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                <title> rajnath singh - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> rajnath singh RSS Feed</description>
                
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                <title>जनरल फान वान वियतनाम के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री नियुक्त : राजनाथ सिंह ने दी बधाई, बोले-आने वाले वर्षों में भारत-वियतनाम साझेदारी निरंतर और अधिक सशक्त होगी</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जनरल फान वान जियांग को वियतनाम का उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री बनने पर शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सुरक्षा, सैन्य आदान-प्रदान और औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। राजनाथ सिंह ने विश्वास जताया कि भारत और वियतनाम की रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में और अधिक सशक्त होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/rajnath-singh-appointed-deputy-prime-minister-and-defense-minister-of/article-149675"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जनरल फान वान जियांग को वियतनाम का उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री नियुक्त किये जाने पर बधाई दी है। राजनाथ सिंह ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत वियतनाम के साथ अपने दीर्घकालिक रक्षा संबंधों को और मजबूत करने तथा सुरक्षा, सैन्य आदान-प्रदान और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने की आशा करता है।</p>
<p>उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-वियतनाम साझेदारी आने वाले वर्षों में निरंतर और अधिक सशक्त होती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 13:24:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>‘समुद्र का प्रताप’ राष्ट्र को समर्पित : 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीकी से निर्मित, देश का पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत </title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा में भारत के पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को राष्ट्र को समर्पित किया। गोवा शिपयार्ड निर्मित यह तटरक्षक बल का सबसे बड़ा जहाज है, जिसमें 60% से अधिक स्वदेशी सामग्री है। यह प्रदूषण नियंत्रण, तटीय गश्त और समुद्री सुरक्षा में सक्षम है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/majesty-of-the-sea-dedicated-to-the-nation-the-countrys/article-138515"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px10.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पोत निर्माण और समुद्री क्षमताओं के विकास में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश की बड़ी उपलब्धि के रूप में सोमवार को गोवा में पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ राष्ट्र को समर्पित किया। भारतीय तटरक्षक के इस पोत को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने बनाया है। लगभग 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ समुद्र प्रताप भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया प्रदूषण नियंत्रण पोत है और तटरक्षक बल के बेड़े का सबसे बड़ा जहाज है।</p>
<p><strong>जटिल चुनौतियों से निपटने में सक्षम :</strong></p>
<p> रक्षा मंत्री ने इस पोत को भारत के परिपक्व रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक बताया जो जटिल विनिर्माण चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम है। उन्होंने कहा  समुद्री पोत में स्वदेशी सामग्री को 90 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सिंह ने कहा कि समुद्र प्रताप को विशेष रूप से प्रदूषण नियंत्रण के लिए डिज़ाइन किया गया है, लेकिन इसकी भूमिका केवल यहीं तक सीमित नहीं है। एक ही मंच पर कई क्षमताओं के एकीकरण से यह पोत तटीय गश्त में भी प्रभावी सिद्ध होगा तथा समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेगा।</p>
<p><strong>‘समुद्र प्रताप’ की विशेषताएं :</strong></p>
<p>यह पोत उन्नत प्रदूषण पहचान प्रणालियों, समर्पित प्रदूषण प्रतिक्रिया नौकाओं और आधुनिक अग्निशमन क्षमताओं से सुसज्जित है। इसमें हेलीकॉप्टर हैंगर और विमानन सहायता सुविधाएं भी हैं, जो इसकी पहुंच और प्रभावशीलता को कई गुना बढ़ाती हैं। रक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन क्षमताओं के कारण यह पोत उबड़-खाबड़ समुद्री परिस्थितियों में भी स्थिर रूप से संचालन करने में सक्षम होगा जिससे वास्तविक अभियानों में बड़ा लाभ मिलेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 11:18:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेना की मारक शक्ति को नई धार, 79 हजार करोड़ रुपए के रक्षा सौदों को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 79,000 करोड़ रुपए के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा खरीद परिषद की बैठक में तीनों सेनाओं के लिए लॉयटर म्यूनिशन, पिनाका रॉकेट, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम, रडार, मिसाइल, सिम्युलेटर और अन्य उन्नत उपकरणों की आवश्यकता को स्वीकृति दी गई।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/defense-deals-worth-rs-79-thousand-crore-approved-to-give/article-137705"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/500-px)-(7)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए 79,000 करोड़ रुपए के रक्षा खरीद सौदों के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को हुई रक्षा खरीद परिषद की बैठक में तीनों सेनाओं के लिए आवश्यकता के आधार पर खरीद के इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।</p>
