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                <title>common man - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>हिमाचल में पेट्रोल-डीजल महंगा होने पर अनुराग ठाकुर ने साधा कांग्रेस पर निशाना: बोले-राहुल और प्रियंका का “खटाखट मॉडल” अब “खटारा मॉडल” बन गया</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर ₹5 की बढ़ोतरी की तीखी आलोचना की है। उन्होंने राहुल गांधी के "खटाखट मॉडल" को "खटारा मॉडल" बताते हुए कहा कि इससे जनता पर ₹1000 करोड़ का वार्षिक बोझ पड़ेगा। भाजपा ने इसे एक जनविरोधी फैसला करार देते हुए कड़े विरोध की चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/when-petrol-and-diesel-became-expensive-in-himachal-anurag-thakur/article-147715"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/anurag-takur.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर जोरदार हमला बोला है। इसी कड़ी में संसद भवन परिसर में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का “खटाखट मॉडल” अब “खटारा मॉडल” बन गया है। इससे पहले भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी सोशल मीडिया एक्स पर वीडियो जारी करके हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार हमला बोला था।</p>
<p>अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा पेट्रोल की कीमत पर प्रति लीटर पांच रुपये की बढ़ोतरी से आम आदमी पर सीधा असर पड़ेगा और इससे जनता की जेब पर सालाना 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बोझ बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पहले ही दो बार में 10 रुपए से अधिक वैट बढ़ाया गया था और अब पांच रुपये का सेस जोड़कर कुल 15 रुपये का अतिरिक्त भार जनता पर डाला गया है। अनुराग ठाकुर ने इसे जनविरोधी फैसला बताते हुए कांग्रेस सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 16:02:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भजनलाल शर्मा ने ग्रामीणों के साथ उठाया कुल्लड़ में चाय का लुत्फ : लोगों से पूछा हालचाल, क्षेत्र की समस्याओं के बारे में ली जानकारी </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भांकरोटा से लौटते समय अचानक चाय की थड़ी पर रुककर ग्रामीणों को चौंका दिया। उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ कुल्हड़ में चाय पी और उनकी समस्याओं को सुना। सड़क, बिजली और पानी जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए, जिससे उनकी सहजता और सादगी की चर्चा हर ओर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-bhajanlal-sharma-enjoyed-drinking-tea-in-kullad-with/article-145169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cm-bhajanlal.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भांकरोटा से लौटते समय अचानक एक चाय की दुकान पर रुककर ग्रामीणों के साथ कुल्लड़ में चाय पी। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर ग्रामीण उत्साहित नजर आए। इस दौरान उन्होंने लोगों से हालचाल पूछा और क्षेत्र की समस्याओं के बारे में जानकारी ली। ग्रामीणों ने सड़क, पानी और बिजली से जुड़े मुद्दे उनके समक्ष रखे।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने का आश्वासन दिया। सहज और सादगीपूर्ण अंदाज में चाय पीते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 13:06:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>मोनोपॉली और डुओपॉली से आम आदमी को फायदा? </title>
                                    <description><![CDATA[कंपनियों की मनमानी रोकने का एक ही रास्ता—कॉम्पिटिशन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/do-monopolies-and-duopolies-benefit-the-common-man/article-136078"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। आमतौर पर ये देखा गया है कि जिस भी फील्ड में मोनोपॉली या डुओपॉली होती है, वहाँ समय के साथ आम आदमी को नुकसान उठाना पड़ता है। किसी भी उद्योग में एंट्री और एग्जिट बैरियर कम होने चाहिए, ताकि कोई भी सक्षम व्यवसायी आसानी से उस क्षेत्र में प्रवेश कर सके या आवश्यकता पड़ने पर बाहर निकल सके।मोनोपॉली और डुओपॉली वाली स्थिति में ये बैरियर काफी ऊँचे होते हैं, जिन्हें हर उद्यमी पार नहीं कर पाता। नतीजा यह होता है कि पूरी पब्लिक कुछ चुनिंदा कंपनियों पर निर्भर हो जाती है, और वही कंपनियाँ बाजार की दिशा और नियम तय करने लगती हैं।इसीलिए जरूरी है कि सरकारी नीतियाँ ऐसी हों जो किसी भी क्षेत्र में नए व्यवसायों के प्रवेश को सरल बनाएँ। जब किसी उद्योग में कंपनियों की संख्या बढ़ती है, तो उपभोक्ताओं को विकल्प मिलते हैं, और सख्त प्रतिस्पर्धा के कारण कीमतें, गुणवत्ता और सेवाएँ बेहतर होती हैं। इस तरह अंत में सबसे बड़ा लाभ आम जनता को ही मिलता है। सवाल यह है कि क्या मोनोपॉली या डुओपॉली से आम आदमी को कोई फायदा होता है। साथ ही, एंट्री और एग्जिट बैरियर कम करने से हेल्दी कॉम्पिटिशन बढ़ेगा और आम व्यक्ति को कितना लाभ मिलेगा? इस पर अर्थशास्त्रियों और जनता की क्या राय है इसे जाना ।</p>
<p><strong>कम बैरियर, ज्यादा अवसर</strong><br />बिजनेस या किसी भी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का होना अत्यंत आवश्यक है। यदि प्रतिस्पर्धा नहीं होगी, तो कोई भी व्यवसाय एक समय के बाद ठहर जाएगा या बंद हो सकता है। प्रतिस्पर्धा हमेशा दो प्रकार से लाभ पहुँचाती है—पहला, यह आगे बढ़ने और बेहतर करने की प्रेरणा देती है; दूसरा, यह इनोवेशन को बढ़ावा देती है, जिससे ग्राहकों को बेहतर उत्पाद और सेवाएँ मिलती हैं। केवल सार्वजनिक या निजी व्यवसायों में मोनोपॉली होना उचित नहीं है। किसी भी सेक्टर में प्रतिस्पर्धियों का होना जरूरी है। डुओपॉली व्यवस्था में गुणवत्ता बेहतर होती है और ग्राहकों को अधिक एवं अच्छे विकल्प मिलते हैं। कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा यह सुनिश्चित करती है कि बेहतर उत्पाद सही मूल्य पर उपभोक्ताओं तक पहुँचें। इसलिए प्रतिस्पर्धा केवल कंपनियों के लिए ही नहीं, बल्कि जनता के हित में भी आवश्यक है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यही है कि उद्योगों में प्रवेश के बैरियर कम से कम हों, ताकि अधिक से अधिक उद्योग स्थापित हो सकें। जब बैरियर कम होंगे तो इनपुट कॉस्ट घटेगी, और जब इनपुट कॉस्ट कम होगी तो प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा।<br /><strong>- हरिमोहन शर्मा, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, कोटा</strong></p>
