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                <title> china - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> china RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चीन को 6जी तकनीक में बड़ी कामयाबी : नई संचार तकनीक ने डेटा स्पीड में बनाया रिकॉर्ड, 5जी से दस गुना तेज ट्रांसमिशन</title>
                                    <description><![CDATA[चीन के शोधकर्ताओं ने ऑप्टिकल फाइबर और वायरलेस नेटवर्क को जोड़कर नई एकीकृत संचार प्रणाली विकसित की, जिसने डेटा स्पीड का विश्व रिकॉर्ड बनाया। पेकिंग विश्वविद्यालय समेत टीम की यह तकनीक फाइबर पर 512 Gbps और वायरलेस पर 400 Gbps ट्रांसमिशन देती है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinas-big-success-in-6g-technology-new-communication-technology-made/article-144023"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने ऑप्टिकल फाइबर और वायरलेस नेटवर्क को जोड़ने वाली एकीकृत संचार प्रणाली विकसित की है, जिसने डेटा ट्रांसमिशन की गति में नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। वैज्ञानिक जर्नल नेचर में गुरुवार को प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, एआई डाटा केंद्रों में कंप्यूटिंग शक्ति की बढ़ती मांग और अगली पीढ़ी के 6जी वायरलेस नेटवर्क के विकास के लिए विभिन्न परिस्थितियों में उच्च गति और कम विलंबता वाले सिग्नल ट्रांसमिशन की आवश्यकता होती है। ऑप्टिकल फाइबर और वायरलेस संचार प्रणालियों के बीच हालांकि सिग्नल आर्किटेक्चर और हार्डवेयर में अंतर के कारण एक ही बुनियादी ढांचे पर दोनों प्रणालियों के बीच उच्च गति और अनुकूल एंड-टू-एंड ट्रांसमिशन हासिल करना कठिन रहा है। यह उच्च गति दूरसंचार नेटवर्क के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी, जिस पर चीनी शोध दल ने कामयाबी हासिल कर ली है। पेकिंग विश्वविद्यालय, पेंग चेंग प्रयोगशाला, शंघाईटेक विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स इनोवेशन सेंटर की शोध टीम ने एक एकीकृत संचार प्रणाली विकसित की है, जो ऑप्टिकल फाइबर पर 512 जीबीपीएस और वायरलेस पर 400 जीबीपीएस का सिंगल-चैनल सिग्नल ट्रांसमिशन प्राप्त करती है।</p>
<p><strong>रियल-टाइम 8के वीडियो एक्सेस का प्रदर्शन :</strong></p>
<p>पेकिंग विश्वविद्यालय में इस शोध पत्र के सह-लेखकों में से एक वांग शिंगजुन के अनुसार, यह नयी प्रणाली ऑप्टिकल फाइबर और वायरलेस नेटवर्क दोनों के जरिये डुअल-मोड ट्रांसमिशन का समर्थन करती है। यह न केवल बैंडविड्थ की सीमाओं और शोर के संचय से बचाती है, बल्कि हस्तक्षेप-विरोधी क्षमताओं को भी बढ़ाती है। दल ने बड़े पैमाने के 6जी उपयोगकर्ता एक्सेस परिदृश्य का अनुकरण भी किया है। इसमें 86 चैनलों पर मल्टीचैनल रियल-टाइम 8के वीडियो एक्सेस का प्रदर्शन किया गया। इसने वर्तमान 5जी मानक की तुलना में दस गुना से अधिक ट्रांसमिशन बैंडविड्थ हासिल की है।  बहुत अधिक क्षमता वाले संचार को सक्षम करने के अलावा यह प्रणाली ऊर्जा की खपत, लागत और बड़े पैमाने पर तैनाती के लिए विस्तार क्षमता के मामले में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 13:21:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ताइवान को हथियार बेचने का मामला : चीन ने 20 अमेरिकी कंपनियों और 10 अधिकारियों पर लगाए प्रतिबंध, कहा- हथियार देना एक-चीन सिद्धांत का गंभीर उल्लंघन </title>
                                    <description><![CDATA[ताइवान को हथियार सप्लाई पर तनाव बढ़ते ही चीन ने 20 अमेरिकी रक्षा कंपनियों और 10 वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन, एल3हैरिस, बोइंग और एंडुरिल इंडस्ट्रीज के प्रमुख शामिल हैं। चीन ने उनकी संपत्तियां फ्रीज कीं और लेनदेन पर रोक लगाई। चीन ने इसे एक-चीन सिद्धांत का उल्लंघन बताया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/case-of-selling-arms-to-taiwan-china-imposed-sanctions-on/article-137431"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/chaina-flag.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। ताइवान को हथियारों की आपूर्ति को लेकर वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव बढ़ गया है। चीन ने हाल के वर्षों में ताइवान को हथियार बेचने में शामिल 20 अमेरिकी रक्षा कंपनियों और 10 वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन जवाबी उपायों में चीन के भीतर कंपनियों और वरिष्ठ अधिकारियों की चल और अचल संपत्तियों को फ्रीज करना, चीन में संगठनों और व्यक्तियों को उनके साथ लेनदेन, सहयोग और अन्य गतिविधियों में शामिल होने से रोकना और हांगकांग और मकाऊ विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों सहित चीन में अधिकारियों के प्रवेश पर रोक लगाना शामिल है, जिन 20 कंपनियों को निशाना बनाया गया है, उनमें नॉथ्र्रॉप ग्रुम्मन सिस्टम्स कॉर्पोरेशन, एल3हैरिस मैरीटाइम सर्विसेज और सेंट लुइस स्थित बोइंग शामिल हैं।</p>
