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                <title>pollution - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>दिल्ली में कांग्रेस चलाएगी &quot;बेहतर दिल्ली&quot; अभियान : प्रदूषण-पानी समेत कई मुद्दों पर होगा आंदोलन, पार्टी ने जारी किया पोस्टर </title>
                                    <description><![CDATA[युवा कांग्रेस 1 मई से राजधानी में "बेहतर दिल्ली" अभियान शुरू करेगी। अजय माकन और उदय भानु चिब ने पोस्टर जारी कर प्रदूषण, पानी की किल्लत और कूड़ा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर आंदोलन का एलान किया। इस जनसंपर्क अभियान का उद्देश्य शीला दीक्षित के 'ग्रीन सिटी' विजन को बहाल करना और शहरी भ्रष्टाचार को उजागर करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-will-run-better-delhi-campaign-in-delhi-there-will/article-151583"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/congress3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। युवा कांग्रेस की ओर से राजधानी दिल्ली में एक मई से "बेहतर दिल्ली" अभियान शुरू किया जायेगा। इस अभियान के तहत शहरी समस्याओं को लेकर जनसंपर्क अभियान चलाया जायेगा, लोगों के सुझाव लिये जायेंगे और विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किया जायेगा। शुक्रवार को कांग्रेस ने इस कार्यक्रम का पोस्टर जारी किया। कांग्रेस कोषाध्यक्ष अजय माकन ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि युवा कांग्रेस ने शहरों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह व्यापक कार्यक्रम तैयार किया है। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है, इसलिए उनकी समस्याओं के समाधान के लिए यह पहल की जा रही है। दिल्ली से इसकी शुरुआत होगी और आगे अन्य शहरों में भी इसे विस्तार दिया जाएगा।</p>
<p>युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि गीग वर्कर्स समेत शहरी नागरिकों की समस्याओं को लेकर संगठन लगातार संघर्ष कर रहा है और आगे भी करेगा। उन्होंने बताया कि "बेहतर दिल्ली" अभियान के तहत प्रदूषण, पानी की कमी, लैंडफिल साइट, जलभराव, डेंगू-चिकनगुनिया, कूड़ा प्रबंधन, यमुना प्रदूषण, भ्रष्टाचार और ट्रैफिक जाम जैसे मुद्दों पर आंदोलन चलाया जाएगा। इसके साथ ही लोगों से सुझाव भी लिए जाएंगे।</p>
<p>दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि यह अभियान युवा कांग्रेस के नेतृत्व में शुरू किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय दिल्ली को "ग्रीन सिटी" के रूप में विकसित किया गया था, जबकि वर्तमान में शहर कई समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार केवल घोषणाएं कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात खराब हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि एक मई से शुरू होने वाला यह अभियान पहले दिल्ली में चलेगा और उसके बाद देश की अन्य राजधानियों में भी इसे लागू किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 15:13:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली में हवा में सुधार: धीरे-धीरे बढ़ रहा तापमान, हल्की बारिश के आसार, वायु गुणवत्ता खराब बनी रही</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली-NCR में बुधवार, 18 फरवरी को हल्की बारिश की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बादल छाए रहने के साथ तापमान बढ़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/air-quality-in-delhi-is-improving-temperature-is-rising-gradually/article-143329"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जबकि पूरे उत्तर भारत में सर्दी का असर अभी बना हुआ है। इस हफ्ते के आखिर में इस इलाके में हल्की बारिश होने के आसार हैं, जिससे मौसम में थोड़ा बदलाव आएगा। भारत मौसम विभाग के मुताबिक, बुधवार के आसपास हल्की बारिश होने का अनुमान है।</p>
<p>भारी बारिश की हालांकि कोई चेतावनी जारी नहीं की गयी है। एक नये पश्चिमी विक्षोभ के हिमालयी बेल्ट पर असर डालने का अनुमान है, जिससे बादल छाये रहेंगे और पर्वतीय इलाकों में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। इस बीच, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में दिन के तापमान में लगातार बढ़ोतरी होने का अनुमान है।</p>
<p>प्रदूषण के मामले में, लोग खराब वायु गुणवत्ता से जूझ रहे हैं। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार रविवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 216 था, जो खराब श्रेणी में आता है। हवा की रफ्तार कम होने की वजह से प्रदूषक जमा हो गये हैं, जिससे हवा गुणवत्ता में ज्यादा सुधार नहीं हो पा रहा है। </p>
