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                <title>project - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>ग्रेट निकोबार द्वीप के आदिवासी प्रमुखों ने की राहुल गांधी से मुलाकात: ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का जताया कड़ा विरोध, बताया जीवन-यापन के तरीके और द्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रेट निकोबार के आदिवासी प्रमुखों ने राहुल गांधी से मिलकर प्रस्तावित मेगा प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे द्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और जनजातीय अस्तित्व के लिए खतरा बताया। राहुल गांधी ने उनके अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया, जबकि सोनिया गांधी ने इसे आदिवासियों के खिलाफ एक "सुनियोजित दुस्साहस" करार दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tribal-chiefs-of-great-nicobar-island-met-rahul-gandhi-expressed/article-147069"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rahul-gandhi3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ग्रेट निकोबार द्वीप के आदिवासी प्रमुखों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इस मौके पर आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के साथ ग्रेट निकोबार द्वीप के आदिवासी प्रमुखों ने श्री गांधी से मुलाकात की। आदिवासी प्रमुखों ने प्रस्तावित ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यह उनके जीवन-यापन के तरीके और द्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना की मंजूरी के दौरान उनकी सहमति भी उचित तरीके से नहीं ली गई। </p>
<p>कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और उनके अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए उनकी चिंताओं को उठाएगी। उल्लेखनीय है कि, कांग्रेस संसदीय दल अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को सुनियोजित दुस्साहस बताते हुए इसका विरोध जताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह परियोजना स्थानीय शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों के अस्तित्व को खत्म कर देगी, एक अखबार में लिखे लेख के जरिए सोनिया गांधी ने इसे आदिवासी अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करार दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 16:00:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कागज से धरातल तक आने में ही कई गुना बढ़ रही प्रोजेक्ट कॉस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[प्रोजेक्ट की डेड लाइन के कोई मायने ही नहीं, बढ़ता रहता है समय और बजट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/project-costs-are-multiplying-several-times-over-just-to-get-from-paper-to-reality/article-141859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/856.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong>  केस एक:</strong> नई धानमंडी स्थित थोक फल सब्जीमंडी को यहां से चंद्रेसल में शिफ्ट करने की योजना तत्कालीन भाजपा सरकार के समय में बनी थी। 23 साल बीतने के बाद भी अभी तक यह योजना प्रक्रियाओं के चलते अधरझूल में ही अटकी है। इससे उस समय इसके लिए तय किए गए बजट में तीन गुना तक बढ़ोतरी हो चुकी है।</p>
<p><strong>केस दो: </strong>कलक्ट्रेट स्थित जिला न्यायालय का भवन समय के साथ छोटा पडने लगा है। इसे स्वास्थ्य भवन के पास सार्वजनिक निर्माण विभाग की जमीन पर तैयार करने के लिए जमीन आवंटित हो गई थी। उस समय इसके लिए करीब 200 करोड़ का बजट तय किया गया था। लेकिन अभी तक प्रक्रियाओं में ही उलझने के कारण न तो जगह तय हो सकी है और न ही इसके बनने की समय सीमा। हालत यह है कि इसका बजट अब 290 करोड़ हो गया है।</p>
<p><strong>केस तीन: </strong>कोटा बैराज समेत तीन बांधों की मरम्मत करवाने की योजना बनी। करीब 10 से 15 साल पहले मरम्मत के लिए करीब 100 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था। वर्तमान में यह बजट दो गुना से भी अधिक 236 करोड़ रुपए हो गया है। लेकिन अभी तक भी मरम्मत के संबंध में कोई ठोस निर्णय या कार्यवाही नहीं हो सकी है।</p>
<p>यह तो कुछ उदाहरण हैं । ऐसी छोटी बड़ी कई योजनाएं हैं जिनकी बजट तक में घोषणा हो जाती है। बजट दो से दस गुना तक बढ़ जाता है लेकिन योजना धरातल पर नहीं आ पाती। दूसरी तरह चीन जैसे देश में ऐसे प्रोजेक्ट ना केवल समय पर तैयार हो जाते हैं अपितु डेढ लाइन से छह माह पूर्व तैयार कर लिया जाता है। ऐसा छोटी मोटी योजनाओं में ही नहीं अपितु बुलेट ट्रेन चलाने जैसी योजनाओं में देखा जा चुका है।चीन को दुनिया में तेजी से और समय से पहले प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए जाना जाता है।</p>