<p>सूची में शामिल 10 व्यक्तियों में रक्षा फर्म एंडुरिल इंडस्ट्रीज के संस्थापक पामर लकी और एल3हैरिस टेक्नोलॉजीज के उपाध्यक्ष जॉन कैंटिलन शामिल हैं।</p>
<p>चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ताइवान को अमेरिका द्वारा हथियार देना एक-चीन सिद्धांत और चीन-अमेरिका के तीन संयुक्त घोषणाओं का गंभीर उल्लंघन है, चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है और चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Dec 2025 15:40:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच जापान का बड़ा कदम : 58 अरब डॉलर के रक्षा बजट को मंजूरी, हमले की क्षमता को बढ़ाना उद्देश्य</title>
                                    <description><![CDATA[जापान ने चीन से बढ़ते क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए अब तक का सबसे बड़ा रक्षा बजट मंजूर किया है। अगले वित्तीय वर्ष में रक्षा के लिए करीब 58 अरब डॉलर (9,000 अरब येन) आवंटित किए गए हैं। बजट का बड़ा हिस्सा लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन क्षमताओं पर खर्च होगा। जापान आक्रामक रक्षा नीति की ओर बढ़ रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/japans-big-step-amid-increasing-tension-with-china-approval-of/article-137332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/japan-flag.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान के मंत्रिमंडल ने क्षेत्रीय तनाव और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए अब तक के सबसे बड़े रक्षा बजट को अपनी मंजूरी दे दी। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए जापान सरकार ने रक्षा क्षेत्र को लगभग 58 अरब डॉलर का आवंटन किया है। जापानी मुद्रा येन में यह राशि नौ हजार अरब येन है। इस भारी भरकम बजट का मुख्य उद्देश्य जापान की जवाबी हमले की क्षमता को बढ़ाना और अत्याधुनिक मानवरहित हथियारों, ड्रोनों के जरिए तटीय सुरक्षा को पुख्ता करना है।</p>
<p>सरकार ने यह फैसला चीन की ओर से मिलने वाली चुनौतियों को देखते हुए लिया है। विशेष रूप से ताइवान पर चीन के संभावित हमले को लेकर जापान ने अपनी सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया है। ताइवान के मामले में जापानी सेना हस्तक्षेप कर सकती है। जापान अब अपनी रक्षा नीति को आत्मरक्षा तक सीमित रखने के पुराने सिद्धांत से हटकर आक्रामक रक्षा की ओर बढ़ रहा है।</p>
<p>बजट का एक बड़ा हिस्सा यानी करीब 970 अरब  येन लंबी दूरी की मिसाइलों के विकास पर खर्च किया जाएगा। इसमें 1,000 किमी रेंज वाली टाइप-12 मिसाइलें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, जनसंख्या की कमी और सेना में कम स्टाफ की चुनौती से निपटने के लिए जापान शील्ड नामक एक उन्नत प्रणाली विकसित कर रहा है। इसके तहत जल, थल और नभ में संचालित होने वाले बड़े पैमाने पर ड्रोन तैनात किए जाएंगे।</p>
<p>अनुमान है कि जापान का वार्षिक सैन्य खर्च 10 ट्रिलियन येन तक पहुंच जाएगा, जिससे यह अमेरिका और चीन के बाद रक्षा पर खर्च करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन जाएगा। जापान ने अपनी जीडीपी का दो  प्रतिशत रक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य रखा है। जापान केवल आयात पर ही नहीं, बल्कि अपने घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है। वह ब्रिटेन और इटली के साथ मिलकर अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान बना रहा है। साथ ही, हाल ही में ऑस्ट्रेलिया द्वारा मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज को अपने जहाजों के अपग्रेडेशन के लिए चुनना जापानी रक्षा उद्योग के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। इस बजट प्रस्ताव को अब मार्च तक संसद की मंजूरी मिलने की उम्मीद है। सरकार इस खर्च की भरपाई के लिए कॉर्पोरेट और तंबाकू करों में बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 