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                <title>पार्सल डिलीवरी की आड़ में मोबाइल गबन : कंपनी के कर्मचारी ने ही गायब किए 200 मोबाइल, पुलिस ने किया धोखाधड़ी का खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[कंपनी के ही एक अन्य कर्मचारी, सुरेंद्र सिंह ने बताया कि कंपनी के स्टॉक से 200 मोबाइल गायब हो गए थे, जिनकी कीमत करीब 20 लाख रुपये थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/under-the-guise-of-parcel-delivery-the-employee-of-a/article-104347"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/pze-(2).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पुलिस थाना मालपुरा गेट की टीम ने संगठित धोखाधड़ी के मामले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों के कब्जे से 20 लाख रुपये मूल्य के 12 महीने पुराने मोबाइल और एक टैबलेट बरामद किए गए हैं। पुलिस उपायुक्त (पूर्व) तेजस्वनी गौतम ने जानकारी दी कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक सुनील कुमार चंदेल एक कंपनी में हब इंचार्ज के रुप में कार्यरत था। कंपनी सांगानेर स्थित कागजी फैक्ट्री के पास स्थित है। सुनील ने पार्सल डिलीवरी की आड़ में मोबाइल गबन करने की योजना बनाई थी। कंपनी के ही एक अन्य कर्मचारी, सुरेंद्र सिंह ने बताया कि कंपनी के स्टॉक से 200 मोबाइल गायब हो गए थे, जिनकी कीमत करीब 20 लाख रुपये थी। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि सुनील चंदेल ने इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।</p>
<p><strong>पुलिस की कार्रवाई</strong><br />मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर पुलिस ने सहायक पुलिस आयुक्त आशाराम चौधरी के निर्देशन में थाना अधिकारी मुनिंद्र सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया। टीम ने तकनीकी सहायता का उपयोग कर आरोपी सुनील चंदेल और उसके सहयोगी अमन मीणा को गिरफ्तार किया। अमन मीणा निवासी गांव बिनोरी, थाना मंडावर, जिला टोंक है। पुलिस ने उनके पास से 11 मोबाइल फोन और 1 टैबलेट बरामद किया है।</p>
<p><strong>आगे की जांच</strong><br />पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस धोखाधड़ी में और कौन-कौन शामिल हैं। आशंका है कि यह एक संगठित गिरोह हो सकता है, जो लंबे समय से इस प्रकार की धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था। पुलिस अन्य वारदातों से भी आरोपियों के संबंधों की जांच कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Feb 2025 14:11:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लाठी से पीट-पीटकर युवक की हत्या </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा में रहकर आॅनलाइन डिलीवरी का काम करता था ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/murder-of-young-man-by-beating-him-with-sticks/article-75750"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/trer-(3)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। विज्ञान नगर थाना इलाके में देर रात एक युवक की लाठी और डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर तलाश में जुट गई है। आरोपी हमलावरों ने सोमवार देर रात युवक पर लाठी-डंडों से वार कर घायल  कर दिया था और मौके से फरार हो गए। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस घायल युवक को उपचार के लिए हॉस्पिटल लेकर गई लेकिन सिर में गम्भीर चोट लगने से युवक ने उपचार के दौरान  दम तोड़ दिया। पुलिस ने मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया। पुलिस निरीक्षक सतीश चंद ने बताया कि मृतक भगवान (27)  सांगोद कस्बे के दोबड़ा गांव का रहने वाला था। पिछले दो साल से कोटा में रह कर ऑनलाइन डिलीवरी का काम करता था और बड़े भाई लक्ष्मीनाथ के साथ अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ लखावा में रहता था। करीब रात 9 बजे सूचना मिली कि आईएल के पास बनी नई कॉलोनी में एक युवक लहूलुहान पड़ा है। मौके पर पुलिस बल के साथ  गए और उसके परिजनों को सूचना दी । परिजन  उसे एम्बुलेंस की मदद  से हॉस्पिटल लाए जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले में आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है आरोपियों को पकड़ने के लिए टीम बनाई गई हैं वह आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दे रही है। सीआई सतीशचंद्र ने बताया कि परिजनों ने दो तीन लड़को पर मारपीट का आरोप लगाया है। उसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। </p>
