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                <title>construction - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>यह कैसी गुणवत्ता जांच, प्रयोगशाला पर ही बरसों से ताला</title>
                                    <description><![CDATA[निगम ने कई साल पहले हाड़ौती उद्यान में प्रयोगशाला स्थापित की थी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-kind-of-quality-check-is-this--the-laboratory-has-remained-locked-for-years/article-156781"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से करवाए जाने वाले निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच के लिए निगम की प्रयोगशाला तो है लेकिन उस पर बरसों से ताला लटका हुआ है। जिससे निगम की निजी प्रयोगशाला में जांच करवानी पड़ रही है। नगर निगम की ओर से शहर में सड़क व अन्य निर्माण कार्य संवेदकों के माध्यम से करवाए जा रहे हैं। निर्माण कार्य के दौरान उपयोग होने वाली सामग्री की गुणवत्ता का पता लगाने के लिए निर्माण सामग्री की जांच प्रयोगशाला में करवाई जाती है। इसके लिए नगर निगम की ओर से कई साल पहले हाड़ौती उद्यान में प्रयोगशाला स्थापित की थी। उस समय यहां जांच के लिए उपकरण व तकनीकी स्टाफ भी लगाए गए थे। जिससे कुछ समय तक तो इसका उपयोग हुआ। लेकिन उसके बाद इस पर एक बार ताला लगा तो उसके बाद से खुला ही नहीं।</p>
<p>वर्तमान में हालत यह है कि प्रयोगशाला पर बरसों से ताला ही लटका हुआ है। नगर निगम के अधिकारियों ने कुछ समय पहले इसे खोलकर देखा था तो अधिकतर जांच उपकरण या तो खराब हो गए हैं या फिर चोरी हो गए। जिससे इस प्रयोगशाला में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जाच ही नहीं की जा रही। निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली सामग्री की जांच निगम अभियंताओं व अधिकारियों को निजी प्रयोगशालाओं में राशि खर्च करके करवानी पड़ रही है।</p>
<p><strong>निगम आयुक्त ने किया था निरीक्षण</strong><br />नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने कुछ समय पहले निगम अधिकारियों व अभियंताओं के साथ इस प्रयोगशाला का निरीक्षण किया था। उस समय वहां की स्थिति देखकर वे भी दंग रह गए थे। उन्होंने अभियंताओं से कहा कि जब निगम के पास प्रयोगशाला है तो इसे चालू किया जाए। लेकिन उसके बाद भी काफी समय हो गया अभी तक इसे चालू नहीं किया गया है। अभी भी प्रयोगशाला के मुख्य द्वार पर ताला ही लटका हुआ है।</p>
<p><strong>सार्वजनिक निर्माण विभाग की है लैब</strong><br />इधर शहर में सार्वजनिक निर्माण विभाग की अपनी प्रयोगशाला है। जहां उनके द्वारा करवाए जाने वाले निर्माण कार्यों की सामग्री की गुणवत्ता जांच करवाई जा रही है। जबकि निगम की प्रयोगशाला होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कुछ समय पहले प्रयोगशाला का निरीक्षण किया था। उस समय जानकारी मिली कि यहां जांच के लिए उपयकरण व मशीनशरी की आवश्यकता है। इस पर इसे चालू करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने व उपकरण व मशीनरी खरीदने के आदेश दिए थे। उसके बाद टेंडर प्रक्रिया में समय लगा। लेकिन यह फाइनल होने के बाद मशीनरी व उपकरण क्रय करने का कार्यादेश जारी किया जा चुका है। करीब दस लाख की लागत से एक सप्ताह में उपकरण आ जाएंगे। जिससे दस दिन के भीतर प्रयोगशाला को शुरु किया जा सकेगा।<br /><strong>- ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त ,नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 14:34:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ओटीएस चौराहे पर फ्लाईओवर बनाने के लिए नई डीपीआर बनाने का आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने कहा- मुख्य सचिव दोषी अफसरों पर करें कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[हाईकोर्ट ने ओटीएस चौराहे पर 83 करोड़ रुपये के फ्लाईओवर के लिए नई डीपीआर बनाने का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने जेडीए को पुराने अनुबंध के आधार पर परियोजना आगे बढ़ाने और ठेका निरस्त करने की जांच कर दोषी अधिकारियों पर दो माह में कार्रवाई के निर्देश दिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/order-to-prepare-new-dpr-for-construction-of-flyover-at/article-156026"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जेएलएन मार्ग स्थित ओटीएस चौराहे पर 83 करोड़ रुपए की लागत से फ्लाई ओवर बनाने के लिए नए सिरे से डीपीआर बनाने के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने जेडीए को कहा है कि वह पूर्व में हुए अनुबंध के आधार पर ही प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाए। अदालत ने पूर्व का अनुबंध निरस्त करने के कारणों की जांच करने के आदेश दिए हैं, ताकि जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय की जा सके। अदालत ने मुख्य सचिव को कहा है कि वे दोषी अफसरों पर दो माह में उचित कार्रवाई करें। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश जेसीएल इंफ्रा प्रा. लि. की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि प्रथमदृष्टया प्रभारी अधिकारी की ओर से अदालत में गलत बयानबाजी की गई है, जिसके तथ्य रिकॉर्ड से अलग पाए गए हैं। ऐसे में सक्षम अधिकारी कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करें।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को निष्पक्ष और तर्कसंगत तरीके से काम करना होगा। राजनीतिक कारणों से सरकार अपने संविदात्मक दायित्वों से बच नहीं सकती है। जेडीए एक तरफ कह रहा है कि कंपनी की वजह से देरी हुई, लेकिन दूसरी ओर जेडीए ने बिना जुर्माने के कपनी को उसकी बैंक गारंटी लौटा दी। यह कृत्य अदालत को गुमराह करने वाला है। याचिका में कहा गया कि जेडीए ने ओटीएस चोराहे को सिग्नल फ्री और सौन्दर्यीकरण कराने को लेकर टेंडर निकाले। याचिकाकर्ता को टेंडर मिलने के बाद कंपनी को 6 जनवरी 2023 से 5 जनवरी, 2024 तक काम पूरा करना था। इसी बीच सरकार बदलने के बाद जेडीए ने अनुबंध की शर्तों का हवाला देते हुए 24 अप्रैल, 2024 को ठेका वापस ले लिया। इसके बाद 16 दिसंबर को याचिकाकर्ता की बैंक गारंटी भी वापस कर दी। वहीं 3 अप्रैल, 2025 को डीपीआर बनाने के लिए नया टेंडर जारी कर दिया। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इसको चुनौती देते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता को दिया ठेका बिना कारण वापस लिया गया है, जबकि कंपनी ने ड्रॉइंग्स और डिजाइन तैयार कर अनुमोदन के लिए पेश कर दिए थे। उनकी ओर से प्रोजेक्ट के लिए पर्याप्त संसाधन जुटा लिए गए थे, लेकिन जरूरी अनुमतियां व साइट पर जमीन मुहैया नहीं कराने के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका। इसके अलावा नई डीपीआर के लिए टेंडर निकालना पहले से तैयार डीपीआर और प्रोजेक्ट को निरस्त करने जैसा है। इसका विरोध करते हुए जेडीए के अधिवक्ता अमित कुडी ने कहा कि याचिकाकर्ता को कई मौके देने के बाद भी काम शुरू नहीं होने पर नियमानुसार ठेका निरस्त किया गया है। इसके अलावा अब वहां 184 करोड़ रुपए के बजाए 83 करोड़ रुपए की लागत से फ्लाईओवर बनना है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने फ्लाईओवर बनाने के लिए जारी डीपीआर को रद्द कर पुराने अनुबंध के आधार पर प्रोजेक्ट पूरा करने को कहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:33:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निर्माण में अधिग्रहण प्रक्रिया की स्वीकृति का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[शिलान्यास के तीन माह बाद भी शुरु नहीं हो सका मथुराधीश कोरिडोर निर्माण कार्य।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/awaiting-approval-for-land-acquisition-process/article-155646"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/nirman-me-adhigrahan-prakriya-ki-swikruti-ka-intezar...kota-news-01.06.2026.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। धार्मिक पर्यटन के रूप में कोटा की पहचान बनाने के लिए किए जाने वाले मथुराधीश कोरिडोर निर्माण व सौन्दर्यीकरण का कार्य शिलान्यास के तीन माह बाद भी शुरु नहीं हो सका है। यह काम अभी तक अधिग्रहण की स्वीकृति के इंतजार में अटका हुआ है।<br />कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से मथुराधीश कोरिडोर का निर्माण व विकास और सौन्दर्यीकरण किया जाएगा। इस पर कुल 66.25 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। इसके पहले चरण के कार्य का शिलान्यास 22 फरवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया था। उसके बाद से अभी तक तीन माह से अधिक का समय हो गया है लेकिन काम शुरु नहीं हो सका है।</p>
<p><strong>यह होना है काम</strong><br />मथुराधीश कोरिडोर निर्माण के तहत पाटनपोल स्थित मंदिर के आस-पास की सड़कों को चौड़ा करना, मंदिर के परिक्रमा मार्ग का सौन्दर्यीकरण, पार्किंग सुविधा व बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए होटल निर्माण समेत कई कार्य किए जाने हैं। पहले चरण में 18.24 करोड़ की लागत से सिविल कार्य किए जाएंगे। वहीं सड़क चौड़ीकरण के तहत मार्ग में आने वाले मकानों, दुकानों, धर्मशालाओं और मंदिर परिसर की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।</p>