<p><strong>यह कर दिखाया चीन ने </strong><br />- हुओशेनशान अस्पताल (वुहान) कोरोना महामारी के दौरान 1000 बेड का अस्पताल तय समय से 10 दिन पहले तैयार कर दिया।<br />- बीजिंग-शंघाई हाई-स्पीड रेल लाइन। 1318 किमी निर्धारित समय से पहले पूरा। यह दुनिया की सबसे व्यस्त हाई-स्पीड रेल लाइनों में से एक।<br />-बीजिंग डाक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल, पूरी तरह हाई-टेक और आॅटोमेटेड सिस्टम के बावजूद 2019 में तय समय से पहले उद्घाटन।<br />- थ्री गॉर्जेस डैम चीन की ऊर्जा जरूरतों की रीढ़ दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध। कई यूनिट पहले ही चालू कर दी गईं।</p>
<p><strong>मिनी सचिवालय की भी यही हालत</strong><br />संभागीय मुख्यालय होने के बावजूद भी अभी तक कोटा में मिनी सचिवालय नहीं है। कोटा में मिनी सचिवालय बनाने का प्रोजेक्ट कांग्रेस सरकार के समय में बना। योजना धरातल पर उतरती उससे पहले ही सरकार बदल गई। प्रोजेक्ट अब एक कदम भी आगे नहीं बढ़ रहा है ।</p>
<p><strong>कंवेंशन सेंटर का तो प्रोजेक्ट ही निरस्त</strong><br />कोटा के दशहरा मैदान स्थित फेज दो में दिल्ली के भारत मंडपम् के तर्ज पर कंवेंशन सेंटर बनाने की योजना थी। पहले इस पर करीब 400 करोड़ रुपए खर्च होने थे। बाद में दूसरी बार योजना बदली और बजट आधा कर 200 करोड़ रुपए कर दिया गया। समय इतना अधिक लगा कि योजना को मूर्त रूप लेने की जगह आखिरकार निरस्त ही करना पड़ा।</p>
<p><strong>स्मार्ट सिटी के भी कई प्रोजेक्ट हुए निरस्त</strong><br />इतना ही नहीं तत्कालीन भाजपा सरकार के समय में कोटा में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बस स्टॉप समेत अन्य कार्य करवाने की योजनाएं बनी। उन पर काम भी हुआ लेकिन सरकार बदलने के बाद आधी से अधिक योजनाएं निरस्त करनी पड़ी और कई में बजट बढ़ गया। ऐसे कई योजनाएं हैं जो धरातल पर आने से पहले ही न तो समय पर पूरी हो पा रही हैं और उनका बजट भी कई गुना अधिक बढ़ रहा है। जिससे आमजन को उनका लाभ तक नहीं मिल पा रहा।</p>
<p><strong>समय पर हो योजनाएं पूरी, जनता पर नहीं पड़े भार</strong><br />तलवंडी निवासी महेश शर्मा का कहना है कि सरकार द्वारा कई बार लोगों की डिमांड पर घोषणा तो कर दी जाती है। उसके बाद योजना भी बन जाती है। लेकिन उन योजनाओं को लागू व विभिन्न स्तरों पर स्वीकृतियों में ही इतना अधिक समय लग जाता है कि उस योजना का बजट कई गुना बढ़ जाता है। जिसका आर्थिक भार जनता पर ही पड़ता है। महावीर नगर निवासी नितिन नामा का कहना है कि योजनाएं आमजन के लिए लाभकारी और कम बजट की होनी चाहिए। साथ ही उन्हें समय पर पूरा किया जाए। जबकि विदेशों में तरक्की करने का कारण ही यह है कि वहां कम बजट में और समय पर योजनाएं पूरी होती है। जिससे जनता को उनका लाभ मिल पाता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />योजनाएं सरकार के स्तर पर बनती है। उनकी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निविदा जारी की जाती है। निविदा व टेंडर जारी होने के बाद उसमें जितना भी समय लगता है उसके बाद बजट बढ़े या कम हो उसके लिए संवेदक फर्म ही जिम्मेदार रहती है। योजनाओं की स्वीकृति में समय लगना सरकार के स्तर पर ही रहता है। एक बार योजना बनने के बाद उसमें बदलाव होने पर ही बजट बढ़ता है।<br /><strong>- सुनील गर्ग, अध्यक्ष, पीडब्यूडी कांंट्रेक्टर एसोसिएशन</strong></p>
<p>जब तक निविदा जारी नहीं होती तब तक वह योजना धरातल पर नहीं आती। निविदा जारी होने व कायार्देश जारी होने के बाद स्वीकृतियों में समय लगने से यदि बजट बढ़ता है तो उसका जनता पर भार नहीं पड़ता है। कई योजनाएं तो निविदा जारी होने से पहले ही बदलती रहती हैं। उस बारे में सरकार के स्तर पर ही कुछ कहा जा सकता है।<br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, एक्सईएन, नगर निगम कोटा</strong></p>
<p> सरकार व प्रशासन की मंशा तो रहती है कि जो भी प्रोजेक्ट बनाए जाएं समय पर पूरा किया जाए। लेकिन कई बार जमीन आवंटन, बजट आवंटन, अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करने में सरकार के स्तर पर ही समय अधिक लग जाता है। जिससे कई बार कुछ प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है। लेकिन हर प्रोजेक्ट बनते समय ही उसकी समय सीमा तय करने से उसकी लागत भी सीमित रहती है और जिस उद्देश्य से प्रोजेक्ट बनाया गया है उसका लाभ भी लोगों को मिल पाता है। विदेशों में ऐसा हो रहा है तो यहां भी उससे सीख लेते हुए कार्य किए जाने चाहिए।<br /><strong>- कृष्णा शुक्ला, अतिरिक्त जिला कलक्टर, प्रशासन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 11:42:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बम्बोरा से नौगांव सड़क परियोजना : निर्धारित समय में नहीं हो सका अवार्ड जारी, अब भूमि अवाप्ति की अवधि एक साल बढ़ी</title>
