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                <title>  mahakumbh - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>महाकुंभ पूर्ण, पर संगम स्नान करने आने वालों की खत्म नहीं हो रही भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[संगम नगरी प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला 26 फरवरी महाशिवरात्रि के आखिरी स्नान पर्व के साथ आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-crowd-of-those-coming-to-take-a-confluence-bath/article-107175"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(13)5.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला 26 फरवरी महाशिवरात्रि के आखिरी स्नान पर्व के साथ आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुका है, लेकिन संगम तट पर श्रद्धालुओं का आना जारी है। भीड़भाड़ के कारण महाकुंभ के दौरान न आ सकने वाले भक्त अब संगम क्षेत्र में स्नान और दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। बिहार से संगम नगरी आए रूपनारायण सिंह ने बताया कि महाकुंभ के दौरान हम स्नान करने नहीं आ सके, इसलिए अब आए हैं। यहां व्यवस्था बहुत अच्छी है, आकर बहुत अच्छा लग रहा है। हम यहां जल लेने के लिए आए हैं। रहने, खाने, नहाने और पूजा पाठ के लिए अच्छी व्यवस्था है।</p>
<p>बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि हम दोबारा कुंभ आए हैं। अब भीड़ कम है। अमावस्या पर यहां बहुत भीड़ थी। हम आधे रास्ते में ही रह गए थे, इसलिए हमें वहीं पर स्नान करना पड़ा था। सीएम योगी ने बहुत अच्छी व्यवस्था की, कहीं कोई कमी नहीं है। 2025 का महाकुंभ अविश्वसनीय रहा है। ऐसे कुंभ हमने अपने जीवन में कभी नहीं देखा था। लोग अभी भी यहां आ रहे हैं। रामकिशोर सिंह ने कहा कि यहां बहुत अच्छी व्यवस्था है। आज की भीड़ देखकर शाही लग रहा है। महाकुंभ मेले के दौरान हम नहीं आ सके थे, अब आए हैं। यहां बहुत भीड़ है। हमने स्नान किया है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसा कुंभ आज तक नहीं लगा है। कुंभ की व्यवस्था को लेकर उन्होंने सीएम योगी और पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। महाकाल की नगरी उज्जैन से संगम नगरी आए सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। ऐसा लग रहा है, जैसे अभी भी कुंभ चल रहा हो। इस समय भी बहुत भीड़ है। 2025 के महाकुंभ में बहुत अच्छी व्यवस्था थी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Mar 2025 12:21:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>महाकुंभ में पर्यावरणीय स्थिरता और स्वच्छता के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश: अमित कपूर  </title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज महाकुंभ 2025 में रिकॉर्ड 66.30 करोड़ श्रद्धालुओं की उपस्थिति दर्ज की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amit-kapoor-presented-a-new-example-in-the-field-of/article-106532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/444.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रयागराज महाकुंभ 2025 में रिकॉर्ड 66.30 करोड़ श्रद्धालुओं की उपस्थिति दर्ज की गई। इतनी बड़ी संख्या के बावजूद, स्वच्छता कर्मियों और ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली के कुशल प्रयासों से यह आयोजन सफ़लतापूर्वक संपन्न हुआ।</p>
<p>भव्य आयोजन के दौरान, कुंभ क्षेत्र में सफाई बनाए रखने के लिए अत्याधुनिक प्रबंधन प्रणाली लागू की गई। इस पर विस्तार से अध्ययन करने के लिए 10 विशेषज्ञों की एक टीम रिपोर्ट तैयार कर रही है। सर्कुलर इकोनॉमी फोरम में भाग लेने जयपुर पहुंचे महाकुंभ अध्ययन टीम के सदस्य अमित कपूर ने बातचीत के दौरान बताया कि कुंभ के दौरान स्वच्छता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे टीम ने पूरी कुशलता से पूरा किया। यह आयोजन पर्यावरणीय स्थिरता और स्वच्छता के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Mar 2025 17:42:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एकता का महाकुंभ, युग परिवर्तन की आहट </title>
                                    <description><![CDATA[महाकुंभ संपन्न हुआ, एकता का महायज्ञ संपन्न हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-mahakumbh-era-of-unity%C2%A0/article-105854"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(4)37.png" alt=""></a><br /><p>महाकुंभ संपन्न हुआ, एकता का महायज्ञ संपन्न हुआ। जब एक राष्ट्र की चेतना जागृत होती है, जब वो सैकड़ों साल की गुलामी की मानसिकता के सारे बंधनों को तोड़कर नव चैतन्य के साथ हवा में सांस लेने लगता है, तो ऐसा ही दृश्य उपस्थित होता है, जैसा हमने 13 जनवरी के बाद से प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में देखा। 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मैंने देवभक्ति से देशभक्ति की बात कही थी। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान सभी देवी-देवता जुटे, संत-महात्मा जुटे,  बाल-वृद्ध जुटे, महिलाएं-युवा जुटे और हमने देश की जागृत चेतना का साक्षात्कार किया। ये महाकुंभ एकता का महाकुंभ था, जहां 140 करोड़ देशवासियों की आस्था एक साथ एक समय में इस एक पर्व से आकर जुड़ गई थी। तीर्थराज प्रयाग के इसी क्षेत्र में एकता, समरसता और प्रेम का पवित्र क्षेत्र श्रृंगवेरपुर भी है, जहां प्रभु श्रीराम और निषादराज का मिलन हुआ था। उनके मिलन का वो प्रसंग भी हमारे इतिहास में भक्ति और सद्भाव के संगम की तरह ही है। प्रयागराज का ये तीर्थ आज भी हमें एकता और समरसता की वो प्रेरणा देता है। बीते 45 दिन, प्रतिदिन, मैंने देखा,  कैसे देश के कोने-कोने से लाखों-लाख लोग संगम तट की ओर बढ़े जा रहे हैं। संगम पर स्रान की भावनाओं का ज्वार, लगातार बढ़ता ही रहा। हर श्रद्धालु बस एक ही धुन में था संगम में स्रान। मां गंगा, यमुना, सरस्वती की त्रिवेणी हर श्रद्धालु को उमंग, ऊर्जा और विश्वास के भाव से भर रही थी। प्रयागराज में हुआ महाकुंभ का ये आयोजन आधुनिक युग के मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के लिए, प्लानिंग और पॉलिसी एक्सपर्ट्स के लिए, नए सिरे से अध्ययन का विषय बना है। </p>
<p>आज पूरे विश्व में इस तरह के विराट आयोजन की कोई दूसरी तुलना नहीं है, ऐसा कोई दूसरा उदाहरण भी नहीं है। पूरी दुनिया हैरान है कि कैसे एक नदी तट पर, त्रिवेणी संगम पर इतनी बड़ी संख्या में करोड़ों की संख्या में लोग जुटे। इन करोड़ों लोगों को ना औपचारिक निमंत्रण था, ना ही किस समय पहुंचना है, उसकी कोई पूर्व सूचना थी। बस, लोग महाकुंभ चल पड़े और पवित्र संगम में डुबकी लगाकर धन्य हो गए। मैं वो तस्वीरें भूल नहीं सकता, स्रान के बाद असीम आनंद और संतोष से भरे वो चेहरे नहीं भूल सकता। महिलाएं हों, बुजुर्ग हों, हमारे दिव्यांग जन हों, जिससे जो बन पड़ा, वो साधन करके संगम तक पहुंचा। और मेरे लिए ये देखना बहुत ही सुखद रहा कि बहुत बड़ी संख्या में भारत की आज की युवा पीढ़ी प्रयागराज पहुंची। भारत के युवाओं का इस तरह महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए आगे आना, एक बहुत बड़ा संदेश है। इससे ये विश्वास दृढ़ होता है कि भारत की युवा पीढ़ी हमारे संस्कार और संस्कृति की वाहक है और इसे आगे ले जाने का दायित्व समझती है और इसे लेकर संकल्पित भी है, समर्पित भी है। इस महाकुंभ में प्रयागराज पहुंचने वालों की संख्या ने निश्चित तौर पर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। लेकिन इस महाकुंभ में हमने ये भी देखा कि जो प्रयाग नहीं पहुंच पाए, वो भी इस आयोजन से भाव-विभोर होकर जुड़े। </p>
<p>कुंभ से लौटते हुए जो लोग त्रिवेणी तीर्थ अपने साथ लेकर गए, उस जल की कुछ बूंदों ने भी करोड़ों भक्तों को कुंभ स्रान जैसा ही पुण्य दिया। कितने ही लोगों का कुंभ से वापसी के बाद गांव-गांव में जो सत्कार हुआ, जिस तरह पूरे समाज ने उनके प्रति श्रद्धा से सिर झुकाया, वो अविस्मरणीय है। ये कुछ ऐसा हुआ है, जो बीते कुछ दशकों में पहले कभी नहीं हुआ। ये कुछ ऐसा हुआ है, जो आने वाली कई-कई शताब्दियों की एक नींव रख गया है। प्रयागराज में जितनी कल्पना की गई थी, उससे कहीं अधिक संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचे। इसकी एक वजह ये भी थी कि प्रशासन ने भी पुराने कुंभ के अनुभवों को देखते हुए ही अंदाजा लगाया था। लेकिन अमेरिका की आबादी के करीब दोगुने लोगों ने एकता के महाकुंभ में हिस्सा लिया, डुबकी लगाई। आध्यात्मिक क्षेत्र में रिसर्च करने वाले लोग करोड़ों भारतवासियों के इस उत्साह पर अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि अपनी विरासत पर गौरव करने वाला भारत अब एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। मैं मानता हूं, ये युग परिवर्तन की वो आहट है, जो भारत का नया भविष्य लिखने जा रही है। </p>
<p>साथियों, महाकुंभ की इस परंपरा से, हजारों वर्षों से भारत की राष्ट्रीय चेतना को बल मिलता रहा है। हर पूर्णकुंभ में समाज की उस समय की परिस्थितियों पर ऋषियों-मुनियों, विद्वत् जनों द्वारा 45 दिनों तक मंथन होता था। इस मंथन में देश को, समाज को नए दिशा-निर्देश मिलते थे। इसके बाद हर 6 वर्ष में अर्धकुंभ में परिस्थितियों और दिशा-निर्देशों की समीक्षा होती थी। 12 पूर्णकुंभ होते-होते, यानि 144 साल के अंतराल पर जो दिशा-निर्देश, जो परंपराएं पुरानी पड़ चुकी होती थीं, उन्हें त्याग दिया जाता था, आधुनिकता को स्वीकार किया जाता था और युगानुकूल परिवर्तन करके नए सिरे से नई परंपराओं को गढ़ा जाता था। 144 वर्षों के बाद होने वाले महाकुंभ में ऋषियों-मुनियों द्वारा, उस समय-काल और परिस्थितियों को देखते हुए नए संदेश भी दिए जाते थे। अब इस बार 144 वर्षों के बाद पड़े इस तरह के पूर्ण महाकुंभ ने भी हमें भारत की विकासयात्रा के नए अध्याय का संदेश दिया है। ये संदेश है- विकसित भारत का। जिस तरह एकता के महाकुंभ में हर श्रद्धालु, चाहे वो गरीब हों या संपन्न हों,  बाल हो या वृद्ध हो, देश से आया हो या विदेश से आया हो, गांव का हो या शहर का हो, पूर्व से हो या पश्चिम से हो, उत्तर से हो, दक्षिण से हो, किसी भी जाति का हो, किसी भी विचारधारा का हो, सब एक महायज्ञ के लिए एकता के महाकुंभ में एक हो गए। एक भारत-श्रेष्ठ भारत का ये चिर स्मरणीय दृश्य, करोड़ों देशवासियों में आत्मविश्वास के साक्षात्कार का महापर्व बन गया। </p>
