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                <title> india - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आर्मेनिया सरकार को जयशंकर ने दिया धन्यवाद: 550 से अधिक भारतीय नागरिकों को ईरान से निकालने में की मदद, बचाव अभियान जारी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ईरान में फंसे 550 से अधिक भारतीयों को आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित निकाला गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस चुनौतीपूर्ण समय में सहयोग के लिए आर्मेनिया का आभार व्यक्त किया। छात्र और तीर्थयात्री सड़क मार्ग से आर्मेनिया पहुँच रहे हैं, जहाँ से उन्हें विशेष उड़ानों द्वारा दिल्ली लाया जा रहा है। यह रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jaishankar-thanked-the-armenian-government-for-helping-in-evacuating-more/article-146723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/armaina.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आर्मेनिया ने ईरान में फंसे 550 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में भारत की मदद की है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोमवार को ईरान से अब तक 550 से अधिक भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में सहयोग के लिए आर्मेनिया सरकार और वहां के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ईरान से अब तक 550 से अधिक भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी की सुविधा प्रदान करने के लिए आर्मेनिया की सरकार और लोगों को धन्यवाद। इन चुनौतीपूर्ण समय में उनके समर्थन की सराहना करता हूं।</p>
<p>छात्रों, तीर्थयात्रियों और व्यवसायियों सहित भारतीय नागरिक ईरान के विभिन्न शहरों से सड़क मार्ग के जरिए सीमा पार कर आर्मेनिया पहुँच रहे हैं। वहां से इन लोगों को येरेवन के शॉर्ट नोट्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डेसे व्यावसायिक उड़ानों (जैसे दुबई के रास्ते) के माध्यम से नयी दिल्ली वापस लाया जा रहा है।</p>
<p>हालांकि, अब तक 550 से अधिक लोगों को निकाला जा चुका है, लेकिन यह अभियान अभी भी जारी है। इसी मार्ग से 15 मार्च को मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के 70 छात्रों का एक जत्था दिल्ली पहुँचा था। इस पूरे प्रयास का प्रबंधन तेहरान और येरेवन में स्थित भारतीय मिशनों द्वारा आर्मेनियाई अधिकारियों के साथ घनिष्ठ सहयोग से किया जा रहा है। सरकार ने 12 मार्च को कहा था कि वह उन भारतीय नागरिकों की सहायता कर रही है जो अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते व्यावसायिक उड़ानों से घर लौटना चाहते हैं। </p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हम उन्हें वीजा और सड़क मार्ग से सीमा पार करने में सहायता कर रहे हैं। जायसवाल ने यह भी कहा कि सरकार ने तेहरान में रहने वाले कई भारतीयों को देश के अन्य सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया है और जो लोग आर्मेनिया या अजरबैजान के रास्ते वापस आना चाहते हैं, उन्हें वीजा संबंधी मदद दी जा रही है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 18:39:34 +0530</pubDate>
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                <title>भारत ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल : अमेरिका के साथ घोषणा पत्र पर किए हस्ताक्षर, तकनीक एवं आर्थिक-रणनीतिक साझेदारी की दिशा में बड़ा कदम</title>
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                        <![CDATA[भारत सिलिकॉन जैसे महत्पपूर्ण दुर्लभ खनिजों की पूरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को विविधीकृत और सशक्त बनाने के लिए अमेरिका की अगुवाई में गठित चुनिंदा देशों के गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ में औपचारिक रूप से शामिल हो गया। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-joins-pax-silica-signs-declaration-with-us-big-step/article-144005"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत सिलिकॉन जैसे महत्पपूर्ण दुर्लभ खनिजों की पूरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को विविधीकृत और सशक्त बनाने के लिए अमेरिका की अगुवाई में गठित चुनिंदा देशों के गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ में औपचारिक रूप से शामिल हो गया। भारत ने कहा है कि इस पहल का उद्देश्य वैश्विक सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और लोकतांत्रिक रूप से संचालित करना है। सिलिकॉन सेमीकंडक्टर और डिजिटल प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज है। यहां भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के दौरान एक विशेष समारोह में भारत और अमेरिका की ओर से ‘पैक्स सिलिका’ घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। गठबंधन में भारत का जुड़ाव दोनों देशों के बीच तकनीक एवं आर्थिक-रणनीतिक साझेदारी की दिशा में बड़ा कदम बताया गया है।</p>
<p><strong>यह समझौता भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है : वैष्णव</strong></p>
<p>केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह समझौता वैश्विक तकनीक और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। आज पैक्स सिलिका पर हस्ताक्षर किए गए, जो सेमीकंडक्टर आपूर्ती श्रृंखला, इसके निर्माण और चिप डिजाइन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि हमारे देश में सेमीकंडक्टर का पूरा माहौल अच्छी तरह स्थापित हो सके। यह घोषणा आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा, तकनीकी संप्रभुता और एआई की वैश्विक दौड़ को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अमेरिका-भारत के बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।</p>
<p><strong>हम अपनी मजबूरी का फायदा उठाने वालों को ना कह रहे हैं : हेलबर्ग</strong></p>
<p>इस मौके पर अमेरिकी आर्थिक मामलों के उपमंत्री जैकब हेलबर्ग ने कहा कि यह समझौता केवल कागज पर एक करार नहीं है, बल्कि एक साझा भविष्य का रास्ता है। हम साथ मिलकर यह कहते हैं कि आर्थिक सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है। संप्रभुता किसी वैश्विक दफ्तर या नौकरशाही से नहीं आती। यह उन निर्माताओं से आती है, जो आज इस कमरे में मौजूद हैं। यह घोषणा एआई के क्षेत्र में नए आविष्कारों को बढ़ावा देने वाला है। साथ ही, यह तकनीकी विकास को रोकने की कोशिशों के खिलाफ खड़े होने का एक संकल्प है। अमेरिकी उपमंत्री ने प्राचीन इतिहास के एक सबक का जिक्र करते हुए कहा कि सिकंदर ने एक बार कहा था कि एशिया के लोग इसलिए गुलाम थे क्योंकि उन्होंने ‘ना’ शब्द बोलना नहीं सीखा था। हमारे दोनों राष्ट्रों की नींव ‘ना’ शब्द पर टिकी है। इसलिए आज जब हम पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, तो हम अपनी मजबूरी और निर्भरता का फायदा उठाने वालों को‘ना’कहते हैं, और हम ब्लैकमेल को ‘ना’ कहते हैं।</p>
<p><strong>समझौता एक ‘रणनीतिक गठबंधन’: गोर </strong></p>
<p>में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस समझौते को एक‘रणनीतिक गठबंधन’बताया जो 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देगा। यह खनिजों और चिप बनाने से लेकर एआई के इस्तेमाल तक, पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित करेगा। पैक्स सिलिका का लक्ष्य मजबूरी वाली निर्भरता को खत्म करके भरोसेमंद औद्योगिक साझेदारी बनाना है, जो स्वतंत्र बाजारों को ताकत दे सके।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 10:56:41 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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                <title>भविष्य का रोडमैप है भारत यूरोपीय संघ एफटीए</title>
