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                <title>country - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>देश में 2 दिन बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, जनसम्पर्क विभाग को प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के दिए निर्देश </title>
                                    <description><![CDATA[जैन धर्म के पर्व पर्युषण पर्व एवं संवत्सरी तथा अनन्त चतुर्दशी के अवसर पर दो दिन पूरे प्रदेश में मांस, मछली और अंडे की दुकानें बंद रहेंगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>जयपुर। जैन धर्म के पर्व पर्युषण पर्व एवं संवत्सरी तथा अनन्त चतुर्दशी के अवसर पर दो दिन पूरे प्रदेश में मांस, मछली और अंडे की दुकानें बंद रहेंगी। स्वायत्त शासन विभाग के आदेश के अनुसार 28 अगस्त 2025 (गुरुवार) को पर्युषण पर्व एवं संवत्सरी तथा 6 सितम्बर 2025 (शनिवार) को अनन्त चतुर्दशी पर राज्यभर में सभी बूचड़खाने और मांसाहार की दुकानें बंद रहेंगी। दोनों तिथियों पर धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए सभी नगर निगम, परिषद एवं पालिकाएं इस निर्णय की अनुपालना सुनिश्चित करें। आदेश में जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, महापौर, सभापति एवं संबंधित निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित दुकानों की प्रभावी निगरानी की जाए और कहीं भी नियमों का उल्लंघन न होने पाए।</p>
<p>इसके अलावा आईटी सेल निदेशालय को आदेश की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करने तथा जनसम्पर्क विभाग को प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम धार्मिक परंपराओं और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। निर्णय से प्रदेशभर में जैन समाज के पर्वों के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Aug 2025 16:38:47 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश को सवालों का जवाब दें चुनाव आयोग : किसके कहने पर मिटाए जा रहे हैं सबूत, राहुल गांधी ने कहा- बेशकीमती है भारत का लोकतंत्र  </title>
                                    <description><![CDATA[वीडियो और सीसीटीवी के सबूत क्यों और किसके कहने पर मिटाए जा रहे हैं। सवाल है कि आयोग क्या भाजपा का एजेंट बनकर काम कर रहा है।      ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-country-should-answer-questions-the-election-commission-is-being/article-123063"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भाजपा पर वोट चोरी का आरोप लगाने के बाद कहा कि भारत का संविधान बेशकीमती है और चुनाव आयोग को इसकी प्रतिष्ठा के लिए 5 सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़ा सवाल यह है कि चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि वीडियो और सीसीटीवी के सबूत क्यों और किसके कहने पर मिटाए जा रहे हैं। सवाल है कि आयोग क्या भाजपा का एजेंट बनकर काम कर रहा है।      </p>
<p>गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग से 5 सवाल हैं और देश को इसका जवाब देना चाहिए। पहला सवाल है कि विपक्ष को डिजिटल वोटर लिस्ट क्यों नहीं मिल रही। क्या छिपा रहे हो। दूसरा है कि सीसीटीवी और वीडियो सबूत मिटाए जा रहे हैं- क्यों और किसके कहने पर। तीसरा है- फर्जी वोटिंग और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की गई-क्यों। चौथा सवाल विपक्षी नेताओं को क्यों डराया धमकाया जा रहा है और 5वां सवाल-साफ-साफ बताओ- क्या भारत का चुनाव आयोग अब भाजपा का एजेंट बन चुका है। उन्होंने कहा कि आयोग को समझना चाहिए कि भारत का लोकतंत्र बेशकीमती है - इसकी चोरी का परिणाम बहुत भयानक होगा। अब जनता बोल रही है-बहुत हुआ।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Aug 2025 18:36:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय क्यों अपने देश से पलायन करते हैं...</title>
                                    <description><![CDATA[आर्थिक अवसरों में असमानता, उच्च बेरोजगारी दर और कम औसत वेतन के कारण  विदेश में भारतीय माइग्रेट कर जाते है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/why-indians-migrate-from-their-country/article-107794"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer74.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। भारत आबादी के मामले में चीन को पीछे करके सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन गया है। जिससे दुनियाभर में बड़े पैमाने पर भारतीय प्रवासियों की साल दर साल संख्या बढ़ती जा रही है। दुनिया के करीब सभी देशों में भारतीय प्रवासी है। वर्ष 2024 की संयुक्त राष्ट्र वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया में सबसे बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों का स्थान है जो लगभग 18 मिलियन तक पहुंच चुका है। सबसे ज्यादा भारतीय प्रवासी यूएसए में है। यहां कुल 5.4 मिलियन लोग जो देश की 345 मिलियन की कुल आबादी का करीब 1.6 %  है। इनमें से करीब 2 मिलियन लोग एनआरआई है तो वहीं करीब 3.3 मिलियन लोग ऐसे है। जिन्होंने अमेरिका की नागरिकता ले ली है। दूसरी तरफ देखे तो साल 2023 में 2.16 लाख भारतीयों ने नागरिकता छोड़कर विदेश का रुख किया। 