<p>अब इसी तरह हमें एक होकर विकसित भारत के महायज्ञ के लिए जुट जाना है। साथियों, आज मुझे वो प्रसंग भी याद आ रहा है, जब बालक रूप में श्रीकृष्ण ने माता यशोदा को अपने मुख में ब्रह्मांड के दर्शन कराए थे। वैसे ही इस महाकुंभ में भारतवासियों ने और विश्व ने भारत के सामर्थ्य के विराट स्वरूप के दर्शन किए हैं। हमें अब इसी आत्मविश्वास से एक निष्ठ होकर, विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए आगे बढ़ना है। भारत की ये एक ऐसी शक्ति है, जिसके बारे में भक्ति आंदोलन में हमारे संतों ने राष्ट्र के हर कोने में अलख जगाई थी। विवेकानंद हों या ऑरोबिंदो हों, हर किसी ने हमें इसके बारे में जागरूक किया था। इसकी अनुभूति गांधी जी ने भी आजादी के आंदोलन के समय की थी। आजादी के बाद भारत की इस शक्ति के विराट स्वरूप को यदि हमने जाना होता और इस शक्ति को सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की ओर मोड़ा होता, तो ये गुलामी के प्रभावों से बाहर निकलते भारत की बहुत बड़ी शक्ति बन जाती। लेकिन हम तब ये नहीं कर पाए। अब मुझे संतोष है, खुशी है कि जनता जनार्दन की यही शक्ति, विकसित भारत के लिए एकजुट हो रही है। वेद से विवेकानंद तक और उपनिषद से उपग्रह तक, भारत की महान परंपराओं ने इस राष्ट्र को गढ़ा है। मेरी कामना है, एक नागरिक के नाते, अनन्य भक्ति भाव से, अपने पूर्वजों का, हमारे ऋषियों-मुनियों का पुण्य स्मरण करते हुए, एकता के महाकुंभ से हम नई प्रेरणा लेते हुए, नए संकल्पों को साथ लेकर चलें। </p>
<p>हम एकता के महामंत्र को जीवन मंत्र बनाएं, देश सेवा में ही देव सेवा, जीव सेवा में ही शिव सेवा के भाव से स्वयं को समर्पित करें। साथियों, जब मैं काशी चुनाव के लिए गया था, तो मेरे अंतरमन के भाव शब्दों में प्रकट हुए थे और मैंने कहा था- मां गंगा ने मुझे बुलाया है। इसमें एक दायित्व बोध भी था, हमारी मां स्वरूपा नदियों की पवित्रता को लेकर, स्वच्छता को लेकर। प्रयागराज में भी गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम पर मेरा ये संकल्प और दृढ़ हुआ है। गंगा जी, यमुना जी, हमारी नदियों की स्वच्छता हमारी जीवन यात्रा से जुड़ी है। हमारी जिम्मेदारी बनती है कि नदी चाहे छोटी हो या बड़ी, हर नदी को जीवनदायिनी मां का प्रतिरूप मानते हुए हम अपने यहां सुविधा के अनुसार, नदी उत्सव जरूर मनाएं। ये एकता का महाकुंभ हमें इस बात की प्रेरणा देकर गया है कि हम अपनी नदियों को निरंतर स्वच्छ रखें, इस अभियान को निरंतर मजबूत करते रहें। मैं जानता हूं, इतना विशाल आयोजन आसान नहीं था। मैं प्रार्थना करता हूं मां गंगा से, मां यमुना से, मां सरस्वती से, हे मां हमारी आराधना में कुछ कमी रह गई हो तो क्षमा करिएगा। जनता जनार्दन, जो मेरे लिए ईश्वर का ही स्वरूप है, श्रद्धालुओं की सेवा में भी अगर हमसे कुछ कमी रह गई हो, तो मैं जनता जनार्दन का भी क्षमाप्रार्थी हूं। साथियों, श्रद्धा से भरे जो करोड़ों लोग प्रयाग पहुंचकर इस एकता के महाकुंभ का हिस्सा बने, उनकी सेवा का दायित्व भी श्रद्धा के सामर्थ्य से ही पूरा हुआ है। यूपी का सांसद होने के नाते मैं गर्व से कह सकता हूं कि योगी जी के नेतृत्व में शासन, प्रशासन और जनता ने मिलकर, इस एकता के महाकुंभ को सफल बनाया। केंद्र हो या राज्य हो, यहां ना कोई शासक था, ना कोई प्रशासक था, हर कोई श्रद्धा भाव से भरा सेवक था।</p>
<p> हमारे सफाईकर्मी, हमारे पुलिसकर्मी, नाविक साथी, वाहन चालक, भोजन बनाने वाले, सभी ने पूरी श्रद्धा और सेवा भाव से निरंतर काम करके इस महाकुंभ को सफल बनाया। विशेषकर, प्रयागराज के निवासियों ने इन 45 दिनों में तमाम परेशानियों को उठाकर भी जिस तरह श्रद्धालुओं की सेवा की है, वह अतुलनीय है। मैं प्रयागराज के सभी निवासियों का, यूपी की जनता का आभार व्यक्त करता हूं, अभिनंदन करता हूं। साथियों, महाकुंभ के दृश्यों को देखकर, बहुत प्रारंभ से ही मेरे मन में जो भाव जगे, जो पिछले 45 दिनों में और अधिक पुष्ट हुए हैं, राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को लेकर मेरी आस्था, अनेक गुना मजबूत हुई है। 140 करोड़ देशवासियों ने जिस तरह प्रयागराज में एकता के महाकुंभ को आज के विश्व की एक महान पहचान बना दिया, वो अद्भुत है। देशवासियों के इस परिश्रम से, उनके प्रयास से, उनके संकल्प से अभीभूत मैं जल्द ही द्वादश ज्योतिर्लिंग में से प्रथम ज्योतिर्लिंग, श्री सोमनाथ के दर्शन करने जाऊंगा और श्रद्धा रूपी संकल्प पुष्प को समर्पित करते हुए हर भारतीय के लिए प्रार्थना करूंगा। महाकुंभ का स्थूल स्वरूप महाशिवरात्रि को पूर्णता प्राप्त कर गया है। लेकिन मुझे विश्वास है, मां गंगा की अविरल धारा की तरह, महाकुंभ की आध्यात्मिक चेतना की धारा और एकता की धारा निरंतर बहती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Feb 2025 12:44:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एकता का महाकुंभ युग परिवर्तन की आहट : यह राष्ट्र चेतना जागृत करने वाला पर्व, आस्था एक साथ एक समय में इस एक पर्व से आकर जुड़ गई थी; महाकुंभ के समापन पर बोले मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[नरेन्द्र मोदी ने प्रयागराज में महाशिवरात्रि के साथ संपन्न महाकुंभ पर्व की दिव्यता और भव्यता पर अपने मन के उद्गार व्यक्त करते हुए इसे युग परिवर्तन की आहट बताया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-mahakumbh-era-of-unity-was-called-a-change-this/article-105759"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/modi-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रयागराज में महाशिवरात्रि के साथ संपन्न महाकुंभ पर्व की दिव्यता और भव्यता पर अपने मन के उद्गार व्यक्त करते हुए इसे युग परिवर्तन की आहट बताया है। उन्होंने महाकुंभ पर अपने विचार को लेखबद्ध करते हुए कहा है कि सहस्राब्दियों से चली आ रही महाकुंभ की यह सनातन परंपरा राष्ट्र चेतना जागृत करने वाला पर्व है। मोदी ने लिखा, महाकुंभ संपन्न हुआ...