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                <title>उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने लागू की नई योजना : प्रदेश के लाखों युवाओं को मिलेगा रोजगार, राठौड़ ने कहा- युवाओं को उद्योगों से जोड़ने के लिए नीतियां बना रही सरकार </title>
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                        <![CDATA[स योजना तहत राज्य सरकार की ओर से शत प्रतिशत ब्याज का पुनर्भरण किया जाएगा। साथ ही, 50 हजार रुपए तक की मार्जिन मनी और सीजीटीएमएसई शुल्क (सूक्ष्म और लघु उद्यम क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट शुल्क) के पुनर्भरण का भी प्रावधान किया गया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/industrycommerce-department-has-implemented-a-new-scheme-lakhs/article-139940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/col-rajyavardhan-rathore.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 12 जनवरी को राज्यस्तरीय युवा महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना का शुभारंभ किया गया। इसके बाद उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने इस योजना की गाइडलाइन जारी कर दी है। जल्द ही आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के एक लाख युवाओं को उद्यमी बनाना है। विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार सेक्टर में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के लिए 10 लाख रुपए तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना तहत राज्य सरकार की ओर से शत प्रतिशत ब्याज का पुनर्भरण किया जाएगा। साथ ही, 50 हजार रुपए तक की मार्जिन मनी और सीजीटीएमएसई शुल्क (सूक्ष्म और लघु उद्यम क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट शुल्क) के पुनर्भरण का भी प्रावधान किया गया है। </p>
<p><strong>यह भी मिलेगा फायदा </strong><br />कर्नल राठौड़ ने बताया कि 8वीं से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण आवेदकों को सेवा एवं व्यापार क्षेत्र के लिए 3.5 लाख रुपए एवं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 7.5 लाख रुपए तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, अधिकतम 35 हजार रुपए की मार्जिन मनी भी दी जाएगी। स्नातक, आईटीआई और अधिक शैक्षणिक योग्यता वाले आवेदकों को सेवा और व्यापार क्षेत्र के लिए 5 लाख रुपए तथा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 10 लाख रुपए तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, 50 हजार रुपए तक की मार्जिन मनी भी दी जाएगी।</p>
<p><strong>युवा कर सकेंगे स्वयं का रोजगार स्थापित </strong><br />राठौड़ ने बताया कि राज्य सरकार बड़े निवेश के साथ-साथ प्रदेश के युवाओं को भी उद्योगों से जोड़ने के लिए योजनाएं और नीतियां बना रही है। इसी क्रम में लागू की गई मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना से प्रदेश के युवा स्वयं का रोजगार स्थापित कर सकेंगे।  </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 10:02:55 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - खाद्य सुरक्षा से अब नहीं कटेंगे किसानों के नाम, केंद्र ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर दिए निर्देश</title>
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                        <![CDATA[एफपीओ के सदस्यों को राशन से वंचित करने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---farmers--names-will-no-longer-be-removed-from-the-food-security-scheme--the-center-has-issued-instructions-to-the-state-government-in-a-letter/article-129498"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news45.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें संगठित करने के लिए बनाए गए किसान उत्पादक संगठनों(एफपीओ) से जुड़े किसानों को अब बड़ी राहत मिली है। अब इन किसानों के नाम खाद्य सुरक्षा सूची से नहीं काटे जाएंगे। राज्य के कई जिलों में रसद विभाग की ओर से इन किसानों को नोटिस दिए जा रहे थे कि वे एफपीओ से जुड़े हैं, इसलिए उनका नाम खाद्य सुरक्षा योजना से हटाया जाएगा। इस कार्रवाई से किसानों में भारी रोष था और कई जगह किसानों ने राशन बंद होने के विरोध में अपने एफपीओ से इस्तीफे भी दे दिए थे। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर निर्देश दिए हैं कि एफपीओ से जुड़े किसानों के नाम खाद्य सुरक्षा सूची से न काटे जाएं। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि एफपीओ में सदस्यता लेने का मतलब यह नहीं है कि किसान की आर्थिक स्थिति सुधर गई है या वह पात्रता से बाहर हो गया है।</p>