                                    <description><![CDATA[तय अवधि (15 फरवरी 2025) तक अवार्ड जारी नहीं हो पाया। अब अधिनियम की धारा 25 के तहत भूमि अर्जन की अवधि को 12 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bombora-to-naugaon-road-project-could-not-be-awarded-in/article-107837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy139.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने बम्बोरा (किशनगढ़ बास) एसएच-25 से नौगांव सड़क परियोजना के तहत भूमि अर्जन की अवधि एक वर्ष के लिए बढ़ा दी है। यह निर्णय भूमि अर्जन पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 25 के तहत लिया गया है। इस परियोजना के लिए भूमि अर्जन की अधिसूचना 4 अक्टूबर 2023 को जारी की गई थी, जिसका राजपत्र में प्रकाशन 15 फरवरी 2024 को हुआ।</p>
<p>हालांकि तय अवधि (15 फरवरी 2025) तक अवार्ड जारी नहीं हो पाया। अब अधिनियम की धारा 25 के तहत भूमि अर्जन की अवधि को 12 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है। यह अधिसूचना उपमुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से जारी की गई है। इसके तहत उपखंड अधिकारी, रामगढ़, जिला अलवर को इस परियोजना से संबंधित भूमि अर्जन के लिए आवश्यक कदम उठाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Mar 2025 14:36:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिंग रोड परियोजना से प्रभावित खातेधारकों और हितधारियों को 11 भूखण्ड आवंटित, जेडीए ने निकाली लॉटरी </title>
                                    <description><![CDATA[हितधारियों द्वारा विभिन्न कारणों से गत 15 वर्षों से विकसित भूमि के लिए आरक्षण पत्र जारी होने के बाद भी आवंटन पत्र एवं लीजडीड नहीं मिल पा रही थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ring-road-project-affected-account-holders-and-stakeholders-allot-11/article-107407"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/jda-jpr.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर विकास प्राधिकरण ने लगभग 15 वर्ष से लंबित चल रहे रिंग रोड परियोजना से प्रभावित ग्राम कानड़वास के काश्तकारों, खातेदारों, हितधारियों को बुधवार को लॉटरी के माध्यम से 11 भूखण्डों का आवंटन किया। जेडीए आयुक्त आनन्दी ने बताया कि जोन 9 में ग्राम कानड़वास तहसील बस्सी में रिंग रोड परियोजना से प्रभावित काश्तकारों, खातेदारों, हितधारियों जिन्हें अवाप्त भूमि के बदले विकसित भूमि दी जानी हैं। आवंटन से शेष रहे कुछ काश्तकारों, खातेधारकों, हितधारियों द्वारा विभिन्न कारणों से गत 15 वर्षों से विकसित भूमि के लिए आरक्षण पत्र जारी होने के बाद भी आवंटन पत्र एवं लीजडीड नहीं मिल पा रही थी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि जेडीए द्वारा पहल करते हुए उपायुक्त जोन 9 एवं उनकी टीम द्वारा रिंग रोड परियोजना से प्रभावित समस्त खातेदारों को मुआवजे के रूप में दी जाने वाली शेष रही भूमि के लिए ग्रामवार कार्रवाई करते हुए ग्राम कानड़वास के शेष रहे खातेदारों की सूची तैयार की गई। इसके बाद उन्हें लॉटरी के माध्यम से ग्राम कानड़वास में ही भूखण्डों का आवंटन किया गया। भूखण्ड आवंटन के बाद खातेदारों द्वारा पूर्व में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के आधार पर ही शीघ्र आवंटन पत्र जारी किए जाएंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 14:50:18 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>फुलपुरी माइको सिंचाई परियोजना के लिए अवाप्त होगी भूमि, जल संसाधन विभाग ने की शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[ राज्य सरकार ने फोर वाटर फुलपुरी माइको सिंचाई परियोजना के निर्माण के लिए बांसवाड़ा जिले के दूब क्षेत्र में शेष खरारों की भूमि अवाप्त करने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/land-will-be-unavailable-for-phulpuri-mico-irrigation-project-water/article-97222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee33.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने फोर वाटर फुलपुरी माइको सिंचाई परियोजना के निर्माण के लिए बांसवाड़ा जिले के दूब क्षेत्र में शेष खरारों की भूमि अवाप्त करने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। जल संसाधन विभाग ने इसके लिए सार्वजनिक सूचना भी जारी की है। विभाग के अनुसार भूमि अवाप्ति का उद्देश्य सार्वजनिक प्रयोजनार्थ है, और यह प्रक्रिया भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 11-12 के तहत की जाएगी।</p>