एकता का महायज्ञ संपन्न हुआ। जब एक राष्ट्र की चेतना जागृत होती है, जब वो सैकड़ों साल की गुलामी की मानसिकता के सारे बंधनों को तोड़कर नव चैतन्य के साथ हवा में सांस लेने लगता है, तो ऐसा ही द्दश्य उपस्थित होता है, जैसा हमने 13 जनवरी के बाद से प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में देखा।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में देवभक्ति से देशभक्ति की बात कही थी। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान सभी देवी-देवता जुटे, संत-महात्मा जुटे, बाल-वृद्ध जुटे, महिलाएं-युवा जुटे, और हमने देश की जागृत चेतना का साक्षात्कार किया। उन्होंने कहा, यह महाकुंभ एकता का महाकुंभ था, जहां 140 करोड़ देशवासियों की आस्था एक साथ एक समय में इस एक पर्व से आकर जुड़ गई थीं।</p>
<p>मोदी ने कहा, तीर्थराज प्रयाग के इसी क्षेत्र में एकता, समरसता और प्रेम का पवित्र क्षेत्र श्रृंगवेरपुर भी है, जहां प्रभु श्रीराम और निषादराज का मिलन हुआ था। उनके मिलन का वो प्रसंग भी हमारे इतिहास में भक्ति और सछ्वाव के संगम की तरह ही है। प्रयागराज का ये तीर्थ आज भी हमें एकता और समरसता की वो प्रेरणा देता है। बीते 45 दिनों में प्रतिदिन, मैंने देखा, कैसे देश के कोने-कोने से लाखों-लाख लोग संगम तट की ओर बढ़े जा रहे हैं। संगम पर स्नान की भावनाओं का ज्वार, लगातार बढ़ता ही रहा। हर श्रद्धालु बस एक ही धुन में था, संगम में स्नान! मां गंगा, यमुना, सरस्वती की त्रिवेणी हर श्रद्धालु को उमंग, ऊर्जा और विश्वास के भाव से भर रही थी।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में हुआ महाकुंभ का आयोजन, आधुनिक युग के ‘मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स’ के लिए, ‘प्लानिंग’ और ‘पॉलिसी एक्सपट्र्स’ के लिए, नए सिरे से अध्ययन का विषय बना है। आज पूरे विश्व में इस तरह के विराट आयोजन की कोई दूसरी तुलना नहीं है, ऐसा कोई दूसरा उदाहरण भी नहीं है। पूरी दुनिया हैरान है कि कैसे एक नदी तट पर, त्रिवेणी संगम पर इतनी बड़ी संख्या में करोड़ों की संख्या में लोग जुटे। इन करोड़ों लोगों को ना औपचारिक निमंत्रण था, ना ही किस समय पहुंचना है, उसकी कोई पूर्व सूचना थी। बस, लोग महाकुंभ चल पड़े और पवित्र संगम में डुबकी लगाकर धन्य हो गए।</p>
<p>मोदी ने कहा, मैं वो तस्वीरें भूल नहीं सकता, स्नान के बाद असीम आनंद और संतोष से भरे वो चेहरे नहीं भूल सकता। महिलाएं हों, बुजुर्ग हों, हमारे दिव्यांग जन हों, जिससे जो बन पड़ा, वो साधन करके संगम तक पहुंचा। मेरे लिए ये देखना बहुत ही सुखद रहा कि बहुत बड़ी संख्या में भारत की आज की युवा पीढ़ी प्रयागराज पहुंची। भारत के युवाओं का इस तरह महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए आगे आना, एक बहुत बड़ा संदेश है। इससे ये विश्वास द्दढ़ होता है कि भारत की युवा पीढ़ी हमारे संस्कार और संस्कृति की वाहक है और इसे आगे ले जाने का दायित्व समझती है और इसे लेकर संकल्पित भी है, समर्पित भी है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि इस महाकुंभ में प्रयागराज पहुंचने वालों की संख्या ने निश्चित तौर पर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। अमेरिका की आबादी के करीब दोगुने लोगों ने एकता के महाकुंभ में हिस्सा लिया, डुबकी लगाई, लेकिन इस महाकुंभ में हमने ये भी देखा कि जो प्रयाग नहीं पहुंच पाए, वो भी इस आयोजन से भाव-विभोर होकर जुड़े। कुंभ से लौटते हुए जो लोग त्रिवेणी तीर्थ अपने साथ लेकर गए, उस जल की कुछ बूंदों ने भी करोड़ों भक्तों को कुंभ स्नान जैसा ही पुण्य दिया। कितने ही लोगों का कुंभ से वापसी के बाद गांव-गांव में जो सत्कार हुआ, जिस तरह पूरे समाज ने उनके प्रति श्रद्धा से सिर झुकाया, वो अविस्मरणीय है। ये कुछ ऐसा हुआ है, जो बीते कुछ दशकों में पहले कभी नहीं हुआ। ये कुछ ऐसा हुआ है, जो आने वाली कई-कई शताब्दियों की एक नींव रख गया है।</p>
<p>मोदी ने कहा, आध्यात्मिक क्षेत्र में शोध करने वाले लोग करोड़ों भारतवासियों के इस उत्साह पर अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि अपनी विरासत पर गौरव करने वाला भारत अब एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। मैं मानता हूं, ये युग परिवर्तन की वो आहट है, जो भारत का नया भविष्य लिखने जा रही है। महाकुंभ की इस परंपरा से, हजारों वर्षों से भारत की राष्ट्रीय चेतना को बल मिलता रहा है। हर पूर्णकुंभ में समाज की उस समय की परिस्थितियों पर ऋषियों-मुनियों, विद्वत् जनों द्वारा 45 दिनों तक मंथन होता था। इस मंथन में देश को, समाज को नए दिशा-निर्देश मिलते थे। इसके बाद, हर छह वर्ष में अर्धकुंभ में परिस्थितियों और दिशा-निर्देशों की समीक्षा होती थी। 12 पूर्णकुंभ होते-होते, यानि 144 साल के अंतराल पर जो दिशा-निर्देश, जो परंपराएं पुरानी पड़ चुकी होती थीं, उन्हें त्याग दिया जाता था, आधुनिकता को स्वीकार किया जाता था और युगानुकूल परिवर्तन करके नए सिरे से नई परंपराओं को गढ़ा जाता था। 144 वर्षों के बाद होने वाले महाकुंभ में ऋषियों-मुनियों द्वारा, उस समय-काल और परिस्थितियों को देखते हुए नए संदेश भी दिए जाते थे। अब इस बार 144 वर्षों के बाद पड़े इस तरह के पूर्ण महाकुंभ ने भी हमें भारत की विकासयात्रा के नए अध्याय का संदेश दिया है। ये संदेश है ‘विकसित भारत’ का।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, जिस तरह एकता के महाकुंभ में हर श्रद्धालु, चाहे वो गरीब हों या संपन्न हों, बाल हो या वृद्ध हो, देश से आया हो या विदेश से आया हो, गांव का हो या शहर का हो, पूर्व से हो या पश्चिम से हो, उत्तर से हो या दक्षिण से हो, किसी भी जाति का हो, किसी भी विचारधारा का हो, सब एक महायज्ञ के लिए एकता के महाकुंभ में एक हो गए। एक भारत-श्रेष्ठ भारत का ये चिर-स्मरणीय द्दश्य, करोड़ों देशवासियों में आत्मविश्वास के साक्षात्कार का महापर्व बन गया। अब इसी तरह हमें एक होकर ‘विकसित भारत’ के महायज्ञ के लिए जुट जाना है।</p>