17:02:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अरुणाचल भारत का हिस्सा : चीन ने भारतीय ब्लॉगर को लिया हिरासत में, 15 घंटे पानी भी नहीं दिया </title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा बताने पर भारतीय ब्लॉगर अनंत मित्तल को करीब 15 घंटे हिरासत में रखा। उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप है। यह घटना 16 नवंबर 2025 को हुई। इससे पहले भी अरुणाचल की एक भारतीय महिला को शंघाई एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/arunachal-is-part-of-india-china-detained-indian-blogger-and/article-137120"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(6)4.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा बताने पर चीन में भारतीय ब्लॉगर अनंत मित्तल को करीब 15 घंटे तक हिरासत में रखा गया। इस दौरान उसे खाना और पानी नहीं देकर मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया गया। अरुणाचल को लेकर पिछले एक महीने में यह दूसरी बार है जब चीन ने बदमाशी की है। इससे पहले अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली एक भारतीय नागरिक को शंघाई एयरपोर्ट पर हिरासत में रखा गया था। भारतीय ब्लॉगर ने एक वीडियो बनाकर अब इसकी जानकारी दी है। उसने कहा है कि चीन के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 15 घंटे से ज्यादा समय तक उसे हिरासत में रखा गया। यह घटना 16 नवंबर 2025 को हुई, जब दिल्ली के रहने वाले ऑन रोड इंडियन नाम के एक यूट्यूबर चीन के लिए निकले और फिर उन्हें हिरासत में रखा गया।</p>
<p>ब्लॉगर अनंत मित्तल के मुताबिक उन्हें इसलिए हिरासत में लिया गया क्योंकि उन्होंने अपने एक ब्लॉग में अरुणाचल प्रदेश का जिक्र किया था, जो भारत का एक अभिन्न अंग है। ब्लॉगर ने उसी महिला का जिक्र किया, जिस शंघाई एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया, जो अरुणाचल की रहने वाली थीं। ब्लॉगर का कहना है कि उन्होंने अपने एक वीडियो में उस महिला का समर्थन किया था और अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा बताया था, इसीलिए उन्हें चीन में हिरासत में ले लिया गया था।</p>
<p><strong>भारतीय पासपोर्ट को मान्यता देने से इनकार :</strong></p>
<p>नवंबर में अरुणाचल की रहने वाली एक भारतीय नागरिक को शंघाई के पुडोंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने करीब 18 घंटे तक हिरासत में रखा था। उसके भारतीय पासपोर्ट को मान्यता देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उसका जन्मस्थान अरुणाचल प्रदेश था। एक वीडियो जारी करते हुए व्लॉगर ने बताया कि जैसे ही वह इमिग्रेशन काउंटर पर पहुंचा, अधिकारी ने उसका पासपोर्ट जांचा और सिस्टम में कुछ देखने के बाद उस पर एक स्टिकर लगा दिया। इसके बाद अन्य अधिकारियों को बुलाया गया और उसे एक अलग जगह ले जाया गया। ब्लॉगर ने बताया कि वहां पहले दो घंटे तक कोई जानकारी नहीं दी गई, जिससे वह डर गया। बाद में दो चीनी अधिकारी उसे एक अलग कमरे में ले गए, उसके मोबाइल और उसके दूसरे उपकरण जब्त कर लिए। व्लॉगर ने कहा कि उसे शक होने लगा कि अरुणाचल प्रदेश को लेकर उसकी बातों को चीन ने अपने खिलाफ माना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 11:18:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन में अजब मुकाबला : 33 घंटे 35 मिनट लेटकर युवक बना ‘दुनिया का सबसे आलसी इंसान’, जीता 3,000 युआन का इनाम</title>
                                    <description><![CDATA[चीन के इनर मंगोलिया के बाओटो शहर में हुई अनोखी ‘लाइ-फ्लैट कॉन्टेस्ट’ में प्रतिभागियों को बिना उठे लगातार लेटे रहना था। मोबाइल, किताब और खाना allowed थे, लेकिन बाथरूम जाना मना था, इसलिए कई प्रतिभागी डायपर पहनकर आए। 240 प्रतिभागियों में से एक युवक ने 33 घंटे 35 मिनट लेटकर खिताब जीता और 3,000 युआन पुरस्कार प्राप्त किया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/in-a-strange-competition-in-china-a-young-man-became/article-133238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(1200-x-600-px)-(630-x-400-px)-(2).png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के इनर मंगोलिया के बाओटो शहर में एक अनोखी और मनोरंजक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसका नाम ‘लाइ-फ्लैट कॉन्टेस्ट’ था, जिसे लोग आलस की प्रतियोगिता भी कह रहे हैं। इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को बस लगातार लेटे रहना था। मोबाइल फोन, किताबें और खाना साथ रखने की अनुमति थी, लेकिन उठना-बैठना, घूमना या बाथरूम जाना बिल्कुल मना था। इसी वजह से कई प्रतिभागी डायपर पहनकर आए थे, ताकि वे बिना उठे लंबे समय तक मुकाबले में टिक सकें।</p>