<p>जिन हितकारियों को इस प्रक्रिया से संबंधित कोई आपत्ति हो, वे 90 दिन के भीतर अपनी आपत्ति भूमि अवाप्ति अधिकारी (उपखण्ड अधिकारी), सज्जनगढ़, बांसवाड़ा के पास प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इस क्षेत्र में प्रवेश कर, सर्वेक्षण करें और आवश्यक कार्यों को संपन्न करें। इस कदम से क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होने की संभावना है, जो कृषि क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Dec 2024 14:12:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुकुंदरा ना इंसानों के काम का रहा ना बाघ ही बस पाए</title>
                                    <description><![CDATA[परियोजना की घोषणा होने के तुरंत बाद आनन फानन में यहां पर सारी तैयारियां की गई, और तीन बाघ यहां पर रणथंभौर से लाकर छोड़े गए ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/mukundra-was-neither-useful-to-humans-nor-tigers-could-settle-here/article-95947"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer-(1)10.png" alt=""></a><br /><p> झालावाड़। झालावाड़ और कोटा जिले के मध्य फैली सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व, इन दोनों के बदली आंसू बहा रही है। परियोजना में ना तो बाघ रह रहे हैं ना हीं इंसान। परियोजना की घोषणा लगभग 7 साल पहले हुई थी, जब तत्कालीन सीएम द्वारा इस परियोजना में गहरी रुचि दिखते हुए इसको जमीन पर उतारने की तैयारी की गई। परियोजना की घोषणा होने के तुरंत बाद आनन फानन में यहां पर सारी तैयारियां की गई, और तीन बाघ यहां पर रणथंभौर से लाकर छोड़े गए जबकि एक बाघ खुद चलता हुआ यहां आ पहुंचा। कुछ दिनों बाद बाघों के एक जोड़े ने दो शावकों को जन्म दिया, इस प्रकार से देखते ही देखते यहां बाघों का कुनबा बढ़कर की 6 की संख्या तक जा पहुंचा। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि सरकार ने पूरा मामले में जल्दबाजी की और बिना पूरी तैयारी के यहां बाघों को छोड़ दिया। जबकि परियोजना के सबसे संपन्न क्षेत्र दरा के घाटी गांव से लेकर मशालपुरा गांव तक लोगों का विस्थापन नहीं हो पाया था, यहां लोग आज भी रह रहे हैं।</p>
<p>सूत्र बताते हैं कि बाघों की मौजूदगी मनुष्यों को रास नहीं आई तथा दोनों एक दूसरे के लिए खतरा बनते रहे और अंत में चार बाघ मौत के मुंह में समा गए, जबकि दो बाघों का रेस्क्यू करके यहां से ले जाया गया। जिसमें से भी एक बाघिन की बाद में मौत हो गई। अब यहां बार-बार बाघ छोड़े जाने की बात उठती आई है, लेकिन हालात आज भी नहीं बदले हैं। परियोजना क्षेत्र में आज भी काफी लोग निवास कर रहे हैं, जो मुआवजा कम होने की बात कह कर यहां से निकलना नहीं चाहते। अधिकांश लोग इलाका छोड़कर जा चुके हैं लेकिन जो लोग यहां पर रह रहे हैं उनका साफ तौर पर कहना है कि जो मुआवजा सरकार द्वारा उनको दिया जा रहा है वह पर्याप्त नहीं है। लोग कहते हैं कि उनकी जमीनें यहां पर बहुत ज्यादा है, ऐसे में मुआवजा राशि उनके लिए कम पड़ रही है। वह स्पेशल पैकेज की मांग करते हैं या सरकार से मुआवजा बड़ा कर दिए जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन पूरे मामले के चलते परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है और हालात ऐसे हो गए हैं कि ना तो यह इलाका बाघों के काम आ रहा है ना ही इंसानों के। बस्तियां उजड़ गई है लेकिन बाघ भी नहीं बस पाए हैं। <br />   <br />परियोजना के मशालपुरा गांव में लगभग 7 परिवार इस वक्त रह रहे हैं, जो साफ तौर पर कहते हैं कि उनको मुआवजा पर्याप्त नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि 15 लाख रुपए प्रत्येक व्यक्ति के हिसाब से सरकार ने मुआवजा दिया है, ऐसे में जिन लोगों की यहां जमीन नहीं थी वह 15-15 लाख रुपए लेकर चले गए, लेकिन जो अब यहां बचे हैं उनकी काफी जमीन यहां पर हैं, ऐसे में उनके नुकसान की पूर्ति 15 लाख रुपए से नहीं हो सकती, इसलिए वह यहां से नहीं जाएंगे। लोगों को आरोप है कि वोट डालने के लिए सरकार 18 साल के व्यक्ति को बालिग मानती है जबकि टाइगर रिजर्व में मुआवजे के लिए आयु सीमा 21 वर्ष रखी गई, ऐसे में कई परिवारों को काफी नुकसान हो रहा है और वह यहां से जाना नहीं चाहते। माना जाता है खुद का फैसलाटाइगर रिजर्व परियोजना में सरकार के पास ऐसा कोई नियम नहीं है कि वह वहां रहने वाले लोगों को जबरदस्ती बाहर निकाल सकें। पूरा मामला स्वैच्छिक है यदि व्यक्ति अपनी मर्जी से जाना चाहता है तभी वह यहां से जाएगा और उसको मुआवजा मिलेगा, लेकिन जो व्यक्ति वहां मर्जी से रहना चाहते हैं उनको वहां से निकला नहीं जा सकता, ऐसे में यहां रहने वाले लोगों पर सरकार और प्रशासन का कोई अंकुश नहीं है और वह इनको यहां से नहीं हटा पा रहे हैं, तथा यहां रहने वाले लोगों का साफ कहना है कि उन्हें स्पेशल पैकेज या स्पेशल मुआवजा जब तक नहीं मिलेगा तब तक वह यहां से