<p><strong>200 मीटर लम्बा व 40 फीट बनेगा एलिवेटेड रोड</strong><br />केडीए की ओर से किए जाने वाले इस कार्य के तहत पहले चरण में मंदिर को चम्बल रिवर फ्रंट से जोडऩे के लिए करीब 200 मीटर लम्बा व 40 फीट चौड़ा एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा। पहले यह रोड मंदिर से भट्टजी घाट की पुलिया तक ही प्रस्तावित था। अब इसे रिवर फ्रंट के गणेश पोल घाट तक बढ़ाया जाएगा। इससे मंदिर व रिवर फ्रंट के बीच एक नया कनेक्टिंग कोरिडोर विकसित हो जाएगा।वहीं मंदिर के पीछे स्थित नामदेव धर्मशाला से भट्टजी घाट तक सड़क को 40 फीट और परिक्रमा मार्ग को 6 से 12 मीटर चौड़ा किया जाएगा।</p>
<p><strong>अधिग्रहण पर खर्च होंगे करीब 30 करोड़ रुपए</strong><br />कोरिडोर निर्माण के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए 15 से अधिक मकानों व दुकानों के साथ ही मंदिर की 15 हजार वर्गफीट जमीन को अग्रिहण किया जाना है। अधिग्रहण के मुआवजे पर करीब 30 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जबकि सौन्दर्यीकरण पर 36.25 करोड़ रुपए खर्च होंगे।</p>
<p><strong>व्यस्त बाजार व आवासीय क्षेत्र</strong><br />इधर सूत्रों के अनुसार मथुराधीश मंदिर पुराने शहर के पाटनपोल में स्थित है। इसके कोरिडोर का विकास करने के लिए मार्ग में आने वाले मकानों व दुकानों को अधिग्रहित किया जाना है। जबकि इस क्षेत्र में व्यस्त बाजार व आवासीय क्षेत्र है। इस कारण से अधिग्रहण में केडीए अधिकारियों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण से अभी तक काम भी शुरु होने में समय लग रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मथुराधीश कोरिडोर निर्माण के पहले चरण के काम का शिलान्यास हो गया है। इस काम के लिए जिन मकानों व दुकानों और धर्मशालाओं व जमीन का अधिग्रहण किया जाना है उसके मुआवजे के लिए 30 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजा हुआ है। वहां से स्वीकृति मिलने का इंतजार है। स्वीकृति मिलने के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरु हो सकेगा।<br /><strong>- मुकेश चौधरी, सचिव, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:35:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस-कजाकिस्तान परमाणु समझौता: इस दशक में शुरू होगा पहला न्यूक्लियर प्लांट, वीवीईआर-1200 रिएक्टरों से बनेगी बिजली</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी परमाणु कंपनी रोसाटॉम ने इस दशक (2030) के भीतर कजाकिस्तान में अपना पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने का लक्ष्य रखा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अस्ताना यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इस प्लांट में रूस निर्मित दो वीवीईआर-1200 रिएक्टर इकाइयां लगाई जाएंगी, जिससे ईंधन आपूर्ति और रखरखाव में सहयोग बढ़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-kazakhstan-nuclear-agreement-first-nuclear-plant-will-start-in-this/article-155374"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/nuclear-fusion-16x9.webp" alt=""></a><br /><p>अस्ताना। रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम का इस दशक के भीतर कजाकिस्तान में परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण का लक्ष्य है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलेक्सी लिखाचेव ने गुरुवार को यह जानकारी दी। पत्रकारों ने लिखाचेव से पूछा कि कजाकिस्तान में परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए पहली कंक्रीट डालने की समयसीमा क्या होगी। तब उन्होंने कहा, "हम कोशिश करेंगे कि यह काम मौजूदा दशक के भीतर शुरू हो जाए।"</p>
<p>रोसाटॉम ने एक बयान में यह जानकारी देते हुए कहा कि रूस और कजाकिस्तान के बीच परमाणु ऊर्जा संयंत्र निर्माण पर हुए अंतर-सरकारी समझौते में परियोजना के दौरान सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें रखरखाव और परमाणु ईंधन की आपूर्ति भी शामिल है।</p>
<p>कजाकिस्तान में परमाणु ऊर्जा संयंत्र निर्माण के लिए सहयोग के मूल सिद्धांतों और शर्तों से संबंधित समझौते पर कल रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अस्ताना यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए। कजाकिस्तान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने 14 जून 2025 को कहा था कि रोसाटॉम देश के पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक समूह का नेतृत्व करेगा। इस संयंत्र में दो बिजली इकाइयां होंगी, जिनमें रूस में निर्मित वीवीईआर-1200 रिएक्टर लगाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:57:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओडिशा में दर्दनाक हादसा : निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक में दम घुटने से 6 लोगों की मौत, सीएम ने की अनुग्रह राशि की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[ओडिशा के कालाहांडी जिले में निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक की शटरिंग हटाते समय दम घुटने से छह मजदूरों की मौत हो गई। हादसा जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण हुआ। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को ₹4-4 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tragic-accident-in-odisha-6-people-died-due-to-suffocation/article-155042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/odisha.png" alt=""></a><br /><p>भुवनेश्वर। ओडिशा के कालाहांडी जिले में मंगलवार सुबह दर्दनाक हादसे में एक गांव में निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक के भीतर फंसने से कम से कम छह लोगों की दम घुटने से मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना जिले के जहां मदनपुर-रामपुर ब्लॉक के तहत आने वाले गौड़ करलाखुंटा गांव में तब हुई जब पीड़ित मजदूर निर्माणाधीन ढांचे से शटरिंग की सामग्री हटाने के लिए उसके अंदर उतरे थे। आशंका जताई जा रही है कि टैंक के भीतर ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस बनने के कारण उनका दम घुट गया। आनन-फानन में सभी पीड़ितों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।</p>
<p>पुलिस ने इस संबंध में अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज कर लिया है और त्रासदी के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की है। मुख्यमंत्री ने एक बयान जारी कर मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 18:03:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मोईकलां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन में गहरी दरारों ने बढ़ाई चिंता, ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[पिलर्स से उखड़कर गिरने लगा सीमेंट और कंक्रीट, स्टाफ व मरीजों को अनहोनी की आशंका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/deep-cracks-in-moikalan-primary-health-center-building-raise-alarms/article-155028"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)91.png" alt=""></a><br /><p>मोईकलां। मोईकलां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन की निर्माण गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल भवन के मुख्य कॉलम और दीवारों में गहरी दरारें आने से कभी भी बड़ी अनहोनी होने की आशंका जताई जा रही है। भवन की जज स्थिति के चलते यहां कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों और इलाज के लिए आने वाले मरीजों में भय का माहौल बना हुआ है।जानकारी के अनुसार अस्पताल भवन के मुख्य लोड-बेयरिंग कॉलम में कई स्थानों पर चौड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं। पिलर्स से सीमेंट और कंक्रीट उखड़कर गिरने लगा है, जिससे भवन की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा मुख्य प्रवेश द्वार की दीवारों में भी दरारें आ चुकी हैं और प्लास्टर टूटने लगा है। बताया जा रहा है कि भवन के आसपास की जमीन भी कुछ स्थानों पर धंसती नजर आ रही है।</p>
<p><strong>शुरुआत से विवादों में रहा निर्माण कार्य</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन निर्माण शुरू होने के समय से ही घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।तत्कालीन सरकार के दौरान भवन हैंडओवर किए जाने के समय भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने गुणवत्ता को लेकर विरोध जताते हुए जांच की मांग की थी, लेकिन उस समय मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब भवन में आई दरारों ने उन आशंकाओं को फिर से उजागर कर दिया है।</p>
<p><strong>डर के साए में काम कर रहा स्टाफ</strong><br />अस्पताल में तैनात डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी भय के माहौल में काम करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि भवन की हालत लगातार खराब होती जा रही है और किसी भी समय हादसा हो सकता है। रोजाना सैकड़ों मरीज और उनके परिजन यहां आते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों से भवन की तकनीकी जांच करवाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पीएचसी भवन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की जांच के लिए बीसीएमएचओ को निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- दीपक महावर, एसडीएम, सांगोद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:17:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं को मिली