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                <title>  donald trump - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>  donald trump RSS Feed</description>
                
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                <title>ट्रम्प ने की ईरान में सैन्य अभियान शुरू होने की पुष्टि : हमारा उद्देश्य उत्पन्न खतरों को खत्म कर अमेरिकी लोगों की रक्षा करना, कहा- 47 वर्षों से अमेरिका की मौत के लगा रहा नारे</title>
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                        <![CDATA[डोनाल्ड ट्रम्प ने पुष्टि की कि ईरान में सैन्य अभियान शुरू किया गया। उद्देश्य ईरानी शासन द्वारा उत्पन्न खतरों को खत्म कर अमेरिकी लोगों, सैनिकों और सहयोगियों की सुरक्षा करना है। ट्रम्प ने ईरान पर अमेरिका विरोधी नारे और रक्तपात का आरोप लगाया।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trump-confirmed-the-start-of-military-operation-in-iran-our/article-144947"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/trump-big-disi.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान में एक सैन्य अभियान शुरू किया गया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए एक वीडियो में कहा कि हमारा उद्देश्य ईरानी शासन, जो कि बहुत कठोर और भयानक लोगों का एक शातिर समूह है, से उत्पन्न आसन्न खतरों को खत्म कर के अमेरिकी लोगों की रक्षा करना है। उन्होंने संदेश में कहा कि इसकी खतरनाक गतिविधियां सीधे तौर पर अमेरिका, हमारे सैनिकों, हमारे विदेशी ठिकानों और दुनिया भर में हमारे सहयोगियों को खतरे में डालती हैं।</p>
<p>ट्रम्प ने कहा कि 47 वर्षों से, ईरानी शासन अमेरिका की मौत के नारे लगा रहा है और रक्तपात एवं सामूहिक हत्याओं का एक अंतहीन अभियान चला रहा है, जिसमें अमेरिका, हमारे सैनिकों और कई, कई देशों के निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 14:45:44 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने क्यूबा को तेल निर्यात करने वाले देशों पर लगाया अतिरिक्त आयात शुल्क : ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर किए हस्ताक्षर, कहा- राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह अतिआवश्यक</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को तेल निर्यात करने वाले देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का आदेश दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकारों के उल्लंघन का हवाला देते हुए अमेरिका ने क्यूबा के खिलाफ आपात घोषणा की। क्यूबा ने इसे क्रूर कदम बताया और अमेरिका पर अन्य देशों को प्रतिबंध में शामिल करने का आरोप लगाया।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-imposed-additional-import-duty-on-countries-exporting-oil-to/article-141342"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/trump.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा पर अतिरिक्त दबाव डालने के उद्देश्य से इस द्वीपीय देश को तेल निर्यात करने वाले देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अतिआवश्यक कदम बताते हुए यह कदम उठाया है, जिसके तहत उन सभी देशों से अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जाएगा, जो क्यूबा को तेल की आपूर्ति करते हैं। इस आदेश के पीछे तर्क दिया गया है कि क्यूबा अमेरिका के प्रति शत्रुता का रुख रखने वाले रूस, चीन और ईरान जैसे देशों से संबंध रखता है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त तर्क दिया गया है कि क्यूबा सरकार आधारभूत मानवाधिकारों की अवहेलना करती है। इन सभी आरोपों के आधार पर अमेरिका ने क्यूबा के खिलाफ राष्ट्रीय आपात की घोषणा कर दी है और इसके सहयोगी देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। दूसरी ओर, क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश की निंदा करते हुए इसे क्यूबा और उसके लोगों के खिलाफ एक क्रूर कृत्य बताया। उन्होंने कहा कि वहां के लोगों पर अब अत्यंत कठिन परिस्थितियों में रहने का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह दूसरे देशों को क्यूबा के खिलाफ अपनी नाकाबंदी नीति में शामिल होने के लिए मजबूर कर रहा है।</p>
<p>क्यूबा के उप विदेश मंत्री कार्लोस एफडी कोसियो ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि अमेरिका दशकों के आर्थिक युद्ध की विफलता के बाद क्यूबा की नाकाबंदी को और सख्त कर रहा है और संप्रभु राष्ट्रों को इस प्रतिबंध में शामिल होने के लिए मजबूर कर रहा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह आदेश मेक्सिको पर महत्वपूर्ण दबाव बनाएगा, क्योंकि अमेरिका के इस पड़ोसी ने लगातार क्यूबा के साथ एकजुटता दिखाई है और क्यूबा को तेल का निर्यात भी सबसे अधिक यहीं करता है।</p>
<p> </p>]]>