नहीं जाएंगे, ऐसे में टाइगर रिजर्व परियोजना पर तलवार लटकी हुई है, क्योंकि बाघ और इंसान एक बार यहां पर साथ रहे तो बाघ खत्म हो गए थे,अब दोबारा अगर यहां बाघों को छोड़ा जाता है तो वह एक तरह का जोखिम लेना ही कहलाएगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />परियोजना क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों से कैंप लगाकर बातचीत की गई थी तथा आगे भी कैंप आयोजित करके उनसे समझाइश की जा रही है, कुछ लोग वहां से जाने को राजी हो गए हैं लेकिन कुछ वहां से जाना नहीं चाहते, प्रशासन के स्तर पर लगातार प्रयास कर रहे हैं तथा उनकी मांगों से सरकार को भी अवगत करवाया जा रहा है। <br /><strong>- अजय सिंह राठौड़, जिला कलेक्टर, झालावाड़।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Nov 2024 16:26:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गारंटी अवधि में सड़कें टूटी तो ठेकेदार से ही ठीक करवाई जाएगी, प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे</title>
                                    <description><![CDATA[डिप्टी सीएम ने कहा कि स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से कार्यों की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग भी हो। लापरवाही करने पर जिम्मेदार के खिलाफ  सख्त कार्रवाई हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/if-the-roads-break-down-during-the-guarantee-period-they/article-83289"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/d.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने शासन सचिवालय में सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक ली जिसमें निर्देश दिए हैं कि डिफेक्ट लाइबलिटी पीरियड में यदि निर्माण कार्य में कोई गुणवत्ता सम्बंधित शिकायत मिलती है तो अधिकारी ठेकेदार से उसको तत्काल ठीक कराएं। कई बार ऐसी शिकायतें मिलती है कि सड़क बनाने के कुछ दिनों बाद ही खराब हो गई। स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से कार्यों की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग भी हो। लापरवाही करने पर जिम्मेदार के खिलाफ  सख्त कार्रवाई हो। नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे,एमडीआर ग्रामीण सड़कों, अन्य सड़कों सहित विभिन्न निर्माणाधीन पुलों एवं अन्य निर्माण कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी उन्होंने ली। नेशनल हाईवे पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर एनएचएआई के अधिकारियों के साथ उनके समाधान को भी कहा है। बैठक में विभाग के एसीएस संदीप वर्मा सहित आला अधिकारी मौजूद रहे। </p>
<p><strong>बरसात के मौसम में अलर्ट रहने के निर्देश</strong><br />उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में अधिकारी ज्यादा अलर्ट रहें। कहीं जलभराव एवं सड़क कटने की शिकायत मिलती है या स्थानीय अधिकारियों को ऐसा अंदेशा है तो वहां पहले से ही माकूल व्यवस्था की जाए। आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो। फील्ड के अधिकारियों के माध्यम से अपने क्षेत्रों कि नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jul 2024 10:55:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Loksabha Election के बाद शहरों को मिलेगी सौगात, 3000 करोड़ की परियोजनाओं का खाका  तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर विकास प्राधिकरण के अलावा प्रदेश भर के अन्य विकास प्राधिकरण और नगर सुधार न्यासों ने अपने-अपने क्षेत्र के लिए विभिन्न प्रोजेक्ट्स प्रस्तावित किए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार ने लोकसभा चुनावों की आचार संहिता खत्म होने के बाद प्रदेश के शहरों में विकास कार्यों को लेकर खाका तैयार किया है। हालांकि कुछ कार्य जुलाई माह में सरकार के पेश होने वाले बजट में शामिल किए जाएंगे, जबकि कुछ कार्य आचार संहिता समाप्त होने के बाद शुरू हो जाएंगे । जयपुर के साथ ही दूसरे शहरों में भी लोगों को यातायात जाम से मुक्ति दिलाने, ड्रेनेज, सड़क निर्माण और पर्यावरण सुधार से जुड़े प्रोजेक्ट्स का प्लान तैयार किया गया है। </p>
<p>लोकसभा चुनाव के परिणाम 4 जून को आने वाले हैं।  इसके बाद जुलाई में उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी प्रदेश का पूर्ण बजट पेश करेंगी।  इस बजट के लिए जयपुर सहित विभिन्न शहरों के विकास के लिए प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। जयपुर विकास प्राधिकरण के अलावा प्रदेश भर के अन्य विकास प्राधिकरण और नगर सुधार न्यासों ने अपने-अपने क्षेत्र के लिए विभिन्न प्रोजेक्ट्स प्रस्तावित किए हैं। जेडीए सहित इन सभी निकायों ने करीब तीन हजार करोड़ रुपए की लागत के प्रोजेक्ट्स प्रस्तावित किए हैं।  इनमें से अकेले जेडीए के प्रोजेक्ट्स की लागत करीब 24 सौ करोड़ रुपए है,  जबकि शेष शहरों के प्रोजेक्ट्स की लागत करीब 6 सौ करोड़ रुपए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cities-will-get-gifts-after-loksabha-elections-blueprint-of-projects/article-78782</link>
