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                <title>गैस संकट से ठंडी पड़ी सब्जी बाजार की रफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[रेस्टोरेंट व ढाबों में घटी सब्जियों की डिमांड, दाम कम होने से आमजन को राहत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/gas-crisis-slows-down-the-vegetable-market/article-149400"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जारी एलपीजी संकट का असर अब सब्जी बाजार पर गहराने लगा है। गैस सिलेंडरों की कमी के चलते होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन और छोटे ढाबों में भोजन तैयार करने का काम प्रभावित हुआ है। इससे सब्जियों की थोक और खुदरा मांग में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। मांग घटने के कारण सब्जियों के दामों में भी कमी आई है, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है, लेकिन किसानों और व्यापारियों के सामने नई चिंता खड़ी हो गई है। व्यापारियों के मुताबिक पहले जहां शहर की मंडियों में रोजाना भारी मात्रा में सब्जियों की खपत होती थी, वहीं अब हालात यह हैं कि मंडियों में माल बचने लगा है। होटल और ढाबों की खरीद आधी रह गई है, जबकि कई छोटे व्यवसाय अस्थायी रूप से बंद भी हो गए हैं। इसके चलते थोक बाजार में आवक अधिक और खपत कम होने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।</p>
<p><strong>इन सब्जियों के दामों में आई गिरावट</strong><br />पिछले एक सप्ताह में टमाटर, आलू, प्याज, भिंडी, लौकी, बैंगन और हरी सब्जियों के दामों में 10 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। जहां टमाटर के भाव पहले 30-40 रुपए किलो थे, वहीं अब 10-15 रुपए किलो तक आ गए हैं। पहले भिंडी सबसे महंगी 60 रुपए प्रति किलो तक बिक रही थी। अब इसकी भी डिमांड कम होने से भाव टूट कर 30 रुपए प्रति किलो पर आ गए हैं। इसके अलावा आलू भी 10 रुपए किलो बिक रहा है। अन्य सब्जियों के भावों में कमी दर्ज की गई है। जिससे आमजन को घरेलू बजट पर कुछ राहत मिली है।</p>
<p><strong>आमजन को राहत, किसान आहत</strong><br />सब्जियों के दाम कम होने से आम उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिला है। गृहिणियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से बढ़ती महंगाई के बीच सब्जियों के सस्ते होने से रसोई का खर्च कुछ कम हुआ है। खासकर मध्यम वर्ग और दैनिक आय वाले परिवारों को इससे राहत महसूस हो रही है। वहीं दूसरी ओर किसानों और व्यापारियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। कम मांग के कारण उन्हें अपनी उपज कम दामों पर बेचनी पड़ रही है। कई बार तो लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि यदि यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>डिमांड बढ़ते ही भावों में आएगी तेजी</strong><br />सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि अभी डिमांड कम होने से सब्जियों की खपत घट गई है। बाद में जैसे ही एलपीजी आपूर्ति सामान्य होगी और होटल और रेस्टोरेंट फिर से पूरी क्षमता से संचालित होंगे तो सब्जियों की मांग में तेजी आएगी। इसके साथ ही दामों में भी फिर से बढ़ोतरी हो सकती है। अभी शादियों की सीजन भी शुरू नहीं हो पाया है। विवाह सीजन का दौर चालू होने के बाद फिर से सब्जियों के भावों में तेजी आने की उम्मीद है। फिलहाल, बाजार में सुस्ती के बीच आमजन को सस्ती सब्जियों का लाभ मिल रहा है, जबकि किसान और व्यापारी हालात सुधरने का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p>पहले रोजाना पूरा माल निकल जाता था, लेकिन अब आधा भी नहीं बिक रहा। मजबूरी में कम दाम पर बेचना पड़ रहा है, जिससे नुकसान हो रहा है।<br /><strong>-शब्बीर वारसी, सब्जी व्यापारी</strong></p>
<p>सब्जियों के दाम कम होने से थोड़ी राहत मिली है। पहले जहां 500-600 रुपए में हफ्ते की सब्जी आती थी, अब 300-400 में काम चल रहा है।<br /><strong>-मीना कुमारी, गृहिणी</strong></p>
<p>खेत में मेहनत करने के बाद भी सही दाम नहीं मिल रहे। मंडी में भाव गिर गए हैं, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।<br /><strong>-रामकेश मीणा, सब्जी उत्पादक</strong></p>
<p>गैस सिलेंडर की दिक्कत के कारण ढाबा पूरा नहीं चला पा रहे हैं। इससे सब्जियों की खरीद भी कम कर दी है।<br /><strong>-अशोक रोहिड़ा, ढाबा संचालक </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 14:31:38 +0530</pubDate>
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                <title>मिडिल ईस्ट तनाव से महंगा हुआ तड़का, खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी से बिगड़ा बजट</title>
                                    <description><![CDATA[कंपनियां लगातार रेट बढ़ा रही हैं, जिससे रोजाना नए दाम लागू हो रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/middle-east-tensions-drive-up-cooking-oil-prices--rising-costs-disrupt-household-budgets/article-148548"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/12200-x-60-px)-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब सीधे आमजन की रसोई तक पहुंच चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित होने और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते खाद्य तेलों के दाम में अचानक उछाल आ गया है। पिछले कुछ दिनों में रिफाइंड तेल 15 से 20 रुपए प्रति किलो तक महंगा हो गया है, जिससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है। व्यापारियों के अनुसार भारत में सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात होता है। मिडिल ईस्ट और आसपास के क्षेत्रों में अस्थिरता के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है, जिससे बाजार में सप्लाई घट गई है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। पाम आॅयल, जो सस्ता विकल्प माना जाता है, उसके दाम भी बढ़ने लगे हैं।</p>
<p><strong>आमजन की जेब पर बढ़ा बोझ</strong><br />गृहिणियों का कहना है कि खाद्य तेल हर घर की जरूरत है, ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से पूरे महीने का बजट गड़बड़ा गया है। कई परिवार अब तेल की खपत कम करने या सस्ते विकल्प तलाशने को मजबूर हैं। काफी समय से खाद्य तेल की कीमत होने से तरह-तरह के पकवानों का स्वाद लिया जा रहा था। अब अचानक से दामों में तेजी आने से घरेलू  बजट गड़बड़ाने लगा है। खाद्य तेलों के बिना कोई सा भी पकवान नहीं बन सकता है। अब कीमत बढ़ने से खर्चा अधिक होने लगा है। सरकार को खाद्य तेलों की कीमत को कम करने के लिए वैकल्पिक उपाय करने चाहिए।</p>