<p>यह प्रतियोगिता 15 नवंबर सुबह 10:18 बजे शुरू होकर 16 नवंबर शाम 7:53 बजे तक चली। कुल 240 लोगों ने हिस्सा लिया। अंत में एक युवक ने 33 घंटे 35 मिनट तक गद्दे पर लेटे रहने का रिकॉर्ड बनाते हुए प्रतियोगिता जीत ली। उसे दुनिया का सबसे आलसी आदमी का खिताब मिला और करीब 3,000 युआन (लगभग 37,442 रुपए) इनाम के रूप में दिए गए। यह इवेंट सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा में रहा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 10:28:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रेयर अर्थ मिनरल्स पर चीन ने मांगी गारंटी : केवल घरेलू भारतीय जरूरतों के लिए हो प्रयोग, अन्य को ना बेचें</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने भारत से भारी रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर सख्त गारंटी मांगी है कि ये अमेरिका को दोबारा निर्यात नहीं होंगे। भारत ने अंतिम उपयोग प्रमाण पत्र दिए हैं, पर चीन और आश्वासन चाहता है। 90% वैश्विक उत्पादन नियंत्रित करने वाला चीन अभी भारत को लाइसेंस नहीं दे रहा, जिससे हाई-टेक और EV उद्योग प्रभावित हो रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-asked-for-guarantee-on-rare-earth-minerals-they-should/article-129252"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/_4500-px)-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि चीन ने भारत से गारंटी मांगी है। चीन ने रिक्वेस्ट किया है कि वह यह गारंटी दे कि चीन से इम्पोर्ट भारी रेयर अर्थ मिनरल्स का शिपमेंट शुरू होने के बाद अमेरिका को दोबारा एक्सपोर्ट नहीं किया जाएगा। चीन चाहता है कि ये रेयर अर्थ, सिर्फ घरेलू भारतीय जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जाए। रेयर अर्थ इलेक्ट्रिक वाहनों और डिफेंस के लिए खास इनपुट है। इसके बिना ऑटो इंडस्ट्रीज से लेकर डिफेंस सेक्टर्स तक के काम प्रभावित हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियों ने लास्ट यूजर्स सर्टिफिकेट जमा कर दिए हैं, जिनमें कहा गया है कि इन मिनरल्स का इस्तेमाल सामूहिक विनाश के हथियारों के निर्माण में नहीं किया जाएगा, लेकिन चीन निर्यात को लेकर और आश्वासन की मांग कर रहा है।</p>
<p><strong>90% हिस्सा चीन करता है कंट्रोल :</strong></p>
<p>रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इन गारंटियों के कारण राजनीतिक संबंधों के बावजूद आपूर्ति में लगातार देरी हो रही है। चीन रेयर अर्थ मिनरल्स के वैश्विक उत्पादन के 90 फीसदी पर कंट्रोल रखता है और उसने कंट्री बेस्ड डाटा भी शेयर करना बंद कर दिया है। भारत और चीन के बीच रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर बातचीत अभी रुकी हुई है, क्योंकि चीन भारत से गारंटी चाहता है।  भारतीय आपूर्तिकर्ताओं ने चीनी नियमों के अनुसार लास्ट यूज सर्टिफिकेट उपलब्ध कराए हैं। चीन की मांग में यह आश्वासन भी शामिल है कि इन रेयर अर्थ का यूज सामूहिक विनाश के हथियारों के निर्माण या प्रोसेसिंग जैसे कामों के लिए नहीं किया जाएगा। वाणिज्य मंत्रालय से सर्टिफाइड कंपनियों ये आश्वासन दे रही हैं। अगस्त में शंघाई सहयोग शिखर सम्मेलन के बाद चीन ने भारत को हल्के दुर्लभ मृदा चुम्बकों की आपूर्ति फिर से शुरू कर दी, लेकिन भारी रेयर अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति अभी भी रुकी हुई है।</p>
<p>पिछले साल भारत ने 306 करोड़ रुपए के 870 टन दुर्लभ मृदा चुम्बकों का आयात किया था। इस मौजूदा कमी का असर हाई टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज पर पड़ा है और इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>चीन ने अप्रैल में राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा का हवाला देते हुए मध्यम और भारी दुर्लभ मृदा से संबंधित वस्तुओं पर एक्सपोर्ट कंट्रोल का ऐलान किया था। केवल वे खरीदार ही इन चीजों का आयात करने के लायक हैं, जिन्होंने चीन के वाणिज्य विभाग से लाइसेंस मिला है। यूरोप और साउथ ईस्ट एशिया को आपूर्ति के खिलाफ, भारतीय विक्रेताओं को अभी तक निर्यात लाइसेंस नहीं दिए गए हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Oct 2025 11:31:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन में विजय दिवस परेड में शामिल हुए पुतिन और शाहबाज : ट्रम्प ने कसा तंज, अमेरिका के खिलाफ साजिश रचने का लगाया आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने दूसरे विश्व युद्ध में अपनी विजय की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक विशाल सैन्य परेड का आयोजन किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/putin-and-shahbaz-trump-who-attended-the-victory-day-parade/article-125733"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/donlad-trump-3.