<p><strong> प्रतिस्पर्धा से रेट संतुलन</strong><br />मोनोपॉली कस्टमर के लिए लगभग हमेशा नुकसानदायक होती है, क्योंकि एक ही कंपनी रेट और प्रॉफिट खुद तय करती है और सरकार भी हर जगह हस्तक्षेप नहीं कर सकती। सरकार आमतौर पर केवल उन्हीं सेक्टर्स में प्राइस कंट्रोल करती है जो सीधे पब्लिक से जुड़े होते हैं।डुओपॉली में कस्टमर को कुछ हद तक फायदा मिल सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा प्योर कॉम्पटीशन में होता है। जब एक ही मार्केट में कई कम्पटीटर्स होते हैं, तो कम्पटीशन का पूरा लाभ कस्टमर तक ट्रांसफर होता है, रेट कम होते हैं और क्वालिटी बेहतर होती है। कस्टमर के पास जितने ज्यादा विकल्प होंगे, उतना ही बेहतर संतुलन रेट और क्वालिटी में मिलेगा। हालाँकि कुछ सेक्टर्स में एंट्री बैरियर जरूरी होते हैं। अगर बिना किसी कंट्रोल के सबको एंट्री दे दी जाए, तो क्वालिटी से समझौता करना पड़ सकता है और आगे चलकर कस्टमर को नुकसान होता है। इसलिए एंट्री और एग्जिट बैरियर फ्लेक्सिबल होने चाहिए, लेकिन सरकार या संबंधित अथॉरिटी द्वारा स्पष्ट पॉलिसी के तहत नियंत्रित होने चाहिए, ताकि वही लोग इस क्षेत्र में आएँ जो तय किए गए मानदंड पूरे करते हों।<br /><strong>- विष्णु गर्ग, सीए</strong></p>
<p><strong>जहाँ गुणवत्ता, वहीं ग्राहक</strong><br />आज के समय में मोनोपॉली काफी हद तक कम हो गई है। अब ऐसे बहुत कम क्षेत्र रह गए हैं जहाँ केवल एक या दो कंपनियाँ ही उत्पाद बनाती हों। अधिकांश सेक्टरों में कई कंपनियाँ सक्रिय हैं और सभी अपने-अपने उत्पाद बाजार में ला रही हैं।डुओपॉली में ग्राहक वही उत्पाद चुनता है, जिससे उसे संतुष्टि मिलती है। जो भी नई कंपनियाँ बाजार में आती हैं, वे अपने उत्पाद की गुणवत्ता को प्रदर्शित करती हैं और यह साबित करने का प्रयास करती हैं कि उनका उत्पाद बेहतर है।ग्राहक तब तक किसी उत्पाद को स्वीकार नहीं करता, जब तक उसे उस उत्पाद की गुणवत्ता पर पूरा विश्वास न हो जाए। जब लोगों को यह भरोसा हो जाता है कि कौन-सा उत्पाद सबसे अच्छी गुणवत्ता का है, तभी वह कंपनी और उसका उत्पाद बाजार में सफल हो पाता है।<br /><strong>- क्रांति जैन, अध्यक्ष, कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p><strong> जहाँ प्रतिस्पर्धा, वहीं प्रगति</strong><br />मोनोपॉली से हमेशा नुकसान ही होता है। जब बिजनेस में कम्पटीशन नहीं होता, तो कंज्यूमर के पास न तो रेट की तुलना का विकल्प रहता है और न ही बेहतर क्वालिटी की उम्मीद। ऐसे में कीमतें ऊँची रहती हैं और क्वालिटी से समझौता होने लगता है।जहाँ दो या उससे अधिक कंपनियाँ होती हैं, वहाँ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनती है और सभी बेहतर प्रोडक्ट व सर्विस देने की कोशिश करते हैं। डुओपॉली में कम से कम इतना फायदा जरूर होता है कि कम्पटीटिव एडवांटेज बना रहता है।किसी भी सेक्टर में एंट्री और एग्जिट बैरियर नहीं होने चाहिए। नई टेक्नोलॉजी और नए आइडियाज को आने का मौका मिलेगा तभी डेवलपमेंट और इनोवेशन संभव है। प्रतिबंध लगाने से प्रगति रुक जाती है।<br /><strong>-नितिन सैनी,डायरेक्टर, सुमंलगम ग्रुप</strong></p>
<p><strong>अधिक प्रतिस्पर्धा, बेहतर उत्पाद</strong><br />सामान्य उपभोक्ता को वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब किसी भी क्षेत्र में मोनोपॉली के बजाय अधिक संख्या में प्लेयर मौजूद हों। जितने अधिक खिलाड़ी होंगे, उतना ही अधिक प्रतिस्पर्धी माहौल बनेगा और उपभोक्ताओं को बेहतर टर्म्स एंड कंडीशंस तथा बेहतर सेवाएँ मिलेंगी। मोनोपॉली की स्थिति में आम आदमी को लगभग हमेशा नुकसान ही होता है। एंट्री और एग्जिट बैरियर के संदर्भ में सरकार की रेग्युलेटरी बॉडी को ऐसे बेसिक स्टैंडर्ड तय करने चाहिए, जो कंपनी के टर्नओवर या संसाधनों पर नहीं, बल्कि प्रोडक्ट और सर्विस की गुणवत्ता पर आधारित हों। उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता को सख्ती से रेग्युलेट किया जाना चाहिए, जो वर्तमान में भारत में प्रभावी रूप से नहीं हो पा रहा है। हम मैन्युफैक्चरिंग की बात तो करते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में हम चीन से कई वर्षों पीछे हैं, और लगभग हर सेक्टर में पिछड़े हुए हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि हमारे उत्पाद ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धी नहीं बन पा रहे हैं। हमें सबसे पहले इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जाएँ। सरकार की रेग्युलेटरी बॉडी को केवल क्वालिटी प्रोडक्ट्स को ही बाजार में अनुमति देनी चाहिए।<br /><strong>- मनोज राठी , अध्यक्ष, द एसएसआई एसोसिएशन, कोटा</strong></p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong><br /><strong>एंट्री और एग्जिट दोनों लचीले हो</strong><br />मोनोपॉली और डुओपॉली से आम आदमी को कभी फायदा नहीं होता। लाभ हमेशा प्रतिस्पर्धा (कॉम्पिटिशन) से आता है। मोनोपॉली में केवल एक कंपनी कीमत तय करती है और उपभोक्ता के पास विकल्प नहीं होते। यही कारण है कि सरकार और सिस्टम हमेशा कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं। प्रतिस्पर्धा होने पर उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर होती है, कीमतें कम होती हैं और उपभोक्ता को सीधे लाभ मिलता है। स्वस्थ कॉम्पिटिशन बनाए रखने के लिए एंट्री और एग्जिट दोनों लचीले होने चाहिए। उद्यमी जब चाहे बाजार में प्रवेश कर सकें और जरूरत पड़ने पर आसानी से बाहर निकल सकें। कई बार व्यवसाय शुरू नहीं करने का कारण यही डर होता है कि भविष्य में बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। भारत ने हाल के वर्षों में एंट्री और एग्जिट से जुड़ी कई पाबंदियाँ कम की हैं। नीति के लिहाज से मोनोपॉली को हमेशा रोकना चाहिए। रेग्युलेटरी अवरोध कम किए जाएं, लेकिन नियंत्रण पूरी तरह खत्म न किया जाए। नियंत्रण जरूरी है, लेकिन इसे सरल और प्रभावी बनाया जाना चाहिए। सभी आवश्यक अनुमतियाँ, दस्तावेज और प्रक्रियाएँ एक ही जगह उपलब्ध हों, ताकि एंट्री आसान बन सके। एंट्री और एग्जिट क्लॉज स्पष्ट और लचीले होने चाहिए। भारत में कॉम्पटीशन कमीशन आफ इंडिया (सीसीआई) इसी कारण बनाया गया है, ताकि मोनोपॉली और डुओपॉली फर्म अपनी एकाधिकारिक शक्तियों का दुरुपयोग नहीं कर सकें।