<p><strong>स्थानीय बाजार में दिख रहा असर</strong><br />कोटा के थोक और खुदरा बाजारों में तेल की कीमतों में तेजी साफ नजर आ रही है। दुकानदारों का कहना है कि कंपनियां लगातार रेट बढ़ा रही हैं, जिससे रोजाना नए दाम लागू हो रहे हैं। कुछ जगहों पर उपभोक्ताओं ने ज्यादा खरीदारी शुरू कर दी है, जिससे मांग और बढ़ गई है। वहीं होटल और ढाबा संचालकों पर भी इसका असर पड़ा है, जहां लागत बढ़ने के कारण या तो कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं या मुनाफा कम करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है तो खाद्य तेलों की कीमतों में और उछाल आ सकता है।</p>
<p>पहले ही सब्जियां और राशन महंगा है, अब तेल भी महंगा हो गया। हर महीने का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है। हमें अब खाने में तेल कम करना पड़ रहा है।<br /><strong>-सीमा शर्मा, गृहिणी</strong></p>
<p>कंपनियां लगातार रेट बढ़ा रही हैं। हर 2-3 दिन में नए दाम आ जाते हैं। ग्राहक भी परेशान हैं और हमारी बिक्री पर भी असर पड़ रहा है।<br /><strong>-राजेश अग्रवाल, दुकानदार</strong></p>
<p>तेल महंगा होने से लागत बढ़ गई है। अगर खाने के दाम बढ़ाते हैं तो ग्राहक कम हो जाते हैं, नहीं बढ़ाते तो मुनाफा खत्म हो जाता है।<br /><strong>-इमरान खान, ढाबा संचालक</strong></p>
<p>रिफाइंड तेल के 15 किलो के पीपे में 200 से 250 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं मूंगफली और सरसों के तेल में भी 50 से 70 रुपए तक की तेजी आई है। अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण सप्लाई प्रभावित है।<br /><strong>-गजेन्द्र गर्ग, थोक व्यापारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 14:22:05 +0530</pubDate>
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                <title>पुश्तैनी जेवरात की वसीयत जरूर बनवाएं, दस्तावेज भी रखें</title>
                                    <description><![CDATA[एमसीएक्स व सट्टा बाजार ला रहा अस्थिरता,सोच समझ कर करें निवेश, अस्थिर मार्केट में धैर्य बनाए रखें
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/make-sure-to-prepare-a-will-for-ancestral-jewelry-and-keep-the-documents/article-147801"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)62.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दे श में जिस तरह से पिछले कुछ समय से सोने-चांदी के भाव में तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है और पूरा बाजार अस्थिर बना हुआ है। उससे एक मध्यमवर्गीय परिवार से लेकर निवेशक तक के मन में सोने-चांदी की खरीद को लेकर  शंका का भाव बना हुआ है। इस संबंध में मंगलवार को दैनिक नवज्योति कार्यालय में टॉक शो का आयोजन किया गया। जिसमें शहर के सरार्फा,निवेशक, सलाहकार व अर्थशास्त्रियों से लेकर महिलाओं तक ने अपने विचार व्यक्त किए। जिनमें यही निष्कर्ष निकला कि बाजार जब स्थिर हो तभी सोने-चांदी में निवेश करें, जिससे लाभ होगा ही होगा। सोने-चांदी में निवेश सुरक्षित है। यह भविष्य  के लिए लाभकारी है।  टॉक शो में बरसों से सोने-चांदी का व्यापार करने वाले सरार्फा व्यापारियों ने अपनी-अपनी राय व्यक्त की। सभी का कहना था कि सोने-चांदी के भाव में जल्दी उतार-चढ़ाव होना अंतरराष्ट्रीय बाजार और डॉलर पर निर्भर है। वहीं पुश्तैनी जेवरात की वसीयत जरूर बनवाकर रखें और जितना भी सोना-चांदी खरींदें उसके बिल या दस्तावेज भी होना आवश्यक है। </p>
<p><strong>हड़बड़ी में निवेश करना गलत</strong><br />अंतरराष्ट्रीय बाजार डॉलर पर निर्भर है। जब सोने-चांदी में निवेश करना हो तो सोच-समझकर व जानकारी लेकर ही करना चाहिए। फिलहाल ईटीएप अच्छा विकल्प है। लोगों को छदम डिमांड के प्रति अवेयर रहना चाहिए। दूसरा जो कर रहा है उसके पीछे नहीं दौड़ना चाहिए। हड़बडी में निवेश करने से कई बार निर्णय गलत भी हो सकता है।  सोने में निवेश करना वैसे तो सुरक्षित है लेकिन यह निवेश तभी करें जब बाजार स्थिर हो या पिछले पांच साल में सबसे न्यूनतम स्तर पर रहा हो। भाव जिस तेजी से बढ़ते हैं उसी तेजी से कम भी होते हैं। ऐसे में कई लोग भाव बढने पर सोना-चांदी बेचने लगते हैं और भाव गिरने पर खरीदने लगते हैं।<br /><strong>-पंकज लड्ढ़ा, कंसलटेंट एवं इनवेस्टमेंट गुरु</strong></p>
<p><strong>एमसीएक्स अस्थिरता का कारण</strong><br />यदि बात की जाए तो एमसीएक्स दिन के साथ -साथ रातभर भी चलता हैं। वहीं जब तक सट्टा बाजार बंद नहीं हो जाता हैं तब तक यहीं शायद इसी तरह  की स्थिति रह सकती हैं। सट्टा बाजार में कुछ पैसे लगाकर भी लोग सोना चांदी खरीद लेते हैं। जिससे  भाव बढ़ते चढ़ते रहते हैं। यह बड़े निवेशकों का खेल है।  अस्थिर बाजार में फिजिकल सोना चांदी तो होता नहीं है। पहले पचास सौ रूपए भी भाव में उतार चढ़ाव होता था तो लगता था यह क्या है। लेकिन अब विश्व व्यापी स्तर पर बड़े खिलाड़ी ऐसा करवाते हैं।  सोने-चांदी के दामों में वृद्धि होने के कारण बाजार में इनकी डिमांड में कमी आई है। <br /><strong>-रमेश कुमार सोनी, अध्यक्ष स्वर्ण रजत कला उत्थान समिति </strong></p>
<p><strong>सोच-समझकर ही करें निवेश</strong><br />जिस तरह से कोई भी नया काम करने से पहले उसके बारे में जानकारी ली जाती है। उसी तरह से सोने-चांदी में निवेश करते समय पूरी जानकारी व सलाह के बाद ही निवेश करना चाहिए। सेंटीमेंट के आधार पर निवेश करना सही नहीं है।  निवेश एक जगह पर नहीं विविधता में करना चाहिए।  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह का माहौल बना हुआ है उसमें तेल और कैश जिसके पास है वही जीत में है। सोने-चांदी का भविष्य सुरक्षित है। लेकिन इसमें तभी निवेश करें जब  बाजार स्थिर हो।  बाजार में अस्थिरता कुछ समय के लिए है। इसका कारण डॉलर व अंतरराष्ट्रीय बाजार है।  -प्रोफेसर गोपाल सिंह, अर्थशास्त्री </p>
<p><strong>बाजार अस्थिरता के मुख्य कारण </strong><br />1.वैश्विक प्रभाव का सीधा असर<br />2. रुपये की कमजोरी<br />3. त्योहार और शादी सीजन की मांग<br />4. ऊंचे भाव के कारण मांग में गिरावट<br />5. स्थानीय बाजार में खरीद क्षमता कम होना<br />6.सट्टेबाजी और एमसीएक्स ट्रेडिंग <br />7.चांदी की औद्योगिक मांग<br />8.ग्राहकों का इंतजार (वेट एंड वाच ट्रेंड)</p>
<p><strong>सही जानकारी का अभाव</strong><br />देश दुनिया में जिस तरह से सोने-चांदी के भाव में तेजी से बदलाव हो रहा है। उससे अधिकतर युवाओं के मन में आशंका बनी हुई है। युवा अधिकतर सोशल मीडिया पर चलने वाली खबरों से प्रभावित हो रहा है। जबकि सही जानकारी का अभाव होने से गलत समय पर निवेश होना खतरनाक हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिस तरह की स्थिति बनी हुई है।  उससे करीब 90 फीसदी लोगों को समझ ही नहीं आ रहा कि वे क्या करें। निवशकों के लिए हालात खराब हैं। स्थिरता का इन्तजार करें।   <br /><strong>-नुपुर खंडेलवाल, सीएस</strong></p>