2022 में यह आंकड़ा 2.25 लाख था। आश्चर्य होगा कि दुनिया में  ऐसे देश भी हैं जहां के नागरिक अपने देश को छोड़ कर  जाना ही नहीं चाहते हैं। ये देश हैं यूएई, जापान, जर्मनी, संयुक्त राज्य अमेरिका ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क,फिनलैंड, स्वीडन, ऑस्ट्रिया और नीदरलैंड के लोग अपने उच्च गुणवत्ता वाले जीवन स्तर के कारण अपने देश में ही  रहना पसंद करते हैं। इन देशों के लोगों की तुलना में भारतीय अक्सर बड़ी संख्या में अपना देश छोड़ते हैं। आर्थिक अवसरों में असमानता, उच्च बेरोजगारी दर और कम औसत वेतन के कारण  विदेश में भारतीय माइग्रेट कर जाते है जबकि यूएई, जापान और जर्मनी जैसे देश स्थिर अर्थव्यवस्था और अच्छी नौकरी की संभावनाएं प्रदान करते हैं, जिससे इन देशों के नागरिकों को अपना देश छोड़ने के लिए कम प्रोत्साहन मिलता है।</p>
<p><strong>यूएई में सबसे कम प्रवासी दर</strong><br />एक अध्ययन से पता चला है कि दुनिया भर में यूएई में सबसे कम प्रवासी दर है। यूएई की 99.37 प्रतिशत आबादी ने देश के उच्च जीवन स्तर से प्रभावित होकर देश के भीतर ही रहना चुना वहीं जापान इस मामले में दूसरे स्थान पर है, जहां 98.95 प्रतिशत लोग रहना चुनते हैं। यह वरीयता जापान के मजबूत सांस्कृतिक संबंधों, जीवन की अनुकूल गुणवत्ता और रैंकिंग में देशों के बीच सबसे कम रहने की लागत से प्रभावित है। जर्मन लोग अपनी मातृभूमि में रहना पसंद कर रहे हैं, क्योंकि वहां खुशी का स्तर सूची में तीसरा सबसे ऊंचा है और जीवन की उच्च गुणवत्ता प्रदान करता है। भारतीय लोग कई वजहों से अपना देश छोड़ते हैं। भारत की आबादी बहुत बड़ी है, जिसका एक बड़ा हिस्सा गरीबी में रहता है, जिससे विदेश में बेहतर नौकरी के अवसर और उच्च वेतन बहुत आकर्षित करते हैं। सुविधाओं से भरे जीवन की चाहत भारतीयों को विदेश लेकर जाती है और नागरिकता छोड़ने के लिए प्रेरित करती है। कई भारतीय छात्रों को घर लौटने के बाद नौकरी ढूंढना कठिन लगता है, यही कारण है कि वे उस देश में जहां वह पढ़ रहे है वहां के स्थायी निवासी के लिए आवेदन करते हैं।   </p>
<p><strong>सबसे ज्यादा इन देशों में बसते हैं भारतीय </strong><br />विदेश में बसने के लिए सबसे ज्यादा भारतीय जिन देशों को चुनते हैं उनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। सबसे ज्यादा भारतीय पलायन करके यही बसते हैं। यहां स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग अच्छा है। बच्चों की पढ़ाई बेहतर होती है। सुविधाएंं ज्यादा हैं और जिंदगी आसान है।</p>
<p><strong>भारतीयों के नागरिकता छोड़ने के कुछ कारण </strong><br />बेहतर शिक्षा, नौकरी के अवसर, मेडिकल सुविधाएं, निवेश के अनुकूल माहौल, विदेशों में अच्छी सैलरी, काम का बेहतर माहौल,  बेहतर रहन-सहन, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, जलवायु और प्रदूषण जैसी जीवनशैली की समस्याएं हैं। भारत में दोहरी नागरिकता का प्रावधान न होना भी पलायन की बड़ी वजह है। कई देश टैक्स में कई तरह की राहत देते हैं, कारोबार करने के लिए कई तरह की सुविधाएं देते हैं। हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 की रिपोर्ट में भारतीय पासपोर्ट 82वें पायदान पर है। भारतीय पासपोर्ट से 58 देशों में वीजा फ्री एंट्री मिलती है, दुनिया के कई देशों का पासपोर्ट भारत के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत है जैसे- अमेरिकी पासपोर्ट से 186 देश और ब्रिटिश पासपोर्ट से 190 देशों में वीजा फ्री एंट्री मिलती है। वहीं, फ्रांस से 192, संयुक्त अरब अमीरात से 185, ऑस्ट्रेलिया के पासपोर्ट से 189 देश में बिना वीजा के जा सकते हैं। यही वजह है कि बेहतर कारोबार के लिए भारतीय विदेश पहुंचते हैं। यही वजह है कि विकसित देशों में मिल रही सुविधाएं भारतीयों को अपनी ओर खींचती हैं।</p>
<p>इन देशों की क्वालिटी ऑफ लाइफ बहुत अच्छी है।  पर कैपिटा इनकम हमारे देश से ज्यादा है। हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत अच्छा है। काफी सर्विसेज वहां सरकार उपलब्ध कराती है। भारत से बाहर जाने का मुख्य कारण डॉलर और रूपए में अंतर है। वहां जाकर कमाई बढ़ जाती है वह उन्हें आकर्षित करता है। दुबई में टैक्स में स्वतंत्रता है। भारत में घर, कार खरीदो तो काफी टैक्स देना पड़ता है।<br /><strong>- डॉ. हर्ष गोयल, कैंसर रोग विशेषज्ञ, कोटा</strong></p>
<p>इन देशों के लोगों को अपने देश से प्यार है। जो कुछ कमाया, जिस मिट्टी से कमाया सब कुछ उसे ही मानते हैं। भारत में जनता को स्वयं अपने देश व अपने काम के प्रति जागरूक होना चाहिए।  इजराइल से सीखना चाहिए कि जब देश पर संकट आया  तो अपने देश के लिए पूरी दुनिया में बसे इजरायली लोग वापिस आकर अपने देश की सुरक्षा में लगे हैं। ऐसी भावना भारत के व्यक्तियों को भी दिखनी चााहिए तभी देश मजबूत होगा और पलायन रूकेगा। भारत में अपार संभावनाएं है पर थोड़ा-सा पैसा कमा कर यहां के लोग बाहर बसने की अपनी इच्छा शक्ति को रोक नहीं पा रहे है। सरकार को भी इस तरफ ध्यान देना चाहिए। कि ऐसा क्योंं हो रहा हैं?<br /><strong>- महावीर प्रसाद नायक, डायरेक्टर, धनलक्ष्मी प्रोपर्टी ग्रुप</strong></p>