<p><strong>किसानों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू</strong><br /> राजस्थान में अब तक 900 से अधिक किसान उत्पादक संगठन पंजीकृत हो चुके हैं। ये संगठन किसानों को संगठित करने, बाजार तक सीधी पहुंच दिलाने और उचित दाम दिलाने के लिए कार्य कर रहे हैं। केंद्र सरकार एफपीओ को मजबूत करने के लिए विशेष योजनाएं भी चला रही है, ताकि छोटे और सीमांत किसानों को सीधी आर्थिक मदद मिल सके। केंद्र के पत्र के बाद अब राज्य सरकार ने भी एफपीओ से जुड़े किसानों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे उन हजारों किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जिनका राशन रोक दिया गया था या जिनके नाम सूची से हटाने की तैयारी थी। कोटा में भी कई एफपीओ सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिनके माध्यम से किसान खाद-बीज, मशीनरी और विपणन की सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं। अब जब केंद्र ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एफपीओ सदस्यता का खाद्य सुरक्षा योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा, तो किसानों में भी उत्साह देखा जा रहा है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />- एफपीओ से जुड़े किसानों के नाम खाद्य सुरक्षा सूची से नहीं हटेंगे।<br />- केंद्र सरकार ने राज्य को पत्र भेज कार्रवाई पर रोक के दिए निर्देश।<br />- अब तक 900 से अधिक एफपीओ पंजीकृत।<br />- राशन बंद होने पर कई किसानों ने दिए थे इस्तीफे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के सदस्यों को राशन से वंचित करने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में गत 8 अक्टूबर को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि खाद्य सुरक्षा योजना (एफएसए) के तहत अपात्र लाभार्थियों की पहचान अभियान के बीच रसद विभाग ने अब किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के सदस्य भी अपात्र के दायरे में आ रहे हैं। ऐसे में कोटा जिले सहित पूरे प्रदेश में एफपीओ सदस्यों को राशन कार्ड से नाम हटाने के नोटिस जारी किए गए हैं। सरकार की ओर से गिव अप अभियान के तहत मुफ्त का राशन लेने वाले अपात्रों का राशन कार्ड से नाम हटाने की कार्रवाई की जा रही है। किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत होते हैं। ऐसे में उन्हें भी बड़ी कंपनियों की तरह मान लिया गया। इसके बाद राशनकार्ड से नाम हटाने के लिए संगठनों के किसानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।  </p>
<p>केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर निर्देश दिए हैं कि एफपीओ से जुड़े किसानों के नाम खाद्य सुरक्षा सूची से न काटे जाएं। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। <br /><strong>- गिरिराज सिंह, नायब तहसीलदार</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Oct 2025 14:55:53 +0530</pubDate>
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                <title>बैल पालन पर मिलेगा 30 हजार का अनुदान :  आवेदन संख्या तेजी से बढ़ने की संभावना, अब तक 19 आ गए आवेदन</title>
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                        <![CDATA[सरकार द्वारा बैलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति किसान 30,000 रुपए का अनुदान देने की घोषणा के बाद जिले में किसानों का उत्साह बढ़ गया है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bulls-are-finally-available--a-subsidy-of-30-000-rupees-will-be-available-for-bull-rearing/article-127336"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(4)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। परंपरागत खेती में बैलों का महत्व एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। सरकार द्वारा बैलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति किसान 30,000 रुपए का अनुदान देने की घोषणा के बाद जिले में किसानों का उत्साह बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार, कृषि विभाग की इस योजना के तहत बैल आधारित खेती को बढ़ावा देने और पशुधन संरक्षण के उद्देश्य से किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक कोटा जिले से 19 किसानों ने आवेदन कर दिए हैं और आने वाले दिनों में आवेदन संख्या तेजी से बढ़ने की संभावना है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कुछ समय पहले तक किसानों को बैल आधारित खेती के लिए प्रेरित करना मुश्किल था। कई बार तो विभागीय टीम को गांव-गांव जाकर बैल खोजने पड़ते थे, लेकिन जैसे ही अनुदान योजना की जानकारी किसानों तक पहुंची, वे स्वयं आवेदन करने आगे आ रहे हैं।</p>
<p><strong>अब खुद आवेदन लेकर पहुंचने लगे किसान</strong><br />जानकारी के अनुसार अब हालात बदल गए हैं। कुछ समय पहले तक कृषि विभाग के अधिकारियों को जिले में बैल खोजने के लिए गांव-गांव मशक्कत करनी पड़ रही थी। परंपरागत खेती को बचाने के लिए सरकार ने जब बैल आधारित खेती करने वाले किसानों को 30 हजार रुपए का अनुदान देने की योजना लागू की, तो तस्वीर पूरी तरह बदल गई। अब किसान खुद आवेदन लेकर विभाग के पास पहुंचे लगे हैं। कृषि विभाग के अनुसार, योजना की घोषणा के बाद अब तक 19 किसानों ने आवेदन कर दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में और भी किसान आवेदन करेंगे। विभागीय अधिकारी गांव-गांव जाकर योजना का प्रचार कर रहे हैं। कई किसानों ने कहा कि यह योजना उनके लिए खेती का बोझ हल्का करेगी। बैलों से खेती करने से न केवल लागत घटेगी बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी।</p>
<p><strong>योजना का उद्देश्य</strong><br />- पारंपरिक खेती को बढ़ावा देना।<br />- बैलों की नस्ल संरक्षण करना।<br />- रासायनिक खाद और डीजल पर बढ़ती निर्भरता कम करना।<br />- छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक संबल देना।</p>