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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 15:49:59 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, ट्रंप ने कहा- अमेरिका का एक और सैन्य बेड़ा ‘बड़ी खूबसूरती से’ ईरान की ओर बढ़ रहा </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर एक और सैन्य बेड़ा भेजने का दावा करते हुए दबाव और बातचीत की दोहरी रणनीति के संकेत दिए। अमेरिका ने शर्तों पर वार्ता की पेशकश की है। क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक तैनाती बढ़ी है, जबकि ईरान ने किसी भी हमले का कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-iran-tension-increased-trump-said-another-american-military-fleet/article-141067"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने सख्त रुख की ओर लौटते हुए कहा है कि एक और सैन्य बेड़ा ‘अरमाडा’ ईरान की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने अमेरिका के आयोवा राज्य के क्लाइव में एक चुनाव-प्रचार जैसे आयोजन में कहा- वैसे इस समय एक और अरमाडा बड़ी खूबसूरती से तैरते हुए ईरान की ओर बढ़ रहा है। हम देखेंगे। उम्मीद है कि वे हमसे समझौता कर लें। उन्हें हमसे पहले ही समझौता कर लेना चाहिए था। कम से कम उनके पास देश तो बचेगा।</p>
<p>ट्रंप के बयान से अमेरिका की सैन्य दबाव के साथ कूटनीति की संभावना वाली दोहरी रणनीति झलकी है। इसी क्रम में ‘एक्सियोस’ को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि ईरान के साथ स्थिति परिवर्तनशील है और बड़े अमेरिकी सैन्य बेड़ों को क्षेत्र के और करीब तैनात किया गया है। उन्होंने दावा किया कि ईरानी अधिकारी कई बार बातचीत की इच्छा जता चुके हैं।</p>
<p>इसके बाद एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की कि यदि ईरान तय शर्तों के तहत संपर्क करता है, तो अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है। इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने शर्तें बताईं, जिनमें यूरेनियम संवर्धन पर रोक, संवर्धित यूरेनियम हटाना, लंबी दूरी की मिसाइल कार्यक्रम पर सीमाएं और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों के समर्थन का अंत शामिल है। ईरान ने इन शर्तों को सिरे से खारिज किया है, हालांकि बातचीत की इच्छा भी जताई है। ट्रंप ने जून में किए गए अमेरिकी हमलों का भी जिक्र करते हुए दावा किया कि तीन प्रमुख ठिकानों पर वार कर ईरान की परमाणु क्षमताओं को नष्ट कर दिया गया, हालांकि वास्तविक नुकसान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।</p>
<p>इस बीच, अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के नेतृत्व वाला स्ट्राइक ग्रुप हिंद महासागर में तैनात किया गया है, जिससे वह अमेरिकी केंद्रीय कमान के परिचालन क्षेत्र और ईरान के संभावित लक्ष्य क्षेत्रों के और करीब आ गया है। ईरान के भीतर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक वरिष्ठ मौलवी ने शुक्रवार की नमाज के दौरान अमेरिका को किसी भी हमले से चेताया।</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान किसी भी अमेरिकी आक्रामकता का जवाब देने के लिए बखूबी सक्षम है और उसकी सशस्त्र सेनाएं घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए हैं। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने जून में इजरायल के साथ हुए संघर्ष के बाद मिसाइल क्षमताओं में उल्लेखनीय सुधार का भी दावा किया है।</p>
<p>ईरानी सैन्य अधिकारियों ने यह भी दावा किया है कि जून में इजरायल के साथ 12 दिन की लड़ाई के बाद से मिसाइल क्षमताओं में काफी सुधार हुआ है। इस लड़ाई के दौरान, इजरायल द्वारा ईरानी सैन्य और परमाणु ठिकानों पर अचानक हमले करने के बाद ईरान ने इजरायली ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए थे। बाद में अमेरिका भी इस लड़ाई में शामिल हो गया और उसने ईरान के अहम परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था।</p>
<p>ईरान के खातम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय के कमांडर मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने चेतावनी दी कि किसी भी हमले की स्थिति में अमेरिका के सभी हित, ठिकाने और प्रभाव के केंद्र तुरंत वैध निशाने बन जाएंगे। ईरानी अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगियों पर भी हमला किया जा सकता है। इसी चिंता के कारण खाड़ी के अरब देशों ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई न करने का अनुरोध किया है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]>
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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 14:39:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिकी टैरिफ धमकी के खिलाफ यूरोपीय संघ में एकजुटता, जवाबी कार्रवाई की तैयारी शुरु</title>
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                        <![CDATA[यूरोपीय संघ के राजनयिकों ने कहा कि ट्रम्प के प्रस्तावित टैरिफ रोकने को लेकर सदस्य देशों में सहमति बनी है और जवाबी कार्रवाई की तैयारी है। ट्रम्प ने 1 फरवरी से कई यूरोपीय देशों पर टैरिफ की चेतावनी दी है। इसे यूरोप ने ब्लैकमेल बताया। ब्रुसेल्स में आपात शिखर सम्मेलन में 93 अरब यूरो के टैरिफ पैकेज पर विचार होगा।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/preparations-begin-for-eu-solidarity-response-to-us-tariff-threat/article-140037"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(2)29.png" alt=""></a><br /><p>बेल्जियम। यूरोपीय संघ के राजनयिकों ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित टैरिफ वृद्धि को रोकने के लिए प्रयास तेज करने पर सदस्य देशों में व्यापक सहमति बनी है। साथ ही, यदि अमेरिका टैरिफ लागू करता है तो जवाबी कार्रवाई की भी तैयारी की जा रही है। ट्रम्प ने घोषणा की थी कि 1 फरवरी से यूरोपीय संघ के सदस्य देश डेनमार्क, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड और फिनलैंड के साथ-साथ ब्रिटेन और नॉर्वे पर भारी टैरिफ लगाए जाएंगे, जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं दी जाती। इस बयान को प्रमुख यूरोपीय देशों ने ब्लैकमेल करार दिया है।</p>