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                        <![CDATA[भारत यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता, एफटीए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक कूटनीति में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/india-eu-fta-is-the-roadmap-of-the-future/article-141412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/fta.png" alt=""></a><br /><p>भारत यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता, एफटीए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक कूटनीति में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। इससे लाखों रोजगार पैदा होंगे तथा भारतीय युवाओं और किसानों के लिए व्यापक अवसरों का सृजन होगा। इसके साथ ही लगभग 2 अरब की उस आबादी के लिए धन पैदा होगा, जो मिल कर वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक चौथाई भाग है। विश्व की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच यह एफटीए इतिहास के सबसे बड़े व्यापार समझौतों में से एक है। वास्तव में यह व्यापार समझौते से ज्यादा व्यापक है।</p>
<p><strong>महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग : </strong></p>
<p>यह कृत्रिम मेधा,एआई रक्षा और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने वाली विस्तृत साझीदारी है। इस एफटीए से भारत के हर क्षेत्र और नागरिक तथा खास तौर से निर्धन तबकों को लाभ पहुंचेगा।</p>
<p>यह एफटीए नियम आधारित व्यापार और आर्थिक नीतियों में स्थिरता सुनिश्चित करता है, जिससे भारत स्वदेशी और विदेशी निवेश के लिए और ज्यादा आकर्षक बनेगा। यह छोटे व्यवसायियों, स्टार्टअप संस्थाओं और कामगारों के लिए अनेक अवसर पैदा करेगा। विश्व ने प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा की सराहना करते हुए इस एफटीए को सभी समझौतों से बड़ा बताया है। यह वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में स्थिरता को मजबूत करता है।</p>
<p><strong>भारत और यूरोपीय संघ :</strong></p>
<p>यह भारत और यूरोपीय संघ को मुक्त बाजार, पूर्वानुमान क्षमता और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध भरोसेमंद साझीदारों के रूप में स्थापित करता है। भारत ने व्यापार मूल्य के हिसाब से यूरोपीय संघ में अपने 99 प्रतिशत से ज्यादा निर्यात के लिए अभूतपूर्व बाजार पहुंच प्राप्त की है,जिससे मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बल मिलेगा। इस एफटीए से कपड़ा, रेडीमेड वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरी सामान और ऑटोमोबाइल जैसे श्रमसाध्य क्षेत्रों को निर्णायक मजबूती मिलेगी। इस समझौते से लगभग 33 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर 10 प्रतिशत तक टैरिफ खत्म होगा। इससे कामगारों, हस्तशिल्पियों, महिलाओं, युवाओं तथा सूक्ष्म, छोटे और मझोले उपक्रमों का सशक्तीकरण होगा।</p>
<p><strong>भारत की भूमिका मजबूत :</strong></p>
<p>वैश्विक मूल्य श्रृंखला से भारतीय व्यवसाय ज्यादा गहराई से जुड़ेंगे और वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका मजबूत होगी। यह समझौता व्यवसायियों और पेशेवर तबके के लिए दूसरे देशों में जाने को आसान बनाते हुए शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं और कंप्यूटर जैसे सेवा क्षेत्रों में अवसरों के नए द्वार खोलता है। इन प्रतिबद्धताओं से उच्च मूल्य वाले रोजगार के अवसरों के खुलने के साथ ही प्रतिभा, नवोन्मेष और संवहनीय आर्थिक विकास के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत होती है। व्यापार समझौते गरीबों के जीवन को बेहतर बनाने की मोदी सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।</p>
<p><strong>विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन :</strong></p>
<p>इस रणनीति में क्रांतिकारी सुधारों और विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करना तथा सभी पक्षों के लिए लाभकारी समझौते के उद्देश्य से विकसित और पूरक अर्थव्यवस्थाओं के साथ बातचीत शामिल है। यह रणनीति भारत को अपनी ताकत का सही इस्तेमाल करने और उन लाभकारी बाजारों तक पहुंच बनाने में सक्षम बनाती है। विकसित देशों के साथ व्यापार समझौते भारतीय उद्योगों को स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के अवसर प्रदान करते हैं और उपभोक्ताओं को विश्व स्तरीय उत्पाद उपलब्ध कराते हैं। यूपीए सरकार ने बिना सोचे समझे भारत के बाज़ार खोल दिए थे, इसके उलट मोदी सरकार ने ऐसे समझौते किए हैं, जिनमें टैरिफ में कमी धीरे धीरे की जाती है। जिससे उद्योगों को उचित नीतिगत समर्थन के साथ अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता और गुणवत्ता में सुधार करने के लिए पर्याप्त समय मिलता है।</p>
<p><strong>उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद :</strong></p>
<p>प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की आपूर्ति प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का केंद्र है। पिछले सप्ताह इसी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था आइए, इस साल हम अपने पूरे सामर्थ्य के साथ गुणवत्ता को प्राथमिकता दें। हमारा एकमात्र मंत्र गुणवत्ता, गुणवत्ता और केवल गुणवत्ता होना चाहिए। कल की तुलना में आज और बेहतर गुणवत्ता। हम जो कुछ भी बनाते हैं, उसकी गुणवत्ता में सुधार करने का संकल्प लें। भारत यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता भारत को एक विकसित देश बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण के पूरी तरह अनुरूप है। यह भारत को वैश्विक मंच पर एक गतिशील, विश्वसनीय और दूरदर्शी भागीदार के रूप में स्थापित करता है,जो दोनों क्षेत्रों के लिए समावेशी, मजबूत और भविष्य के लिए तैयार विकास की नींव रखता है।</p>
<p><strong>मोदी सरकार द्वारा :</strong></p>
<p>मोदी सरकार द्वारा संपन्न प्रत्येक मुक्त व्यापार समझौते ने दोनों पक्षों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं और भारत के श्रम प्रधान क्षेत्रों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार किया है। इन समझौतों ने 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनने की दिशा में उसकी यात्रा को तेज़ किया है। मोदी सरकार द्वारा संपन्न अन्य व्यापार समझौतों के साथ, भारत ईयू एफटीए, ढुलमुल और निर्णायक नेतृत्व के बीच के अंतर को रेखांकित करता है। जहां पहले की सरकारें हिचकिचाती थीं और घुटने टेकती थीं वहीं मोदी सरकार ने बदलाव लाने वाला एक ऐसा समझौता किया है, जो बाजारों का विस्तार करने के साथ रोजगार पैदा करता है और भारत के मुख्य हितों की रक्षा करता है। यह इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे मजबूत नेतृत्व और रणनीतिक स्पष्टता नए अवसरों के दरवाजे खोल सकती है, जो देश को समृद्धि के रास्ते पर ले जा सकते हैं।</p>
<p><strong>-पीयूष गोयल</strong><br /><strong>(केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री)</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 12:12:28 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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            <item>
                <title>चीन 2030 तक 1000 जे-20 लड़ाकू विमानों का करेगा संचालन : अमेरिका का दबदबा होगा कम, भारत को भी बढ़ानी होगी लड़ाकू विमानों की संख्या</title>
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                        <![CDATA[चीन 2030 तक करीब 1,000 जे-20 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट तैनात कर सकता है। इससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की वायु बढ़त और भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ेंगी। चीन तेजी से वायुसेना का आधुनिकीकरण कर रहा है, जबकि भारत और अमेरिका अपनी क्षमताएं मजबूत करने में जुटे हैं।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-will-operate-1000-j-20-fighter-planes-by-2030-americas/article-140676"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(4)27.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लंदन स्थित थिंक टैंक रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन वर्ष 2030 तक लगभग 1,000 ख-20 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों का संचालन कर सकता है। यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के हवाई वर्चस्व को चुनौती देने के साथ-साथ भारत के लिए भी एक बड़ी रणनीतिक चिंता बन सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने पिछले पांच वर्षों में अपनी वायु शक्ति को अभूतपूर्व गति से आधुनिक बनाया है।</p>