<p>पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने बताया कि वायु गुणवत्ता स्तर में पहले थोड़ा सुधार हुआ था, लेकिन शहर की हवा अभी भी ठीक नहीं है। वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणाली ने बताया है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक 180 के आस-पास रह सकता है, जो मध्यम श्रेणी के दायरे में चला जाएगा, लेकिन अभी तक कोई खास राहत नहीं मिली है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 14:02:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सांसों पर संकट, थर्मल की बूढ़ी इकाइयां शहर को बना रही बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[चिमनियों से उठता धुआँ थर्मल प्लांट के 4-5 किमी क्षेत्र तक शहर की हवा को प्रदूषित कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/breathing-crisis--the-aging-thermal-power-plant-units-are-making-the-city-sick/article-142152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा नगरी के नाम से पहचाने जाने वाले कोटा की आबो-हवा अब जहरीली होती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह कोटा थर्मल पावर प्लांट की वे बूढ़ी इकाइयां हैं, जो अपनी तय उम्र पूरी कर चुकी हैं, लेकिन आज भी धड़ल्ले से चलाई जा रही हैं। 1983 में स्थापित थर्मल की यूनिट1 और यूनिट 2 अपनी निर्धारित अवधि से करीब 10 साल ज्यादा समय निकाल चुकी हैं । इसके बावजूद इनसे निकलने वाला धुआं, राख और गर्म पानी शहरवासियों की सांसों और चंबल नदी दोनों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। चंबल किनारे बसें लोगों का कहना है कि थर्मल से 4 से 5 किलोमीटर की परिधि तक सीधा असर दिख रहा है। हवा में घुले सूक्ष्म कण सांसों के जरिए शरीर में जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों ने सफेद कपड़े पहनना तक बंद कर दिया है,क्योंकि छत पर कपड़े सुखाने पर कुछ ही देर में उन पर राख जम जाती है। चिमनियों से उठता धुआं दिनभर शहर की हवा को दूषित कर रहा है।अवधी पार कर चुकी इकाइयों का असर अब युवाओं पर भी साफ दिखने लगा है।</p>
<p><strong>कम उम्र  सांस, आंख और त्वचा की समस्याएं</strong><br />किशोरपुरा क्षेत्र की 35 वर्षीय रिंकू कंवर बताती हैं, सीढ़ियां चढ़ते ही सांस फूलने लगती है। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। डॉक्टर कहते हैं कि हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां कम उम्र के लोग भी सांस, आंख और त्वचा संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। थर्मल से निकलने वाला प्रदूषण केवल हवा तक सीमित नहीं है। संयंत्र से छोड़ा जा रहा गर्म और दूषित पानी सीधे चंबल नदी में मिलाया जा रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे नदी का तापमान बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर जलीय जीवों और चंबल की जैव विविधता पर पड़ रहा है। मगर प्रशासन और थर्मल प्रबंधन इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।</p>
<p><strong>बड़ा सवाल फ्लू गैस डी-सल्फराइजेशन (एफजीडी) प्लांट नहीं</strong><br />नियमों के अनुसार थर्मल में यह प्लांट लगना चाहिए था, ताकि सल्फर डाइआॅक्साइड जैसे जहरीले गैसों का उत्सर्जन कम हो सके। लेकिन आज तक यह प्लांट पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया। नतीजा यह है कि शहर की सांसों में जहर लगातार घुलता जा रहा है। किशोरपुरा, शिवपुरा, पाटनपोल, साबरमती कॉलोनी, केथूनीपोल, शक्ति नगर, दादाबादी, श्रीनाथपुरम से लेकर सकतपुरा और नांता तक राख का फैलाव देखा जा रहा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रात में खुले में सोना तो दूर, दिन में घरों की खिड़कियां खोलना भी मुश्किल है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।</p>
<p><strong>प्रभाव जो देखे जा रहे</strong><br />-5 किमी तक राख और धुएं का फैलाव।<br />-सफेद कपड़ों पर जम रही काली परत।<br />-आंख और स्वांस के रोगियों को बढ रही परेशानी।<br />-थर्मल के गर्म पानी को सीधे नदी में मिलाने से चंबल की जैव विविधता पर भी संकट बढ़ रहा है, थर्मल से डिस्चार्ज पानी के साथ आॅयल की मात्रा भी नदी में आती है, कुछ महीने पहले भी किशोरपुरा की तरफ काफी सारी मरी मछिलयां पानी पर पडी़ हुई देखी गई थी ।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong><br />थर्मल से निकलने वाले धुएं में कईं प्रकार के टॉक्सिस औैर पार्टिकल होते है दमा ,फेफड़ों से सम्बन्धित बिमारी वाले रोगियों में यह गम्भीर समस्याएं पैदा कर सकता है।<br /><strong>- डॉ. राजेश ताखर,  श्वास व एलर्जी रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p>अवधी पार कर चुकी थर्मल इकाइयों को चलाना बेहद खतरनाक है। बिना ट्रीटमेंन्ट प्लांट के सल्फर और पार्टिकुलेट मैटर सीधे हवा में जा रहे हैं। इससे श्वसन रोगों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। साथ ही गर्म पानी नदी में छोड़ने से पानी में आक्सीजन की कमी हो जाती है। जलीय जीवों के विकास में बाधा तो होती ही साथ ही कई अन्य बुरे प्रभाव भी जन्म लेने लगते है यह पर्यावरणीय अपराध की श्रेणी में आता है। कोटा की आबो-हवा और चंबल की सेहत अब निर्णायक मोड़ पर है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को चुकाना पड़ेगा।<br /><strong>-अनिल रावत, सेवानिवृत्त वैज्ञानिक, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</strong></p>
