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                <title> America - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> America RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिका से भारतीयों को लगा झटका, फ्लोरिडा में नए एच1बी वीजा हायरिंग पर 1 साल के लिए रोक</title>
                                    <description><![CDATA[फ्लोरिडा अपने स्टेट यूनिवर्सिटी सिस्टम में नए H-1B वीजा हायरिंग पर एक साल की रोक लगाने की तैयारी में है। प्रस्ताव 29 जनवरी को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सामने आएगा। मंजूरी मिलने पर 2027 की शुरुआत तक पब्लिक यूनिवर्सिटीज विदेशी फैकल्टी व स्टाफ की नई भर्ती नहीं कर सकेंगी।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indians-get-a-shock-from-america-ban-on-new-h1b/article-140674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(2)48.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी स्टेट फ्लोरिडा अपने स्टेट यूनिवर्सिटी सिस्टम में नए एच-1बी वीजा हायरिंग पर एक साल तक रोक लगा सकता है। इस रोक का आधिकारिक ऐलान जल्दी ही किए जाने की संभावना है। इसका मकसद नौकरियों में अमेरिकियों को तरजीह देना और विदेशी लेबर पर निर्भरता कम करना बताया गया है। यह फैसला विदेशी कामगारों, खासतौर से भारतीयों को झटका देगा। इसकी वजह यह है कि अमेरिका के एच-1बी वीजा कार्यक्रम का लाभ सबसे ज्यादा भारतीय पेशेवरों को मिलता रहा है। वीजा पर रोक का यह प्लान फ्लोरिडा के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की ओर से 29 जनवरी को पेश किया जाएगा। इसको मंजूरी के साथ ही यह पब्लिक यूनिवर्सिटीज को 2027 की शुरूआत तक एच-1बी वीजा पर नए फैकल्टी या स्टाफ लाने से रोकेगा। यह कदम गवर्नर रॉन डेसेंटिस के पहले के निर्देश के बाद उठाया गया है। इसने टैलेंट रिक्रूटमेंट और इमिग्रेशन पॉलिसी पर बहस छेड़ दी है।</p>
<p><strong>नए एच-1बी हायरिंग के लिए क्या प्रस्ताव दे रहा है ?</strong></p>
<p>ड्राफ्ट पॉलिसी के तहत फ्लोरिडा की पब्लिक यूनिवर्सिटीज को एक साल तक एच-1बी वीजा पर नए कर्मचारियों को हायर करने से रोक दिया जाएगा। इससे सीधे तौर पर फॉल 2026 सेमेस्टर के लिए रिक्रूटमेंट प्रभावित होगा। इस रोक के दौरान कैंपस नए एच-1बी फैकल्टी, रिसर्चर्स या प्रोफेशनल स्टाफ को शामिल नहीं कर पाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 10:25:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इटली को 100 जेएसएसएम मिसाइलें बेचने की अमेरिका की मंजूरी : आकाश से धरती पर मार करने में सक्षम, राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को समर्थन देगी बिक्री</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने इटली को 100 जेएएसएसएम मिसाइलें और संबंधित उपकरण बेचने की मंजूरी दी, जिसकी अनुमानित लागत 30.1 करोड़ डॉलर है। यह बिक्री इटली की सुरक्षा और नाटो सहयोग को मजबूत करेगी। मिसाइलें एफ-35 विमानों में इस्तेमाल होंगी। सौदे में परीक्षण उपकरण, स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक सेवाएं भी शामिल हैं और ठेकेदार लॉकहीड मार्टिन होगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-approval-to-sell-100-jssm-missiles-to-italy-capable/article-134973"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/america-flag.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका ने आकाश से धरती पर मार करने वाली ज्वाइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ (जेएएसएसएस) मिसाइलों और उनसे संबंधित उपकरणों को इटली को बेचने पर सहमति जताई। इस सौदे की अनुमानित लागत 30 करोड़ 10 लाख अमेरिकी डॉलर है।  </p>
<p>अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (डीएससीए) ने एक बयान में कहा- स्टेट डिपार्टमेंट ने इटली सरकार को विस्तारित रेंज वाली जेएएसएसएस मिसाइलें और संबंधित उपकरण बेचने की संभावित विदेश सैन्य बिक्री को मंजूरी दे दी है। इस बारे में कांग्रेस को आवश्यक सूचना भेज दी गई है।</p>
<p>इटली सरकार ने अमेरिका से विस्तारित रेंज की 100 जेएएसएसएम मिसाइलें खरीदने का अनुरोध किया है, जिनकी अनुमानित कुल लागत 30 करोड़ 10 लाख डॉलर है। डीएससीए ने कहा कि यह प्रस्तावित बिक्री संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश नीति लक्ष्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को समर्थन देगी, क्योंकि इससे यूरोप में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक प्रगति में योगदान देने वाले नाटो सहयोगी इटली की सुरक्षा मजबूत होगी।</p>