<p><strong>आम आदमी की रेंज से हो रहा बाहर</strong><br />मैं करीब नौ साल से सोने-चांदी की दुकान का संचालन करती हूं। अभी इनके भाव बढ़ने के कारण मार्केट में लोअप मिडिल और लोअर क्लास की ग्राहकी पर काफी असर पड़ा हैं। अब खरीद के लिए लोग कम आते हैं।  इनके भाव स्थिर रहें तो ग्राहक का लेने का मन करता हैं। वहीं मैं ग्राहकों को  यही कहना चाहूंगी कि वे जब भी ज्वैलरी खरीदे हमेशा हॉलमार्क वाली ही खरीदें । जिससे फ्रॉड होने की संभावना नहीं रहती हैं। आप जब भी उसे निकालेंगे उस पर बाजार भाव का पैसा मिलेगा। <br /><strong>-मधुबाला माहेश्वरी, ज्वैलरी व्यापारी सिल्वर पैलेस</strong></p>
<p><strong>हड़बड़ी में न तो खरीदें और न ही बेचें</strong><br />सोने-चांदी के भाव में जिस तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है उससे बाजार में अस्थिरता बनी है। लेकिन यह लेकिन यह अधिक समय तक नहीं रहेगी। फिर भी सोने-चांदी में निवेश करने से पहले व्यक्ति हो या निवेशक उसे अपनी हैसियत देखकर ही निवेश करना चाहिए। एक बार निवेश करने के बाद इसमें धैर्य रखने की जरूरत होती है। हड़बड़ी में न तो खरीदें और न ही बेचें। सोने-चांदी का भविष्य सुनहरा है। इसमें निवेश भी सुरक्षित है। लेकिन पूरी जानकारी लेने के बाद और सही समय पर ही निवेश करें। <br /><strong>-सुरेन्द्र गोयल विचित्र, अध्यक्ष सरार्फा बोर्ड</strong></p>
<p><strong>पुश्तैनी जेवरात की वसीयत जरूर बनाएं</strong><br />सोना-चांदी सबसे सुरक्षित धन के रूप में माना जाता है। घर में महिलाएं आर्थिक सुरक्षपर विवाहित महिला 500 ग्राम तक, अविवाहित महिला 250 ग्राम तक और पुरुष 100 ग्राम तक सोना-चांदी रख रखता है। लेकिन इनका पक्का बिल होना चाहिए। वहीं जिन लोगों को विरासत में या पुश्तैनी सोना व जेवरात मिलते हैं उनकी वसीयत जरूर होनी चाहिए। जिससे वे किसी भी मुसीबत में नहीं पड़ सकेंगे। जेवरात की वसीयत सादा कागज पर भी बनाई जा सकती है। इसके लिए नोटरी की आवश्यकता नहीं होती। <br /><strong>-नरेन्द्र डाबी, कानूनी सलाहकार</strong></p>
<p><strong>कमोडिटी पर लगे लगाम</strong><br />भारतीय संस्कृति में हमेशा से ही सोने- चांदी खरीदने का चलन रहा हैं। अस्थिरता और उतार चढ़ाव ने लोगों के जीवन पर काफी प्रभाव डाला है। भाव नियंत्रण पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।  क्योकि कमोडिटी में एक लाख लगाकर इंसान एक किलो सोना खरीद सकता हैं। यह गलत है। जिसके चलते कमोडिटी पर लगाम होना चाहिए जिससे इनके भावों में वृद्धि को रोका जा सकता हैं और जिससे ग्राहकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा हैं। <br /><strong>-मनीष कुमार मूंदड़ा , एक्सपोर्टर, राधा माधव आॅरनामेन्ट  </strong></p>
<p><strong>बड़े खिलाड़ी ला रहे अस्थिरता</strong><br />आप देख सकते हैं। जब से सोने -चांदी में वायदा की लेन-देन एमसीएक्स   में आया तब से इनमें अस्थिरता रहने लगी। पहले हम देखते थे कि जब आॅफ सीजन होता था तब भाव कम होते थे और सीजन में बढ़ जाते थे। पर अब ऐसा नहीं होता हैं। पहले चुनावी साल में अधिकतर इन धातुओं के भाव बढ़ जाते थे। पर अब कुछ नहीं कह सकते हैं।  सन 1965 के आसपास सिल्वर व 1974 में सोना की वायदा बाजार में ी एंट्री हुई।   सन 2005 में  इंडिया में एमसीएक्स की एंट्री हुई।  1980 से 2002 तक इंडिया की करैंसी में डिफे्ररेंट  रहा। वहीं अभी करीब चाइना और इंडिया ही इनका सबसे  बड़ा बाजार हैं।  <br /><strong>-सीताराम सोनी, पूर्व अध्यक्ष स्वर्ण रजत कला उत्थान समिति  </strong></p>
<p><strong>सोने में निवेश सुरक्षित है</strong><br />सोने में निवेश करना सुरक्षित है। लेकिन यह सोच समझकर ही करना चाहिए। अपनी जमा पूंजी या एफडी तोड़कर सोने में निवेश करना गलत है। जिस तरह से बाजार में स्थिति बनी हुई है यह वायदा बाजार के कारण है। सोना -चांदी सही समय पर ही खरीदना चाहिए जब बाजार स्थिर हो। भाव में तेजी से उतार-चढ़ाव को अंजाम देने में एक लॉबी काम करती है। सोना हमेशा हॉल मार्क वाला ही खरीदना चाहिए। जिससे उसकी वैद्यता बनी रहती है। <br /><strong>-विवेक कुमार जैन, दिव्यांश हालमार्किंग</strong></p>
<p><strong>महंगाई बढने से कम हुई सोने की खरीद</strong><br />सोने-चांदी के भावों में जिस तरह से तेजी हुई है।  इससे महंगाई बढ़ी है। इस महंगाई के दौर में सोने-चांदी की खरीद कम हो गई है। हर परिवार में बेटी की शादी पर परिवार वाले उसे अपनी हैसियत के हिसाब से जेवरात देते हैं। महंगाई के इस दौर में सरकार को चाहिए कि बेटी की शादी  में दिए जाने वाले जेवरात पर छूट का प्रावधान किया जाए। जैसे रजिस्ट्री में महिलाओं को छूट दी जाती है वैसा कुछ नियम बनाया जाना चाहिए।  विशेष रूप से सोने-चांदी की खरीद पर जीएसटी में कमी हो। <br /><strong>-भारती मूंदड़ा, गृहिणी</strong></p>
<p><strong>विश्व स्तर पर काम कर रही लॉबी</strong><br />सोने-चांदी के भाव में जिस तरह से तेजी से बदलाव हो रहा है। इसका कारण अधिकतर वायदा बाजार है। वर्तमान में इस क्षेत्र में जो उतार-चढ़ाव हो रहा है उसमें विश्व स्तर की लॉबी काम कर रही है। यह लॉबी 2024 से ही चल रही है। डॉलर के मुकाबले रूपया कमजोर हुआ है। सोने-चांदी का भाव डॉलर पर निर्भर करता है। एमसीए बाजार पर सरकार का नियंत्रण नहीं है।ऐसे में बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। <br /><strong>-अरूण कुमार जैन, अध्यक्ष सरार्फा थोक विक्रेता व्यावसायिक संघ  </strong></p>
<p><strong>महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा प्रभावित</strong><br />सोना-चांदी महंगी होने के बाद भी थोड़ी-थोड़ी बचत करके ही इनको खरीद सकते हैं। वहीं कुछ मां -बाप की आर्थिक स्थिति सहीं है तो वहां थोड़ा-थोड़ा करके भी दे सकते हैं। और इसमें इनवेस्ट भी कर सकते हैं। भारत में महिलाओं को  हर मां -बाप आर्थिक सुरक्षा के लिए स्त्री धन के रूप में अपनी बेटी को शादी में भारतीय परंपरा अनुसार जो जरूरी गहने होते हैं वह देते  हैं। बाजार की उथल पुथल से इसमें कमी आ गई है। भाव बढ़ने से लोग खरीद करने से पहले सोचते हैं। <br /><strong>-आरती डाबी, समाज सेविका , न्याय विज्ञान संस्थान</strong></p>
<p><strong>युवा पीढ़ी का सोना -चांदी से मोह भंग</strong><br />सोने चांदी के प्रति मोह में कमी आई है। अब लोग सोना चांदी केवल इनवेस्टमेंन्ट कोे लिए खरीदते और बेचते हैं।  वहीं अब सोने-चांदी की रेट बढ़ जाती है। तब इनको बेचा जाता हैं। वहीं कई बार लगातार रेट कम होने से जनता को भ्रम पैदा हो जाता हैं। हमारे घर में बीते दिनों में इनकी खरीदारी की अब इनके भाव में कमी - बढ़ोतरी होने के हम कई बार सही निर्णय नहीं ले पाते हैं। युवा पीढ़ी सोना - चांदी नहीं खरीद रही। आज का  युवा  आर्टिफिशीयल ज्वैलरी की तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। <br /><strong>-दीप्ति मेवाड़ा, पे्रसिडेंट, जेडीबी कामर्स कॉलेज </strong></p>