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                <pubDate>Tue, 21 May 2024 14:31:06 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चौपाटी बनी स्मार्ट लेकिन नहीं सुधरी पार्किंग </title>
                                    <description><![CDATA[चौपाटी को स्मार्ट बनाने के साथ ही यहां खड़े होने वाले वाहनों से बाधित हो रहे  ट्रैफिक का भी समाधान किया जाना है।  जिससे चौपाटी के सामने की मुख्य रोड चौड़ी रहे। जहां से ट्रैफिक आसानी से निकल सके। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/chowpatty-became-smart-but-parking-did-not-improve/article-33658"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/chaupati-bani-smart-lekin-nahi-sudhri-parking...kota-news..29.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के बीच शॉपिंग सेंटर स्थित चौपाटी को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत स्मार्ट तो बना दिया लेकिन उसके सामने की पार्किंग में सुधार नहीं हुआ है। जिससे सड़क पर खड़े हो रहे वाहनों से ट्रैफिक बाधित हो रहा है। शहर के बीच बनी चौपाटी काफी समय से अस्त-व्यस्त हो रही थी। यहां पूरे शहर के लोग फास्ट फूट का आनंद लेने परिवार समेत आते हैं। ऐसे में यहां दुकानों के सामने खड़े होने वाले ठेलों से सड़क पर अतिक्रमण तो हो ही रहा था साथ ही ट्रैफिक में भी बाधा उत्पन्न हो रही थी। इसे व्यवस्थित करने के लिए नगर निगम कोटा दक्षिण की तत्कालीन आयुक्त कीर्ति राठौड़ ने प्रयास किए। उन्होंने सबसे पहले तो चौपाटी में दुकानों के आगे खड़े हो रहे फास्ट फूड के ठेलों को वहां से हटाकर उन्हें दुकानों के फुटपाथ पर चढ़ाया। उसके बाद इस चौपाटी को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत स्मार्ट बनाने का प्रस्तार तैयार किया। </p>
<p><strong>एक रूपता लाने का प्रयास</strong><br />स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इस चौपाटी में बनी सभी दुकानों को एक रूपता देने का प्रयास किया गया। जिसमें सभी दुकानों के आगे की जगह को कच्ची जमीन पर इंटर लोकिंग कर पक्का किया गया। दुकानों के आगे ड्रेनेज सिस्टम को सही करने के लिए नाला बनाया। वहीं चौपाटी पर नई और रेंग बिरंगी लाइटें लगाई गई। सभी दुकानों के ऊपर एक रूपता वाला शेड लगाया गया। साथ ही सभी दुकानों के नाम के बोर्ड जो अलग-अलग आकार के थे उनके स्थान पर एक समान नाम वाले बोर्ड लगाने का काम किया जाएगा।  इसके साथ ही वर्तमान में हर दुकानदार ने अपने हिसाब से मेज कुर्सी लगाई हुई है। जिनके स्थान पर स्मार्ट सिटी से एक जैसी मेज कुर्सी लगाने का निर्णय किया गया। जिससे कोई भी ग्राहक किसी भी दुकान के सामने खड़ा होकर व बैठकर खाने-पीने का आनंद ले सकेगा।</p>
<p><strong>पार्किंग को अन्य स्थान पर शिफ्ट करना है</strong><br />चौपाटी को स्मार्ट बनाने के साथ ही यहां खड़े होने वाले वाहनों से बाधित हो रहे  ट्रैफिक का भी समाधान किया जाना है। इसके लिए दुकानदार हो या ग्राहक सभी के वाहनों को यहां से हटाकर रोटरी क्लब भवन की तरफ खड़ा करने की योजना है। जिससे चौपाटी के सामने की मुख्य रोड चौड़ी रहे। जहां से ट्रैफिक आसानी से निकल सके। हालांकि वर्तमान में शाौपिंग सेंटर क्षेत्र में सड़क बनाने का काम किया जा रहा है। </p>
<p><strong>नहीं हुई पार्किंग की व्यवस्था</strong><br />स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत काफी समय से चल रहे काम के दौरान चौपाटी तो स्मार्ट बना दी गई है। लेकिन अभी तक भी पार्किंग की व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है। जिससे अभी भी वाहन मेन रोड पर खड़े हो रहे हैं। </p>
<p>चौपाटी का अधिकतर काम तो पूरा हो गया है। सिर्फ फर्नीचर लगाना बाकी है। उसके बाद वाहनों की पार्किंग रोटरी क्लब वाली रोड पर करवाई जाएगी। इसके लिए चौपाटी के सामने ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से वाहन चालकों व दुकानदारों से समझाइश की जाएगी। <br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, अधिशाषी अभियंता. नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/chowpatty-became-smart-but-parking-did-not-improve/article-33658</link>
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                <pubDate>Thu, 29 Dec 2022 15:49:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेयजल परियोजना पुनर्गठन के लिए 69.58 करोड़ की निविदा स्वीकृत़</title>