रफ्तार, आरएसआरडीसी बोर्ड बैठक में ₹4938 करोड़ के ऋण प्रस्ताव को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी की अध्यक्षता में आयोजित RSRDC की 131वीं बैठक में कोटपुतली-किशनगढ़ और ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेस-वे के भूमि अधिग्रहण के लिए ₹4938 करोड़ स्वीकृत किए गए। इसके अलावा केकड़ी-देवली सड़क अपग्रेडेशन हेतु ₹460 करोड़ की मंजूरी दी गई। डिप्टी सीएम ने निर्माण कार्यों में आमजन की सुविधा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/expressway-projects-gain-momentum-loan-proposal-worth-%E2%82%B94938-crore-approved/article-154871"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/diya-kumari1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर । उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने रविवार को राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (आरएसआरडीसी) की 131वीं बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश की प्रमुख एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के लिए ₹4938 करोड़ के ऋण प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। यह राशि कोटपुतली–किशनगढ़ एवं ब्यावर–भरतपुर एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण कार्यों को गति देने के लिए स्वीकृत की गई है।</p>
<p>बैठक में उप मुख्यमंत्री ने नसीराबाद–सरवाड़–केकड़ी–देवली सड़क (एसएच-26) के अपग्रेडेशन, केकड़ी बाईपास निर्माण तथा सड़क को दो लेन से चार लेन में विकसित करने हेतु ₹460 करोड़ के ऋण प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इसके अलावा गोटन–बिलाड़ा–पुण्डल सड़क की मरम्मत के लिए ऋण राशि को ₹17 करोड़ से बढ़ाकर ₹27.87 करोड़ करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 की बैलेंस शीट को अंतिम रूप देने सहित कुल 33 नियमित और 2 अतिरिक्त प्रस्तावों को अनुमोदित किया गया।</p>
<p>उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क परियोजनाओं के निर्माण में उपयोगिता और आमजन की सुविधा को प्राथमिकता दी जाए, ताकि परियोजनाएं अधिक लाभकारी और प्रभावी साबित हों।</p>
<p>आरएसआरडीसी सभागार में आयोजित बैठक में सार्वजनिक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता, परिवहन विभाग के प्रमुख शासन सचिव भवानी सिंह देथा, वित्त विभाग की शासन सचिव टीना सोनी, सार्वजनिक निर्माण विभाग के शासन सचिव डी.आर. मेघवाल, सीई (भवन) सत्येन्द्र सिंह, आरएसआरडीसी के प्रबंध निदेशक सुनील जयसिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 17:17:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संशोधित PKC-ERCP परियोजना में तेजी, चंबल जलसेतु के 3000 पाइलों का कार्य पूरा </title>
                                    <description><![CDATA[वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन की बैठक में संशोधित PKC-ERCP परियोजना की प्रगति रिपोर्ट पेश की गई। नौनेरा पंप हाउस की खुदाई जारी है और चंबल जलसेतु के लिए 5,000 में से 3,000 पाइलों का निर्माण पूरा हो चुका है। मेज से गलवा तक सुरंग खुदाई और फीडर निर्माण कार्य भी तेजी से जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/revised-pkc-ercp-project-expedited-work-of-3000-piles-of-chambal/article-154698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/secratrait11.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन लिमिटेड की 12वीं बैठक में संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी (PKC-ERCP) परियोजना के तहत अब तक हुए कार्यों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के विभिन्न पैकेजों में निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। जानकारी के अनुसार, नौनेरा पंप हाउस के लिए नींव की खुदाई का कार्य जारी है। वहीं चंबल जलसेतु पर लगाए जाने वाले कुल 5060 पाइलों में से 3000 पाइलों का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा 8 पाइल कैप का कांक्रीटीकरण कार्य पूर्ण हो गया है, जबकि 4 पाइल कैप का सुदृढ़ीकरण कार्य भी संपन्न कर लिया गया है।</p>