<p>यह बिक्री इटली की क्षमता बढ़ाएगी, जिससे वह मौजूदा और भविष्य के खतरों का बेहतर सामना कर सकेगा। इन उन्नत, लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का इटली एफ35 जैसे अपने लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल कर पाएगा। एजेंसी ने उम्मीद जताई कि इटली इन उपकरणों और सेवाओं को अपनी सेना में आसानी से शामिल कर लेगा और यह बिक्री क्षेत्र के मौलिक सैन्य संतुलन को नहीं बदलेगी।</p>
<p>अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, बिक्री में कई अन्य गैर-मिसाइल उपकरण भी शामिल होंगे, जैसे जेएसएसएम से जुड़े परीक्षण उपकरण, कंटेनर, 'स्पेयर और रिपेयर पार्ट', तकनीकी और 'लॉजिस्टिक सेवाएँ। इस बिक्री का मुख्य ठेकेदार फ्लोरिड़ा के ऑरलैंडो स्थित लॉकहीड मार्टिन कंपनी होगी।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Dec 2025 15:11:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुतिन के दिल्ली आते ही अमेरिका को आई भारत की याद : क्वॉड का हवाला देकर लगाई दोस्ती की गुहार, पाकिस्तान को झटका</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में क्वॉड का हवाला देते हुए भारत के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर दिया है, खासकर हिंद-प्रशांत में चीन के बढ़ते प्रभाव का सामना करने हेतु। रिपोर्ट में भारत को व्यापारिक रिश्ते सुधारने का प्रमुख साझेदार बताया गया। पुतिन की भारत यात्रा और भारत-रूस निकटता को अमेरिका ने चिंता का कारण माना।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/as-soon-as-putin-came-to-delhi-america-remembered-india/article-134921"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-6010-px.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिल्ली आते ही अमेरिका को अब भारत की याद आने लगी है। अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को जारी किया है। इसमें क्वॉड का हवाला देकर भारत के साथ रिश्ते को सुधारने के प्रयासों को जारी रखने का आह्वान किया गया है। अमेरिका ने यह आह्वान तब किया है जब ट्रेड डील और भारी भरकम टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद काफी बढ़ा हुआ है। अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में पैदा हो रहे खतरे से निपटने के लिए भारत की भागीदारी जरूरी है। क्वॉड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इसे हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के खतरे से निपटने के लिए बनाया गया है।</p>
<p><strong>भारत के साथ व्यवसायिक रिश्ते को सुधारना :</strong></p>
<p>अमेरिका के नवंबर महीने के लिए जारी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में पाकिस्तान का केवल बार जिक्र किया गया है। वह भी केवल भारत और पाकिस्तान सीजफायर का जिक्र है। इसके अलावा पाकिस्तान का कोई जिक्र नहीं है। वह भी तब जब पाकिस्तानी फील्ड मार्शल और पीएम शहबाज शरीफ दोनों ने हाल के दिनों में ट्रंप की खुशामद में कई बयान दिए हैं। अमेरिका की सुरक्षा रणनीति में कहा गया है, हमें भारत के साथ व्यवसायिक रिश्ते को सुधारना चाहिए ताकि नई दिल्ली क्वॉड के जरिए हिंद प्रशांत सुरक्षा में योगदान दे सके। हम अपने सहयोगियों के साथ अपने काम को जोड़ेंगे ताकि अपने संयुक्त लक्ष्य किसी एक देश के आधिपत्य को रोका जा सके।</p>
<p><strong>अमेरिका को भारत-रूस दोस्ती से टेंशन :</strong></p>
<p>अमेरिका ने यह रिपोर्ट ऐसे समय पर जारी किया है जब अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण विरोधी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर आए हैं। भारत में पुतिन का जोरदार स्वागत किया गया है। भारत और रूस की दोस्ती अमेरिका के लिए हमेशा ही चिंता का विषय रही है। अमेरिका ने भारत के रूस से तेल लेने की वजह से अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है।</p>
<p><strong>अफ्रीका में क्रिटिकल मिनरल के लिए संयुक्त रूप से दावेदारी :</strong></p>
