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                <title>ravana - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सत्य की विजय : राम को प्रणाम कर रावण ने त्यागे प्राण</title>
                                    <description><![CDATA[ विजयादशमी के दिन रावण के वध के साथ अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/victory-of-truth-ravana-sacrificed-his-life-after-paying-obeisance/article-92950"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(5)11.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर कला केन्द्र की ओर से आयोजित पांच दिवसीय रामलीला महोत्सव शनिवार को संपन्न हुआ। अंतिम दिन का मंचन कई मायनों में खास रहा। रोष-होश-जोश राम भावना का कोष राम, प्रेम परितोष रामए राम गुणधाम हैं। </p>
<p>प्रभु राम के गुणों के बखान के साथ प्रस्तुति की शुरुआत हुई। कुंभकरण को जगाने के दौरान जहां कलाकारों ने दर्शकों को गुदगुदाया वहीं कुंभकरण व रावण की वार्ता ने नीतिगत सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। विभीषण के संवादों के जरिए धर्म की उचित व्याख्या का प्रयास किया गया, वहीं कुंभकरण ने भाइयों के बीच संबंधों का वर्णन किया। भीषण युद्ध के बाद कुंभकरण की मौत लंका में कोहराम मचा देती है।</p>
<p>लक्ष्मण और इंद्रजीत के बीच युद्ध के दौरान इंद्रजीत के दिव्य रथ को बड़ी बखूबी दिखाया गया। अंतत: तलवारों के टकराव से निकली चिंगारियों ने इंद्रजीत को लील लिया। राम और रावण का युद्ध देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे। विजयादशमी के दिन रावण के वध के साथ अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया गया।</p>
<p>रावण ने राम नाम लेकर अपने प्राण त्यागे। राम सिया के मिलन पर सभी के आंसु छलक गए। राम के राज्याभिषेक के साथ लोक नृत्य व शास्त्रीय नृत्य का अनूठा संगम भी देखने को मिला। पारंपरिक घूमर नृत्य, फिर भरतनाट्यम और कथक से महफिल सजी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Oct 2024 13:27:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रावण दहन का वंशज मनाते शोक, स्नान कर बदलते हैं जनेऊ</title>
                                    <description><![CDATA[रावण की पत्नी मंदोदरी जोधपुर के मंडोर की ही रहने वाली थी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/descendants-of-ravana-dahan-celebrate-by-taking-mourning-bath-and/article-92941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size16.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर के मंडोर से रावण का पुराना रिश्ता रहा है। रावण की पत्नी मंदोदरी के पीहर के रूप में विख्यात मंडोर को रावण के ससुराल के रूप में जाना जाता है। मंडोर में आज भी बकायदा रावण और मंदोदरी की चंवरी मौजूद है। यही नहीं जोधपुर में रहने वाले रावण के वंशजों ने जोधपुर में रावण और मंदोदरी का मंदिर भी बनाया है जिन्हें रावण के वंशज आज भी पूजते हैं।</p>
<p>यही वजह है कि हर साल की तरह विजयादशमी के दिन रावण के वंशज दशहरे के कार्यक्रम में शरीक नहीं हुए और हमेशा की तरह इस बार भी शोक मनाया। रावण दहन के बाद में स्नान करके जनेऊ भी बदले। शायद ही किसी को पता होगा कि जोधपुर में रावण का एक ऐसा मंदिर भी है जहां बकायदा रावण के वंशज उनकी पूजा अर्चना करते हैं, यहां तक की विजयादशमी के दिन जब रावण का दहन होता है तो वह रावण दहन नहीं देखते बल्कि रावण दहन के बाद उसका शोक मनाते हैं।</p>
<p>जहां एक ओर पूरा देश असत्य पर सत्य की जीत के लिए खुशी मना रहा था और एक दूसरे को बधाइयां दे रहा था, वहीं यहां कुछ लोग शोक में डूब जाते हैं। ये कोई और नहीं बल्कि रावण के वंशज हैं जो विजयदशमी के दिन रावण दहन के बाद पहले स्नान करते हैं फिर रावण मंदिर में आरती और पूजा अर्चना करते हैं। सबसे बड़ी बात ये हैं कि ये लोग रावण के साथ-साथ भगवान राम की भी पूजा करते हैं। हालांकि इनकी श्रद्धा रावण के ही प्रति है। उसी के तहत रावण के वंशजों ने रावण दहन के बाद स्नान इत्यादि के बाद जनेऊ बदलने के बाद पूजा अर्चना भी की। </p>