<p><strong>गांव के लोगों से थी दुश्मनी </strong><br />मृतक के भाई लक्ष्मीनाथ ने बताया कि 4 महीने पहले लड़की भागने के मामले उसकी गांव के कुछ लोगों से दुश्मनी हो गई थी। उन्होंने जान से मारने की धमकी दी थी। दोनों पक्षों में राजीनामा हो गया था। देर रात भगवान पर हमला हुआ उसकी  बाइक व मोबाइल का अभी तक पता नहीं लगा। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी बताया जो पुलिस के पास है। फिलहाल कारण सामने नही आए है। आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे है। मामले की जांच की जा रही है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Apr 2024 17:02:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीजेरियन डिलीवरी के बढ़ते मामले चिंताजनक</title>
                                    <description><![CDATA[ सीजेरियन डिलीवरी से पैदा होने वाले बच्चे का विकास प्रभावित होता ही है, साथ ही मां भी शारीरिक कमजोरी का शिकार हो जाती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/increasing-cases-of-caesarean-delivery-worrying/article-46585"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/x-72.png" alt=""></a><br /><p>वाकई यह बेहद चिंताजनक है कि देश में हर साल सर्जरी से पैदा होने वाले बच्चों की तादाद बढ़ रही है। यह संख्या सिर्फ  निजी अस्पतालों में ही नहीं बल्कि सरकारी अस्पतालों में भी बढ़ी है। यह जानकर बड़ा आश्चर्य होगा कि सीजेरियन आपरेशन की मदद से पैदा होने वाले बच्चों की वजह से मानव जाति के विकास पर असर पड़ता है। सीजेरियन डिलीवरी से पैदा होने वाले बच्चे का विकास प्रभावित होता ही है, साथ ही मां भी शारीरिक कमजोरी का शिकार हो जाती है। गौरतलब है कि भारत में बड़े पैमाने पर सीजेरियन आपरेशन हो रहे हैं और पिछले एक दशक में यह अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकड़ों के मुताबिक 2010 तक भारत में सिर्फ साढ़े आठ फीसदी बच्चे सीजेरियन आपरेशन से होते थे। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक 10-15 फीसदी से कम ही था, लेकिन राष्ट्रीय परिवार कल्याण सर्वे-5 (एनएचएफएस) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दशक में सीजेरियन आॅपरेशन के मामले में भारत इससे बहुत आगे चला गया है। राष्ट्रीय परिवार कल्याण सर्वे-5 (एनएचएफएस) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश में हर साल औसतन 2.40 करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं, जिनमें से करीब 80 फीसदी अस्पतालों में पैदा होते हैं। इनमें से 21.5 फीसदी यानी करीब 41 लाख बच्चों का जन्म हर साल सीजेरियन प्रसव से होता है। सर्वे के मुताबिक सीजेरियन प्रसव के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2019-2021 के बीच देश में सीजेरियन प्रसव के मामले 21.5 फीसदी दर्ज किए गए हैं। मगर शहरी क्षेत्रों के निजी अस्पतालों में कमोबेश दो में से एक प्रसव सीजेरियन हो रहा है। इससे पूर्व जब 2015-16 में एनएचएफएस-4 सर्वे किया गया था, तब देश में सीजेरियन प्रसव के मामले 17.2 फीसदी थे। यानी पांच वर्षों में इसमें चार फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली यानी एचएमआईएस ने 2019-20 में सीजेरियन डिलीवरी के 20.5 फीसदी की सूचना दी है, जो 2020-21 में बढ़कर 21.3 फीसदी और फिर 2021-22 में 23.29 फीसदी हो गया। भारतीय राज्यों में, सीजेरियन डिलीवरी का उच्चतम फीसदी तेलंगाना में देखा गया।</p>
<p>अगर हम निजी और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर होने वाले सीजेरियन डिलीवरी की बात करें तो निजी स्वास्थ्य केंद्रों में सीजेरियन प्रसव ज्यादा किए जाते हैं। ऐसे आरोप भी लगते रहे हैं कि ज्यादा बिल बनाने के लिए ऐसा किया जाता है। एनएचएफएस-5 सर्वे के आंकड़े भी इसी बात की तरफ ईशारा ज्यादा करते हैं। इसमें पाया गया कि जो प्रसव निजी स्वास्थ्य केंद्रों में हुए, वहां 47.4 फीसदी सीजेरियन हुए हैं। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 49.3 फीसदी तक दर्ज किया गया है। जबकि, ग्रामीण क्षेत्रों में 46 फीसदी पाया गया। एनएचएफएस-4 सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, निजी अस्पतालों में 40.9 फीसदी प्रसव सीजेरियन हो रहे थे। यानी यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। जो वाकई बेहद चिंताजनक है।</p>