<p>पैसा कमाने और बेहतर जीवन यापन के लिए अनेक भारतीय विदेश में जाकर बसते है। भारत छोड़ने के पीछे पैसा सबसे बड़ा कारण है। हालांकि इतनी आवश्यकता नहीं हैं। यदि उन्हें देश में ही उनकी काबिलियत के हिसाब से अवसर मिलें तो शायद प्रतिभाएं पलायन नहीं करेगी। ये देश  हर तरह से विकसित और उन्नत देश है। वहां सभी सुविधाएं है। अर्थव्यवस्था मजबूत है, शिक्षा की गुणवत्ता अच्छी है जर्मनी में विश्व के प्रसिद्ध विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्थान हैं। अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं हैं, सुरक्षित देश हैं। इसलिए वह वहां  रहने में सहज महसूस करते हैं। यही कारण है कि वह देश नहीं छोड़ पाते है। <br /><strong>- लक्ष्मीकांत माहेश्वरी, प्रोपराइटर एल.के.कंस्ट्रक्शन</strong></p>
<p> भारत में आबादी इतनी ज्यादा है। यहां के लोग उच्च शिक्षित और योग्य हो जाते है कि उन्हें जॉब के अवसर उतने नहीं मिलते जितने मिलने चाहिए। उनके लिए देश से बाहर जाना मजबूरी हो जाती है। आना तो वापिस देश में चाहते हैं लेकिन उनकी योग्यता के अनुसार जॉब नहीं मिल पाता । पॉपुलेशन भारत में ज्यादा है जॉब सीमित रहेगी। इन देशों  में आबादी बहुत कम है। जॉब भी है। वहां लोग ईजी गोइंग लाइफ जीते है। भारत में क्वालीफाइड लोगों के लिए सरकारी जॉब कम हो गया है। प्राइवेट जॉब में भी लिमिटेशन हैं। देश छोड़ना उनकी दिली इच्छा नहीं होती मजबूरी हो जाती है।<br /><strong>- एस. के. विजय, सीए</strong></p>
<p>इन देशों  में नागरिकों को सब सुविधाएं मिल रही हैं, जितने शिक्षित हैं उसके हिसाब से कमाई कर रहे हैं। उनकी सरकार पूरी सुविधा देती है। हमारे देश में बच्चों को उतनी सुविधा नहीं मिलती है, इसलिए बच्चे बाहर जाने को तैयार हो जाते हैं। जर्मनी, जापान, यूएई हो वहां का रहन सहन, आबोहवा बहुत अच्छी है। यहां प्रदूषित है वहां  प्रदूषण मुक्त रहता है। हमारे यहां भी सरकार लोगों की आवश्यकताओं व अपेक्षाओं को पूरा करने की कोशिश करती हैं लेकिन यह हो नहीं पाता क्योंकि वहां की आबादी में और भारत की आबादी में बहुत अंतर है। इन देशों में क्वालिटी आफ लाइफ है इसलिए उनलोगों को  उनके देश से बाहर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती । <br /><strong>- चारू जैन, अध्यक्ष इनरव्हील क्लब कोटा</strong></p>
<p>शिक्षा के प्रति जागरुकता वहां  बहुत ज्यादा है । भारत में इस चीज की कमी है।  वहां  शिक्षा का खर्चा सरकार उठाती है। हमारे यहां  यह सुविधा नहीं है।  हमारे यहां चाहे कितने भी उच्च शिक्षित हो जाए सैलरी का पैकेज कम होता है। वहां मल्टीनेशनल कंपनियां बहुत अच्छी है जिनमें बहुत अच्छे अमाउंट में पैसा दिया जाता है।  वहां रेजीडेंशियल फ्री होता है। वहां के लोग अपना काम खुद करते है जिससे खर्चे कम हो जाते है। उनके देश  में किसी चीज की कमी नहीं है  इसलिए वह अपना देश नहीं छोड़ते है।<br /><strong>- डॉ. सेहबा खान, फिजियोथेरेपिस्ट</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Mar 2025 15:47:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मार्च-2026 तक देश से खत्म हो जाएगा नक्सलवाद: अमित शाह</title>
                                    <description><![CDATA[ बैठक में 7 राज्यों के अफसरों के साथ करीब 4 घंटे तक बातचीत की गई। मीटिंग में अलग-अलग राज्यों के डीजीपी, पैरा मिलिट्री फोर्स के चीफ और राज्य सरकार के सचिवों को बुलाया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/naxalism-will-be-eliminated-from-the-country-by-march-2026/article-88565"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/b.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रायपुर में शनिवार को वामपंथी उग्रवाद की समीक्षा की। शाह ने कहा किए मार्च-2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। मैं मानता हूं कि अब समय आ गया है कि वामपंथी उग्रवाद की समस्या पर एक मजबूत रणनीति के साथ रुथलेस रणनीति के साथ अंतिम प्रहार किया जाए। वामपंथी उग्रवाद लोकतंत्र व्यवस्था के लिए चैलेंज है। मुझे विश्वास है कि हमारी लड़ाई अंतिम चरण पर पहुंच गई है। हम देश को 2026 तक पूरी तरह नक्सल समस्या से मुक्त कर पाएंगे। नक्सल प्रभावित जिलों में भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार की सभी योजना का सौ फीसदी काम हो इसे लेकर बैठक में चर्चा हुई। बैठक में 7 राज्यों के अफसरों के साथ करीब 4 घंटे तक बातचीत की गई। मीटिंग में अलग-अलग राज्यों के डीजीपी, पैरा मिलिट्री फोर्स के चीफ और राज्य सरकार के सचिवों को बुलाया गया।</p>
