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                <title>project - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>संशोधित PKC-ERCP परियोजना में तेजी, चंबल जलसेतु के 3000 पाइलों का कार्य पूरा </title>
                                    <description><![CDATA[वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन की बैठक में संशोधित PKC-ERCP परियोजना की प्रगति रिपोर्ट पेश की गई। नौनेरा पंप हाउस की खुदाई जारी है और चंबल जलसेतु के लिए 5,000 में से 3,000 पाइलों का निर्माण पूरा हो चुका है। मेज से गलवा तक सुरंग खुदाई और फीडर निर्माण कार्य भी तेजी से जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/revised-pkc-ercp-project-expedited-work-of-3000-piles-of-chambal/article-154698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/secratrait11.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन लिमिटेड की 12वीं बैठक में संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी (PKC-ERCP) परियोजना के तहत अब तक हुए कार्यों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के विभिन्न पैकेजों में निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। जानकारी के अनुसार, नौनेरा पंप हाउस के लिए नींव की खुदाई का कार्य जारी है। वहीं चंबल जलसेतु पर लगाए जाने वाले कुल 5060 पाइलों में से 3000 पाइलों का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा 8 पाइल कैप का कांक्रीटीकरण कार्य पूर्ण हो गया है, जबकि 4 पाइल कैप का सुदृढ़ीकरण कार्य भी संपन्न कर लिया गया है।</p>
<p>बैठक में बताया गया कि नौनेरा बैराज से मेज तक फीडर निर्माण के लिए लगभग 20 प्रतिशत मिट्टी कार्य पूरा हो चुका है। वर्तमान में मेज से गलवा तक दो स्थानों पर सुरंग की खुदाई का कार्य प्रगति पर है। इस पैकेज के अंतर्गत 12 किलोमीटर लंबाई में 4 संरचनाओं और फीडर निर्माण का कार्य भी लगातार जारी है। अधिकारियों ने परियोजना कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 16:20:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पेट्रोल, डीज़ल एवं गैस संकट पर ARTIA का मंथन, ऊर्जा आत्मनिर्भरता हेतु वैकल्पिक ऊर्जा परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्री एसोसिएशन (आरतिया) ने जयपुर में पेट्रोल, डीजल और गैस की बढ़ती कीमतों पर मंथन किया। संगठन ने केंद्र सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि पेट्रोलियम पर निर्भरता घटाने के लिए बायोचार, कोयला गैसीकरण और वेस्ट-टू-मीथेन जैसी वैकल्पिक ऊर्जा परियोजनाओं को तुरंत मिशन मोड पर शुरू किया जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/artias-brainstorming-on-petrol-diesel-and-gas-crisis-demand-for/article-154493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/artoia.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्री एसोसिएशन (आरतिया) द्वारा पेट्रोल, डीज़ल एवं रसोई गैस की बढ़ती कीमतों, ऊर्जा लागत में वृद्धि तथा इसके व्यापार, उद्योग एवं आमजन पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर आयोजित मंथन में विष्णु भूत, कमल कंदोई, आशीष सराफ, प्रेम बियानी, श्रवण पारीक, संजय शर्मा, पंकज गोयल (दीप ज्योति), हरि शर्मा, हनीफ टांक, प्रकाश छाबड़ा, के. एस. राठौड़, सूर्य प्रकाश शर्मा, संजीव बंसल, नीरज खदरिया, सीए महेंद्र दानी आदि उपस्थित रहे। बैठक में संगठन ने केंद्र सरकार को विस्तृत सुझाव प्रेषित करते हुए कहा कि बढ़ती ईंधन लागत अब केवल आर्थिक चुनौती नहीं, बल्कि व्यापार, परिवहन, कृषि, लघु उद्योग एवं आम नागरिकों के दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाला गंभीर विषय बन चुकी है।</p>