<p>यह सही है कि कई मामलों में सीजेरियन डिलीवरी के माध्यम से बच्चों का जन्म होना मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद रहता है। तमाम महिलाओं को डिलीवरी के समय कुछ कारणों से जान जाने का भी खतरा होता है जिसकी वजह से सीजेरियन डिलीवरी करानी पड़ती है। लिहाजा मेडिकल साइंस की इस प्रगति को जीवन रक्षक भी माना जाता है। लेकिन, हमें यह समझना होगा कि सीजेरियन डिलीवरी का महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। कई शोध और अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि सीजेरियन डिलीवरी का महिलाओं के स्वास्थ्य पर दीर्घकालीन प्रभाव रहता है। यह डिलीवरी महिलाओं के साथ-साथ पैदा होने वाले बच्चों की सेहत पर भी असर डालती है। बता दें कि जिन महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी होती है उनकी तुलना में सीजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं की रिकवरी में अधिक समय लगता है। जैसा कि सीजेरियन डिलीवरी से रिकवरी करने में औसतन 4 से 6 सप्ताह का समय लगता है। साथ ही, नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में सीजेरियन डिलीवरी के कारण महिलाओं का शरीर अधिक कमजोर हो जाता है। इस डिलीवरी में महिलाओं के शरीर से अधिक मात्रा में रक्त निकलता है। जिसके कारण कमजोरी हो जाती है। कई बार सीजेरियन डिलीवरी के दौरान हुई दिक्कतों की वजह से महिला को लंबे समय तक इसके साइड इफेक्ट्स से जूझना पड़ता है। इसके अलावा, सीजेरियन डिलीवरी के बाद शरीर में नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में अधिक बदलाव देखने को मिलते हैं जिसके कारण आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। शरीर में मोटापे के अलावा कई अन्य बदलाव भी होते हैं। इन बदलावों के कारण कई तरह की बीमारियां भी हो सकती हैं। हालांकि नॉर्मल डिलीवरी के बाद भी शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं, लेकिन इनका खतरा सीजेरियन डिलीवरी से कम होता है।लिहाजा, सीजेरियन डिलीवरी के लगातार बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने की दिशा में कोशिशें होनी चाहिए। यह देखा गया है कि पिछले एक दशक के भीतर महिलाओं की जीवनशैली और खान-पान में बड़े स्तर पर बदलाव हुआ है।  </p>
<p><strong>-अली खान</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 May 2023 10:08:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मानवता शर्मसार: बस स्टैंड पर प्रसव, अस्पताल ले जाने को कोई नहीं हुआ तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा। शहर के नयापुरा रोडवेज बस स्टैंड  पर ही रविवार देर रात 11.30 बजे एक महिला ने बच्ची को जन्म दिया। महिला की हालत बिगड़ी और वह दर्द से करहाने लगी लेकिन वहां मौजूद लोग मूकदर्शक बन देखते रहे।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/humanity-shamed-delivery-at-bus-stand-no-one-is-ready/article-13146"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/kota-roadways-delivery.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोटा।</strong> शहर के नयापुरा रोडवेज बस स्टैंड  पर ही रविवार देर रात 11.30 बजे एक महिला ने बच्ची को जन्म दिया। महिला की हालत बिगड़ी और वह दर्द से करहाने लगी लेकिन वहां मौजूद लोग मूकदर्शक बन देखते रहे।  कुछ देर बाद जानकारी  एक महिला पुलिसकर्मी मौके पर पहुंची लेकिन उसे अस्पताल तक कोई नहीं ले गया। एएसआई कला शर्मा ने बताया कि कैथून निवासी घुमंतू जाति की गर्भवती महिला गीता को उसका पति शनिवार को बस स्टैंड पर छोड़ गया था। वह बीकानेर जा रहे थे।</p>
<p>इस बीच  किसी बात पर इनका झगड़ा हो गया और पति छोड़कर चला गया। गीता पति के इंतजार में रविवार को बस स्टैंड पर ही रही। गीता के पूर्व में दो बच्चियां हैं। उसे रात 11.30 बजे  प्रसव पीड़ा हुई और काफी तेज दर्द के बाद  स्टैंड पर ही डिलीवरी हो गई। उस समय वहां ज्यादा लोग नहीं थे। जो मौजूद थे उनमें से कुछ ने महिला पर कपड़ा डाला। इतने में ऑटो स्टैंड के इंचार्ज शकील शाह ने आसपास से गुजर रही महिलाओं से मदद की गुहार की। कुछ महिलाओं ने मौके पर पहुंचकर गीता को संभाला। कोटा ऑटो यूनियन ने महिला ऑटो चालक गीता शर्मा को मामले की जानकारी देते हुए बस स्टैंड जाने के लिए कहा। उस समय गीता बस स्टैंड से गरीब 7 किलोमीटर दूर थी। जानकारी लगते ही वह तुरंत बस स्टैंड के  पहुंची और एक महिला पुलिसकर्मी की मदद से जच्चा और बच्चा को जेके लोन अस्पताल पहुंचाया।</p>