<br /><strong>- प्रो. वी. वी. सिंह, अर्थशास्त्री</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 13:03:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>सरकारी योजनाओं से वंचित जनता हो रही बेहाल</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री आवास योजना में भी अब तक महज 28 नाम चयनित हुए हैं जबकि इस नगर में इस सीमा में लगभग 200 परिवार आसानी से आ सकते हैं लेकिन पालिका कर्मचारियों की लापरवाही से गरीब परिवार स्वयं का आशियाना बनाने का जैसे ख्वाब ही देख सकता है। उसे इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/condition-of-indragarh-municipality--people-deprived-of-government-schemes-are-getting-helpless/article-28216"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/indraghar-nagar-palika-ka-haal-sarkari-yojanao-se-vanchit-janta-ho-rahi-behaal...kota-news-31.10.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>इन्द्रगढ़। नगर में नगर पालिका बोर्ड के चुनाव हुए लगभग 20 माह बीत चुके हैं। इन 20 माह में नगर पालिका प्रशासन राज्य सरकार की किसी भी योजना का लाभ आम आदमी तक सही ढंग से नहीं पंहुचा पाया है। पालिका प्रशासन द्वारा राज्य सरकार की सभी योजनाओं को ताक में रखकर अपनी मनमर्जी से कार्य किया जा रहे है। प्रशासन शहरों के संग अभियान की बात करें तो डेढ़ साल में पालिका प्रशासन आम आदमी को डेढ़ सौ पट्टे भी जारी नहीं कर पाया है वही अगस्त से शुरू हुए अभियान के द्वितीय चरण में तीन माह बीत जाने के बाद भी आमजन को 10 पट्टें ही वितरित किए गए हैं। पालिका प्रशासन द्वारा अपने कर्मचारियों से 20 माह में 20 बार सर्वे करवाया जा चुका है लेकिन सर्वे के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हो रही है। पालिका के कर्मचारी बार बार घर घर जाकर आमजन को पट्टे बनवाने के लिए आमंत्रित कर रहे है लेकिन जब पट्टे का आवेदन आम आदमी द्वारा किया जाता है तो पट्टे बनाने में उससे अनावश्यक दस्तावेज मांगे जा रहे है जिससे आमजन में रोष व्याप्त है। राज्य सरकार द्वारा अभियान के द्वितीय चरण में कई महत्वपूर्ण रियायतें दी गई लेकिन नगर पालिका प्रशासन को जैसे उनसे कोई मतलब नहीं है। पट्टें की फाइलें डेढ़ साल से धूल खा रही हैं। यही नहीं नगर पालिका प्रशासन स्वयं अपने द्वारा बेचे गए भूखंड़ों का भी पट्टे जारी करने में असमर्थ नजर आ रहा है। किसी भूखंड को नाले में दर्ज भूमि में बताया जा रहा है तो किसी की प्लानिंग के नक़्शे में शामिल ही नहीं होना बताया जा रहा है जबकि नीलामी में बेचे भूखंड़ों की नगर पालिका द्वारा 10 वर्षीय लिज तक जमा है यही हाल प्रधानमंत्री आवास योजना का भी है। इस योजना में भी अब तक जहां महज 28 नाम चयनित हुए हैं जबकि इस नगर में इस सीमा में लगभग 200 परिवार आसानी से आ सकते हैं लेकिन पालिका कर्मचारियों की लापरवाही से गरीब परिवार स्वयं का आशियाना बनाने का जैसे ख्वाब ही देख सकता है। उसे इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।</p>
<p><strong>इंदिरा रसोई में जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा भोजन</strong><br />इंदिरा रसोई योजना की बात करे तो इस योजना के तहत मुख्यमंत्री द्वारा की गई नवीन रसोई की घोषणा जो अंबेडकर भवन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास खोली गयी है महज खानापूर्ति बनकर रह गई है। पालिका प्रशासन द्वारा नवीन रसोई का शुभारंभ तो आनन-फानन में कर दिया गया लेकिन उक्त रसोई वर्तमान में आज भी सिर्फ कागजों में ही संचालित हो रही है जिससे अस्पताल में आने वाले मरीजों एवम उनके परिजनों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। </p>
<p><strong>शहरी रोजगार गारंटी योजना में मजदूरों के मेहनताना देने में किया धोखा</strong><br />यही हाल शहरी रोजगार गारंटी योजना का है नगरपालिका ने योजना की शुरूआत में प्रचार प्रसार से लेकर अन्य चीजों में भारी खर्चा किया। मजदूरों को कतार में लगा कर रजिस्ट्रेशन करवाए गए लेकिन उक्त योजना में कार्य करवाने के बाद जब भुगतान की बारी आई तो पालिका प्रशासन फिसड्डी साबित हुआ। मजदूरों को 20 रुपए प्रतिदिन से लेकर 40 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मेहनताना थमा दिया गया। पालिका कर्मियों ने जानकारी के अभाव में एक साथ 800 से अधिक श्रमिक लगा लिए जिससे श्रमिकों को सही भुगतान नहीं किया जा सका। श्रमिकों को  धनतेरस के दिन भी छुट्टी नहीं दी गई जबकि उक्त श्रमिकों से कार्य करवाने हेतु योजना प्रभारी मनीष बैरवा से लेकर अधिशाषी अधिकारी तक छुट्टिया मनाने में व्यस्त थे जिससे मजबूर होकर गुस्साए श्रमिकों ने रोड जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। विकास के नाम पर नगर पालिका में पैसा नही है का राग अलापा जाता है लेकिन फालतू खर्चों में पालिका प्रशाशन के पास पैसों की कोई कमी नहीं आ रहीं। सड़कें पूरी तरह टूटी हुई है। सड़कों पर हो रहे गड्ढों में नगर वासी आए दिन घायल हो रहे है। डेढ़ साल में विकास कार्यों के टेंडर नही हो पाए जो हुए है उनके कायार्देश नही दिए गए है। </p>
<p>पार्षद अशोक नरबान ने बताया कि उनके वार्ड में पिछले वर्ष नालियों की मरम्मत के टेंडर हुए थे लेकिन एक रुपए का कार्य नही हुआ। ठेकेदार और पालिका प्रशासन ने मिली भगत कर बिल पास करवा लिए। पार्षद सरोज जैन ने जानकारी दी की उनके वार्ड में 2 लाख के टेंडर जारी किए थे लेकिन एक नाली की मरम्मत करवाके 2 लाख का बिल उठा लिया गया। वार्ड का सामुदायिक भवन का निमार्ण 6 वर्ष से अधूरा पड़ा है जिसे कोई देखने वाला नही है।</p>