<p>ARTIA ने देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए बायोचार, कोयला गैसीकरण एवं अपशिष्ट-से-मीथेन (Waste-to-Methane) जैसी वैकल्पिक ऊर्जा परियोजनाओं को मिशन मोड पर शीघ्र लागू करने की मांग की। संगठन का मानना है कि फसल अवशेष, जैविक कचरे एवं उपलब्ध संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग कर पेट्रोलियम उत्पादों एवं गैस पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:09:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रेट निकोबार परियोजना पर कांग्रेस ने जताई चिंता: जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री को लिखा पत्र, आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर ग्रेट निकोबार परियोजना के मौजूदा स्वरूप पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर व्यावसायिक बदलावों से पर्यावरण और आदिवासियों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए वैकल्पिक सैन्य परिसंपत्तियों के विस्तार का सुझाव दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-expressed-concern-over-the-great-nicobar-project-jairam-ramesh/article-154130"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने ग्रेट निकोबार परियोजना के मौजूदा स्वरूप पर राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुनर्विचार की आवश्यकता जताते हुए कहा है कि इससे पर्यावरणीय नुकसान तथा आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन की आशंका है। पार्टी का कहना है कि वह लगातार इस संबंध में सरकार को अवगत करा रही है, लेकिन उसकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को बताया कि उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम को पत्र लिखने के बाद अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि सरकार एक व्यावसायिक परियोजना को सुरक्षा जरूरतों के आधार पर उचित ठहराने की कोशिश कर रही है, जबकि इसके पर्यावरणीय प्रभावों तथा आदिवासी हितों पर पड़ने वाले असर को लेकर लगातार आलोचना हो रही है।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि देश की रक्षा क्षमता मजबूत करने पर कोई मतभेद नहीं है, लेकिन ग्रेट निकोबार के कैंपबेल बे स्थित आईएनएस बाज के रनवे विस्तार और नौसैनिक जेट्टी जैसी योजनाएं कम पर्यावरणीय नुकसान के साथ बेहतर विकल्प हो सकती हैं। उन्होंने आईएनएस कार्दीप, आईएनएस कोहासा, आईएनएस उत्क्रोश, आईएनएस जरावा और कार निकोबार वायुसेना स्टेशन जैसी मौजूदा सैन्य परिसंपत्तियों के विस्तार का भी सुझाव दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि परियोजना में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और टाउनशिप से सैन्य क्षमता नहीं बढ़ती, फिर भी इन्हें सुरक्षा कारणों से उचित ठहराया जा रहा है। उन्होंने रक्षा मंत्री से परियोजना के मौजूदा स्वरूप पर पुनर्विचार करने और नौसेना अधिकारियों द्वारा सुझाए गए विकल्पों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 13:08:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी का टिहरी दौरा: 1000 मेगावाट परियोजना का करेंगे लोकार्पण, शासन और प्रशासन स्तर पर तैयारियां तेज</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द ही टिहरी का अपना पहला दौरा करेंगे। वे यहाँ 1000 मेगावाट की 'पंप स्टोरेज परियोजना' राष्ट्र को समर्पित करेंगे और टिहरी मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखेंगे। यह यात्रा ऊर्जा भंडारण, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में उत्तराखंड के लिए एक विकास का नया अध्याय साबित होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modis-visit-to-tehri-will-inaugurate-1000-mw-project/article-153091"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi1.png" alt=""></a><br /><p>टिहरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहली बार उत्तराखंड के टिहरी जिले के दौरे पर पहुंच सकते हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मई के अंतिम सप्ताह अथवा जून के प्रथम सप्ताह में प्रधानमंत्री टिहरी पहुंचकर देश की महत्वपूर्ण 1000 मेगावाट क्षमता वाली टिहरी पंप स्टोरेज परियोजना का लोकार्पण करेंगे। इस संभावित दौरे को लेकर शासन और प्रशासन स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री का यह दौरा राजनीतिक से अधिक विकास और ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों पर केंद्रित रहेगा। टिहरी पंप स्टोरेज परियोजना को देश की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं में माना जा रहा है। यह परियोजना बिजली उत्पादन के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण और राष्ट्रीय ग्रिड संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञ इसे भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से "गेमचेंजर" मान रहे हैं।</p>