<p><strong>रावण की पत्नी मंदोदरी थी जोधपुर की रहने वाली</strong><br />रावण की पत्नी मंदोदरी जोधपुर के मंडोर की ही रहने वाली थी। जोधपुर के मेहरानगढ़ किले के पास चांदपोल मार्ग पर रावण के वंशजों की ओर से स्थापित रावण मंदिर में उनके वंशज नियमित रूप से पूजा अर्चना करते हैं। रावण की आराधना करना पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का नियमित रूप से मंत्रोच्चारण के साथ पूजा करना उनके जीवन का एक हिस्सा हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Oct 2024 12:14:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>राहुल को रावण की संज्ञा देने पर मानहानि परिवाद पेश</title>
                                    <description><![CDATA[ कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को रावण की संज्ञा देते हुए भाजपा ट्विटर हैंडल पर उनकी सात सिर वाली फोटो पोस्ट करने के खिलाफ महानगर मजिस्ट्रेट क्रम-11 महानगर प्रथम में मानहानि परिवाद पेश किया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/defamation-complaint-filed-against-rahul-for-calling-him-ravana/article-58916"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/rahul_gandhi_.jpg1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को रावण की संज्ञा देते हुए भाजपा ट्विटर हैंडल पर उनकी सात सिर वाली फोटो पोस्ट करने के खिलाफ महानगर मजिस्ट्रेट क्रम-11 महानगर प्रथम में मानहानि परिवाद पेश किया गया है। परिवाद को कार्यालय रिपोर्ट के लिए नौ अक्टूबर की तारीख दी गई है। जसवंत गुर्जर की ओर से पेश इस परिवाद में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और आईटी सेल के नेशनल हैड अमित मालवीय को आरोपी बनाया गया है। परिवाद में अधिवक्ता विपुल शर्मा ने कहा कि सनातन धर्म का अपमान करते हुए भाजपा के ट्विटर हैंडल पर पोस्ट की गई है, जिसमें राहुल गांधी की सात सिर वाली फोटो के साथ ही नए युग का रावण बताया गया है। परिवाद में कहा गया कि इससे कांग्रेस पार्टी का भी अपमान हुआ है। इस ट्वीट से भ्रमित होकर परिवादी के परिचित लोगों ने उससे इन कथनों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा कि क्या वह भी देश विरोधी पार्टी का सदस्य है। इस ट्वीट से परिवादी की मानहानि हुई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Oct 2023 10:24:48 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रावण से भी भारी कोरोना : प्रभु राम की बाट जोह रहे हैं अब रामलीला मंच</title>
                                    <description><![CDATA[सूने मंच बिना यशगान, कौनसी दिशा में गए मेरे भगवान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A3-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE---%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A5%81-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9F-%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%B9-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9A/article-1600"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/ravan-ramleela-maidan.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। बोलो ए जमीं, बोलो आसमान, कोई तो जवाब दो खोलो ए जुबान, कौनसी दिशा में गए मेरे भगवान... राष्ट्र कवि प्रदीप की यह गीत रचना कोरोना के कारण सूने पड़े रामलीला मंचोंं पर सटीक बैठती है। वाकई कोरोना अब रावण से भी भारी हो गया है, जिसके कारण त्योहारों के साथ अब प्राचीनकाल से चली आ रही रामलीला जैसी परंपराओं पर भी विराम लग गया है। जयपुर में आजादी के बाद से ही भगवान राम की लीलाएं अनवरत रूप से मंचित होती आई हैं, लेकिन विगत दो साल से ये कोरोना की भेंट चढ़ी हुई हैं। बिना भगवान राम के यशगान के रामलीला मैदान सूने पड़े हैं। यूं देश आजाद होने के साथ ही जयपुर में कई जगह रामलीलाओं का मंचन होने लगा था, लेकिन सबसे बड़ा मंच न्यू गेट स्थित रामलीला मैदान था। यहां रामलीला की शुरुआत आज से करीब 70 साल पहले सोहनमल हरिश्चन्द्र ओसवाल जैन परिवार ने की थी। वे भगवान राम के अनन्य भक्त थे। उनकी इस परम्परा को उनके पौत्र सुरेन्द्र गोलछा आज भी निभा रहे हैं, लेकिन कोरोना गाइडलाइन के चलते पिछले दो साल से रामलीला मंचन नहीं हुआ। इस आयोजन के लिए उन्होंने गोलछा चेरिटेबल ट्रस्ट के बैनर तले रामलीला महोत्सव समिति का गठन भी कर रखा है। इसके महामंत्री प्रवीण बड़े भैया का कहना है कि न्यू गेट रामलीला मैदान में रामलीला के लिए मथुरा-वृंदावन से मंडलियां बुलाई जाती हैं। करीब दो दशक पहले तक इस रामलीला के प्रति दर्शकों का काफी क्रेज हुआ करता था। इसे देखने शहर के दूरदराज इलाकों से लोग परिवार समेत आते थे। दिल्ली की तरह जयपुर में भी रामलीला मैदान है।