<p><strong>चीन की बढ़ती हवाई ताकत :</strong></p>
<p>2020 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स के पास लगभग 50 जे-20 विमान थे। लेकिन 2025 तक यह संख्या बढ़कर करीब 300 हो गई है। आरयूएसआई के अनुमान के अनुसार, चीन वर्तमान में हर साल लगभग 120 जे-20ए और जे-20 एस स्टील्थ फाइटर जेट का उत्पादन कर रहा है। इस दर से उत्पादन जारी रहा, तो 2030 तक चीन के पास करीब 1,000 जे-20 और 900 जे-16 (4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमान) सेवा में हो सकते हैं। इसके अलावा चीन जे-35 नामक एक और स्टील्थ फाइटर जेट विकसित कर रहा है, जिसे वायुसेना और नौसेना दोनों के लिए डिजाइन किया गया है। यह कदम चीन की सैन्य रणनीति में बहु-क्षेत्रीय वर्चस्व स्थापित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।</p>
<p><strong>अमेरिका की स्थिति :</strong></p>
<p>अमेरिका अभी भी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के मामले में सबसे शक्तिशाली देश बना हुआ है। अमेरिकी वायुसेना, नौसेना और मरीन कॉर्प्स के पास कुल मिलाकर लगभग 600 एफ-35 फाइटर जेट हैं, जिनमें से लगभग 400 अमेरिकी वायुसेना के पास हैं। इसके अलावा अमेरिका के पास 187 एफ-22 रैप्टर विमान भी हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे उन्नत स्टील्थ फाइटर जेट में गिना जाता है। अमेरिका की योजना 2040 के दशक तक 1,700 से अधिक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान तैनात करने की है। तकनीकी बढ़त, वैश्विक सैन्य ठिकानों और अनुभवी पायलटों के कारण अमेरिका अभी भी वायु युद्ध में महत्वपूर्ण बढ़त बनाए हुए है।</p>
<p><strong>भारत की हवाई शक्ति और चुनौतियां :</strong></p>
<p>भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद चला आ रहा है, और 1962 के युद्ध के बाद से दोनों देशों के संबंध सामरिक रूप से संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में चीन की बढ़ती हवाई ताकत भारत के लिए एक गंभीर रणनीतिक संकेत है। भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में लगभग 29 से 31 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है। अनुमान के मुताबिक, भारत के पास करीब 500 से 660 सक्रिय लड़ाकू विमान हैं, जिनमें एसयू-30 एमकेआई, राफेल, मिराज-2000 और तेजस जैसे विमान शामिल हैं। हालांकि, चीन की तुलना में भारत की संख्या और उत्पादन क्षमता सीमित है। भारत भविष्य में स्वदेशी तेजस एमके-2, एएमसीए (पांचवीं पीढ़ी का स्वदेशी फाइटर जेट) और अतिरिक्त राफेल विमानों के जरिए अपनी वायु शक्ति को मजबूत करने की योजना बना रहा है, लेकिन इन परियोजनाओं को पूरी तरह प्रभावी होने में अभी समय लगेगा।</p>
<p><strong>एशिया और वैश्विक सामरिक संतुलन होगा प्रभावित :</strong></p>
<p>2030 तक चीन की वायु शक्ति में संभावित वृद्धि एशिया और वैश्विक सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। अमेरिका अभी भी तकनीक और अनुभव में आगे है, लेकिन चीन तेजी से अंतर कम कर रहा है। वहीं, भारत के लिए यह समय अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण, उत्पादन क्षमता और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने का है, ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन बनाए रखा जा सके।</p>]]>
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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 11:37:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स में भारत ने अमेरिका और चीन को पछाड़ा : भारत को 16वां स्थान, अमेरिका 66वें और चीन 68वें पर, इंडेक्स में सिंगापुर सबसे ऊपर</title>
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                        <![CDATA[रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स में भारत ने 154 देशों में 16वां स्थान हासिल किया है। दिल्ली के वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन द्वारा जारी इस इंडेक्स में सिंगापुर शीर्ष पर रहा। रैंकिंग नागरिक कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी सहित 58 संकेतकों पर आधारित है। अमेरिका 66वें और चीन 68वें स्थान पर हैं।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-overtook-america-and-china-in-the-responsible-nations-index/article-140304"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(2)35.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने 154 देशों के एक इंडेक्स में 16वां स्थान हासिल किया है। यह रैंकिंग रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स (आरएनआई) के तहत दी गई है। यह इंडेक्स बताता है कि देश अपने नागरिकों, पर्यावरण और दुनिया के प्रति कितनी जिम्मेदारी से काम करते हैं। इस इंडेक्स को दिल्ली के थिंक टैंक वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन (डब्ल्यूआईएफ) ने लॉन्च किया है। इस इंडेक्स में सिंगापुर सबसे ऊपर है।</p>
<p>यह इंडेक्स वर्ल्ड बैंक, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से 2023 तक के उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल करता है। इसे तीन मुख्य बातों के आधार पर बनाया गया है। पहला, आंतरिक जिम्मेदारी जो नागरिकों की गरिमा, कल्याण और सशक्तीकरण के प्रति देश के कर्तव्यों को देखती है। दूसरा, पर्यावरण जिम्मेदारी जो पारिस्थितिकी संरक्षण और टिकाऊ विकास के प्रति देश की प्रतिबद्धता की जांच करती है। तीसरा, बाहरी जिम्मेदारी जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के व्यवहार और योगदान पर केंद्रित है।</p>
<p><strong>7 अलग-अलग पैमाने :</strong></p>
<p>इन तीन मुख्य बातों को सात अलग-अलग पैमानों पर मापा जाता है। इनमें क्वालिटी ऑफ लाइफ, गवर्नेंस, सोशल जस्टिस और एम्पावरमेंट, इकोनॉमिक परफॉर्मेंस, पर्यावरण संरक्षण, शांति के प्रति प्रतिबद्धता और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध शामिल हैं। कुल 58 चुने हुए संकेतकों का इस्तेमाल करके अंतिम स्कोर और रैंकिंग तय की जाती है। वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन ने एक बयान में कहा, यह इंडेक्स देशों को सिर्फ उनकी आर्थिक ताकत या भू-राजनीतिक प्रभाव से नहीं, बल्कि नागरिकों, पर्यावरण और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति उनकी जिम्मेदारी के आधार पर आंकने के लिए एक नया वैश्विक ढांचा प्रदान करता है।</p>
<p><strong>आर्थिक शक्ति होने से नहीं मिलती यह गारंटी :</strong></p>
<p>इस इंडेक्स में चीन को 68वां और अमेरिका को 66वां स्थान मिला है। आरएनआई के नतीजों से पता चलता है कि ज्यादा जीडीपी या आर्थिक शक्ति होने से यह गारंटी नहीं मिलती कि देश जिम्मेदारी से काम करेगा। डब्ल्यूआईएफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा, वास्तव में कई विकासशील देश पर्यावरण नैतिकता, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में अमीर देशों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं। यह विश्लेषण बताता है कि जिम्मेदारी और जवाबदेह संस्थानों की मौजूदगी, समान विकास और समावेशी शासन के बीच एक मजबूत संबंध है। रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि वैश्विक स्तर पर असमानताएं बढ़ी हैं। खासकर जलवायु जिम्मेदारी, न्यायिक स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव के मामलों में ऐसा हुआ है। यह समकालीन राष्ट्रवाद के असमान नैतिक परिदृश्य को उजागर करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सामूहिक रूप से ये इनसाइट इस बात की पुष्टि करते हैं कि राष्ट्रीय सफलता को केवल इस आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए कि राष्ट्र क्या हासिल करते हैं, बल्कि इस आधार पर भी मापा जाना चाहिए कि वे इसे कितनी जिम्मेदारी से हासिल करते हैं।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 11:11:06 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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            <item>
