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                <title> JLF - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> JLF RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यूरोपीय देशों को अपनी रक्षा के लिए छोड़नी होगी अमेरिका पर पूर्ण निर्भरता, सिकोरस्की ने कहा- यूक्रेन पर हमला, यूरोप की शांति को खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पोलैंड के उपप्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर यूरोप की सुरक्षा और वैश्विक भरोसे पर चिंता जताई। उन्होंने युद्ध के लिए पुतिन को जिम्मेदार ठहराया और यूक्रेनी शरणार्थियों को दिए गए पोलैंड के मानवीय समर्थन का उल्लेख किया। सिकोरस्की ने 1994 के बुडापेस्ट ज्ञापन की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/european-countries-will-have-to-give-up-complete-dependence-on/article-140036"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(1)36.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में फ्रंट लॉन पर आयोजित सत्र ‘ए कॉन्टिनेंट इन क्राइसिस : रशिया, यूक्रेन एंड द यूरोपियन स्टोरी’ में पोलैंड के उपप्रधानमंत्री और विदेशी मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की की बातों ने पूरे फेस्टिवल को एक गंभीर वैश्विक विमर्श की ओर मोड़ दिया। यह सत्र केवल रूस-यूक्रेन युद्ध की चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें यूरोप की सामूहिक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय भरोसे की विश्वसनीयता और बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन पर गहरी और स्पष्ट टिप्पणियां सामने आईं। सिकोरस्की की भाषा कूटनीतिक होने के बावजूद तीखी थी और उनके वक्तव्य यूरोप की वर्तमान चिंता और भविष्य की आशंकाओं को साफ  तौर पर उजागर कर रहे थे।</p>
<p><strong>जान बचाने को यूक्रेनी नागरिक पहुंचे पोलैंड :</strong></p>
<p>यूक्रेन के पड़ोसी देश के रूप में पोलैंड की स्थिति पर बात करते हुए सिकोरस्की ने मानवीय संकट की गंभीर तस्वीर खींची। युद्ध शुरू होने के बाद लाखों यूक्रेनी नागरिक जान बचाने के लिए पोलैंड पहुंचे। इतने बड़े पैमाने पर शरणार्थियों के आवास, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतें सुनिश्चित करना आसान नहीं था, फिर भी पोलैंड ने इसे मानवीय दायित्व के रूप में निभाया।</p>
<p><strong>सिकोरस्की ने 1994 के बुडापेस्ट ज्ञापन का किया जिक्र :</strong></p>
<p>अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए सिकोरस्की ने 1994 के बुडापेस्ट ज्ञापन का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि शीत युद्ध के बाद यूक्रेन ने दुनिया के सबसे बड़े परमाणु हथियार भंडारों में से एक को छोड़ दिया था। बदले में उसकी संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा का आश्वासन दिया गया था।</p>
<p><strong>पुतिन को ठहराया युद्ध का जिम्मेदार :</strong></p>
<p>सिकोरस्की ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह संघर्ष रणनीतिक विवशता से अधिक व्यक्तिगत अहंकार से प्रेरित है। पुतिन ने अपने गौरव और प्रभुत्व की भावना को अंतरराष्ट्रीय नियमों, संधियों और पड़ोसी देशों की संप्रभुता से ऊपर रखा है। यूक्रेन पर हमला केवल एक देश पर आक्रमण नहीं रहा। बल्कि इसने पूरे यूरोप की शांति और स्थिरता को खतरे में डाल दिया।   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 10:41:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रचना का एक्सटेंशन बन सकता है एआई, एक्सप्रेशन नहीं, प्रसून जोशी ने कहा- आविष्कार को जुगाड़ कहना हमारी सोच की सीमा है </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में प्रसून जोशी ने कहा कि आविष्कार को ‘जुगाड़’ कहना बंद होना चाहिए। उन्होंने रचनात्मकता, कविता, भाषा और एआई पर विचार रखते हुए कहा कि एआई मानव अनुभवों का ही विस्तार है। जोशी ने कविता को आंतरिक यात्रा बताया और कहा, भाषा मेरी हिंदी है, अंग्रेजी मेरा हुनर।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ai-can-become-an-extension-of-creation-not-an-expression/article-140034"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)39.