<p><strong>गांवों में घट रही बैलों की संख्या</strong><br />विभागीय अधिकारियों के अनुसार पहले हर गांव में बैलों की दर्जनों जोड़ियां देखने को मिलती थी। मगर अब समय बदल चुका है, और अधिकतर किसानों ने बैलों को त्याग दिया है। सिंचाई के साधनों से वंचित किसानों ने भी आधुनिक उपकरणों का सहारा लेकर बैलों की उपयोगिता को भुला दिया है। यही कारण है कि पशुधन की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। पहले कई स्थानों पर बड़े पशु मेले आयोजित किए जाते थे। इन मेलों में लाखों रुपए के बैल खरीदे और बेचे जाते थे, लेकिन जब से खेतों में बैलों का उपयोग कम हुआ, पशु मेलों का अस्तित्व भी संकट में आ गया। ऐसे में सरकार ने बैलों से खेती को बढ़ावा देने के लिए यह योजना शुरू की है।</p>
<p>लघु और सीमांत किसानों के लिए यह योजना काफी अच्छी है। अनुदान मिलने से अब बैलों के माध्यम से खेती को बढ़ावा मिलेगा। सरकार और कृषि विभाग का यह प्रयास काफी सराहनीय है।<br /><strong>- जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p>सरकार द्वारा बैलों की खेती करने वालों को प्रति किसान 30,000 रुपए का अनुदान देने की घोषणा के बाद जिले में किसानों का उत्साह बढ़ गया है। अब तक कोटा जिले से 19 किसानों ने आवेदन किए हैं और इनकी प्रशासनिक स्वीकृति जारी भी कर दी है।<br /><strong>- अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 16:35:25 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - पॉलीथिन कैरी बैग का निर्माण करना पड़ेगा भारी</title>
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                        <![CDATA[प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने पुरस्कार की बढ़ाई राशि।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---manufacturing-polythene-carry-bags-will-be-costly/article-124675"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(3)48.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्लास्टिक कचरा दुनिया में प्रदूषण फैलाने में सबसे बड़ा खतरा बन रहा है। देश में भी प्लास्टिक पॉलिथीन को कम करने के लिए इस पर अलग-अलग तरीके से बैन किया गया है। आमजन को जागरुक करने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी प्लास्टिक पॉलिथीन से लोगों का मोह नहीं छूट रहा है। बाहर से हरेक सामान पॉलिथीन में पैक होकर आ रहा है। अब राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सिंगल यूज प्लास्टिक एवं प्लास्टिक कैरी बैग का उपयोग बंद करवाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने का निर्णय किया है। इसके प्रतिबंध पर प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने पुरस्कार योजना लागू की है।  पूर्व में इस योजना के अंतर्गत प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग अथवा सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं का निर्माण करने वाले इकाइयों व उद्योगों की सूचना देने पर पांच हजार रुपए का पुरस्कार निर्धारित था। अब मंडल द्वारा इस योजना में संशोधन करते हुए पुरस्कार राशि को बढ़ाकर पंद्रह हजार रुपए कर दिया गया है।  </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला </strong><br />सिंगल यूज प्लास्टिक सर्वाधिक खतरनाक है। इसकी बिक्री पर बैन लगा हुआ है लेकिन इसके बाद भी यह बाजार में खुलेआम बिक रही है। दैनिक नवज्योति में गत 9 मार्च को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें बताया था कि शहर की थोक फल सब्जीमंडी में पॉलीथिन का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। यहां पर सभी विक्रेता पॉलीथिन के साथ ही कारोबार करने में जुटे हुए हैं। मंडी परिसर में दिनभर सब्जियों की बिक्री पॉलीथिन में ही हो रही है। थैलियों में सामग्री लाने और ले जाने सुविधाजनक होने के कारण विक्रेता से लेकर ग्राहक तक इसका उपयोग करता है। दिनभर के कारोबार के बाद ज्यादातर पॉलीथिन कचरे के रूप में तब्दील हो जाती है। देश में 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध है। जबकि 75 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक बैग पर पहले से ही बैन लगा हुआ है। प्रतिबंध के बावजूद थोक फलमंडी का कारोबार पॉलीथिन के बल पर हो रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग इस सम्बंध में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। ऐसे में इनका धड़ल्ले से संचालन हो रहा है। </p>
<p><strong>पुरस्कार राशि में किया संशोधन</strong><br />मंडल के अधिकारियों के अनुसार भारत सरकार के  पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार देशभर में चिन्हित सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री एवं उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। इनमें प्लास्टिक स्टिक वाले ईयर बड्स, गुब्बारों की प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक झंडे, कैंडी और आइसक्रीम की प्लास्टिक स्टिक, मिठाई के डिब्बों के चारों ओर लपेटने वाली प्लास्टिक फिल्म, आमंत्रण पत्रों और सिगरेट पैकेट पर चढ़ाई जाने वाली प्लास्टिक शीट, 100 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंधित हैं। प्रतिबंध के बाद भी इनका बाजार में धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। अब इस प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जनसहभागिता को बढ़ावा देने के लिए पुरस्कार योजना लागू की है। अब मंडल द्वारा इस योजना में संशोधन करते हुए पुरस्कार राशि को बढ़ाकर पंद्रह हजार रुपए कर दिया गया है। प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग अथवा सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं का निर्माण करने वाली किसी इकाई की विश्वसनीय सूचना देने पर सूचना दाता को पंद्रह हजार रुपए का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।</p>
