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                <title>actor - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>उतार-चढ़ाव से भरा रहा इस स्टारकिड का करियर: नकली अंगूठी से किया था प्रपोज; मजबूरी में किए क्या-क्या काम, आज है 280 करोड़ का मालिक</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेता अभिषेक बच्चन 50 वर्ष के हो गए। ‘रिफ्यूजी’ से शुरुआत कर ‘धूम’, ‘गुरु’ जैसी हिट फिल्मों से उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/trending-today/this-star-kids-career-was-full-of-ups-and-downs/article-142049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/bachchan.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता अभिषेक बच्चन आज 50 वर्ष के हो गए हैं। 05 फरवरी, 1976 को मुंबई में जन्में अभिषेक को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनके पिता अमिताभ बच्चन अभिनेता, जबकि मां जया भादुरी जानी-मानी अभिनेत्री हैं। अभिषेक बच्चन ने अपने करियर की शुरूआत वर्ष 2000 में प्रदर्शित जे.पी.दत्ता की फिल्म रिफ्यूजी से की।</p>
<p><img src="https://images.news18.com/ibnlive/uploads/2026/02/abhishek-bachchan-Birthday-amitabh-2026-02-6d5ec0df22dbcaa08b8554034569faca-16x9.jpg?impolicy=website&amp;width=400&amp;height=225" alt="Abhishek Bachchan Turns 50: 50 Facts On Films, Family And Career |  Bollywood News - News18"></img></p>
<p>हालांकि यह फिल्म टिकट खिड़की पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी, लेकिन अभिषेक के अभिनय को अवश्य पसंद किया गया। इसके बाद अभिषेक ने तेरा जादू चल गया, ढ़ाई अक्षर प्रेम के, बस इतना सा ख्वाब है, हां मैने भी प्यार किया है, शरारत, मुंबई से आया मेरा दोस्त, मैं प्रेम की दीवानी हूं, ओम जय जगदीश, एलओसी कारगिल, कुछ न कहो जैसी फिल्मों में काम किया, लेकिन इनमें से कोई फिल्म टिकट खिड़की पर सफल नहीं रही।</p>
<p><img src="https://images.moneycontrol.com/static-mcnews/2024/08/20240826055427_tcynm.jpg?impolicy=website&amp;width=770&amp;height=431" alt="Aishwarya Rai Bachchan on her marriage and career: 'No question of losing  myself'"></img></p>
<p>वर्ष 2003 में अभिषेक की फिल्म जमीन प्रदर्शित हुई। इस फिल्म में अभिषेक के अलावा अजय देवगन की भी मुख्य भूमिका थी। फिल्म को टिकट खिड़की पर औसत सफलता मिली। वर्ष 2004 में प्रदर्शित फिल्म युवा अभिषेक के करियर की महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई। इस फिल्म में अभिषेक का किरदार ग्रे शेड्स लिए हुए थे, लेकिन वह दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने में सफल रहे। वर्ष 2004 में प्रदर्शित फिल्म धूम उनके करियर की पहली सुपरहिट फिल्म साबित हुई। इसके बाद अभिषेक ने कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया, जिनमें उनके अभिनय को सराहा गया।</p>
<p><img src="https://www.livemint.com/lm-img/img/2025/07/04/600x338/Kaalidhar_Laapata_Abhishek_Bachchan_1751636094289_1751636094481.jpeg" alt="कालीधर लापता' समीक्षा: अभिषेक बच्चन ने परित्याग, उपचार और अप्रत्याशित  दोस्ती की एक कोमल कहानी को बखूबी निभाया | मिंट"></img></p>
<p>वर्ष 2007 में अभिषेक बच्चन को मणिरत्नम की फिल्म गुरू में काम करने का अवसर मिला। माना जाता है कि यह फिल्मदिवंगत उद्योगपति धीरू भाई अंबानी के जीवन पर बनायी गयी थी। अभिषेक बच्चन ने अपने संजीदा अभिनय से दर्शको का दिल जीत लिया। इस फिल्म के लिये अभिषेक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिये नामांकित किये गये। इसी वर्ष अभिषेक बच्चन ने ऐश्वर्या राय से शादी कर ली।वर्ष 2008 में अभिषेक बच्चन की दोस्ताना और सरकार राज जैसी सुपरहिट फिल्में प्रदर्शित हुयी और दोनो फिल्मों के लिये वह सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिये नामांकित किये गये।वर्ष 2009 में अभिषेक बच्चन ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया और सुपरहिट फिल्म 'पा' का निर्माण किया।</p>
<p><img src="https://images-hmd.mid-day.com/HMD/images/images/2025/oct/AbhishekBachchan-Award_d.jpg" alt="Abhishek Bachchan wins Filmfare Best Actor award for `I Want to Talk`: अभिषेक  बच्चन ने फिल्मफेयर में `आई वांट टू टॉक` के लिए जीता बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड"></img></p>
<p>वर्ष 2012 में प्रदर्शित सुपरहिट फिल्म बोल बच्चन में अभिषेक बच्चन ने जबरदस्त हास्य अभिनय से दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया। वर्ष 2013 में अभिषेक बच्चन के करियर की सबसे कामयाब फिल्म धूम 3 प्रदर्शित हुयी। वर्ष 2014 में अभिषेक की एक और सुपरहिट फिल्म हैप्पी न्यू ईयर प्रदर्शित हुयी है। इसके बाद अभिषेक बच्चन की हाउसपुल 3, मनमर्जिया, लूडो, द बिग बुल, बॉब विश्वास, दसवीं, घूमर और आई वांट टू टॉक, हाउसफुल 5 जैसी फिल्में प्रदर्शित हुयी।</p>
<p><img src="https://images.moneycontrol.com/static-mcnews/2024/07/20240716075352_ab.png" alt="अभिषेक बच्चन शाहरुख खान की फिल्म 'किंग' में खलनायक की भूमिका निभाने के लिए  पूरी तरह तैयार हैं।"></img></p>
<p>अभिषेक बच्चन ने फिल्म 'आई वांट टू टॉक' के लिए अपने करियर का पहला बेस्ट एक्टर फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। अभिषेक इन दिनों फिल्म किंग में काम कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>Trending Today</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 14:52:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>Death Anniversary: निजी जिंदगी में बेहद संवेदनशील इंसान थे मुकेश</title>