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने दूसरे विश्व युद्ध में अपनी विजय की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक विशाल सैन्य परेड का आयोजन किया, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग उन सहित 20 से अधिक विदेशी नेताओं ने शिरकत की। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव एवं केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस भारी-भरकम परेड का निरीक्षण किया और सैनिकों से सलामी ली।  इस परेड में रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और कनाडा जैसे देशों से चीन की द्वितीय विश्व युद्ध में सहायता करने वाले लोगों के प्रतिनिधियों या उनके परिवार के सदस्यों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था।</p>
<p>साल 2015 के बाद से यह दूसरा अवसर था, जब चीन ने जापानी आक्रमण के विरुद्ध चीनी जन प्रतिरोध युद्ध और विश्व फासीवाद-विरोधी युद्ध में मिली मिली जीत के उपलक्ष्य में सैन्य परेड का आयोजन किया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मौक़े पर चीन को बधाई दी और साथ ही तंज कसते हुए अमेरिका के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने एक पोस्ट किया कि बड़ा सवाल यह है कि क्या चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग उस भारी समर्थन और'रक्त का जिक्र करेंगे जो अमेरिका ने चीन को विदेशी आक्रमणकारी से आजादी हासिल करने में मदद करने के लिए दिया था।</p>
<p>ट्रम्प ने पुतिन और किम की अमेरिका के खिलाफ कथित तौर पर  साजिश रचने के लिए भी आलोचना की। उन्होंने कहा- व्लादिमीर पुतिन और किम जोंग उन को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं, क्योंकि आप अमेरिका के खिलाफ़ साजिश रच रहे हैं। परेड से पहले जिनपिंग ने अपने संबोधन में 80 साल पहले हुई इस जीत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, कहा कि यह आधुनिक समय में विदेशी आक्रमण के विरुद्ध चीन की पहली पूर्ण विजय है। चीन के लोगों ने युद्ध में अपार बलिदान देकर मानव सभ्यता के उद्धार और विश्व शांति की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने राष्ट्रों से युद्ध के मूल कारण को समाप्त करने और ऐतिहासिक त्रासदियों की पुनरावृत्ति को रोकने का आह्वान किया। उन्होंने शांतिपूर्ण विकास के प्रति चीन की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उल्लेखनीय है कि दूसरे विश्व युद्ध में जापान ने दो सितंबर, 1945 को आधिकारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद चीन ने तीन सितंबर को विजय दिवस घोषित किया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 03 Sep 2025 16:53:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोई सीक्रेट डिप्लोमेसी नहीं, चीन-भारत संबंधों में सुधार दोनों देशों का साझा हित : विदेश मंत्रालय</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के टैरिफ युद्ध के बीच भारत-चीन संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद चीन की यात्रा पर जा रहे हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/no-secret-diplomacy-china-india-relations-improve-shared-interest-of-both/article-125238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(4)52.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। अमेरिका के टैरिफ युद्ध के बीच भारत-चीन संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद चीन की यात्रा पर जा रहे हैं। इस बीच चीन ने कहा है कि भारत के साथ संबंधों को सुधारना दोनों देशों के हित में है। पिछले साल पीएम मोदी औ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद दोनों देशों के संबंधों में व्यापक सुधार हुआ है। इनमें सीमा पर </p>