<p>इसके अलावा श्री मोदी इस दौरान टिहरी मेडिकल कॉलेज की आधारशिला भी रख सकते हैं तथा क्षेत्र के विकास से जुड़ी कई अन्य योजनाओं की घोषणाएं होने की भी संभावना है। इससे टिहरी सहित आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद जताई जा रही है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले उत्तराखंड के कई महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थलों का दौरा कर चुके हैं, हालांकि टिहरी जिला अब तक प्रधानमंत्री के दौरे से अछूता रहा था।</p>
<p>स्थानीय विधायक किशोर उपाध्याय ने शुक्रवार को बताया कि प्रारंभ में यह कार्यक्रम दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे परियोजना के उद्घाटन के साथ प्रस्तावित था लेकिन टिहरी परियोजना के ऐतिहासिक महत्व और स्थानीय लोगों की भावनाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री ने स्वयं टिहरी आने की सहमति दी। उन्होंने कहा कि यह दौरा टिहरी के विकास को नई दिशा देने वाला साबित होगा। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने भी संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। पीएमओ की ओर से आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा का अब सभी को इंतजार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:55:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बजट के प्रस्ताव भिजवाते समय ही प्रोजेक्ट की लागत का सही आकलन करें अधिकारी : प्रोजेक्ट में अनावश्यक देरी ना हो, दिया कुमारी ने कहा- प्रोजेक्ट्स का समय पर पूरा होना जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को बजट प्रस्ताव भेजते समय प्रोजेक्ट लागत का सटीक आकलन करने के निर्देश दिए, ताकि देरी रोकी जा सके। निर्माण भवन में समीक्षा बैठक में उन्होंने बयाना बाइपास सहित कई लंबित परियोजनाओं की प्रगति पर नाराजगी जताई और जल्द पूरा करने को कहा। समयबद्ध कार्य से ही आमजन को लाभ मिलेगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/officials-should-correctly-estimate-the-cost-of-the-project-while/article-152500"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/6622-copy15.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने निर्देश दिए है कि अधिकारी बजट के प्रस्ताव भिजवाते समय ही प्रोजेक्ट की लागत का सही आकलन करें, ताकि प्रोजेक्ट में अनावश्यक देरी ना हो। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप बजट घोषणाओं को आमजन का लाभ मिल सके, इसके लिए प्रोजेक्ट्स का समय पर पूरा होना जरूरी है। दिया कुमारी शनिवार को निर्माण भवन में पीडब्ल्यूडी की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अलाइनमेंट का बारीकी से आकलन करें</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिया कुमारी ने बयाना बाइपास, बारां-अटरू आरओबी, जैतूपुरा-जयसिंहपुरा, भादरा बाइपास, नसीराबाद-सारवाड़-केकड़ी-देवली सड़क, मेज नदी पर हाई लेवल ब्रिज, सलूम्बर बाइपास सहित विभिन्न प्रोजेक्ट्स निर्माण में देरी के कारणों की समीक्षा कर इन्हें जल्द से जल्द चालू कराने के निर्देश दिए। बैठक में राज्य मंत्री मंजू बाघमार, विभाग के एसीएस प्रवीण गुप्ता, शासन सचिव डी आर मेघवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 14:28:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ग्रेट निकोबार द्वीप के आदिवासी प्रमुखों ने की राहुल गांधी से मुलाकात: ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का जताया कड़ा विरोध, बताया जीवन-यापन के तरीके और द्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रेट निकोबार के आदिवासी प्रमुखों ने राहुल गांधी से मिलकर प्रस्तावित मेगा प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे द्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और जनजातीय अस्तित्व के लिए खतरा बताया। राहुल गांधी ने उनके अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया, जबकि सोनिया गांधी ने इसे आदिवासियों के खिलाफ एक "सुनियोजित दुस्साहस" करार दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tribal-chiefs-of-great-nicobar-island-met-rahul-gandhi-expressed/article-147069"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rahul-gandhi3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ग्रेट