<p>हमारे यहां पर जिला प्रदूषण बोर्ड की टीम द्वारा समय समय पर सेम्पलिंग करवायी जाती है, जिसकी रिपोर्ट भी आगे जाती है।<br /><strong>-शिखा अग्रवाल, मुख्य अभियन्ता कोटा थर्मल</strong></p>
<p>चम्बल के पानी और हवा की सेम्पिलंग करने के लिये हमारी टीमें लगातार जाती रहती है। जिसकी अपडेट पोर्टल पर डाल दी जाती है ।<br /><strong>-योग्यता सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी जिला प्रदूषण बोर्ड, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 14:54:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वायु प्रदूषण राष्ट्रीय समस्या : निगरानी के लिए बने एनसीएपी का कानूनी आधार, कांग्रेस ने कहा- वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के साथ हो तत्काल पुनर्गठन </title>
                                    <description><![CDATA[एनसीएपी को नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में यह एक नोशनल क्लीन एयर प्रोग्राम बनकर रह गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/legal-basis-for-ncap-made-to-monitor-air-pollution-national/article-139151"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/jairam-ramesh-2-(2).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि वायु प्रदूषण राष्ट्रीय समस्या बन गई है। इसलिए इसकी निगरानी के लिए बने राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम (एनसीएपी) का कानूनी आधार और मजबूत कर अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के साथ ही इसका तत्काल पुनर्गठन किया जाना चाहिए। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने यहां एक बयान में एनसीएपी की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि सैटेलाइट डेटा आधारित इस अध्ययन के अनुसार देश के 4,041 नगरों में से 1,787 शहर बीते 5 वर्षों में लगातार राष्ट्रीय मानकों से अधिक प्रदूषित रहे है। इसके बावजूद एनसीएपी के तहत केवल 130 शहरों को शामिल किया गया है, जो गंभीर रूप से प्रदूषित शहरों का महज 4 प्रतिशत है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एनसीएपी को नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में यह एक नोशनल क्लीन एयर प्रोग्राम बनकर रह गया है। इससे जुड़े 130 शहरों में से 28 शहरों में आज तक वायु गुणवत्ता मापन के निगरानी स्टेशन नहीं हैं और जहाँ हैं, वहां भी प्रदूषण का स्तर बेहद चिंताजनक है। कांग्रेस नेता ने एनसीएपी कानूनी श्रेणी देने की मांग की और कहा कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन की सख्त व्यवस्था के साथ ही एनसीएपी की मौजूदा फंडिंग व्यवस्था को बढ़ाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि वर्तमान में इसके लिए लगभग 10,500 करोड़ रुपये के बजट को 131 शहरों में बांटा जा रहा है, जबकि वास्तविक जरूरत इससे 10 से 20 गुना अधिक की है। उन्होंने यह भी कहा कि एनसीएपी को कम से कम 25,000 करोड़ रुपये देकर देश के 1,000 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों और कस्बों वह इसके दायरे में लाया जाना चाहिए।</p>
<p>रमेश ने कहा कि एनसीएपी का प्रदर्शन मापने का पैमाना पीएम 2.5 स्तर होना चाहिए और इसका फोकस ठोस ईंधन के जलने, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक प्रदूषण जैसे प्रमुख स्रोतों पर केंद्रित किया जाना चाहिए। कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में इस साल के अंत तक एफजीडी अनिवार्य रूप से लगाने, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की स्वतंत्रता बनाये रखने और मोदी सरकार में बने जन विरोधी पर्यावरण कानून संशोधनों को वापस लेने की भी मांग दोहराई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार संसद में वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों को बार-बार कमतर दिखाने की कोशिश कर अपनी अक्षमता और लापरवाही को छिपाने का प्रयास करती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 16:33:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>Delhi-NCR में घने कोहरे और प्रदूषण की दोहरी मार, AQI 'खराब', आईजीआई हवाईअड्डे पर उड़ान में देरी</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में सोमवार सुबह घने कोहरे और 262 एक्यूआई (AQI) के साथ वायु गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में रही। कम दृश्यता के कारण आईजीआई एयरपोर्ट पर कई उड़ानें प्रभावित हुईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/double-whammy-of-dense-fog-and-pollution-in-delhi-ncr-flight/article-138435"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/delhi-ncr.