<p><strong>सरकार बीजापुर और दंतेवाड़ा के विकास के लिए कटिबद्ध</strong><br />उन्होंने कहा कि हम सब का मानना है कि वामपंथी उग्रवाद हमारे देश की लोकतंत्र व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है। भारत सरकार बस्तर से बीजापुर और दंतेवाड़ा से लेकर धमतरी तक कुरुक्षेत्र के विकास के लिए कटिबद्ध है। वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के लिए कई अचीवमेंट हुए हैं, 2022 में 1 साल ऐसा आया कि जिसमें चार दशक में पहली बार मृत्यु की संख्या 100 से नीचे गई। 2014 से 24 तक सबसे कम वामपंथी उग्रवाद की घटना दर्ज की गई। टॉप-14 नक्सली लीडर को न्यूट्रलाइज किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Aug 2024 12:53:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विश्व शांति, देश की प्रगति और गरीब कल्याण के ध्येय से आहुत हुआ कुमकुमार्चन महायज्ञ</title>
                                    <description><![CDATA[ महायज्ञ देश की प्रगति, विश्व शांति एवं ग़रीब कल्याण के ध्येय से आहुत किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/kumkumarchan-mahayagya-was-organized-with-the-aim-of-world-peace/article-83880"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(3)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। श्री विद्या कोटि कुमकुमार्चन महायज्ञ का जयपुर इंदिरा नगर स्थित पुष्पांजलि परिसर में शुभारंभ हुआ। देश के वरिष्ठ संत स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी की मौजूदगी में महायज्ञ हुआ।</p>
<p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक निंबाराम ने महायज्ञ का उद्घाटन किया। स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने आरएसएस के क्षेत्र प्रचारक निंबाराम को शाॅल ओढ़ाकर सम्मानित किया। युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह मौजूद रहे। विधायक देवी सिंह शेखावत, भाजपा प्रवक्ता प्रताप राव, राजस्थान महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सुमन शर्मा भी मौजूद रहे। महायज्ञ देश की प्रगति, विश्व शांति एवं ग़रीब कल्याण के ध्येय से आहुत किया गया।</p>
<p>स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि सनातन धर्म के कारण ही विश्व सुरक्षित है। सनातन और प्रभु राम का विरोध करने का अधिकार किसी को नहीं है। युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा प्रभु राम जन जन के हमारे आदर्श हैं। राजनीतिक लोगों को प्रभु राम के खिलाफ नहीं बोलना चाहिए।</p>
<p>महायज्ञ 6 से 9 जुलाई तक चलेगा। तमिलनाडु से मंगवाए गए 1 टन कुमकुम से महायज्ञ हो रहा है। माता ललिता का अनुष्ठान हो रहा है। राजस्थान सहित देश भर से संत महंतों और श्रद्धालुओं का महायज्ञ में आगमन हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jul 2024 16:12:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरसीईपी में शामिल होना चाहिए भारत : आसियान </title>
                                    <description><![CDATA[आरसीईपी में शामिल होने से भारत और अन्य देशों को लाभ होगा, क्योंकि इससे अधिक बाजार उपलब्ध होगी तथा यह व्यापार सौदे पारस्परिक हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-should-join-in-the-rcep--says-asean/article-62605"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/sizte--(12)1.png" alt=""></a><br /><p>मानदो। दक्षिण- पूर्व एशियाई देशों का  संगठन (आसियान) के 10 सदस्य देशों ने आकांशा व्यक्त की है कि भारत को क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) में शामिल होना चाहिए। आसियान के सदस्य देशों में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं। इंडोनेशिया के दौरे पर आए भारतीय मीडिया के प्रतिनिधिमंडल से बात करते हुए आसियान के महासचिव डॉ. काओ किम होर्न ने कहा कि समावेशी, खुले और नियम-आधारित व्यापार समझौते से सभी भागीदारों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि आरसीईपी में शामिल होने से भारत और अन्य देशों को लाभ होगा, क्योंकि इससे अधिक बाजार उपलब्ध होगी तथा यह व्यापार सौदे पारस्परिक हैं।</p>
<p><strong>वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी</strong><br />भारत 2019 में चीन के नेतृत्व वाले आरसीईपी से यह कहते हुए बाहर हो गया था कि यह निर्णय स्थानीय उद्योग और राष्ट्र के हित में लिया गया था। उस समय एक आधिकारिक बयान में कहा गया था कि समझौते की संरचना भारत की चिंताओं का समाधान नहीं करती है। उल्लेखनीय है कि आरसीईपी आसियान सदस्य देशों और पांच अन्य देशों ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता है। यह दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में से एक है, जिसमें वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी और दुनिया की लगभग एक तिहाई आबादी शामिल है।</p>
<p><strong>व्यापार 131.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर</strong><br />अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत और आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 131.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। वित्त वर्ष 2013 में आसियान के साथ व्यापार भारत के वैश्विक व्यापार का 11.3 फीसदी था। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Nov 2023 12:23:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में आत्महत्या के 50 फीसदी मामले सिर्फ 5 राज्यों से, जानिए कौनसे राज्य और क्या कारण है इन आत्महत्याओं के </title>