निकोबार द्वीप के आदिवासी प्रमुखों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इस मौके पर आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के साथ ग्रेट निकोबार द्वीप के आदिवासी प्रमुखों ने श्री गांधी से मुलाकात की। आदिवासी प्रमुखों ने प्रस्तावित ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यह उनके जीवन-यापन के तरीके और द्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना की मंजूरी के दौरान उनकी सहमति भी उचित तरीके से नहीं ली गई। </p>
<p>कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और उनके अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए उनकी चिंताओं को उठाएगी। उल्लेखनीय है कि, कांग्रेस संसदीय दल अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को सुनियोजित दुस्साहस बताते हुए इसका विरोध जताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह परियोजना स्थानीय शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों के अस्तित्व को खत्म कर देगी, एक अखबार में लिखे लेख के जरिए सोनिया गांधी ने इसे आदिवासी अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करार दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 16:00:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कागज से धरातल तक आने में ही कई गुना बढ़ रही प्रोजेक्ट कॉस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[प्रोजेक्ट की डेड लाइन के कोई मायने ही नहीं, बढ़ता रहता है समय और बजट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/project-costs-are-multiplying-several-times-over-just-to-get-from-paper-to-reality/article-141859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/856.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong>  केस एक:</strong> नई धानमंडी स्थित थोक फल सब्जीमंडी को यहां से चंद्रेसल में शिफ्ट करने की योजना तत्कालीन भाजपा सरकार के समय में बनी थी। 23 साल बीतने के बाद भी अभी तक यह योजना प्रक्रियाओं के चलते अधरझूल में ही अटकी है। इससे उस समय इसके लिए तय किए गए बजट में तीन गुना तक बढ़ोतरी हो चुकी है।</p>
<p><strong>केस दो: </strong>कलक्ट्रेट स्थित जिला न्यायालय का भवन समय के साथ छोटा पडने लगा है। इसे स्वास्थ्य भवन के पास सार्वजनिक निर्माण विभाग की जमीन पर तैयार करने के लिए जमीन आवंटित हो गई थी। उस समय इसके लिए करीब 200 करोड़ का बजट तय किया गया था। लेकिन अभी तक प्रक्रियाओं में ही उलझने के कारण न तो जगह तय हो सकी है और न ही इसके बनने की समय सीमा। हालत यह है कि इसका बजट अब 290 करोड़ हो गया है।</p>
<p><strong>केस तीन: </strong>कोटा बैराज समेत तीन बांधों की मरम्मत करवाने की योजना बनी। करीब 10 से 15 साल पहले मरम्मत के लिए करीब 100 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था। वर्तमान में यह बजट दो गुना से भी अधिक 236 करोड़ रुपए हो गया है। लेकिन अभी तक भी मरम्मत के संबंध में कोई ठोस निर्णय या कार्यवाही नहीं हो सकी है।</p>
<p>यह तो कुछ उदाहरण हैं । ऐसी छोटी बड़ी कई योजनाएं हैं जिनकी बजट तक में घोषणा हो जाती है। बजट दो से दस गुना तक बढ़ जाता है लेकिन योजना धरातल पर नहीं आ पाती। दूसरी तरह चीन जैसे देश में ऐसे प्रोजेक्ट ना केवल समय पर तैयार हो जाते हैं अपितु डेढ लाइन से छह माह पूर्व तैयार कर लिया जाता है। ऐसा छोटी मोटी योजनाओं में ही नहीं अपितु बुलेट ट्रेन चलाने जैसी योजनाओं में देखा जा चुका है।चीन को दुनिया में तेजी से और समय से पहले प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए जाना जाता है।</p>
<p><strong>यह कर दिखाया चीन ने </strong><br />- हुओशेनशान अस्पताल (वुहान) कोरोना महामारी के दौरान 1000 बेड का अस्पताल तय समय से 10 दिन पहले तैयार कर दिया।<br />- बीजिंग-शंघाई हाई-स्पीड रेल लाइन। 1318 किमी निर्धारित समय से पहले पूरा। यह दुनिया की सबसे व्यस्त हाई-स्पीड रेल लाइनों में से एक।<br />-बीजिंग डाक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल, पूरी तरह हाई-टेक और आॅटोमेटेड सिस्टम के बावजूद 2019 में तय समय से पहले उद्घाटन।<br />- थ्री गॉर्जेस डैम चीन की ऊर्जा जरूरतों की रीढ़ दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध। कई यूनिट पहले ही चालू कर दी गईं।</p>