                <title>गाजा संघर्ष को खत्म करने की जुगत : भारत को बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने के लिए ट्रंप का निमंत्रण, मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण के कदमों पर करेंगे विचार</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति के लिए बनाए जा रहे बोर्ड ऑफ पीस में भारत को शामिल होने का निमंत्रण दिया है। यह पहल ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी है। बोर्ड गाजा में शांति, पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता की निगरानी करेगा। भारत की वैश्विक साख के चलते यह प्रस्ताव अहम माना जा रहा है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/efforts-to-end-gaza-conflict-trumps-invitation-to-india-to/article-140032"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/trump.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा में शांति बहाली के लिए बनाए जा रहे बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने का निमंत्रण दिया है। यह बोर्ड गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने और शांति प्रकिया को आगे बढ़ाने के लिए बनाया जा रहा है। साथ ही यह पहल गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी है। अमेरिका इस योजना के दूसरे चरण को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>भारत की वैश्विक साख को सम्मान :</strong></p>
<p>भारत को यह न्योता उसकी वैश्विक साख, संतुलित विदेश नीति और शांति प्रयासों में भूमिका को देखते हुए दिया गया है। माना जा रहा है कि इस बोर्ड में शामिल देश गाजा की स्थिति पर नजर रखेंगे, मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण और संघर्ष रोकने से जुड़े कदमों पर विचार करेंगे। हालांकि, इस प्रस्ताव पर भारत की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिकिया नहीं आई है। ऐसे में यदि भारत इस पहल में शामिल होता है, तो यह पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया में उसकी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।</p>
<p><strong>क्या है बोर्ड ऑफ पीस ?</strong></p>
<p>व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बोर्ड ऑफ पीस के सदस्यों की सूची जारी की। यह बोर्ड गाजा में शांतिए स्थिरताए पुनर्निर्माण और लंबे समय तक विकास की निगरानी करेगा। इस बोर्ड के चेयरमैन खुद डोनाल्ड ट्रंप होंगे। व्हाइट हाउस के अनुसारए बोर्ड में कई बड़े और प्रभावशाली नाम शामिल हैं, जिनमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, इसके अलावा, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान और कतर के राजनयिक अली अल थवाड़ी को भी गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड में शामिल किया गया है।</p>
<p><strong>इजराइल पीस बोर्ड से नाराज :</strong></p>
<p>नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है। जानकारी के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फियद को शामिल करने से है। तुर्किए को हमास का समर्थक माना जाता है और इजराइल के साथ इसका संबंध तनावपूर्ण हैं। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>पाक को भी न्योता :</strong></p>
<p>पाकिस्तान ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ  को राष्ट्रपति ट्रम्प ने गाजा के लिए बनाए गए बोर्ड ऑफ  पीस में शामिल होने का न्योता दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया से बातचीत में पुष्टि की कि पाकिस्तान को औपचारिक रूप से यह निमंत्रण मिला है। ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान गाजा में शांति और सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में हिस्सा लेता रहेगा और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के मुताबिक फिलिस्तीन मुद्दे का स्थायी समाधान चाहता है।</p>
<p><strong>परमानेंट सदस्यता पाने के लिए देशों को एक अरब डॉलर देने होंगे :</strong></p>
<p>ट्रम्प की प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस में सदस्यता को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। ब्लूमबर्ग न्यूज ने रिपोर्ट किया कि बोर्ड के ड्राफ्ट चार्टर में कहा गया है कि देशों को परमानेंट सदस्यता पाने के लिए पहले साल में 1 बिलियन (एक अरब डॉलर) की फीस देनी होगी। ट्रम्प तय करेंगे कि किस देश को सदस्य बनने का निमंत्रण मिलेगा। सामान्य सदस्यता 3 साल की होगी, जिसे बाद में रिन्यू किया जा सकता है।</p>]]>
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                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 09:49:59 +0530</pubDate>
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                <title>भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का होगा सौदा, फरवरी में फ्रांस से हो सकती है राफेल की 36 अरब डॉलर की बिग डील </title>
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                        <![CDATA[भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए भारत फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदेगा। फरवरी में राष्ट्रपति मैक्रों के भारत दौरे के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर संभव हैं। डील करीब 3.25 लाख करोड़ रुपए की बताई जा रही है, जिसमें एफ4 और एफ5 वैरिएंट शामिल होंगे।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/there-will-be-a-deal-between-india-and-france-to/article-139604"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(10)1.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। भारत ने तय कर लिया है कि भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी को पूरा करने के लिए फ्रांस से राफेल फाइटर जेट खरीदे जाएंगे। फ्रांस की डिफेंस वेबसाइट ने इस डील को लेकर कई तरह के दावे किए हैं। इसमें बताया गया है कि भारत, फ्रांसीसी राफेल फाइटर जेट का सबसे एडवांस वर्जन खरीदने जा रहा है। इसमें कहा गया है कि भारत और फ्रांस के बीच इस समझौते पर फरवरी महीने में दस्तखत किए जाएंगे। ये सौदा उस वक्त होगा, जब फरवरी में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत का दौरा करेंगे। इसने कहा है कि भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा होगा, जिसे मेक इन इंडिया के तहत भारत में स्थानीय स्तर पर बनाया जाएगा।</p>
<p><strong>एफ5 का निर्माण भारत में नहीं, बल्कि फ्रांस में : </strong></p>
<p>रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत और फ्रांस के बीच जो समझौता होगा, उसमें 90 नए राफेल एफ4 लड़ाकू विमान छोटी और मध्यम अवधि में भारत को डिलीवरी दी जाएगी। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के पास मौजूद 36 राफेल लड़ाकू विमानों को एफ4 वैरिएंट में अपग्रेड किया जाएगा। ये अपग्रेडेशन उसी तरह का होगा, जैसा फ्रांसीसी वायुसेना और फ्रांस की नौसेना के मौजूदा वैरिएंट को एफ4 वैरिएंट में अपग्रेड किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये कॉन्ट्रैक्ट का पहला चरण होगा। जबकि दूसरे चरण में मध्यम और लबी अवधि के लिए कॉन्ट्रैक्ट होगा, जिसमें 24 राफेल एफ5 का एक बैच शामिल होगा, जिनमें सभी का उत्पादन फ्रांस में ही डसॉल्ट एविएशन कंपनी करेगी। यानि एफ5 का निर्माण भारत में नहीं, बल्कि फ्रांस में ही होगा।</p>
<p><strong>राफेल एफ5 को लेकर अड़चन बाकी :</strong></p>