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार सुबह घने कोहरे की चादर छायी रही। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई)खराब श्रेणी में बना रहा, जिससे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाईअड्डे पर उड़ान संचालन में बाधा आयी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, सुबह आठ बजे तक दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 260-262 रहा और लगातार दूसरे दिन भी यह <br />खराब श्रेणी में बना रहा। कई इलाकों में प्रदूषण स्तर चिंताजनक रहा।</p>
<p>बता दें कि अक्षरधाम में एक्यूआई 294 रिकॉर्ड किया गया, तो आईटीओ में 253-256 दर्ज किया गया। दोनों 'खराब' श्रेणी में हैं। आनंद विहार में ज्यादा खराब देखी गयी, जहां एक्यूआई 320 रहा। इससे यह 'बहुत खराब' श्रेणी में आया। चांदनी चौक सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक था, जहां एक्यूआई 337 रहा। अन्य स्थान जैसे अलीपुर (275), बुराड़ी (216), द्वारका सेक्टर-8 (288) और मुंडका (281) भी 'खराब' श्रेणी में रहे। वहीं, आया नगर (178), बवाना (195), आईजीआई हवाईअड्डा (153), आईआईटी दिल्ली (192), लोधी रोड (182) और एनएसआईटी द्वारका (171) में 'मध्यम' वायु गुणवत्ता स्तर दर्ज किया। घने कोहरे और धुंध से सुबह दृश्यता कम कर दी। इस कारण आईजीआई हवाईअड्डे पर कई उड़ानें देरी से उड़ी। अधिकारियों ने यात्रियों को यात्रा से पहले उड़ान का शेड्यूल जांच करने की सलाह दी है।</p>
<p>सर्दियों के मौसम में कम तापमान, शांत हवाएं और हवा में अधिक नमी के कारण प्रदूषक सतह के पास ही जमा हो गये हैं। इससे वायु गुणवत्ता लंबे समय से खराब बनी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लगातार बना रहने वाला धुंध बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले लोगों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, हवा की गुणवत्ता में आये सुधार के मद्देनजर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) उप-समिति ने शुक्रवार शाम को दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों से 'स्टेज-3' के प्रतिबंध हटा लिये हैं।</p>
<p>हालांकि, अधिकारियों ने दिल्ली वासियों से मौजूदा ग्रैप ढांचे के स्टेज-एक और स्टेज दो के तहत बताये गये उपायों का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया है, ताकि वायु गुणवत्ता में और गिरावट न आये। सरकार ने यह भी साफ किया कि उल्लंघन या कानूनी नियमों का पालन न करने के कारण जिन कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन साइटों को बंद करने का आदेश दिया गया है, उन्हें आयोग की स्पष्ट मंजूरी के बिना दोबारा काम शुरू करने की इजाजत नहीं दी जायेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 15:58:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली एनसीआर में कोहरे और प्रदूषण की दोहरी मार, एक्यूआई 'बहुत खराब' श्रेणी में</title>
                                    <description><![CDATA[तेज हवाओं के बावजूद दिल्ली की वायु गुणवत्ता रविवार को 361 तक पहुंच गई। रोहिणी और आनंद विहार सबसे प्रदूषित रहे, जिससे निवासियों को सांस लेने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/double-blow-of-fog-and-pollution-in-delhi-ncr-air/article-138318"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/delhi-pollution.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली के कई इलाकों में रविवार सुबह वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई जबकि तेज हवाएं चलती रहीं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीबीसीबी) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आज सुबह नौ बजे तक कई निगरानी केंद्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का स्तर बहुत खराब बना रहा। रोहिणी में एक्यूआई 361, आनंद विहार में 351, चांदनी चौक में 357, वजीरपुर में 343, पंजाबी बाग में 327, आर के पुरम में 320 और आईटीओ में 309 दर्ज किया गया। 301 से 400 के बीच का एक्यूआई बहुत खराब श्रेणी में आता है और इससे सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।</p>