                                    <description><![CDATA[मुकेश ने अपने तीन दशक के सिने कैरियर मे 200 से भी ज्यादा फिल्मों के लिये गीत गाये।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/death-anniversary-mukesh-was-a-very-sensitive-person-in-his/article-88666"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/mukesh1.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। दर्द भरे नगमों के बेताज बादशाह मुकेश के गाये गीतों मे जहां संवेदनशीलता दिखाई देती है, वहीं निजी जिंदगी में भी वह बेहद संवेदनशील इंसान थे और दूसरों के दुख.दर्द को अपना समझकर उसे दूर करने का प्रयास करते थे।</p>
<p>इस संबंध में एक वाकया है कि एक बार एक लड़की बीमार हो गई। उसने अपनी मां से कहा कि यदि मुकेश उन्हें कोई गाना गाकर सुनाएं तो वह ठीक हो सकती है। मां ने जवाब दिया कि मुकेश बहुत बड़े गायक हैं। भला उनके पास तुम्हारे लिए कहां समय है। यदि वह आते भी हैं तो इसके लिए काफी पैसे लेंगे। तब उसके डॉक्टर ने मुकेश को उस लडकी की बीमारी के बारे में बताया।</p>
<p>मुकेश तुरंत लड़की से मिलने अस्पताल गए और उसके गाना गाकर सुनाया और इसके लिए उन्होंने कोई पैसा भी नहीं लिया। लड़की को खुश देखकर मुकेश ने कहा कि यह लड़की जितनी खुश है उससे ज्यादा खुशी मुझे मिली है।</p>
<p>मुकेश चंद माथुर का जन्म 22 जुलाई 1923 को दिल्ली में हुआ था। उनके पिता लाला जोरावर चंद माथुर एक इंजीनियर थे और वह चाहते थे कि मुकेश उनके नक्शे कदम पर चलें, लेकिन वह अपने जमाने के प्रसिद्ध गायक अभिनेता कुंदनलाल सहगल के प्रशंसक थे और उन्हीं की तरह गायक अभिनेता बनने का ख्वाब देखा करते थे।मुकेश ने दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद स्कूल छोड़ दिया और दिल्ली लोक निर्माण विभाग में सहायक सर्वेयर की नौकरी कर ली। जहां उन्होंने सात महीने तक काम किया। इसी दौरान अपनी बहन की शादी में गीत गाते समय उनके दूर के रिश्तेदार मशहूर अभिनेता मोतीलाल ने उनकी आवाज सुनी और प्रभावित होकर वह उन्हें 1940 में वह मुंबई ले आए और उन्हें अपने साथ रखकर पंडित जगन्नाथ प्रसाद से संगीत सिखाने का भी प्रबंध किया।</p>
<p>इसी दौरान मुकेश को एक हिन्दी फिल्म निर्दोष (1941) में अभिनेता बनने का मौका मिल गया जिसमें उन्होंने अभिनेता-गायक के रूप में संगीतकार अशोक घोष के निर्देशन में अपना पहला गीत..दिल ही बुझा हुआ हो तो..भी गाया। हालांकि, यह फिल्म टिकट खिड़की पर बुरी तरह से नकार दी गयी। इसके बाद मुकेश ने दुख-सुख, आदाब अर्ज जैसी कुछ और फिल्मों में भी काम किया लेकिन पहचान बनाने में कामयाब नहीं हो सके। मोतीलाल प्रसिद्ध संगीतकार अनिल विश्वास के पास मुकेश को लेकर गये और उनसे अनुरोध किया कि वह अपनी फिल्म में मुकेश से कोई गीत गवाएं। वर्ष 1945 में प्रदर्शित फिल्म 'पहली नजर' में अनिल विश्वास के संगीत निर्देशन में दिल जलता है तो जलने दे..गीत के बाद मुकेश कुछ हद तक अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गये।</p>
<p>मुकेश ने इस गीत को सहगल की शैली में ही गाया था। सहगल ने जब यह गीत सुना तो उन्होंने कहा था..अजीब बात है मुझे याद नहीं आता कि मैंने कभी यह गीत गाया है। इसी गीत को सुनने के बाद सहगल ने मुकेश को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। सहगल की गायकी के अंदाज से प्रभावित रहने के कारण अपनी शुरूआती दौर की फिल्मों में मुकेश सहगल के अंदाज मे ही गीत गाया करते थे लेकिन वर्ष 1948 मे नौशाद के संगीत निर्देशन में फिल्म (अंदाज) के बाद मुकेश ने गायकी का अपना अलग अंदाज बनाया।</p>
<p>मुकेश के दिल में यह ख्वाहिश थी कि वह गायक के साथ साथ अभिनेता के रूप मे भी अपनी पहचान बनाये। बतौर अभिनेता वर्ष 1953 में प्रदर्शित माशूका और वर्ष 1956 में प्रदर्शित फिल्म अनुराग की विफलता के बाद उन्होने पुन: गाने की ओर ध्यान देना शुरू कर दिया ।इसके बाद वर्ष 1958 मे प्रदर्शित फिल्म यहूदी के गाने ये मेरा दीवानापन है की कामयाबी के बाद मुकेश को एक बार फिर से बतौर गायक अपनी पहचान मिली। इसके बाद मुकेश ने एक से बढ़कर एक गीत गाकर श्रोताओ को भाव विभोर कर दिया ।</p>
<p>मुकेश ने अपने तीन दशक के सिने कैरियर मे 200 से भी ज्यादा फिल्मों के लिये गीत गाये। गायक मुकेश को उनके गाये गीतो के लिये चार बार फिल्म फेयर के सर्वश्रेष्ठ पाश्र्वगायक के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा वर्ष 1974 मे प्रदर्शित (रजनी गंधा ( के गाने (कई बार यूहीं देखा) के लिये मुकेश राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये। राजकपूर की फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम के गाने..चंचल निर्मल शीतल की रिकार्डिंग पूरी करने के बाद वह अमरीका में एक कंसर्ट में भाग लेने के लिए चले गए जहां 27 अगस्त 1976 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया । उनके अनन्य मित्र राजकपूर को जब उनकी मौत की खबर मिली तो उनके मुंह से बरबस निकल गया मुकेश के जाने से मेरी आवाज और आत्मा..दोनों चली गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Aug 2024 12:57:14 +0530</pubDate>
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                <title>बालरूम डांसर संदीप सोपारकर ने वैक्स म्यूजियम की खूबसूरती को निहारा, पर्यटकों के साथ  खिंचाई फोटो  </title>
