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                <title> waqf - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> waqf RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>लश्करे लूट की लम्पट छूट पर सर्जिकल स्ट्राइक है वक्फ संशोधन एक्ट : ये कानून किसी मजहब का नहीं मुल्क का, नकवी ने कहा- इससे धर्म का नुकसान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि लश्करे लूट की लम्पट छूट पर सर्जिकल स्ट्राइक है वक़्फ़ संशोधन एक्ट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/surgical-strike-is-a-surgical-strike-at-the-lamp-exemption/article-110779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/6622-copy.jpg22.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि लश्करे लूट की लम्पट छूट पर सर्जिकल स्ट्राइक है वक़्फ़ संशोधन एक्ट। नकवी ने वक्फ पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि चोट लश्करे तबाही पर चीख लश्करे तुष्टीकरण की निकल रही है, जिनके लूट लाइसेंस की नाकेबंदी पर लूटसाहबों की लामबंदी इस बात का प्रमाण है कि वक़्फ सिस्टम की दाल में काला नहीं था, बल्कि पूरी दाल ही काली हो गई थी। इस गन्दगी की सफाई में मुल्क और मजहब की भलाई है।</p>
<p>नकवी ने कहा कि वक़्फ़ सुधार क़ानून, आस्था के संरक्षण और व्यवस्था के सुधार का है, ये क़ानून किसी मजहब का नहीं मुल्क का है, इससे ना धर्म को नुक़सान है ना धार्मिक स्थल को। नकवी ने कहा कि कुछ लोग भय-भ्रम के भंवरजाल से सीधे-साधे लोगों के कंधों पर बंदूक़ और कम्युनल कांस्प्रेसी का संदूक ले कर घूम रहें हैं। ऐसे भ्रम के गटर में भरोसे का शटर लगा कर साजिशी ङ्क्षसडिकेट के साम्प्रदायिक संक्रमण का सफ़ाया करना होगा।</p>
<p>नकवी ने कहा कि वक्फ सुधार कानून लूट की लंका में कानून का डंका, वक़्फ सिस्टम के कन्फ्यूजन, कंट्राडिक्शन, कनफ्लिक्ट को करेक्ट कर, सुधार और सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करेगा। नकवी ने कहा कि वक़्फ संशोधन पर बहस के दौरान संसद में तर्कों, तथ्यों की कंगाली से जूझ रहे लोग सड़क पर मवाली जैसे व्यवहार में जुटकर, संवैधानिक सुधार पर सांप्रदायिक वार कर रहे हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Apr 2025 19:02:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वक्फ संपत्तियों का पात्रों को नहीं मिल रहा था लाभ : सरकार ने इसलिए किया हस्तक्षेप, शेखावत ने कहा- पात्र लोगों के उपयोग में आएगी संपत्ति</title>
                                    <description><![CDATA[शेखावत ने कहा कि वक्फ के दुरुपयोग के कारण साधारण मुसलमान, जिसके कल्याण के लिए, जिस संपत्ति का नियोजन किया गया था, वो नहीं हो पाया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/waqf-properties-were-not-getting-the-characters-the-government-was/article-110776"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/gajendra-singh-shekhawat.jpg" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने वक्फ संशोधन कानून को लेकर स्पष्ट करते हुए कहा कि वक्फ को दान की संपत्तियों को तथाकथित धर्म के पैरोकारों ने अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए दुरुपयोग किया, इसलिए सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। शेखावत ने कहा कि वक्फ के दुरुपयोग के कारण साधारण मुसलमान, जिसके कल्याण के लिए, जिस संपत्ति का नियोजन किया गया था, वो नहीं हो पाया। वक्फ संशोधन कानून से अब वक्फ की संपत्ति, जो उसके पात्र हैं, उन्हीं के लिए उपयोग में आएगी। </p>