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आविष्कार को जुगाड़ कहना बंद होना चाहिए, यह बात लेखक, गीतकार और रचनात्मक विचारक प्रसून जोशी ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पूरे आत्मविश्वास और गहराई के साथ कही। रविवार की सुबह फ्रंटलॉन में आयोजित सत्र इमेजिन: द न्यू हॉरिजन्स ऑफ क्रिएटिविटी में वे किश्वर देसाई के साथ संवाद में थे। यह बातचीत केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या रचनात्मकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि मनुष्य की असीम संभावनाओं, भाषा, मां, बचपन, संस्कृति और अनुभव के सत्य तक फैलती चली गई। प्रसून जोशी ने स्पष्ट कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में आर्टिफिशियल जैसा कुछ नहीं है। वहां जो भी है, वह मनुष्य द्वारा ही दिया गया डेटा है, मानव अनुभवों का संग्रह। एआई के पास वह है जो कहा जा चुका है, जबकि मनुष्य के पास वह भी है जो अभी कहा ही नहीं गया है।</p>
<p><strong>कविता मंजिल नहीं, एक आंतरिक यात्रा :</strong> कविता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कविता किसी मंजिल का नाम नहीं, वह यात्रा है, लेकिन उसकी मंजिल रचनाकार के भीतर ही रहती है। किसी रचना का जितना महत्व होता है, उसका निर्माण-प्रक्रिया उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उस प्रक्रिया में जो आनंद, जो खुरदरापन है, वहीं रचना की आत्मा है।  </p>
<p><strong>भाषा मेरी हिंदी, लेकिन अंग्रेजी मेरा हुनर : </strong>जोशी ने कहा कि भाषा व्यक्ति के विश्वास और विचारों को झटका देती है। उन्होंने कहा कि भाषा तो एक ही होती है, वह आपकी मां होती है, जिससे आप नाराज भी हो सकते हैं और प्यार भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा, भाषा मेरी हिंदी है, लेकिन अंग्रेजी मेरा हुनर है। विज्ञापन की दुनिया में हिंदी को बोर्डरूम तक पहुंचाने पर उन्होंने कहा कि एक समय था जब सब बोलते थे और वे सिर्फ सुनते थे, आज वे बोलते हैं और सब सुनते हैं। एचएमटी हिंदी मीडियम टाइप कहे जाने के दर्द को भी उन्होंने साझा किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 10:00:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जेएलएफ का चौथा दिन : सत्ता, न्याय और डिजिटल भविष्य पर वैश्विक विमर्श, अवकाश के दिन दिखी खासी भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) के चौथे दिन गंभीर चर्चाओं और व्यापक संवाद की श्रृंखला जारी रही। साहित्य, राजनीति, कानून और तकनीक से जुड़ी प्रमुख आवाजें एक साथ आईं और सत्ता, न्याय, नेतृत्व तथा उन कहानियों पर विचार किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/fourth-day-of-jlf-global-discussion-on-power-justice-and/article-140027"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/etws.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) के चौथे दिन गंभीर चर्चाओं और व्यापक संवाद की श्रृंखला जारी रही। साहित्य, राजनीति, कानून और तकनीक से जुड़ी प्रमुख आवाजें एक साथ आईं और सत्ता, न्याय, नेतृत्व तथा उन कहानियों पर विचार किया। प्रसिद्ध उपन्यासकार रिचर्ड फ्लैनगन ने टिम एडम्स के साथ बातचीत में पर्यावरणीय संकट, राजनीतिक उथल-पुथल और विवादित इतिहासों के दौर में साहित्य की नैतिक जरूरत पर विचार किया।</p>
<p>वहीं, फ्रंट लॉन में आयोजित सत्र ‘ए कॉन्टिनेंट इन क्राइसिस : रशिया, यूक्रेन एंड द यूरोपियन स्टोरी’ में पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोर्स्की ने नवतेज सरना के साथ यूरोप की राजनीतिक दिक्कतों का तीखा विश्लेषण किया। दिन की सबसे महत्वपूर्ण बातचीतों में से एक सत्र ‘आइडियाज ऑफ जस्टिस’ रहा। जिसमें भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.वाई.चंद्रचूड़ ने वीर सांघवी के साथ संवाद किया।</p>
<p>अपनी पुस्तक व्हाय द कॉन्स्टिट्यूशन मैटर्स के संदर्भ में चर्चा करते हुए लोकतंत्र में न्याय के वास्तविक अर्थ को समझाया। दिन का साहित्यिक समापन ‘द मर्डर डायलॉग’ सत्र के साथ हुआ। जिसमें फि ल्मकार और अभिनेता अनिर्बान भट्टाचार्य तथा लेखक रुद्रनील सेनगुप्ता ने अमृता महाले के साथ संवाद किया। बातचीत में अपराध कथा, सिनेमाई कहानी कहने की शैली और इस विधा के केंद्र में मौजूद नैतिक जटिलताओं पर चर्चा हुई।</p>