<p>यूरोपीय संघ के नेता गुरुवार को ब्रुसेल्स में एक आपातकालीन शिखर सम्मेलन में स्थिति पर विचार करेंगे। प्रस्तावित विकल्पों में अमेरिका से आयात होने वाले 93 अरब यूरो के उत्पादों पर टैरिफ पैकेज शामिल है, जिसे छह महीने के निलंबन के बाद 6 फरवरी से स्वतः लागू किया जा सकता है।</p>
<p> </p>]]>
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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 10:25:41 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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            <item>
                <title>गाजा संघर्ष को खत्म करने की जुगत : भारत को बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने के लिए ट्रंप का निमंत्रण, मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण के कदमों पर करेंगे विचार</title>
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                        <![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति के लिए बनाए जा रहे बोर्ड ऑफ पीस में भारत को शामिल होने का निमंत्रण दिया है। यह पहल ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी है। बोर्ड गाजा में शांति, पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता की निगरानी करेगा। भारत की वैश्विक साख के चलते यह प्रस्ताव अहम माना जा रहा है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/efforts-to-end-gaza-conflict-trumps-invitation-to-india-to/article-140032"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/trump.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा में शांति बहाली के लिए बनाए जा रहे बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने का निमंत्रण दिया है। यह बोर्ड गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने और शांति प्रकिया को आगे बढ़ाने के लिए बनाया जा रहा है। साथ ही यह पहल गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी है। अमेरिका इस योजना के दूसरे चरण को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>भारत की वैश्विक साख को सम्मान :</strong></p>
<p>भारत को यह न्योता उसकी वैश्विक साख, संतुलित विदेश नीति और शांति प्रयासों में भूमिका को देखते हुए दिया गया है। माना जा रहा है कि इस बोर्ड में शामिल देश गाजा की स्थिति पर नजर रखेंगे, मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण और संघर्ष रोकने से जुड़े कदमों पर विचार करेंगे। हालांकि, इस प्रस्ताव पर भारत की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिकिया नहीं आई है। ऐसे में यदि भारत इस पहल में शामिल होता है, तो यह पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया में उसकी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।</p>
<p><strong>क्या है बोर्ड ऑफ पीस ?</strong></p>
<p>व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बोर्ड ऑफ पीस के सदस्यों की सूची जारी की। यह बोर्ड गाजा में शांतिए स्थिरताए पुनर्निर्माण और लंबे समय तक विकास की निगरानी करेगा। इस बोर्ड के चेयरमैन खुद डोनाल्ड ट्रंप होंगे। व्हाइट हाउस के अनुसारए बोर्ड में कई बड़े और प्रभावशाली नाम शामिल हैं, जिनमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, इसके अलावा, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान और कतर के राजनयिक अली अल थवाड़ी को भी गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड में शामिल किया गया है।</p>
<p><strong>इजराइल पीस बोर्ड से नाराज :</strong></p>
<p>नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है। जानकारी के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फियद को शामिल करने से है। तुर्किए को हमास का समर्थक माना जाता है और इजराइल के साथ इसका संबंध तनावपूर्ण हैं। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>पाक को भी न्योता :</strong></p>
<p>पाकिस्तान ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ  को राष्ट्रपति ट्रम्प ने गाजा के लिए बनाए गए बोर्ड ऑफ  पीस में शामिल होने का न्योता दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया से बातचीत में पुष्टि की कि पाकिस्तान को औपचारिक रूप से यह निमंत्रण मिला है। ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान गाजा में शांति और सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में हिस्सा लेता रहेगा और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के मुताबिक फिलिस्तीन मुद्दे का स्थायी समाधान चाहता है।</p>
<p><strong>परमानेंट सदस्यता पाने के लिए देशों को एक अरब डॉलर देने होंगे :</strong></p>
<p>ट्रम्प की प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस में सदस्यता को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। ब्लूमबर्ग न्यूज ने रिपोर्ट किया कि बोर्ड के ड्राफ्ट चार्टर में कहा गया है कि देशों को परमानेंट सदस्यता पाने के लिए पहले साल में 1 बिलियन (एक अरब डॉलर) की फीस देनी होगी। ट्रम्प तय करेंगे कि किस देश को सदस्य बनने का निमंत्रण मिलेगा। सामान्य सदस्यता 3 साल की होगी, जिसे बाद में रिन्यू किया जा सकता है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 09:49:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ट्रम्प ने खुद को बताया वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति : ट्रुथ सोशल पर पोस्ट की तस्वीर, जानें पूरा मामला </title>