<p>शेखावत ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा संपत्ति अगर किसी के पास है, तो वो वक्फ बोर्ड के पास में है, जिसका ठीक लाभ पात्रों को मिलना चाहिए, लेकिन वो नहीं मिल पा रहा था। इसलिए सरकार कानून लेकर आई। एक सवाल के जवाब में शेखावत ने कहा कि भारत का संविधान जहां एक तरफ यह कहता है कि सभी नागरिक समान हैं, वहीं उसी संविधान में अल्पसंख्यकों और कुछ सजातीय समूहों के लिए अलग-अलग प्रबंध भी किए गए हैं। वक्फ उसी का हिस्सा है, लेकिन बाबा साहेब ने संविधान को जीवंत रूप में बनाया ताकि बदलते हुए समय के परिपेक्ष्य में उसमें बदलाव किए जा सकें। </p>
<p>गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा की अभी शुरुआत हुई है। वक्फ के कानून में संशोधन हुआ है। ट्रिपल तलाक समाप्त हुआ है। देखते जाइए, थोड़े दिन बाद में देश के सभी लोगों की आशा के अनुरूप ऐसे बदलाव देखने को मिलेंगे। मंदिरों की संपत्ति से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि अधिकांश मंदिर राज्य सरकारों की संपत्ति और संपदा हैं। विभिन्न राज्य सरकारों ने मंदिरों के प्रबंधन के लिए देवस्थान बोर्ड की व्यवस्था की है। अपने राजस्थान में भी लगभग सभी मंदिरों का प्रबंध मोटे तौर पर देवस्थान विभाग के पास है। केवल कुछ मंदिर, जो या तो पारिवारिक ट्रस्ट का मंदिर है या रामदेवरा का मंदिर एकदम अलग है, क्योंकि वह मंदिर नहीं है, समाधि स्थल है। उच्चत्तम न्यायालय में उसके ऊपर निर्णय हुआ है। </p>
<p>सभी राज्यों में इस तरह की व्यवस्थाएं की गई, लेकिन दक्षिण भारत के मंदिर आज भी प्रबंध न्यास के पास में हैं। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि जब तक देश के बहुसंख्यक समाज की तरफ से इस तरह का कोई विषय न उठे, तब तक इससे छेड़छाड़ करने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकारें प्रबंध करें। पेट्रोल-डीजल की कीमतों से जुड़े सवाल पर शेखावत ने कहा कि वर्ष 2014 के पहले से देश की सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम को सरकार के हस्तक्षेप से मुक्त कर दिया था। इनके दाम तय करना शुद्ध रूप से पेट्रोलियम कंपनी और रिफाइनरी के अधीन है। वह मार्केट संचालित है। इसमें सरकार का न्यूनतम हस्तक्षेप हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हमेशा से सिद्धांत रहा है कि मिनिमम गवर्नमेंट मैक्सिमम गवर्नेंस हो। राज्य का न्यूनतम हस्तक्षेप हो, इस सिद्धांत पर हम काम कर रहे हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Apr 2025 19:00:07 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ याचिकाओं पर समय रहते विचार करने को सहमत, 5 अप्रैल को नए कानून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मिली थी मंजूरी </title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह ‘वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025’ की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर समय रहते विचार करेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/on-april-5-the-new-law-was-approved-by-president/article-109971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह ‘वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025’ की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर समय रहते विचार करेगा। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना तथा न्यायाधीश संजय कुमार और के वी विश्वनाथन की पीठ ने कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और ए. एम. सिंघवी के शीघ्र सुनवाई के लिए 'तत्काल उल्लेख' किए जाने के बाद समय रहते याचिका पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की। संसद के दोनों सदनों में संबंधित विधेयक पास होने के बाद 5 अप्रैल को नए कानून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी मिल गई।</p>
<p>वक्फ (संशोधन) विधेयक की वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं पहले ही दायर की जा चुकी हैं। याचिकाएं दायर करने वालों में कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान शामिल हैं।</p>