<p>बैठक में बताया गया कि नौनेरा बैराज से मेज तक फीडर निर्माण के लिए लगभग 20 प्रतिशत मिट्टी कार्य पूरा हो चुका है। वर्तमान में मेज से गलवा तक दो स्थानों पर सुरंग की खुदाई का कार्य प्रगति पर है। इस पैकेज के अंतर्गत 12 किलोमीटर लंबाई में 4 संरचनाओं और फीडर निर्माण का कार्य भी लगातार जारी है। अधिकारियों ने परियोजना कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 16:20:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : अडूसा-पालकियां मार्ग से हटने लगा अतिक्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[करीब एक वर्ष पूर्व 1 करोड़ 74 लाख रुपये की लागत से निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--encroachments-being-cleared-from-the-adusa-palkiyan-route/article-154054"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(6)12.png" alt=""></a><br /><p>कुंदनपुर। अडूसा से पालकियां तक बनने वाली बहुप्रतीक्षित डामर सड़क मार्ग में बाधा बने अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई शुक्रवार से शुरू हो गई। 8 मई को दैनिक नवज्योति में प्रकाशित 'शिलान्यास के एक साल बाद भी नहीं बनी अडूसा-पालकियां सड़क' खबर के बाद प्रशासन हरकत में आया और पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचकर कार्रवाई प्रारंभ की गई।</p>
<p>जानकारी के अनुसार राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा करीब एक वर्ष पूर्व 1 करोड़ 74 लाख रुपए की लागत से सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया था। शिलान्यास होने के बावजूद कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा था। दैनिक नवज्योति में प्रकाशित खबर के बाद ग्रामीणों की समस्या और आक्रोश प्रशासन तक पहुंचा। ग्रामीणों ने पहले भी विरोध प्रदर्शन कर सड़क निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग उठाई थी। किसानों का कहना था कि रास्ता बाधित होने से खाद, बीज और कृषि मशीनरी खेतों तक पहुंचाने में भारी परेशानी हो रही थी।</p>
<p><strong>पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई</strong><br />शुक्रवार सुबह राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड की टीम, राजस्व विभाग एवं पुलिस जाप्ता अडूसा गांव पहुंचा। अधिकारियों ने सीमाज्ञान 'करवाने के बाद जेसीबी मशीन की सहायता से रास्ते में बने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू करवाई। रास्ते को समतल करने के लिए मिट्टी भी डाली गई।</p>
<p><strong>ग्रामीणों में खुशी का माहौल</strong><br />मौके पर संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे तथा भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कार्रवाई शुरू होने के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल देखा गया। लोगों ने उम्मीद जताई कि अब लंबे समय से लंबित सड़क निर्माण कार्य जल्द पूरा होगा और क्षेत्रवासियों को राहत मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 15:05:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पिंक टॉयलेट के नाम पर पुरानी सुविधा खत्म : सुविधा के लिए दर-दर भटक रहे ग्रामीण, 15 दिन से काम ठप</title>
                                    <description><![CDATA['पिंक टॉयलेट' का निर्माण तो कागजों में शुरू हो गया, लेकिन धरातल पर प्रशासन ने 15 दिन पूर्व एकमात्र चालू शौचालय को भी ध्वस्त कर दिया। नतीजा यह है कि आज भीषण गर्मी के बीच व्यापारी, राहगीर और विशेषकर ग्रामीण महिलाएं बुनियादी सुविधा के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/existing-facility-scrapped-in-the-name-of--pink-toilets---work-stalled-for-15-days/article-152869"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/pink-toilet-ke-naam-par-purani-suvidha-khatm,-15-din-se-kaam-tap...atru.-dist.-baran.-06may2026.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><p>अटरू। अटरू कस्बे के हृदय स्थल और मुख्य व्यापारिक केंद्र हाट चौक में विकास की योजना आमजन के लिए परेशानी का सबब बन गई है। महिलाओं को सुविधा देने के उद्देश्य से 'पिंक टॉयलेट' का निर्माण तो कागजों में शुरू हो गया, लेकिन धरातल पर प्रशासन ने 15 दिन पूर्व एकमात्र चालू शौचालय को भी ध्वस्त कर दिया। नतीजा यह है कि आज भीषण गर्मी के बीच व्यापारी, राहगीर और विशेषकर ग्रामीण महिलाएं बुनियादी सुविधा के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>विकास की अधूरी तैयारी, ढहाया पुराना, 'अधर' में नया.....