<p><strong> महिला ऑटो चालक की तत्परता से बची जान</strong><br />ऑटो स्टैड के इंचार्ज शकील शाह ने बताया कि सूचना मिलते ही रात में गाड़ी चला रही महिला ऑटो चालक गीता शर्मा को फोन कर बस स्टैंड पहुंचने को कहा। गीता शर्मा नर्सिंग किए हुए है। वह स्टेशन हाट रोड से 15 मिनिट में बस स्टैंड पहुंची और एएसआई कला शर्मा, समाज सेवी राजा खान की  मदद से  महिला को जेकेलोन पहुंचाया। ऑटो यूनियन अध्यक्ष भूपेंद्र सक्सेना ने गीता शर्मा ऑटो चालक को  नगद पुरस्कार देने का ऐलान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 13:43:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> प्रसव कराने के नाम पर आठ हजार रुपए रिश्वत लेते डॉक्टर गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[उदयपुर। संभाग के बांसवाड़ा जिले में बुधवार को एसीबी ने प्रसव कराने के नाम पर आठ हजार रुपए की रिश्वत लेते चिकित्साधिकारी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/doctor-arrested-for-taking-bribe-of-eight-thousand-rupees-in-the-name-of-delivery/article-12287"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/15-udi-acb.jpg" alt=""></a><br /><p> उदयपुर। संभाग के बांसवाड़ा जिले में बुधवार को एसीबी ने प्रसव कराने के नाम पर आठ हजार रुपए की रिश्वत लेते चिकित्साधिकारी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया।</p>
<p><br />एसीबी के एएसपी माधोसिंह ने बताया कि महिला के परिजनों ने शिकायत दी कि राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दानपुर में गर्भवती का प्रसव कराने के लिए ले गए थे, जहां पदस्थ चिकित्सक प्रदीप पुत्र भगवान सहाय शर्मा निवासी पाली, दौसा ने उनसे आठ हजार रुपए देने के बाद ही प्रसव कराने की बात कही। ब्यूरो टीम ने सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद आरोपी चिकित्सक को महिला के परिजनों से आठ हजार रुपए लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी चिकित्सक को गुरुवार को उदयपुर एसीबी न्यायालय में पेश किया जाएगा।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jun 2022 11:58:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[udaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> कोरोना का एक और खतरा, समय से पहले हो सकता है प्रसव</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश सहित देश में कोरोना के मामले एक बार फिर बढ़ने लगे हैं। ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए भी खतरा बढ़ता जा रहा है। हाल ही में हुए शोध में पता चला है कि गर्भवस्था में कोरोना होने के कारण बच्चे का जन्म समय से पहले ही हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर हर गर्भवती महिला को वैक्सीन लगाने की सलाह दे रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/another-danger-of-corona--premature-delivery-can-happen/article-9419"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/covid1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।   प्रदेश सहित देश में कोरोना के मामले एक बार फिर बढ़ने लगे हैं। ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए भी खतरा बढ़ता जा रहा है। डॉक्टरों  का मानना है कि गर्भवस्था के दौरान कोरोना होने पर महिलाओं को अस्पताल और आईसीयू में भर्ती  करना पड़ सकता है। ऐसे में जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। हाल ही में हुए शोध में पता चला है कि गर्भवस्था में कोरोना होने के कारण बच्चे का जन्म समय से पहले ही हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर हर गर्भवती महिला को वैक्सीन लगाने की सलाह दे रहे है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्भधारण करने से पूर्व ही वैक्सीन लगाने से कोरोना सहित कई बीमारियों से होने वाले बच्चे को बचाया जा सकता है। कोटा के अस्पतालों में आने वाली गर्भवती