<p>मोदी ने कहा, आज मुझे वो प्रसंग भी याद आ रहा है जब बालक रूप में श्रीकृष्ण ने माता यशोदा को अपने मुख में ब्रह्मांड के दर्शन कराए थे। वैसे ही इस महाकुंभ में भारतवासियों ने और विश्व ने भारत के सामथ्र्य के विराट स्वरूप के दर्शन किए हैं। हमें अब इसी आत्मविश्वास से एक निष्ठ होकर, विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए आगे बढऩा है। भारत की ये एक ऐसी शक्ति है, जिसके बारे में भक्ति आंदोलन में हमारे संतों ने राष्ट्र के हर कोने में अलख जगाई थी। इसकी अनुभूति गांधी जी ने भी आजादी के आंदोलन के समय की थी। आजादी के बाद भारत की इस शक्ति के विराट स्वरूप को यदि हमने जाना होता, और इस शक्ति को  ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की ओर मोड़ा होता, तो ये गुलामी के प्रभावों से बाहर निकलते भारत की बहुत बड़ी शक्ति बन जाती, लेकिन हम तब ये नहीं कर पाए। अब मुझे संतोष है, खुशी है कि जनता जनार्दन की यही शक्ति, विकसित भारत के लिए एकजुट हो रही है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, वेद से विवेकानंद तक और उपनिषद से उपग्रह तक, भारत की महान परंपराओं ने इस राष्ट्र को गढ़ा है। मेरी कामना है, एक नागरिक के नाते, अनन्य भक्ति भाव से, अपने पूर्वजों का, हमारे ऋषियों-मुनियों का पुण्य स्मरण करते हुए, एकता के महाकुंभ से हम नई प्रेरणा लेते हुए, नए संकल्पों को साथ लेकर चलें। हम एकता के महामंत्र को जीवन मंत्र बनाएं, देश सेवा में ही देव सेवा, जीव सेवा में ही शिव सेवा के भाव से स्वयं को समर्पित करें। जब मैं काशी चुनाव के लिए गया था, तो मेरे अंतरमन के भाव शब्दों में प्रकट हुए थे, और मैंने कहा था, मां गंगा ने मुझे बुलाया है। इसमें एक दायित्व बोध भी था, हमारी मां स्वरूपा नदियों की पवित्रता को लेकर, स्वच्छता को लेकर प्रयागराज में भी गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम पर मेरा ये संकल्प और द्दढ़ हुआ है। गंगा जी, यमुना जी, हमारी नदियों की स्वच्छता हमारी जीवन यात्रा से जुड़ी है। हमारी जिम्मेदारी बनती है कि नदी चाहे छोटी हो या बड़ी, हर नदी को जीवनदायिनी मां का प्रतिरूप मानते हुए, हम अपने यहां सुविधा के अनुसार, नदी उत्सव जरूर मनाएं! ये एकता का महाकुंभ हमें इस बात की प्रेरणा देकर गया है कि हम अपनी नदियों को निरंतर स्वच्छ रखें, इस अभियान को निरंतर मजबूत करते रहें।</p>
<p>मोदी ने कहा, मैं जानता हूं, इतना विशाल आयोजन आसान नहीं था। मैं प्रार्थना करता हूं मां गंगा से, मां यमुना से, मां सरस्वती से, हे मां हमारी आराधना में कुछ कमी रह गई हो तो क्षमा करिएगा। जनता जनार्दन, जो मेरे लिए ईश्वर का ही स्वरूप है, श्रद्धालुओं की सेवा में भी अगर हमसे कुछ कमी रह गई हो, तो मैं जनता जनार्दन का भी क्षमाप्रार्थी हूं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, श्रद्धा से भरे जो करोड़ों लोग प्रयाग पहुँचकर इस एकता के महाकुंभ का हिस्सा बने, उनकी सेवा का दायित्व भी श्रद्धा के सामथ्र्य से ही पूरा हुआ है। उत्तर प्रदेश का सांसद होने के नाते मैं गर्व से कह सकता हूं कि योगी के नेतृत्व में शासन, प्रशासन और जनता ने मिलकर, इस एकता के महाकुंभ को सफल बनाया। केंद्र हो या राज्य हो, यहां ना कोई शासक था, ना कोई प्रशासक था, हर कोई श्रद्धा भाव से भरा सेवक था। हमारे सफाईकर्मी, हमारे पुलिसकर्मी, नाविक साथी, वाहन चालक, भोजन बनाने वाले, सभी ने पूरी श्रद्धा और सेवा भाव से निरंतर काम करके इस महाकुंभ को सफल बनाया। विशेषकर, प्रयागराज के निवासियों ने इन 45 दिनों में तमाम परेशानियों को उठाकर भी जिस तरह श्रद्धालुओं की सेवा की है, वह अतुलनीय है। मैं प्रयागराज के सभी निवासियों का, उत्तर प्रदेश की जनता का आभार व्यक्त करता हूं, अभिनंदन करता हूं। महाकुंभ के द्दश्यों को देखकर, बहुत प्रारंभ से ही मेरे मन में जो भाव जगे, जो पिछले 45 दिनों में और अधिक पुष्ट हुए हैं, राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को लेकर मेरी आस्था, अनेक गुना मजबूत हुई है। 140 करोड़ देशवासियों ने जिस तरह प्रयागराज में एकता के महाकुंभ को आज के विश्व की एक महान पहचान बना दिया, वो अछ्वुत है!</p>
<p>मोदी ने कहा, देशवासियों के इस परिश्रम से, उनके प्रयास से, उनके संकल्प से अभीभूतज् मैं जल्द ही द्वादश ज्योतिर्लिंग में से प्रथम ज्योतिर्लिंग, सोमनाथ के दर्शन करने जाऊंगा और श्रद्धा रूपी संकल्प पुष्प को समर्पित करते हुए हर भारतीय के लिए प्रार्थना करूंगा। महाकुंभ का स्थूल स्वरूप महाशिवरात्रि को पूर्णता प्राप्त कर गया है, लेकिन मुझे विश्वास है, मां गंगा की अविरल धारा की तरह, महाकुंभ की आध्यात्मिक चेतना की धारा और एकता की धारा निरंतर बहती रहेगी।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Feb 2025 15:24:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>महाकुंभ में जीवन और आसक्ति के बीच द्वंद्व का हुआ अहसास : प्रीति जिंटा</title>