<p>अब प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग अथवा सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं का निर्माण करने वाले इकाइयों व उद्योगों की सूचना देने पर पंद्रह हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। आमजन सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करें और यदि कहीं इनके निर्माण की जानकारी हो तो इसकी जानकारी तुरन्त विभाग को उपलब्ध  कराएं।<br /><strong>- योग्यता सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Aug 2025 14:54:23 +0530</pubDate>
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                <title>कृषक उपहार योजना में संशोधन को स्वीकृति, ई-नाम पोर्टल पर कृषि जिंसों की बिक्री को मिलेगा प्रोत्साहन</title>
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                        <![CDATA[इस योजना का लाभ उन किसानों को ही मिलेगा जो ई-नाम पोर्टल के माध्यम से बिक्री करते हुए ई-पेमेंट (इलेक्ट्रॉनिक भुगतान) प्रणाली से भुगतान प्राप्त करते हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amendment-in-farmers-scheme-will-be-encouraged-to/article-123128"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws28.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने किसानों को पारदर्शी और डिजिटल माध्यम से कृषि जिंसों की बिक्री के लिए प्रोत्साहित करने के लिए संचालित ‘कृषक उपहार योजना’ में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। अब इस योजना का लाभ उन किसानों को ही मिलेगा, जो ई-नाम पोर्टल के माध्यम से बिक्री करते हुए ई-पेमेंट (इलेक्ट्रॉनिक भुगतान) प्रणाली से भुगतान प्राप्त करते हैं। </p>
<p>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को कृषि विपणन विभाग द्वारा भिजवाए गए प्रस्ताव के अनुसार अब उन्हीं किसानों को उपहार कूपन जारी किया जाएगा, जिनकी जिंसों की बिक्री ई-नाम पोर्टल पर दर्ज हुई हो और उसका भुगतान ई-पेमेंट के माध्यम से प्राप्त किया गया हो। योजना के वर्तमान स्वरूप में देखा जा रहा था कि ई-नाम पर कृषि जिंस के विक्रय पर्चियों पर जारी कूपन की तुलना में ई-पेमेंट पर जारी कूपन की संख्या काफी कम है। अब केवल ई-पेमेंट पर ही उपहार कूपन जारी किए जाने से ई-नाम पोर्टल पर बिक्री के साथ-साथ किसान और व्यापारी तत्काल एवं सुरक्षित डिजिटल लेन-देन के लिए प्रेरित होंगे। </p>
<p>संशोधित योजना में ई-पेमेंट से प्राप्त कृषि उपज विक्रय की प्रति 10 हजार रूपए की राशि एवं इसके गुणकों में उपहार कूपन ई-नाम सॉफ्टवेयर द्वारा जारी किए जा सकेंगे। प्रत्येक 6 माह में मंडी स्तर पर ड्रॉ निकालकर 50,000 रूपए का प्रथम पुरस्कार 30 हजार रूपए का द्वितीय पुरस्कार और 20 हजार रूपये का तृतीय पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Aug 2025 17:57:57 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - जांच कमेटी की रिपोर्ट पर एक दर्जन ग्राम पंचायतों की निविदा निरस्त</title>
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                        <![CDATA[दैनिक नवज्योति अखबार ने हमारी शिकायत को प्रमुखता से उठाकर हमें न्याय दिलाया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/effect-of-news---tenders-of-a-dozen-gram-panchayats-cancelled-on-the-report-of-the-investigation-committee/article-122371"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>हिंडोली। दैनिक नवज्योति द्वारा शिकायतों की खबर प्रमुखता से छपने पर हिंडोली पंचायत समिति द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट पर विकास अधिकारी रामकुमार चौधरी ने संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को एक दर्जन ग्राम पंचायत के मनरेगा योजना की टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। विकास अधिकारी रामकुमार चौधरी ने बताया कि 24 जुलाई को हिंडोली पंचायत समिति क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायत मुख्यालय पर मनरेगा योजना एवं आरडी योजना के अंतर्गत सामान सप्लाई के टेंडर हुए थे। टेंडर प्रक्रिया के अंतर्गत एक दर्जन ग्राम पंचायत द्वारा टेंडर प्रक्रिया में धांधली के आरोप लग रहे थे। कुछ ग्राम पंचायत में संवेदकों के फार्म से डीडी गायब होने की शिकायत मिल रही थी। मिली शिकायतों के आधार पर हिंडोली पंचायत समिति द्वारा तीन सदस्य जांच कमेटी बनाई गई, जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट विकास अधिकारी रामकुमार चौधरी को सौंपी और विकास अधिकारी चौधरी ने ग्राम पंचायत सावंतगढ़, रामचंद्रजी का खेड़ा, आकोदा, चेता, बड़गांव, रुणीजा, छाबड़िया का नया गांव, गोठड़ा, पगारा, टोकड़ा, दबलाना, भवानीपुरा ग्राम पंचायत की निविदा प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। संवेदको ने दैनिक नवज्योति अखबार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दैनिक नवज्योति अखबार ने हमारी शिकायत को प्रमुखता से उठाकर हमें न्याय दिलाया है। </p>
<p>तीन सदस्य जांच कमेटी ने शुक्रवार दोपहर को अपनी रिपोर्ट मैंरे को सौंपी और मैंने रिपोर्ट का गहनता से अध्ययन किया। जांच कमेटी ने एक दर्जन ग्राम पंचायत में धुंधली के सबूत मिलने पर निविदाओं को निरस्त कर दिया है। <br /><strong>- रामकुमार चौधरी, विकास अधिकारी, पंचायत समिति, हिंडोली। </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Aug 2025 15:15:48 +0530</pubDate>