महिलाओं को कोरोना के दोनों टीके लगाने के लिए प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। स्त्रीरोग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी प्रेग्नेंट महिलाए जो कोरोना संक्रमण की शिकार थी उन पर रिसर्च करने में यह परिणाम सामने आए हैं कि जो महिलाएं आईसीयू में भर्ती रही या कोरोना होने का पता प्रेग्नेंसी के 28 से 37 हफ्तों के बीच चला उनके प्रीटर्म बर्थ अधिक हुए। इस शोध के बाद से ही स्त्री रोग विशेषज्ञ वैक्सीन लगाने पर ज्यादा फोकस कर रही है। <br /><br /><strong>कोरोना से समय पूर्व डिलेवरी का  खतरा ज्यादा</strong><br />स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चित्तौड़ा ने बताया कि कोरोना संक्रमण जिस गति से फिर से फैलना शुरू हुआ ऐसे में गर्भवती महिलाओं को ज्यादा सावधानी रखने की आवश्यकता है।  प्रेग्नेंसी के दौरान आईसीयू में भर्ती होने का खतरा उम्र और हाई ब्लड प्रेशर जैसी कोमोर्बिडिटीज पर भी निर्भर करता है। साथ ही, जो गर्भवती महिलाएं कोरोना के खिलाफ वैक्सीन की दोनों खुराक ले चुकी हैं, उनमें ये खतरा बेहद कम हो जाता है। अस्पताल में भर्ती होने के साथ-साथ प्रेग्नेंट महिलाओं को कोरोना से प्रीटर्म बर्थ यानि समय से पहले जन्म का भी खतरा होता है। इससे बच्चे को भविष्य में गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं, जो आजीवन चल सकती हैं। ऐसे दोनों वैक्सीन लगवाना जरूरी है। <br /><br /><strong>स्वस्थ बच्चे के लिए वैक्सीन  जरूरी</strong><br />गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सविता शर्मा ने बताया कि  वैक्सीन प्रेग्नेंट महिला और उसके बच्चे दोनों के लिए ही जरूरी है। साथ ही, कोरोना से बचने के लिए कोविड प्रोटोकॉल का पालन भी करना चाहिए। इसमें मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग करना और भीड़ से बचना शामिल हैं।<br /> प्रेग्नेंसी के पहले या उसके दौरान वैक्सीन लगवाने से कोरोना से बचा जा सकता है। अगर कोई प्रेग्नेंट महिला वैक्सीन नहीं लगवाती है, तो गर्भ में बच्चे के विकास से जुड़ी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।<br /><br /><strong>प्रेग्नेंट महिला कोरोना से ऐसे करें बचाव</strong><br />स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चित्तौड़ा ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बच्चे को बचाने से पहले मां को इस संक्रमण से बचना जरूरी है। इसके लिए वहीं सभी सावधानियां बरतनी है जो कोविड प्रोटोकाल में बताई गई  है। <br />- हाथ साफ रखना, मास्क पहना, सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखना, हाथ नहीं मिलना। <br />- संक्रमण संदिग्ध से दूरी बनाए। <br />-गर्भधारण से पहले वैक्सीन की दोनों डोज लगाना जरूरी। <br />- भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचे। <br />- मां को प्रसव से पहले ही कोरोना संक्रमण हुआ है तो ऐसे में सावधानी ज्यादा रखने की जरूरत है। मां बच्चे का जन्म के बाद टेस्ट करना जरूरी है।<br />-नवजात में रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत नई होती है।  वह किसी भी तरह की बीमारी को नहीं पहचानता है इसलिए बच्चे को रोगो से बचाने के लिए वैक्सीन दी जाती है। ताकि इसकी बीमारी का हमला होने पर होने पर बच्चे का शरीर पहचान कर बचाव कर सकें। <br />- हृदय रोग से  पीड़ित महिलाओं को ज्यादा सावधानी की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 16:08:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सायशा स्कोडा में नई स्लाविया की पहली डिलीवरी</title>
                                    <description><![CDATA[सायशा स्लाविया में लाँच के बाद पहली डिलीवरी रवि खंडेलवाल को की गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/first-delivery-of-the-new-slavia-in-the-saysha-koda/article-5320"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/bazar.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। स्कोडा ऑटो इंडिया ने जयपुर में स्कोडा स्लाविया की ग्राहक डिलीवरी शुरू की। सायशा स्लाविया में लाँच के बाद पहली डिलीवरी रवि खंडेलवाल को की गई। स्लाविया को विशेष रूप से भारतीय ग्राहकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। कार की शुरुआती कीमत 10.69 लाख एक्सशोरूम है। इस अवसर पर साई गिरिधर सायशा मोटर्स ने कह कि हम जयपुर में ग्राहकों के लिए स्लाविया की डिलीवरी शुरू करते हुए बेहद रोमांचित हैं। ग्राहक नए स्कोडा स्लाविया कि टेस्ट ड्राइव के लिए जयपुर के वैशाली नगर और जवाहर नगर में सयशा स्कोडा स्कोडा शोरूम और अलवर एवं सीकर स्थित शोरूम पर भी जा सकते हैं।</p>