<p>पालिका प्रशासन व कर्मचारियों की लापरवाही से आमजन को राज्य सरकार की योजना में पट्टे नहीं मिल पाए हैं। कर्मचारी लोगों से अनावश्यक दस्तावेज मांगते हैं। कनिष्ठ अभियंता द्वारा समय पर फाइलों का निस्तारण नहीं किया जाता है। इस कारण आठ 8 महीने से फाइलें पेंडिंग पड़ी हुई है। इनका निस्तारण करवा जल्द पट्टे जारी करवाए जाने चाहिए जिससे आमजन को राहत मिल सके। इंदिरा रसोई 2 महीने से कागजों में ही संचालित हो रही है। दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। रोजगार गारंटी योजना में कर्मचारियों की लापरवाही से लाभ गरीबों तक नहीं पहुंचा है पालिका प्रशासन ने लोगों को 240 मजदूरी बताकर 20 रुपए पकड़ाकर लोगों के साथ विश्वासघात किया है लोगों को उचित मेहनताना मिलना चाहिए था।<br /><strong>- नरेंद्र कुमार जैन, पार्षद नगर पालिका इंद्रगढ़</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री आवास योजना में मेरे पास जितने आवेदन आए थे उन सभी का निस्तारण कर दिया गया है। तेरह आवेदन पेंडिंग है जिन्हें राज्य स्तरीय मीटिंग के बाद सबमिट करवा दिया जाएगा। पुराने आवेदन पूर्व में ही निरस्त कर दिए गए थे। इस कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। नए आवेदन किए जाएंगे तो लाभ अवश्य दिलवाया जाएगा।<br /><strong>- मोनू बैरवा, योजना प्रभारी, प्रधानमंत्री आवास योजना नगर पालिका इंद्रगढ़</strong></p>
<p>पालिका प्रशासन की लापरवाही से सभी योजनाओं का लाभ गरीब जनता को नहीं मिल पा रहा है। डेढ़ साल से मिलीभगत कर पट्टे बनाए जा रहे हैं। गरीब लोगों के पट्टे नहीं बनाए जा रहे हैं। कर्मचारी आम जनता के साथ बुरा व्यवहार करते हैं। अनावश्यक दस्तावेज मांगने से लोग आवेदन करने से भी कतराते हैं। सभी योजनाओं का लाभ पारदर्शिता के साथ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचना चाहिए।<br /><strong>- अशोक नरबान, वार्ड पार्षद नगर पालिका इंद्रगढ़</strong></p>
<p>पालिका प्रशासन सभी योजनाओं का लाभ गरीब जनता को नहीं दिलवा पा रहा है। रसूखात रखने वाले लोगों के सभी कार्य आसानी से हो रहे हैं। रोजगार योजना में पालिका द्वारा मजदूरों के साथ धोखा किया गया है सभी पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।<br /><strong>- आसाराम मीणा, वार्ड पार्षद नगर पालिका इंद्रगढ़</strong></p>
<p>8 माह पूर्व दुकानों के पट्टे के लिए फाइल लगाई थी। 3 माह पहले पट्टा शुल्क भी जमा करवा दिया लेकिन आज तक पट्टा नहीं दिया गया। कभी फोटो तो कभी आधार कार्ड मांगकर अब भी परेशान किया जा रहा है।<br /><strong>- नन्द किशोर जैन, व्यवसायी इन्द्रगढ़</strong></p>
<p>कनिष्ठ अभियन्ता के नही होने से पट्टों की फाइलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा था। नए कनिष्ठ अभियंता की नियुक्ति हो चुकी है। सभी फाइलें नए अभियंता को सुपुर्द करवा कर आठ दिवस में इनका निस्तारण करवा दिया जाएगा। लोगों के अधिक से अधिक पट्टे बने यही प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना का दोबारा सर्वे करवाया गया है। पात्र लोगों को लाभ दिलवाया जाएगा। नई इंदिरा रसोई अन्य स्थान पर शिफ्ट करवाई जा रही है। अगर कर्मचारियों द्वारा लापरवाही की जा रही है उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- बाबूलाल बैरवा, अध्यक्ष नगर पालिका, इंद्रगढ़</strong></p>
<p>कनिष्ठ अभियंता सप्ताह में एक ही दिन लगाए जाने से पट्टों की फाइलों पर रिपोर्ट नहीं हो पा रही थी। इस कारण पट्टे जारी नहीं किए जा सके। नए अभियंता की नियुक्ति हो जाने से अतिशीघ्र अधिक से अधिक पट्टे जारी किए जा सकेंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना में 28 लोगों के नाम सेलेक्ट हो चुके हैं और दोबारा सर्वे करवाया जा रहा है। सर्वे में पात्र लोगों को लाभ दिलवाया जाएगा। शहरी रोजगार गारंटी योजना में अधिक श्रमिक एक साथ लगने से यह स्थिति आई है। कनिष्ठ अभियंता द्वारा सही जानकारी नहीं दिए जाने से मजदूरों को इसका लाभ नहीं मिला।शीघ्र निस्तारण करवा दिया जाएगा। <br /><strong>- मनीष बैरवा, योजना प्रभारी नगर पालिका इंद्रगढ़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Oct 2022 16:08:47 +0530</pubDate>
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                <title>भोपाल, इंदौर के रूट पर बस चले तो आमजन और व्यापारियों को मिले राहत</title>
                                    <description><![CDATA[ कस्बे में स्थित स्वर्गीय प्रेमसिंह सिंघवी बस स्टैंड पर रोडवेज बसों की कमी के चलते यात्री परेशान है। वरिष्ठ नागरिकों, महिला यात्रियों, विद्यार्थियों, दिव्यांगों को रोडवेज बसों में मिलने वाली छूट का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लोगों का कहना की पूर्व में संचालित दर्जनों बसों को विभाग ने यात्री भार कम बता कर बंद कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/relief-for-common-man-and-businessman-if-the-bus-runs-on-the-route-of-bhopal--indore/article-11908"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/roadways-bus-2.jpg" alt=""></a><br /><p><br />हरनावदाशाहजी। कस्बे में स्थित स्वर्गीय प्रेमसिंह सिंघवी बस स्टैंड पर रोडवेज बसों की कमी के चलते यात्री परेशान है। वरिष्ठ नागरिकों, महिला यात्रियों, विद्यार्थियों, दिव्यांगों को रोडवेज बसों में मिलने वाली छूट का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लोगों का कहना की पूर्व में संचालित दर्जनों बसों को विभाग ने यात्री भार कम बता कर बंद कर दिया। जिससे आमजन को काफी परेशानी हो रही है। वहीं लोगों का कहना है कि पूर्व में संचालित बारां-इंदौर, बारां भोपाल बस का संचालन शुरू किया जावे जिससे क्षैत्र के व्यापारियों और आमजन को राहत मिलेगी। <br /><br /><strong>कई रूटों पर बंद पड़ी है रोडवेज बसें</strong><br />वर्तमान में यात्रियों को निजी वाहनों में अधिक किराया देकर यात्रा करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कस्बे