                                    <description><![CDATA[जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने जयपुर-बीसलपुर पेयजल परियोजना की सेन्ट्रल ट्रांसफर मैन पाइप लाइन के पुनर्गठन कार्यों के लिए 69 करोड़ 58 लाख रूपए की निविदा स्वीकृत कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/6958-crore-tender-approved-for-restructuring-drinking-water-project/article-24115"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/water-project.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर शहर के चारदीवारी क्षेत्र एवं टेल एण्ड के क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की समस्या का निराकरण जल्द होगा। शहर के ट्रांसपोर्ट नगर, ब्रह्मपुरी एवं न्यू फिल्टर हाउस जैसे टेल एण्ड के क्षेत्रों में पर्याप्त दबाव से बीसलपुर के पानी की आपूर्ति भी हो सकेगी। साथ ही, रामनिवास बाग पम्पिंग स्टेशन पर लोड भी कम होगा। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने जयपुर-बीसलपुर पेयजल परियोजना की सेन्ट्रल ट्रांसफर मैन पाइप लाइन के पुनर्गठन कार्यों के लिए 69 करोड़ 58 लाख रूपए की निविदा स्वीकृत कर दी है। योजना के कार्यादेश इसी माह जारी कर एक वर्ष में कार्य पूरे किए जाएंगे। </p>
<p>अतिरिक्त मुख्य सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं भूजल डॉ. सुबोध अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसकी मंजूरी दी गई। इसके अलावा जयपुर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पर्याप्त पेयजल आपूर्ति के लिए जलदाय विभाग ने करीब 28 करोड़ रूपए की जलापूर्ति योजनाओं की निविदाओं को भी स्वीकृति दी है। जयपुर-बीसलपुर पेयजल परियोजना पुनर्गठन कार्यों के तहत 11 मिलियन लीटर क्षमता का स्वच्छ जलाशय भूजल विभाग के झालाना कैम्पस में प्रस्तावित है। ओटीएस चैराहे से ट्रांसपोर्ट नगर ट्रक स्टेण्ड हैडवक्र्स, ब्रह्मपुरी हैडवक्र्स को फीड करते हुए न्यू फिल्टर प्लांट जयपुर-दिल्ली बाईपास रोड तक करीब 18 किलोमीटर तक पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इस योजना से जयपुर-दिल्ली बाईपास, ट्रांसपोर्ट नगर, बासबदनपुरा, ईदगाह क्षेत्र, कर्बला, ब्रह्मपुरी, गुर्जरघाटी, कागदीवाडा, जयसिंहपुरा खोर एवं आमेर आदि क्षेत्रों में वर्ष 2051 तक की मांग को ध्यान में रखते हुए करीब 8 लाख की आबादी को लाभ मिलेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Sep 2022 17:49:19 +0530</pubDate>
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                <title>ERCP राजस्थान का भाग्य बदलने की परियोजना है। मुख्यमंत्री व शेखवत राजनीति नहीं करें : मिश्रा</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान की प्रस्तावित पूर्वी नहर परियोजना (ERCP) को लेकर आम आदमी पार्टी ने सरकार को सलाह दी है कि वे केंद्र की बीजेपी सरकार की तरह थोथे कागजी बयानों की राजनीति छोड़े और परियोजना को लागू करने के लिए ठोस कदम उठाएं।  आम आदमी पार्टी ERCP को लेकर जनता में जाएगी और कांग्रेस- बीजेपी की नूरा कुश्ती का पर्दाफाश करेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ercp-is-a-project-to-change-the-fate-of-rajasthan-chief-minister-and-shekhwat-should-not-do-politics-vinay-mishra/article-13842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/vinay-aap_new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान की प्रस्तावित पूर्वी नहर परियोजना (ERCP) को लेकर आम आदमी पार्टी ने सरकार को सलाह दी है कि वे केंद्र की बीजेपी सरकार की तरह थोथे कागजी बयानों की राजनीति छोड़े और परियोजना को लागू करने के लिए ठोस कदम उठाएं।  आम आदमी पार्टी ERCP को लेकर जनता में जाएगी और कांग्रेस- बीजेपी की नूरा कुश्ती का पर्दाफाश करेगी। <br /><br />आप पार्टी के प्रदेश चुनाव प्रभारी विनय मिश्रा ने मुख्यमंत्री को ERCP को लेकर एक विस्तृत पत्र लिखा है। मिश्रा ने पत्र में कहा है कि यह परियोजना न केवल सीधे तौर पर प्रभावित 13 जिलों के लोगों का जीवन बदल देगी, बल्कि पूरे प्रदेश में पेयजल, सिंचाई और कृषि उत्पाद के माध्यम से व्यापारिक गतिविधियों को भी कई गुना बढ़ा देगी। इसको लागू करने में टालमटोल की राजनीति करना उचित नहीं है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि पूर्वी नहर परियोजना को चुनावी व राजनीतिक मुद्दा न बनाएं और इसको व्यवहारिक स्वरूप देकर लागू करें। आप ने परियोजना में देरी के लिए केंद्र को दोषी ठहराते हुए कहा कि मोदी सरकार के मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत राजस्थान के होते हुए भी राजस्थान के जायज कानूनी हक की रक्षा करने में पूरी तरह असफल रहे हैं और लगातार इस परियोजना