<p><strong>मिनी सचिवालय की भी यही हालत</strong><br />संभागीय मुख्यालय होने के बावजूद भी अभी तक कोटा में मिनी सचिवालय नहीं है। कोटा में मिनी सचिवालय बनाने का प्रोजेक्ट कांग्रेस सरकार के समय में बना। योजना धरातल पर उतरती उससे पहले ही सरकार बदल गई। प्रोजेक्ट अब एक कदम भी आगे नहीं बढ़ रहा है ।</p>
<p><strong>कंवेंशन सेंटर का तो प्रोजेक्ट ही निरस्त</strong><br />कोटा के दशहरा मैदान स्थित फेज दो में दिल्ली के भारत मंडपम् के तर्ज पर कंवेंशन सेंटर बनाने की योजना थी। पहले इस पर करीब 400 करोड़ रुपए खर्च होने थे। बाद में दूसरी बार योजना बदली और बजट आधा कर 200 करोड़ रुपए कर दिया गया। समय इतना अधिक लगा कि योजना को मूर्त रूप लेने की जगह आखिरकार निरस्त ही करना पड़ा।</p>
<p><strong>स्मार्ट सिटी के भी कई प्रोजेक्ट हुए निरस्त</strong><br />इतना ही नहीं तत्कालीन भाजपा सरकार के समय में कोटा में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बस स्टॉप समेत अन्य कार्य करवाने की योजनाएं बनी। उन पर काम भी हुआ लेकिन सरकार बदलने के बाद आधी से अधिक योजनाएं निरस्त करनी पड़ी और कई में बजट बढ़ गया। ऐसे कई योजनाएं हैं जो धरातल पर आने से पहले ही न तो समय पर पूरी हो पा रही हैं और उनका बजट भी कई गुना अधिक बढ़ रहा है। जिससे आमजन को उनका लाभ तक नहीं मिल पा रहा।</p>
<p><strong>समय पर हो योजनाएं पूरी, जनता पर नहीं पड़े भार</strong><br />तलवंडी निवासी महेश शर्मा का कहना है कि सरकार द्वारा कई बार लोगों की डिमांड पर घोषणा तो कर दी जाती है। उसके बाद योजना भी बन जाती है। लेकिन उन योजनाओं को लागू व विभिन्न स्तरों पर स्वीकृतियों में ही इतना अधिक समय लग जाता है कि उस योजना का बजट कई गुना बढ़ जाता है। जिसका आर्थिक भार जनता पर ही पड़ता है। महावीर नगर निवासी नितिन नामा का कहना है कि योजनाएं आमजन के लिए लाभकारी और कम बजट की होनी चाहिए। साथ ही उन्हें समय पर पूरा किया जाए। जबकि विदेशों में तरक्की करने का कारण ही यह है कि वहां कम बजट में और समय पर योजनाएं पूरी होती है। जिससे जनता को उनका लाभ मिल पाता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />योजनाएं सरकार के स्तर पर बनती है। उनकी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निविदा जारी की जाती है। निविदा व टेंडर जारी होने के बाद उसमें जितना भी समय लगता है उसके बाद बजट बढ़े या कम हो उसके लिए संवेदक फर्म ही जिम्मेदार रहती है। योजनाओं की स्वीकृति में समय लगना सरकार के स्तर पर ही रहता है। एक बार योजना बनने के बाद उसमें बदलाव होने पर ही बजट बढ़ता है।<br /><strong>- सुनील गर्ग, अध्यक्ष, पीडब्यूडी कांंट्रेक्टर एसोसिएशन</strong></p>
<p>जब तक निविदा जारी नहीं होती तब तक वह योजना धरातल पर नहीं आती। निविदा जारी होने व कायार्देश जारी होने के बाद स्वीकृतियों में समय लगने से यदि बजट बढ़ता है तो उसका जनता पर भार नहीं पड़ता है। कई योजनाएं तो निविदा जारी होने से पहले ही बदलती रहती हैं। उस बारे में सरकार के स्तर पर ही कुछ कहा जा सकता है।<br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, एक्सईएन, नगर निगम कोटा</strong></p>
<p> सरकार व प्रशासन की मंशा तो रहती है कि जो भी प्रोजेक्ट बनाए जाएं समय पर पूरा किया जाए। लेकिन कई बार जमीन आवंटन, बजट आवंटन, अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करने में सरकार के स्तर पर ही समय अधिक लग जाता है। जिससे कई बार कुछ प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है। लेकिन हर प्रोजेक्ट बनते समय ही उसकी समय सीमा तय करने से उसकी लागत भी सीमित रहती है और जिस उद्देश्य से प्रोजेक्ट बनाया गया है उसका लाभ भी लोगों को मिल पाता है। विदेशों में ऐसा हो रहा है तो यहां भी उससे सीख लेते हुए कार्य किए जाने चाहिए।<br /><strong>- कृष्णा शुक्ला, अतिरिक्त जिला कलक्टर, प्रशासन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 11:42:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बम्बोरा से नौगांव सड़क परियोजना : निर्धारित समय में नहीं हो सका अवार्ड जारी, अब भूमि अवाप्ति की अवधि एक साल बढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[तय अवधि (15 फरवरी 2025) तक अवार्ड जारी नहीं हो पाया। अब अधिनियम की धारा 25 के तहत भूमि अर्जन की अवधि को 12 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bombora-to-naugaon-road-project-could-not-be-awarded-in/article-107837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy139.