                                    <description><![CDATA[महाकुम्भ-2025 के अंतर्गत आखिरी स्नान पर्व पर प्रीति जिंटा ने भावुक कर देने वाला आध्यात्मिक पोस्ट किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/preeti-zinta-realized-the-duality-between-life-and-attachment-in/article-105596"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(6)18.png" alt=""></a><br /><p>महाकुम्भ नगर। महाकुम्भ-2025 के अंतर्गत आखिरी स्नान पर्व पर प्रीति जिंटा ने भावुक कर देने वाला आध्यात्मिक पोस्ट किया। सोशल मीडिया पर उनकी यह पोस्ट कुछ दिन पहले हुई तीर्थराज प्रयागराज की यात्रा से जुड़ी रही, जिसमें अध्यात्मिक अनुभूतियों का समावेश रहा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर अपने ऑफिशियल अकाउंट से प्रयागराज महाकुम्भ में अपनी यात्रा से जुड़ा हुआ एक वीडियो शेयर करते हुए अपनी आध्यात्मिक अनुभूति के बारे में विस्तार से लिखा।</p>
<p>प्रीति जिंटा ने एक्स पर लिखा, कुंभ मेले में यह मेरा तीसरा मौका था और यह जादुई, दिल को छूने वाला तथा थोड़ा दुखद था। जादुई इसलिए क्योंकि मैं चाहे जितनी भी कोशिश कर लूं, मैं यह नहीं बता सकता कि मुझे कैसा महसूस हुआ। दिल को छूने वाला इसलिए क्योंकि मैं अपनी मां के साथ गई थी और यह उनके लिए दुनिया से बढ़कर था। दुखद इसलिए क्योंकि मैं जीवन और मृत्यु के विभिन्न चक्रों से मुक्त होना चाहती थी, लेकिन मुझे जीवन और आसक्ति के द्वंद्व का अहसास हुआ।</p>
<p>जिंटा ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, क्या मैं अपने परिवार, अपने बच्चों और अपने प्रियजनों को छोडऩे के लिए तैयार हूं। नहीं! मैं तैयार नहीं हूं! यह बहुत ही भावुक और विनम्र करने वाला होता है, जब आपको यह अहसास होता है कि आसक्ति के तार मजबूत और शक्तिशाली हैं और चाहे आपकी आसक्ति कुछ भी हो, आखिरकार आपकी आध्यात्मिक यात्रा और आगे की यात्रा अकेले ही होगी। मैं इस धारणा के साथ वापस आई कि हम आध्यात्मिक अनुभव वाले मनुष्य नहीं हैं, बल्कि आध्यात्मिक प्राणी हैं, जो मानवीय अनुभव कर रहे हैं। इसके आगे मुझे नहीं पता, लेकिन मुझे विश्वास है, मेरी जिज्ञासा निश्चित रूप से उन सभी उत्तरों की ओर मार्ग प्रशस्त करेगी जिनकी मुझे तलाश है, तब तक, हर हर महादेव।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 11:58:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>कुंभ से लौट रहे 8 श्रद्धालुओंं की बीच रास्ते में थमी सांसें, पति-पत्नी, बेटी-दामाद, चालक समेत पांच की मौत, पांच लोग घायल</title>
                                    <description><![CDATA[कार सवार दीपेश परवानी पुत्र जितेंद्र परवानी निवासी शांति नगर एनबीसीसी ब्लॉक जयपुर घायल हो गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/five-people-killed-five-people-including-husband-wife-daughter-in-law-driver-who/article-104748"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer73.png" alt=""></a><br /><p>देवली। प्रयागराज महाकुंभ स्नान कर घर लौट रहे एक परिवार की कार दौसा-जयपुर बाईपास के निकट सड़क पर खड़े ट्रेलर से टकरा गई। जिससे कार सवार देवली निवासी पति, पत्नी, बेटी दामाद और चालक समेत पांच लोगों की मौत हो गई। वहीं कार सवार तीन जने घायल हो गए। प्रशिक्ष डीएसपी रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि जयपुर-बाईपास पर खड़े ट्रेलर के पीछे से कार टकरा गई। दुर्घटना इतनी भयंकर थी कि कार के आगे के हिस्से को काटकर मृतक एवं घायलों को बाहर निकाला गया। दुर्घटना में देवली के पटेल नगर निवासी मुकुट बिहारी पुत्र किस्तूर मल सोनी और उनकी पत्नी गुड्डी देवी, इनके दामाद राकेश पुत्र किशन लाल सोनी निवासी सूर्य नगर आबकारी थाना सांगानेर एवं राकेश की पत्नी निधि और कार चालक नफीस खान निवासी मलाला डूंगर जिला सवाईमाधोपुर की मौत हो गई। जबकि कार सवार दीपेश परवानी पुत्र जितेंद्र परवानी निवासी शांति नगर एनबीसीसी ब्लॉक जयपुर घायल हो गए। घटना के बाद घायलों को दौसा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। </p>
<p><strong>झपकी आने से हादसे की आशंका  </strong><br />दौसा पुलिस उपअधीक्षक रवि प्रकाश शर्मा के अनुसार कार चालक को संभवत: नींद की झपकी आ गई थी, जिससे हादसा हुआ। दौसा पुलिस उपाधीक्षक रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि मृतकों का पोस्टमार्टम करा कर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि कार सवार दीपेश परवानी(35) पुत्र जितेंद्र परवानी निवासी शांति नगर एनबीसीसी ब्लॉक जयपुर, ट्रक ड्राइवर धर्मवीर और मैकेनिक रामचरण घायल हुए हैं। पुलिस के अनुसार ईको कार में गैस किट लगी हुई थी। जिस कारण आसपास से गुजर रहे ट्रैफि क को भी कुछ देर के लिए रोका गया था।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री ने सड़क हादसे पर जताया शोक</strong><br />सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि ये सूचना अत्यंत दु:खद एवं पीड़ादायक है। घटना की सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों को घायलों का समुचित चिकित्सीय उपचार सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Feb 2025 09:01:17 +0530</pubDate>