                                    <description><![CDATA[संदीप सोपारकर के साथ चित्रांगदा नाटक की पूरी टीम ने भी वैक्स म्यूजियम का दौरा किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ballroom-dancer-sandeep-soparkar-admired-the-beauty-of-the-wax/article-86803"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(11)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित चित्रांगदा एक सशक्त नारी के मंचन के लिए जयपुर आए ख्याति प्राप्त बालरूम डांसर, कोरियोग्राफर, अभिनेता संदीप सोपारकर ने नाहरगढ़ दुर्ग स्थित जयपुर वैक्स म्यूजियम का दौरा किया। वैक्स के पुतलों को देखकर संदीप ने सराहा और तारीफ करते हुए कहा कि वैक्स म्यूजियम का यही वास्तविक रूपी सेट माहौल अन्य वैक्स म्यूजियम से अलग अनुभव कराता है, बल्कि उनकी दुनिया में ले जाता है।</p>
<p>कांच के टुकड़ों से बने शीशमहल की चकाचौंध देखकर तो संदीप एक अलग ही दुनिया में चले गए और अपने खास बैले डांस वाले अंदाज में झूमने लगे। म्यूजियम में स्थित पर्यटकों के साथ भी संदीप ने उत्साह के साथ फोटो खिंचाई। संदीप सोपारकर के साथ चित्रांगदा नाटक की पूरी टीम ने भी वैक्स म्यूजियम का दौरा किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Aug 2024 16:50:26 +0530</pubDate>
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                <title>शोले के गब्बर से अमजद खान ने मनवाया था अभिनय का लोहा</title>
                                    <description><![CDATA[अपनी अदाकारी से लगभग तीन दशक तक दर्शको का भरपूर मनोरंजन करने वाले लोकप्रिय अभिनेता अमजद खान 27 जुलाई 1992 को इस दुनिया से रूखसत हो गये।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/amjad-khan-had-proved-his-acting-prowess-with-sholays-gabbar/article-85920"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/4111u1rer-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड में अमजद खान का नाम ऐसे अभिनेता के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने खलनायकी के क्षेत्र में अपने अभिनय का लोहा मनवाया।</p>
<p>12 नवंबर 1940 को जन्में अमजद खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनके पिता जयंत फिल्म इंडस्ट्री में खलनायक की भूमिका निभा चुके थे। अमजद खान ने बतौर कलाकार अपने अभिनय जीवन की शुरूआत वर्ष 1957 में प्रदर्शित फिल्म अब दिल्ली दूर नही से की। इस फिल्म में अमजद खान ने बाल कलाकार की भूमिका निभायी। वर्ष 1965 में अपनी होम प्रोडक्शन मे बनने वाली फिल्म पत्थर के सनम के जरिये अमजद खान बतौर अभिनेता अपने करियर की शुरूआत करने वाले थे, लेकिन किसी कारण से फिल्म का निर्माण नहीं हो सका। सत्तर के दशक मे अमजद खान ने मुंबई से अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद बतौर अभिनेता काम करने के लिये फिल्म इंडस्ट्री का रूख किया।</p>
<p>वर्ष 1973 में बतौर अभिनेता उन्होंने फिल्म हिंदुस्तान की कसम से अपने करियर की शुरूआत की, लेकिन इस फिल्म से दर्शकों के बीच वह अपनी पहचान नहीं बना सके। इसी दौरान अमजद खान को थियेटर में अभिनय करते देखकर पटकथा लेखक सलीम खान ने अमजद खान से शोले में गब्बर सिंह के किरदार को निभाने की पेशकश की जिसे अमजद खान ने स्वीकार कर लिया।  </p>
<p>फिल्म शोले के किरदार गब्बर सिंह ने अमजद खान को फिल्म इंडस्ट्री में सशक्त पहचान दिलायी, लेकिन फिल्म के निर्माण के समय गब्बर सिंह की भूमिका के लिये पहले डैनी का नाम प्रस्तावित था। फिल्म शोले के निर्माण के समय गब्बर सिंह वाली भूमिका डैनी को दी गयी थी, लेकिन उन्होंने उस समय धर्मात्मा में काम करने की वजह से शोले में काम करने से लिये इंकार कर दिया। शोले के कहानीकार सलीम खान की सिफारिश पर रमेश सिप्पी ने अमजद खान को गब्बर सिंह का किरदार निभाने का अवसर दिया। जब सलीम खान ने अमजद खान से फिल्म शोले में गब्बर सिंह का किरदार निभाने को कहा तो पहले तो अमजद खान घबरा से गये, लेकिन बाद में उन्होंने इसे एक चैलेंज के रूप में लिया और चंबल के डाकुओं पर बनी किताब अभिशप्त चंबल का बारीकी से अध्य्यन करना शुरू किया। बाद में जब फिल्म शोले प्रदर्शित हुयी तो अमजद खान का निभाया किरदार गब्बर सिंह दर्शको में इस कदर लोकप्रिय हुआ कि लोग गाहे बगाहे उनकी आवाज और चाल ढ़ाल की नकल करने लगे।</p>
<p>बताया जाता है कि जब फिल्म शोले की शूटिंग शुरू हुई तो अमजद खान को मुंबई से बैंगलौर पहुँचना था। वह फ्लाइट लेकर बैंगलौर के निकले।अभी फ्लाइट ने उड़ान भरी ही थी कि पता चला विमान में कुछ तकनीकी खराबी आ गयी हैं। इसके बाद किसी तरह विमान को रास्ते में ही किसी एअरपोर्ट पर उतार लिया गया। कुछ चार-पांच घंटो के बाद विमान की तकनीकी खराबी ठीक कर ली गई। लेकिन यात्रियों ने इसमें यात्रा करने से मना कर दिया। अमजद खान को किसी भी तरह बैंगलौर पहुंचना था। अमजद खान ने विमान में यात्रा का फैसला किया और शूटिंग पर पहुंचे।</p>
<p>फिल्म शोले की सफलता से अमजद खान के सिने कैरियर में जबरदस्त बदलाव आया और वह खलनायकी की दुनिया के बेताज बादशाह बन गये। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नही देखा और अपने दमदार अभिनय से दर्शकों की वाहवाही लूटने लगे। वर्ष 1977 मे प्रदर्शित फिल्म शतरंज के खिलाडी में उन्हें महान निर्देशक सत्यजीत रे के साथ काम करने का मौका मिला। इस फिल्म के जरिये भी उन्होंने दर्शकों का मन मोह लिया। अपने अभिनय मे आई एकरूपता को बदलने और स्वयं को चरित्र अभिनेता के रूप मे भी स्थापित करने के लिये अमजद खान ने अपनी भूमिकाओं में परिवर्तन भी किया। इसी क्रम में वर्ष 1980 मे प्रदर्शित फिरोज खान की सुपरहिट फिल्म कुर्बानी में अमजद खान ने हास्य अभिनय कर दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया।</p>