</strong><br />प्रशासन द्वारा 24 अप्रैल को हाट चौक स्थित पुराने शौचालय को इस वादे के साथ तोड़ा गया था कि यहां जल्द ही आधुनिक पिंक टॉयलेट बनेगा लेकिन विडंबना देखिए कि 15 दिन बीत जाने के बाद भी मौके पर निर्माण कार्य गति नहीं पकड़ सका है। बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के पुराने ढांचे को जमींदोज करने के फैसले ने प्रशासनिक दूरदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p><strong>प्रशासनिक पक्ष और आश्वासन</strong><br />प्रशासन का कहना है कि फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में महिला पार्क के पास स्थित सुलभ शौचालय का उपयोग किया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार नए पिंक टॉयलेट के निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू करने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p><strong>मुख्य चुनौतियां और मांग</strong><br />हाट चौक से सुलभ शौचालय की दूरी अधिक होने के कारण विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और ग्रामीणों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं होता, तब तक चौक के आसपास अस्थायी या मोबाइल शौचालय की व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही लोगों ने यह भी कहा कि पिंक टॉयलेट जैसी योजना महिलाओं की सुविधा और सम्मान से जुड़ी है, लेकिन निर्माण में हो रही देरी उनकी गरिमा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। ऐसे में प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर कार्य शुरू कर जल्द पूरा करना चाहिए।</p>
<p><strong>साप्ताहिक हाट में महिलाओं के लिए मुश्किल बढ़ीं</strong><br />हाट चौक कस्बे का वह केंद्र है, जहां साप्ताहिक बाजार के दौरान अटरू सहित दर्जनों गांवों की भीड़ उमड़ती है। खरीदारी के लिए आने वाली महिलाओं को शौचालय नहीं होने के कारण कठिनाई झेलनी पड़ रही है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन ने मलबा डालने और सुविधा छीनने में तो तत्परता दिखाई, लेकिन निर्माण शुरू करने में सुस्ती बरत रहे हैं।</p>
<p>निशान, रंगत करवाकर नींव की खुदाई का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।<br /><strong>-मनोज कुमार सिंह, ठेकेदार</strong></p>
<p>एक-दो दिन के भीतर निर्माण कार्य सुचारू रूप से चालू करवा दिया जाएगा।<br /><strong>- योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी, ईओ, नगरपालिका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 15:30:52 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : छावनी में शुरु हुआ सीसी सड़क का निर्माण कार्य, हादसों व जाम से जल्द मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[पहले से बनी डामर की सड़क को कई दिन से खोदकर छोड़ा हुआ था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---construction-of-cc-road-begins-in-chhavani/article-152855"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। छावनी मेन रोड पर सीसी सड़क बनाने का काम संवेदक द्वारा मंगलवार को शुरु कर दिया है। जिससे जल्दी ही सड़क का काम पूरा होने पर यहां से गुजरने वाले वाहनों को न तो जाम का सामना करना पड़ेगा और न ही हादसों का खतरा रहेगा। कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा संवेदक के माध्यम से छावनी मेन रोड स्थित डॉ. राम कुमार सर्किल पर सीसी सड़क का निर्माण कार्य शुरु कराया गया है। संवेदक द्वारा यहां सीसी सड़क बनाने के लिए पहले से बनी डामर की सड़क को कई दिन से खोदकर छोड़ा हुआ था। जिससे वहां सड़क उबड़ खाबड़ होने के साथ ही सीवरेज के चैम्बर भी बाहर की तरफ अधिक ऊपर निकल गए थे। जिससे वहां से गुजरने वाले वाहन दिन में हादसों का शिकार हो रहे हैं। साथ ही मेन रोड होने से यहां चारों तरफ से वाहनों के आने के कारण दिनभर में कई बार जाम की स्थिति बन रही थी।</p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति ने उठाया था मामला</strong><br />छावनी में कई दिन से खुदी सड़क से स्थानीय निवासियों व राहगीरों और व्यापारियों को रही परेशानी को देखते हुए इस मामले को दैनिक नवज्योति ने उठाया था। समाचार पत्र में 5 मई के अंक में पेज 4 पर' सीसी के लिए खोदी सड़क, जाम व हादसों का खतरा ,शीर्षक से प्रकाशित किया था। जिसमें स्थानीय लोगों के साथ ही वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों की पीड़ा को उजागर किया गया था।समाचार प्रकाशित होते ही केडीए अधिकारी व संवेदक हरकत में आए और मंगलवार को सुबह ही सीसी सड़क बनाने का काम शुरु कर दिया। केडीए अधिकारियों का कहना है कि सड़क का काम शुरु कर दिया है। मेन रोड होने से इस सड़क को सूखने में कई दिन का समय लगने से रास्ते को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ सकता है। जल्दी ही सड़क का काम पूरा हो जाएगा। जिससे लोगों को राहत मिलेगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 14:18:27 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का  : चंबल के बूढ़े बांधों को अब मिलेगी संजीवनी, जीर्णोद्धार पर 225 करोड़ रुपए की आएगी लागत</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा बैराज, राणाप्रताप सागर व जवाहर सागर में होंगे सुधार कार्य।