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                        <![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर खुद को “वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति” बताते हुए तस्वीर पोस्ट की। यह पोस्ट 11 जनवरी, 2026 की है। इससे पहले 3 जनवरी को अमेरिका ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर देश से बाहर भेजा। ट्रम्प ने कहा कि सुरक्षित सत्ता हस्तांतरण तक अमेरिका अस्थायी रूप से कराकस का संचालन करेगा और तेल भंडार का उपयोग करेगा।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trump-called-himself-acting-president-of-venezuela-posted-picture-on/article-139236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "ट्रुथ सोशल" पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें उन्हें "वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति" के रूप में दिखाया गया है। यह तस्वीर 11 जनवरी, 2026 को पोस्ट की गई थी, जिसमें ट्रम्प को 45वें और 47वें अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में दर्शाया गया, साथ ही उन्हें जनवरी 2026 से वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में भी दिखाया गया।</p>
<p>यह घटना 3 जनवरी, 2026 को हुई, जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया और उन्हें देश से बाहर ले गया। ट्रम्प ने इस कार्रवाई के कुछ घंटे बाद कहा कि उनकी सरकार अस्थायी रूप से कराकस का संचालन करेगी और वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार का उपयोग अन्य देशों को तेल बेचने के लिए करेगी, जबकि एक सुरक्षित सत्ता हस्तांतरण तक वह शासन करेंगे।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 11:00:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पैसा लो अपना देश दो : डेनमार्क को हड़पने की नई चाल, ट्रंप का हर नागरिक को 90 लाख रुपए का ऑफर</title>
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                        <![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए विचार कर रहे हैं, जिसके तहत ग्रीनलैंडवासियों को प्रति व्यक्ति 10,000 से 1,00,000 डॉलर तक का भुगतान किया जा सकता है। इस प्रस्ताव पर व्हाइट हाउस में चर्चा हो रही है, लेकिन यूरोपीय देशों ने इसका विरोध किया है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने इसे अस्वीकार किया है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/take-the-money-give-your-country-trumps-new-trick-to/article-139034"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। वेनेजुएला के बाद अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर है। ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंडवासियों को डेनमार्क से अलग कर संयुक्त राज्य अमेरिका के करीब आने के लिए राजी करने के प्रयास को लेकर विचार कर रहे हैं। इसके लिए ग्रीनलैंड के निवासियों को प्रति व्यक्ति मोटी रकम देने के बारे में आंतरिक रूप से चर्चा चल रही है। दरअसल, समाचार एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि व्हाइट हाउस के अधिकारी ग्रीनलैंड के हर व्यक्ति को 10,000 से 1,00,000 डॉलर ( 90 लाख भारतीय रुपए) तक का एकमुश्त भुगतान देने पर बात कर रहे हैं। हालांकि, यह पैसे कब और कैसे दिए जाएंगे, यह विचार अभी प्रारंभिक चरण में है और इसके विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं।</p>
<p><strong>कब्जा नहीं, खरीदना चाहते ?</strong></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति का ग्रीनलेंड को खरीदने का ये आइडिया नया नहीं है, लेकिन हाल में इस पर ज्यादा गंभीरता से बात हो रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अपने देश के सांसदों से कहा है कि प्रेसिडेंट ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं करना चाहते बल्कि उसे खरीदना चाहते हैं। हालांकि, ट्रंप के इस कदम का यूरोपीय देश विरोध कर रहे हैं। यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच स्थित ग्रीनलैंड द्वीप विश्व का सबसे बड़ा द्वीप है। जो लगभग 2,166,086 वर्ग किलोमीटर (836,330 वर्ग मील) के क्षेत्र में फैला हुआ है। यह द्वीप राष्ट्र वर्तमान में डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, जिसकी आबादी लगभग 57,000 है और यहाँ प्रचुर मात्रा में उपयोगी प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। बताते चले कि डेनमार्क और संयुक्त राज्य अमेरिका नाटो के सहयोगी हैं, ग्रीनलैंड को लेकर वाशिंगटन के हालिया बयानों की कड़ी आलोचना हुई है। मंगलवार को फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने एक संयुक्त घोषणा जारी कर कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य के बारे में निर्णय पूरी तरह से ग्रीनलैंड और डेनमार्क पर निर्भर करता है और अमेरिकी हस्तक्षेप का अर्थ इसके विपरीत होगा।</p>
<p><strong>बहुत हो गया...</strong></p>
<p>ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा द्वीप के अधिग्रहण का मुद्दा उठाए जाने के बाद प्रतिक्रिया दी। बहुत हो गया... अब विलय के बारे में कोई कल्पना नहीं चलेगी।</p>
<p><strong>व्हाइट हाउस कर रहा विचार :</strong></p>