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                <title>12 हजार स्कूटियां बांटेंगे, गुरुकुल योजना पूरे साल चलेगी : भड़ाना</title>
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                        <![CDATA[ओमप्रकाश भड़ाना ने अपने कार्यकाल के एक साल पूरा होने के मौके पर एमबीसी वर्ग के लिए किए गए कार्यों की मीडिया से बाचतीत करते हुए जानकारी दी। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gurukul-scheme-will-distribute-12-thousand-scooters/article-118746"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer142.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश भड़ाना ने अपने कार्यकाल के एक साल पूरा होने के मौके पर एमबीसी वर्ग के लिए किए गए कार्यों की मीडिया से बाचतीत करते हुए जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पूर्व गहलोत सरकार में वर्ग को केवल गुमराह किया गया। युवाओं को छात्रावासों में रहने के उनके अधिकार तक से वंचित रखा। यहीं नहीं एमबीसी वर्ग की छात्राओं को स्कूटियां तक नहीं बांटी गई। अब उनके समय की लंबित स्कूटियां भी बोर्ड के प्रयास से बांटी जाएगी। आगामी दिनों में एमबीसी वर्ग और कालीबाई योजना के तहत 12 हजार स्कूटियों का वितरण किया जाएगा। कहा कि गुरूकुल योजना में 500 एमबीसी वर्ग को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने के लिए 5 हजार रुपए प्रति छात्र दिए जाते हैं। मैंने खुद योजना से जुड़े 52 में से 22 स्कूलों का निरीक्षण किया, लेकिन यहां बच्चों को सालभर योजना का फायदा पूर्व सरकार ने नहीं दिया। अनियमितताएं हुई।</p>
<p>साल में एक माह ही बच्चों को फायदा मिला। 12 ऐसे स्कूल अब ब्लैकलिस्टेड कर 16 नए मापदंड पर खरे उतरने वाले स्कूलों को जोड़ा गया। अब पूरे साल योजना का संचालन होगा। पूर्व सरकार में देवनारायण बोर्ड योजना में संचालित छात्रावासों, आवासीय विद्यालयों में घोर अव्यवस्थाएं थी। जर्जर छात्रावासों के रखरखाव के लिए अब सीएम ने बजट में 5-5 लाख रुपए देने की घोषणा की गई है। 82 छात्रावासों में एमबीसी वर्ग के 60 फीसदी सीटों को नहीं भरा जा रहा था। अब हमने तय किया है कि इन सीटों पर वर्ग के छात्र ही प्रवेश ले सकेंगे। कांग्रेस के वक्त 44 छात्रावासों में स्थाई वॉर्डन नहीं थे। अब विभाग से 20 में स्थाई लगवाए गए हैं। 24 में भी जल्द वॉर्डन मिलेंगे। छात्रावासों में प्रति व्यक्ति पहले 3 हजार रुपए दिए जाते थे, अब 3250 रुपए किए गए हैं ताकि उन्हें अच्छा भोजन मिल सके। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Jun 2025 12:30:52 +0530</pubDate>
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                <title>प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में जल संसाधन विभाग को 16.50 करोड़ मंजूर, जल शक्ति मंत्रालय ने ‘हर खेत को पानी अभियान‘ के तहत दी राशि</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ‘हर खेत को पानी‘ अभियान में जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जल संसाधन विभाग को 16.50 करोड़ रुपए की केन्द्रीय सहायता राशि स्वीकृत की गई है]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-the-pradhan-mantri-agricultural-irrigation-scheme-the-ministry-of/article-117384"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/copy-of-news-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ‘हर खेत को पानी‘ अभियान में जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जल संसाधन विभाग को 16.50 करोड़ रुपए की केन्द्रीय सहायता राशि स्वीकृत की गई है। यह राशि वर्ष 2025-26 की प्रथम किश्त के रूप में अभियान अंतर्गत प्रगतिरत 84 रिपेयर-रिनोवेशन-रेस्टोरेशन (आरआरआर) कार्यों के लिए प्राप्त हुई है। अब राज्य सरकार द्वारा 40 प्रतिशत (लगभग 11 करोड़ रुपए) राशि और जोड़ी जाएगी। इस प्रकार कुल 27.50 करोड़ रुपए की लागत से कार्यों को गति मिलेगी।</p>
<p>जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि आरआरआर योजना अंतर्गत कोटा, बूंदी और टोंक जिलों में सिंचाई सुविधाओं के पुनरुद्धार के लिए 84 कार्य 11 सितम्बर, 2023 को स्वीकृत किए गए थे। इन कार्यों के पूर्ण होने से लगभग 4 हजार 404 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र को फिर से क्रियाशील हो जाएगा, जिससे 2.16 लाख से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।</p>
<p>विभागीय जानकारी के अनुसार, परियोजना की कुल लागत 142.92 करोड़ रुपए है। इसमें केन्द्र और राज्य का अंशदान 60.40 के अनुपात में है। इसके अंतर्गत केन्द्रांश 85.75 करोड़ रुपए और राज्यांश 57.17 करोड़ रुपए निर्धारित है। इसके तहत विभाग को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 15 करोड़ रुपए की केन्द्रीय सहायता प्राप्त हुई थी। वर्तमान में कार्यों की भौतिक प्रगति लगभग 65 प्रतिशत पूर्ण हो चुकी है।</p>
<p>इस योजना की प्रगति से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में संचालित ‘वंदे गंगा‘ जल संरक्षण-जन अभियान को भी गति मिलेगी। उल्लेखनीय है कि जल संसाधन मंत्री लगातार विभिन्न जिलों का दौरा कर अभियान के तहत जल संरचनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर रहे हैं। आमजन को जागरूक कर अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास कर रहे हैं। जिला प्रशासन प्रशासन स्तर पर भी जल संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-the-pradhan-mantri-agricultural-irrigation-scheme-the-ministry-of/article-117384</link>