<p>बातचीत, सेनाओं की वापसी जैसे कदम भी शामिल हैं। हाल में ही चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भी भारत का दौरा किया और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान, दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के व्यापार का ऐलान भी किया। भारत और चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी इसी साल शुरू किया है।</p>
<p><strong>भारत-चीन संबंधों में सुधार पर क्या बोला बीजिंग</strong><br />चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को सवालों के लिखित जवाब में कहा कि चीन-भारत संबंधों में सुधार दोनों देशों का साझा हित है और यह दोनों पक्षों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच कोई गुप्त कूटनीति नहीं थी, बल्कि केवल सामान्य संचार और बातचीत थी। दरअसल, एक रिपोर्ट में बताया गया था कि चीन ने संबंधों में सुधार के लिए मार्च में भारत से चुपचाप संपर्क किया था। इस मामले से परिचित एक भारतीय अधिकारी ने बताया कि शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखकर अमेरिका के किसी भी ऐसे सौदे पर चिंता व्यक्त की जो चीन के हितों को नुकसान पहुंचा सकता है।</p>
<p><strong>मोदी-जिनपिंग की मुलाकात का हवाला</strong></p>
<p>चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि पिछले साल अक्टूबर में रूस के कजान में पीएम मोदी के साथ शी जिनपिंग की मुलाकात से संबंधों में फिर से सुधार हुआ। उन्होंने कहा चीन और भारत के सक्षम अधिकारियों ने दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति को गंभीरता से लागू किया है, संस्थागत संवाद की बहाली को बढ़ावा दिया है और सामान्य आदान-प्रदान किया है। इसके बाद से ही भारत और तीन के संबंधों में तेजी आई है। दोनों पक्षों ने सीमा पर गतिरोध को दूर करने के लिए कदम उठाए हैं।</p>
<p><strong>अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ भारत के साथ चीन</strong><br />चीन ने भारत पर अमेरिका के टैरिफ की भी खुलकर आलोचना की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया है। इससे अमेरिका को भारतीय निर्यात चरमरा गया है। इस पर चीन के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, चीन-भारत संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने और संभालने के लिए भारत के साथ काम करने को तैयार है। चीन ने खुलकर भारत पर अमेरिकी टैरिफ का विरोध किया है। भारत में चीनी राजदूत ने शू फेइहोंग ने तो यहां तक कहा था कि ऐसी हरकतों के सामने, चुप्पी या समझौता करने से धौंस जमाने वालों का हौसला बढ़ता है।</p>
<p><strong>ग्लोबल टाइम्स ने भी भारत के साथ संबंधों को सराहा</strong><br />चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने भी अपने संपादकीय में भारत के साथ दोस्ती की खुलकर वकालत की है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में गर्मजोशी रणनीतिक और आर्थिक रूप से सार्थक है और यह वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलावों से जुड़ा है। अखबार ने कहा, आज, एशिया के आर्थिक विकास के जुड़वां इंजन, ग्लोबल साउथ के प्रमुख प्रतिनिधि और एससीओ, ब्रिक्स और जी 20 के सदस्य होने के नाते, चीन और भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को अधिक लोकतंत्र और निष्पक्षता की ओर ले जाने के मिशन को साझा करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:41:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीन ने बनाया दुनिया का सबसे ऊंचा ब्रिज, इतना मजबूत कि 840 हाथी भी चढ़ जाएं तो कुछ नहीं होगा</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने एक और अजूबा बनाकर तैयार कर लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-created-the-worlds-highest-bridge-so-strong-that-even/article-125022"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(630-x-400-px)-(9).png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने एक और अजूबा बनाकर तैयार कर लिया है। गुइझोउ प्रांत की पहाड़ियों के बीच चीन ने दुनिया का सबसे ऊंचा पुल तैयार कर लिया है। नाम है हुआजियांग ग्रैंड कैन्यन ब्रिज। इस पुल ने हाल ही में अपना आखिरी बड़ा टेस्ट पास कर लिया और इंजीनियरों ने इसे सुरक्षित घोषित कर दिया है। सितंबर से आम लोग इस पर सफर कर पाएंगे।</p>
<p><strong>840 हाथियों जितना वजन डालकर टेस्टिंग :</strong></p>