<p>अमेरिका को भारत और अन्य यूरोपीय तथा एशियाई सहयोगियों के साथ मिलकर अफ्रीका में क्रिटिकल मिनरल के लिए संयुक्त रूप से दावेदारी की जा सके। हिंद प्रशांत क्षेत्र के बारे में कहा गया है कि अगर को विरोधी दक्षिण चीन सागर को कंट्रोल करने की कोशिश करता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Dec 2025 12:01:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप के प्लान पर भड़के यूक्रेन के राष्ट्रपति, जेलेंस्की ने कहा- पीस प्लान हमें मंजूर नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-रूस की संभावित शांति योजना पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कब्जाई जमीन रूस को सौंपना अंतरराष्ट्रीय कानून और यूक्रेन की संप्रभुता का उल्लंघन होगा तथा खतरनाक मिसाल बनेगा। ड्राफ्ट प्रस्ताव में खेरसॉन, जापोरिज्जिया और डोनबास के हिस्सों पर रूस का नियंत्रण मानने की बात सामने आई है। इसी बीच रूस ने खारकीव पर हमले तेज कर दिए हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ukraines-president-zelensky-furious-over-trumps-plan-said-we/article-133518"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/1200-x-600-px--(13).png" alt=""></a><br /><p>कीव। अमेरिका और रूस के यूक्रेन शांति प्रस्ताव पर वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि रूस को जबरदस्ती जमीन पर कब्जा करने देना एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा। उनकी यह प्रतिक्रिया तब आई है, जब दावा किया जा रहा है कि इस शांति योजना में यूक्रेन की कब्जाई जमीन को रूस को सौंपने की बात कही गई है। हालांकि, यह योजना अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुई है। इसके बावजूद यूक्रेन से लेकर यूरोपीय यूनियन के देशों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस बीच रूस ने यूक्रेन पर हमले तेज कर दिए हैं। ताजा हमलों में रूस ने खारकीव को निशाना बनाया है, जिसमें कई यूक्रेनी मारे गए हैं।</p>
<p><strong>जेलेंस्की बोले- यह खतरनाक मिसाल :</strong></p>
<p>अमेरिका-रूस के यूक्रेन शांति योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए जेलेंस्की ने कहा कि एक बड़ा मुद्दा यह है कि पुतिन जो कुछ उन्होंने चुराया है, उसे कानूनी मान्यता देना चाहते हैं, ताकि इलाके की अखंडता और संप्रभुता के सिद्धांत को तोड़ा जा सके। जेलेंस्की ने यह भी कहा कि ऐसा करना एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा। उनका तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय कानून यूक्रेन की इलाके की अखंडता और संप्रभुता को मान्यता देता है। ऐसे में पुतिन की मांग के आगे झुककर रूस को यह इलाका सौंपना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भी उल्लंघन होगा।</p>
<p><strong>समझौता मॉस्को को इनाम देने जैसा :</strong></p>
<p>जेलेंस्की का कहना है कि 2014 में रूस के क्रीमिया पर कब्जा करने और कई दूसरे इलाकों पर कब्जे ने सीधे तौर पर इस सिद्धांत को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा विचार है कि शांति समझौता मॉस्को को उसके हमले के लिए इनाम दे सकता है, तो यह हमें मंजूर नहीं है। रूस बार-बार मांग करता रहा है कि यूक्रेनी सैनिक कई मुश्किलों वाले पूर्वी इलाकों से हट जाएं।</p>
<p><strong>अमेरिकी शांति योजना में क्या है ?</strong></p>
<p>यूएस शांति योजना के ड्राफ्ट में खेरसॉन और जापोरिज्जिया में फ्रंट लाइन को फ्रीज करने का प्रस्ताव है, जिससे रूस को उन इलाकों के बड़े हिस्से पर कंट्रोल मिल जाएगा। शायद यूक्रेन के लिए ज्यादा चिंता की बात यह है कि इसमें यह भी कहा गया है कि कीव को इंडस्ट्रियल पूर्वी डोनबास इलाके के उन हिस्सों को, जो अभी भी यूक्रेन के कंट्रोल में हैं रूस के डी फैक्टो कंट्रोल में सौंप देना चाहिए। जेलेंस्की ने बार-बार कहा है कि डोनबास छोड़ने से यूक्रेन भविष्य में रूसी हमलों के लिए कमजोर हो जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 11:21:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका : शटडाउन खत्म करने के लिए डेमोक्रेट और रिपब्लिकन के बीच सहमति, अड़चनें अभी बाकी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका में 40 दिन तक चले शटडाउन को खत्म करने की दिशा में सीनेट ने रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के समझौते पर मतदान किया। यह पहला प्रक्रियात्मक कदम है, लेकिन शटडाउन पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिनिधि सभा में भी वोटिंग जरूरी है। इसमें स्वास्थ्य सेवा सब्सिडी बढ़ाने और सरकारी वित्तपोषण की व्यवस्था शामिल है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hurdles-still-remain-in-agreement-between-democrats-and-republicans-to/article-131990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11110.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका में जारी शटडाउन को समाप्त करने के लिए सत्तापक्ष रिपब्लिकन और विपक्षी डेमोक्रेट के बीच सहमति के बाद सीनेट में एक समझौता पारित हो गया है। इसके बाद भी शटडाउन को खत्म करने के लिए कुछ और बाधाएं भी पार करनी शेष हैं।</p>