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--chambal-s-aging-dams-to-receive-a-new-lease-of-life/article-151942"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/asar-khabar-ka---chambal-k-bodhe-bandhon-ko-ab-milegi-sanjevane...kota-news-28.04.2026.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल नदी के बांधों के लिए उन्नयन की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राणा प्रताप सागर बांध, जवाहर सागर बांध और कोटा बैराज के आधुनिकीकरण के लिए लगभग 225 करोड़ रुपए की लागत से कार्य कराए जाएंगे। बांधों के पुनर्वास और सुरक्षा सुधार के लिए यह कार्य डैम रिहैबिलिटेशन एंड इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिज्प फेज-2) के तहत होंगे। इनके लिए निविदा जारी कर दी गई है। इससे क्षेत्र में जल प्रबंधन, सिंचाई और विद्युत उत्पादन को अधिक सुदृढ़ किया जा सके।</p>
<p><strong>60 साल बाद कोटा बैराज के गेटों का होगा रिप्लेसमेंट</strong><br />कोटा जिले की लाडपुरा तहसील स्थित कोटा बैराज के वर्ष 1960 में निर्माण के बाद से हाइड्रो-मैकेनिकल कार्यो में कोई बड़ा रिप्लेसमेंट/ओवरहालिंग कार्य नहीं हुआ है। इसके 19 रेडियल गेट और 2 स्लुइस गेट की स्थिति ठीक नहीं है। स्लुइस गेट कई वर्षों से निष्क्रिय हैं। अब इस प्रोजेक्ट के तहत 19 रेडियल गेटों, 2 स्लुइस गेटों, 2 सैट स्टॉपलोग गेट, गैन्ट्री क्रेन और विद्युत उपकरणों को बदलने का कार्य करते हुए व्यापक आधुनिकीकरण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कोटा और बूंदी जिलों की पेयजल और सिंचाई आवश्यकताओं को देखते हुए सुधार कार्यों के दौरान भी बैराज का जल स्तर 854.50 फीट पर बना रहेगा। सभी कार्य पूर्ण जल भराव की स्थिति में ही सम्पादित होंगे।</p>
<p><strong>बिना विद्युत उत्पादन बाधित किए होगा सुदृढ़ीकरण</strong><br />चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित राणा प्रताप सागर बांध, चम्बल परियोजना का प्रमुख जल भंडारण केन्द्र है। यह बांध पेयजल और सिंचाई के लिए जल उपलब्धता के साथ-साथ 172 मेगावाट की विद्युत उत्पादन क्षमता रखता है। इसके राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए रखरखाव और उन्नयन कार्य कराए जा रहे हैं। बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति को बिना बाधित किए इस बांध के 17 वर्टिकल क्रेस्ट गेटों, गेन्ट्री क्रेन, 4 स्लुइस गेटों, स्टॉपलोग गेटों को बदलने और स्काई-जंप बकेट की मरम्मत का कार्य किया जाएगा। ये वर्टिकल गेट 18408 क्यूमेक्स तक की बाढ़ निकासी क्षमता रखते हैं।</p>
<p><strong>जवाहर सागर बांध में होगा तकनीकी उन्नयन</strong><br />बूंदी जिले के तालेड़ा ब्लॉक में राणा प्रताप सागर बांध के नीचे (डाउनस्ट्रज्ीम में) स्थित जवाहर सागर बांध वर्ष 1972 में बना था। लगभग 33.66 मीटर ऊंचे बांध की सुरक्षा और 99 मेगावाट क्षमता वाले पावर हाउस की दक्षता बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास और तकनीकी सुधार किए जाएंगे। यह संरचना चंबल नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने और डाउनस्ट्रीम जल प्रबंधन में अहम भूमिका निभाती है। बांध में 15.24 मीटर चौड़ाई एवं 13.41 मीटर ऊंचाई के 12 रेडियल गेट हैं। इसकी भराव क्षमता 67.11 एमसीयूएम है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार परियोजना के सभी कार्य उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और समयबद्ध पूर्ण किए जाएंगे। तीनों बांधों के उन्नयन से जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ उनकी आयु में भी वृद्धि होगी। हाड़ौती क्षेत्र की सिंचाई और पेयजल सुरक्षा भी लम्बे समय तक सुनिश्चित रहेगी और शहरी विकास को भी गति मिलेगी।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />चंबल नदी पर बने प्रदेश के प्रमुख बांध कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणाप्रताप सागर के सम्बंध में छह साल से सर्वे लेकिन काम नहीं फाइलों में कैद चबंल के बांधों का जीर्णोद्धार शीर्षक से दो अप्रैल को दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि इन बांधों के नवजीवन के लिए करोड़ों रुपए का बजट स्वीकृत हो चुका है। हर साल निविदाएं जारी होती हैं, लेकिन कार्य शुरू होने से पहले ही प्रक्रिया फिर किसी ने किसी कारण से अटक जाती है। इन बांधों के सुधार को लेकर पिछले 5-6 वर्षों से लगातार सर्वे और तकनीकी अध्ययन किए जा रहे हैं। राणा प्रताप सागर बांध के स्लूज गेट बदलने के लिए अंडरवाटर सर्वे तक पूरा हो चुका है। केंद्रीय जल आयोग सहित विभिन्न एजेंसियों के विशेषज्ञों ने भी निरीक्षण कर रिपोर्ट दी, लेकिन इसके बावजूद काम शुरू नहीं हो सका है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:33:29 +0530</pubDate>
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