<p>वर्ष 1981 मे अमजद खान के अभिनय का नया रूप दर्शको के सामने आया। प्रकाश मेहरा की सुपरहिट फिल्म लावारिस में वह अमिताभ बच्चन के पिता की भूमिका निभाने से भी नहीं हिचके। हांलाकि अमजद खान ने फिल्म लावारिस से पहले अमिताभ बच्चन के साथ कई फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभायी थी पर इस फिल्म के जरिये भी अमजद खान दर्शकोें की वाहवाही लूटने में सफल रहे। वर्ष 1981 में प्रदर्शित फिल्म याराना में उन्होंने सुपर स्टार अमिताभ बच्चन के दोस्त की भूमिका निभायी। इस फिल्म में उन पर फिल्माया यह गाना बिशन चाचा कुछ गाओ बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। इसी फिल्म मे अपने दमदार अभिनय के लिये अमजद खान अपने सिने करियर में दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ सह कलाकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये।</p>
<p>इसके पहले भी वर्ष 1979 में उन्हें फिल्म दादा के लिये सर्वश्रेष्ठ सह कलाकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा वर्ष 1985 में फिल्म मां कसम के लिये अमजद खान सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये। वर्ष 1983 में अमजद खान ने फिल्म चोर पुलिस के जरिये निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखा लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से नकार दी गयी। इसके बाद वर्ष 1985 में भी अमजद खान ने फिल्म अमीर आदमी गरीब आदमी का निर्देशन किया लेकिन यहां पर भी उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा।</p>
<p>वर्ष 1986 में एक दुर्घटना के बाद अमजद खान लगभग मौत के मुंह से बाहर निकले थे और इलाज के दौरान दवाइयों के लगातार सेवन से उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आती रही। उनका शरीर लगातार भारी होता गया। नब्बे के दशक में स्वास्थ्य खराब रहने के कारण अमजद खान ने फिल्मों मे काम करना कुछ कम कर दिया। अपने फिल्मी जीवन के आखिरी दौर में वह अपने मित्र अमिताभ बच्चन को लेकर लंबाई चैड़ाई नाम की फिल्म बनाना चाहते थे, लेकिन उनका यह ख्वाब अधूरा ही रह गया। अपनी अदाकारी से लगभग तीन दशक तक दर्शको का भरपूर मनोरंजन करने वाले लोकप्रिय अभिनेता अमजद खान 27 जुलाई 1992 को इस दुनिया से रूखसत हो गये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jul 2024 13:23:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया राजकुमार ने</title>
                                    <description><![CDATA[चार दशक तक दर्शकों के दिल पर राज करने वाले महान अभिनेता राजकुमार 3 जुलाई 1996 को इस दुनिया को अलविदा कह गये।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/rajkumar-ruled-the-hearts-of-the-audience-with-his-powerful/article-83525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। संवाद अदायगी के बेताज बादशाह कुलभूषण पंडित उर्फ राजकुमार का नाम फिल्म जगत की आकाश गंगा में ऐसे धुव्रतारे की तरह है,जिन्होंने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया।</p>
<p>राजकुमार का जन्म पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में आठ अक्तूबर 1926 को एक मध्यम वर्गीय कश्मीरी बाह्मण परिवार में हुआ था। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद राजकुमार मुंबई के माहिम पुलिस स्टेशन में बतौर सब इंस्पेक्टर काम करने लगे। राजकुमार मुंबई के जिस थाने में कार्यरत थे वहां अक्सर फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों का आना-जाना लगा रहता था। एक बार पुलिस स्टेशन में फिल्म निर्माता कुछ जरूरी काम के लिए आए हुए थे और वह राजकुमार के बातचीत करने के अंदाज से काफी प्रभावित हुए। और उन्होंने राजकुमार से अपनी फिल्म 'शाही बाजार' में अभिनेता के रूप में काम करने की पेशकश की। राजकुमार सिपाही की बात सुनकर पहले ही अभिनेता बनने का मन बना चुके थे। इसलिए उन्होंने तुरंत ही अपनी सब इंस्पेक्टर की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और निर्माता की पेशकश स्वीकार कर ली।</p>
<p>शाही बाजार को बनने में काफी समय लग गया और राजकुमार को अपना जीवनयापन करना भी मुश्किल हो गया। इसलिए उन्होंने वर्ष 1952 में प्रदर्शित फिल्म 'रंगीली' में एक छोटी सी भूमिका स्वीकार कर ली। यह फिल्म सिनेमा घरों में कब लगी और कब चली गयी। यह पता ही नहीं चला। इस बीच उनकी फिल्म 'शाही बाजार' भी प्रदर्शित हुई। जो बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी। शाही बाजार की असफलता के बाद राजकुमार के तमाम रिश्तेदार यह कहने लगे कि तुम्हारा चेहरा फिल्म के लिये उपयुक्त नहीं है। और कुछ लोग कहने लगे कि तुम खलनायक बन सकते हो।</p>
<p>वर्ष 1952 से 1957 तक राजकुमार फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते रहे। 'रंगीली' के बाद उन्हें जो भी भूमिका मिली राजकुमार उसे स्वीकार करते चले गए। इस बीच उन्होंने 'अनमोल', 'सहारा', 'अवसर', 'घमंड', 'नीलमणि' और 'कृष्ण सुदामा' जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई। महबूब खान की वर्ष 1957 में प्रदर्शित फिल्म 'मदर इंडिया' में राजकुमार गांव के एक किसान की छोटी सी भूमिका में दिखाई दिए। हालांकि यह फिल्म पूरी तरह अभिनेत्री नर्गिस पर केन्द्रित थी। फिर भी वह अपने अभिनय की छाप छोडऩे में कामयाब रहे। इस फिल्म में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति भी मिली और फिल्म की सफलता के बाद वह अभिनेता के रूप में फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गए।</p>