<p>21 से 25 अगस्त के बीच पुल पर लोड टेस्ट किया गया। पुल पूरी तरीके से सेफ है कि नहीं, और ये भारी वजन सह सकता है कि नहीं, इसके लिए 96 बड़े ट्रक पुल पर चढ़ाए गए। हर ट्रक का वजन करीब 35 टन था। यानी लगभग 3360 टन वजन एक साथ पुल पर डाला गया। इसे अगर और आसान भाषा में समझें तो, अगर एक भारतीय हाथी का औसत वजन 4 टन मानें तो करीब 840 हाथियों का वजन डालकर पुल की टेस्टिंग हुई है।</p>
<p>ट्रक अलग-अलग जगह खड़े किए गए ताकि अलग-अलग हालात में पुल की मजबूती जांची जा सके। 400 से ज्यादा सेंसर लगाए गए थे, जो हर छोटी-बड़ी हलचल रिकॉर्ड कर रहे थे।</p>
<p><strong>कितना ऊंचा है ये ब्रिज ?</strong></p>
<p>हुआजियांग ब्रिज को दुनिया का सबसे ऊंचा पुल माना गया है। यह पानी से लेकर पुल के डेक तक 625 मीटर ऊंचा है। इसे समझने के लिए ऐसे मान लीजिए कि यह लगभग 200 मंजिंला इमारत जितना ऊंचा है। पुल का बीच वाला हिस्सा 1,420 मीटर लंबा है और पूरे ब्रिज की लंबाई करीब 2,890 मीटर तक फैली हुई है।</p>
<p><strong>बनाना आसान नहीं था :</strong></p>
<p>इस पुल का निर्माण जनवरी 2022 में शुरू हुआ था। इंजीनियरों और मजदूरों को इसे बनाते समय कई चुनौतियों से गुजरना पड़ा। कभी पहाड़ की खड़ी ढलानें मुश्किल बनीं, तो कभी तेज हवाओं और मौसम ने काम रोका। इतनी कठिनाइयों के बावजूद प्रोजेक्ट को तय समय में पूरा कर लिया गया। यही वजह है कि इसे इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।</p>
<p><strong>क्यों खास है गुइझोउ ?</strong></p>
<p>गुइझोउ प्रांत को दुनिया का ब्रिज म्यूजियम कहा जाता है। यहां 30 हजार से ज्यादा पुल बने हैं, जिनमें दुनिया के तीन सबसे ऊंचे ब्रिज भी शामिल हैं। अब हुआजियांग ब्रिज इस लिस्ट में नया ताज पहनाने वाला है। सितंबर में इसका आधिकारिक उद्घाटन होगा और फिर यह दुनिया का सबसे ऊंचा पुल आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 28 Aug 2025 11:53:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन : टॉप डिप्लोमैट लियू जियानचाओ हिरासत में, विदेश मंत्री बनने की चल रही थीं अटकलें</title>
                                    <description><![CDATA[चीन के सियासी गलियारों में हलचल तेज है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-top-diplomat-liu-gianchao-was-going-to-become-foreign/article-123230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)21.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के सियासी गलियारों में हलचल तेज है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ राजनयिक लियू जियानचाओ को जुलाई के अंत में एक विदेशी दौरे से लौटने के बाद बीजिंग में अधिकारियों ने पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई उस वक्त हुई है, जब वो हाल के वर्षों में चीन की विदेश नीति के सबसे सक्रिय चेहरों में से एक बन चुके थे। लियू जियानचाओ को चीन में संभावित विदेश मंत्री के तौर पर देखा जा रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, 61 वर्षीय लियू को जुलाई के अंत में एक विदेशी दौरे से बीजिंग लौटने के बाद हिरासत में लिया गया। यह जानकारी मामले से जुड़े लोगों के हवाले से दी गई है।</p>
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय संपर्क विभाग ने तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी :</strong></p>
<p>न्यूज एजेंसी के मुताबिक, फिलहाल, चीन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। चीनी सरकार के राज्य परिषद सूचना कार्यालय और कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय संपर्क विभाग ने तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी है। लियू जियानचाओ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के उस विभाग के प्रमुख हैं, जो विदेशी राजनीतिक दलों के साथ संबंध प्रबंधन का काम करता है। उन्होंने 2022 में यह जिम्मेदारी संभालने के बाद से 20 से ज्यादा देशों का दौरा किया और 160 से ज्यादा देशों के अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं। दरअसल, लियू की व्यस्त विदेश यात्राओं और खासतौर पर अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन से वॉशिंगटन में हुई मुलाकातों ने यह अटकलें तेज कर दी थीं कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रहे लियू को अगला विदेश मंत्री बनाने की तैयारी हो रही है। लियू की हिरासत को अब तक के सबसे उच्च-स्तरीय राजनयिक जांच के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p><strong>किन गैंग को विदेश मंत्री के पद से हटाया :</strong></p>