                                    <description><![CDATA[देश में आत्महत्या के 50 प्रतिशत से अधिक मामले पांच प्रमुख राज्यों महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में दर्ज किए जाते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ncrb-data-on-suicide-cases-in-india-hindi-news/article-56822"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/sucide.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। देश में आत्महत्या के 50 प्रतिशत से अधिक मामले पांच प्रमुख राज्यों महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में दर्ज किए जाते हैं।</p>
<p>राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, 2021 में देश में आत्महत्याएं के मामलों की कुल संख्या 1,64,033 थी। एनसीआरबी रिपोर्ट ने अगस्त 2022 में इस चौंकाने वाले डेटा का खुलासा किया। सोलास नामक एक गैर-लाभकारी गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने यहां एक मीडिया सम्मेलन के दौरान भारत सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि आंकड़े चिंताजनक हैं, 2021 में देश में दर्ज की गई आत्महत्याओं में 7.2 प्रतिशत की चिंताजनक वृद्धि हुई है और कुल संख्या 1,64,033 मामलों तक पहुंच गई है।</p>
<p>इन दुखद घटनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा मुख्य रूप से पांच राज्यों, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में दर्ज किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है, कुल मिलाकर, सभी आत्महत्याओं के 50.4 प्रतिशत मामले देश के इन पांच राज्यों में दर्ज किए गए। </p>
<p>नई दिल्ली स्थित एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, आत्महत्या कई कारकों से हो सकती है, जैसे किसी के पेशे या करियर से संबंधित मुद्दे, अलगाव की भावना, दुव्र्यवहार, हिंसा, पारिवारिक संघर्ष, मानसिक स्वास्थ्य विकार, शराब की लत, वित्तीय असफलताएं, क्रोनिक दर्द, और भी बहुत कुछ।</p>
<p>सोलास संकटग्रस्त लोगों को परामर्श देकर आत्महत्या से निपटने का प्रयास कर रहा है। इसने कहा कि एनसीआरबी केवल पुलिस को रिपोर्ट किए गए मामलों से आत्महत्याओं के बारे में जानकारी इकट्ठा करता है। आत्महत्या के मामलों से निपटने के लिए काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों और विशेषज्ञों का मानना है कि आत्महत्या के विचार वाले व्यक्ति अपने जीवन को समाप्त करने की इच्छा के बजाय अपने दर्द से राहत चाहते हैं।</p>
<p>प्रसिद्ध मनोचिकित्सक जय रंजन राम ने विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के वार्षिक समारोह को चिह्नित करने के लिए लाइफलाइन फाउंडेशन के सोलास का अनावरण किया, जो आत्महत्या से बचे लोगों और उनके परिवारों के लिए एक नई सहायता समूह पहल है।</p>
<p>यहां प्रेस क्लब, कोलकाता में अनावरण कार्यक्रम में एक पैनल चर्चा भी हुई, जिसमें किसी प्रियजन की आत्महत्या के परिणामस्वरूप हुए आघात से निपटने में लोगों की मदद करने में सहायता समूहों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया।</p>
<p>लाइफलाइन फाउंडेशन की ओर से संस्थापक और निदेशक सुक्षम ङ्क्षसह ने कहा कि आत्महत्या की प्रवृत्ति से जूझ रहे व्यक्ति संगठन के अनुभवी स्वयंसेवकों के साथ अपनी भावनाओं को खुलकर साझा कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Sep 2023 15:37:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>नित्यानंद के देश कैलासा ने अमेरिकी शहर को लगाया चूना</title>
                                    <description><![CDATA[इस नए मामले के साथ ही कैलासा के साथ पहला ऐसा धोखाधड़ी का मामला जुड़ गया है जिसे विदेशी धरती पर अंजाम दिया गया है। नेवार्क के अधिकारियों की मानें तो यह समझौता सिर्फ छह दिनों तक चला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/nityanandas-country-kailasa-limes-american-city/article-40167"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/s-111.png" alt=""></a><br /><p>नेवॉर्क सिटी। रेप के आरोपी नित्यानंद के झूठे देश कैलासा के खिलाफ धोखाधड़ी का पहला मामला भी दर्ज हो गया है। इस देश ने किसी और को नहीं बल्कि न्यूजर्सी के शहर नेवॉर्क को अपना पहला शिकार बनाया है। नेवॉर्क सिटी के अधिकारी शुरूआत में तो इस बात को लेकर काफी खुश थे कि उन्हें हिंदू देश कैलासा के साथ जुड़ने का मौका मिल रहा है। लेकिन बाद में उन्हें पता लगा कि वो जिस देश के साथ जुड़ने जा रहे हैं उसका तो कोई अस्तित्व ही नहीं है। जनवरी में नेवॉर्क सिटी ने कैलासा के कुछ प्रतिनिधियों का स्वागत किया था। मगर अब सिटी हॉल की तरफ से माना गया है कि यह सबकुछ एक धोखाधड़ी का हिस्सा थी जिसे एक भगोड़े भारतीय गुरु स्वामी नित्यानंद की तरफ से अंजाम दिया जा रहा था।</p>
<p>इस नए मामले के साथ ही कैलासा के साथ पहला ऐसा धोखाधड़ी का मामला जुड़ गया है जिसे विदेशी धरती पर अंजाम दिया गया है। नेवार्क के अधिकारियों की मानें तो यह समझौता सिर्फ छह दिनों तक चला। उन्होंने इसे पूरी तरह से बेसलेस और जीरो करार दिया है। </p>