<p>वर्ष 1959 में प्रदर्शित फिल्म 'पैगाम' में उनके सामने हिन्दी फिल्म जगत के अभिनय सम्राट दिलीप कुमार थे, लेकिन राज कुमार यहां भी अपनी सशक्त भूमिका के जरिये दर्शकों की वाहवाही लूटने में सफल रहे। इसके बाद 'दिल अपना' और 'प्रीत पराई', 'घराना', 'गोदान', 'दिल एक मंदिर' और 'दूज का चांद' जैसी फिल्मों मे मिली कामयाबी के जरिये वह दर्शकों के बीच अपने अभिनय की धाक जमाते हुए ऐसी स्थिति में पहुंच गए जहां वह अपनी भूमिकाएं स्वयं चुन सकते थे। वर्ष 1965 में प्रदर्शित फिल्म 'काजल' की जबरदस्त कामयाबी के बाद राजकुमार ने अभिनेता के रूप में अपनी अलग पहचान बना ली। बी.आर .चोपड़ा की 1965 में प्रदर्शित फिल्म 'वक्त' में अपने लाजवाब अभिनय से वह एक बार फिर से दर्शक का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे। फिल्म में राजकुमार का बोला गया एक संवाद 'चिनाई सेठ, जिनके घर शीशे के बने होते हैं, वो दूसरों के घर पे पत्थर नहीं फेंका करते' या 'चिनाई सेठ ये छुरी बच्चों के खेलने की चीज नहीं, हाथ कट जाये तो खून निकल आता है' दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुए।</p>
<p>'वक्त' की कामयाबी से राजकुमार शोहरत की बुंलदियों पर जा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने 'हमराज', 'नीलकमल', 'मेरे हुजूर', 'हीर रांझा' और 'पाकीजा' में रूमानी भूमिकाएं स्वीकार कीं. जो उनके फिल्मी चरित्र से मेल नहीं खाती थीं। कमाल अमरोही की फिल्म 'पाकीजा' पूरी तरह से मीना कुमारी पर केन्द्रित फिल्म थी। इसके बावजूद राजकुमार ने अपने सशक्त अभिनय के दम पर दर्शकों की वाहवाही लूटी। पाकीजा में उनका एक संवाद 'आपके पांव देखे बहुत हसीन हैं इन्हें जमीन पर मत उतारियेगा, मैले हो जायेगें' इस कदर लोकप्रिय हुआ कि लोग गाहे बगाहे उनके संवाद की नकल करने लगे। वर्ष 1978 में प्रदर्शित फिल्म 'कर्मयोगी' में राज कुमार के अभिनय और विविधता के नए आयाम दर्शकों को देखने को मिले। इस फिल्म में उन्होंने दो अलग-अलग भूमिकाओं में अपने अभिनय की छाप छोड़ी।</p>
<p>अभिनय में एकरूपता से बचने और स्वयं को चरित्र अभिनेता के रूप में भी स्थापित करने के लिए उन्होंने स्वयं को विभिन्न भूमिकाओं में पेश किया। इस क्रम में 1980 में प्रदर्शित फिल्म 'बुलंदी' में वह चरित्र भूमिका निभाने से भी नहीं हिचके। इस फिल्म में भी उन्होंने दर्शकों का मन मोहे रखा। वर्ष 1991 में प्रदर्शित फिल्म 'सौदागर' में राजकुमार के अभिनय के नए आयाम देखने को मिले। सुभाष घई की निर्मित इस फिल्म में राजकुमार 1959 में प्रदर्शित फिल्म 'पैगाम' के बाद दूसरी बार दिलीप कुमार के सामने थे और अभिनय की दुनिया के इन दोनों महारथियों का टकराव देखने लायक था। नब्बे के दशक में राजकुमार ने फिल्मों मे काम करना काफी कम कर दिया। इस दौरान उनकी 'तिरंगा', 'पुलिस और मुजिरम, 'इंसानियत के देवता, बेताज बादशाह, जवाब, गॉड और गन जैसी फिल्में प्रदर्शित हुयीं।</p>
<p>नितांत अकेले रहने वाले राजकुमार ने शायद यह महसूस कर लिया था कि मौत उनके काफी करीब है। इसीलिए अपने पुत्र पुरू राजकुमार को उन्होंने अपने पास बुला लिया और कहा ''देखो मौत और जिंदगी इंसान का निजी मामला होता है। मेरी मौत के बारे में मेरे मित्र चेतन आनंद के अलावा और किसी को नहीं बताना। मेरा अंतिम संस्कार करने के बाद ही फिल्म उद्योग को सूचित करना। 'अपने संजीदा अभिनय से लगभग चार दशक तक दर्शकों के दिल पर राज करने वाले महान अभिनेता राजकुमार 3 जुलाई 1996 को इस दुनिया को अलविदा कह गये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jul 2024 15:17:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>Happy Birthday: 74 वर्ष के हुये मिथुन चक्रवर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 1979 में मिथुन चक्रवर्ती को रविकांत नगाईच की फिल्म सुरक्षा में काम करने का मौका मिला जो उनके सिने करियर की पहली हिट फिल्म साबित हुयी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/happy-birthday-mithun-chakraborty-turns-74/article-81726"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/mithun-chakraborty.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती आज 74 वर्ष के हो गये।</p>
<p>16 जून 1950 को कोलकाता शहर में जन्में मिथुन चक्रवर्ती मूल नाम गौरांग चक्रवर्ती ने स्नातक की शिक्षा कोलकाता के मशहूर स्कॉटिश चर्च से पूरी की। मिथुन चक्रवर्ती अपने जीवन के शुरूआती दौर में वामपंथी विचारधारा से काफी प्रभावित रहने के कारण नक्सलवाद से जुड़े रहे लेकिन अपने भाई की असमय मृत्यु से उन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़ दिया और पुणे फिल्म संस्थान में दाखिला ले लिया। निर्देशक  मृणाल सेन की नजर मिथुन पर पड़ी थी। लड़कियों के साथ फ्लर्ट करना मिथुन का अंदाज मृणाल को पसंद आया और दो साल बाद उन्होंने अपनी फिल्म 'मृगया' के लिए मिथुन को कास्ट कर लिया।</p>
<p>वर्ष 1976 में प्रदर्शित फिल्म मृगया बतौर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती के सिने करियर की पहली फिल्म थी। फिल्म में उन्होंने एक ऐसे संथाली युवक मृगया की भूमिका निभाई जो अंग्रेजी हूकुमत द्वारा अपनी पत्नी के यौन शोषण के विरूद्ध आवाज उठाता है । फिल्म में उन्हें दमदार अभिनय के लिये सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। अवॉर्ड को लेने के लिए दिल्ली जाने के लिए मिथुन के पास पैसे नहीं थे। उन दिनों रेखा दिल्ली में फिल्म की शूटिंग करने जा रही थीं। उन्होंने अपना स्पॉटबॉय बनाकर फ्लाइट में उनका टिकट बुक करवाया और मिथुन को लेकर दिल्ली गई। फिल्म मृगया की सफलता के बावजूद मिथुन चक्रवर्ती को बतौर अभिनेता काम नहीं मिल रहा था। आश्वासन तो सभी देते लेकिन उन्हें काम करने का अवसर कोई नही देता था। इस बीच मिथुन चक्रवर्ती को दो अंजाने फूल खिले है गुलशन गुलशन जैसी कुछ फिल्मों में छोटी सी भूमिका निभाने का मौका मिला लेकिन इन फिल्मों से उन्हें कोई खास फायदा नहीं पहुंचा ।</p>