<p><strong>इन रक्षा सौदों की दी गई मंजूरी : </strong>इस वर्ष की अंतिम बैठक में मंजूर किए गए इन खरीद सौदों की कुल अनुमानित लागत लगभग 79,000 करोड़ रुपए है और इनमें सेना की तोपखाना रेजिमेंट के लिए लॉयटर म्यूनिशन सिस्टम, लो लेवल लाइट वेट रडार, पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम के लिए लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट एम्युनिशन तथा इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम मार्क-11,बोलार्ड पुल टग्स, हाई फ्रीक्वेंसी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो मैनपैक तथा हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग रेंज रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम, ऑटोमैटिक टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम, अस्त्र मार्क-11 मिसाइलें, फुल मिशन सिम्युलेटर तथा स्पाइस-1000 लॉन्ग रेंज गाइडेंस किट्स आदि की खरीद को आवश्यकता की स्वीकृति दी गई।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 11:11:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए व्यापक सुधार विकल्प नहीं, बल्कि रणनीतिक जरूरत, राजनाथ ने कहा- चुनौतियों से निपटने के लिए पुरानी व्यवस्था पर नहीं कर सकते भरोसा </title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘चाणक्य डिफेंस डायलॉग’ में कहा कि आतंकवाद और जटिल क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए सेनाओं और संस्थानों में सुधार रणनीतिक आवश्यकता है। उन्होंने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, प्रौद्योगिकी और प्रक्रियाओं में सुधार पर जोर देते हुए बताया कि यह भारत को सशक्त, सुरक्षित और विकसित बनाने की कुंजी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/in-view-of-future-challenges-comprehensive-reforms-are-not-an/article-133942"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)12.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद सहित विभिन्न क्षेत्रीय चुनौतियों के बीच सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत बनाने के लिए सेनाओं सहित सभी संस्थाओं में व्यापक सुधारों पर जोर देते हुए कहा है कि यह विकल्प नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता है। सिंह ने सेना द्वारा आयोजित सेमिनार ‘चाणक्य डिफेंस डायलॉग’ को संबोधित करते हुए कहा कि जब हम दुनिया के माहौल और अपने पड़ोस की असलियत को देखते हैं, तो एक बात बहुत साफ हो जाती है, हम भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए पुरानी व्यवस्था पर भरोसा नहीं कर सकते।</p>
<p>सिंह ने कहा कि बहुत तेजी से बदल रही है और खतरे जटिल रूप ले रहे हैं । इसीलिए सुधार अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जरूरत बन गए हैं। सिंह ने भारत को नए दौर के लिए तैयार करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि इन सुधारों की बदौलत ही भारत सशक्त, सुरक्षित और विकसित बनेगा। उन्होंने कहा- जब हम ‘सुधार से बदलाव’ की बात करते हैं, तो हम सिर्फ प्रक्रिया या नीति की बात नहीं कर रहे होते। हम सिर्फ मौजूदा हालात में बदलाव की बात नहीं कर रहे होते। हम भारत को एक नए दौर के लिए तैयार करने की बात कर रहे हैं जो इसे सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत में बदल देगा।</p>
<p>सुधारों के महत्व का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा- रिफॉर्म हमारे इंस्टीट्यूशन की एडैप्टेबिलिटी को मजबूत करते हैं, हमारे सशस्त्र बलों की फुर्ती बढ़ाते हैं और देश को अपनी किस्मत खुद बनाने का विश्वास देते हैं।</p>
<p>सिंह ने भारत के समक्ष आतंकवाद सहित विभिन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा- भारत एक ऐसे इलाके में रहता है, जहाँ कई तरह की चुनौतियाँ सामने आती हैं - आतंकवाद, अराजक तत्वों को सीमा पार से समर्थन, सीमाओं को बदलने की कोशिशें, मैरीटाइम प्रेशर और यहाँ तक कि सूचना युद्ध भी। यह मुश्किल हालात हैं, जिनके लिए लगातार सावधानी और मकसद की साफ-सफाई की जरूरत होती है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि सुरक्षित भारत के बिना हम विकसित भारत नहीं बना सकते। सशक्त भारत के बिना हम सुरक्षित भारत नहीं बना सकते। यही वह श्रृंखला है जो हमारी राष्ट्रीय उम्मीदों को एक साथ जोड़े रखती है, लेकिन बदलती दुनिया में इस श्रृंखला को मजबूत बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रेजिलएंस यानी किसी भी स्थिति के अनुसार ढलने तथा उससे निपटने की क्षमता विकसित करनी होगी।</p>
<p>सिंह ने कहा- रेजिलएंस का यह आइडिया सिर्फ थ्योरी पर आधारित नहीं है। इसे हमारे रिफ़ॉम्र्स, हमारे इंस्टीट्यूशन्स और हमारी नेशनल स्ट्रैटेजी को गाइड करना चाहिए। हमें रेजिलएंस बनाने की दिशा में इन सुधारों पर फ़ोकस करना चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि आप सभी जो यहाँ इकट्ठे हुए हैं, आज अपनी बातचीत में इस सोच को आगे बढ़ाएँगे और जब हम रेजिलएंस बनाने की बात करते हैं, तो उस रेजिलएंस का सबसे मजबूत पिलर, बिना किसी शक के, हमारी आम्र्ड फ़ोर्सेस हैं।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि जब भी एक मजबूत, सुरक्षित और विकसित भारत की बात होती है, तो सबसे पहले सशस्त्र बलों की भूमिका याद आती है। उनकी हिम्मत, अनुशासन और प्रतिबद्धता राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ हैं। उनका योगदान सीमाओं की रक्षा करने से कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा- हमारे सशस्त्र बल वहाँ स्थिरता लाती हैं, जहाँ इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसीलिए सशस्त्र बलों में सुधार और आधुनिकीकरण केवल प्रशासनिक काम नहीं हैं, बल्कि भारत के दीर्घावधि भविष्य में निवेश हैं।