<p>फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और फ्रांस के बीच एफ5 राफेल को लेकर पेंच फंसी हुई है। भारत अपने नए डिलीवर किए गए राफेल एफ4 को स्वतंत्र रूप से एफ5 स्टैंडर्ड में अपग्रेड कर सकता है या नहीं, इसको लेकर अड़चनें बाकी है। अभी यह पता नहीं है कि क्या पुराने राफेल एफ3, जिन्हें एफ4 स्टैंडर्ड में अपग्रेड किया जाएगा, क्या उन्हें भी एफ5 में बदला जा सकता है? इसको लेकर अभी पूरी तरह से मामला साफ नहीं हो पाया है। फरवरी महीने में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत का दौरा करेंगे, जहां वो एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे। ये शिखर सम्मेलन 16 फरवरी से 20 फरवरी तक चलेगा और इसी दौरान भारत और फ्रांस के बीच राफेल फाइटर जेट को लेकर समझौते पर साइन होने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>फ्रांस की जीडीपी कुछ प्रतिशत बढ़ जाएगी :</strong></p>
<p>समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल के लिए 3.25 लाख करोड़ रुपए की डील होने वाली है। यानि करीब 36 अरब डॉलर से ज्यादा की ये डील होगी। हालांकि फ्रांसीसी मीडिया ने कहा है कि फिलहाल ये डील कितने अरब डॉलर की होगी, इसकी जानकारी आधिकारिक तौर पर नहीं दी गई है, लेकिन उसका कहना है कि ये डील इतनी विशालकाय होगी कि फ्रांस की जीडीपी कुछ प्रतिशत बढ़ जाएगी। फ्रांसीसी मीडिया ने कहा है कि भारतीय वायुसेना ने राफेल फाइटर जेट का पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त इस्तेमाल किया है और वायुसेना अधिकारियों का विश्वास राफेल में काफी बढ़ गया है। इसीलिए ये डील ऐसे लोगों को चुप करा देगा, जो पिछले कुछ महीनों से राफेल की बुराई कर रहे थे।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 11:12:04 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>भारत 2040 तक चांद पर उतारेगा अपने अंतरिक्ष यात्री : पूर्व इसरो प्रमुख</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। पूर्व इसरो प्रमुख एएस किरण कुमार ने कहा है कि 2040 तक भारत अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर उतारेगा। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-will-land-its-astronauts-on-the-moon-by-2040/article-138805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(6)2.png" alt=""></a><br /><div>नई दिल्ली। भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। पूर्व इसरो प्रमुख एएस किरण कुमार ने कहा है कि 2040 तक भारत अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर उतारेगा। उन्हें सुरक्षित वापस लाएगा, साथ ही, भारत अपना स्पेस स्टेशन भी बनाएगा। यह बयान उन्होंने फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी  में आयोजित एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के 5वें सिम्पोजियम के उद्घाटन में दिया।</div>
<div> </div>
<div><strong>भारत का स्पेस प्रोग्राम क्यों खास ?</strong></div>
<div> </div>
<div>किरण कुमार ने कहा कि भारत एकमात्र देश है जिसने स्पेस टेक्नोलॉजी को समाज के फायदे के लिए शुरू किया, न कि मिलिट्री उद्देश्य से. डॉ विक्रम साराभाई की दूरदर्शिता कमाल की थी। आजादी के सिर्फ 10 साल बाद उन्होंने स्पेस टेक्नोलॉजी से ब्रॉडकास्ट कम्युनिकेशन और मौसम निगरानी जैसी सुविधाएं नागरिकों तक पहुंचाईं।</div>
<div>उन्होंने भारत के स्पेस रोडमैप पर विस्तार से बताया </div>
<div>जल्द ही चंद्रयान की फॉलो-ऑन मिशन आएगा।</div>
<div>  जापान के साथ मिलकर लैंडर और रोवर पर काम चल रहा है।</div>
<div> चांद के साउथ पोलर रीजन में खास जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश होगी।</div>
<div> </div>
<div>यह आगे की कई गतिविधियों की शुरूआत होगी, भारत ब्रह्मांड को समझने और स्पेस आॅब्जर्वेशन के लिए प्रतिबद्ध है। यह मौके कॉलेज, इंजीनियरिंग संस्थानों और प्राइवेट कंपनियों के लिए बड़े अवसर खोलेंगे।</div>
<div> </div>
<div><strong>क्या कहा किरण कुमार ने ?</strong></div>
<div> </div>
<div>एएस किरण कुमार अब पीआरएल के मैनेजमेंट काउंसिल के चेयरमैन हैं। उन्होंने कहा कि अब से 2040 तक स्पेस में कई मिशन होंगे। 2040 का प्लान है कि भारतीयों को चांद पर उतारा जाए और सुरक्षित वापस लाया जाए। भारत 2040 तक अपना स्पेस स्टेशन भी बनाएगा।</div>
<div> </div>
<div><strong>सिम्पोजियम का फोकस :</strong></div>
<div> </div>
<div>तीन दिन का यह सिम्पोजियम ऑप्टिक्स और एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंटेशन की एस्ट्रोनॉमी, स्पेस साइंस, प्लैनेटरी साइंस, एटमॉस्फेरिक साइंस और क्वांटम साइंस जैसे क्षेत्रों में भूमिका पर केंद्रित है। इसमें देशभर से करीब 150 वैज्ञानिक, इंजीनियर, शिक्षाविद, युवा रिसर्चर और इंडस्ट्री के लोग शामिल हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>भारत के आगे के स्पेस प्लान :</strong></div>
<div> </div>
<div> चंद्रयान सीरीज: चंद्रयान-4, 5, 6, 7, 8 प्लान में. सैंपल रिटर्न, जापान के साथ छवढए मिशन।</div>
<div> भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन: 2035 तक पूरा, कुछ मॉड्यूल 2027 से।</div>
<div> गगनयान: 2027 तक पहला मानव मिशन।</div>
<div> चांद पर मानव लैंडिंग: 2040 तक. कुछ प्लान में चांद के आसपास स्पेस स्टेशन भी।</div>
<div> अन्य: शुक्रयान (वीनस मिशन), मंगल मिशन आदि।</div>
<div> </div>
<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में ही 2040 तक चांद पर भारतीय उतारने का लक्ष्य दिया था। भारत का स्पेस प्रोग्राम तेजी से बढ़ रहा है। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद अब मानव मिशन और चांद पर कदम की तैयारी है। यह न सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि होगी, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात होगी।</div>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 10:52:35 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>विशेष उल्लेखनीय है स्वदेशी रक्षा प्रणाली की प्रगति</title>
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                        <![CDATA[आधुनिक युग में विश्व के किसी भी राष्ट्र की महत्ता जिन शक्तिशाली संसाधनों के आधार पर निर्धारित होती है, उनमें युद्धक अस्त्र-शस्त्र प्रथम हैं।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/particularly-notable-is-the-progress-of-the-indigenous-defense-system/article-138554"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px11.png" alt=""></a><br /><p>आधुनिक युग में विश्व के किसी भी राष्ट्र की महत्ता जिन शक्तिशाली संसाधनों के आधार पर निर्धारित होती है, उनमें युद्धक अस्त्र-शस्त्र प्रथम हैं। भारत के संदर्भ में विचार किया जाए, तो गत साढ़े आठ दशकों से इस दिशा में यहां उत्तरोत्तर प्रगति होती रही। हमारे रक्षा वैज्ञानिकों, अनुसंधानकर्ताओं तथा अन्यान्य संबद्ध कर्मचारियों ने राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ मिलकर इस संबंध में अविस्मरणीय कार्य किये हैं। विशेषकर गत चौदह-पंद्रह वर्षों में रक्षा अनुसंधान, निर्माण, उत्पादन, मित्र राष्ट्रों के साथ सहयोग पर आधारित आधुनिक रक्षण प्रणालियों की खोज व निर्माण तथा अंतत: रक्षा उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भर होने के बाद निर्यात में भी अग्रिम पंक्ति के देशों में सम्मिलित होने की उपलब्धि सराहनीय है। भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणाली पिछले एक दशक में आयात निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर तीव्रतापूर्वक बढ़ी है।</p>
<p><strong>वैश्विक स्तर पर : </strong></p>