<p>वर्ष 1979 में मिथुन चक्रवर्ती को रविकांत नगाईच की फिल्म सुरक्षा में काम करने का मौका मिला जो उनके सिने करियर की पहली हिट फिल्म साबित हुयी। मारधाड़ और एक्शन से भरपूर इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती एक जासूस की भूमिका में थे। उनका यह अंदाज सिने प्रेमियों को काफी पसंद आया। बाद में वर्ष 1982 में इस फिल्म का सीक्वल वारदात बनाया गया।</p>
<p>मिथुन चक्रवर्ती की किस्मत का सितारा वर्ष 1982 में प्रदर्शित फिल्म डिस्को डांसर से चमका । नाच गाने से भरपूर इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती ने डिस्को डांसर की भूमिका में दिखाई दिये। बेहतरीन गीत संगीत और अभिनय से सजी बी सुभाष निर्देशित इस फिल्म की जबरदस्त कामयाबी ने अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को स्टार के रूप में स्थापित कर दिया। फिल्म डिस्को डांसर की सफलता के बाद मिथुन चक्रवर्ती की छवि एक डांसिग स्टार के रूप में बन गयी। इस फिल्म के बाद निर्माता निर्देशकों ने अधिकतर फिल्मों में मिथुन चक्रवर्ती की डांसिग अभिनेता की छवि को भुनाया। इन फिल्मों में कसम पैदा करने वाले की डांस डांस जैसी फिल्में शामिल है।</p>
<p>अस्सी के दशक में मिथुन चक्रवर्ती उन निर्माताओं की पहली पसंद बन गये जो कम बजट की पारिवारिक फिल्म बनाते थे । इस दौर में वह फिल्म निर्माताओं के लिये गरीबों का अमिताभ बनकर उभरे और कई सफल फिल्मों में काम करके दर्शको का मनोरंजन करने में सफल रहे । मिथुन को गरीबों का अमिताभ बच्चन कहा जाता था। इस पर रिएक्शन देते हुए मिथुन ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा- यह मेरी अब तक की सबसे बड़ी तारीफ है। अमिताभ सदी के सबसे बड़े स्टार हैं। अमिताभ बड़े बैनर की फिल्में करते थे और मैं छोटी बजट की फिल्में करता था। बजट के हिसाब से दोनों फिल्मों की कमाई हो जाती थी। नब्बे के दशक के आखिरी वर्षों में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से कुछ हद तक किनारा कर लिया और उटी चले गये जहां वह होटल व्यवसाय करने लगे, हालांकि इस दौर में भी उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से अपना नाता पूरी तरह से नही तोड़ा और फिल्मों में अभिनय कर दर्शको का मन मोहते रहे।</p>
<p>अभिनय में एकरूपता से बचने और स्वयं को चरित्र अभिनेता के रूप में भी स्थापित करने के लिये मिथुन चक्रवर्ती ने खुद को विभिन्न भूमिकाओं में पेश किया। इस क्रम में वर्ष 2005 में प्रदर्शित फिल्म एलान में ग्रे शेडस निभाकर अपने सिने करियर की दूसरी पारी शुरु की। वर्ष 2005 में ही मणिरत्नम की फिल्म गुरू में उनके अभिनय का नये आयाम देखने को मिले । मिथुन चक्रवर्ती के सिने करियर पर नजर डाले तो पायेगे वह मल्टी स्टारर फिल्मों का अहम हिस्सा रहे है । जब कभी फिल्म निर्माताओ को ऐसी फिल्मों में अभिनेता की जरूरत होती वह मिथुन चक्रवर्ती को नजर अंदाज नहीं कर पाते । मिथुन चक्रवर्ती को बुद्धदेव दासगुप्ता की बंगाली फिल्म तहादेर कथा के लिए दूसरा नेशनल अवॉर्ड मिला। उन्हें फिल्म स्वामी विवेकानंद के लिए सहायक अभिनेता का नेशनल अवार्ड भी मिला है।</p>
<p>मिथुन चक्रवर्ती ने अपने सिने करियर में सभी नामचीन अभिनेत्रियों के साथ काम किया है लेकिन रूपहले पर्दे पर उनकी जोड़ी रंजीता के साथ खासी पसंद की गयी । इसके अलावे मिथुन चक्रवर्ती की जोड़ी श्रीदेवी, पदमिनी कोल्हापुरी और जीनत अमान के साथ भी पसंद की गयी । मिथुन चक्रवर्ती अपने सिने कैरियर में अब तक दो बार फिल्म फेयर पुरस्कार से नवाजे जा चुके है। मिथुन चक्रवर्ती को को कला के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। मिथुन चक्रवर्ती अपने सिने करियर में 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। मिथुन चक्रवर्ती आज भी जोशो-खरोश के साथ फिल्मों में काम कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Jun 2024 12:43:06 +0530</pubDate>
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                <title>बेहतर कहानी से पेपर लीक जैसे मुद्दों पर नाटक बनने की जरूरत : बेदी</title>
                                    <description><![CDATA[बेदी रवींद्र मंच पर 17वें कोलाज आफ किलकारी चिल्ड्रन्स-टीनेजर्स थिएटर वर्कशॉप के समापन समारोह में रूबरू हो रहे थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-is-a-need-to-make-drama-on-issues-like/article-80975"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/rvindra-manch.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बॉलीवुड एक्टर राकेश बेदी ने कहा कि ओटीटी को कहां-कहां सेंसर करेंगे आप? बडे पर्दें पर कई अटैक हुए और लांछन लगे। जब टेलीविजन आया था तो लोगों ने कहा था कि बडे पर्दो खत्म हो जाएंगे। मेरे लिए तो फिल्में, सीरियल और थिएटर सब समान हैं और मैं किसी एक का चयन नहीं कर सकता हूं। बेदी ने यह बात रविवार को रवींद्र मंच पर मीडिया से रूबरू होने के दौरान कही। इस दौरान उन्होंने कई समसामायिक मुद्दों पर बात करते हुए अपनी जर्नी शेयर की।</p>