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff00ff;"><strong>महिला कलाकार भी आने लगीं</strong></span></span><br /> आदर्श नगर राम मंदिर भी दूसरी बड़ी रामलीला के रूप में जाना जाता है। यहां भी रामलीला करीब छह दशक से हो रही है। इस मंच पर जयपुर के ही कलाकार रामलीला के विभिन्न पात्रों को निभाते थे, लेकिन सबकी व्यस्तताएं बढ़ने के कारण यहां भी बाहर से मंडलियां बुलाई जाने लगी। आदर्श नगर राम मंदिर प्रन्यास के सचिव इन्द्र कुमार चड्ढ़ा ने बताया कि दो साल से कोरोना के चलते रामलीला मंचन नहीं हो रहा है। शहर में होने वाली अन्य लीलाओं में महिला पात्रों को पुुरुष ही निभाते हैं, लेकिन प्रन्यास ने समय के साथ इसमें बदलाव कर महिला कलाकारों को भी बुलाना प्रारंभ किया है, जिनके अभिनय को काफी सराहा गया।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff00ff;"><strong>यहां भी होती हैं रामलीलाएं </strong></span></span><br /> जवाहर नगर रामलीला समिति की ओर से भी पिछले चार दशक से जवाहर नगर रामलीला मैदान में रामलीला का मंचन किया जा रहा है। समिति के महासचिव गोपी किशन माछर ने बताया कि इस मंच पर भी मथुरा आदि से कलाकार बुलाए जाते हैं, लेकिन इस बार रामलीला नहीं की जा रही है। इसी तरह शास्त्री नगर हाऊसिंग बोर्ड, अम्बाबाड़ी नया खेड़ा और सांगानेर सहित विभिन्न क्षेत्रों में रामलीलाएं होती रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Oct 2021 12:43:07 +0530</pubDate>
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                <title>नहीं रहें रावण : मशहूर टीवी अभिनेता अरविंद त्रिवेदी का निधन</title>
                                    <description><![CDATA[टेलीविजन अभिनेता और धारावाहिक रामायण में रावण का किरदार निभाकर मशहूर हुए अरविंद त्रिवेदी का मंगलवार की रात निधन हो गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A3---%E0%A4%AE%E0%A4%B6%E0%A4%B9%E0%A5%82%E0%A4%B0-%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6-%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%A8/article-1455"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/ravan1.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। टेलीविजन अभिनेता और धारावाहिक रामायण में रावण का किरदार निभाकर मशहूर हुए अरविंद त्रिवेदी का मंगलवार की रात निधन हो गया। वह 82 साल के थे। वह पिछले कई सालों से बीमार थे और कुछ महीनों पहले उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी। कल देर रात उन्होंने अंतिम सांसे ली।</p>
<p><br /> उनका अंतिम संस्कार मुंबई में बुधवार को कांदिवली वेस्ट में स्थित दहानुकरवाड़ी श्मशान घाट में किया जाएगा। रामायण धारावाहिक में लक्ष्मण के किरदार को निभाने वाले अभिनेता सुनील लहरी ने इंस्टाग्राम पर अरविंद की एक तस्वीर को साझा करते हुए लिखा, “ यह बेहद दुख की बात है कि अरविंद भाई अब नहीं रहे। उनकी आत्मा को शांति मिलें। वह मेरे लिए पिता समान थे।”</p>
<p>राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ट्वीट कर लिखा है कि लोकप्रिय धारावाहिक 'रामायण' में अपने शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ने वाले प्रसिद्ध अभिनेता अरविंद त्रिवेदी जी के निधन का दुखद समाचार मिला। समाजसेवा एवं अध्यात्म क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें सदैव याद किया जाता रहेगा। ॐ शान्ति!</p>
<p><br /> उल्लेखनिय है कि त्रिवेदी बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये थे और 1991 से लेकर 1996 तक साबरकांठा से सांसद रहे। <br /> <br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Oct 2021 12:18:20 +0530</pubDate>
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