<p>2026 तक भारत ने रक्षा क्षेत्र में न केवल अपनी तकनीकी व प्रौद्योगिकीय क्षमता को सिद्ध किया है, बल्कि हमारा देश वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख रक्षा निर्यातक के रूप में भी उभरा है। आज यहां आधुनिक अस्त्र-शस्त्रों का बड़े पैमाने पर नवोन्नत ढंग से निर्माण हो रहा है। नित नवीन स्वदेशी रक्षा प्रणालियां विकसित की जा रही हैं। इस क्षेत्र में मित्र देशों के साथ खोज से लेकर उत्पादन तक उपयोगी साझेदारियां भी की जा रही हैं। वर्तमान में देश की आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली एक बड़ी उपलब्धि है। यह प्रक्षेपास्त्रीय तकनीक विश्व की सबसे उन्नत प्रणालियों में से एक है। इस उन्नतिकरण में इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम की विशाल भूमिका रही है। इसके अंतर्गत अग्नि-5 और अग्नि-6 अति उल्लेखनीय है। इस वर्ष तक भारत की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता अत्यधिक परिष्कृत हो चुकी है।</p>
<p><strong>तकनीक से युक्त :</strong></p>
<p>इस प्रयास से प्रेरित होकर अब अग्नि-6 का निर्माण हो रहा है, जो मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल रीएंट्री व्हीकल तकनीक से युक्त है। गत वर्ष मई माह में ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के साथ हुये अल्पावधि के युद्ध में देशवासियों ने ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र का युद्धक प्रदर्शन देखा ही था, कि कैसे इस वायु अस्त्र ने शत्रु देश के चिन्हित ठिकानों को ध्वस्ताधूत किया था। ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। भारत अब इसके हाइपरसोनिक संस्करण ब्रह्मोस-दो पर काम कर रहा है, जो मैक 7 से अधिक गति प्राप्त करने में सक्षम है। प्रलय मिसाइल का भी उल्लेख हो रहा है। यह एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे विशेष रूप में पारंपरिक युद्ध के लिए डिजाइन किया गया है। ये चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर भारत की आक्रामक क्षमता को में वृद्धि करती है। राष्ट्र की वायु रक्षा प्रणाली भी प्रशंसनीय है।</p>
<p><strong>वायु रक्षा प्रणाली :</strong></p>
<p>आकाश कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसके नए संस्करण आकाश प्राइम में स्वदेशी एक्टिव रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर लगा है। वीशॉर्ड्स नामक एक मैनपैड मिसाइल भी भारत में बनी है। ये बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है, जो युद्धक प्रतिरोध के लिये विश्वसनीय होने के साथ-साथ पर्वतों में सैनिकों द्वारा सुगमता से कंधे पर लादकर उपयोग की जा सकती है। समर का उल्लेख भी आवश्यक है। ये भारतीय वायु सेना द्वारा विकसित प्रणाली है, जो पुरानी रूसी मिसाइलों को आधुनिक लॉन्चर के साथ जोड़कर बनाई गई है। इस समय स्वदेशी लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर के विनिर्माण में भी तेजी आई है। भारतीय वायु सेना मेक इन इंडिया के अंतर्गत विकसित विमानों पर अधिक भरोसा कर रही है। तेजस एमके1, एवं एमके2 भी नवोन्नत विमान हैं। यह एक हल्का, चौथी पीढ़ी का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है।</p>
<p><strong>उत्पादन और परीक्षण :</strong></p>
<p>इस वर्ष तेजस मार्क-2 का उत्पादन और परीक्षण अंतिम चरणों में है, जो राफेल के स्तर की तकनीक से लैस है। इसके अतिरिक्त एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भी भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर प्रोग्राम है। यह दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता रखता है। साथ ही एलसीएच प्रचंड भी रक्षा हेतु एक अति उपयोग अस्त्र है। ये दुनिया का एकमात्र लड़ाकू हेलीकॉप्टर है जो 5000 मीटर की ऊंचाई सियाचिन जैसे क्षेत्रों पर आवश्यकतानुसार उतर सकता है और उड़ान भर सकता है। थल एवं नभ ही नहीं, अपितु समुद्र में भी स्वदेशी रक्षा शक्ति नित नवीन उपलब्ध्यिां अर्जित कर रही है। भारतीय नौसेना का लक्ष्य 2030 तक पूरी तरह स्वदेशी जलयान का निर्माण करना है। आईएनएस विक्रांत इस लक्षित कार्य की दिशा में पहले से अर्जित एक उपलब्धि है ही। यह भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत हैं।</p>
<p><strong>तकनीक और ड्रोन : </strong></p>
<p>भारत की न्यूक्लियर ट्रायड,जल, थल और नभ से परमाणु हमले की क्षमता को पूर्ण करती हैं। आधुनिक युद्ध अब धरातल पर सैनिकों द्वारा नहीं, अपितु तकनीक और ड्रोन आधारित हो चुके हैं। इस बिंदु को ध्यान में रख तपस बीएच-201 तैयार है। यह एक स्वदेशी मीडियम एल्टिट्यूड लांग एंड्युरेंस यानी कि मेल ड्रोन है, जो निगरानी और गुप्त जानकारी एकत्र करने के लिए बनाया गया है। डीआरडीओ ने एक एंटी-ड्रोन सिस्टम डी-4 प्रणाली विकसित की है जो शत्रु के ड्रोन को निष्क्रिय कर सकती है या लेजर से नष्ट कर सकती है। रक्षा क्षेत्र में आधुनिक खोजों तथा तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रक्षा उत्कृष्टता हेतु नवप्रवर्तन पर ध्यान दिया जा रहा है, जिसके द्वारा स्टार्टअप्स और एमएसएमई को रोबोटीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में रक्षा समाधान खोजने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है।</p>
<p><strong>-विकेश कुमार बडोला</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 12:40:56 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत ने रूसी तेल आयात को लेकर अपने संकल्प पर मजबूती दिखाई, देश को 78,000 करोड़ से 98,000 करोड़ की बचत होने का अनुमान </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखा है। सरकार इसे रणनीतिक और आर्थिक रूप से लाभकारी मानती है, जिससे सालाना 78,000-98,000 करोड़ रुपए की बचत होती है। अमेरिका ने ऊंचे शुल्क और प्रतिबंधों की चेतावनी दी है, लेकिन भारत ने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-showed-strength-in-its-resolve-regarding-russian-oil-import/article-138201"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(5).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका के दबाव को बिना शोर शराबे के खारिज करते हुए रूस से कच्चे तेल आयात जारी रखते हुए  सरकार ने अपने रणनीतिक संकल्प की मज़बूती का प्रदर्शन किया है। रूस से आयात करने के खिलाफ अमेरिका ने गत अगस्त से अपने बाजार में भारतीय सामानों पर 50% का दंडात्मक शुल्क दिया और चाहता है कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद कर दे। तेल और गैर के लिए विदेशी स्रोतों पर पर अपनी बड़ी निर्भरता के बीच भारत रूस को तेल आयात एक भरोसेमंद और रणनीतिक आपूर्तिकर्ता मानता है। रूस से तेल आयात करने से भारत को सालाना 78,000 करोड़ से 98,000 करोड़ की बचत होने का अनुमान है।</p>
<p><strong>यूक्रेन के विरोध में रूस को मदद :</strong></p>
<p>गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल आयात करने के विरुद्ध कड़ी चेतावनी दे रखी है। अमेरिका कहा तर्क है कि  रूस को भारत से मिलने वाले तेल के मुनाफे से यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है। ट्रम्प सरकार का कहना है कि रूस की आक्रामकता को रोकने के लिए भारत को रूसी तेल खरीदना बंद कर देना चाहिए नहीं तो उसे गंभीर आर्थिक प्रतिबंधों और ऊंचे शुल्क का सामना करना पड़ेगा।  </p>
<p><strong>रूसी कंपनियों पर कड़ी पाबंदियां :</strong></p>
<p>रूस से कच्चा तेल आयात जारी रखना एक ऐसे संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र  व्यवहार को दिखाता है जो अपने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देता है। भारत ने यह दृढता ऐसे समय दिखायी है जबकि अमेरिका ने रूसी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर कड़ी पाबंदियां लगा रखी है।  </p>
<p><strong>अक्टूबर में 26,250 करोड़ खर्च :</strong></p>
<p>रेला एडवाइजर्स के अनुसार अकेले अक्टूबर,2025 में भारत ने रूसी तेल खरीदने पर 26,250 करोड़ खर्च किये। उससे पहले सितंबर में भी भारत ने रूस से इतनी ही राशि का तेल आयात किया था। अमेरिका और चीन के बाद भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक में से एक बन गया है। यूक्रेन युद्ध से पहले, भारत के तेल आयात में रूसी कच्चे तेल का हिस्सा सिर्फ 0.2 प्रतिशत था।</p>
<p><strong>18 लाख बैरल का आयात :</strong></p>
<p>यह आंकड़ा बढ़कर 43 प्रतिशत हो गया और एक समय 65% तक पहुंच गया था। अब भारत की कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रूस से आता है। भारत औसतन एक दिन में 18 लाख बैरल का आयात कराता है। एक समय इसमें रूसी कच्चा तेल 12 लाख बैरल तक पहुंच गया था।</p>