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                <title>महाकुंभ मेले के दौरान गुवाहाटी रेलसेवा का मार्ग रहेगा परिवर्तित</title>
                                    <description><![CDATA[महाकुंभ मेला - 2025 के दौरान बीकानेर - गुवाहाटी रेलसेवा मार्ग परिवर्तित।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-route-of-guwahati-rail-service-will-be-changed-during/article-103947"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/train_03.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महाकुंभ मेला - 2025 के दौरान बीकानेर - गुवाहाटी रेलसेवा मार्ग परिवर्तित व बीकानेर-हावडा और बीकानेर-कोलकाता रेलसेवा रीशडयूल रहेगी। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी शशि किरण के अनुसार महाकुंभ मेला- 2025 के दौरान बीकानेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस रेलसेवा 12 फरवरी को बीकानेर से प्रस्थान कर अपने निर्धारित मार्ग कानपुर सेन्ट्रल, प्रयागराज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय के स्थान पर परिवर्तित मार्ग कानपुर सेन्ट्रल, लखनऊ, बाराबंकी, गोरखपुर होकर संचालित होगी।</p>
<p>इसी प्रकार बीकानेर-हावडा एक्सप्रेस रेलसेवा 12 फरवरी को बीकानेर से अपने निर्धारित समय से 4 घंटे देरी से, बीकानेर- कोलकाता साप्ताहिक रेलसेवा 12 फरवरी को बीकानेर से अपने निर्धारित समय से 4 घंटे देरी से प्रस्थान करेगी ।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Feb 2025 18:19:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकुंभ सनातन संस्कृति की जड़ों से जुड़ने का पर्व : बागडे ने महाकुंभ त्रिवेणी संगम में लगाई डुबकी, पवित्र स्नान किया</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने परिजनों सहित महाकुंभ मेले में त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-festival-of-connecting-the-roots-of-mahakumbh-sanatan-culture/article-103932"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(28).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने परिजनों सहित महाकुंभ मेले में त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई। राज्यपाल ने संगम स्नान के साथ ही कुंभ से जुड़ी भारतीय सनातन परंपरा को स्मरण करते हुए कहा कि महाकुंभ स्नान संस्कृति की जड़ों से जुड़ना है।</p>
<p>गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान से शरीर ही नहीं आत्मा की भी शुद्धि होती है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय सनातन संस्कृति में आस्था रखने वाले विशाल जन का आत्मीय समागम स्थल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Feb 2025 17:18:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परिचालन कारणों से महाकुंभ मेला स्पेशल रेलसेवा की एक ट्रिप रद्द</title>
                                    <description><![CDATA[रेलवे की ओर से महाकुंभ मेला - 2025 के लिए संचालित होने वाली श्रीगंगानगर-बरौनी महाकुंभ मेला स्पेशल रेलसेवा की एक ट्रिप को परिचालन कारणों से रद्द किया जा रहा है। 

]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/a-trip-to-mahakumbh-mela-special-rail-service-canceled-due/article-103937"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/train_03.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रेलवे की ओर से महाकुंभ मेला - 2025 के लिए संचालित होने वाली श्रीगंगानगर-बरौनी महाकुंभ मेला स्पेशल रेलसेवा की एक ट्रिप को परिचालन कारणों से रद्द किया जा रहा है। </p>
<p>उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी शशि किरण के अनुसार श्रीगंगानगर-बरौनी महाकुंभ मेला स्पेशल रेलसेवा (1 ट्रिप) श्रीगंगानगर से 14 फरवरी को एवं बरौनी से 16 फरवरी को रद्द रहेगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Feb 2025 16:57:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री सहित मंत्री-विधायक जाएंगे महाकुंभ : 8 फरवरी को होंगे रवाना, राजस्थान मंडप में होगी कैबिनेट की बैठक </title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित सरकार की सभी मंत्री और भाजपा के विधायक 8 फरवरी को सपत्नी स्नान करने जाएंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mahakumbh-will-go-to-mahakumbh-to-go-to-rajasthan-pavilion/article-103407"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/bhajanlal-sharma-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित सरकार के सभी मंत्री और भाजपा के विधायक 8 फरवरी को सपत्नी स्नान करने जाएंगे। जानकारी के अनुसार सुबह 6:00 बजे सभी विधायक और मंत्री सांगानेर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। सुबह 8:30 बजे सभी का प्रयागराज में संगम में स्नान करने का कार्यक्रम रहेगा। यहां पंडितों और संतों की मौजूदगी में मंत्रोचार के साथ स्नान होगा।  </p>