<p><strong>हर उम्र के लोगों में दिखा साहित्य का उत्साह :</strong></p>
<p>जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में रविवार को हर उम्र के लोगों की अच्छी भीड़ देखने को मिली। दोपहर दो बजे यहां प्रवेश द्वार से बाहर तक लोग कतार में लगकर प्रवेश लेते दिखाई दिए।</p>
<p><strong>जेएलएफ में आज यह सत्र रहेंगे खास :</strong></p>
<p>जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन सोमवार को एलिस ऑसवाल्ड: ए जर्नी थू्र वर्ड्स एंड वर्ल्ड्स : एलिस ऑसवाल्ड से जीत थायिल की बातचीत, सेलिब्रेटिंग मांगा एंड ग्राफि क नोवेल्स : योशितोकी ओइमा, उजान दत्ता और अबीर कपूर से राधिका झा की बातचीत, दुभाषिया तोमोको किकुची के साथ द लेजेंड ऑफ  कुमारिकंडम: आनंद नीलकंठन से मृदुला रमेश की बातचीत और लेजेंडा : द रियल वीमेन बिहाइंड द मिथ्स में  जनीना रामिरेज से नारायणी बासु की बातचीत जैसे सत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/fourth-day-of-jlf-global-discussion-on-power-justice-and/article-140027</link>
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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 09:21:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पधारो म्हारे देश… साहित्य, संस्कृति और विचारों का उत्सव बना जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल, सीएम शर्मा- गुलदस्ते नहीं, ज्ञान की खुशबू फैलाने वाली पुस्तकें देनी चाहिए सम्मान में</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का उद्घाटन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया। उन्होंने आमजन से साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़कर योगदान देने की अपील की। सीएम ने कहा कि पुस्तक ज्ञान बांटती है और समाज को दिशा देती है। उन्होंने राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/visit-our-country%E2%80%A6-jaipur-literature-festival-became-a-festival-of/article-139674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(1)27.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान की अतिथि-सत्कार की परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल एक बार फिर देखने को मिला। “पधारो म्हारे देश” की भावना के साथ इस मंच पर देश-विदेश के विद्वान, लेखक और विचारक एकत्र हुए और अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आमजन से देश-प्रदेश की संस्कृति और साहित्य से अधिक से अधिक जुड़कर इसके विकास में अपना अमूल्य योगदान देने की अपील की।</p>
<p>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान हमेशा से साहित्य, कला और विचारों की भूमि रहा है, जहां परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।</p>
<p>सीएम शर्मा ने कहा कि सम्मान के प्रतीक के रूप में गुलदस्ता नहीं, बल्कि पुस्तक भेंट की जानी चाहिए। गुलदस्ता कुछ दिनों में मुरझा जाता है, लेकिन पुस्तक वर्षों तक ज्ञान बांटती है और समाज को दिशा देती है। उन्होंने कहा कि साहित्य मनुष्य को सकारात्मक सोचने की शक्ति देता है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने राजस्थान की विविधताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महल, किले, हवेलियां, रेगिस्तान, झीलें, अभ्यारण्य और बर्ड सेंचुरी प्रदेश की पहचान हैं, जिन्हें देखने दुनियाभर से लोग आते हैं। पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने पेड़, नदियों और पहाड़ों की पूजा कर प्रकृति को सम्मान दिया है। इस विरासत को सहेजना और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 14:51:27 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ऐश्वर्या वैध रघुनाथन के सुरों के साथ JLF का शुभारंभ, मॉर्निंग म्यूजिक की शास्त्रीय प्रस्तुति ने साहित्य प्रेमियों को किया मंत्रमुग्ध</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत मॉर्निंग म्यूजिक सत्र में शास्त्रीय गायिका ऐश्वर्या वैध रघुनाथन की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुई। उनकी शास्त्रीय गायकी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। फेस्टिवल में फ्रंट लॉन, बैठक, चारबाग व सूर्यमहल सहित पांच वैन्यू पर विविध साहित्यिक सत्र आयोजित हो रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jlf-inaugurated-with-the-tunes-of-aishwarya-vaidya-raghunathan-classical/article-139630"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/annndd.