<p><strong>ओटीटी टैलेंट दिखाने का जरिया</strong><br />बेदी ने थिएटर के बारे में कहा कि जो थिएटर करते हैं वे करते ही हैं। कुछ और आ जाने से उनको ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। बात कि जाए ओटीटी की तो वह भी एक चैनल है पैसा कमाने या टैलेंट दिखाने का। फिर भी यदि आप थिएटर के लिए पेशनेट हैं तो आप वो करोगे ही। </p>
<p><strong>थिएटर नहीं लेता ज्यादा समय</strong><br />बेदी ने थिएटर के बारे में कहा कि ये भ्रम है कि थिएटर ज्यादा समय मांगता है। ऐसा कुछ भी नहीं है। आप एक प्ले 15 से 20 दिन में तैयार कर लेते हैं और फिर सिर्फ  एक शाम आपसे थिएटर मांगता है जब आप उसे प्ले करते हैं। मैंने भी बहुत प्ले लिखे और डायरेक्ट भी किए हैं। देखा जाए तो थिएटर आपको लाइव रखता है। इससे आदमी के रिएक्शन शार्प रहते हैं। </p>
<p><strong>सामाजिक मुद्दों पर नाटक होने चाहिए</strong><br />पेपर लीक पर नाटक बनने की जरूरत के सवाल पर उन्होंने कहा कि हां ऐसे नाटक बनने की जरूरत है। नाटक समाज का दर्पण हैं और एक-दूसरे के प्रतिबिंब हैं। उन्होंने अपनी पहली चॉइस के बारे में कहा कि फिल्म, थिएटर और सीरीयल्स में से किसी एक को चुनने का मतलब है कि तीन बच्चों में से किसी एक को चुनना। मेरे लिए सब समान हैं और सबके लिए समय-समय पर काम करता हूं। मूवी, थिएटर अ‍ैर सीरियल सब अपनी-अपनी जगह पर हैं। कुछ हो सकते हैं जो सिनेमा और ओटीटी के बाद थिएटर को अवॉइड करते हो मगर मैं ऐसा नहीं करता।</p>
<p><strong>यहां किया पार्टिसिपेट</strong><br />बेदी रवींद्र मंच पर 17वें कोलाज आफ किलकारी चिल्ड्रन्स-टीनेजर्स थिएटर वर्कशॉप के समापन समारोह में रूबरू हो रहे थे। कला संस्कृति विभाग राजस्थान, ललित कला अकादमी, क्यूरियो चिल्ड्रंस थिएटर, रवींद्र मंच और हिमालयीय यूनिवर्सिटी उत्तराखंड की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने विभिन्न एक्टिविटी की। लगभग 90 बच्चों ने रवींद्र मंच पर आउटडोर और मुख्य मंच पर क्रिएटिव नाटय प्रस्तुतियां दीं।</p>
<p><strong>तीन नाटकों का मंचन </strong><br />समापन समारोह में तीन नाटकों का मंचन हुआ। पहला कॉमेडी ड्रामा भूतों की धमाचौकड़ी रहा। इस नाटक की कहानी एक छोटे से गांव के एक किसान के ईद-गिर्द घूमती है। दूसरे नाटक मेहनत का इत्र और तीसरे अक्ल का जादू नाटक में भी बच्चों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से लोगों की वाहवाही लूटी। कार्यक्रम का संचालन प्रियदर्शनी मिश्रा और गगन मिश्रा ने किया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jun 2024 09:53:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>60 की उम्र में एक्टर आशीष विद्यार्थी ने की रुपाली बरुआ से शादी</title>
                                    <description><![CDATA[आशीष और रुपाली की यह शादी कोलकाता में ही रजिस्टर हुई। दोनों की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/actor-ashish-vidyarti-married-rupali-baruah-at-the-age-of/article-46675"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/ashish112.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। हिंदी सिनेमा में विलेन के किरदार के लिए प्रसिद्ध एक्टर आशीष विद्यार्थी ने 60 साल की उम्र में शादी कर ली है। आशीष ने यह शादी असम की रहने वाली रुपाली बरुआ से की है। रुपाली असम की रहने वाली हैं, और कोलकाता में एक फैशन लेबल से जुड़ी हुईं हैं। आशीष की यह दूसरी शादी है। आशीष और रुपाली की यह शादी कोलकाता में ही रजिस्टर हुई। दोनों की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। </p>
<p>इससे पहले आशीष ने एक्ट्रेस राजोशी विद्यार्थी से शादी की थी। राजोशी सिंगर एक्टर और थियेटर आर्टिस्ट हैं। आशीष विद्यार्थी 11 भाषाओं में 200 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं। उन्हें वालीवुड में विलेन के तौर पर पहचान मिली। उन्होंने तमिल, कन्नड़, मलयालम और अंग्रेजी भाषा की फिल्मों में भी काम किया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 May 2023 16:02:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिग बॉस के बाद एक बार फिर सलमान के साथ नजर आएगी पलक तिवारी, पंजाबी सिंगर और अभिनेता जस्सी गिल के अपोजिट देंगी दिखाई </title>
                                    <description><![CDATA[ बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की आने वाली फिल्म भाईजान में श्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी काम करती नजर आ सकती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/after-bigg-boss--palak-tiwari-will-once-again-be-seen-with-salman--will-be-seen-opposite-punjabi-singer-and-actor-jassi-gill/article-11893"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/palak-tiwari--salman-khan.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। फिल्म 'कभी ईद कभी दिवाली' का टाइटल बदलकर 'भाईजान' रखने  के बाद एक बार फिर यह मूवी स्क्रिन पर आने से पहले सोशल मीडिया पर चर्चाओं में है। दरअसल इस बार चर्चा पलक तिवारी को लेकर है। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की आने वाली फिल्म भाईजान में श्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी काम करती नजर आ सकती हैं।<br /><br />दरअसल इससे पहले सलमान खान इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म 'भाईजान' को लेकर चर्चा में रहे हैं। हाल ही में मेकर्स ने फिल्म का टाइटल 'कभी ईद कभी दिवाली' से बदलकर 'भाईजान' रखा है। हमारे खास सूत्रों की माने तो सलमान की इस फिल्म में श्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी की एंट्री पक्की हो गई है। इस फिल्म में पलक पंजाबी सिंगर और अभिनेता जस्सी गिल के अपोजिट दिखाई देंगी। सलमान ने खुद ही पलक को इस फिल्म के लिए कास्ट किया है। फिल्म में पलक और जस्सी का एक गाना भी होगा।