<p>इसके बाद सभी प्रयागराज में राजस्थान के लोगों के रुकने के लिए बनाए गए राजस्थान मंडपम में जाएंगे, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक होगी। यहां से सभी मंत्री और विधायक प्रयागराज में स्थित लेटे हुए हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे और वहां से शाम 8:00 बजे तक जयपुर लौटने का कार्यक्रम है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Feb 2025 19:01:03 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ना अस्पताल में मिले, ना मोर्चरी में...महाकुंभ भगदड़ के बाद से लापता हैं कई लोग, तलाश में भटक रहे परिजन</title>
                                    <description><![CDATA[मौनी अमावस्या के स्नान में मची भगदड़ में सरकारी आंकड़ों में 30 लोगों की मौत हुई और 60 लोग घायल हुए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/neither-met-in-the-hospital-nor-many-people-are-missing/article-103354"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/photo.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। मौनी अमावस्या के स्नान में मची भगदड़ में सरकारी आंकड़ों में 30 लोगों की मौत हुई और 60 लोग घायल हुए। घटना के 7 दिन गुजर जाने के बाद भी कई श्रद्धालु ऐसे हैं, जिनकी तलाश जारी है। यह वह लोग हैं, जिनका नाम ना तो घायलों की सूची में है ना ही मरने वालों की सूची में है और ना ही लावारिस लाशों में है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर 29 जनवरी को हुए हादसे के बाद से ये लोग कहां गए?<br />प्रयागराज में यूं तो कई बड़े अस्पताल है, लेकिन सरकारी व्यवस्था में दो अस्पताल सबसे बड़े हैं। एक स्वरूप रानी अस्पताल और दूसरा मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज। स्वरूप रानी अस्पताल के गेट से लेकर पोस्टमार्टम हाउस तक, हर तरफ 29 जनवरी को संगम से लापता हुए लोगों की तस्वीर लगी है। घर वालों ने सूचना देने के लिए नंबर और उचित इनाम का भी ऐलान किया है।</p>
<p><strong>भगदड़ से लापता लोग : </strong>जयपुर की रहने वाली 62 साल की राजकुमारी पारीक का पोस्टर हो या फिर समस्तीपुर बिहार की रहने वाली मीना देवी, सीता देवी का पोस्टर हो या फिर मध्य प्रदेश के सागर के रहने वाले तेजई पटेल का पोस्टर। ऐसे तमाम पोस्टर दीवारों पर लगे हैं जिन पर साफ लिखा है कि 29 जनवरी की सुबह संगम पर मची भगदड़ से ये तमाम लोग लापता हैं। स्वरूप रानी अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में जाकर पूछा गया तो पता चला अज्ञात लाश मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस में रखी जाती है। मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस पर भी ऐसे ही पोस्टर लगे हैं। मध्य प्रदेश में सागर के रहने वाले लापता तेजई पटेल का पोस्टर लगाकर पास में ही भटक रहे उनके बेटे अशोक पटेल से न्यूज एजेंसी टीम की मुलाकात हो गई।</p>
<p><strong>कहां लापता हो गए कुछ पता नहीं : </strong>लापता पिता की तलाश कर रहा बेटा आपबीती बताते हुए फफक पड़ा।  अशोक ने बताया कि गांव से साथ आए लोग सकुशल घर पहुंच गए लेकिन पिताजी अभी तक नहीं पहुंचे। कोई बता ही नहीं रहा, आखिर हम कहां जाएं? कहां तलाश करें? पिताजी तो नहाने आए थे लेकिन हमें क्या पता था कि वो अब नहीं लौटेंगे। महाकुंभ आने से पहले पिता की दी हुई आखिरी निशानी सोने का लॉकेट दिखाते हुए बेटा कहता है कि यहां आते वक्त कह रहे थे कि यह पहन लो... हमें क्या पता था अब वह लौट के नहीं आएंगे। पिता को हर जगह तलाशा, वो ना अस्पताल में मिले, ना पोस्टमार्टम हाउस में। इतने दिनों से कहां लापता हो गए कुछ पता नहीं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/neither-met-in-the-hospital-nor-many-people-are-missing/article-103354</link>
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                <pubDate>Thu, 06 Feb 2025 12:26:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>महाकुम्भ : भूटान नरेश ने संगम में लगाई पुण्य की डुबकी, योगी ने नरेश को चांदी का कलश किया भेंट </title>
                                    <description><![CDATA[ भूटान नरेश जिम्मे खेसर नामग्ययाल वांगचुक ने महाकुंभ के दौरान मंगलवार को गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%C2%A0mahakumbh--bhutan-king-took-a-holy-dip-in-the-sangam--yogi-presented-a-small-silver-urn-to-the-king/article-103122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/mahakumbh.png" alt=""></a><br /><p>महाकुंभनगर। भूटान नरेश जिम्मे खेसर नामग्ययाल वांगचुक ने महाकुंभ के दौरान मंगलवार को गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भूटान नरेश खेसर नामग्ययाल अरैल से जेटी से संगम पहुंचे और दोनो लोगों ने पुण्य की डुबकी लगाई। पुरोहितों ने मुख्यमंत्री और भूटान नरेश  का विधिविधान से पूजन संपन्न कराया।  मुख्यमंत्री और भूटान नरेश में गंगा मां को दुग्ध और माला अर्पित किया। दोनों महानुभावों ने मां गंगा की आरती उतारी। मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से भूटान नरेश को छोटा चांदी का कलश सौंपा।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भूटान के राजा जिम्मे खेसर नामग्ययाल वांगचुक ने गंगा की जलधारा पर कलरव कर रहे साइबेरिया पक्षियों को अपने हाथों में पीले रंग की बास्केट में दाना रखकर चुगाया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Feb 2025 14:43:18 +0530</pubDate>
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