<p>व्हाइट हाउस ने भी ग्रीनलैंड के खरीद पहलू पर अपनी राय रखी। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम संभावित खरीद के स्वरूप पर विचार कर रही है। वहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पुष्टि की कि वे अगले सप्ताह वाशिंगटन में अपने डेनिश समकक्ष से ग्रीनलैंड और उसके भविष्य पर चर्चा करने के लिए मिलेंगे।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 11:00:51 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप की धमकी पर ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई के करीबी का पलटवार, कहा- अपने सैनिकों की सलामती चाहिए तो ईरान में दखल नहीं दे अमेरिका</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सुप्रीम लीडर खामेनेई के सलाहकार अली लारिजानी ने कहा कि ईरान में आंदोलनों के पीछे अमेरिका है। उन्होंने चेताया कि अमेरिकी हस्तक्षेप से पूरा क्षेत्र अस्थिर होगा और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचेगा।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/a-close-aide-of-iranian-supreme-leader-khamenei-retaliated-on/article-138195"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान का खामेनेई शासन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी से बौखला गया है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी सलाहकार ने आरोप लगाया कि ईरान में चल रहे आंदोलन के पीछे अमेरिका का हाथ है। उन्होंने ट्रंप की धमकी पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर अमेरिका को अपने सैनिकों की सुरक्षा की परवाह है तो वो ईरान में दखल नहीं देगा। ट्रंप ने शुक्रवार को ट्रूथ सोशल पर ईरान को चेतावनी देते हुए लिखा, अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। अगर प्रदर्शनकारियों को गोली मारी गई और उनकी हत्या की गई, तो अमेरिका पूरी तरह तैयार है।</p>
<p><strong>अमेरिका का हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगा : </strong></p>
<p>ट्रंप की इस धमकी पर पलटवार करते हुए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली लारिजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, इजरायली अधिकारियों और डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से यह साफ है कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा था। हम वास्तव में प्रदर्शन कर रहे लोगों और तोड़फोड़ करने वाले तत्वों के बीच स्पष्ट अंतर करते हैं। ट्रंप को यह समझना चाहिए कि इस घरेलू मामले में अमेरिका का हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगा और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने धमकी के अंदाज में आगे लिखा, अमेरिकी जनता को यह जानना चाहिए।</p>
<p>ट्रंप की इस धमकी पर पलटवार करते हुए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली लारिजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, इजरायली अधिकारियों और डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से यह साफ है कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा था। हम वास्तव में प्रदर्शन कर रहे लोगों और तोड़फोड़ करने वाले तत्वों के बीच स्पष्ट अंतर करते हैं। ट्रंप को यह समझना चाहिए कि इस घरेलू मामले में अमेरिका का हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगा और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने धमकी के अंदाज में आगे लिखा, अमेरिकी जनता को यह जानना चाहिए।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 11:09:54 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप ने तेल टैंकरों की पूर्ण नाकेबंदी का दिया आदेश, कहा- वेनेजुएला अब तक के सबसे बड़े सैन्य बेड़े से घिरा </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में आने-जाने वाले सभी प्रतिबंधित तेल टैंकरों की पूर्ण नाकेबंदी का आदेश दिया है। उन्होंने मादुरो सरकार पर नशीली दवाओं की तस्करी और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। इस कदम से वेनेजुएला के तेल निर्यात और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trump-ordered-a-complete-blockade-of-oil-tankers-and-said/article-136258"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/donlad-trump-3.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में आने-जाने वाले सभी प्रतिबंधित तेल टैंकरों की पूर्ण नाकेबंदी का आदेश दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह आदेश वेनेजुएला और निकोलस मादुरो सरकार पर और दबाव बढ़ाने की कोशिशों का परिणाम है। ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला अब तक के सबसे बड़े सैन्य बेड़े से घिरा हुआ है। यह नाकेबंदी मुख्य रूप से वेनेजुएला के प्राथमिक राजस्व स्रोत को निशाना बना रही है।</p>
<p>ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में पूर्ण और संपूर्ण नाकेबंदी शब्दों पर जोर देते हुए संकेत दिया कि सैन्य तैनाती को और भी बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि वेनेजुएला अपनी जमीन, तेल और अमेरिका को सौंप दे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि अमेरिका के सैन्य अभियान का उद्देश्य नशीली दवाओं के व्यापार को रोकने से कहीं अधिक है।</p>
<p>ट्रंप प्रशासन ने बार-बार वेनेजुएला पर नशीली दवाओं की तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया है। सितंबर के बाद से फेंटानिल और अन्य अवैध दवाएं ले जाने के आरोपी जहाजों पर अमेरिकी सैन्य हमलों में कथित तौर पर कम से कम 90 लोग मारे गए हैं।</p>