<br /><br />फरहाद समजी के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में सलमान खान, शहनाज गिल, पलक तिवारी और जस्सी गिल के अलावा वेंकटेश, पूजा हेगड़े, राघव जुयाल और सिद्धार्थ निगम भी लीड रोल में दिखाई देंगे। पलक तिवारी ने सलमान खान और आयुष शर्मा स्टारर 'अंतिम: द फाइनल ट्रुथ' में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया था। इसके अलावा पलक को सलमान खान के रिएलिटी शो 'बिग बॉस 15' में भी स्टेज शेयर करते हुए देखा गया था।<br /><br /> </p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 13:42:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> ड्रीमगर्ल के सीक्वल में  आयुष्मान खुराना फिर मचाएंगे धमाल</title>
                                    <description><![CDATA[फिल्म के निर्देशक राज शांडिल्य ने फिल्म ड्रीमगर्ल के दूसरे पार्ट पर काम शुरू कर दिया है। राज शांडिल्य इन दिनों नुसरत भरुचा की फिल्म'जनहित में जारी के प्रमोशन में बिजी हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/-bollywood---actor--ayushmann-khurrana--dreamgirl-sequel/article-10899"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/dream-girl.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p></p>
<p>मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना फिल्म ड्रीमगर्ल के सीक्वल में काम करते नजर आ सकते हैं। आयुष्मान खुराना ने वर्ष 2019 में प्रदर्शित सुपरहिट फिल्म 'ड्रीम गर्ल' में काम किया था। इस फिल्म के निर्देशक राज शांडिल्य ने फिल्म ड्रीमगर्ल के दूसरे पार्ट पर काम शुरू कर दिया है। राज शांडिल्य इन दिनों नुसरत भरुचा की फिल्म 'जनहित में जारी' के प्रमोशन में बिजी हैं।<br /><br />राज शांडिल्य ने बताया, 'मैं फिल्म ड्रीमगर्ल  की स्क्रिप्ट लिख रहा हूं और इसमें थोड़ा समय लग सकता है। गौरतलब है कि ड्रीम गर्ल ने करीब 200 करोड़ रुपये की कमाई की थी। यह फिल्म एक ऐसे युवक की कहानी थी जो एक महिला होने का दिखावा करता है जबकि वह डायल-ए-फ्रेंड हॉटलाइन पर पुरुषों से बात करता है।''  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/-bollywood---actor--ayushmann-khurrana--dreamgirl-sequel/article-10899</link>
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                <pubDate>Tue, 31 May 2022 16:30:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> नवलगढ़ में प्रीतम प्यारे आमिर खान</title>
                                    <description><![CDATA[शूटिंग पर जाने से पहले एक होटल के पास से मुस्लिम भाइयों को ईद की मुबारकवाद दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhunjhunu/jhunjhunu--actor-aamir-khan-in-nawalgarh-for-the-shooting-of-the-film-pritam-pyare/article-9114"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/aamir-khan.jpg" alt=""></a><br /><p>नवलगढ़। नवलगढ़ में चल रही शूटिंग प्रीतम प्यारे के दृश्यों के लिए सीने अभिनेता आमिर खान नवलगढ़ आए हुए है। मंगलवार को चैलासी रोड़ पर स्थित न्यारिया मस्जिद में ईद की नमाज अदा की। वहीं शूटिंग पर जाने से पहले एक होटल के पास से मुस्लिम भाइयों को ईद की मुबारकवाद दी।<br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>झुंझुनूं</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 May 2022 15:41:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>100 दिनों के शेड्यूल वाली फिल्म में काम नहीं करता, खिलाड़ी कुमार के बयान की अहम वजह जानने के लिए पढ़े यह खबर</title>
                                    <description><![CDATA[ बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार का कहना है कि वह 100 दिनों के शेड्यूल वाली फिल्म में काम नहीं करते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/bollywood-actor-akshay-kumar-says-he-doesn-t-work-in-a-film-with-a-schedule-of-100-days/article-6036"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/akshay-kumar.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार का कहना है कि वह 100 दिनों के शेड्यूल वाली फिल्म में काम नहीं करते हैं।  अक्षय हर साल कई फिल्मों में काम करते हैं। अक्षय कुमार ने बताया है कि वह ऐसी फिल्में करते हैं, जिसका बजट सीमित होता है और वह तय शेड्यूल में पूरी हो जाती है। अक्षय कुमार ने कहा, ''बजट मेरे लिए सबसे बड़ा पहलू रहता है। मैं 'बजट हिट तो फिल्म हिट' में विश्वास रखता हूं। मैंने कभी पैसा बर्बाद नहीं किया और सभी के समय का सम्मान किया है। मैं अपने को-एक्टर और क्रू के समय का सम्मान करता हूं, जिससे समय मुझे वापस सम्मान दे सके।</p>
<p>अक्षय कुमार ने कहा, ''कोई भी किसी भी फिल्म को 50 दिनों से ज्यादा का वक्त नहीं दे सकता और यदि आप इस समय में फिल्म की शूङ्क्षटग करते हैं, तो आपका बजट हमेशा कंट्रोल में रहेगा। मैं ऐसी फिल्मों में काम नहीं करूंगा, जिसमें 100 दिनों से ज्यादा की शूङ्क्षटग की जरूरत हो। ''<br /><br />अक्षय कुमार जल्द ही 'पृथ्वीराज','रक्षा बंधन','राम सेतु' और 'ओह माय गॉड 2' में भी नजर आएंगे। अक्षय 18 मार्च को रिलीज होने वाली फिल्म'बच्चन पांडे' के प्रमोशन में व्यस्त हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Mar 2022 17:48:57 +0530</pubDate>
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