के वरिष्ठ नागरिक कल्लू भाई मंसूरी, मांगीलाल जैन, मोहम्मद हुसैन, ओमप्रकाश गौतम, हाजी खलील अहमद, चंद्रप्रकाश शर्मा, मुरलीधर खंडेलवाल ने बताया कि कस्बे से होकर पूर्व में बारां-इंदोर, हरनावदाशाहजी - रामगंजमंडी बारां- भोपाल, वाया झालावाड़, मनोहरथाना-झालावाड़ वाया हरनावदाशाहजी, मनोहरथाना हरनावदाश हजी खानपुर झालावाड़ रोडवेज बसों का संचालन हो रहा था। कोरोना काल के पहले से ही इन रोडवेज बसों का संचालन बंद कर दिया गया था। अब सामान्य स्थिति होने के बावजूद इन बसों का फिर से संचालन शुरू नहीं किया गया है। जिससे यात्रियों को कस्बे से संचालित निजी वाहनों में अधिक किराया देकर यात्रा करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यहां तक की यात्रियों को जिला मुख्यालय जाने के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><br /><strong>बारां रोडवेज डिपो की एक बस का संचालन हो रहा</strong><br />हरनावदाशाहजी कस्बा जिले का बड़ा कस्बा होने के बावजूद भी बारां डिपो की ओर से यहां तक रोडवेज बसों का संचालन नहीं किया जा रहा है। बारां, झालावाड़, कोटा डिपो की नई रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से यात्री रोडवेज बस सेवा से महरूम है। बारां डिपो की मात्र एक बस बारां-मनोहरथाना वाया हरनावदाशाहजी का संचालन हो रहा है। हरनावदाशाहजी से छीपाबड़ौद, छबड़ा के भार के अनुसार बसों का नहीं हो रहा है। ऐसे में निजी बसों, आॅटो, जीप तथा मैजिक चालकों की मौज हो रही है।<br /><br /><strong>परिवहन विभाग के अधिकारियों को लिखे पत्र</strong><br />कस्बे से होकर रोडवेज बसों का संचालन करने की मांग को लेकर कस्बेवासियों ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे, लेकिन बसों का संचालन नहीं हो पाया। आसपास के कई रूटों पर रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से निजी वाहन चालक क्षमता से अधिक सवारियां बिठाकर जान जोखिम डालकर यात्रा करवा रहे हैं। क्षेत्र में आबादी बढ़ने के साथ यात्री साधनों में वृद्धि नहीं हो पा रही है। वर्तमान में हरनावदाशाहजी से अकलेरा, झालावाड़, कोटा के लिए 2 रोडवेज बसों का ही संचालन हो रहा है।<br /><br /><strong>रात्रिकालीन बसों के संचालन की उठाई मांग</strong><br />डीएलएड छात्रध्यापक आशु मंसूरी, पवन रैगर, नदीम खान, घनश्याम लववंशी आदि कॉलेज छात्रों ने बताया कि स्कूल, कॉलेज व अन्य कार्य से जाने के लिए सुबह के समय अकलेरा, झालावाड़ जाने के लिए रोडवेज बस नहीं है। जिससे सुबह जल्दी पहुंचने वाले स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थियों एवं यात्रियों को परेशानी हो रही है। पूर्व में संचालित रात्रिकालीन दूरगामी बसों को फिर से शुरू करने की मांग भी उठाई गई है। वरिष्ठ नागरिकों, कॉलेज छात्रों, जनप्रतिनिधियों व कस्बेवासियों ने बारां, झालावाड़, कोटा आगार रोडवेज मुख्य प्रबंधकों से दोपहर के समय हरनावदाशाहजी से छबड़ा, बारां, झालावाड़, कोटा, जयपुर, भोपाल, इंदौर की ओर नई रोडवेज बसों का संचालन जल्द ही शुरू करने और बारां से अकलेरा तक तथा कोटा, झालावाड़ से अकलेरा तक संचालित हो रही रोडवेज बसों का संचालन हरनावदाशाहजी तक करने की मांग की है।<br /><br /><strong>पूर्व में चलती बारां - इंदौर रोडवेज बस</strong><br />सालों पहले बारां इंदौर रोडवेज बस का संचालन किया जाता था लेकिन उसको भी बंद कर दिया गया। लोगों का कहना है कि बारां इंदौर बस फिर से शुरू हो जावे तो व्यापारियों ओर आमजन को काफी राहत मिलेगी। <br /><br />बारां रोडवेज डिपो में बसों की कमी चल रही है। अब मात्र 56 बसे हैं। उपलब्ध संसाधनों के अनुसार ही बसों का संचालन किया जा रहा है। वैसे भी एक बस बारां-मनोहरथाना का संचालन कभी बंद नहीं किया गया। आगे भी नई बसें मिलती हैं तो यात्री भार के अनुसार बसों का संचालन किया जाएगा। <br /><strong>- सुनिता जैन, मुख्य प्रबंधक बारां रोडवेज डिपो</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 14:55:34 +0530</pubDate>
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                <title>फिर आम आदमी नाचेगा बिचौलियों की अंगुलियों पर</title>
                                    <description><![CDATA[गेहूं के दाम में आए उछाल ने इस साल सरकारी खरीद का पूरा गणित गड़बड़ा दिया। इसी का फायदा उठाकर व्यापारियों ने भारी मुनाफा कमाया।  स्थिति यह हो गई कि केन्द्र सरकार को इस साल अपना खरीद का लक्ष्य तक घटाना पड़ गया। वहीं गेहूं के दामों में बढ़ोतरी का खामियाजा आमजन को उठाना पड़ा। 

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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/then-the-common-man-will-dance-on-the-fingers-of-middlemen/article-11461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/aam-aadmi-ko-milega-expensive-wheat.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गेहूं के दाम में आए उछाल ने इस साल सरकारी खरीद का पूरा गणित गड़बड़ा दिया। इसी का फायदा उठाकर व्यापारियों ने भारी मुनाफा कमाया। स्थिति यह हो गई कि केन्द्र सरकार को इस साल अपना खरीद का लक्ष्य तक घटाना पड़ गया। वहीं गेहूं के दामों में बढ़ोतरी का खामियाजा आमजन को उठाना पड़ा। वर्तमान में कम दाम में खरीदे गेहूं को अधिक दाम में बेचकर व्यापारी भारी मुनाफा कमा रहे हैं।  हाड़ौती में हर साल गेहूं की बम्पर पैदावार होती है। हालांकि इस साल तेज गर्मी के कारण उत्पादन क्षमता में कुछ प्रभाव पड़ा था। इसके बावजूद बाजार में बिक्री के लिए गेहूं की आवक शुरू होते ही दामों में तेजी आ गई थी। अमूमन 1800 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल बिकने वाले गेहूं के दाम इस बार 2100 से 2200 के बीच बोले गए, जबकि समर्थन मूल्य पर गेहूं के दाम 2015 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किए गए थे। व्यापारी वर्ग ने इसका भरपूर फायदा उठाया और थोड़े दाम बढ़ाकर किसानों का सारा गेहूं खरीद लिया। इसका नतीजा यह रहा कि हाड़ौती क्षेत्र में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई।<br /><br /><strong>और घटाना पड़ गया कोटा</strong><br />हर साल अधिकांश किसान अपनी उपज का उचित दाम प्राप्त करने के लिए सरकारी खरीद केन्द्र पर गेहूं बेचने की कोशिश करता था। इसकी प्रक्रिया काफी जटिल होने के बावजूद किसान का यही प्रयास रहता था कि उसका गेहूं सरकारी खरीद केन्द्र पर ही बिके, लेकिन इस बार गेहूं खरीद की गणित पूरी तरह से बिगड़ गई है। व्यापारी वर्ग ने पहले से ही अधिक दाम लगाकर किसानों का सारा माल खरीद लिया। ऐसे में सरकारी खरीद ठप हो गई। इसके चलते केन्द्र सरकार ने देश में गेहूं खरीद का कोटा घटाकर 195 लाख टन कर दिया, जो पिछले साल की तुलना में 55 फीसदी कम था। इससे व्यापारियों को भी फायदा हुआ। <br /><br /><strong>ऐसे हुई व्यापारियों की मौज</strong><br />गेहूं का उत्पादन और गुणवत्ता कमजोर होने का सीधा फायदा व्यापारियों को मिला। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की दर 2015 रुपए प्रति क्विंटल थी। इसी का फायदा व्यापारियों ने उठाया और किसानों से अच्छी गुणवत्ता वाला गेहूं भी 2100 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल के बीच खरीद लिया। उसके बाद अपने पास स्टॉक कर लिया। उस समय काफी मात्रा में गेहूं देश से बाहर निर्यात किया जा रहा था। ऐसे में व्यापारियों ने किसानों से खरीदा अधिकांश माल विदेशों में भेज दिया। इसका फायदा भी व्यापारियों को मिला। वहीं निर्यात के चलते स्थानीय स्तर पर गेहूं के दामों में और इजाफा हो गया, जिससे आमजन में हाहाकार मच गया। गेहूं के दामों पर लगाम के लिए केन्द्र सरकार को निर्यात पर प्रतिबंध तक लगाना पड़ा। इसके बावजूद दामों में ज्यादा कमी नहीं आई।<br /><br /><strong>मुनाफाखोरी का खेल</strong><br />कृषि उपजमंडी में किसानों का गेहूं 2100 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल के बीच खरीदा गया था। व्यापारियों ने सारा गेहूं खरीदकर अपने यहां स्टॉक कर लिया। उसके बाद मुनाफाखोरी का खेल शुरू कर दिया। व्यापारियों ने अपने स्तर पर गेहूं के दाम बढ़ा दिए और आमजन को 2500 से 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बेचा। व्यापारी को एक क्विंटल पर ही करीब 400 रुपए का भारी मुनाफा हो गया। कृषिमंडी से निकला गेहूं आमजन तक पहुंचने तक 400 रुपए प्रति क्विंटल महंगा हो गया। <br /><br /><strong>सफाई के नाम पर धोखा</strong><br />लोगों का कहना है कि बाजार में इस समय गेहूं 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मिल रहा है। इतने अधिक दाम होने के बारे में व्यापारी बताता है कि किसानों से खरीदे गए गेहूं की क्वालिटी काफी खराब होती है, इसलिए उस गेहूं की सफाई करवाई जाती है। इसलिए अधिक दाम लगाने पड़ते है। लोगों का कहना है कि मशीन क्लीन गेहूं के नाम से लूटमार की जा रही है। गेहूं को क्लीन करने में इतना खर्चा नहीं आता है इसके बावजूद सफाई के नाम पर दाम अधिक लगाए जाते है।  <br /><br /><strong>इतना महंगा गेहूं कभी नहीं खाया</strong><br />परिवार के लिए हर साल आठ बोरी गेहूं लेते हैं। इस बार गेहूं के दामों ने सकते में ला दिया है। आठ बोरी गेहूं ही बीस हजार रुपए से अधिक के आ गए। इससे पूरे घर का बजट ही गड़गड़ा गया है। व्यापारी मशीन क्लीन के नाम पर लोगों से धोखा करते हैं। ज्यादा रुपए लेने के बाद भी गेहूं में कंकर व अन्य गंदगी मिली हुई थी।<br /><strong>- दुर्गाप्रसाद शर्मा, जयश्रीविहार</strong><br /><br />परिवार में दस सदस्य हैं, इसलिए सालभर का गेहूं एक साथ खरीद लेते हैं। इस साल तो  गेहूं काफी महंगा पड़ गया। कोरोना महामारी के चलते व्यवसाय पहले से ही ठप था। अब महंगे गेहूं की और स्थिति बिगाड़ दी। मजबूरी में गेहूं खरीदने की मात्रा कम करनी पड़ी। अगर आगे दाम कम होंगे तो और गेहूं खरीद लेंगे।<br /><strong>- रामभरोस सुमन, ग्रीन होम सोसायटी</strong><br /><br />भामाशाहमंडी में किसानों को इस बार गेहूं के दाम अधिक मिले थे। इससे किसानों को फायदा हुआ था। अधिकांश किसानों ने व्यापारियों को ही माल बेचा था। इसके बाद माल की दर व्यापारी अपने हिसाब से ही तय करता है।<br /><strong>- जवाहरलाल नागर, भामाशाहमंडी सचिव</strong><br /><br />गेहूं के दामों में इजाफा होने से इस बार सरकारी केन्द्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई है।  कोटा संभाग में गेहूं खरीद के लक्ष्य तय किए गए थे, लेकिन बाजार में समर्थन मूल्य से अधिक दाम होने से केन्द्रों पर खरीद नहीं हो पाई। <br /><strong>- सतीश कुमार, मण्डल प्रबंधक, एफसीआई कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jun 2022 15:42:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कलेक्टर ने सुनी आमजन की समस्याएं,  प्रशासन गांवों के संग अभियान में मनाया बेटी का जन्मदिन</title>
                                    <description><![CDATA[कलेक्टर भगवती प्रसाद कलाल  नोखा क्षेत्र के दौरे पर रहे। उन्होंने भामटसर में ग्राम पंचायत स्तरीय जनसुनवाई में आमजन की समस्याएं सुनी। कुदसू में प्रशासन गांवों के संग अभियान के तहत फॉलोअप शिविर का निरीक्षण किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/the-collector-listened-to-the-problems-of-the-common-man-celebrated-daughter-s-birthday-in-campaign-with-administration-villages/article-11295"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/cc.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बीकानेर।</strong> कलेक्टर भगवती प्रसाद कलाल शुक्रवार को नोखा क्षेत्र के दौरे पर रहे। उन्होंने भामटसर में ग्राम पंचायत स्तरीय जनसुनवाई में आमजन की समस्याएं सुनी। कुदसू में प्रशासन गांवों के संग अभियान के तहत फॉलोअप शिविर का निरीक्षण किया। जसरासर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रगतिरत आवास का अवलोकन किया।</p>
<p>भामटसर के राजीव गांधी सेवा केन्द्र में आयोजित जनसुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जनसुनवाई की त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू की गई है। अधिकारी इनमें पूर्ण गंभीरता से भागीदारी निभाएं तथा अपने स्तर पर निस्तारण योग्य समस्याओं का प्राथमिकता से निस्तारण करें, जिससे आमजन को राहत मिल सके।</p>