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) का आगाज़ इस वर्ष मॉर्निंग म्यूजिक सत्र में शास्त्रीय गायिका ऐश्वर्या वैध रघुनाथन की भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ हुआ। सुरों की शुद्धता और रागों की आत्मीयता से सजी यह प्रस्तुति साहित्य और संगीत प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण रही।</p>
<p>सुबह के शांत वातावरण में ऐश्वर्या वैध रघुनाथन की शास्त्रीय गायकी ने श्रोताओं को भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ा। बड़ी संख्या में मौजूद दर्शकों ने न केवल इस प्रस्तुति का आनंद लिया, बल्कि तालियों के साथ कलाकार का उत्साहवर्धन भी किया।</p>
<p>फेस्टिवल परिसर में दर्शकों की सुविधा और विविध सत्रों के आयोजन के लिए फ्रंट लॉन, बैठक, चारबाग, सूर्यमहल सहित कुल पांच वैन्यू बनाए गए हैं। विभिन्न मंचों पर साहित्य, कला और विचारों का संगम पूरे उत्साह के साथ देखने को मिल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:27:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>कविता एक इत्र की तरह है, जिसकी शीशी में से इत्र उड़ भी जाए तो उसमें महक बाकी रह जाती है : मिश्रा</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में  अंतिम दिन दरबार हॉल में दोपहर 12 बजे हुए सत्र ‘कलिंग एंड द वॉर विदिन : बिना कलिंग विजय के’ में लेखक यतीन्द्र मिश्रा ने कहा कि कविता मेरा पहला प्यार है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/poetry-is-like-a-perfume-even-if-the-perfume-fly/article-103042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/untitled-design-(21).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में सोमवार को अंतिम दिन दरबार हॉल में दोपहर 12 बजे हुए सत्र ‘कलिंग एंड द वॉर विदिन : बिना कलिंग विजय के’ में लेखक यतीन्द्र मिश्रा ने कहा कि कविता मेरा पहला प्यार है। ये एक ऐसी विधा है, जिसमें वह सबकुछ कहा जा सकता है, जो हम कहना चाहते हैं। कविता एक ऐसे इत्र की तरह है, जिसकी शीशी में से इत्र उड़ भी जाए, तब भी उसमें महक बाकी रह जाती है। उन्होंने प्रज्ञा तिवारी के साथ संवाद के दौरान कहा कि मेरा बचपन भक्ति कविताएं सुनते हुए गुजरा है। हमारे भक्ति संगीत में इतनी शक्ति है कि आज मीरा और नरसी को हुए पांच सौ साल गुजर गए हैं, लेकिन उनके भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ और ‘पायोजी मैंने राम रतन धन पायो’ आज भी लोक में प्रचलित है। उनका कहना था कि कोई कवि या कविता इसलिए महान या बड़ी नहीं होती कि वह किसी फेस्टिवल में सुनी जाए या उसे किसी बड़े पुरस्कार से सम्मानित किया जाए। आम आदमी के लिए लिखी गई कविता जिसे हर कोई आसानी से समझ ले, वही बड़ी कविता होती है।</p>
<p><strong>नारा बन चुकी कविताएं लिखी जा रही हैं...</strong></p>
<p>यतीन्द्र ने कहा कि आज के दौर की कविताओं की बात करते हुए कहा कि आजकल नारा बन चुकी कविताएं लिखी जा रही है। कविता को इतना टिपिकल मत बनाओं। कविता को रस की तरह लिखना चाहिए। तुलसीदास की एक चौपाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गांव-देहात में अनपढ़ किसान जब बरसात के आने में देर हो जाती है और खेती सूखने लगती हैं तो कहते हैं ‘का बरसा जब कृषि सुखाने’। अब उन्हें यह बिल्कुल पता नहीं है कि यह तुलसीदास जी ने रामचरित मानस के बालकाण्ड़ में सीता स्वयंवर के समय कहीं है, लेकिन कविता की शक्ति यह है कि वो अंचल में कहावत की तरह प्रचलित हो जाए। मैं श्रेष्ठ लिखना पसंद करता हूं। आप भी वो लिखें जो आपको पसंद हो जिन पर आपका विश्वास हो। </p>