<p>अधिकारियों की मानें तो इस पूरे आयोजन में किसी भी तरह के पैसे का लेन-देन नहीं हुआ है। नेवॉर्क सिटी के प्रवक्ता की तरफ से कहा गया है कि हालांकि इस घटना पर काफी खेद है मगर नेवॉर्क सिटी ऐसी साझेदारी की तरफ देख रही थी जो विविध संस्कृतियों से भरी हुई है।  नेवॉर्क सिटी जिस प्रोग्राम के तहत कैलासा से जुड़ने वाली थी, उसे सिस्टर सिटी प्रोग्राम नाम दिया गया है जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शुरू किया गया था। </p>
<p><br />इस प्रोग्राम का मकसद दो नगरपालिकाओं के बीच सांस्कृतिक और वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करना था। नेवॉर्क, न्यू जर्सी का सबसे बड़ा शहर है।</p>
<p><strong>12 जनवरी को हुआ कार्यक्रम</strong><br />12 जनवरी को एक साइनिंग सेरेमनी हुई थी जिसमें नेवॉर्क के मेयर रास बाराका ने नकली प्रतिनिधियों मुलाकात की थी। उन्होंने इस दौरान कहा था कि मैं प्रार्थना करता हूं कि हमारा रिश्ता हमें सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक विकास को समझने में मदद करे और दोनों जगहों पर हर किसी के जीवन में सुधार करे। </p>
<p>सीबीएस की रिपोर्ट की मानें तो कैलासा के काल्पनिक निवासियों के लिए कोई सुधार नहीं आ रहा है। वहीं, नेवार्क के निवासी सिर्फ शर्मिंदगी महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि आखिर कैसे उनके नेता एक घोटाले में फंस गए। उनका मानना है कि इस घोटाले को तो गूगल पर सर्च करके भी टाला जा सकता था।</p>
<p><strong>नेवॉर्क के निवासी दुखी</strong><br />नेवॉर्क के रहने वाले शकी मेरिट ने सीबीएस न्यूज से कहा कि एक भी अधिकारी ने गूगल पर सर्च नहीं किया और इसलिए हम इस पूरे फसाद में फंस गए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सारी सच्चाई का पता लगाना होगा। एक और निवासी मिशेल ने कहा है कि हिंदू भाईयों और बहनों से उन्हें काफी प्यार है लेकिन यह एक धोखाधड़ी का मामला है। यहां के निवासियों की मानें तो अगली बार सिस्टर सिटी के बारे में कोई भी फैसला गूगल पर सर्च करके ही लिया जाएगा।</p>
<p>स्वयंभू बाबा नित्यानंद के  संयुक्त राज्य कैलासा (यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा) ने 30 से अधिक अमेरिकी शहरों के साथ एक सांस्कृतिक भागीदारी समझौता किया है। रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि बाबा ने काल्पनिक देश के साथ सिस्टर सिटी समझौता निरस्त कर दिया है। </p>
<p>नित्यानांद ने 2019 में संयुक्त राज्य कैलासा की स्थापना की घोषणा की थी। एक वेबसाइट के अनुसार 30 से अधिक अमेरिकी शहरों ने फर्जी देश कैलासा के साथ सांस्कृतिक भागीदारी समझौता किया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Mar 2023 12:07:41 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एशिया-प्रशांत किसी देश के लिए युद्ध का क्षेत्र नहीं : जिनपिंग</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ने कहा कि जो देश नए शीत युद्ध छेडऩे की तैयारी में हैं, उन्हें हमारे देश से अनुमति नहीं दी जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/asia-pacific-not-a-war-zone-for-any-country-jinping/article-30060"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/jinping.jpg" alt=""></a><br /><p>बैंकाक। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है, कि एशिया-प्रशांत किसी देश के लिए युद्ध का क्षेत्र नहीं है इसलिए, किसी भी देश को इसे युद्ध का मैदान बनाने का विचार त्याग देना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार  जिनपिंग की यह लिखित टिप्पणी थाइलैंड की राजधानी बैंकाक में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन के मौके पर एक व्यापारिक कार्यक्रम के लिए तैयार की गई है। राष्ट्रपति ने कहा कि जो देश नए शीत युद्ध छेडऩे की तैयारी में हैं, उन्हें हमारे देश से अनुमति नहीं दी जाएगी। हमें एक दायरे में रहकर, एक दूसरे के साथ स्पष्टवादी और ईमानदारी का रवैया रखना चाहिए। आयोजकों द्वारा प्रदान किए गए इस क्षेत्र को युद्ध का मैदान नहीं बनना चाहिए। </p>
<p>उत्तर कोरिया ने जिंनपिंग और जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा से मिलने के बाद कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी। अमेरिका और उसके सहयोगियों को कठोर सैन्य प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। रूस जी-20 और एशिया, प्रशांत महासागरीय आर्थिक सहयोग (एपेक) दोनों का सदस्य है लेकिन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शिखर सम्मेलन से दूर रहे। पहले उप प्रधान मंत्री एंड्री बेलौसोव एपेक में उनका प्रतिनिधित्व करेंगे। उत्तर कोरिया द्वारा रिकॉर्ड मिसाइल हमले के बाद चीन और जापान के नेताओं ने गुरुवार को तीन साल में अपनी पहली आमने-सामने की (एजेंसी) की। चीन और जापान नेताओं की (एजेंसी) एशिया, पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (एपेक) फोरम के एक शिखर सम्मेलन के दौरान महामारी से उबरने और यूक्रेन में रूस द्वारा लगातार जारी युद्ध से वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल पर केंद्रित थी।</p>