<p>इस शटडाउन के 40 दिनों के गतिरोध को दूर करने की दिशा में दोनों दलों में हुई बातचीत के बाद, कुछ डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन के साथ मिलकर समझौते के पक्ष में मतदान किया। यह मतदान सरकार को पैसा मुहैया कराने के लिए एक समझौता पारित करने की दिशा में पहला प्रक्रियात्मक कदम है। गतिरोध भले ही कमजोर हो गया हो लेकिन संघीय कर्मचारियों और सेवाओं की बहाली से पहले कई और बाधाओं को पार करनी होंगी। इनमें प्रतिनिधि सभा का मतदान भी शामिल है।</p>
<p>वर्तमान शटडाउन अमेरिका में अब तक का सबसे लंबा शटडाउन रहा है। एक अक्टूबर से कई सरकारी सेवाएं और भुगतान  निलंबित हैं और लगभग 14 लाख केंद्रीय कर्मचारी अवैतनिक अवकाश पर हैं या बिना वेतन के काम कर रहे हैं। इस बंद का कई सेवाओं पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा है, जिसमें अमेरिकी हवाई यात्रा और खाद्य सुरक्षा संबंधी कार्यक्रम शामिल हैं।</p>
<p>रिपब्लिकन के पास सीनेट में 53-47 का बहुमत अवश्य है लेकिन इस विधेयक के लिए न्यूनतम 60 वोटों की सीमा पार करने की आवश्यकता थी। वे डेमोक्रेटस के आठ वोट हासिल करने में सफल रहे।</p>
<p>इस समझौते में दिसंबर में स्वास्थ्य सेवा सब्सिडी बढ़ाने पर मतदान के बनी सहमति शामिल है। यह  सरकारी सहायता इस साल समाप्त होने वाली है। डेमोक्रेटस इसमें रियायतों की मांग कर रहे थे।</p>
<p>डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने कहा था कि वे सरकारी कार्यों के लिए नए वित्तपोषण को तब तक समर्थन नहीं देंगे, जब तक कांग्रेस उन सब्सिडी पर ध्यान नहीं देती, जो लाखों अमेरिकियों को स्वास्थ्य बीमा के लिए भुगतान करने में मदद करती हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 16:38:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका का परमाणु परीक्षण पर स्पष्टीकरण : सिस्टम टेस्ट होगा न कि परमाणु विस्फोट, यह परीक्षण अमेरिका के परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हाल ही में बताए गए परमाणु परीक्षण वास्तविक विस्फोट नहीं, बल्कि ‘सिस्टम टेस्ट’ होंगे। ये नॉन-क्रिटिकल एक्सप्लोजन हैं और अमेरिका के परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण का हिस्सा हैं। परीक्षणों का उद्देश्य हथियारों के हिस्सों की कार्यक्षमता सुनिश्चित करना है। स्थानीय लोग सुरक्षित रहेंगे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/americas-clarification-on-nuclear-test-will-be-a-system-test/article-131414"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने स्पष्ट किया है कि हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु हथियार परीक्षणों की जो बात कही है, उसमें वास्तविक रूप से परमाणु विस्फोट नहीं बल्कि ‘सिस्टम टेस्ट’ होगा।</p>
<p>एक सवाल के जवाब में बताया कि ये परीक्षण अमेरिका के परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा हैं। उनके अनुसार- हम जिन परीक्षणों की बात कर रहे हैं, वे सिस्टम टेस्ट हैं, न कि परमाणु विस्फोट। इन्हें ‘नॉन-क्रिटिकल एक्सप्लोजन’ कहा जाता है।</p>
<p>राइट ने बताया कि इन परीक्षणों के जरिए हथियारों के विभिन्न हिस्सों को जांचा जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे आवश्यक संरचना और विस्फोट की तैयारी की जरूरतों को सही ढंग से पूरा करते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या नेवादा रेगिस्तान के पास रहने वाले लोग विस्फोट के बाद बनने वाले मशरूम आकार के बादल की चपेट में आ सकते हैं तो उन्होंने कहा- इस बारे में कोई चिंता नहीं है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 04 Nov 2025 16:31:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गाजा युद्धविराम समझौते की निगरानी के लिए अमेरिका भेजेगा 200 सैनिक : टास्क फोर्स सुनिश्चित करेगी कोई उल्लंघन न हो, टीम में कतर और तुर्की के सशस्त्र बल होंगे शामिल </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका, इजरायल-हमास युद्धविराम समझौते की निगरानी के लिए इजरायल में 200 सैनिकों की टास्क फोर्स भेज रहा है। यह टीम उल्लंघन रोकने और निरीक्षण की जिम्मेदारी निभाएगी। टास्क फोर्स गाजा में नहीं होगी। इसमें मिस्र, कतर और तुर्की के सशस्त्र बलों के सदस्य भी शामिल होंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-will-send-200-soldiers-to-monitor-the-gaza-ceasefire/article-129295"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/us-military.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका, इजरायल और हमास के बीच गाजा युद्धविराम समझौते की निगरानी के लिए इजरायल में लगभग 200 सैनिक भेज रहा है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि टास्क फोर्स समझौते की निगरानी, निरीक्षण और यह सुनिश्चित करेगी कि कोई उल्लंघन न हो।</p>