<p>हाल के महीनों में अमेरिका ने क्षेत्र में अतिरिक्त युद्धपोत भी तैनात किए हैं, जो बढ़ती सैन्य उपस्थिति का संकेत देते हैं। दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार वाले वेनेजुएला ने अमेरिका पर उसके प्राकृतिक संसाधनों को जब्त करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है।</p>
<p>ट्रंप ने कहा- वेनेजुएला पूरी तरह से दक्षिण अमेरिका के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े नौसैनिक बेड़े से घिरा हुआ है। यह और बड़ा होता जाएगा और उन्हें लगने वाला झटका ऐसा होगा जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा होगा। जब तक कि वे अमेरिका को वह सारा तेल, जमीन और अन्य संपत्तियां वापस नहीं कर देते जो उन्होंने पहले हमसे चुराई थीं।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा- अवैध मादुरो शासन इन चोरी किए गए तेल क्षेत्रों के तेल का उपयोग खुद को वित्तपोषित करने, आतंकवाद', मानव तस्करी, हत्या और अपहरण के लिए कर रहा है। हमारी संपत्ति की चोरी और आतंकवाद, नशीली दवाओं की तस्करी व मानव तस्करी सहित कई अन्य कारणों से वेनेजुएला शासन को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है।</p>
<p>ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया- मादुरो शासन ने कमजोर और अकुशल बाइडन प्रशासन के दौरान जिन अवैध प्रवासियों और अपराधियों को अमेरिका भेजा है, उन्हें तेजी से वेनेजुएला वापस भेजा जा रहा है। अमेरिका अपराधियों, आतंकवादियों या अन्य देशों को हमारे राष्ट्र को लूटने, धमकाने या नुकसान पहुँचाने की अनुमति नहीं देगा और इसी तरह, किसी शत्रु शासन को हमारी जमीन, तेल या कोई अन्य संपत्ति लेने की अनुमति नहीं देगा। जिसे तुरंत अमेरिका को लौटाया जाना चाहिए।</p>
<p>अमेरिका के इस कदम के वेनेजुएला के तेल निर्यात पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि तेल वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। वेनेजुएला अपने कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह से टैंकरों पर निर्भर है और किसी भी व्यवधान से गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो सकता है।</p>
<p>इसके अलावा, अमेरिका ने पिछले कैरिबियन सागर में क्यूबा और चीन जाने वाले वेनेजुएला के तेल से लदे एक टैंकर को जब्त कर लिया था। एक न्यायाधीश ने यह पता चलने के बाद इस जब्ती को वैध करार दिया था कि जहाज ने हाल ही में ईरान से तेल का परिवहन किया था। ईरान एक अन्य देश है, जिसपर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखा है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 14:37:03 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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                <title>भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का ट्रंप का फैसला : प्रतिनिधि सभा ने इसके खिलाफ पेश किया प्रस्ताव, शुल्क को बताया अवैध</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[अमेरिकी कांग्रेस के तीन सदस्यों ने भारत से आयात पर ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 50% तक शुल्क हटाने का प्रस्ताव पेश किया है। सांसदों ने टैरिफ को अवैध बताते हुए कहा कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं, श्रमिकों और अमेरिका-भारत संबंधों को नुकसान होता है। प्रस्ताव का उद्देश्य अतिरिक्त 25% शुल्क रद्द कर व्यापारिक तनाव कम करना है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-decision-to-impose-up-to-50-percent-tariff-on/article-135838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/trump.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका में कांग्रेस (संसद) के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के तीन सदस्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत से सामानों के आयात पर लगाए गए 50 प्रतिशत तक शुल्क को समाप्त करने के लिए प्रस्ताव पेश किया है। अमेरिकी सांसदों ने पेश किए गए इस प्रस्ताव में इन शुल्क को अवैध बताया और कहा है कि इससे अमेरिकी श्रमिकों और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचेगा। साथ ही अमेरिका-भारत संबंधों में भी तनाव पैदा होगा। यह प्रस्ताव रिप्रेजेंटेटिव डेबोरा रॉस, मार्क वेसी और राजा कृष्णमूर्ति ने पेश किया।</p>
<p>इससे पहले सीनेट में ब्राजील पर लगाए गए इसी तरह के टैरिफ को वापस लेने और आपातकालीन शक्तियों के तहत व्यापार शुल्क लगाने के राष्ट्रपति के अधिकार को सीमित करने के लिए दोनों पार्टियों ने मिलकर प्रयास किया था। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस कदम का मकसद 27 अगस्त को भारतीय सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को रद्द कराना है।</p>
<p>गौरतलब है कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत कई भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। सुश्री रॉस ने कहा, Þउत्तर कैरोलिना की अर्थव्यवस्था व्यापार, निवेश और एक जीवंत भारतीय अमेरिकी समुदाय के जरिए भारत से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि भारतीय कंपनियों ने राज्य में 100 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है, जिससे जीवन विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे सेक्टर्स में हजारों नौकरियाँ पैदा हुई हैं, जबकि उत्तर कैरोलिना के कारोबारी हर साल भारत को हजारों डॉलर का सामान मुहैया कराते हैं।</p>