<p>किशिदा ने इस बैठक की शुरुआत में कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि चीन के निर्माण में और तेजी लाना महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने चेतावनी दी कि उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है, जो उसका सातवां परीक्षण होगा। अगस्त में जब चीन के सैनिकों को अभ्यास कराया जा रहा था उस दौरान, बड़े पैमाने पर चीनी मिसाइलें ताइवान के आसपास दागी गईं और उनमें से कुछ जापान के क्षेत्र में गिरी थीं। इसके अलावा, टोक्यो ने अपने क्षेत्र में चीनी हवाई और समुद्री उल्लंघनों का विरोध किया। एपेक सभा में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान भी शामिल होंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Nov 2022 14:43:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>लंपी स्किन जांच के लिए पूरे देश में सिर्फ तीन लैब</title>
                                    <description><![CDATA[ लंपी स्किन वायरस गोवंश की जान ले रहा है, लेकिन राजस्थान में पशुपालन विभाग संसाधनों के अभाव में लाचार बना हुआ है। प्रदेश में इस बीमारी की जांच के लिए लैब तक नहीं है। सैंपल लेने के बाद  उन्हें जांच के लिए भोपाल, बरेली और हिसार भेजा जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/only-three-labs-across-the-country-for-lumpy-skin-test/article-19982"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/lampi-skin-test-k-liye-desh-mei-3-lab..kota-news-22.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। लंपी स्किन वायरस गोवंश की जान ले रहा है, लेकिन राजस्थान में पशुपालन विभाग संसाधनों के अभाव में लाचार बना हुआ है। प्रदेश में इस बीमारी की जांच के लिए लैब तक नहीं है। सैंपल लेने के बाद उन्हें जांच के लिए भोपाल, बरेली और हिसार भेजा जा रहा है। इसकी रिपोर्ट आने में करीब दस दिन लग रहे हैं। इस कारण लंपी स्किन रोग से पीड़ित गोवंश को समय पर उचित उपचार नहीं मिल पाता है। कोटा से भी कुछ गोवंशों के सैम्पल जांच के लिए भेजे गए हैं। यहां पर है लैब लंपी स्किन रोग की जांच के लिए पूरे देश में केवल तीन ही लैब है। यह उत्तर प्रदेश के बरेली में इंडियन वेटनरनी रिसर्च इंस्टीटयूट, भोपाल की निशाद लैब और हरियाणा के हिसार में नेशनल रिसर्च सेंटर आॅफ इग्वाइन लैब स्थित है। इन लैबों में राजस्थान व गुजरात सहित पांच राज्यों के हजारों सैंपल भेजे जा रहे हैं। यहां से लैब काफी दूर होने से जांच रिपोर्ट आने में करीब दस दिन का समय लग रहा है। इस दौरान पशुपालन विभाग के चिकित्सक रोग की स्थिति देखकर ही उपचार कर रहे हैं। संभाग में अभी एक भी नहीं आया केस कोटा संभाग में लंपी बीमारी के अभी एक भी केस नहीं आया है। लेकिन यहां से संदिग्ध गायों के सैंपल लेब में भेजे है। रिपोर्ट आने का इंतजार है। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक सीएल मीणा ने बताया कि कोटा में अभी एक भी केस नहीं आया लेकिन पूरी सर्तकता बरती जा रही है। यह होता है लंपी स्किन रोग लंपी स्किन बीमारी मुख्य रूप से गोवंश को प्रभावित करती है। देसी गोवंश की तुलना में संकर नस्ल के गोवंश में लंपी स्किन बीमारी के कारण मृत्यु दर अधिक है। इस बीमारी से गोवंश में मृत्यु दर 1 से 5 प्रतिशत तक है। रोग के लक्षणों में बुखार, दूध में कमी, त्वचा पर गांठें, नाक और आंखों से स्राव आदि शामिल हैं। रोग के प्रसार का मुख्य कारण मच्छर, मक्खी और परजीवी जैसे जीव हैं। इसके अतिरिक्त इस बीमारी का प्रसार संक्रमित पशु के नाक से स्राव, दूषित फीड और पानी से भी हो सकता है। संक्रमित गोवंश में लंपी बीमारी की जांच के लिए राजस्थान में लैब नहीं है। सैंपलों को राज्य से बाहर स्थित लैबों में भेजा जाता है। कोटा से भी कुछ सैम्पल भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने में काफी समय लगता है। - एस. भावडेकर, पशु चिकित्सक</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Aug 2022 16:47:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title> 'मैं रहूं या न रहूं ये देश रहना चाहिए- अटल' बड़े पर्दे पर आएगी नजर, पंकज त्रिपाठी निभायेंगे अटल बिहारी वाजपेयी का किरदार</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी सिल्वर स्क्रीन पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का किरदार निभते नजर आ सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/whether-i-stay-or-not--this-country-should-remain--atal-will-be-seen-on-the-big-screen--pankaj-tripathi-will-play-the-character-of-atal-bihari-vajpayee/article-13916"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/att.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी सिल्वर स्क्रीन पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का किरदार निभते नजर आ सकते हैं।