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार सशस्त्र बलों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा- हम सुरक्षा और संपर्क दोनों को सपोर्ट करने के लिए  सीमाओं और समुद्री ढांचा का सुविधाओं को मजबूत कर रहे हैं। हम नए प्लेटफॉर्म, प्रौद्योगिकी और स्ट्रक्चर के जरिए सेनाओं को आधुनिक बना रहे हैं। हम गति, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित  करने के लिए खरीद प्रक्रिया में सुधार कर रहे हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 15:52:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वदेशी हथियारों का प्रदर्शन रक्षा उपक्रमों की विश्वसनीयता का प्रमाण, राजनाथ सिंह ने कहा- हमारे सभी उपक्रम आत्मनिर्भरता के मजबूत स्तंभ के रूप में कर रहे काम </title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के विजन में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों की भूमिका अहम है। उन्होंने चार उपक्रमों — मुनिशन्स इंडिया, आर्मर्ड व्हीकल्स निगम, इंडिया ऑप्टेल और हिंदुस्तान शिपयार्ड — को मिनीरत्न दर्जा मिलने पर सम्मानित किया। सिंह ने बताया कि 2024-25 में 1.51 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन में 71.6% योगदान सार्वजनिक उपक्रमों का रहा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/demonstration-of-indigenous-weapons-is-proof-of-credibility-of-defense/article-132004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/6622-copy62.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने में रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के योगदान की सराहना करते हुए कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी प्लेटफार्मो का उत्कृष्ट प्रदर्शन इन उपक्रमों की विश्वसनीयता और क्षमता को साबित करता है। उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में 1.51 लाख करोड़ रुपए के रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का योगदान 71.6 प्रतिशत था।<br />सिंह ने सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया और इन उपक्रमों के कामकाज की व्यापक समीक्षा की। साथ ही उन्होंने चार उपक्रमों  मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड , आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड , इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड  और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ) को मिनीरत्न (श्रेणी-ढ्ढ) का दर्जा हासिल करने पर सम्मानित किया।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने देश के रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने में इन उपक्रमों के निरंतर योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारे सभी 16 उपक्रम देश की आत्मनिर्भरता के मजबूत स्तंभ के रूप में काम कर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर जैसे ऑपरेशनों में उनका उत्कृष्ट प्रदर्शन हमारे स्वदेशी प्लेटफार्मों की विश्वसनीयता और क्षमता को साबित करता है।</p>
<p>सिंह ने चार उपक्रमों के मिनीरत्न का दर्जा हासिल करने को रक्षा क्षेत्र में उनकी बढ़ती दक्षता, स्वायत्तता और योगदान का प्रतीक बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि 2021 में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड को सात नए उपक्रमों में बदलने से कामकाज की अधिक स्वतंत्रता, नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढावा मिला है। रक्षा मंत्री ने कहा कि अब ये चारों उपक्रम क्षमता विस्तार, आधुनिकीकरण , नए उद्यमों और सहयोगों को शुरू करने में सक्षम होंगे। रक्षा मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 1.51 लाख करोड़ रुपए का रक्षा उत्पादन हासिल किया, जिसमें रक्षा उपक्रमों का योगदान  71.6 प्रतिशत था। रक्षा निर्यात 6,695 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो भारत के स्वदेशी प्रणालियों में वैश्विक विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि ‘मेड इन इंडिया’ रक्षा उत्पादों को वैश्विक सम्मान मिल रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 17:48:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संयुक्त राष्ट्र में सुधार जरूरी : भारत नियम आधारित व्यवस्था का पक्षधर, राजनाथ ने कहा- चुनौतियों से निपटने में विफल रही यह संस्था </title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा ढांचा आज की चुनौतियों से निपटने में असफल है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन पर चिंता जताई और भारत की शांति स्थापना में भूमिका को रेखांकित किया। सिंह ने कहा- भारत नियम-आधारित व्यवस्था और वैश्विक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/reforms-are-necessary-in-the-united-nations-rajnath-a-supporter/article-129654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधारों पर जोर देते हुए कहा है कि विश्वास के संकट का सामना कर रही यह संस्था मौजूदा वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं होने के कारण चुनौतियों से निपटने में विफल रही है। रक्षा मंत्री ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि कुछ देश खुलेआम अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p>सिंह ने भारतीय सेना द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में यह बात कही। सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र में शांति सैनिकों का योगदान देने वाले देशों के सेना प्रमुखों को संबोधित करते हुए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के पुराने बहुपक्षीय ढांचे पर सवाल उठाते हुए इसमें सुधारों की वकालत की। उन्होंने कहा- हम आज की चुनौतियों का सामना पुराने बहुपक्षीय ढांचों से नहीं कर सकते। व्यापक सुधारों के बिना, संयुक्त राष्ट्र विश्वास के संकट का सामना कर रहा है। आज की परस्पर जुड़ी दुनिया के लिए, हमें एक सुधारित बहुपक्षवाद की आवश्यकता है, जो आज की वास्तविकताओं को प्रतिबंबित करे, सभी हितधारकों की आवाज बनें, समकालीन चुनौतियों का समाधान करे और मानव कल्याण पर केंद्रित हो।</p>