<p>एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स, जमीयत उलमा-ए-हिंद, समस्त केरल जमीयतुल उलमा जैसे संगठनों ने भी शीर्ष अदालत में रिट याचिकाएं दायर की हैं। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि यह अधिनियम मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता को छीनने की एक खतरनाक साजिश है। उन्होंने तर्क दिया कि यह संशोधन वक्फ के धार्मिक स्वरूप को भी विकृत करेगा और वक्फ तथा वक्फ बोर्डों के प्रशासन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी अपरिवर्तनीय रूप से नुकसान पहुंचाएगा।</p>
<p>उनकी याचिकाओं में शीर्ष अदालत से अधिनियम को असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26 और 300-ए का उल्लंघन करने वाला घोषित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई। याचिकाओं में प्रतिवादी केंद्र सरकार और कानून एवं न्याय मंत्रालय को इसके प्रावधानों को लागू करने या लागू करने से रोकने का आदेश देने की गुहार लगाई गई है। नए वक्फ कानून ‘एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तीकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995’ ने ‘वक्फ अधिनियम, 1995’ की जगह ली है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Apr 2025 17:58:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विपक्ष का वक्फ संशोधन विधेयक पर जेपीसी की रिपोर्ट को अवैध और असंवैधानिक कहना दुर्भाग्यपूर्ण, रिजिजू ने कहा- जेपीसी की रिपोर्ट में सुझाव, विचार, टिप्पणी आदि शामिल </title>
                                    <description><![CDATA[संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि जेपीसी की रिपोर्ट राज्यसभा में पेश कर दी गई है और लोकसभा में भी पेश हो जाएगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/calling-the-jpc-report-on-the-waqf-amendment-bill-of/article-104168"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/news21.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट को विपक्ष द्वारा अवैध और असंवैधानिक कहे जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और कहा है कि यदि उन्हें लगता है कि उनकी कोई बात रिपोर्ट में नहीं है, तो वे समिति के अध्यक्ष से अपील कर सकते हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि जेपीसी की रिपोर्ट राज्यसभा में पेश कर दी गई है और लोकसभा में भी पेश हो जाएगी। 6 माह में जेपीसी ने बहुत ही अच्छा कार्य किया है। रिपोर्ट के साथ अनुलग्नक में सदस्यों के सुझाव, विचार, टिप्पणी आदि शामिल हैं।</p>
<p>रिजिजू ने कहा कि समिति के अध्यक्ष को नियमानुसार अधिकार है कि यदि कोई टिप्पणी जिसमें अध्यक्ष या समिति के अस्तित्व पर सवाल खड़ा किया गया है। उसे वह हटा सकते हैं। यदि संबंधित सदस्य को लगता है कि उनकी बात नहीं हटानी चाहिए तो वह अध्यक्ष से अपील कर सकते हैं। अध्यक्ष उस पर पुनर्विचार कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए जेपीसी की रिपोर्ट को अवैध और असंवैधानिक कहना ठीक नहीं है।  जेपीसी सरकार की नहीं है। इसमें सभी दलों के सदस्य हैं। कुछ सत्ता पक्ष के हैं और कुछ विपक्ष के। उनके विचार भी अलग-अलग हो सकते हैं। रिपोर्ट को मतविभाजन से मंजूरी या नामंजूरी दी जा सकती है। जो भी स्वीकार या अस्वीकार किया गया है, सब कुछ रिपोर्ट एवं अनुलग्नक में शामिल है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि आपत्ति पत्र में यदि कोई टिप्पणी अनुचित है तो उसे अध्यक्ष आंशिक या पूरी तरह हटा सकते हैं। इसलिए जेपीसी ने काम ठीक से नहीं किया, यह कहना, उचित नहीं है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि रिपोर्ट पेश किये जाने के बाद संसद से सरकार के पास जाएगी। फिर केन्द्रीय मंत्रिमंडल में उस पर विचार किया जाएगा तथा उसके बाद एक नया संशोधित वक्फ़ संशोधन विधेयक लाया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2025 15:22:54 +0530</pubDate>
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