<br /><br />पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर एक फिल्म बनायी जा रही है,जिसका टाइटल 'मैं रहूं या न रहूं ये देश रहना चाहिए- अटल' है। अटल बिहारी वाजपेयी के ऊपर बन रही फिल्म के लिए मेकर्स ऐसे चेहरे को तलाश रहे थे कि जो बिल्कुल उनके रोल में फिट बैठ सके। चर्चा है कि पंकज त्रिपाठी , इस फिल्म में अटल बिहारी वाजपेयी का रोल करेंगे। अटल बिहारी वाजपेयी की इस फिल्म को विनोद भानुशाली, संदीप सिंह, सैम खान, कमलेश भानुशाली और विशाल गुरनानी को प्रोड्यूस करेंगे। यह फिल्म अटल बिहारी वाजपेयी पर लिखी गई किताब 'द अनटोल्ड वाजपेयी' पर आधारित होगी। यह एक पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म है, जिसकी शूटिंग अगले साल की शुरुआत में शुरू की जाएगी।इस फिल्म को अगले साल अटल बिहारी वाजपेयी की 99वीं जयंती 25 दिसंबर के मौके पर रिलीज किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jul 2022 17:07:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में बढ़ता कोरोना ग्राफ: 24 घंटे में 4245 मामले आए सामने </title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली।  देश में कोरोना वायरस संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या 119457  तक पहुंच गई है, जिनमें पिछले 24 घंटे में 4245 मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को यहां बताया कि गुरूवार सुबह सात बजे तक  11,44,489 टीके दिये जा चुके हैं। इनमें बीते 24 घंटे में दिए टीकों का आंकड़ा भी शामिल है, जो 198.33 करोड़ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/corona-graph-rising-in-the-country-4245-cases-were-reported/article-13806"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/corona10.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  देश में कोरोना वायरस संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या 119457  तक पहुंच गई है, जिनमें पिछले 24 घंटे में 4245 मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को यहां बताया कि गुरूवार सुबह सात बजे तक  11,44,489 टीके दिये जा चुके हैं। इनमें बीते 24 घंटे में दिए टीकों का आंकड़ा भी शामिल है, जो 198.33 करोड़ है।<br /><br /> मंत्रालय ने बताया कि इस दौरान कोविड से ग्रसित 14650 मरीज ठीक हुये हैं। इसी के साथ अभी तक कुल 42921977  मरीज कोविड मुक्त हो चुके हैं।देश में बीते 24 घंटे में कोरोना से हुई मौतों का सिलसिला भी जारी रहा। इस दौरान महामारी की चपेट में आकर 35 मरीजों की मौत हुई है। जिसके साथ ही मृतकों की कुल संख्या पांच लाख 525305 तक पहुंच गई है। इन नये आंकड़ों के साथ देश में दैनिक संक्रमण दर 4.32 प्रतिशत, स्वस्थ होने वालों की दर 98.52 प्रतिशत और मृत्यु दर 1.21 प्रतिशत है। देश में पिछले 24 घंटे में 4,38,005 कोविड परीक्षण किये गये हैं। अब तक कुल  86.53 करोड़ कोविड परीक्षण किये जा चुके हैं। <br /><br />केरल में कोरोना वायरस के 1014  सक्रिय मामले बढ़कर 30169  हो गये हैं। इससे निजात पाने वाले लोगों की संख्या 3080 बढ़कर 6559746 हो गयी है, जबकि मृतकों की संख्या 70073 है। महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 839 घटकर 19981 हो गयी  है जबकि 3974 और लोगों के स्वस्थ होने के बाद इससे  निजात पाने वाले लोगों  का आंकड़ा 7825114 तक पहुंच गया है और मृतकों  का आंकड़ा 147956 पर स्थिर है। कर्नाटक में सक्रिय मामलों की संख्या 83 बढ़कर 6481 हो गयी है जबकि 1044 और लोगों के स्वस्थ होने के बाद इससे निजात पाने वाले लोगों का आंकड़ा 3928397 तक पहुंच गया है। मृतकों का आंकड़ा 40122 है।<br /><br /> दिल्ली में सक्रिय मामले 83 बढ़कर 2590 हो गये हैं। राज्य में इस जानलेवा वायरस को 516 और लोगों ने मात दी, जिसके बाद कोरोना से मुक्त होने वालों की कुल संख्या बढ़कर 1909782 तक पहुंच गई। अभी तक इस महामारी से 26276 लोगों की मौत हो चुकी  है।<br /> तेलंगाना में सक्रिय मामले 129  बढ़कर 4882 हो गये हैं। कोविड को मात देकर स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या 434  बढ़कर 794944 हो गयी हैं। मृतकों का आंकड़ा 4,111 पर बरकरार है। गुजरात में सक्रिय मामले 129  बढ़कर 3724 हो गये हैं। कोरोना से निजात पाने वालों की कुल संख्या 1220682 हो गयी है। राज्य में कोविड-19 से अब तक 10948  लोग जान गंवा चुके हैं।<br /><br />देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सक्रिय मामलों की संख्या 168 घटकर 2401 रह गयी है। राज्य में इस जानलेवा वायरस को मात देने वालों की संख्या में 510 का इजाफा होने के बाद कुल संख्या बढ़कर 2066672 हो गयी है, इसी दौरान मृतकों की संख्या 23543 पर स्थिर रही। हरियाणा में सक्रिय मामले 84  घटकर 1955  हो गये हैं। इस दौरान 498 लोगों के स्वस्थ होने से महामारी से उबरने वाले मरीजों की कुल संख्या 1005762 हो गयी हैं, जबकि मृतकों का आंकड़ा 10627 पर बरकरार है। पंजाब में सक्रिय मामले नौ घटकर 1031 हो गये हैं। इस दौरान 196 लोगों के स्वस्थ होने से महामारी से उबरने वाले मरीजों की कुल संख्या 745063  हो गयी हैं, जबकि मृतकों का आंकड़ा 17781 पहुंच गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jul 2022 14:14:40 +0530</pubDate>
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