<p><br /><strong>स्लाविया की खासियत</strong>: कुशक एसयूवी के बाद स्लाविया स्कोडा, ऑटो  इंडिया का दूसरा मेड फॉर इंडिया एमक्यूबी-एओ-इन प्लेटफॉर्म पर आधारित वाहन है। यह 1.0 लीटर 3.सिलेंडर टर्बो.पेट्रोल द्वारा संचालित है। 1752 मिमी पर स्कोडा स्लाविया अपने प्रीमियम मध्यम आकार के सेडान सेगमेंट में सबसे चौड़ी कार है, इसके केबिन में पांच लोग आराम से बैठ सकते हैं। स्लाविया 521 लीटर की क्षमता के साथ बूट स्पेस के मामले में भी अपने वर्ग में सबसे आगे है। पीछे की सीटों में न केवल पर्याप्त जगह है, बल्कि व्यक्तिगत उपकरणों को चार्ज करने के लिए दोहरे एसी वेंट और दोहरे यूएसबी पोर्ट के साथ पीछे के यात्रियों की सुविधा और सुविधा का भी ध्यान रखा गया हैं कार में सभी इंफोटेनमेंट और नेविगेशन जरूरतों के लिए डैश में 25.4 सेमी (10.इंच) टचस्क्रीन है। यात्री सुरक्षा के लिए स्लाविया में छह एयरबैग एंटी-लॉक ब्रेक, इलेक्ट्रॉनिक स्थिरता नियंत्रण आदि शामिल हैं।</p>
<p> </p>
<p><strong>19.47 किलोमीटर प्रति लीटर तक माइलेज</strong><br />स्कोडा आॅटो इंडिया के ब्रांड निदेशक जैक हॉलिस ने बताया कि नई स्लाविया 1.0 टीएसआई की कीमत 10.69 लाख रुपए से शुरू है। प्रीमियम मिड साइज सेडान में तीन ट्रिम्स  होंगे, ऐक्टिव, एम्बिशन स्टाइल। स्लाोविया 1.0 टीएसआइ दो ट्रांसमिशंस के विकल्प के साथ तीन वैरिएंट्स में उपलब्ध है। इसका फुली.लोडेड स्टाइल वैरिएंट सिक्सा स्पीड टॉर्क कन्वेर्टर आॅटोमैटिक एवं सनरूफ  विकल्प के साथ 15.39 लाख में मिलेगा। सभी वैरिएंट्स में स्लाविया 1.0 टीएसआइ में सिक्स स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स् भी उपलब्ध होगा। टीएसआइ इंजन को 19.47 किलोमीटर प्रति लीटर तक की ईंधन दक्षता की रेटिंग मिली है और यह 10.7 सेकंड में 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ लेता है। स्लाविया सेडान एक्स क्लूसिव क्रिस्टबल ब्लू, टॉर्नेडो रेड एक्सडक्लूासिव टु इंडिया, कैंडी व्हाइट, ब्रिलियंट सिल्वर और कार्बन स्टील। 175 से ज्यादा कस्टमर टच पॉइंट्स के साथ यह देश भर के 100 से ज्यादा शहरों में मौजूद है। 2021 में 23,858 यूनिट्स की बिक्री के साथ 130 प्रतिशत की तीन अंकों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Mar 2022 13:10:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>  कोख चीर रहे प्राइवेट अस्पताल : हर चौथी डिलिवरी ‘सिजेरियन’ </title>
                                    <description><![CDATA[एक्सपर्ट बोले : मोटी कमाई के साथ सुरक्षित प्रसव का फोबिया बड़ा कारण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/private-hospital-tearing-womb--every-fourth-delivery-caesarean--not-even-one-lakh-on-13-47-lakh-deliveries-in-government--1-08-lakh-on-4-lakh-in-private-only--expert-said--phobia-of-safe-delivery-with-big-earnings-is-a-big-reason/article-4553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/6_news.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में प्रसव के सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क के साथ सामान्य प्रसव के आंकड़े सुखद हैं। हर 13-14 प्रसव में से केवल एक प्रसव सिजेरियन हो रहा है। लेकिन प्राइवेट अस्पतालों में इसका आंकड़ा डराने वाला है। हर चौथा प्रसव सिजेरियन ही करवाया जा रहा है। हालांकि जांचों में गर्भ में जटिलताएं एक कारण हो सकता है,लेकिन सामान्य के मुकाबले सिजेरियन प्रसव से मोटी कमाई को भी प्रदेश के सरकारी डॉक्टर इसका एक बड़ा कारण मानते हैं।<br /><br />राजस्थान में सालाना करीब 17.50 लाख गर्भवती महिलाओं का प्रसव हो रहा है। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के अनुसार इनमें से 77 फीसदी यानी 13 लाख 47 हजार 500 प्रसव सरकारी अस्पतालों में हो रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक इनमें से 7.2 फीसदी मतलब 97,020 हजार की ही जटिलताओं के कारण मजबूरन सिजेरियन कर प्रसव कराया जा रहा है। जबकि प्राइवेट अस्पतालों में सरकारी के मुकाबले प्रसव का आंकड़ा तीन चौथाई (23 फीसदी) 4,02,500 ही है, लेकिन आॅपरेशन से 26.9 फीसदी यानी एक चौथाई से ज्यादा 1.08 लाख का प्रसव सालाना हो रहाी है। एक्सपर्ट डॉक्टर प्राइवेट अस्पतालों के पैसा कमाने के लिए सिजेरियन प्रसव कराने को अधिक प्रायिकता देने के साथ ही गर्भवती, परिजन और डॉक्टरों में सुरक्षित प्रसव के पैदा हुए फोबिया को भी इसका बड़ा कारण मानते हैं।<br /><br /><br />प्राइवेट में इलाज के साथ पैसा कमाने का प्रोफेशनलिज्म तो होता ही है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन प्रसूता-परिजनों और डॉक्टरों में सुरक्षित प्रसव का यहां फोबिया ज्यादा होता है। गर्भवती, परिजन भी डॉक्टरों पर बिना परेशानी प्रसव कराने का दबाव बनाते हैं। -<strong>डॉ.पुष्पा नागर, अधीक्षक, जनाना अस्पताल</strong><br /><br />प्राइवेट अस्पतालों में व्यावसायिकरण ज्यादा सिजेरियन का कारण मान सकते हैं, लेकिन दोषी तो परिजन-गर्भवती खुद हैं। परिजन-प्रसूता चाहती हैं कि प्रसव बिना दर्द के आसानी से हो। परिजन पैसे देकर चिकित्सा सुविधा ले रहे हैं, इसलिए डॉक्टर उनकी इस संतुष्टि को ज्यादा महत्व देता है। -<strong>डॉ.विमला जैन, पूर्व अधीक्षक, महिला चिकित्सालय</strong><br /><br />प्राइवेट अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव ज्यादा क्यों हो रहे हैं। बिना वजह तो नहीं हो रहे, इसकी समीक्षा करेंगे।<br />-<strong>आशुतोष ए.टी पेंडणेकर, शासन सचिव, चिकित्सा विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Feb 2022 12:33:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश में हर साल 2,886 प्रसूताएं तोड़ रही हैं दम</title>
                                    <description><![CDATA[नवजात को कोख में नौ महीने पालकर जिदंगी देने वाली 8 प्रसूताएं राजस्थान में रोजाना प्रसव के दौरान दम तोड़ रही हैं। हर साल प्रदेश में करीब 17.60 लाख महिलाएं बच्चों को जन्म देती हैं, जिनमें प्रति एक लाख प्रसूताओं पर 164 की मौत हो जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-2-886-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A4%AE/article-4219"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/prasuta.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में 2,886 प्रसूताएं हर साल बच्चे को जन्म देने या प्रसव के दौरान मर रही हैं। हालांकि प्रदेश में 2003 के मुकाबले यह संख्या आधी हो चुकी है, लेकिन अभी भी प्रसूताओं की चिकित्सकीय केयर पर उनके परिजन को जागरूक करने की जरुरत है। वहीं दूसरी ओर चिकित्सा विभाग की मेटरनिटी हेल्थ की स्कीमों, जागरूकता अभियान को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की आवश्यकता है।<br /> <strong><br /> रैफरल परिवहन की मजबूती नहीं</strong><br /> चौबीसों घंटे दुर्गम और दूरस्थ डिलेवरी पाइंट पर रैफरल सिस्टम के लिए परिवहन की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में प्रसूता की हालत बिगड़ने पर उच्च अस्पतालों में परिवहन में देरी भी मौत का एक कारण है।  <br /> <br />                                 <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>प्रसूताओं की मौतें क्यों?</strong></span></span></span><br /> <strong>44.7%महिलाएं प्रसव पूर्व अस्पताल नहीं जाती</strong><br /> नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक राजस्थान में 44.7 फीसदी प्रसूताएं ऐसी हैं जो प्रसव पूर्व जांच और चिकित्सकीय परामर्श को अस्पताल ही नहीं जाती हैं। गंभीर बात यह है कि गांवों में प्रसूताएं इसे लेकर ज्यादा लापरवाह हैं। शहरों में 39.4 फीसदी और गांवों में 46.1 फीसदी गर्भधारण करने के बाद प्रसव पूर्व जांच नहीं करातीं हैं। इसके चलते उनके शारारिक पोषण, गर्भ से जुड़ी जटिलताओं का पता ही नहीं चलता।<br /> <br /> <strong>46%  में खून-पोषण की कमी</strong><br /> प्रदेश में 46.3 फीसदी महिलाएं गर्भवती होने के दौरान एनीमिक यानी खून की कमी से जूझ रही होती है। गांवों में ऐसी गर्भवती महिलाओं की संख्या 47.5 और शहरों में 41.4 फीसदी है। खून की कमी, कुपोषण, गर्भधारण के बाद जांचें और जटिलताएं ही मौत का बड़ा कारण होती है। वहीं 24 फीसदी गर्भवती महिलाएं तो आयरन की गोलियां भी खून की कमी पूरी करने के लिए नहीं लेती है।