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने बम्बोरा (किशनगढ़ बास) एसएच-25 से नौगांव सड़क परियोजना के तहत भूमि अर्जन की अवधि एक वर्ष के लिए बढ़ा दी है। यह निर्णय भूमि अर्जन पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 25 के तहत लिया गया है। इस परियोजना के लिए भूमि अर्जन की अधिसूचना 4 अक्टूबर 2023 को जारी की गई थी, जिसका राजपत्र में प्रकाशन 15 फरवरी 2024 को हुआ।</p>
<p>हालांकि तय अवधि (15 फरवरी 2025) तक अवार्ड जारी नहीं हो पाया। अब अधिनियम की धारा 25 के तहत भूमि अर्जन की अवधि को 12 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है। यह अधिसूचना उपमुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से जारी की गई है। इसके तहत उपखंड अधिकारी, रामगढ़, जिला अलवर को इस परियोजना से संबंधित भूमि अर्जन के लिए आवश्यक कदम उठाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Mar 2025 14:36:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिंग रोड परियोजना से प्रभावित खातेधारकों और हितधारियों को 11 भूखण्ड आवंटित, जेडीए ने निकाली लॉटरी </title>
                                    <description><![CDATA[हितधारियों द्वारा विभिन्न कारणों से गत 15 वर्षों से विकसित भूमि के लिए आरक्षण पत्र जारी होने के बाद भी आवंटन पत्र एवं लीजडीड नहीं मिल पा रही थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ring-road-project-affected-account-holders-and-stakeholders-allot-11/article-107407"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/jda-jpr.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर विकास प्राधिकरण ने लगभग 15 वर्ष से लंबित चल रहे रिंग रोड परियोजना से प्रभावित ग्राम कानड़वास के काश्तकारों, खातेदारों, हितधारियों को बुधवार को लॉटरी के माध्यम से 11 भूखण्डों का आवंटन किया। जेडीए आयुक्त आनन्दी ने बताया कि जोन 9 में ग्राम कानड़वास तहसील बस्सी में रिंग रोड परियोजना से प्रभावित काश्तकारों, खातेदारों, हितधारियों जिन्हें अवाप्त भूमि के बदले विकसित भूमि दी जानी हैं। आवंटन से शेष रहे कुछ काश्तकारों, खातेधारकों, हितधारियों द्वारा विभिन्न कारणों से गत 15 वर्षों से विकसित भूमि के लिए आरक्षण पत्र जारी होने के बाद भी आवंटन पत्र एवं लीजडीड नहीं मिल पा रही थी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि जेडीए द्वारा पहल करते हुए उपायुक्त जोन 9 एवं उनकी टीम द्वारा रिंग रोड परियोजना से प्रभावित समस्त खातेदारों को मुआवजे के रूप में दी जाने वाली शेष रही भूमि के लिए ग्रामवार कार्रवाई करते हुए ग्राम कानड़वास के शेष रहे खातेदारों की सूची तैयार की गई। इसके बाद उन्हें लॉटरी के माध्यम से ग्राम कानड़वास में ही भूखण्डों का आवंटन किया गया। भूखण्ड आवंटन के बाद खातेदारों द्वारा पूर्व में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के आधार पर ही शीघ्र आवंटन पत्र जारी किए जाएंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ring-road-project-affected-account-holders-and-stakeholders-allot-11/article-107407</link>
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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 14:50:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फुलपुरी माइको सिंचाई परियोजना के लिए अवाप्त होगी भूमि, जल संसाधन विभाग ने की शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[ राज्य सरकार ने फोर वाटर फुलपुरी माइको सिंचाई परियोजना के निर्माण के लिए बांसवाड़ा जिले के दूब क्षेत्र में शेष खरारों की भूमि अवाप्त करने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/land-will-be-unavailable-for-phulpuri-mico-irrigation-project-water/article-97222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee33.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने फोर वाटर फुलपुरी माइको सिंचाई परियोजना के निर्माण के लिए बांसवाड़ा जिले के दूब क्षेत्र में शेष खरारों की भूमि अवाप्त करने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। जल संसाधन विभाग ने इसके लिए सार्वजनिक सूचना भी जारी की है। विभाग के अनुसार भूमि अवाप्ति का उद्देश्य सार्वजनिक प्रयोजनार्थ है, और यह प्रक्रिया भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 11-12 के तहत की जाएगी।</p>