<p><strong>हॉलमार्क की जागरूकता जरूरी</strong><br />भाव बढ़ने के कारण अब ग्राहकी कम हो गई। अभी करीब हम सोने पर 20 और 22 कैरेट  पर हॉलमार्क लगा रहे हैं। डायमंड पर करीब 14 कैरेट पर हॉलमार्क लगाया जाता हैं। हाल मार्क में छह डिजिट की लोगों को जानकारी नहीं होती है। इसकी जानकारी होना चाहिए। अक्सर लोग ज्वैलरी में  में बारीक या छोटे नग लगाते है तो वह भी वजन में काउंट होते हैं जब कि पुराने सोने की स्थिति में उनहों गला कर लिया जाता है। <br /><strong>-योगेश सोनी, हॉलमार्क सेन्टर व्यापारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 12:22:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इजरायल, अमेरिका और ईरान का संघर्ष : शादियों व होटल-रेस्टोरेंट पर दिखने लगा युद्ध का असर, बुकिंग को लेकर नियमों में बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[ कई जगहों पर आयोजकों को पहले से ज्यादा कीमत पर सिलेंडर मंगवाने पड़ रहे हैं, जिससे खर्च भी बढ़ गया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/conflict-between-israel--the-us--and-iran--the-impact-of-the-war-is-being-felt-on-weddings-and-hotels-and-restaurants/article-146099"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव और युद्ध का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखने लगा है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसका असर देश के कई हिस्सों की तरह कोटा में भी दिखाई देने लगा है, जहां एलपीजी गैस की किल्लत होने लगी है। शहर में गैस सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित होने से होटल, रेस्टोरेंट और शादी समारोह आयोजित करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई होटल संचालकों का कहना है कि गैस सिलेंडरों की आपूर्ति समय पर नहीं हो रही है, जिससे रसोई संचालन में दिक्कतें आ रही हैं।</p>
<p><strong>अतिरिक्त सिलेंडर की व्यवस्था करने में मशक्कत</strong><br />शादी-विवाह का सीजन होने के कारण मांग पहले से ही अधिक है। ऐसे में कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों को अतिरिक्त सिलेंडर की व्यवस्था करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई जगहों पर आयोजकों को पहले से ज्यादा कीमत पर सिलेंडर मंगवाने पड़ रहे हैं, जिससे खर्च भी बढ़ गया है। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो भोजन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कुछ छोटे रेस्टोरेंट संचालकों ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इलेक्ट्रिक उपकरणों या अन्य ईंधन का सहारा लेना शुरू कर दिया है, लेकिन इससे लागत बढ़ रही है।</p>
<p><strong>आगे कारोबार पर और दिखेगा असर</strong><br />मार्च और अप्रैल का महीना शादियों चलते होटल और रेस्टोरेंट कारोबारी के लिए काफी व्यस्त रहता है. लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई रुकने से हलवाई और कैटर्स की भी मुश्किलें बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। अगर होटल और रेस्टोरेंट में कमर्शियल गैस सिलेंडर की बिना रुकावट के सप्लाई नहीं होती है तो इसका सीधा-सीधा असर खाने की कीमतों पर भी देखा जा सकता है, वहीं औद्योगिक इकाइयां जैसे कपड़ा कांच जैसे उद्योगों में गैस की खपत ज्यादा होती है उन पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहते हैं तो ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति और कीमतों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।</p>
<p><strong>बुकिंग को लेकर नियमों में बदलाव</strong><br />कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर ही नहीं बल्कि घरेलू उपभोक्ताओं पर बुकिंग को लेकर कई नियमों में बदलाव किया है। पहले उपभोक्ता को दो या तीन दिन में घरेलू गैस की सप्लाई होती थी लेकिन अब यह सप्लाई 7 से 10 दिनों तक की जाएगी यानी कुल मिलाकर घरेलू गैस की किल्लत का असर आम व्यक्ति की रसोई पर भी देखने को मिलेगा। कॉमर्शियल गैस सिलेंडर का लोग स्टॉक कर रह हैं। इस वजह से तेल कंपनियों ने गैस आपूर्ति की सप्लाई को पूरी तरीके से बाधित कर दिया है। तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की डिलीवरी पर रोक लगाने का ऐलान किया है।</p>
<p>कामर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई रोक दिए जाने से कोटा शहर में चल रहे होटल, रेस्टोरेंट- ढाबे,कचौरी नमकीन की दुकानों ,खोमचे वालों एवं शादियों के सीजन को देखते हुए हलवाई कैटरिंग व्यवसाइयों के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया है। हमने जब सभी गैस एजेंसियों के संचालकों से कमर्शियल सिलेंडर सप्लाई की बात कही तो सभी ने हाथ खड़े कर दिए। इससे इन व्यवसाइयों से जुड़े लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है क्योंकि एक-दो दिन में सप्लाई नहीं आई तो कोटा में संचालित व सभी व्यवसाइयो को अपना व्यवसाय बंद करना पड़ेगा। सरकार को चाहिए कि कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति को यथावत रखा जाए।<br /><strong>-अशोक माहेश्वरी, अध्यक्ष व संदीप पाडिया, महासचिव, होटल फेडरेशन आॅफ राजस्थान कोटा डिवीजन</strong></p>
<p>केंद्र सरकार द्वारा कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर रोक लगाए जाने से हाड़ौती क्षेत्र में चल रहे शादी-विवाह के सीजन के बीच कैटरिंग व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। गैस की कमी के कारण हलवाइयों और कैटरर्स के सामने भोजन तैयार करने को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जिससे विवाह समारोहों की व्यवस्थाएं भी प्रभावित होने लगी हैं। अचानक सप्लाई बंद होने से कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के सामने भोजन व्यवस्था को लेकर बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है।<br /><strong>- सचिन माहेश्वरी,अध्यक्ष, हाड़ौती हलवाई-कैटरर्स एसोसिएशन</strong></p>