<p>कुछ देशों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय नियमों की खुलेआम धज्जी उडाए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत पुरानी अंतर्राष्ट्रीय संरचनाओं में सुधार की वकालत करते हुए, अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूती से कायम रखने में मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा- आजकल, कुछ देश खुलेआम अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, कुछ उन्हें कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कुछ अपने नियम बनाकर अगली सदी पर अपना दबदबा बनाना चाहते हैं। इन सबके बीच, भारत पुरानी अंतर्राष्ट्रीय संरचनाओं में सुधार की वकालत करते हुए, अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूती से कायम रखने में मजबूती से खड़ा है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुरूप  सैन्य योगदान देने वाले देशों की अधिक भूमिका की वकालत करने वाली एक आवाज है। उन्होंने कहा- जो लोग क्षेत्र में सेवा करते हैं और जोखिम उठाते हैं, उन्हें अपने मिशनों का मार्गदर्शन करने वाली नीतियों को आकार देने में एक सार्थक आवाज मिलनी चाहिए।</p>
<p>सिंह ने कहा कि भारत मानता है कि शांति स्थापना की सफलता केवल संख्या पर ही नहीं, बल्कि तैयारियों पर भी निर्भर करती है। यहां स्थित हमारे संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र (सीयूएनपीके) ने 90 से अधिक देशों के प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया है। यह केंद्र व्यापक परिद्दश्य-आधारित शिक्षा प्रदान करता है, इसमें सशस्त्र समूहों के साथ बातचीत, खतरे में मानवीय अभियानों और संकट के दौरान नागरिक सुरक्षा का अनुकरण शामिल है।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में भारत का विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा- भारत के लिए, यह सिर्फ बातचीत का विषय नहीं है, हजारों भारतीय संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले शांति और विकास के लिए काम करते हैं। यह एक प्रमुख उदाहरण है, जो भारत के वादों को प्रदर्शन के साथ जोडऩे के सिद्धांत और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सिंह ने कहा कि भारत के लिए शांति स्थापना कभी भी एक विकल्प का कार्य नहीं रहा है, बल्कि एक आस्था का विषय रहा है। उन्होंने कहा- अपनी स्वतंत्रता के आरंभ से ही, भारत अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के अपने मिशन में संयुक्त राष्ट्र के साथ द्दढ़ता से खड़ा रहा है।</p>
<p>सिंह ने कहा कि भारत महात्मा गांधी की भूमि है, जहां शांति हमारे अहिंसा और सत्य के दर्शन में गहराई से निहित है। महात्मा गांधी के लिए, शांति केवल युद्ध का अभाव नहीं, बल्कि न्याय, सछ्वाव और नैतिक शक्ति की एक सकारात्मक स्थिति थी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 15:30:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजनाथ सिंह का रक्षा लेखा विभाग को निर्देश : सेनाओं के एकीकरण में सक्रिय भूमिका, अनुसंधान और विकास की जरूरतों को दें ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण के लिए चल रही कवायद के बीच रक्षा लेखा विभाग से उनकी जरूरतों के अनुसार बजटीय समीकरणों को बनाये रखते हुए इस महत्वपूर्ण पहल में सक्रिय योगदान देने को कहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rajnath-singhs-defense-accounts-department-should-pay-attention-to-the/article-128457"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/rajnath-singh1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण के लिए चल रही कवायद के बीच रक्षा लेखा विभाग से उनकी जरूरतों के अनुसार बजटीय समीकरणों को बनाए रखते हुए इस महत्वपूर्ण पहल में सक्रिय योगदान देने को कहा है। सिंह ने बुधवार को यहां रक्षा लेखा विभाग के 278 वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि रक्षा लेखा विभाग की तीनों सेनाओं तक पहुंच है और उन्हें तीनों की जरूरतों के बारे में भलीभांति पता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब तीनों सेनाओं में एकीकरण का काम तेजी से चल रहा है तो लेखा विभाग को इस काम को सरल तथा प्रभावी बनाने के लिए अपनी भूमिका को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि लेखा विभाग के समक्ष यह चुनौती है कि वह अनुसंधान और विकास की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बजटीय समीकरणों को बरकरार रखे और एकीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाये। उन्होंने कहा कि " आज के समय में अनुसंधान और विकास की जो जरूरत है उसको देखते हुए रक्षा लेखा विभाग के पास एक बड़ी चुनौती यह है, कि किस प्रकार से वह बजटीय समीकरण को बरकरार रखते हुए अनुसंधान और विकास की राशि की प्रक्रिया को भी सुगम बनाए। </p>
<p>सिंह ने कहा कि रक्षा लेखा विभाग को तीनों सेनाओं के साथ बैठकर विचार विमर्श करना चाहिए कि वे तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण को सुविधाजनक और सुगम कैसे बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि " आप सभी, सेनाओं के साथ बैठकर, विचार-विमर्श करें और यह देखें, कि आप लोग तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण को कितना आसान बना सकते हैं। यह हमारी तीनों सेनाओं के एकीकरण में अच्छे परिणाम दे सकता है, ऐसा मेरा विश्वास है। "</p>