<p>अधिकारी के अनुसार, मिस्र, कतर और तुर्की सशस्त्र बलों के सदस्य अमेरिकी टीम में शामिल होंगे। एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि टास्क फोर्स गाजा में नहीं होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 10 Oct 2025 14:42:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका में 7 साल में पहली बार शटडाउन : बिना वेतन के छुट्टी लेने के लिए मजबूर होंगे लाखों कर्मचारी, सरकारी काम ठप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सीनेट में एक अल्पकालिक व्यय विधेयक पारित न होने के कारण अमेरिकी सरकार बुधवार की सुबह से ही 'शटडाउन' में चली गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/for-the-first-time-in-7-years-in-america-millions/article-128413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिकी सीनेट में एक अल्पकालिक व्यय विधेयक पारित न होने के कारण अमेरिकी सरकार बुधवार की सुबह से ही 'शटडाउन' में चली गई। यह लगभग 7 वर्षों में पहली बार 'शटडाउन' है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा कि इस शटडाउन के कारण लाखों संघीय कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इसके अलावा कुछ सार्वजनिक सेवाएं रोकी जा सकती हैं और आर्थिक आंकड़ों के जारी होने पर भी असर पड़ सकता है। जब अमेरिकी संसद से सालाना व्यय विधेयक पारित नहीं हो पाता तो सरकार को कुछ खर्चे रोकने पड़ जाते हैं। इसे शटडाउन कहा जाता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 01 Oct 2025 13:10:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका ने ड्रग उत्पादक देशों में भारत को किया शामिल : यह देश के लिए बेहद शर्मनाक, अखिलेश ने पूछा- कहां गई विदेश नीति </title>
                                    <description><![CDATA[ड्रग उत्पादक व निर्यातक देशों में 23 देशों की सूची में डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत को शामिल किए जाने पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विरोध जताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-involved-india-in-drug-producing-countries-akhilesh-asked-very/article-127244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)16.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। ड्रग उत्पादक व निर्यातक देशों में चीन, अफगानिस्तान, पाकिस्तान समेत 23 देशों की सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत को शामिल किए जाने पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विरोध जताया है। उन्होंने ड्रग उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल किया जाना देश के लिए बेहद शर्मनाक है। साथ ही उन्होंने पूछा है कि कहां गई वह विदेश नीति, जिसका डंका पीटा जा रहा था। अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि जिस अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए भाजपा के लोग हवन पूजन करते फिर रहे थे, जीत की कामना कर रहे थे और खुशियां मना रहे थे, पटाखे फोड़ रहे थे, उसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत का घोर अपमान किया। भारत को ड्रग्स उत्पादक एवं निर्यातक देशों में पाकिस्तान के साथ ही सूची में डाल दिया, यह देश के लिए बेहद शर्मनाक है। कहां गई वह विदेश नीति, जिसका डंका पीटा जा रहा था।</p>