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                <pubDate>Sat, 14 Jun 2025 16:09:28 +0530</pubDate>
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                <title>चिरंजीवी योजना शुरू करने की मांग : युवा कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन, कलक्टर को राज्यपाल के नाम का सौंपा ज्ञापन </title>
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                        <![CDATA[चिरंजीवी योजना शुरू करने की मांग को लेकर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट सर्किल पर प्रदर्शन किया। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/youth-congress-demands-a-demonstration-on-the-collectorate-a-memorandum/article-116575"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer31.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चिरंजीवी योजना शुरू करने की मांग को लेकर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट सर्किल पर प्रदर्शन किया। जयपुर शहर यूथ कांग्रेस राकेश सैनी और जयपुर ग्रामीण यूथ कांग्रेस अध्यक्ष धर्मवीर पायला के संयुक्त नेतृत्व में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना को पुनः प्रारंभ किए जाने की मांग को लेकर खासा कोठी सर्किल पर एकत्रित होकर कलेक्ट्रेट सर्किल पर पहुंचे। कलेक्टर परिसर के गेट पर चढ़कर नारेबाजी प्रदर्शन कर कलक्टर को राज्यपाल के नाम का ज्ञापन सौंपा।</p>
<p>प्रदर्शन कर रहे युवा कांग्रेस नेता रवि सिंगदर ने कहा कि सरकार चिरंजीवी योजना को बंद कर के आम और गरीब लोगों के साथ कुठाराघात कर रही है। चिरंजीवी योजना की वजह से गरीब लोगों को ईलाज कराने में आर्थिक बोझ नहीं सहना पड़ता था, लेकिन अब निजी अस्पतालों में लुटने के लिए मजबूर होंगे। सरकार प्रदेश की जनता के हित में इस योजना को फिर से शुरू करे।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Jun 2025 16:50:18 +0530</pubDate>
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                <title>साइकिल शेयरिंग योजना बंद, कबाड़ हुई साइकिलें</title>
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                        <![CDATA[कम्पनी द्वारा निगम को राशि नहीं देने पर एक बार कम्पनी की साइकिलों को भी जब्त किया गया था। यह योजना नगर निगम के पिछले बोर्ड के समय शुरु की गई थी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cycle-sharing-scheme-stopped--bicycles-became-junk/article-115956"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(1)39.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में शुरु की गई साइकिल शेयरिंग योजना के बंद होते ही योजना के तहत उपयोग ली जा रही साइकिलें कबाड़ हो गई हैं। वर्तमान में उनमें से कई साइकिलें दशहरा मैदान में ढेर में धूल खा रही हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में साइकिल शेयरिंग योजना शुरु की गई थी। इस योजना के तहत नगर निगम की ओर से शहर में विशेष रूप से नए कोटा क्षेत्र में साइकिल स्टैंडों के लिए शेड तैयार करवाए गए थे। जहां निजी कम्पनी के माध्यम से किराए पर साइकिलें दी जाती थी।  कोचिंग स्टूडेंट व आमजन इन स्टैंडों से साइकिल निर्धारित समय के लिए किराए पर लेकर उनका उपयोग कर रहे थे। जानकारी के अनुसार शहर में निगम की ओर से करीब 14 केन्द्र बनाए गए थे। जिनमें तलवंडी व जवाहर नगर समेत कई जगह शामिल थी। इस योजना के तहत निजी कम्पनी द्वारा निगम को राजस्व दिया जाता था। लेकिन पूर्व में कम्पनी द्वारा निगम को राशि नहीं देने पर एक बार कम्पनी की साइकिलों को भी जब्त किया गया था। यह योजना नगर निगम के पिछले बोर्ड के समय शुरु की गई थी। </p>
<p><strong>योजना का समय हुआ पूरा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के राजस्व अधिकारी विजय अग्निहोत्री ने बताया कि साइकिल शेयरिंग योजना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शुरु की गई थी। यह योजना दस साल के लिए थी। योजना का समय पूरा होते ही यह बंद हो गई।  योजना के तहत किराए पर देने वाली साइकिलें निजी कम्पनी की थी। लेकिन जगह नगर निगम ने दी रखी थी। जब योजना का समय पूरा हो गया  तो निगम ने उन जगहों को खाली कराया। उन जगहों का अन्य कार्य में उपयोग किया जाना है। ऐसे में कम्पनी द्वारा जब साइकिलें नहीं उठाई गई तो उन्हें निगम ने एक निर्धारित स्थान पर सुरक्षित रखवा दिया। दशहरा मैदान स्थित श्रीराम रंगमंच के पीछे ये वही साइकिलें रखी हुई है। पिछले कई महीने से रखी होने से उन साइकिलों पर धूल जम गई होगी। इधर नगर निगम कोटा दक्षिण के नेता प्रतिपक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि यह योजना निगम के माध्यम से संचालित की गई थी। निजी कम्पनी द्वारा निगम को निर्धारित राशि नहीं देने पर निगम ने साइकिलें जब्त की थी। संभावना है कि ये वही जब्त साइकिलें होंगी। ये साइकिलें नगर निगम की नहीं कम्पनी की है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 May 2025 16:24:46 +0530</pubDate>
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                <title>16 हजार की डिग्री के लिए बालिकाएं चुका रही 50 हजार, रेगुलर स्कीम में 3 हजार रुपए फीस</title>