<p>वेसी ने कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है और ये अवैध टैरिफ उत्तरी टेक्सास के लोगों पर एक रोजमर्रा का कर हैं जो पहले से ही बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं। भारतीय-अमेरिकी कांग्रेसी राजा कृष्णमूर्ति ने टैरिफ को नुकसानदायक बताते हुए कहा कि वे आपूर्ति श्रृंख्ला को बाधित करते हैं, अमेरिकी श्रमिकों को नुकसान पहुँचाते हैं, और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि शुल्क खत्म करने से अमेरिका-भारत आर्थिक और सुरक्षा सहयोग मजबूत होगा। कृष्णमूर्ति ने कहा कि अमेरिकी हितों या सुरक्षा को आगे बढ़ाने के बजाय, ये टैरिफ उन्हें कमजोर करते हैं। इन नुकसानदायक उपायों को खत्म करने से अमेरिका को भारत के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ने और हमारी साझा आर्थिक और सुरक्षा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा।</p>
<p>यह प्रस्ताव कांग्रेसी डेमोक्रेट्स द्वारा ट्रंप के एकतरफा व्यापारिक कार्यों को चुनौती देने और भारत के साथ तनावपूर्ण संबंधों को फिर से ठीक करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। अक्टूबर की शुरुआत में रॉस, वेसी और कृष्णमूर्ति ने कांग्रेसी रो खन्ना और 19 अन्य सांसदों के साथ मिलकर राष्ट्रपति से टैरिफ नीति को पलटने और द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने का आग्रह किया था। बयान में कहा गया है। ट्रंप के भारत टैरिफ को खत्म करना व्यापार पर कांग्रेस के संवैधानिक अधिकार को वापस पाने और गलत व्यापार नीतियों को लागू करने के लिए आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग को रोकने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Dec 2025 14:33:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति का ऐलान, दक्षिण अफ्रीका को 2026 में होने वाले जी20 सम्मेलन में नहीं करेंगे आमंत्रित, जानें क्यों ?</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति साइरिल रामाफोसा ने कहा कि उनका देश अपने अधिकार से जी20 सदस्य है और किसी देश की अनुमति की जरूरत नहीं। ट्रम्प के बयान को अफसोसनाक बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण अफ्रीका संप्रभु राष्ट्र है और जी20 में उसकी सदस्यता वैध है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-president-announces-that-south-africa-will-not-be-invited/article-133879"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)-(12).png" alt=""></a><br /><p>प्रिटोरिया। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति साइरिल रामाफोसा ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान पर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि, उनका देश अपने अधिकार से जी20 का सदस्य है और सम्मेलन में शामिल होने के लिए उन्हें किसी देश के मशवरे की जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि श्री ट्रम्प ने कहा था कि वह दक्षिण अफ्रीका को 2026 में फ्लोरिडा में होने वाले जी20 सम्मेलन में आमंत्रित नहीं करेंगे। इसके जवाब में रामाफोसा ने कहा, दक्षिण अफ्रीका अपने नाम और अधिकार से जी20 का सदस्य है। उसकी जी20 सदस्यता सभी सदस्य राष्ट्रों की मंज़ूरी से है।</p>
<p>दक्षिण अफ्रीका एक स्वायत्त संवैधानिक लोकतांत्रिक देश है और वैश्विक मंचों में सदस्यता एवं अधिकार के संबंध में किसी अन्य देश से अपमान स्वीकार नहीं करता है। उन्होंने एक बयान में कहा,  दक्षिण अफ्रीका हर देश की संप्रभुता का सम्मान करता है और वैश्विक समुदाय में किसी देश का या उसकी उपस्थिति और योग्यता का अपमान नहीं करेगा। रामाफोसा ने ट्रम्प के बयान को अफसोसनाक करार देते हुए जी20 में दक्षिण अफ्रीका की सदस्या के संबंध में लगाई जा रही अटकलों को सिरे से खारिज किया। </p>
<p><strong>अमेरिका ने वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल  नहीं भेजा</strong></p>
<p>ट्रम्प ने सोशल मीडिया का रुख करते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीका मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है और उसने जी20 की मेजबानी के दस्तावेजों के हस्तांतरण में प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है। इस वजह से वह दक्षिण अफ्रीका को अगले साल फ्लोरिडा में होने वाले जी20 सम्मेलन में आमंत्रित नहीं करेंगे। इस सब के बावजूद ट्रम्प ने इस बात पर भी जोर दिया कि दक्षिण अफ्रीका जी20 का पूर्ण, सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहेगा।</p>
<p>इसके जवाब में रामाफोसा ने कहा कि, अमेरिका ने जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन में वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल को नहीं भेजा, इसलिए जी20 मेजबानी के आधिकारिक दस्तावेज दक्षिण अफ्रीका में अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों को सौंपने पड़े। रामाफोसा के बयान में कहा गया, जी20 के संस्थापक सदस्य के तौर पर दक्षिण अफ्रीका ने हमेशा सर्वसम्मति, सहयोग और साझेदारी की उस भावना का सम्मान किया है, जो जी20 को परिभाषित करती है। उन्होंने कहा कि, अमेरिका ने अपनी मर्जी से शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया। बयान में यह भी कहा गया कि एक ओर जहां अमेरिकी सरकार ने इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी व्यवसायियों और नागरिक-समाज समूहों ने बी20 और जी20 सोशल जैसे जी20 आयोजनों में बड़ी संख्या में अपनी हिस्सेदारी दर्ज की।</p>
