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                <title>करोड़ों खर्च फिर भी वाहन फेला रहे प्रदूषण, नगर निगम कोटा उत्तर-दक्षिण के वाहनों को सीएनजी व ई वी में किया जाएगा शिफ्ट </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर में जनसंख्या व वाहनों के लगातार बढ़ने से प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/even-after-spending-crores-of-rupees--vehicles-are-spreading-pollution/article-104182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(2)29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण द्वारा एक तरफ तो  अपने वाहनों में पेट्रोल-डीजल व मरम्मत पर हर साल करोडों रुपए खर्च कर रहा है। उसके बाद भी ये वाहनच वायु व ध्वनि प्रदूषण फेला रहे है। जबकि कोटा में प्रदूषण का स्तर(एक्यूआई) लगातार बढ़ने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में इस मद में होने वाले खर्च को कम करने के लिए निगम के वाहनों को सीएनजी या ईवी में शिफ्ट किया जा सकता है। कोटा शहर में जनसंख्या व वाहनों के लगातार बढ़ने से प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। अधिकतर प्रदूषण पुराने वाहनों से हो रहा है। सरकार ने 15 साल पुराने व्यवसायिक वाहनों को सड़क पर चलने की रोक तक लगा दी है। लेकिन उसके बाद भी नगर निगम में कई पुराने वाहन सड़कों पर चल रहे है। उनमें से अधिकतर वाहन पेट्रोल-डीजल से चल रहे है। पेट्रोल-डीजल के पुराने वाहन शहर में वायु व ध्वनि प्रदूषण को भी बढ़ा रहे हैं। शहर में वर्तमान में प्रदूषण का स्तर 205 एक्यूआई पर पहुंच गया है जो काफी खतरनाक स्थिति है। इसे कम करने के लिए पेट्रोल-डीजल के स्थान पर सीएनजी व ईवी वाहनों का उपयोग किया जा सकता है।</p>
<p><strong>गैराज में सभी तरह के वाहन</strong><br />नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि निगम के गैराज में सभी तरह के वाहन है। टिपर से लेकर जेसीबी, डम्पर, ट्रेक्टर-ट्रॉली, जेटिंग मशीन, सीवरेज मशीन, अधिकारियों व कर्मचारियों के वाहन शामिल है। सफाई से संबंधित वाहन तो रोजाना संचालित हो रहे है। सभी वाहन डीजल और पेट्रोल से संचालित हो रहे है। बड़े-बड़े और पुराने वाहन होने से कई तो औसत कम होने से डीजल भी अधिक खपत वाले है। हालांकि निगम का प्रयास रहता है कि जितना आवश्यक हो उतने ही वाहनों का उपयोग हो और पेट्रोल-डीजल की कम से कम खपत हो।  निगम द्वारा बजट में जितना प्रावधान रखा जाता है इतना बजट पूरा खर्च नहीं होता। </p>
<p><strong>पेट्रोल-डीजल व ऑयल का बजट 8 करोड़</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर की ओर से गैराज अनभिाग के बजट में से करीब आधा बजट 8 करोड़ रुप एतो पेट्रोल-डीजल व आॅयल के लिए रखा गया है। चालू वित्त वर्ष  में इस मद में 6 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था। जिसमें से दिसम्बर तक  3.04 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके है। </p>
<p><strong>कोटा उत्तर में गैराज का  14.50 करोड़ बजट</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर की ओर से आगामी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए गैराज अनुभाग के मद में 14.50 करोड़ रुपए का बजट  प्रावधान किया गया है। हालांकि चालू वित्त वर्ष 2024-25 में यह बजट \20 करोड़ रुपए रखा गया था। जिसे बाद में संशोधित कर 12 कर दिया था। लेकिन हालत यह है कि दिसम्बर 2024 तक इस मद में से 5.93 करोड़ रुपए खर्च किए गए। </p>
<p><strong>कोटा दक्षिण निगम में 12करोड़ का बजट</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से आगामी वित्तब वर्ष के लिए गैराज अनुभाग मद में 12.01 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। जिसमें से सिर्फ पेट्रोल-डीजल व आॅयल मद में 5 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।  इस तरह से नगर निगम द्वारा हर साल वाहनों में  करोड़ों रुपए का पेट्रोल-डीजल जलाया जा रहा है और शहर को प्रदूषित भी किया जा रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम के सभी वाहन पेट्रोल-डीजल से संचालित हो रहे है। कई वाहन पुराने होने से उनका औसत कम होने से खपत अधिक हो रही है। साथ ही ये प्रदूषण भी फेला रहे है। इसके विकल्प के रूप में नगर निगम द्वारा अपने वाहनों का संचालन सीएनजी से किया जा सकता है। इससे औसत भी सही रहता है और प्रदूषण भी नहीं फेलता। शहर में इसके पम्प पर्याप्त होने से समस्या भी नहीं होगी। हालांकि ईवी वाहनों के लिए चार्जिंग पाइंट होना आवश्यक है। ईवी सफाई वाहनों में कारगर नहीं होगी। <br /><strong>- कपिल शर्मा, अध्यक्ष गैराज समिति नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2025 18:46:47 +0530</pubDate>
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