<p>इस दौरान ग्रामीणों ने शौचालय बनाने, विद्युत के ढीले तार कसवाने, पेयजल आपूर्ति सहित विभिन्न समस्याएं रखी। समस्याओं के निस्तारण के लिए उन्होंने वहां मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया।  इस दौरान उपखण्ड अधिकारी स्वाति गुप्ता, अधिशाषी अभियंता धीर सिंह गोदारा, तहसीलदार नरेन्द्र बापेड़िया, विकास अधिकारी मेजर अली, अतिरिक्त विकास अधिकारी राजेश व्यास सहित विभिन्न अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>बेटी के जन्मदिन पर काटा केक:</strong></span></p>
<p>कलेक्टर ने कुदसू में प्रशासन गांवों के संग अभियान के तहत आयोजित फॉलोअप शिविर का अवलोकन किया। विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। शिविर के दौरान बेटी के जन्म दिन को उत्सव के रूप में मनाया गया। कलेक्टर ने जन्म दिन का केक कटवाया और बेटी का मुंह मीठा करवाया।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>विभिन्न कार्यों का किया निरीक्षण:</strong></span></p>
<p>कलेक्टर ने कुदसू में मनरेगा के तहत भैसोलाई नाडी तलाई खुदाई कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने यहां नियोजित महिला मेट से कार्य का नापझोख करवाया। मेट द्वारा किए गए कार्य की सराहना की। उन्होंने जसरासर में भी आमजन की जनसमस्याएं सुनी तथा यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पेमाराम मालूराम मेघवाल के प्रगतिरत आवास का निरीक्षण किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बीकानेर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jun 2022 14:56:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अतिक्रमियों ने छलनी की सड़कें, गड्ढे आमजन के लिए बने जानलेवा</title>
                                    <description><![CDATA[ उपखंड मुख्यालय शाहाबाद से मुंगावली मझारी कस्बा नोनेरा एवं दर्जनों गांव तक पहुंचने के लिए रोड बना हुआ है, इस रोड के दोनों तरफ अतिक्रमण इस कदर बढ़ चुका है कि वाहन चालकों को अब साइड लेने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसके चलते आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/encroachment-has-sieved-roads--pits-become-deadly-for-common-man/article-6901"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/sadak.jpg" alt=""></a><br /><p>शाहाबाद। उपखंड मुख्यालय शाहाबाद से मुंगावली मझारी कस्बा नोनेरा एवं दर्जनों गांव तक पहुंचने के लिए रोड बना हुआ है, इस रोड के दोनों तरफ अतिक्रमण इस कदर बढ़ चुका है कि वाहन चालकों को अब साइड लेने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसके चलते आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, परंतु सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा अतिक्रमण को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, जिससे अतिक्रमण के हौसले बुलंद हैं। जानकारी अनुसार शाहाबाद से मुगावली मझारी कस्बा नोनेरा एवं दर्जनों गांव तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग बना हुआ है जिसके समीप ही निर्माण कार्य आदि कर दिए हैं, जिससे राहगीरों को एवं वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है एवं दोनों तरफ खेत होने की वजह से किसानों द्वारा बीच-बीच में रोड को खोदकर पाइपलाइन एवं पत्थर डाल दिए जाते हैं, जिसके चलते रात्रि के समय कई दुर्घटनाएं हुई हैं। मुंगावली निवासी बाल किशन ने बताया कि मैं रात्रि के समय आ रहा था पाइप लाइन डालने के लिए को दी हुई जगह के बीच में पत्थर आदि पड़े हुए थे, इस कारण से मेरी मोटरसाइकिल स्लिप हुई और मैं गिर गया, मेरे यहां चोटे आई। आए दिन लोग चोटिल होते हैं, परंतु कोई कार्रवाई नहीं की जाती जो रोड को खोदकर पानी की पाइपलाइन डालते हैं पत्थर डालते हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग को इसके प्रति ठोस कार्रवाई करनी चाहिए एवं क्षेत्र के लोगों द्वारा बताया कि कई बार इसकी सूचना सार्वजनिक निर्माण विभाग को मौखिक एवं लिखित रूप में दी जा चुकी है, लेकिन फिर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। <br /><br /><strong>गड्ढों की वजह से दुर्घटना का खतरा बढ़ा</strong><br />जगह-जगह गड्ढे होने के कारण दुर्घटना का खतरा अधिक बढ़ गया है, ऐसे में सभी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या का स्थाई समाधान किया जाना चाहिए और जो खेत मालिक एक तरफ से दूसरी तरफ पानी ले जाते हैं वह एक बार रोड खुदवा कर नीचे पाइप लाइन को डाल दें और ऊपर से रोड को ठीक किया जाए, जिससे रोड की खुदाई भी नहीं होगी और दूसरी तरफ किसानों का पानी भी पहुंचेगा और हर साल यह समस्या उत्पन्न होती है परंतु सार्वजनिक निर्माण विभाग का उदासीनपन लोगों को दुर्घटना का निमंत्रण दे रहा है।<br /><br />जगह-जगह रोड को खोदकर छोड़ दिया है, जिससे दुर्घटना होने का डर लगा रहता है जबकि इस रोड पर 1 दर्जन से अधिक गांव लगे हुए हैं एवं यह रोड मध्य प्रदेश तक जाता है। रोड खोदने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।<br />- राजू शर्मा निवासी मजारी<br /><br />अतिक्रमण के चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है , वाहन चालकों को साइड लेने परेशानियां आती हैं, साइड लेने पर यदि किसी के रखे हुए पत्थर कोट के पत्थर गिर जाते हैं तो लड़ाई झगड़े की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।<br />- महेंद्र जाटव मुंगावली <br /><br />कई बार सार्वजनिक निर्माण विभाग को उक्त समस्या के बारे में अवगत कराया गया, परंतु विभाग का उदासीन रवैया अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहा है, रोड के समीप अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।<br />- आनंद गोयल मंडल अध्यक्ष भाजपा शाहाबाद<br /><br />उक्त समस्या के बारे में कई बार संबंधित विभाग के अधिकारी को अवगत कराया परंतु कोई कार्यवाही नहीं की जाती, यदि शीघ्र ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो क्षेत्र के लोगों के तरफ से अधिशासी अभियंता कार्यालय सार्वजनिक निर्माण विभाग शाहाबाद पर धरना एवं प्रदर्शन किया जाएगा। <br />- बालकिशन कश्यप निवासी मुंगावली<br /><br />खेतों में पानी देने के लिए पाइप लाइन का स्थाई समाधान किया जाना चाहिए। पाइपलाइन एक बार किसानों से कहकर स्थाई पाइप डलवाए जाएं और रोड के गड्ढों को भरा जावे। क्षेत्र के लोग चोटिल हो रहे हैं, रोड पर से अतिक्रमण हटाने के लिए ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए। <br />- कलाबाई सहरिया, सरपंच शुभघरा पंचायत समिति शाहाबाद</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Mar 2022 16:06:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खस्ताहाल सड़कें , आमजन के लिए बनी मुसीबत</title>