<p>तेज हवाएं चलने के बावजूद राजधानी के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है। सुबह में हवाओं से प्रदूषण में थोड़ी कमी आई लेकिन यह कमी एक्यूआई को मध्यम स्तर तक लाने में मददगार साबित नहीं हुई। मौसम विज्ञान विभाग ने कहा, रविवार सुबह न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि दिन में अधिकतम तापमान लगभग 17 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है।</p>
<p>सबसे कम दृश्यता सफदरजंग एवं पालम में दर्ज की गई, जहां दृश्यता गिरकर 1,300 मीटर रह गयी। इस बीच, अधिकारियों ने शुक्रवार से प्रदूषण नियंत्रण प्रतिबंधों में ढील दी और वायु गुणवत्ता में अस्थायी सुधार होने के बाद श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना को बंद कर दिया।</p>
<p>पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि स्थिति में सुधार होने के मद्देनजर जीआरएपी पर सीएक्यूएम उप-समिति ने एनसीआर में तत्काल प्रभाव से सभी कार्रवाइयों को रद्द करने का निर्णय लिया है। हालांकि पहले और दूसरे चरण के उपाय लागू रहेंगे। अधिकारियों ने कहा है कि वे स्थिति पर नजदीकी से निगाह बनाए रखे हुए हैं क्योंकि मौसम की स्थिति एवं प्रदूषण का स्तर लगातार बदल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 14:18:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, कल से 50 प्रतिशत कर्मचारी करेंगे घर से काम, जानें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने सरकारी व निजी संस्थानों में 50 प्रतिशत वर्क-फ्रॉम-होम लागू किया है। GRAP के तहत प्रभावित निर्माण श्रमिकों को 10,000 रुपये मुआवजा मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-delhi-government-50-percent-employees-will-work/article-136254"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/delhi-government-work-from-home.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली के श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में सभी सरकारी और निजी संस्थानों के लिये गुरुवार से 50 प्रतिशत 'वर्क-फ्रॉम-होम' सुनिश्चित करने के लिये दिशानिर्देश जारी किये। कपिल मिश्रा ने कहा कि ये निर्देश अस्पतालों, अग्निशमन सेवा, जेल प्रशासन, निजी परिवहन, बिजली और पानी विभागों, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण विभाग सहित जरूरी सेवाओं पर लागू नहीं होगा।</p>
<p>दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि ग्रैप-3 और ग्रैप-4 के तहत काम बंद होने के कारण प्रभावित पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को दिल्ली सरकार मुआवजे के तौर पर 10,000 रुपये देगी। नये जारी किये गये आदेशों का उल्लंघन करने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p>इससे पूर्व, दिल्ली सरकार ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन समिति (सीएक्यूएम) की सिफारिश के बाद शहर में प्रदूषण का स्तर बढऩे के कारण नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा तक के छात्रों के लिये शहर भर के स्कूलों को 'हाइब्रिड मोड' में बदलने का निर्देश दिया था। साथ ही पांचवीं कक्षा तक के छात्रों के लिये पूरी तरह से ऑनलाइन क्लास की भी घोषणा की गयी थी। </p>
<p>आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि ऑनलाइन क्लास में शामिल होने का विकल्प छात्रों और माता-पिता पर छोड़ा गया है। स्कूलों को यह जानकारी तुरंत माता-पिता तक पहुंचाने के लिये कहा गया है। यह आदेश अगले निर्देश तक लागू रहेगा। कक्षा दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई हमेशा की तरह ऑफलाइन जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 14:54:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति बेहद खतरनाक : 460 पर पहुंचा एक्यूआई, तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[वाहनों और धूल प्रदूषण (जिसका ज्यादातर हिस्सा निर्माण कार्य के कारण होता है) को दिल्ली में हवा की गुणवत्ता की बिगड़ती स्थिति के लिए मुख्य कारण माना जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/serious-pollution-situation-in-delhi-aqi-reached-460-very-dangerous/article-135915"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/pollution.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी वायु प्रदूषण की रोकथाम को सख्त पाबंदियां लागू होने के बावजूद रविवार सुबह आठ बजे यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगभग 460 दर्ज किया गया। यह वायु प्रदूषण की बेहद खतरनाक स्थिति का संकेत देता है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम ) ने शनिवार को हवा को और प्रदूषित होने से रोकने के लिए ग्रैप (श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना)-4 लागू कर दी थी। गौरतलब है कि आयोग ने शनिवार को पहले ग्रैप-3 लागू किया था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर दिल्ली शहर और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ग्रैप-4 लगा दिया। वाहनों और धूल प्रदूषण (जिसका ज्यादातर हिस्सा निर्माण कार्य के कारण होता है) को दिल्ली में हवा की गुणवत्ता की बिगड़ती स्थिति के लिए मुख्य कारण माना जा रहा है।</p>