<p>अखिलेश ने कहा कि ड्रग्स और अवैध धंधों के काम में भाजपा के लोग शामिल हैं और इसके कारण पूरे देश की प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है। विदेश नीति शून्य है, केवल खोखले दावे किए जा रहे हैं। भारत का सर पूरे विश्व में भाजपा ने नीचा कर दिया है, यह देश के लिए एक शर्मनाक पल है। एक अन्य पोस्ट में विदेश में जॉर्जिया में भारतीयों के साथ दुर्व्यवहार को लेकर सवाल उठाते हुए अखिलेश ने कहा कि विदेशों में भारतीयों के साथ ये बर्ताव देश के लिए बेहद शर्मनाक और वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिष्ठा पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है। क्या भारतीयों के साथ विदेश में ऐसा बर्ताव किया जाएगा। शर्मनाक। उन्होंने कहा कि इसके पहले अमेरिका द्वारा हथकड़ी बेड़ी लगाकर भारतीयों को भारत वापिस भेजा गया, अब जॉर्जिया में भारतीय पर्यटकों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार भारतीय प्रतिष्ठा और विदेश नीति पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है। इसका मतलब जो विदेश में डंका बजने वाले दावे थे वो सब खोखले, दिखावटी और प्रायोजित निकले।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 18 Sep 2025 16:35:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के लिए तेज करेंगे प्रयास : दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल ने की बैठक, अमेरिका के 50% टैरिफ के बाद आई थी खटास </title>
                                    <description><![CDATA[भारत और अमेरिका के मध्य व्यापारिक संबंधों में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में व्यापार समझौते के लिए प्रयास तेज करने पर सहमति बनी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/efforts-will-be-intensified-for-indo-us-trade-agreement-the-delegation/article-127084"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(8).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के मध्य व्यापारिक संबंधों में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में व्यापार समझौते के लिए प्रयास तेज करने पर सहमति बनी है। वार्ता को पटरी पर लाने के उद्देश्य से अमेरिका के सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में आए अमेरिका व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के एक दल की यहां वाणिज्य विभाग के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें भारतीय दल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल ने किया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार चर्चा सकारात्मक और भविष्योन्मुखी रही और इसमें व्यापार समझौते के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया। वार्ता के दौरान इस बात पर सहमति बनी है कि दोनों पक्षों के लिए लाभप्रद व्यापार समझौते के लिए प्रयास तेज किए जाएं ताकि जल्द उसके सार्थक परिणाम सामने आ सकें।</p>
<p><strong>अमेरिका के 50% टैरिफ के बाद आई थी खटास :</strong></p>
<p>अमेरिका भारत का प्रमुख व्यापारिक भागीदार है, लेकिन अमेरिका के भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने के बाद से दोनों देशों के बीच रिश्तों में खटास आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति, और अमेरिका के कुछ अधिकारियों के कटु बयानों के कारण दोनों पक्षों के व्यापारिक संबंधों में तनाव उत्पन्न हो गया था। हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप के नरमी भरे बयान और सोशल मीडिया पोस्ट तथा उन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उत्साहजनक प्रतिक्रियाओं से व्यापार वार्ता में गतिरोध टूटने का रास्ता निकालने की संभावना उभरी है।</p>
<p><strong>मोदी कह चुके छोटे तथा मझौले उद्योगों का हित सर्वोपरि : </strong></p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उम्मीद जाहिर की है कि भारत और अमेरिका के बीच नवंबर तक कोई अच्छा समझौता हो जाएगा। वहीं, प्रधानमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत के लिए देश के किसानों, पशुपालकों, मछुआरों और छोटे तथा मझौले उद्योगों का हित सर्वोपरि है और उनके साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। दूसरी तरफ, अमेरिका जीएम मक्का, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के बाजार के लिए भारत पर दबाव बना रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Sep 2025 13:03:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>यूक्रेन में रूसी युद्ध की फंडिंग कर रहा भारत, नाटो में अमेरिकी राजदूत का नया हमला, और ज्यादा प्रतिबंध लगाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के नेतृत्व वाले उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में अमेरिकी राजदूत मैथ्यू व्हिटेकर ने यूक्रेन युद्ध के लिए भारत पर हमला बोला है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/funding-of-russian-war-in-ukraine-india-is-demanding-a/article-126617"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_400-px)8.png" alt=""></a><br /><p>ब्रसेल्स। अमेरिका के नेतृत्व वाले उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में अमेरिकी राजदूत मैथ्यू व्हिटेकर ने यूक्रेन युद्ध के लिए भारत पर हमला बोला है। व्हिटेकर ने भारत पर यूक्रेन में चल रहे रूस के सैन्य अभियान की फंडिंग का आरोप लगाया। फॉक्स न्यूज से बात करते हुए अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों को रूसी तेल की बिक्री से यू्क्रेन में मॉस्को के सैन्य अभियान का वित्तपोषण हो रहा है। व्हिटेकर ने मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए इन देशों पर अतिरिक्त प्रतिबंध और टैरिफ लगाने की अपील की।अमेरिकी मीडिया ब्रॉडकास्टर फॉक्स पर व्हिटेकर ने दावा किया कि रूस की अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ रही है और तेल से होने वाली आय युद्ध के लिए धन जुटाने का मुख्य स्रोत बनी हुई है। व्हिटेकर ने जोर देकर कहा कि किसी भी अतिरिक्त प्रतिबंध और शुल्क को यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ कोऑर्डिनेट किया जाना चाहिए ताकि साफ संदेश दिया जा सके कि यूक्रेन में मॉस्को की आक्रामकता अस्वीकार्य है।</p>
<p><strong>चीन और ब्राजील पर भी निशाना :</strong></p>
<p>व्हिटेकर ने इंटरव्यू के दौरान कहा कि इस युद्ध के लिए जो पैसा खर्च हो रहा है, वह भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों को तेल की बिक्री से आ रहा है। मुझे लगता है कि अगले चरण में पुतिन के लिए व्यापार की लागत बढ़ाने और राजस्व को कम करने के लिए अतिरिक्त प्रतिबंध और शुल्क लगाने होंगे। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि रूस की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती। यूक्रेन में जारी मौत और विनाश को रोकना होगा।</p>
<p><strong>अमेरिका भारत पर लगा रहा आरोप :</strong></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर लगातार निशाना साधा है। ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीद के लिए 25 प्रतिशत का अलग टैरिफ लगाया है, जिसके बाद भारतीय सामानों पर शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि भारत को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि यूरोपीय संघ अभी भी रूसी गैस का महत्वपूर्ण खरीदार बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Sep 2025 11:18:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका के साथ व्यापार संबंधी बातचीत का जल्द निकलेगा निर्णय : ट्रम्प से बातचीत के लिए उत्सुक, मोदी बोले- भारत और अमेरिका स्वाभाविक साझेदार </title>
                                    <description><![CDATA[हम दोनों देशों के लोगों के लिए एक उज्जवल और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-decision-will-soon-come-out-of-business-related-conversation-with/article-126448"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/modi-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्वास जताया है कि अमेरिका के साथ व्यापार संबंधी बातचीत का जल्द निर्णय निकलेगा और वह भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बातचीत के लिए उत्सुक है। प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट के जवाब में यह बात कही। मोदी एक्स पर लिखा कि भारत और अमेरिका घनिष्ठ मित्र और स्वाभाविक साझेदार हैं। मुझे विश्वास है कि हमारी व्यापार बातचीत भारत-अमेरिका साझेदारी की असीम संभावनाओं को उजागर करने का मार्ग प्रशस्त करेगी। हमारी टीमें इन चर्चाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए काम कर रही हैं। मैं राष्ट्रपति ट्रम्प से बातचीत के लिए भी उत्सुक हूँ। हम दोनों देशों के लोगों के लिए एक उज्जवल और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।</p>
<p>इससे पहले ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत और अमेरिका दोनों देशों के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए बातचीत जारी रखे हुए हैं। मैं आने वाले हफ्तों में अपने बहुत अच्छे मित्र प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत करने के लिए उत्सुक हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे दोनों महान देशों के लिए एक सफल निष्कर्ष पर पहुँचने में कोई कठिनाई नहीं होगी।''</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Sep 2025 14:27:52 +0530</pubDate>
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