<br /> <strong><br /> सिजेरियन डिलेवरी में सुविधाओं का अभाव</strong><br /> प्रदेश में 10.4 फीसदी महिलाओं की सालाना सिजेरियन डिलेवरी होती है। सभी अस्पतालों में डिलेवरी की सुविधा, विशेषज्ञ डॉक्टर ना होने से प्रसव पीड़ा के दौरान रैफर करने की स्थिति बनती है तो जान सांसत में आ जाती है।<br /> <strong><br /> चार डिलेवरी केन्द्रों में से औसतन एक पर ही स्त्रीरोग विशेषज्ञ</strong><br /> प्रसूताओं की डिलेवरी के लिए पीएचसी स्तर तक करीब 2 हजार सरकारी अस्पताल में सुविधा हैं, लेकिन स्त्री रोग विशेषज्ञ केवल मात्र 550 ही हैं। यानी चार अस्पतालों में से एक पर ही स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर है। मौतों को और कम करने के लिए कम से कम एक अस्पताल में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ की जरुरत है। प्रसूताओं की समय पर जांच-चिकित्सा मिले इसलिए हर नाम पीएम मातृत्व सुरक्षा अभियान के लिए विभाग को प्राइवेट चिकित्सक हॉयर करने पड़ते हैं।<br /> <br /> प्रसूताओं की मौतों को रोकने के लिए हाल ही में समीक्षा बैठक की है। सभी को बचाने के हर संभव प्रयास होते हैं।<br /> -<strong>आशुतोष ए.टी.पेडनेकर, शासन सचिव, चिकित्सा</strong><br /> <br /> प्रसूता का एनीमिक होना, प्रसव पूर्व जांच ना कराने से व्याप्त जटिलताओं का पता न लगना ही मौतों का बड़ा कारण है। गर्भवती को प्रसव पूर्व जांचे और चिकित्सकीय परामर्श लेने से काफी हद तक मौतें रोकी जा सकती है।<br /> -<strong>डॉ.विमला जैन, पूर्व अधीक्षक, महिला चिकित्सालय, जयपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jan 2022 13:16:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केजरिवाल का चौका : दिल्ली सरकार ने घर-घर राशन की फाइल राज्यपाल बैजल को भेजी</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय राजधानी में घर-घर राशन की योजना पर केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल अनिल बैजल के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राशन की डोरस्टेप डिलीवरी की फ़ाइल फिर से उपराज्यपाल को भेजी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%95%E0%A4%BE---%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%98%E0%A4%B0-%E0%A4%98%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%9C%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AD%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A5%80/article-1447"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/kejriwal.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली</strong>। राष्ट्रीय राजधानी में घर-घर राशन की योजना पर केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल अनिल बैजल के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राशन की डोरस्टेप डिलीवरी की फ़ाइल फिर से उपराज्यपाल को भेजी है।</p>
<p><br /> दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने मंगलवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उपराज्यपाल को फाइल भेज दी गयी है। इसमें कहा गया है कि 'दिल्ली हाईकोर्ट ने राशन की डोरस्टेप डिलीवरी लागू करने की अनुमति दे दी है ऐसे में आप भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दें ताकि दिल्ली में जल्द से जल्द राशन की डोर स्टेप डिलीवरी योजना लागू हो सके।</p>
<p><br /> पिछले सप्ताह दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली में राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजना लागू करने की सशर्त इजाजत दे दी थी। राशन की डोर स्टेप डिलीवरी योजना पर केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल में काफी समय से विवाद चल रहा है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजना लागू करने पर अड़ी थी, जबकि उपराज्यपाल/ केंद्र सरकार इसका विरोध कर रहे थे।</p>
<p><br /> दिल्ली सरकार का आरोप है कि केंद्र ने राजधानी में 72 लाख राशन कार्ड धारकों को लाभान्वित करने वाली उसकी महत्वाकांक्षी घर-घर राशन योजना को रोक दिया और उसने इस कदम को राजनीति से प्रेरित बताया था। केंद्र सरकार ने हालांकि आरोपों को आधारहीन करार दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Oct 2021 18:48:45 +0530</pubDate>
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