<p><strong>मां की अनुपस्थिति को मैंने जिया कविता में :</strong></p>
<p>यतीन्द्र ने मां का जिक्र करते हुए कहा कि हाल ही मैंने मेरी मां को खोया है। मैं अपनी मां के बहुत नजदीक था। मां की अनुपस्थिति को मैंने अपनी कवितापर जिसमें पंद्रह कविताएं हैं। ये कविताएं मैंने अपनी मां के लिए लिखी है। वे जहां भी होंगी इन्हें पढ़ रही होंगी। यह मेरी मां को श्रद्धांजलि है। उन्होंने उपस्थित युवाओं से कहा कि मैं अपनी मां को बहुत प्यार करता हूं और उन्हें खोकर उदास हूं। मैं जानता हूं कि मां-बाप हमेशा के लिए नहीं होते, लेकिन आपके पेरेंट्स जितने दिन आपके साथ रहें, अच्छा है। अपने प्रियजनों को उनके जाने के बाद भुला देना प्रेम नहीं है। दु:ख वह नहीं है, जिसे आप भुला दें, बल्कि आपने उन्हें बिसरा दिया तो मतलब आपने उन्हें प्रेम किया ही नहीं।<br /> </p>
<p><strong>बाजार से मां के लिए उनकी पसंद की चीजें ले जाया करता था...</strong></p>
<p>मां से अपने रिश्ते की अहमियत को बताते हुए यतीन्द्र ने कहा कि मैं जब भी घर से बाहर किसी दूसरे शहर में जाता था तो उस शहर के बाजार से मां के लिए उनकी पसंद की चीजें जैसे सुरमा, चूड़ी, बिंदी, परांदे, लहरिया, पचरंगी, चुनरी आदि जरूर लेकर आता था। इसके लिए कई बार मुझे आठ-आठ घंटे भी दुकानों पर बैठने पड़ता था, लेकिन मेरी इच्छा रहती थी कि मैं अपनी मां के लिए उनकी पसंद की कोई चीज लेकर जाऊं। जबकि मेरी मां ज्यादा मेकअप नहीं करती थी। मैं अपनी मां के लिए दुनिया की हर चीज खरीदकर लाना चाहता था। यहां तक कि जामुन और अमरूद जो मेरे शहर अयोध्या में भी मिल जाते है, लेकिन मैं अपनी मां के लिए आगरा, बेंगलूरु और इलाहबाद के अमरूद तथा जामुन लेकर आता था।में जिया है। इस संग्रह का एक पूरा खंड मां </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Feb 2025 11:09:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>जेएलएफ जैसे आयोजनों से मिलता पर्यटनों को बढ़ावा : सचिन पायलट </title>
                                    <description><![CDATA[ राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में भाग लेने के लिए क्लार्क्स आमेर पहुंचे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sachin-pilot-promotes-tourists-from-events-like-jlf%C2%A0/article-102716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/78-(4).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में भाग लेने के लिए क्लार्क्स आमेर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि वे हर साल इस फेस्टिवल में आते हैं और इसे अपने लिए गर्व की बात मानते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जेएलएफ एक ऐसा मंच है, जहां विभिन्न विषयों पर खुलकर चर्चा होती है और विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है। भले ही सभी की राय अलग हो, लेकिन बातचीत और विचार-विमर्श जरूरी है। सचिन पायलट ने कहा कि दुनियाभर में साहित्य उत्सव आयोजित किए जाते हैं, लेकिन यह गर्व की बात है कि जेएलएफ की शुरुआत जयपुर से हुई। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस आयोजन को और भव्य बनाया जाए, क्योंकि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और राज्य की समृद्ध कलाए संस्कृति और विरासत को संजोने में मदद मिलती है। उन्होंने इस आयोजन को रोजगार सृजन से भी जोड़ा और कहा कि ऐसे महोत्सवों से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलते हैं। पायलट ने उत्तर प्रदेश सरकार पर महाकुंभ मेले में हुई अव्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए वीआईपी कल्चर पर सवाल उठाए।</p>
<p><strong>महाकुंभ और व्यक्तिगत आस्था पर प्रतिक्रिया :</strong></p>
<p>महाकुंभ मेले में भाग लेने को लेकर पूछे गए सवाल पर सचिन पायलट ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी धार्मिक आस्था होती है और इसे प्रदर्शित करने या इस पर राजनीति करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में हर व्यक्ति को अपने धर्म और आस्था के पालन की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2025 10:26:03 +0530</pubDate>
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