<p>ग्रैप-4 के प्रतिबंधों में निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी, और बाहरी गतिविधियों को कम करने की सलाह के साथ-साथ हाइब्रिड या ऑनलाइन स्कूलिंग की सिफारिशें शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि 450 से ऊपर का एक्यूआई गंभीर  श्रेणी में आता है, जो आम लोगों और खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या दिल की बीमारियों वाले लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पर कड़ी न•ार रखी जा रही है और अगर प्रदूषण की स्थिति में सुधार नहीं होता तो आगे के उपायों पर विचार किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Dec 2025 15:42:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>''मोदी जी आगे बढ़ो हम आपके साथ है'' राहुल गांधी ने लोकसभा में उठाया प्रदूषण का मुद्दा</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राजधानी सहित देश के बड़े शहरों में बढ़ते प्रदूषण को गंभीर बताते हुए विस्तृत चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों पर इसका भारी असर पड़ रहा है और कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। राहुल ने समाधान के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील की। सरकार ने किरेन रिजिजू के माध्यम से चर्चा के लिए सहमति जताई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-the-problem-of-pollution-in-delhi-rahul-gandhi-said/article-135748"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/delhi-air-polution-rahul-gandhai.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को राजधानी सहित देश के बड़े शहरों में दमघोंटू प्रदूषण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सदन में इस पर विस्तृत चर्चा करके इस गंभीर समस्या के समाधान के रास्ते खोजे जाने चाहिए। </p>
<p>राहुल गांधी ने शून्यकाल में इस मुद्दे पर कहा कि बच्चों, बुजुर्गों सहित सभी को प्रदूषण से अत्यंत कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। बुजुर्गों को प्रदूषण के कारण सांस लेना पाना मुश्किल हो रहा है। इससे शहरी क्षेत्रों खासकर महानगरों में बड़ी संख्या में लोगों को सांस संबंधी बीमारियां जकड़ रही हैं। कैंसर जैसी घातक बीमारी भी प्रदूषण के कारण बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण पर सदन में होने वाली चर्चा में आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर यहां से देश को यह संदेश जाना चाहिए कि इस अत्यंत गंभीर समस्या के समाधान के लिए सारे राजनीतिक दल एकमत हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा में सांस लेना जनता का मौलिक अधिकार है, उनका मानना है कि प्रदूषण से निपटने के लिए एक योजना लायी जानी चाहिए, जिससे इस समस्या का प्रभावी समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदूषण पर मात्र चिंता व्यक्त कर देने से और इसे दूर करने के प्रयास किये जा रहे हैं, ऐसा कह देने से कुछ नहीं होगा। इस गंभीर संकट के समाधान के लिए ठोस और प्रभावी कार्य करने पड़ेंगे। </p>
<p>इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार प्रदूषण के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है। इस मुद्दे को कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में लायेंगे और फिर सदन को इसकी जानकारी देंगे। उन्होंने कहा, हम सभी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए तैयार हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Dec 2025 16:02:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वायु प्रदूषण के संकट पर संसद में चर्चा जरूरी : यह बच्चों के लिए बड़ी चिंता, राहुल गांधी ने कहा- लोगों को सुरक्षित भविष्य के लिए स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार</title>