<p>रक्षा लेखा विभाग के महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह विभाग सशस्त्र सेनाओं और सहयोगी संगठनों के वित्तीय प्रबंधन में बड़ी भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा प्रदान की गई वित्तीय सलाह, लेखा और बजट प्रबंधन एक तरफ तो रक्षा सेवाओं की वित्तीय स्थिति को सुनिश्चित करती है वहीं दूसरी तरफ संचालन तैयारियों को भी सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि रखा लेखा विभाग ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वित्तीय मजबूती सुनिश्चित की, संसाधनों की पूर्ति की और संचालन तत्परता को बनाए रखा। उन्होंने कहा कि " यह केवल एक लेखा संगठन नहीं है , यह एक ऐसा प्रवर्तक है जो राष्ट्र के आर्थिक चक्र के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करता है। यह एक अदृश्य सेतु है जो वित्त और सशस्त्र बलों को जोड़ता है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने नई पीढी के जीएसटी सुधारों के कारण रक्षा खरीद की लागत कम होने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे अधिक से अधिक रक्षा खरीद की जा सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 01 Oct 2025 18:50:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तीनों सेनाओं का एकीकरण अब अभियानों की जरूरत : दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में गिनी जाती है हमारी सेना, राजनाथ ने कहा- पहले से अधिक जटिल हुए खतरे </title>
                                    <description><![CDATA[राजनाथ सिंह ने मौजूदा समय में थल, जल, वायु, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस के क्षेत्रों के आपस में गहराई से जुड़े होने तथा सुरक्षा के बदलते स्वरूप और खतरों की जटिलता को देखते हुए तीनों सेनाओं के एकीकरण पर बल दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/integration-of-the-three-armies-now-the-need-for-campaigns/article-128346"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(4)24.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मौजूदा समय में थल, जल, वायु, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस के क्षेत्रों के आपस में गहराई से जुड़े होने तथा सुरक्षा के बदलते स्वरूप और खतरों की जटिलता को देखते हुए तीनों सेनाओं के एकीकरण पर बल दिया है और कहा है कि आज के दौर में जिस तरह की चुनौतियां हमारे सामने आ रही हैं, उसमें बेहतर विकल्प यही है कि हम इन चुनौतियों का मिलकर सामना करें। उन्होंने कहा कि अंतर संचालन और एकीकरण अब केवल वांछनीय लक्ष्य नहीं रह गए, बल्कि अब यह संचालन जरूरत बन चुके हैं।</p>
<p>सिंह ने तीनों सेनाओं के सेमीनार को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सेनाओं को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में गिना जाता है और  हर सेना की अपनी गौरवशाली परंपरा तथा अपनी पहचान रही है। उन्होंने कहा कि लेकिन एकीकरण और तालमेल के बिना इससे जो मूल्य या अनुभव या नई चीज उस सेना ने सीखी वह उसी तक सीमित रह गई और उसका फायदा दूसरी सेना को नहीं मिला।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में सुरक्षा और खतरों का स्वरूप बदल चुका है और वे अधिक जटिल हो गए हैं इसे देखते हुए तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण जरूरी है, जिससे मिलकर चुनौतियों का सामना किया जा सके।</p>
<p>सिंह ने कहा- 21वीं सदी में सुरक्षा का स्वरूप काफी बदल चुका है। खतरे पहले से कहीं अधिक जटिल हो गए हैं। आज थल, जल, वायु , अंतरिक्ष और साइबरस्पेस यह सभी क्षेत्र आपस में गहराई से जुड़ गए हैं। ऐसे समय में कोई भी सेना यह सोचकर अलग-थलग नहीं रह सकती, कि अपने क्षेत्र में वह अकेले ही सब संभाल लेगी। आज के दौर में, जिस तरह की चुनौतियां हमारे सामने आ रही हैं, उसमें बेहतर विकल्प यही है, कि हम इन चुनौतियों का मिलकर सामना करें।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि अंतर संचालन और एकीकरण अब केवल वांछनीय लक्ष्य नहीं रह गए, बल्कि अब यह संचालन जरूरत बन चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन इस बात का प्रमाण है, कि जब हमारी सेनाएं मिलकर काम करती हैं, तो उनकी सामूहिक शक्ति कितनी बढ़ जाती है।</p>
<p>सिंह ने कहा कि अगर हमारे निरीक्षण और सुरक्षा मानक अलग-अलग रहेंगे तो मुश्किल समय में असमंजस की स्थिति पैदा होगी और निर्णय लेने की गति धीमी हो जाएगी। उन्होंने कहा- एक छोटी तकनीकी गलती भी बड़ा प्रभाव पैदा कर सकती है, लेकिन जब मानक समान होंगे, तो उस स्थिति में हमारा तालमेल भी सही होगा और हमारे सैनिकों का विश्वास भी बढ़ेगा।</p>
<p>एकीकरण की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए निरंतर संपर्क और संवाद जरूरी है। यानी, लगातार बातचीत, विचार-विमर्श और एक-दूसरे को समझने का प्रयास हमें करते रहना होगा। हर सेना को यह अनुभव होना चाहिए, कि दूसरा पक्ष उनकी परिस्थितियों और चुनौतियों को समझ रहा है। इसके साथ ही, हर सेना को एक दूसरे की परंपराओं और विरासत का सम्मान भी बनाए रखना होगा।