<p>जिन हितकारियों को इस प्रक्रिया से संबंधित कोई आपत्ति हो, वे 90 दिन के भीतर अपनी आपत्ति भूमि अवाप्ति अधिकारी (उपखण्ड अधिकारी), सज्जनगढ़, बांसवाड़ा के पास प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इस क्षेत्र में प्रवेश कर, सर्वेक्षण करें और आवश्यक कार्यों को संपन्न करें। इस कदम से क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होने की संभावना है, जो कृषि क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Dec 2024 14:12:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>मुकुंदरा ना इंसानों के काम का रहा ना बाघ ही बस पाए</title>
                                    <description><![CDATA[परियोजना की घोषणा होने के तुरंत बाद आनन फानन में यहां पर सारी तैयारियां की गई, और तीन बाघ यहां पर रणथंभौर से लाकर छोड़े गए ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/mukundra-was-neither-useful-to-humans-nor-tigers-could-settle-here/article-95947"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer-(1)10.png" alt=""></a><br /><p> झालावाड़। झालावाड़ और कोटा जिले के मध्य फैली सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व, इन दोनों के बदली आंसू बहा रही है। परियोजना में ना तो बाघ रह रहे हैं ना हीं इंसान। परियोजना की घोषणा लगभग 7 साल पहले हुई थी, जब तत्कालीन सीएम द्वारा इस परियोजना में गहरी रुचि दिखते हुए इसको जमीन पर उतारने की तैयारी की गई। परियोजना की घोषणा होने के तुरंत बाद आनन फानन में यहां पर सारी तैयारियां की गई, और तीन बाघ यहां पर रणथंभौर से लाकर छोड़े गए जबकि एक बाघ खुद चलता हुआ यहां आ पहुंचा। कुछ दिनों बाद बाघों के एक जोड़े ने दो शावकों को जन्म दिया, इस प्रकार से देखते ही देखते यहां बाघों का कुनबा बढ़कर की 6 की संख्या तक जा पहुंचा। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि सरकार ने पूरा मामले में जल्दबाजी की और बिना पूरी तैयारी के यहां बाघों को छोड़ दिया। जबकि परियोजना के सबसे संपन्न क्षेत्र दरा के घाटी गांव से लेकर मशालपुरा गांव तक लोगों का विस्थापन नहीं हो पाया था, यहां लोग आज भी रह रहे हैं।</p>
<p>सूत्र बताते हैं कि बाघों की मौजूदगी मनुष्यों को रास नहीं आई तथा दोनों एक दूसरे के लिए खतरा बनते रहे और अंत में चार बाघ मौत के मुंह में समा गए, जबकि दो बाघों का रेस्क्यू करके यहां से ले जाया गया। जिसमें से भी एक बाघिन की बाद में मौत हो गई। अब यहां बार-बार बाघ छोड़े जाने की बात उठती आई है, लेकिन हालात आज भी नहीं बदले हैं। परियोजना क्षेत्र में आज भी काफी लोग निवास कर रहे हैं, जो मुआवजा कम होने की बात कह कर यहां से निकलना नहीं चाहते। अधिकांश लोग इलाका छोड़कर जा चुके हैं लेकिन जो लोग यहां पर रह रहे हैं उनका साफ तौर पर कहना है कि जो मुआवजा सरकार द्वारा उनको दिया जा रहा है वह पर्याप्त नहीं है। लोग कहते हैं कि उनकी जमीनें यहां पर बहुत ज्यादा है, ऐसे में मुआवजा राशि उनके लिए कम पड़ रही है। वह स्पेशल पैकेज की मांग करते हैं या सरकार से मुआवजा बड़ा कर दिए जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन पूरे मामले के चलते परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है और हालात ऐसे हो गए हैं कि ना तो यह इलाका बाघों के काम आ रहा है ना ही इंसानों के। बस्तियां उजड़ गई है लेकिन बाघ भी नहीं बस पाए हैं। <br />   <br />परियोजना के मशालपुरा गांव में लगभग 7 परिवार इस वक्त रह रहे हैं, जो साफ तौर पर कहते हैं कि उनको मुआवजा पर्याप्त नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि 15 लाख रुपए प्रत्येक व्यक्ति के हिसाब से सरकार ने मुआवजा दिया है, ऐसे में जिन लोगों की यहां जमीन नहीं थी वह 15-15 लाख रुपए लेकर चले गए, लेकिन जो अब यहां बचे हैं उनकी काफी जमीन यहां पर हैं, ऐसे में उनके नुकसान की पूर्ति 15 