                                    <description><![CDATA[देश के बच्चों के बेहतर और सुरक्षित भविष्य के लिए उन्हें स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार है और इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराई जानी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/it-is-necessary-to-discuss-the-crisis-of-air-pollution/article-133934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वायु प्रदूषण की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस दिशा में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मुद्दा है और हर घर की अपने बच्चों लेकर यह बड़ी चिंता बन गयी है। इसलिए देश के बच्चों के बेहतर और सुरक्षित भविष्य के लिए उन्हें स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार है और इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराई जानी चाहिए।</p>
<p>गांधी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मैं जिससे भी मिलता हूँ, वह मुझे एक ही बात कहती है कि उसका बच्चा जहरीली हवा में साँस लेते हुए बड़ा हो रहा है। वे थके हुए, डरे हुए हैं। कांग्रेस नेता ने इस संकट से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह करते हुए प्रधानमंत्री से कहा कि भारत के बच्चे हमारे सामने परेशान हैं। केंद्र सरकार सरकार कोई तत्परता, कोई योजना, कोई जवाबदेही क्यों नहीं दिखाती। वायु प्रदूषण पर संसद में तत्काल विस्तृत बहस करायी जानी चाहिए। साथ ही इस आपातकाल से निपटने के लिए लागू करने योग्य कार्य योजना की आवश्यकता है। हमारे बच्चे स्वच्छ हवा के हकदार हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 15:13:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली की हवा खराब : बढ़ रहा प्रदूषण का खौफ, वर्क फ्रॉम होम को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करे सकेंगे। यह कदम एहतियात के तौर पर लिया गया है, ताकि प्रदूषण को संतुलित किया जा सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/delhis-air-is-bad-fear-of-pollution-is-increasing-work/article-133329"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/6622-copy73.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का खौफ बढ़ता जा रहा है। शनिवार के दिन यहां की हवा और जहरीली हो गई। इस दौरान एक्यूआई 400 के पार चला गया। सरकार ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में प्राइवेट इंस्टिट्यूट को वर्क फ्रॉम होम करने की हिदायत दी गई है। सरकार ने कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के निर्देशों के अनुसार राजधानी के प्राइवेट दफ्तरों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इसके तहत अब प्राइवेट ऑफिस 50% कर्मचारियों के साथ ऑन साइट काम करेंगे और बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करे सकेंगे। यह कदम एहतियात के तौर पर लिया गया है, ताकि प्रदूषण को संतुलित किया जा सके।</p>
<p><strong>नोएडा-गाजियाबाद में डीजल ऑटोरिक्शा पर रोक</strong><br />लगातार बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए यूपी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। नोएडा और गाजियाबाद में डीजल ऑटोरिक्शा पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया है।</p>
<p><strong>सख्त हुए ग्रैप-3 के नियम </strong><br />एनसीआर और उसके आसपास के इलाकों में कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने ग्रैप-3 के नियमों में भी सख्ती दिखाई है। ग्रैप-3 में बदलाव किए गए हैं। इसके तहत इसके सिर्फ 3 चरण होंगे। ग्रैप के चौथे चरण को प्रोटोकॉल से हटा दिया गया है। इसका साफ मतलब है कि अब ग्रैप 4 में लागू होने वाले सारे नियम ग्रैप 3 में शामिल कर दिए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Nov 2025 11:26:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>अब प्रदूषण की गिरफ्त में इंसान ही नहीं अंतरिक्ष भी</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया में प्रगति का अब कोई न तो मापदंड रहा है और न ही कोई मानदंड।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/now-not-only-humans-but-also-space-is-in-the/article-132903"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)-(19).png" alt=""></a><br /><p>दुनिया में प्रगति का अब कोई न तो मापदंड रहा है और न ही कोई मानदंड। इसका अहम कारण होड है, जो थमने का नाम नहीं ले रही। प्रगति और विभिन्न क्षेत्रों में सबसे पहले कामयाबी हासिल कर उन्नति के शिखर पर पहुंचने की होड ने ही खोज कहें या अनुसंधान की महती महत्वाकांक्षा ने इंसान को राकेटों - सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने हेतु प्रोत्साहित किया। अब तो अंतरिक्ष ही क्या, चंद्रमा और मंगल नामक ग्रह पर भी पहुंच बनाने में इंसान ने कामयाबी पा ली है। वह बात दीगर है कि उसके इन अभियानों से लाभ कितना होता है और हानि कितनी इसकी चिंता किसी को नहीं है। इंसान की कारगुजारी का ही दुष्परिणाम है कि उसने अपने ग्रह को तो प्रदूषित किया ही है,अब अंतरिक्ष को भी प्रदूषित कर डाला है। अंतरिक्ष में प्रदूषण इसका जीता-जागता सबूत है। हकीकत यह है कि इंसान, वायु, जल, धरती, नदी, मृदा, खान-पान की वस्तुएं ही क्या प्रदूषण की मार से अब कोई बचा नहीं है। यहां तक अंतरिक्ष भी प्रदूषण से अछूता नहीं रहा है।</p>