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                        <![CDATA[रेगुलर स्कीम के मुकाबले सेल्फ फाइनेंस स्कीम में ढाई गुना ज्यादा लग रही फीस ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/girls-are-paying-50-thousand-for-a-degree-of-16-thousand/article-115954"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(3)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज जेडीबी आर्ट्स में एमए होम साइंस व जीपीईएम पिछले 7 साल से सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहे हैं। जिससे बालिकाओं की शिक्षा महंगी हो गई। नतीजन, 16 हजार की डिग्री के लिए उन्हें 50 हजार रुपए फीस चुकानी पड़ रही है। सरकारी कॉलेज होने के बावजूद महंगी फीस, बालिकाओं के शिक्षा में बढ़ते कदम पर बेड़ियां बन गई। दरअसल, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (जीपीईएम) व होम साइंस बीए तक तो सरकारी स्कीम के तहत संचालित होता है। जिसमें कोर्स फीस परईयर 3 हजार रुपए लगती है। जबकि, एमए में यही कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चलने से 20 हजार रुपए परईयर हो गई।  महंगी फीस के कारण बालिकाओं को बारां-झालावाड़ की ओर रुख करना पड़ रहा है। वहीं, इंडस्ट्रीज में डिमांड होने के बावजूद छात्राएं इन पाठ्यक्रमों में एडमिशन नहीं ले पा रही। </p>
<p><strong>जीपीईएम :</strong> 40 हजार कोर्स व 10 हजार एग्जाम फीस: राजकीय कला कन्या महाविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत एमए जीपीईएम कोर्स की फीस पर-ईयर 20 हजार रुपए है। साल में दो बार सेमेस्टर एग्जाम होते हैं। पर-सेमेस्टर एग्जाम फीस ढाई हजार रुपए है, ऐसे में एक साल के 25 हजार रुपए होते हैं और दो साल का पीजी कोर्स पूरा करने के लिए छात्राओं को 50 हजार रुपए चुकाने पड़ते हैं। ग्रामीण परिवेश से आने वाली छात्राओं के लिए इतनी महंगी फीस दे पाना चुनौतिपूर्ण रहता है। ऐसे में कई छात्राएं रुचि होने के बावजूद इस कोर्स में दाखिला नहीं ले पाती। </p>
<p><strong>रेगुलर स्कीम में 3 हजार रुपए फीस</strong><br />जीपीईएम विभागाध्यक्ष प्रो. बिंदू चतुर्वेदी बताती हैं, यदि गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (जीपीईएम) कोर्स सरकारी स्कीम में संचालित किया जाए तो इसकी फीस 20 हजार की बजाय 3 हजार रुपए सालाना हो जाएगी। वहीं, सेमेस्टर एग्जाम फीस 5 हजार रुपए जोड़कर 8 हजार रुपए में एक साल पूरा हो जाएगा। इस तरह दो साल की यह डिग्री 50 हजार की जगह 16 हजार रुपए में पूरी हो जाएगी। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा छात्राएं दाखिला ले पाएंगी और उन पर आर्थिक भार भी नहीं पड़ेगा। टैक्सटाइल डिजाइनिंग के क्षेत्र में प्रतिभाएं उभर सकेंगी। </p>
<p><strong>होम साइंस : 15 हजार की जगह लग रहे 30 हजार</strong><br />होम साइंस की विभागाध्यक्ष दीपा स्वामी बताती हैं, एमए होम साइंस भी सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहा है। इसकी पर-ईयर फीस 10 हजार रुपए तथा 5 हजार रुपए सेमेस्टर एग्जाम फीस है। ऐसे में एक साल में 15 हजार रुपए खर्च होते हैं। इस तरह दो साल की डिग्री पूरी करने के लिए 30 हजार लगते हैं। जबकि, यही कोर्स यूजी में सरकारी मोड पर संचालित होने से इसकी फीस परईयर 3 हजार रुपए ही है। </p>
<p><strong>साइड इफेक्ट: हर साल खाली रहती सीटें</strong><br />कॉलेज से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश के अन्य जिलों से भी लड़कियां जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में एमए जीपीईएम में दाखिले के लिए आवेदन करती हैं। इस विषय में कुल 20 सीटें हैं, जिसके मुकाबले एडमिशन फॉर्म तो दो गुने आते हैं लेकिन फीस ज्यादा होने के चलते 10 से ज्यादा सीटें खाली रह जाती है। कॉलेज में यूजी में 1999 में यह कोर्स शुरू हुआ था। उस समय राज्य में केवल अलवर व बीकानेर में ही चलता था। डिमांड बढ़ने पर जेडीबी में पीजी में वर्ष 2018 में सेल्फ फाइनेंस स्कीम में इस कोर्स को शुरू किया था। जीपीईएम में गत वर्ष प्रिवियस में 15 तथा फाइनल में 11 सीटें खाली रह गई। होम साइंस की 40 सीटों में से आधी सीटें खाली रही थी।  </p>
<p><strong>बारां-झालावाड़ जाने को मजबूर छात्राएं</strong><br />छात्राओं ने बताया कि हाड़ौती में केवल राजकीय महाविद्यालय बारां व झालावाड़ में ही होम साइंस रेगुलर स्कीम में संचालित हो रहा है। जिसमें सरकारी फीस होने के कारण बड़ी संख्या में छात्राएं कोटा से बारां-झालावाड़ जाने को मजबूर होती है। जबकि, कोटा में इसे सरकारी स्कीम में चलाने के लिए आयुक्तालय से लेकर विधायक मंत्री तक को ज्ञापन दे चुके हैं, इसके बावजूद समाधान नहीं हो रहा। </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं</strong><br /><strong>फीस बहुत महंगी, रेगुलर मोड पर चलाए सरकार</strong><br />मैने जीपीईएम में एमए किया है। सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चलने से कोर्स की फीस बहुत महंगा है। ऊपर से सेमेस्टर के कारण फीस और बढ़ गई। इसके अलावा प्रेक्टिकल, असाइमेंट व इंडस्ट्री विजिट सहित अन्य खर्चों को मिलाकर दो साल की डिग्री करने में 50 हजार से ज्यादा रुपए खर्च हो गए। इतनी महंगी शिक्षा से कई छात्राएं रुचि होते हुए भी यह कोर्स नहीं कर पातीं। सरकार को छात्राओं के हित में इस कोर्स को रेगुलर स्कीम में संचालित करना चाहिए। <br /><strong>-निकिता सचवानी, रिसर्चर जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p>एक साथ 20 हजार रुपए सालाना फीस जमा करवाना लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। क्योंकि, अधिकतर छात्राएं ग्रामीण परिवेश से आती हैं। जीपीईएम