लाख रुपए से नहीं हो सकती, इसलिए वह यहां से नहीं जाएंगे। लोगों को आरोप है कि वोट डालने के लिए सरकार 18 साल के व्यक्ति को बालिग मानती है जबकि टाइगर रिजर्व में मुआवजे के लिए आयु सीमा 21 वर्ष रखी गई, ऐसे में कई परिवारों को काफी नुकसान हो रहा है और वह यहां से जाना नहीं चाहते। माना जाता है खुद का फैसलाटाइगर रिजर्व परियोजना में सरकार के पास ऐसा कोई नियम नहीं है कि वह वहां रहने वाले लोगों को जबरदस्ती बाहर निकाल सकें। पूरा मामला स्वैच्छिक है यदि व्यक्ति अपनी मर्जी से जाना चाहता है तभी वह यहां से जाएगा और उसको मुआवजा मिलेगा, लेकिन जो व्यक्ति वहां मर्जी से रहना चाहते हैं उनको वहां से निकला नहीं जा सकता, ऐसे में यहां रहने वाले लोगों पर सरकार और प्रशासन का कोई अंकुश नहीं है और वह इनको यहां से नहीं हटा पा रहे हैं, तथा यहां रहने वाले लोगों का साफ कहना है कि उन्हें स्पेशल पैकेज या स्पेशल मुआवजा जब तक नहीं मिलेगा तब तक वह यहां से नहीं जाएंगे, ऐसे में टाइगर रिजर्व परियोजना पर तलवार लटकी हुई है, क्योंकि बाघ और इंसान एक बार यहां पर साथ रहे तो बाघ खत्म हो गए थे,अब दोबारा अगर यहां बाघों को छोड़ा जाता है तो वह एक तरह का जोखिम लेना ही कहलाएगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />परियोजना क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों से कैंप लगाकर बातचीत की गई थी तथा आगे भी कैंप आयोजित करके उनसे समझाइश की जा रही है, कुछ लोग वहां से जाने को राजी हो गए हैं लेकिन कुछ वहां से जाना नहीं चाहते, प्रशासन के स्तर पर लगातार प्रयास कर रहे हैं तथा उनकी मांगों से सरकार को भी अवगत करवाया जा रहा है। <br /><strong>- अजय सिंह राठौड़, जिला कलेक्टर, झालावाड़।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Nov 2024 16:26:25 +0530</pubDate>
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                <title>गारंटी अवधि में सड़कें टूटी तो ठेकेदार से ही ठीक करवाई जाएगी, प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे</title>
                                    <description><![CDATA[डिप्टी सीएम ने कहा कि स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से कार्यों की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग भी हो। लापरवाही करने पर जिम्मेदार के खिलाफ  सख्त कार्रवाई हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/if-the-roads-break-down-during-the-guarantee-period-they/article-83289"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/d.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने शासन सचिवालय में सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक ली जिसमें निर्देश दिए हैं कि डिफेक्ट लाइबलिटी पीरियड में यदि निर्माण कार्य में कोई गुणवत्ता सम्बंधित शिकायत मिलती है तो अधिकारी ठेकेदार से उसको तत्काल ठीक कराएं। कई बार ऐसी शिकायतें मिलती है कि सड़क बनाने के कुछ दिनों बाद ही खराब हो गई। स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से कार्यों की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग भी हो। लापरवाही करने पर जिम्मेदार के खिलाफ  सख्त कार्रवाई हो। नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे,एमडीआर ग्रामीण सड़कों, अन्य सड़कों सहित विभिन्न निर्माणाधीन पुलों एवं अन्य निर्माण कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी उन्होंने ली। नेशनल हाईवे पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर एनएचएआई के अधिकारियों के साथ उनके समाधान को भी कहा है। बैठक में विभाग के एसीएस संदीप वर्मा सहित आला अधिकारी मौजूद रहे। </p>
<p><strong>बरसात के मौसम में अलर्ट रहने के निर्देश</strong><br />उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में अधिकारी ज्यादा अलर्ट रहें। कहीं जलभराव एवं सड़क कटने की शिकायत मिलती है या स्थानीय अधिकारियों को ऐसा अंदेशा है तो वहां पहले से ही माकूल व्यवस्था की जाए। आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो। फील्ड के अधिकारियों के माध्यम से अपने क्षेत्रों कि नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jul 2024 10:55:52 +0530</pubDate>
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