<p><strong>हालिया अध्ययन में : </strong></p>
<p>लंदन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपने हालिया अध्ययन में इस बात का खुलासा किया है कि अंतरिक्ष का यह प्रदूषण धरती के ऊपर वायुमंडल में 500 गुणा अधिक नकारात्मक असर छोड़ रहा है। इसमें धरती से छोड़े गये रॉकेटों और सैटेलाइट की अहम भूमिका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि राकेट और सैटेलाइट से पहले कभी इतना प्रदूषण वायुमंडल की ऊपरी परत में नहीं छोड़ा गया। यह परत ही लम्बे समय तक प्रदूषण को रोककर रखती है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया तो पृथ्वी के वायुमंडल में इसके गंभीर परिणाम होंगे। अध्ययन में यह स्पष्ट हो गया है कि स्पेसएक्स का स्टारलिंक, वनवेब जैसे बड़े सैटेलाइटों ने प्रदूषण को तीन गुणा बढ़ाने में अहम योगदान दिया है। इसका जीपीएस, संचार और मौसम के पूर्वानुमान सहित अंतरिक्ष आधारित तकनीकों पर निर्भर उद्योगों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।</p>
<p><strong>पर्यावरणवेत्ताओं की चिंता :</strong></p>
<p>यही नहीं उपग्रह डेटा का इस्तेमाल फसल उत्पादन व अनुमान, फसल की गहनता, सूखा आकलन, बंजर भूमि सूची, भूजल संभावित क्षेत्रों की पहचान, अंतर्देशीय जलीय चक्र और कृषि की उपयुक्तता, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, महासागरीय स्थिति की सूचना के साथ भूजल पुनर्भरण संभाव्यता आदि के लिए भी किया जाता है। लेकिन इसके लाभ के साथ साथ खतरे भी अनेक हैं। सबसे बड़ा खतरा तो इनके द्वारा छोड़े गये अनुपयुक्त या समय सीमा समाप्ति के बाद कबाड़ सामानों से अंतरिक्ष में हो रहे प्रदूषण का है, जिसने समूची दुनिया के वैज्ञानिकों और पर्यावरणवेत्ताओं की चिंता को और बढ़ा दिया है। ये पृथ्वी के भूमध्य रेखीय तल में पृथ्वी की सतह से लगभग 30,000 किलोमीटर ऊपर भूस्थिर कक्षा में हैं जो अधिकांशत: संचार और मौसम की जानकारी से संबंधित उपग्रह हैं। जहां तक भारत का सवाल है, केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार भारत ने इसरो के द्वारा अबतक 1975 से भारतीय मूल के 129 के अलावा 36 देशों के 342 विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं।</p>
<p><strong>अंतरिक्ष में बढ़ता कचरा :</strong></p>
<p>सबसे अहम सवाल तो अंतरिक्ष में दिनोंदिन बढ़ रहे कचरे का है।अक्सर उच्चतर कक्षाओं, चंद्रमा या अन्य ग्रहों तक पहुंचने के लिए अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की निम्न कक्षा से ही गुजरना पड़ता है। यहां मलबा सबसे ज्यादा और सघन मात्रा में होता है, जहां कक्षीय वेग सबसे ज्यादा होता है। यही वह अहम कारण है कि अंतरिक्ष का यह कचरा या मलबा कहें, लियो में मौजूद अंतरिक्ष यान के लिए ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष यात्रा के सभी रूपों के लिए बड़ा खतरा है। अंतरिक्ष का कचरा परिचालन अंतरिक्ष यान पर प्रभाव डाल सकता है। इससे सभी आकारों का और भी अधिक मलबा पैदा हो सकता है, जिससे जोखिम का असर और बढ़ सकता है जिसे केप्लर सिंड्रोम कहते हैं। यहां सबसे बड़ी चिंता तो निष्क्रिय उपग्रहों और रॉकेटों के मलबे को लेकर है, जो इस क्षेत्र में फैले हुए हैं और जो अंतरिक्ष में अव्यवस्था फैला रहे हैं। 1957 में जब सबसे पहले अंतरिक्ष में स्पूतनिक पहुंचा, तभी से अंतरिक्ष में मलबा जमा होना शुरू हुआ है।</p>
<p><strong>खतरे की चेतावनी :</strong></p>
<p>ऐसी स्थिति में अंतरिक्ष यान और कक्षीय मलबे की दूसरी वस्तुओं से टकराने की संभावना बढ़ जाती है। नतीजतन लियो का उपयोग दशकों तक असंभव हो जाता है, जो भयावह खतरे की चेतावनी है। इसमें दो राय नहीं है कि अंतरिक्ष में प्रदूषण के लिए खासतौर से विभिन्न देशों की सरकारें तो जिम्मेदार हैं ही, अंतरिक्ष ऐजेंसियां और निजी कंपनियां भी काफी हदतक जिम्मेदार हैं। यह प्रदूषण मुख्यत: उपग्रहों व राकेटों के हिस्सों और प्रक्षेपणों के दौरान पैदा हुए मलबे के रूप में होता है। इसके लिए स्पेसएक्स, एरियान के साथ लाकहीड व मार्टीन जैसी कंपनियों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। कुछ दिनों से केन्या सहित दूसरी जगहों से वहां अंतरिक्ष से मलबा गिरने की खबरें आ रहीं हैं। स्वाभाविक है कि अंतरिक्ष में भी मलबा जमा होने की सीमा है। जाहिर है इससे अंतरिक्ष में मलबे की समस्या और भयावह रूप अख्तियार करेगी। इसमें दो राय नहीं।</p>
<p><strong>-ज्ञानेन्द्र रावत</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 11:58:56 +0530</pubDate>
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