को रेगुलर स्कीम में चलाने के लिए शिक्षकों व आयुक्तालय से डिमांड की लेकिन कुछ नहीं हुआ। फॉर्म तो सीटों से दो गुना आते हैं लेकिन महंगी फीस के कारण छात्राएं एडमिशन नहीं ले पाती। कुछ समय पहले छात्राओं  ने होमसाइंस व जीपीईएम को रेगुलर स्कीम में करने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था। <br /><strong>-अनुश्री सक्सेना, छात्रा जेडीबी कॉलेज</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्रोफेसर </strong><br /><strong>परिधान इंडस्ट्री में रोजगार के अवसर </strong><br />जीपीएम, गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एम्पोर्ट मैनेजमेंट कोर्स होता है। इसमें कपड़ा निर्माण से लेकर डिजाइनिंग व एक्सपोर्ट-एम्पोर्ट तक की जानकारी दी जाती है। इस कोर्स में एडमिशन लेकर छात्राएं, फैशन डिजाइनिंग, परिधान उद्योग, गारमेंट व्यवसाय, बुटीक, गारमेंट इंडस्ट्री में कॅरियर बना सकती हैं। वहीं, नेट व सेट कर आरपीएससी के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में भी नौकरी पा सकती हैं। छात्राओं को जयपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा में इंडस्ट्री विजट करवाई जाती है। वहीं,  कैथून में कोटा डोरिया के उत्पादन-निर्माण दिखाया जाता है। इसमें रोजगार के असीम अवसर उपलब्ध हैं।<br /><strong>-प्रो. बिंदू चतुर्वेदी, विभागाध्यक्ष जीपीईएम, जेडीबी आर्ट्स कॅलेज</strong></p>
<p>कोटा जिले में यह एकमात्र ऐसा कॉलेज है, जहां होम साइंस में एमए कराई जाती है। लेकिन, सेल्फ फाइनेंस स्कीम में होने से फीस महंगी हो गई। जिसकी वजह से छात्राओं को बारां-झालावाड़ जाना पड़ता है। होम साइंस में प्रसार शिक्षा, इंटियर डिजाइनिंग, टेक्सटाइल, फू्रड एंड न्यूट्रीशियन तथा फर्नीचर डिजाइनिंग सीखाई जाती है। इसे रेगुलर मोड पर संचालित करवाने के लगातार प्रयास कर रहे हैं। आयुक्तालय को भी पत्र भेज चुके हैं। उम्मीद है इस सत्र से हो जाए। <br /><strong>-प्रो. दीपा स्वामी, विभागाध्यक्ष होम साइंस, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p> यह कॉलेज संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज है। पिछले 7 साल से जीपीईएम व होम साइंस कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चल रहा है। फीस बहुत महंगी है, जिसके कारण छात्राओं पर आर्थिक बोझ पड़ता है। इन कोर्सेज को सरकार द्वारा संचालित करवाने के लिए हर साल आयुक्तालय को पत्र भेजा जाता है।  हाल ही में लोकसभा स्पीकर के विशेषाधिकारी को भी इससे अवगत कराया है। उन्होंने समाधान का भरोसा दिलाया है। अब तक उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री, स्थानीय विधायकों को भी पत्रों के माध्यम से छात्राओं के हित में इन कोर्सेज को रेगुलर स्कीम में करवाने की मांग की थी। इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ। हालांकि, हमारे स्तर पर प्रयास जारी है।  <br /><strong> -प्रो. सीमा चौहान, प्राचार्य जेडीबी आर्ट्स कॉलेज कोटा</strong></p>]]>
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                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 May 2025 15:08:04 +0530</pubDate>
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                <title>आवासीय योजना लॉन्च करेगा आवासन मंडल, अर्पाटमेंट में उच्च आय वर्ग के बनेंगे फ्लैट्स </title>
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                        <![CDATA[मंडल आयुक्त रश्मि शर्मा ने बताया कि आमजन को सस्ती दरों पर आवास उपलब्ध कराने के लिए जयपुर सहित प्रदेश के अन्य शहरों में आवासीय योजनाएं लॉन्च कर रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/residential-scheme-will-launch--of-high-income-group-in/article-113747"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/awasan-madal-rhb1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आमजन के आवास का सपना पूरा करने के लिए राजस्थान आवासन मंडल प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्वतंत्र एवं बहुमंजिला आवासीय आवासीय योजनाएं लॉन्च करेगा। मंडल की 5 योजनाओं में 240 बहुमंजिला आवास एवं 187 स्वतंत्र आवास सहित कुल 427 आवासों के लिए आवेदन मांगे जाएंगे। </p>
<p>मंडल आयुक्त रश्मि शर्मा ने बताया कि आमजन को सस्ती दरों पर आवास उपलब्ध कराने के लिए जयपुर सहित प्रदेश के अन्य शहरों में आवासीय योजनाएं लॉन्च कर रहा है। उन्होंने बताया कि राजधानी जयपुर में सांगानेर स्थित प्रताप नगर आवासीय योजना के सेक्टर 26 स्थित गंगा अर्पाटमेंट में उच्च आय वर्ग के 80 फ्लैट्स बनाए जाएंगे। </p>
<p>इसी प्रकार मानसरोवर सेक्टर पांच स्थित गुलमोहर अपार्टमेंट में उच्च आय वर्ग के दो श्रेणियों के आवास 100 एवं 60 फ्लैट्स बनाए जाएंगे। शर्मा ने बताया कि बारां जिले में गजनपुरा आवासीय योजना में घरोंदा के 8, एमआईजी ए के 19, एमआईजी ब के 13 और एचआईजी के 12 स्वतंत्र आवास, बूंदी जिले की लाखेरी आवासीय योजना में एमआईजी ए के 59, एमआईजी ब के 28 और एचआईजी के 35 तथा धौलपुर जिले की बाड़ी रोड आवासीय योजना में एमआईजी ब के 2 एवं एचआईजी के 11 स्वतंत्र आवासों की योजना लाई जा रही है। उन्होंने बताया कि योजना की लांचिग का समय 12 मई को संभावित है।</p>]]>
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                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 May 2025 12:50:17 +0530</pubDate>
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