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा- हमें यह संकल्प लेना होगा, कि हम पुराने परंपराओं को तोड़ेंगे। हम एक साथ एकीकरण की ओर बढ़ेंगे। जब हमारी तीनों सेनाएँ, एक स्वर, एक लय और एक ताल में संचालन करेंगी, तभी हम किसी भी दुश्मन को हर मोर्चे पर जवाब दे पाएँगे और राष्ट्र को समग्रता के साथ,नईं ऊंचाइयों पर ले जाएँगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 15:36:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिग-21 लड़ाकू विमान वायु सेना के बेड़े से विदा : 6 दशक तक भारत की सुरक्षा की सुनिश्चित, राजनाथ सिंह ने कहा- देश के वीरता के इतिहास में विमान का बड़ा योगदान </title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायु सेना के लड़ाकू बेड़े से विदा किए गए मिग -21 लड़ाकू विमान को शौर्य और पराक्रम का प्रतीक बताते हुए कहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mig-21-fighter-aircraft-the-security-of-india-for-6/article-127992"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(8)6.png" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायु सेना के लड़ाकू बेड़े से विदा किए गए मिग -21 लड़ाकू विमान को शौर्य और पराक्रम का प्रतीक बताते हुए कहा है कि इस विमान ने 6 दशक तक भारत की सुरक्षा सुनिश्चित की और सैन्य विमानन की यात्रा में इसका इतिहास स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। वायु सेना में 62 वर्षों तक सेवा देने वाले मिग-21 विमान को विदाई देने के लिए एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। सिंह ने इस अवसर पर वायु सेनाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी से लेकर अब तक के देश के वीरता के इतिहास में मिग -21 का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि इस विमान के लंबे इतिहास में ऐसे कई मौके आए जब इसने अपनी निर्णायक क्षमता को साबित किया। उन्होंने कहा - जब हम मिग-21 को, उसकी संचालन यात्रा से विदाई दे रहे हैं, तो मुझे लगता है, हम एक ऐसे अध्याय को विदा करने जा रहे हैं, जो न केवल भारतीय वायु सेना के इतिहास में, बल्कि हमारी पूरे सैन्य विमानन की यात्रा में स्वर्णिम अक्षरों  से लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि मिग-21 केवल एक विमानह्ल या मशीन भर नहीं है, बल्कि यह भारत और रूस के बीच गहरे संबंधों का भी एक प्रमाण है।</p>
<p>मिग -21 को वायु सेना के परिवार का अभिन्न हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि इसने हमारा आत्मविश्वास बढाने के साथ साथ हमें विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने कहा-  हम सबके लिए यह सिर्फ एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि एक परिवार के सदस्य जैसा है, जिसके साथ हमारा जुड़ाव बहुत गहरा है। मिग-21 ने हमारे विश्वास को आकार दिया, हमारी रणनीति को मजबूत किया और हमें वैश्विक मंच पर अपने आपको स्थापित करने में मदद की है। अपनी इतनी लंबी यात्रा में इसने हर चुनौती का सामना किया और हर बार अपनी काबिलियत साबित की।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने मिग -21 को लेकर आम धारणा को गलत बताते हुए कहा कि वायु सेना 60 वर्ष पुराने विमान नहीं उड़ा रही है, बल्कि इन्हें निरंतर उन्नत किया गया है। उन्होंने कहा - जब मिग-21 की बात होती है, अक्सर यह कहा जाता है कि भारतीय वायुसेना 60 साल पुराने विमान उड़ा रही थी। मैं इस अवसर पर एक जरूरी तथ्य स्पष्ट कर देना चाहता हूँ। 1960 और 1970 के दशक में जो मिग-21 विमान हमारी सेनाओं के पास आए थे, वे बहुत पहले ही सेवा से बाहर हो चुके हैं।जो मिग-21 विमान आज तक हम उड़ा रहे थे, वे अधिकतम वर्ष पुराने हैं। 40 साल का जीवन चक्र ऐसे विमान के मानक में बिल्कुल सामान्य है। कई देशों में ऐसे विमान को इतने ही समय तक सक्रिय रखा जाता है।</p>
<p>सिंह ने कहा कि मिग-21 की एक खास बात यह है कि इसे तकनीकी रूप से हमेशा उन्नत रखा गया। उन्होंने इसके लिए एचएएल की भी सराहना की। उन्होंने कहा - एक इंटरसेप्टर के तौर पर मिग-21 ने दुश्मन को रोकने का काम किया। ग्राउंड अटैक में इसने अपनी आक्रामक क्षमता दिखाई। लड़ाकू विमान के रूप में, इसने हवाई सीमाओं की रक्षा की और सिर्फ इतना ही नहीं, इसने एक ट्रैनर विमान के तौर पर भी असंख्य पायलटों  को तैयार किया। कहने का मतलब यह है कि मिग-21 ने हर उड़ान के साथ, भारत के भविष्य को और भी मजबूत किया है।  <br />रक्षा मंत्री ने कहा कि यह विमान भारत की सुरक्षा यात्रा में एक सारथी की तरह हमेशा हमारे साथ खड़ा रहा और हमें भरोसा है कि आने वाले कल में हमारी नई पीढ़ी इसी भावना के साथ रक्षा विनिर्माण  और हवाई शक्ति को और ऊँचाइयों पर ले जाएगी। उन्होंने कहा- मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में जब दुनिया भारत को देखेगी, तो कहेगी यह वो देश है, जिसने मिग-21 से शुरुआत की और आज भविष्य की प्रौद्योगिकी में दुनिया का लीडर है। यही हमारी यात्रा है, यही हमारा गौरव है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 26 Sep 2025 17:00:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>राजनाथ ने पाकिस्तान को धूल चटाने वाले सैनिकों से की बात : भारत की ताकत की परीक्षा थी 1965 का युद्ध, कहा- सेनाओं को किसी चीज की कमी नहीं होने देगी सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 1965 की लड़ाई में पाकिस्तान को धूल चटाने वाले सैनिकों से बातचीत करते हुए उन्हें आश्वस्त किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rajnath-talked-to-the-soldiers-who-dusted-pakistan-the-test/article-127321"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/capture23.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 1965 की लड़ाई में पाकिस्तान को धूल चटाने वाले सैनिकों से बातचीत करते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि मातृ भूमि की रक्षा करने वाले हर सैनिक का सम्मान तथा कल्याण सरकार की प्राथमिकता है और सैनिकों तथा सेनाओं को किसी संसाधन की कमी महसूस नहीं होने देगी।  </p>
<p>सिंह ने 1965 की लड़ाई के 60 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित समारोह में इस लड़ाई में दम खम दिखाने वाले अधिकारियों और जवानों को संबोधित किया। उन्होंने पूर्व सैनिकों तथा सेवारत सैनिकों को आश्वस्त किया कि सरकार उन्हें सम्मान से लेकर सैन्य साजो सामान तक किसी भी चीज की कमी नहीं होने देगी।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा- आज जब मैं अपने वेटरन्स के बीच हूँ, तो मैं एक संकल्प भी आपके समक्ष दोहराना चाहता हूँ। वह संकल्प यह है, कि चाहे वह सेवारत सैनिक हों, वेटरन्स हों या हमारे शहीदों के परिवारजन, हमारी सरकार के लिए हर किसी का सम्मान और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। सेनाओं का आधुनिकीकरण हो, प्रशिक्षण हो, या उपकरणों का उन्नयन हो, यह सब हम इसलिए कर रहे हैं, कि हमारा जवान कभी संसाधनों की कमी महसूस न करे।</p>