<p>इससे पहले चीन में 2023 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के करीबी माने जाने वाले किन गैंग को विदेश मंत्री के पद से हटा दिया था। किन गैंग को लेकर उस समय विवाहेतर संबंधों की अफवाहें फैली थीं। चीन के उत्तर-पूर्वी प्रांत जिलिन में जन्मे लियू जियानचाओ ने बीजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में ग्रेजुएशन किया और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने विदेश मंत्रालय में ट्रांसलेटर के रूप में अपना पहला पद संभाला। लियू ने ब्रिटेन में चीन मिशन में काम किया और बाद में इंडोनेशिया और फिलीपींस में राजदूत रहे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के तौर पर वे अपने बेबाक और कभी-कभी मजाकिया जवाबों के लिए जाने जाते रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Aug 2025 14:28:39 +0530</pubDate>
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                <title>11वीं एशियाई यूथ महिला हैंडबॉल चैंपियनशिप, राजस्थान की ममता-मुस्कान भारतीय हैंडबॉल टीम में  </title>
                                    <description><![CDATA[जियांग्शेन में होने वाली 11वीं एशियाई यूथ महिला हैंडबॉल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए भारतीय महिला हैंडबॉल टीम चीन पहुंच गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/11th-asian-youth-womens-handball-championship-rajasthans-mamta-muskan-in-indian/article-120894"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/dhdb.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जियांग्शेन (चीन) में 18 से 26 जुलाई  तक होने वाली 11वीं एशियाई यूथ महिला हैंडबॉल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए भारतीय महिला हैंडबॉल टीम चीन पहुंच गई। भारतीय हैंडबॉल टीम में राजस्थान की ममता और मुस्कान भी शामिल हैं। राजस्थान की मनीषा राठौड़ को भारतीय टीम का कोच बनाया गया है। राजस्थान हैंडबाल संघ के सचिव यशप्रताप सिंह ने गुरुवार को यहां बताया कि उन्होंने बताया कि लेफ्ट बैक की पोजीशन पर खेलने वाली मुस्कान और पीवट पोजीशन पर खेलने वाली ममता राजस्थान खेल परिषद की महिला हैंडबॉल एकेडमी की खिलाड़ी हैं। वहीं टीम की कोच मनीषा राठौड़ भी परिषद में हैंडबॉल प्रशिक्षक के पद पर कार्यरत हैं।</p>
<p><strong>भारतीय टीम : </strong>कनिष्का (कप्तान), शिवानी, रिधिमा, गरिमा, नेहा, शिक्षा, मुस्कान (हिमाचल प्रदेश), ममता, मुस्कान (राजस्थान), नैना-उप कप्तान, कोमल, अनन्या, वैष्णवी सिंह (उत्तर प्रदेश), मनाली (गुजरात), काफी (हरियाणा), अमृता, अदिति, साक्षी (साईं)। कोच:- सचिन चौधरी, मनीषा राठौड़, बिनोय, नवीन पूनिया। फिजियो:- मोनिका शर्मा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Jul 2025 11:43:16 +0530</pubDate>
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                <title>रेयर अर्थ एलिमेंट्स अमेरिका भेजने को फिर से तैयार हुआ चीन </title>
                                    <description><![CDATA[ट्रम्प ने कहा कि चीन के शी जिनपिंग ने दुर्लभ खनिजों को अमेरिका में प्रवाहित करने पर सहमति व्यक्त की है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rare-earth-elements-are-ready-to-re-prepared-to-send/article-116698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer43.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ट्रम्प ने कहा कि चीन के शी जिनपिंग ने दुर्लभ खनिजों को अमेरिका में प्रवाहित करने पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दुर्लभ खनिज और चुम्बकों को अमेरिका में आने देने पर सहमति जताई है, जिससे विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव कम हो सकता है।</p>
<p>ट्रम्प की यह टिप्पणी शी जिनपिंग के साथ एक दुर्लभ बातचीत के एक दिन बाद आई है, जिसका उद्देश्य व्यापार तनाव को हल करना था, जो इस विषय पर कई सप्ताह से चल रहा है।</p>
<p>ट्रम्प ने कहा था कि वार्ता का "बहुत सकारात्मक निष्कर्ष" निकला है और कहा था कि "दुर्लभ पृथ्वी उत्पादों की जटिलता के संबंध में अब कोई प्रश्न नहीं होना चाहिए।"</p>
<p>इस मुद्दे पर तनाव कम होने का एक और संकेत यह है कि चीन ने अमेरिका की शीर्ष तीन वाहन निर्माताओं के दुर्लभ-पृथ्वी आपूर्तिकर्ताओं को अस्थाई निर्यात लाइसेंस प्रदान कर दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Jun 2025 17:16:56 +0530</pubDate>
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