<p>कोटा में घरेलू गैस सिलेंडरों की नियमित रूप से आपूर्ति हो रही है। केवल कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर रोक लगाई गई है। वहीं अब ई-केवाईसी भी अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा एलपीजी गैस सिलेंडर की दोबारा बुकिंग अब पिछली डिलीवरी के 25 दिन बाद ही हो सकेगी।<br /><strong>-अरविंद गुप्ता, अध्यक्ष, हाड़ौती कोटा एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 15:50:59 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-इजरायल व ईरान के युद्ध में झुलसा बासमती चावल, कीमतों में गिरावट का दौर शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[खाड़ी देशों में निर्यात ठप व नए सौदे अटके-हाड़ौती के व्यापारियों और किसानों की बढ़ी चिंता।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/basmati-rice-has-been-damaged-in-the-us-israel-iran-war--and-prices-are-falling/article-145490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती अंचल से खाड़ी देशों और ईरान को होने वाला बासमती चावल का निर्यात इन दिनों लगभग ठप पड़ गया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण नए निर्यात सौदे अटक गए हैं। इसका सीधा असर स्थानीय चावल बाजार और मंडियों में देखने को मिल रहा है। निर्यात प्रभावित होने से चावल की कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हो गया है। व्यापारियों के अनुसार दामों में करीब 10 हजार रुपए प्रति टन तक की कमी दर्ज की गई है। हाड़ौती के कोटा, बारां और बूंदी जिलों से बड़ी मात्रा में बासमती चावल का व्यापार होता है। यहां के चावल की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण इसकी मांग खाड़ी देशों और ईरान में रहती है।</p>
<p><strong>रास्ते में अटकी चावल की खेप</strong><br />वर्तमान में ईरान में मौजूदा परिस्थितियों और वहां के प्रमुख बंदरगाहों पर व्यापारिक गतिविधियों में आई सुस्ती के कारण चावल की खेप भेजने में परेशानी आ रही है। निर्यातकों के अनुसार ईरान के सबसे बड़े बंदरगाह बंदर अब्बास के रास्ते ईरान और अफगानिस्तान को चावल भेजा जाता है। वर्तमान हालात के कारण इस मार्ग से जाने वाली खेप फिलहाल रुक गई है। इसके चलते निर्यातकों ने नए सौदे करना भी लगभग बंद कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि हाड़ौती क्षेत्र से होने वाले चावल निर्यात का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा ईरान और खाड़ी देशों में जाता है। अब वहां युद्ध का माहौल होने का सीधा असर स्थानीय बाजार पर पड़ रहा है। मंडियों में चावल की खरीद धीमी हो गई है।</p>
<p><strong>खाड़ी देशों में यहां होती है सप्लाई</strong><br />हाड़ौती का बासमती चावल मुख्य रूप से खाड़ी देशों के दुबई, अबूधाबी, शारजाह (यूएई), दम्माम और जेद्दा (सऊदी अरब), दोहा (कतर), कुवैत सिटी (कुवैत) और मस्कट (ओमान) जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में भेजा जाता है। इन स्थानों से चावल स्थानीय बाजारों और सुपरमार्केट के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। खाड़ी देशों में भारतीय बासमती चावल की अच्छी मांग रहती है। वहां बड़ी संख्या में भारतीय और दक्षिण एशियाई लोग रहते हैं, जिसके कारण इन देशों में बासमती चावल का उपभोग काफी अधिक है। इसके अलावा ईरान में भी हाड़ौती के बासमती चावल का काफी खपत होती है। अब युद्ध के कारण खाड़ी देशों में चावल का निर्यात ठप हो गया है।</p>
<p><strong>मंडियों में दिखने लगा असर</strong><br />निर्यात प्रभावित होने से कोटा सहित हाड़ौती की मंडियों में चावल की मांग कमजोर हो गई है। व्यापारियों के अनुसार हाड़ौती से काफी मात्रा में चावल ईरान और खाड़ी देशों में जाता है। ऐसे में वहां से मांग कम होने का सीधा असर स्थानीय बाजार पर पड़ रहा है। यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो चावल मिलों में उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है और स्टॉक बढ़ने से कीमतों में और गिरावट आने की संभावना है। अब मंडियों में रोजाना धान के भाव में कमी आने लगी है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार भामाशाहमंडी में धान के भावों में रोजाना 200 से 400 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट आ रही है।</p>
<p>अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण नए निर्यात सौदे अटक गए हैं। इसका सीधा असर स्थानीय चावल बाजार और मंडियों में देखने को मिल रहा है। चावल की कीमतों में गिरावट आने लगी है।<br /><strong>- भूपेन्द्र सोनी, प्रमुख व्यापारी, भामाशाहमंडी</strong></p>
<p>बंदरगाह मार्ग प्रभावित होने से कई खेप अटक गई हैं। यदि जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं हुई तो व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।<br />निर्यात ठप होने से स्थानीय बाजार में स्टॉक बढ़ने लगा है।<br /><strong>- राजेश अग्रवाल, निर्यातक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 15:00:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>घरेलू थोक बाजार में चावल और दालों के दाम बढ़े : गेहूं और चीनी स्थिर, सरसों और सोया तेल में भी दिखी तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[घरेलू थोक जिंस बाजारों में बीते सप्ताह चावल, दालों और खाद्य तेलों के दामों में तेजी रही, जबकि गेहूं और चीनी स्थिर रहे। चावल 30 रुपए महंगा होकर 3,863.88 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा। सरसों तेल 83 रुपए और तुअर दाल 110 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ी। गुड़ के भाव में भी 21 रुपए की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/prices-of-rice-and-pulses-increased-in-the-domestic-wholesale/article-130641"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(5)11.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। घरेलू थोक जिंस बाजारों में बीते सप्ताह चावल के औसत भाव बढ़ गए। दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में भी तेजी रही, जबकि गेहूं और चीन के दाम कमोबेश स्थिर रहे। घरेलू थोक जिंस बाजारों में सप्ताह के दौरान चावल की औसत कीमत 30 रुपए बढ़कर सप्ताहांत पर 3,863.88 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। गेहूं 2,859.70 रुपए प्रति क्विंटल पर लगभग स्थिर रहा। आटे की कीमत 11 रुपए बढ़कर 3,324.16 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गई।</p>
<p>बीते सप्ताह सरसों तेल की औसत कीमत 83 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ गई। पाम ऑयल में 42 रुपए की तेजी रही। मूंगफली तेल 32 रुपए और सोया तेल 56 रुपए प्रति क्विंटल महंगा हुआ। सूरजमखी तेल की कीमत 69 रुपए और वनस्पति की 48 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ गई। दाल-दलहनों में मसूर दाल की औसत कीमत में 16 रुपए प्रति क्विंटल की साप्ताहिक तेजी दर्ज की गई। चना दाल की कीमत 21 रुपए और मूंग दाल की 42 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ गई। तुअर दाल 110 रुपए और उड़द दाल 33 रुपए प्रति क्विंटल महंगी हुई। मीठे के बाजार में सप्ताह के दौरान गुड़ के औसत भाव 21 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ गए। वहीं, चीनी के भाव में कमोबेश टिकाव रहा।</p>
<p><strong>दाल-दलहन : </strong>दाल चना 7875.79 रुपए, मसूर काली 8102.91 रुपए, मूंग दाल 10125.80 रुपए, उड़द दाल 10398.60 रुपए, तुअर दाल 10525.20 रुपए प्रति क्विंटल।</p>
<p><strong>अनाज :</strong> (भाव प्रति क्विंटल) गेहूं दड़ा 2859.70 रुपए और चावल 3863.88 रुपए प्रति क्विंटल।</p>