<p>इस अवसर पर 1965 की लड़ाई के बाद वीर चक्र से सम्मानित अधिकारियों लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) सतीश नाम्बियार और मेजर आर एस बेदी तथा इस लड़ाई में अपने जौहर दिखाने वाले अनेक पूर्व सैनिक मौजूद थे।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि 1965 का युद्ध सिर्फ एक छोटा-मोटा संघर्ष नहीं था, बल्कि वह भारत की ताकत की परीक्षा थी। उस दौर में जो परिस्थितियाँ थीं, उसे देखते हुए पाकिस्तान ने यह सोचा कि वह घुसपैठ से गुरिल्ला लड़ाई से और अचानक हमलों से भारत को डरा देगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत के जवानों की भावना और ताकत का पता नहीं था कि वह देश की मिट्टी की रक्षा के लिए क्या कुछ कर सकता है।</p>
<p>सिंह ने 1965 के युद्ध के दौरान फिलौरा और अन्य लड़ाईयों में सेनाओं के पराक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान की हिम्मत तोड़ दी। सेनाओं ने साबित कर दिया कि युद्ध, टैंकों से नहीं, बल्कि हौसले और द्दढ प्रतिज्ञा से जीता जाता है।</p>
<p>असल उत्तर की लड़ाई और उसमें अपनी बहादुरी से दुश्मन के अनेकों टैंकों को भस्म करने वाले परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस लड़ाई और इस रणबांकुरें के रणकौशल ने यह सिखाया कि हथियारों से वीरता का पता नहीं चलता बल्कि सैनिकों के दिल से पता चलता है। उन्होंने कहा- वह पल हर भारतीय के सीने को गर्व से चौड़ा कर देता है। उनकी वीरता हमें सिखाती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साहस, संयम और देशभक्ति का संगम, असंभव को संभव बना सकता है।</p>
<p>तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शस्त्री की इच्छाशक्ति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा- कोई भी युद्ध केवल रणक्षेत्र में नहीं लड़ा जाता, बल्कि युद्ध में जो विजय मिलती है, वह पूरे राष्ट्र के सामूहिक संकल्प का फल होता है। वर्ष 1965 के उस कठिन समय में, जब चारों ओर अनिश्चितता और चुनौतियाँ थीं, तब लाल बहादुर शास्त्री की द्दढ़ इच्छाशक्ति वाले नेतृत्व में देश ने उन चुनौतियों का सामना किया। शास्त्री ने उस दौर में न केवल निर्णायक राजनीतिक नेतृत्व दिया, बल्कि पूरे देश के मनोबल को ऊँचाई तक पहुँचाया। उन्होंने एक ऐसा नारा दिया जो आज भी हमारे हृदय में गूंजता है, ‘जय जवान, जय किसान’। इस एक नारे में हमारे वीर सैनिकों के सम्मान के साथ-साथ हमारे अन्नदाताओं का गौरव भी शामिल था।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से ही राष्ट्र के रूप में भारत अपने पड़ोसियों के मामले में उतना भाग्यशाली नहीं रहा है। हमेशा देश के समक्ष किसी न किसी तरह से चुनौतियां आई हैं, लेकिन भारतवासियों की यही विशेषता है, कि वे चुनौतियों को प्रारब्ध मानकर नहीं बैठ गए।  हमने मेहनत की और अपने प्रारब्ध का निर्माण, अपनी नियति का निर्माण खुद किया</p>
<p>‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान स्वदेशी हथियारों की कामयाबी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा- किसी भी राष्ट्र का वास्तविक भाग्य, उसके खेतों में, कारखानों में, प्रयोगशालाओं में और रणभूमि में बहाए गए पसीने से बनता है। हमारे नागरिकों ने अब तक यह सिद्ध किया है, कि भारत अपना भाग्य किसी और के भरोसे नहीं छोड़ता, भारत अपना भाग्य खुद गढ़ता है। इसका एक उदाहरण हमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी देखने को मिला। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 15:33:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रक्षा मंत्रालय का बड़ा कदम : नई खरीद नियमावली 2025 को मंजूरी, आत्मनिर्भरता और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा</title>
                                    <description><![CDATA[ रक्षा मंत्रालय ने सुधारों की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए राजस्व खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित, सरल, सक्षम और युक्तिसंगत बनाने के लिए नई रक्षा खरीद नियमावली 2025 को मंजूरी दे दी है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ministry-of-defense-major-steps-new-purchase-rules-2025-will/article-126853"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/rajnath-singh-3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने सुधारों की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए राजस्व खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित, सरल, सक्षम और युक्तिसंगत बनाने के लिए नई रक्षा खरीद नियमावली 2025 को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यालय ने रविवार को बताया कि रक्षा मंत्री ने नयी नियमावली को मंजूरी दे दी है। बजट अनुमान 2025 में राजस्व खरीद का बजट लगभग एक लाख करोड़ रुपए है।</p>
<p>नई नियमावली रक्षा क्षेत्र मेंआत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए सेनाओं के लिए राजस्व खरीद में तेजी लाएगी, स्टार्टअप और एमएसएमई सहित भारतीय उद्योग को सरल प्रक्रियाओं के साथ सक्षम बनाने के साथ साथ नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देगी। इसमें सहायक वित्तपोषण विकल्प और अनावश्यक दंड में ढील देकर उद्योगों के सामने आने वाली कार्यशील पूंजी संबंधी समस्याओं को कम किया गया है।</p>