<p><strong>अमेरिका भी रूस से तेल लेता है :</strong></p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका खुद अपनी ज़रूरतों के लिए रूसी तेल आयात करता है, लेकिन वह भारत और रूस की कंपनियों पर ज़बरदस्त दबाव डाल रहा हैऔर प्रतिबंध लगा रहा है। ट्रंप ने भारत पर रूसी कच्चे तेल को रिफाइन करके और पेट्रोलियम उत्पादों को यूरोपीय देशों सहित निर्यात करके बड़ा मुनाफा कमाने का आरोप लगाया है। उन्होंने रूसी हथियार खरीदने पर भी भारत के विरुद्ध प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है।</p>
<p><strong>कीमत सबसे महत्वपूर्ण कारक :</strong></p>
<p>भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर कुमार ने कहा है  कि तेल खरीद तय करने में कीमत सबसे महत्वपूर्ण कारक है। इसके अनुसार, भारत ने प्रतिबंधों से पहले और बाद में लगातार आयात बढ़ाया है। पिछले वर्ष जनवरी और जून के बीच, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल, मित्तल एनर्जी, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड जैसी प्रमुख रिफाइनरियों ने बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल आयात किया।  </p>
<p><strong>400 रुपए प्रति बैरल की बचत :</strong></p>
<p>इतने ज़्यादा दबाव और बयानबाज़ी के बावजूद भारत ने रूसी तेल खरीदने की अपनी नीति से पीछे नहीं हटा, और अपने राष्ट्रीय आर्थिक हितों की रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। रूसी कच्चे तेल को खरीदने से भारत को लगभग 400 रुपए प्रति बैरल की बचत हुई है। यह फायदा यूक्रेन युद्ध के बाद दूसरे आपूर्तिकर्ताओं से नहीं मिल रहा था। भारत की बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था की जरूरतों को देखते हुए इस आयात पर निर्भरता से बचा नहीं जा सकता।    </p>
<p><strong>रोक लगाने वाला कोई निर्देश जारी नहीं :</strong></p>
<p>अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच एचपीसीएल के चेयरमैन विकास कौशल ने कहा कि सरकार ने रूसी तेल आयात पर रोक लगाने वाला कोई निर्देश जारी नहीं किया है और खरीद के फैसले लागत-प्रभावशीलता और बाजार की रुचि के आधार पर तेल कंपनियों पर निर्भर करते हैं।</p>
<p><br />    <br /> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
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                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 12:02:00 +0530</pubDate>
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                <title>पारिवारिक परंपरा को बोझ नहीं, समाधान समझें</title>
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                        <![CDATA[समग्र विश्व एक वैश्विक ग्राम है और हम सभी इस बृहतपरिवार का हिस्सा हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/consider-family-tradition-as-a-solution-not-a-burden/article-138105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)5.png" alt=""></a><br /><p>समग्र विश्व एक वैश्विक ग्राम है और हम सभी इस बृहतपरिवार का हिस्सा हैं। भारत ने तो वसुधैव कुटुम्बकम् का उद्घोष करते हुए समूची दुनिया को एक परिवार ही माना है। वैसे भारत की परिवार परम्परा दुनिया के लिये अनुकरणीय है। हम सभी एक परिवार हैं, चाहे हमारी नागरिकता, धर्म, जाति, सीमाएं या नस्ल कुछ भी हो। समग्र मानव जाति को एक साथ आना चाहिए और प्रेम और शान्ति में विश्वास करना चाहिए और विश्व में सुख और आशा लाने हेतु इसका अभ्यास करना चाहिए। संसार संघर्षों, युद्धों, उपद्रवों, कष्ट और पीड़ा से भरा पड़ा है। यदि हम सभी एक साथ आएं और दुनिया को प्रेम और धैर्य से ठीक करें, तो हम सभी खुशी से और अपने हृदयों में आशा के साथ रह सकते हैं। वैश्विक परिवार दिवस विविधता एवं एकता और विश्व शान्ति और अहिंसा महत्व के बारे में जागरूकता लाता है।</p>
<p><strong>परिवार की भूमिका : </strong></p>
<p>परिवार की भूमिका, उसकी बदलती संरचना और सामाजिक प्रासंगिकता आधुनिक समाज की सबसे गहरी विडंबनाओं और चुनौतियों को उजागर करने वाला एक चिंतन बन गया है। परिवार मानव जीवन की वह मूल इकाई है, जहां व्यक्ति का भावनात्मक, नैतिक और सामाजिक निर्माण होता है। भारतीय संदर्भ में परिवार केवल रक्त-संबंधों का समूह नहीं रहा, बल्कि वह संस्कारों की पाठशाला, शांति, सहयोग एवं सौहार्द की प्रयोगभूमि और जीवन-मूल्यों का आधार रहा है। इसी परिवार-परंपरा ने भारत को सदियों तक सामाजिक स्थिरता, अहिंसा, सहिष्णुता और मानवीय करुणा का देश बनाए रखा। आज विडंबना यह है कि जिस भारतीय परिवार व्यवस्था को दुनिया एक आदर्श मॉडल के रूप में देख रही है, उसी भारत में वह धीरे-धीरे उपेक्षा और विस्मृति का शिकार होती जा रही है।</p>
<p><strong>उपभोक्तावादी जीवनशैली :</strong></p>
<p>वैश्वीकरण, शहरीकरण, प्रतिस्पर्धा और उपभोक्तावादी जीवनशैली ने परिवार को सुविधा केंद्रित इकाई में बदल दिया है। संयुक्त परिवारों का विघटन, एकल परिवारों का बढ़ना और रिश्तों में औपचारिकता का प्रवेश इस परिवर्तन की स्पष्ट पहचान है। माता-पिता दोनों के कार्यरत होने की स्थिति में बच्चों के साथ समय बिताना एक चुनौती बन गया है। परिणामस्वरूप बचपन, जो कभी परिवार के स्रेह, संवाद और अनुभवों से संवरता था, आज स्क्रीन, अकेलेपन और भावनात्मक रिक्तता के बीच पनप रहा है। बच्चों के जीवन में माता-पिता की अनुपस्थिति केवल समय की कमी नहीं है, बल्कि वह सुरक्षा, संवाद और मार्गदर्शन की कमी भी है। परिवार का वह सहज वातावरण, जहां प्रश्न पूछे जा सकते थे, गलतियां स्वीकार की जा सकती थीं और भावनाएं साझा की जा सकती थीं, आज धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। बुजुर्ग, जो कभी परिवार की धुरी हुआ करते थे, अनुभव और संस्कार के संवाहक थे, आज कई घरों में हाशिये पर खड़े दिखाई देते हैं।</p>
<p><strong>वैश्विक स्तर पर :</strong></p>
<p>उनके पास समय नहीं, धैर्य नहीं और कभी-कभी सम्मान भी नहीं बचा। यह स्थिति केवल पीढ़ियों के बीच दूरी नहीं बढ़ा रही, बल्कि समाज को उसके नैतिक आधार से भी वंचित कर रही है। दूसरी ओर, यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि वैश्विक स्तर पर आज परिवार की भूमिका को नए सिरे से समझा जा रहा है। पश्चिमी देशों में, जहां अत्यधिक व्यक्तिगत स्वतंत्रता ने सामाजिक अकेलेपन को जन्म दिया, अब परिवार, साझेदारी और सामूहिक जीवन की पुनर्स्थापना पर गंभीर विमर्श हो रहा है। परिवार केवल निजी जीवन की इकाई नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और सामाजिक संतुलन की आधारशिला भी है। दुनिया भर में संस्कृतियां और धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि पूरी मानव जाति एक बड़ा परिवार है, जो एकजुट होकर ही जीवित रह सकती है। परिवार के साथ शिक्षा और कल्याण ही भविष्य की ओर संकेत करता है कि परिवार की भूमिका केवल बच्चों को पालने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह शिक्षा का पहला केंद्र और कल्याण का स्थायी आधार है।</p>
<p><strong>जीने की संस्कृति :</strong></p>
<p>परिवार की प्रासंगिकता इसी बिंदु पर सबसे अधिक उभरकर सामने आती है कि परिवार केवल रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि जीने की संस्कृति है। परिवार में बिताया गया समय निवेश है, व्यय नहीं। बच्चों के साथ संवाद, बुजुर्गों के साथ सहभागिता और रिश्तों के बीच संवेदनशीलता समाज के दीर्घकालिक स्वास्थ्य की गारंटी है। यदि आज परिवार टूट रहे हैं, तो उसका प्रभाव केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह सामाजिक असंतुलन, मानसिक तनाव और मूल्यहीनता के रूप में व्यापक रूप से सामने आएगा। इस संदर्भ में आवश्यक है कि हम परिवार को नए दृष्टिकोण से देखें। आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। कार्य और परिवार के बीच प्राथमिकताओं का पुनर्निर्धारण हो। डिजिटल सुविधाओं के साथ मानवीय संवाद को भी उतना ही महत्व दिया जाए। बच्चों के लिए समय निकालना दायित्व नहीं, बल्कि भविष्य के समाज में निवेश के रूप में समझा जाए।</p>