<p><strong>चीनी-गुड़ : </strong>चीनी एस 4326.49 रुपए और गुड़ 5032.23 रुपए प्रति क्विंटल बोले गए।  </p>
<p><strong>खाद्य तेल : </strong>सरसों तेल 17913 रुपए, मूंगफली तेल 17622.20 रुपए, सूरजमुखी तेल 15638.90 रुपए, सोया तेल 13772.60 रुपए, पाम ऑयल 12533.30 रुपए और वनस्पति 14513.50 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर रहा। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Oct 2025 11:31:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>दशहरा मेले में इस बार नहीं लगेगा महंगाई का तड़का, खाद्य पदार्थ और झूलों की नहीं बढ़ेगी रेट</title>
                                    <description><![CDATA[मेला समिति ने दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया है गत वर्ष के समान ही दुकानों का किराया लिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-dussehra-fair-will-not-be-affected-by-inflation-this-time--food-prices-and-swings-will-not-increase/article-127868"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(1)29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । एक ओर जहां महंगाई लगातार बढ़ रही है। वहीं उसका असर इस बार दशहरे मेले में नहीं दिखाई देगा। दशहरा मेले में महंगाई का तड़का नहीं लगेगा। विशेष रूप से खाद्य पदार्थ और झूलों पर। दशहरा मेले का विधिवत शुभारम्भ तो दो दिन पहले नवरात्र के दिन से हो गया है लेकिन अभी तक भी मेले में पूरी दुकानें नहीं लग पाई है। बाहर से आने वाले दुकानदार अभी तक बहुत कम संख्या में आए। हालांकि स्थानीय व्यापारी व दुकानदारों द्वारा अपने हिसाब से दुकानें तैयार की जा रही है। जिससे खाने-पीने की दुकानों के साथ ही झूले ही लग पाए हैं।  दशहरा मैदान के फेज एक में झूला मार्केट से लेकर मैदान में अन्य निर्धारित स्थानों पर हर साल लगने वाले परम्परागत झूले लग रहे है। वहीं नसीराबाद का कचौड़ा, पकौड़ी व सोफ्टी और फास्ड फूड की दुकानें लगना शुरु हो गई है।  दुकानदारों का कहना है कि इस बार मेले में खाद्य पदार्थ व झूलों की रेट नहीं बढ़ाई गई है। खाद्य पदार्थ के दुकानदार सुनील वैष्णव ने बताया कि नसीराबाद का कचौड़ा व गोभी के पकौड़े, गुलाब जामुन व अन्य खाद्य पदार्थों की कीमत इस बार भी वही है जो गत वर्ष थी।  सोफ्टी के  दुकानदार प्रमोद लोधा का कहना है कि मेला समिति ने दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया है। गत वर्ष के समान ही इस बार भी दुकानों का किराया लिया गया है। इस कारण से सोफ्टी की दरों में भी बढ़ोतरी नहीं की गई है। जिससे 30 से 50 रुपए के बीच ही सोफ्टी की रेट है। हालांकि कई दुकानदार 20 रुपए में भी बेचते हैं।  वहीं झूला संचालक जाकिर हुसैन ने बताया कि मेले में जहां परम्परागत रूप से जो झूले आते हैं उनकी संख्या पहले से भी अधिक हो गई है। करीब 60 से ज्यादा झूले लगेंगे। ऐसे में इस बार भी झूलों की रेट नहीं बढ़ाई गई है। जितनी रेट गत वर्ष थी उतनी ही रखी गई है। 30-40 रुपए से लेकर 80 रुपए तक ही रेट है। </p>
<p><strong>नए झृूलों की रेट अधिक है</strong><br />वहीं मेला समिति के अध्यक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि मेला समिति की ओर से इस बार मेले में आवंटित दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया गया है। इसका मकसद मेले में आने वाले व्यापारियों के साथ ही आमजन पर आर्थिक भार नहीं बढ़ाना है। इस बार भी झूला संचालकों से पुरानी दर पर ही झूले संचालित करने को कहा गया है।  उन्होंने बताया कि इस बार मेले में कई नए व आकर्षक झूले भी लगेंगे जो पहली बार आएंगे। ये झूले बड़े होने से इनकी रेट सामान्य झूलों से कुछ अधिक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Sep 2025 14:51:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अनाज और शाक-सब्जियों की कीमतों में नरमी के कारण खुदरा मुद्रास्फीति 3.16 प्रतिशत </title>
                                    <description><![CDATA[उपभोक्त मूल्य सूचकांक के अप्रैल के अनंतिम आंकड़ों के सरकारी आंकड़ों के अनुसार खुदरा मुद्रास्फीति दर लगातार तीन माह से चार प्रतिशत से नीचे बनी हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/retail-inflation-316-percent-due-to-softness-in-the-prices/article-114094"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer72.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अनाज और शाक-सब्जियों की कीमतों में नरमी के कारण भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा  मुद्रास्फीति अप्रैल, 2025 में गिर कर 3.16 प्रतिशत पर आ गई।</p>
<p>इससे पिछले महीने मार्च में खुदरा मुद्रास्फीति 3.34 प्रतिशत और पिछले साल अप्रैल में 4.83 प्रतिशत रही थी।  उपभोक्त मूल्य सूचकांक के अप्रैल के अनंतिम आंकड़ों के सरकारी आंकड़ों के अनुसार खुदरा मुद्रास्फीति दर लगातार तीन माह से चार प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। आरबीआई पर इसे दो से छह प्रतिशत के बीच और नीचे के दायरे में रखने का दायित्व है। इससे आने वाले समय में आरबीआई को मौद्रिक नीति में और ढील देने में आसानी होगी। अप्रैल में खाद्य वर्ग में खुदरा मुद्रास्फीति गिर 1.78 प्रतिशत पर आ गयी जो तीन साल के न्यूनतम स्तर पर है। पिछले साल अप्रैल में खाद्य मुद्रास्फीति 8.70 प्रतिशत पर काफी ऊंची थी। आलोच्य माह में सब्जियों के भाव सालाना आधार पर 11 प्रतिशत नीचे थे। दाल-दलहनों का खुदरा मूल्य स्तर भी एक साल पहले की तुलना में 5.2 प्रतिशत नीचे था।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 May 2025 11:28:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप का टैरिफ वॉर, कम हुई खाद्य तेलों की धार</title>
                                    <description><![CDATA[व्यापारियों के अनुसार वैश्विक बाजार में बदलाव के चलते अप्रैल-जून तिमाही में खाद्य तेल की कीमतों में और कमी आने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trump-s-tariff-war--prices-of-edible-oils-reduced/article-109958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर का असर यहां के खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ा है। पिछले कुछ माह से शहर के किराना बाजार में खाद्य तेलों के दामों में तेजी का रूख बना हुआ था। इस कारण आमजन की रसोई का बजट गड़बड़ा रहा था। अमेरिका की ओर से हाल ही में भारत पर उच्च टैरिफ लगाया गया है। इससे कृषि उत्पादों के व्यापार में रुकावट आ गई है और सोयाबीन सहित अन्य खाद्य पदार्थों का निर्यात ठप हो गया है। इस कारण घरेलू बाजार में रिफाइंड सहित अन्य तेलों के दामों में गिरावट आ गई है। किराना व्यापारियों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में ही खाद्य तेलों की कीमतों में 40 से 50 रुपए प्रति टीन की कमी आई है। इससे फिलहाल आमजन को राहत मिली है।  </p>