<p>नई नियमावली से उद्योग, शिक्षा जगत और सार्वजनिक क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा अनुसंधान और विकास को कई सक्षम प्रावधानों के साथ बढ़ावा मिलेगा। इसमें रक्षा राजस्व खरीद और उद्योग के लिए समान अवसर प्रदान करने से संबंधित विशिष्ट चिंताओं का समाधान किया गया है। नई नियमावली वित्त मंत्रालय द्वारा जारी वस्तुओं के लिए खरीद नियमावली के अनुरूप है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 14 Sep 2025 18:50:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहे सेनाएं : जीत के लिए प्रौद्योगिकी और रणनीति में महारत जरूरी, राजनाथ सिंह ने कहा- तुरंत जवाब देकर ही अपना लोहा मनवा सकेंगी सेनाएं </title>
                                    <description><![CDATA[राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्धों की बढ़ती जटिलता और अनिश्चितता के मौजूदा दौर में केवल सैनिकों या हथियारों की संख्या ही पर्याप्त नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/forces-ready-for-a-long-battle-mastery-in-technology-and/article-124962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(630-x-400-px)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्धों की बढ़ती जटिलता और अनिश्चितता के मौजूदा दौर में केवल सैनिकों या हथियारों की संख्या ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, रणनीति और युद्ध के स्वरूप के अनुरूप तुरंत उसका जवाब देने में सक्षम सेनाएं ही अपना लोहा मनवा सकेंगी। उन्होंने देश और सेनाओं को लंबी लड़ाइयों के लिए तैयार रहने तथा इसके लिए जरूरी क्षमता और संसाधनों की उपलब्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध केवल हथियारों की लड़ाई नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी, खुफिया जानकारी, अर्थव्यवस्था और कूटनीति के संयुक्त प्रयास पर निर्भर करेंगे। जो देश प्रौद्योगिकी, रणनीति और अनुकूलनशीलता के त्रिकोण में महारत हासिल कर लेगा वही सच्ची वैश्विक शक्ति के रूप में उभरेगा।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि साइबर युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानवरहित यान और उपग्रह-आधारित निगरानी भी भविष्य के युद्धों को आकार दे रही हैं। सिंह ने आर्मी वॉर कॉलेज में युद्ध, युद्धनीति और युद्ध-संघर्ष पर तीनों सेनाओं के अपनी तरह के पहले सेमिनार रण संवाद को संबोधित करते हुए प्रौद्योगिकी और चौंकाने वाली रणनीतियों के गठजोड़ को आधुनिक युद्ध की बढ़ती जटिलता तथा अनिश्चितता का मुख्य कारण बताया। उन्होंने नवाचारों और अप्रत्याशित चुनौतियों के लिए तैयार रहने की जरूरत पर बल देते हुए मौजूदा प्रौद्योगिकियों में महारत हासिल करने पर भी जोर दिया ताकि समय के साथ आगे रहा जा सके।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने भविष्य के युद्धों की अनिश्चितता तथा निरंतर बदलते स्वरूप पर कहा कि आधुनिक युद्ध अब जमीन, समुद्र और हवा तक ही सीमित नहीं रहे अब वे अंतरिक्ष और साइबरस्पेस तक भी फैल गए हैं। उपग्रह प्रणालियाँ, उपग्रह-रोधी हथियार और अंतरिक्ष कमान केंद्र शक्ति के नए साधन हैं। आज हमें केवल रक्षात्मक तैयारी की ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय रणनीति की भी आवश्यकता है। भविष्य के युद्ध केवल हथियारों की लड़ाई नहीं होंगे, वे प्रौद्योगिकी , खुफिया जानकारी, अर्थव्यवस्था और कूटनीति का संयुक्त प्रयास होंगे। जो राष्ट्र तकनीक, रणनीति और युद्ध के स्वरूप के अनुरूप ढलने के त्रिकोण में महारत हासिल कर लेगा, वही सच्ची वैश्विक शक्ति के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि यह इतिहास से सीखने और एक नया इतिहास लिखने , भविष्य का अनुमान लगाने और उसे आकार देने का समय है।</p>
<p>सिंह ने जोर देकर कहा कि केवल सैनिकों की संख्या या हथियारों के भंडार का आकार अब पर्याप्त नहीं है, क्योंकि साइबर युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानवरहित हवाई वाहन और उपग्रह-आधारित निगरानी भविष्य के युद्धों को आकार दे रहे हैं। उन्होंने सटीक निर्देशित हथियारों, वास्तविक समय की खुफिया जानकारी और डेटा-संचालित सूचना को किसी भी संघर्ष में सफलता की आधारशिला बताया।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि इसका कोई अंत नहीं है और यह अनिश्चितता युद्ध के परिणामों को बदलने की ताकत रखती है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि जब तक हम एक नवाचार को पूरी तरह से समझ पाते हैं, तब तक दूसरा उभर आता है - जो युद्ध की दिशा को पूरी तरह से बदल देता है। मानवरहित हवाई वाहन, हाइपरसोनिक मिसाइलें, साइबर हमले और एआई-संचालित निर्णय लेने जैसे उपकरण आधुनिक संघर्षों में अप्रत्याशित मोड़ ला रहे हैं। आश्चर्य के इस तत्व की सबसे खास बात यह है कि अब इसका कोई स्थायी रूप नहीं रहा। यह बदलता रहता है, हमेशा अपने साथ अनिश्चितता लेकर चलता है। और यही अनिश्चितता विरोधियों को उलझा देती है, और अक्सर युद्ध के परिणाम में निर्णायक कारक बन जाती है।</p>
<p>सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को प्रौद्योगिकी संचालित युद्ध का असाधारण उदाहरण बताते हुए कहा कि इसमें भारत ने युद्ध का मैदान और उसके नियम तय किये तथा दुश्मन को उसके लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में जो भी देश युद्ध का मैदान तय करता है, वही खेल और उसके नियमों को नियंत्रित करता है, और दूसरों के पास अपनी पसंद के विपरीत शर्तों पर प्रतिक्रिया देने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। हमारा प्रयास युद्ध के मैदान और खेल के नियमों को स्वयं निर्धारित करना होना चाहिए, जिससे विरोधी को वहाँ लडऩे के लिए मजबूर किया जा सके, ताकि बढ़त हमेशा हमारे पास रहे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 27 Aug 2025 17:41:34 +0530</pubDate>
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