<p><strong>देश के खिलाफ दंडात्मक उपाय अपनाना निराशाजनक</strong></p>
<p>रामाफोसा ने कहा कि, अमेरिका से कूटनीतिक रिश्ते सुधारने की कई कोशिशों के बावजूद गलत सूचना और विकृतियों के आधार पर ट्रम्प का उनके देश के खिलाफ दंडात्मक उपाय अपनाना निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि, अमेरिका द्वारा बॉयकॉट किया गया 2025 जी20 शिखर सम्मेलन जोहान्सबर्ग सदस्य राज्यों की तारीफों का केंद्र बना और उसका अंत बहुपक्षीय सहयोग की पुष्टि करने वाले घोषणापत्र के साथ हुआ। अमेरिका की आपत्तियों और बॉयकॉट के बावजूद 20 राष्ट्रनेताओं के एक समूह ने शनिवार को  घोषणापत्र पर अपने हस्ताक्षर किए। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 11:42:56 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>ट्रंप को लगा उन्हीं के टैरिफ का डंक, 6 देशों ने रद्द की एफ-35 फाइटर जेट डील</title>
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                        <![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ऊंचे टैरिफ वाली अमेरिका फर्स्ट नीति एफ-35 लड़ाकू विमान प्रोग्राम पर भारी पड़ रही है। 2025 में पुर्तगाल, स्पेन और अन्य देशों ने सौदे रद्द या रोक दिए, जिससे लॉकहीड मार्टिन को अरबों डॉलर का नुकसान और नौकरियों पर खतरा बढ़ा। सऊदी सौदा एकमात्र उम्मीद है, पर राजनीतिक विवाद जारी हैं।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trump-felt-the-sting-of-his-own-tariffs-6-countries/article-133875"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)-(11).png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति का मतलब है कि अमेरिका को पहले रखना। इसके तहत उन्होंने विदेशी सामान पर बहुत ऊंचे टैरिफ लगा दिए हैं, लेकिन यह नीति अमेरिका के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान एफ-35 के प्रोग्राम पर भारी पड़ रही है। 2025 में कई देशों ने एफ-35 खरीदने के सौदे रद्द कर दिए या रोक दिए। इससे लॉकहीड मार्टिन कंपनी को अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है। अमेरिकी नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।</p>
<p><strong>ट्रंप के टैरिफ : अमेरिका को बचाने की कोशिश, लेकिन उलटा असर</strong></p>
<p>ट्रंप ने 2025 में विदेशी सामान पर 10% से 50% तक टैरिफ लगा दिए। यह रेसिप्रोकल टैरिफ कहलाता है, मतलब जो देश अमेरिकी सामान पर टैक्स लगाते हैं, उन पर भी वैसा ही। अप्रैल 2025 तक औसत टैरिफ 27% हो गया, जो 100 साल का रिकॉर्ड है।</p>
<p>ट्रंप का कहना है कि इससे अमेरिकी नौकरियां बचेंगी। लेकिन एफ-35 के पार्ट्स दुनिया भर से आते हैं, टैरिफ से कीमत बढ़ गई, जिससे कई सहयोगी देश नाराज हो गए. वे अब यूरोपीय विमान जैसे राफेल, यूरोफाइटर या ग्रिपेन चुन रहे हैं। इससे एफ-35 का निर्यात संकट गहरा गया है।</p>
<p><strong>एकमात्र जीत : सऊदी अरब का सौदा, लेकिन मुश्किलें बाकी</strong></p>
<p>ट्रंप ने नवंबर 2025 में सऊदी अरब को एफ-35 बेचने की मंजूरी दी, यह नया ग्राहक है, लेकिन कांग्रेस की मंजूरी चाहिए। इजरायल बहुत नाराज है क्योंकि एफ-35 की ताकत इजरायल के पास थी। सऊदी-अमेरिका रिश्ते सुधारने के लिए यह कदम है, लेकिन अभी सौदा पक्का नहीं।</p>
<p><strong>अमेरिका पर क्या असर पड़ रहा है ?</strong></p>
<p>यह रद्द सौदे एफ-35 प्रोग्राम को 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान पहुंचा रहे हैं, पेंटागन ने 2026 के लिए खरीद कम कर दी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी बोझ, हर घर पर 1,200 डॉलर का अतिरिक्त टैक्स पड़ेगा। सहयोगी देश अब मेक इन यूरोप पर जोर दे रहे हैं। ट्रंप की नीति से ठअळड रिश्ते खराब हो रहे हैं, लॉकहीड मार्टिन को नौकरियां कम होने का डर है। कुल मिलाकर अमेरिका फर्स्ट- अमेरिका के ही हितों पर चोट कर रही है।</p>
<p><strong>2025 के रद्द सौदे : देश-दर-देश नुकसान</strong></p>
<ul>
<li>पुर्तगाल ने मार्च 2025 में 36 एफ-35 जेट खरीदने का प्लान रद्द कर दिया। पुराने एफ-16 की जगह यूरोपीय विकल्प जैसे राफेल या ग्रिपेन चुन लिया।</li>
<li>भारत ने एफ-35 को पूरी तरह खारिज कर दिया। एयरो इंडिया 2025 में अमेरिका ने इसे दिखाया, लेकिन 50% टैरिफ की वजह से कीमत बहुत ऊंची हो गई।</li>
<li>भारत अब अपनी स्वदेशी तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दे रहा है।</li>
<li>स्विट्जरलैंड का 36 जेटों का सौदा (9.1 बिलियन डॉलर) डगमगा रहा है। ट्रंप ने स्विस सामान जैसे घड़ियां और चॉकलेट पर 39% टैक्स लगाया, जो बाद में 15% हो गया, लेकिन स्विस सांसद नाराज हैं। 42000 लोगों ने रद्द करने की अपील पर हस्ताक्षर किए।</li>
<li>स्पेन ने 45-50 जेटों का सौदा तोड़ दिया। ट्रंप ने स्पेन को नाटो के 5% डिफेंस खर्च न करने पर फटकार लगाई और टैरिफ की धमकी दी। स्पेन अब योरोजेटर या फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम खरीदेगा।</li>
<li>कनाडा ने 72 जेटों का सौदा रिव्यू कर लिया। 16 जेट मिल चुके हैं, लेकिन लागत बढ़ने और वर पर भरोसे की कमी से परेशानी हो रही।</li>
<li>स्वीडन का ग्रिपेन 10,000 नौकरियां देने का वादा कर रहा है, कुल मिलाकर, 150 जेटों का नुकसान और 72 अनिश्चित।</li>
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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 11:32:04 +0530</pubDate>
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