<p><strong>टैरिफ वॉर से ऐसे मिली राहत</strong><br />जानकारी के अनुसार अभी अमेरिका से भारत आने वाली वस्तुओं पर औसतन 7.7 प्रतिशत शुल्क लगता है, जबकि भारत से अमेरिका जाने वाली वस्तुओं पर केवल 2.8 प्रतिशत यानी दोनों के बीच 4.9 प्रतिशत का अंतर है। यही वजह है कि इन दिनों सोयाबीन सहित अन्य खाद्य पदार्थो का निर्यात प्रभावित हो गया है। इसके अलावा चीन द्वारा अमेरिकी सोयाबीन आयात पर टैरिफ बढ़ाए जाने के कारण भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट आ गई। इसका असर घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ा है और यहां पर भावों में कमी हुई है। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने तेल कंपनियों से पत्र लिखकर कहा था कि वो खाने के तेल के दाम इंटरनेशनल रेट के हिसाब से घटाएं। इसके बाद विभिन्न तेल ब्रांडो की कंपनियों ने भी कीमतों में कमी कर दी है। व्यापारियों के अनुसार वैश्विक बाजार में बदलाव के चलते अप्रैल-जून तिमाही में खाद्य तेल की कीमतों में और कमी आने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>खाद्य तेल</strong><br />फॉर्च्यून                 2310<br />चंबल                    2280<br />सदाबहार               2180<br />एलेक्सा                 2070<br />दीपज्योति              2200 <br />सरसों स्वास्तिक      2380<br />तेल अलसी              2270 <br />मूंगफली ट्रक           2820<br />स्वास्तिक निवाई      2440<br />कोटा स्वास्तिक        2420<br />सोना सिक्का            2710  <br />(भाव 15 किलो प्रति टिन)</p>
<p><strong>एक साल से लगातार बढ़ रहे थे दाम</strong><br />किराना व्यापारी गौरव अग्रवाल ने बताया कि पिछले एक साल से खाद्य तेलों के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। इस साल जिले में भले ही सरसों का बंपर उत्पादन हुआ हो, लेकिन सरसों के तेल के दाम फिर भी कम नहीं हो रहे थे। पिछले एक साल से तो सरसों तेल के दाम थमने का नाम नहीं ले रहे थें। एक साल पहले सरसों के तेल की कीमत 100 से 110 रुपए प्रति लीटर थी, जो इस साल 150 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गए थे। अब ट्रंप टैरिफ वॉर के चलते अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल मची हुई है।  अमेरिका में निर्यात प्रभावित होने से अब खाद्य तेलों की खपत घरेलू बाजार में होने लगी है। इस कारण खाद्य तेलों के भावों में गिरावट आई है। पिछले कुछ माह से खाद्य तेलों के दामों में तेजी होने के कारण रसोई का बजट बिगाड़ रखा था। सरसों की फसल बाजार में आने के बाद भी तेलों के दाम कम होने के बजाय बढ़ रहे थे। अब कीमत कम होने से राहत मिली है।<br /><strong>- सावित्री शर्मा, गृहिणी </strong></p>
<p>पिछले काफी समय से सरसों व रिफाइंड तेलों के दाम बढ़ने से सब्जियों में तड़का लगाना मुश्किल होता जा रहा था। तेलों के अन्य खाद्य पदार्थ के दाम भी तेज हो रहे थे। अब कीमत होने से सब्जियों का स्वाद बढ़ जाएगा। <br /><strong>- रोशनी सिंह, गृहिणी </strong></p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट आ गई। इसका असर घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ा है और यहां पर भावों में कमी हुई है। केंद्र सरकार ने भी तेल कंपनियों को दाम घटाने के लिए कहा था।<br /><strong>- दीपक दलाल, खाद्य तेलों के थोक विक्रेता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Apr 2025 16:28:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भीषण गर्मी से सब्जियों के भाव आसमान पर पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[मुहाना मंडी, जनता मार्केट मंडी और रिटेल मार्केट में सब्जियों के भावों में बहुत बड़ा अंतर है। मंडियों में बिकने वाली सब्जियों के भाव रिटेल में डबल से ऊपर बिक रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/prices-of-vegetables-skyrocketed-due-to-extreme-heat/article-82678"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/uu11rer-(15)9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भीषण गर्मी के कारण जयपुर के बाजार में सब्जियों के भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची। टिंडा 160 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। आलू, प्याज और टमाटर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे। आलू प्याज और टमाटर 40 से 60 रुपए प्रति किलो बिक रहे हैं। आधिकांश सब्जियों सौ रुपए प्रति किलो से ऊपर बिक रही है। मंडियों में आवक बहुत धीमी चल रही है। मुहाना मंडी, जनता मार्केट मंडी और रिटेल मार्केट में सब्जियों के भावों में बहुत बड़ा अंतर है। मंडियों में बिकने वाली सब्जियों के भाव रिटेल में डबल से ऊपर बिक रही है।</p>
<p><strong>रिटेल भाव</strong><br />आलू 40 से 50 रुपए <br />प्याज 35 से 50 रुपए <br />टिंडा 100 से 160 रुपए <br />टमाटर 40 से 60 रुपए</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Jun 2024 18:04:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेब महंगाई से लाल, अनार के दाम में भी उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[देश के सबसे बड़े सेब उत्पादक राज्य हिमाचल प्रदेश और कश्मीर में इस बार बारिश और बर्फबारी के कारण सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/apple-red-due-to-inflation--price-of-pomegranate-also-increased/article-54948"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/seb-mehngayi-s-laal,-anaar-k-daam-me-bhi-uchaal...kota-news-photo-19-08-2023-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बारिश की मार सिर्फ टमाटर और हरी सब्जियों पर ही नहीं पड़ी है, बल्कि सेब उत्पादक किसानों को भी भारी नुकसान हुआ है। हिमाचल प्रदेश में बारिश की वजह से 30 प्रतिशत से अधिक सेब की फसल बर्बाद हो गई है। इस कारण कोटा जिले में सेब के दाम में भारी उछाल आ गया है। शहर की प्रमुख मंडी में सेब के दाम 100 से 140 रुपए प्रति किलो पहुंच गए हैं। वहीं अनार के दाम में भी तेजी बनी हुई है। इसके दाम भी 140 रुपए किलो हो गए हैं।</p>
<p><strong>फल व सब्जी के दाम</strong><br />सेब    100-140<br />अनार    80-140<br />केला    30-40<br />टमाटर    60-70 <br />भिंडी    40-60<br />अदरक    130-140 <br />बैंगन    40-60<br />मिर्च     40-60<br />फूल गोभ    60-80<br />टिंडा    40-60<br />अरबी    40-60<br />मूली    50-60<br />(भाव रुपए प्रति किलो)</p>
