अब तक 30 से अधिक पुरस्कारों से हो चुकी सम्मानित।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/innovation--crop-monitoring-to-go--smart/article-162839"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(7)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच युवा इनोवेटर अनन्या गोहिल ने कृषि-तकनीक, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। फसल निगरानी, आंकड़ा-आधारित कृषि और आधुनिक तकनीकी समाधानों की दिशा में उनका कार्य कृषि की वास्तविक आवश्यकताओं को नई तकनीकों से जोड़ने का प्रयास है। 30 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित अनन्या ने अपनी प्रतिभा, नवाचार और सक्रिय भागीदारी के माध्यम से युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायक पहचान स्थापित की है। कृषि-तकनीक के साथ-साथ तकनीकी नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक प्रभाव से जुड़े क्षेत्रों में उनकी सक्रिय भूमिका उन्हें एक उभरती हुई युवा नवप्रवर्तक के रूप में स्थापित करती है। पुरस्कारों की उपलब्धि उनके निरंतर प्रयास, सीखने की क्षमता और नए विचारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है। कृषि-तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अपनी सक्रिय भूमिका के साथ अनन्या वेल्ट्रियोनेक्स स्मार्ट क्रिएशन्स प्राइवेट लिमिटेड में मुख्य विपणन अधिकारी (सीएमओ) और ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।</p>
<p><strong>कारगर साबित हो रही कृषि तकनीक क्रॉपजेन</strong><br />अनन्या गोहिल क्रॉपजेन नामक कृषि-तकनीक पहल से जुड़ी हैं। क्रॉपजेन का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरसंवेदी तकनीक, भू-स्थानिक बुद्धिमत्ता और आंकड़ा विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से फसलों की निगरानी को सरल, व्यवस्थित और अधिक प्रभावी बनाना है। युवा इनोवेटर अनन्या का कहना है कि क्रॉपजेन एक तकनीक-आधारित फसल निगरानी प्रणाली है, जिसे किसानों, कृषि विशेषज्ञों, कृषि व्यवसायों और शोधकतार्ओं के लिए उपयोगी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य खेतों और फसलों से संबंधित आंकड़ों को व्यवस्थित रूप से समझना तथा उनसे उपयोगी और व्यावहारिक जानकारी तैयार करने में सहायता करना है। दूरसंवेदी और भू-स्थानिक तकनीकों की सहायता से फसल निगरानी को स्थान-आधारित बनाया जा सकता है। इससे खेत और फसल की स्थिति से संबंधित जानकारी का डिजिटल विश्लेषण करने तथा कृषि प्रबंधन से जुड़े निर्णयों को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 15:13:45 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार के साथ निजी भागीदारी बढ़ेगी आधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल </title>
                                    <description><![CDATA[भारत सरकार के खान मंत्रालय के निदेशक योगेन्द्र भांभू ने कहा कि देश में माइनिंग सेक्टर में रिफार्मस लागू हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/private-partnership-with-government-will-increase-modern-technology-will-be/article-101017"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(14)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। खनन को मिनरल्स एक्सप्लोरेशन को लेकर राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में देश-प्रदेश के एक्सपर्ट जुटे। राजस्थान में मिनरल्स एक्सप्लोरेशन में निजी सहभागिता बढ़ाने और आधुनिक तकनीक का उपयोग करने पर जोर दिया गया। खान विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी.रविकांत ने कहा कि क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल डिपोजिट्स का डेटा 31 जनवरी तक पब्लिक डोमेन पर केन्द्र व राज्य की एक्सप्लोरेशन संस्थान के साथ ही एनपीईएज व पीईएज के साथ साझा किया जाएगा। प्रदेश में एक्सप्लोरेशन का रोडमैप बनाया जा रहा है। राजस्थान में 89 फीसदी पोटाश के भंडार हैं। देश दुनिया के खनिज खोज व खनन की आधुनिक तकनीक का उपयोग माइनिंग सेक्टर में सुनिश्चित करने का काम हो रहा है। आज मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी में केवल एक वर्ष में ही राजस्थान शीर्ष पर आ गया है। निदेशक माइंस भगवती प्रसाद कलाल ने कहा कि राजस्थान में क्रिटिकल और स्ट्रेटिजिक मिनरल्स के व्यापक डिपोजिट मिलने की उम्मीद है। भारत सरकार के खान मंत्रालय के निदेशक योगेन्द्र भांभू ने कहा कि देश में माइनिंग सेक्टर में रिफार्मस लागू हो रहे हैं। हमें एक दूसरे के आइडियाज और बेस्ट प्रेक्टिसेज को साझा करना होगा।</p>
<p>जीएसआई के निदेशक संजय सिंह ने कहा कि क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की प्रोसेसिंग में चीन का एकाधिकार है। हमारे यहां अच्छे डिपोजिट्स होने के बावजूद हमें समन्वित प्रयासों से अभी काफी काम करना होगा। एनएमईटी के जयन्त गुप्ता ने कहा कि माइनिंग एक्सप्लोरेशन में निजी क्षेत्र की भागीदारी के संबंध में आवश्यक प्रावधानों व लाइसेंस प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। भारतीय गुणवत्ता परिषद के वरिष्ठ निदेशक डॉ. एके झा ने प्राइवेट प्लेयर्स के लिए भी गुणवत्ता और मानव संसाधन पर खास जोर दिया। क्रिटिकल मिनरल ट्रेकर्स के निदेशक ऑपरेशन विक्रम के. वाई ने कहा कि एआई के उपयोग की अहमियत बताई। आईबीएम के चन्द्रेश कुमार बोहरा ने कहा कि 29 क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स के एक्सप्लोरेशन के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी तय की जा रही है। उन्होंने इसमें रेवेन्यू शेयर और रिवर्स ऑक्शन के बारे में बताया। भूविज्ञान विभाग के डॉ. सीपी दाधीच ने राजस्थान के मिनरल संपदा की जानकारी दी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jan 2025 10:05:48 +0530</pubDate>
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