<p><strong>शांत और सहयोगी :</strong></p>
<p>बुजुर्गों को केवल सहारा नहीं, बल्कि मार्गदर्शक के रूप में पुन: स्वीकार किया जाए। परिवार ही हमें यह सिखाता है कि परिवार जितना सशक्त होगा, समाज उतना ही शांत और सहयोगी बनेगा। परिवारों में संवाद होगा तो समाज में टकराव कम होंगे। परिवारों में साझेदारी होगी, तो सहयोग की भावना मजबूत होगी। इसलिए आज आवश्यकता इस बात की है कि भारत अपनी पारिवारिक परंपरा को बोझ नहीं, बल्कि वैश्विक समाधान के रूप में देखे। अंतत: परिवार हमें आत्ममंथन का अवसर देता है। यदि परिवार सशक्त हुए तो शांति, साझेदारी और मानवीय मूल्यों का भविष्य सुरक्षित रहेगा। भारतीय परिवार परंपरा आज भी प्रासंगिक है, आवश्यक है कि हम उसे समयानुकूल रूप देते हुए अपने जीवन के केंद्र में पुन: स्थापित करें, क्योंकि मजबूत परिवार ही मजबूत समाज और शांत विश्व की आधारशिला होते हैं।</p>
<p><strong>-ललित गर्ग</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:56:10 +0530</pubDate>
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                <title>नए वर्ष में अनुत्तरित सवालों के जवाबों की तलाश</title>
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                        <![CDATA[एक और वर्ष इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/searching-for-answers-to-unanswered-questions-in-the-new-year/article-137873"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(9)3.png" alt=""></a><br /><p>एक और वर्ष इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। वर्ष 2025 केवल कैलेंडर का एक अंक नहीं था, बल्कि वह घटनाओं, चेतावनियों, उपलब्धियों और विडंबनाओं का ऐसा संगम रहा, जिसने समाज, राजनीति और विकास की हमारी समूची अवधारणाओं को कठघरे में खड़ा किया। नये वर्ष में प्रवेश करते समय यह केवल उल्लास, संकल्प और शुभकामनाओं का क्षण नहीं है, बल्कि गहरे आत्ममंथन का अवसर भी है। सवाल यह नहीं कि नया साल हमें क्या देगा, सवाल यह है कि बीते वर्ष ने हमें क्या सिखाया और हम उन सीखों को अपने जीवन, नीतियों और प्राथमिकताओं में कितना उतार पाए। हर नया वर्ष अपने साथ उम्मीदों की नई रोशनी लेकर आता है, लेकिन वह बीते वर्ष की छायाओं से मुक्त नहीं होता। उन छायाओं को समझना और उनसे सबक लेना ही नये वर्ष की सच्ची शुरुआत है।</p>
<p><strong>भारत और विश्व :</strong></p>
<p>वर्ष 2025 की ओर दृष्टि डालें तो यह स्पष्ट होता है कि भारत और विश्व दोनों स्तरों पर विकास और संकट साथ-साथ चले। एक ओर भारत ने डिजिटल अर्थव्यवस्था, अंतरिक्ष विज्ञान, बुनियादी ढांचे और वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति को मजबूत किया, वहीं दूसरी ओर पहलगाम की आतंकी घटना, पर्यावरणीय आपदाएं, महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और चिकित्सा की बढ़ती लागत, सामाजिक विषमता और राजनीतिक अविश्वास जैसे प्रश्न और भी गहरे होते चले गए। ये वे अनुत्तरित सवाल हैं, जिनके समाधान के बिना नये भारत और सशक्त भारत की संकल्पना अधूरी ही रहेगी। जाते हुए वर्ष के आंकड़ों एवं घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि केवल आर्थिक आंकड़ों की चमक से किसी राष्ट्र की वास्तविक स्थिति नहीं आंकी जा सकती।</p>
<p><strong>दुनिया को संदेश दिया :</strong></p>
<p>पहलगाम की आतंकी घटना ने एक बार फिर आतंकवाद के भयावह चेहरे को उजागर किया, लेकिन उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब केवल पीड़ित नहीं, बल्कि निर्णायक और साहसी प्रतिकार करने वाला राष्ट्र है। इस सटीक कार्रवाई ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की पोल खोलते हुए दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और नागरिकों के जीवन के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। आतंक के विरुद्ध भारत की यह नीति न तो उकसावे में आना, न ही चुप रहना, एक परिपक्व, सक्षम और आत्मविश्वासी राष्ट्र की पहचान बन चुकी है, जिसने सीमा पार बैठे आतंकी संरक्षकों को गहरा और ठोस जवाब दिया है। इसी परिप्रेक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राएं और उनकी वैश्विक नेतृत्व छवि भारत के उभार को नई ऊंचाइयों तक ले जाती दिखती हैं।</p>
<p><strong>भारत की भूमिका :</strong></p>
<p>कूटनीति, निवेश, तकनीक और आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका सुदृढ़ हुई है, जिससे देश के भीतर विश्वास और आशाओं का संचार हुआ है। स्थिर शासन, सुधारों की निरंतरता और वैश्विक साझेदारियों के बल पर भारत का तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना अब एक दूर का स्वप्न नहीं, बल्कि साकार होता परिदृश्य प्रतीत होता है। आतंकवाद के विरुद्ध कठोर रुख, नक्सलवादमुक्त भारत और अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भर, नवोन्मेषी गति इन तीनों ने मिलकर भारत को विश्व मंच पर निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित किया है। पर्यावरण वर्ष 2025 की सबसे बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया। जलवायु परिवर्तन अब केवल वैज्ञानिक रिपोर्टों या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का विषय नहीं रहा, बल्कि वह आम आदमी के जीवन का कठोर यथार्थ बन चुका है। हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन, उत्तर भारत में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, महानगरों में दमघोंटू प्रदूषण और तटीय इलाकों में चक्रवातों की बढ़ती तीव्रता,ये सभी घटनाएं एक ही संकट की अलग-अलग अभिव्यक्तियां हैं।</p>
<p><strong>प्रकृति से खिलवाड़ :</strong></p>
<p>हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल, पूर्वोत्तर और अन्य राज्यों में आई प्राकृतिक आपदाओं ने यह दिखा दिया कि प्रकृति से खिलवाड़ का मूल्य सबसे पहले गरीब और वंचित चुकाते हैं। विकास की अंधी दौड़ में जब पहाड़ों को काटा जाता है, नदियों को बांधा जाता है और जंगलों को उजाड़ा जाता है, तो उसका परिणाम विनाश के रूप में सामने आता है। नये वर्ष में यह सवाल हमारे सामने खड़ा है कि क्या विकास का अर्थ केवल सड़कें, पुल, सुरंगें और ऊंची इमारतें हैं, या वह जीवन, प्रकृति और भविष्य की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। जब तक पर्यावरणीय संतुलन को विकास नीति के केंद्र में नहीं रखा जाएगा, तब तक हर नया साल नई आपदाओं की आहट लेकर आता रहेगा। वर्ष 2025 ने हमें यह सोचने को विवश किया है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य ही स्थायी विकास का एकमात्र रास्ता है।</p>
<p><strong>सोचने की प्रेरणा :</strong></p>
<p>प्रदूषण और स्वास्थ्य का संकट भी 2025 में और अधिक गहराया। सवाल यह है कि क्या आर्थिक विकास के नाम पर हम अपने ही जीवन स्रोतों को नष्ट करने के लिए तैयार हैं। नया वर्ष यह सोचने की प्रेरणा देता है कि स्वास्थ्य केवल अस्पतालों और दवाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और सुरक्षित पर्यावरण उसका मूल आधार हैं। शिक्षा के क्षेत्र में 2025 ने कई कड़वी सच्चाइयों को उजागर किया। विदेशों में पढ़ाई लगातार महंगी होती गई और देश के भीतर निजी शिक्षा संस्थानों की फीस मध्यम वर्ग की पहुंच से भी बाहर होती चली गई। नया साल यह मांग करता है कि स्वास्थ्य को सेवा के रूप में पुनर्परिभाषित किया जाए, न कि मुनाफे के साधन के रूप में। महामारी और आपदाओं के अनुभव यह सिखाते हैं कि मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली ही किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होती है। यदि हम 2025 की घटनाओं से प्रेरणा लेकर 2026 में सही प्रश्न पूछने का साहस कर पाएं, तो उनके उत्तर स्वत: रास्ता बना लेंगे। यही नये वर्ष की सच्ची कामना, संकल्प और सबसे बड़ी उपलब्धि हो सकती है।</p>
<p><strong>-ललित गर्ग</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 12:27:40 +0530</pubDate>
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