<p><strong>सेब की आपूर्ति प्रभावित</strong><br />देश के सबसे बड़े सेब उत्पादक राज्य हिमाचल प्रदेश और कश्मीर में इस बार बारिश और बर्फबारी के कारण सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। इस कारण उत्पादन में कमी आने से बाजार में सेब की आपूर्ति पर प्रभाव पड़ा है। जिससे सेब की कीमतें में भारी उछाल आया है। इससे आमजन को महंगे सेब खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। स्थानीय फल व्यापारियों ने बताया कि कोटा में सेब की सबसे ज्यादा आवक हिमाचल प्रदेश से होती है। गत दिनों वहां हुई भारी बारिश के कारण सेब के बाग नष्ट हो गए हैं। जिससे  कोटा में सेब की आवक कम होने लगी है। इस कारण दाम में तेजी आई है। </p>
<p><strong>मंडी में तेजी से बढ़े दाम</strong><br />धानमंडी स्थित फल व्यापारी अशोक कुमार ने बताया कि मंडी में कुछ दिन पहले सेब 70 से 90 रुपए किलो बिक रहा था। पूर्व में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से सेब आ रहा था। इस कारण सेब के दाम स्थिर थे। कुछ दिनों पहले हिमाचल प्रदेश में बारिश से सेब की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इस कारण वहां से सेब की आवक बंद हो गई है। इस समय केवल उत्तराखंड से सेब आ रहा है। इसलिए सेब के दाम 100 से 140 रुपए प्रति किलो पहुंच गए हैं। इसके साथ अनार के दाम में भी उछाल बना हुआ है। फल मंडी में अच्छी किस्म का अनार 90 से 140 रुपए किलो के बीच मिल रहा है।</p>
<p><strong>इधर किचन में होने लगी टमाटर की एंट्री</strong><br />इधर स्थानीय सब्जीमंडी में टमाटर के दामों में निरन्तर गिरावट हो रही है। कोटा शहर में जो टमाटर 200 रुपए प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया था उसके दाम शुक्रवार को थोक फल सब्जी मण्डी में 60 से 70 रुपए प्रतिकिलो पर आ गए। भावों में आई नरमी से अब मंडी में हर सब्जी की दुकान में टमाटर दिखाई देने लगा है।  बारिश के चलते टमाटर की फसल को खासा नुकसान पहुंचने से मार्केट में कमी हो गई थी और दाम चार गुना महंगे हो गए थे।अब टमाटर के दामों में गिरावट हो रही है। मंडी में टमाटर के प्रमुख व्यापारी शब्बीर वारसी ने बताया कि एक सप्ताह पहले टमाटर की आवक 1300 से 1500 कैरेट प्रतिदिन हो रही थी। वहीं अब बैंगलुरु व शिमला से करीब 2000 कैरेट टमाटर की आवक हो रही है। आवक बढ़ऩे से दाम कम हुए हैं। </p>
<p><strong>चाय में आया अदरक का स्वाद </strong><br />महंगाई के दौर में अदरक ने भी चाय से दूरी बना ली थी। अदरक के दाम 250 रुपए प्रतिकिलो पर पहुंच गए थे। जिससे चाय से अदरक का स्वाद चला गया था। घर से लेकर चाय की दुकान तक अदरक दूर हो गई थी। लेकिन अब महंगाई कम हुई तो स्वाद वापस दिखने लगा है। शुक्रवार को मंडी में अदरक 140 रुपए प्रति किलो बिक रहा था। हालांकि अभी भी ग्राहक ज्यादा अदरक नहीं ले रहे हैं। कोटा की मंडी में इन दिनों जयपुर व दिल्ली से नई अदरक की आवक शुरू हो गई है। इसके कारण अदरक के भाव में कमी आई है।</p>
<p>पहले टमाटर महंगा होने के कारण घर की रसोई से टमाटर का स्वाद गायब हो गया था। अब सेब के दाम में तेजी आने लगी है। हर माह कोई न कोई सब्जी या फल में तेजी आती रहती है। खाने की चीजों में अब लगातार महंगाई होती जा रही है। <br /><strong>- उमा तोमर, गृहिणी</strong></p>
<p>पिछले एक महीने से घर की रसोई से टमाटर और अदरक का स्वाद ही फीका हो गया था, लेकिन अब इनके दाम में कमी आई है। अब सेब व अनार के दाम बढ़ने लगे हैं। फिलहाल सेब व अनार खरीदने से दूरी बना रखी है।<br /><strong>- पारुल वर्मा, गृहिणी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Aug 2023 15:37:35 +0530</pubDate>
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                <title>जीरे की कीमतों में भारी उछाल, 50 हजार तक पहुंची कीमत</title>
                                    <description><![CDATA[जीरे की कीमतों में इजाफा साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। देश की सबसे बड़ी जीरा मंडी ऊंझा में जीरा 45 हजार रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/huge-jump-in-the-prices-of-cumin-the-price-reached/article-42486"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/yy.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पहली बार जीरे का भाव 50 हजार रुपए का प्रति क्विंटल पहुंच गया है। नागौर की मेड़ता मंडी में जीरा 50 हजार रुपए प्रति क्विंटल बिका। मंडी में जीरे ने पहली बार 9 हजार रुपए प्रति क्विंटल की उछाल दर्ज की। बेमौसम बारिश की वजह से बहुत सी फसलें प्रभावित हुई हैं। जिसका असर जीरे पर भी देखने को मिल रहा है। जीरे की कीमतों में इजाफा साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। देश की सबसे बड़ी जीरा मंडी ऊंझा में जीरा 45 हजार रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गया है। </p>
<p>जीरे के उत्पादन में कमी के साथ साथ बाजार में इसकी मांग भी बढ़ी है। वैश्विक बाजार में बढ़ रही इसकी मांग के कारण भी इसकी कीमत में तेजी देखी जा रही है। भारत विश्व में जीरा उत्पादन में पहले नंबर पर है, जिसके कारण इसलिए भारत में होने वाले उत्पादन का असर पूरे विश्व में देखा जा रहा है। गुजरात और राजस्थान जीरे के सबसे बड़े उत्पादक है, और यहां की कीमतों में ही भारी उछाल देखने को मिल रहा है। गुजरात के ऊंझा मंडी में जीरे की न्यूनतम कीमत 35 हजार रुपए प्रति क्विंटल देखी गई। </p>
<p>व्यापारियों के अनुसार पिछले 2018 तक जीरे का भाव 12-13 हजार रुपए प्रति क्विंटल ही देखने को मिलता था, लेकिन पिछले 3- 4 सालों में इसकी कीमतों में शानदार बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। पिछले साल जीरे की अधिकत्तम कीमत 37 हजार प्रति क्विंटल थी। वहीं इस साल इसकी कीमत 50 हजार रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गई है। </p>
<p>उनका मानना है कि पहले किसानों को उनके जीरे की कीमत नहीं मिलती थी, जबकि उपभोक्ता इसे महगें दामों पर ही खरीदता था। अब किसानों को सही कीमत मिलनी भी शुरु हुई है। बड़ी कंपनियां कई हजार टन जीरे की सीधी खरीद किसानों से कर रही है, जिसका लाभ किसानों को मिल रहा है। वहीं कीमत बढ़ने का कारण जीरे की बुआई में कमी आना और ओलावृष्टि से फसलों का नष्ट होना भी है। </p>
<p>व्यापारियों के का कहना है कि अभी कुछ समय तक जीरे की कीमत 40 से 45 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक स्थिर रहेगी। इस साल जीरे की बेंचमार्क कीमत को भी 32 हजार के आसपास तक रहने की रहने की संभावना है, जबकि पिछले साल बेंचमार्क कीमत 25 हजार  रुपए प्रति क्विंटल तक रही थी। पिछले साल कुल 3.88 लाख टन जीरा उत्पादन देश में हुआ था। जीरे की गुणवत्ता में भी पहले से सुधार देखने को मिल रहा है, जिसके कारण न सिर्फ कंपनिया सीधे खरीद कर रही हैं बल्कि विदेशों में भी बड़े पैमाने पर इसकी मांग बढ़ रही है। </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Apr 2023 15:41:04 +0530</pubDate>
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