के काम व प्लान पर सवाल उठा रहे हैं। शेखावत पर  मिश्रा ने आरोप लगाया है कि वो ERCP को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने के लिए शर्तें लगा रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। <br /><br />पत्र में राज्य सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए गए हैं। श्री मिश्रा ने कहा है कि  डिपेंडिबिलिटी के तकनीकी मसले पर केंद्र सरकार आपत्ति कर रही है. ऐसे में राज्य सरकार को चाहिए कि वह केंद्र से चर्चा करके इस विवाद को समाप्त करें। सच यह है कि केंद्र सरकार की आपत्तियों पर बुलाई गई बैठकों में प्रदेश की टीम हिस्सा लेने में आनाकानी करती रही हैं। पत्र में लिखा है, पूर्वी नहर परियोजना 2016-17 में वसुंधरा राजे सरकार ने घोषित की थी। इसके बाद 2018 में सरकार बदल कई और गहलोत मुख्यमंत्री बने, लेकिन तीन साल तक इस परियोजना पर कोई काम नहीं हुआ। अब चुनाव नजदीक आ गए हैं तो अशोक गहलोत ने सीधे 9500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान कर के परियोजना लागू करने की घोषणा कर दी। ना तो उन्होंने केंद्र की तकनीकी आपत्तियों को समाप्त करने पर कोई प्रयास नहीं किया, न ही फिजिबिलिटी चेक करवाई। इसके अलावा डिपेंडिबिलिटी विवाद को समाप्त करने के लिए कोई प्रयास नहीं करने के साथ ही  पाइपलाइन, ट्रीटमेंट प्लांट और लिफ्ट प्लांट के लिए जरूरी जमीनों का ठीक से सर्वे करवाने पर भी कोई ध्यान नहीं दिया है।पत्र में मिश्रा ने कहा है कि मुख्यमंत्री जी ने बड़ी घोषणा तो कर दी कि राष्ट्रीय परियोजना घोषित नहीं होती है तो भी इस नहर परियोजना को पूरा करेंगे। पर बिना ग्राउंड तैयारी के चुनाव से डेढ़ साल पहले उनकी घोषणा प्रदेश की जनता को वोट के लिए बेवकूफ बनाने के सिवाय कुछ नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jul 2022 19:23:32 +0530</pubDate>
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                <title>ईआरसीपी पर भाजपा 13 जिलों में रखेगी केन्द्र का पक्ष, शेखावत ने किया नेताओं को अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों में ईआरसीपी प्रोजेक्ट को लेकर गरमाई राजनीति में भाजपा और केन्द्र सरकार का पक्ष रखने के लिए भाजपा ऑफिस में क्षेत्र के विधायकों, सांसदों और अन्य भाजपा नेताओं की बैठक हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-bjp-leaders-meeting-aut-ercp-project/article-13188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/4545465.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों में ईआरसीपी प्रोजेक्ट को लेकर गरमाई राजनीति में भाजपा और केन्द्र सरकार का पक्ष रखने के लिए भाजपा ऑफिस में क्षेत्र के विधायकों, सांसदों और अन्य भाजपा नेताओं की बैठक हुई। बैठक में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सभी नेताओं को प्रोजेक्ट में केन्द्र सरकार का पक्ष, राज्य सरकार के दिल्ली भेजे प्रोजेक्ट डीपीआर में व्याप्त तकनीकी खामियों, कांग्रेस के लगाए जा रहे आरोपों का काउंटर करने के लिए सभी को प्रशिक्षित किया है। ये सभी नेता अब अपने जिलों में ईआरसीपी पर भाजपा-केन्द्र का जनता के बीच पक्ष रखेंगे। कांग्रेस के आरोपों का जवाब देंगे। जानकारी के अनुसार शेखावत भी पूर्वी राजस्थान में जाकर मुद्दे पर अपनी बात रख सकते हैं। बैठक में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी भी मौजूद रहे। उन्होंने भी अपनी बात रखी। बैठक में क्षेत्रीय नेताओं से ईआरसीपी को लेकर जनता का फीडबैक भी लिया गया।</p>
<p><strong>सरकार इसे राजनीति हथियार बना रही, जनता को फायदा नहीं देना चाहते : शेखावत</strong><br />प्रोजेक्ट पर सीएम राजनीति कर भम्र फैला रहे हैं, लेकिन यह पाप वे धो नहीं सकेंगे। कांग्रेस 13 जिलों में इसे राजनीति हथियार बनाना चाहती है। इन जिलों में करीब 40 प्रतिशत आबादी रहती है। इसलिए यह काफी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। प्रदेश सरकार इसे आगे नहीं बढ़ाना चाहती। केनद्र सरकार इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन प्रदेश सरकार जनता को फायदा नहीं देना चाह रही। प्रदेश के भेजे प्रोजेक्ट डीपीआर 75 फीसदी निर्भरता का बनाया है, जबकि राष्ट्रीय परियोजना के लिए 50 फीसदी पर बनना चाहिए। तत्कालीन एमपी के सीएम कमलनाथ और अब शिवराज सिंह सरकार राजस्थान की डीपीआर पर आपत्ति व्यक्त कर चुके है। कांग्रेस केन्द्र सरकार को बदनाम कर रही है। राजस्थान सरकार इसे अपने स्तर पर लागू करने के सवाल पर कहा कि ऐसा होगा, तो कोर्ट जाने का रास्ता खुला है, क्योंकि केन्द्र के अनुरूप ही प्रोजेक्ट बन सकता है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jun 2022 10:59:08 +0530</pubDate>
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