                                    <description><![CDATA[सिरसी रोड के पास अलंकार मोड से लेकर कनकपुरा पर आम लोगों की सुविधा के लिए जलदाय विभाग ने बीसलपुर लाइन तो डाल दी, लेकिन जेडीए अधिकारियों की लापरवाही से यहां स्थानीय लोगों को सुविधा के साथ दुविधा में डाल दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/roads-from-alankar-mode-near-sirsi-road-to-kanakpura-in-ruins--trouble-for-common-man/article-5510"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/ro.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। सिरसी रोड के पास अलंकार मोड से लेकर कनकपुरा पर आम लोगों की सुविधा के लिए जलदाय विभाग ने बीसलपुर लाइन तो डाल दी, लेकिन जेडीए अधिकारियों की लापरवाही से यहां स्थानीय लोगों को सुविधा के साथ दुविधा में डाल दिया है। इस मार्ग पर पेयजल लाइन को डाले कई महीने हो गए, लेकिन जेडीए इस रोड को सुधारने के नाम पर चुप्पी साधे बैठा है।</p>
<p><strong>राहगीरों और वाहन चालकों को खासी परेशानी</strong><br />वार्ड-50 पार्षद संजू चौधरी ने बताया कि अलंकार मोड से पांच्यावाला एवं कनकपुरा से केशुपुरा पुलिया मोड़ तक दो किलोमीटर से अधिक सड़क को पेयजल लाइन डालने से खोदा था। अब दो महीने बीत गए, लेकिन जेडीए अधिकारियों को बार-बार शिकायत करने के बाद भी समाधान नहीं हुआ। रोड की खस्ताहाल स्थिति के चलते स्थानीय निवासी, राहगीरों और वाहन चालकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस रोड पर सोनपुरी, कनक विहार, कनक विहार विस्तार, जगदंबा नगर सहित दर्जनों कॉलोनियां है जहां लोगों को नियमित आवागमन होता है।</p>
<p><br /><strong>आए दिन होती हैं दुर्घटना</strong><br />सड़क जगह-जगह हो रहे गड्ढों से आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं और वाहन चालक चोटिल होते हैं। रोड पर जमा मिट्टी आस पास की दुकानों में जाती है, इससे व्यापारियों का व्यवसायी भी प्रभावित होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/roads-from-alankar-mode-near-sirsi-road-to-kanakpura-in-ruins--trouble-for-common-man/article-5510</link>
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                <pubDate>Sat, 05 Mar 2022 10:55:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>आम आदमी पर महंगाई की मार : 15रुपए महंगा हुआ घरेलू गैस सिलेंडर</title>
                                    <description><![CDATA[इससे पहले 01 अक्टूबर को केवल 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडरों के दाम बढ़ाए गए थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%86%E0%A4%AE-%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A4%AE%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0---15%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%8F-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86-%E0%A4%98%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%97%E0%A5%88%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0/article-1457"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/gas.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली</strong>। पेट्रेाल-डीजल की बढ़ती कीमतों से महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों को गैर सब्सिडी रसोई गैस (एलपीजी) के दाम में प्रति सिलेंडर 15 रुपये की बढ़ोतरी होने से आज एक और झटका लगा है। देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की बुधवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, गैर सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के रसोई गैस सिलेंडर के दाम में 15 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। इससे दिल्ली में रसोई गैस की कीमत 884.50 रुपये से बढ़कर 899.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है।वहीं, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि इससे पहले 01 अक्टूबर को केवल 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडरों के दाम बढ़ाए गए थे।</p>
<p><br /> पिछले एक साल में रसोई गैस 305.50 रुपये तक महंगा हो चुका है। इस वर्ष 01 सितंबर को 14.2 किलोग्राम के गैर-सब्सिडी रसोई गेस सिलेंडर के दाम में 25 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले 17 अगस्त को गैस सिलेंडर की कीमतों में 25 रुपये का इजाफा हुआ था।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> इस बढ़ोतरी के बाद देश के चार महानगरों में गैर सब्सिडी रसोई गैस के दाम इस प्रकार हैं :<br /> महानगर.................पुरानी कीमत....................नई कीमत(रुपये प्रति सिलेंडर)</strong></span></span><br /> <strong>दिल्ली........................884.50..........................899.50<br /> कोलकाता..................911.00..........................926.00<br /> मुंबई..........................884.50..........................899.50<br /> चेन्नई..........................900.50..........................915.50</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Oct 2021 12:34:48 +0530</pubDate>
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