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                <title>करीब छह माह से नहीं बह रही चम्बल माता से जलधारा</title>
                                    <description><![CDATA[रिवर फ्रंट के आकर्षणों में से एक आकर्षण हैं मूर्ति से बहती जलधारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-stream-from-chambal-mata-has-not-flowed-for-nearly-six-months/article-134668"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । एक तरफ तो शहर को पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। जहां देश विदेश से पर्यटकों को लाकर यहां के पर्यटन स्थलों को दिखाने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ यहां के पर्यटन स्थलों की सुध तक नहीं ली जा रही है। जिसका नजीता है चम्बल रिवर फ्रंट। रिवर फ्रंट पर बैराज साइड पर लगी चम्बल माता की विशाल मूर्ति से पिछले करीब 6 माह से जल धारा तक नहीं बह रही है। जिससे वहां आने वाले बाहरी पर्यटक ही नहीं स्थानीय लोग भी उस मनोरम दृश्य को देखने से वंचित हो रहे हैं। रिवर फ्रंट के आकर्षणों में से एक आकर्षण हैं मूर्ति से बहती जलधारा। लेकिन वहां आने वालों को काफी समय से यह जलधारा बहती हुई नजर ही नहीं आ रही है।रिवर फ्रंट घूमने गए लोगों का कहना है कि वीडियो व रील में तो चम्बल माता से जलधारा बहती हुई दिखती है। लेकिन जब वहां मौके पर गए तो जलधारा नजर ही नहीं आई। जिससे वहां जाकर भी निराशा ही मिली।</p>
<p><strong>धीरे-धीरे गायब हो रहे व्यू कटर</strong><br />रिवर फ्रंट बनने के बाद तत्कालीन नगर विकास न्यास की ओर से बैराज के समानांतर पुल पर रिवर फ्रंट व बैराज साइड दोनों तरफ व्यू कटर लगाए गए हैं। जिससे पुल से गुजरने वाले वाहन चालक अंदर की तरफ नहीं देख सके। साथ ही वाहन चालकों को वहां रूकने से जाम की स्थिति भी नहीं बने। जबकि जब व्यू कटर नहीं लगे थे तब वहां पुल पर जाम की स्थिति बनी रहती थी।लेकिन हालत यह है कि वर्तमान में बैराज साइड से व्यू कटर धीरे-धीरे गायब हो रहे है। बैराज से सकतपुरा की तरफ जाते समय कहीं एक-दो तो कहीं आधा दर्जन से अधिक व्यू कटर टुकड़ों में गायब हो रहे हैं। शुरूआत में यह एक दो जगह से गायब हुए थे वहीं अब इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।</p>
<p>लोगों का कहना है कि कुछ लोगों ने बरसात के समय बैराज के गेट खुलने पर उनके पानी को देखने के लिए कुछ जगह से व्यू कटर तोड़े थे। लेकिन केडीए अधिकारियों की अनदेखी से उन्हें सही नहीं किया गया। जिससे अब यह अधिक जगह से गायब हो गए हैं। जिससे वहां काफी जगह हो गई है। ऐसे में वहां से किसी के झांकने पर गिरकर हादसा होने का खतरा बना हुआ है।</p>
<p>इधर होटल फैडरेशन आॅफ राजस्थान कोटा संभाग के अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी ने बताया कि उन्होंने पर्यटन विभाग व केडीए अधिकारियों के साथ गत दिनों रिवर फ्रंट का अवलोकन किया था। इस दौरान वहां जो भी कमियां नजर आई उन्हें दुरुस्त करने के लिए कहा था। जिससे टूर एंड ट्रेवल मार्ट में आने वालों को अच्छा नजारा दिख सके। चम्बल माता की जलधारा को भी फिर से शुरू करने के लिए कहा है। अधिकारियों ने शीघ्र ही उसे चालू करने की बात कही है।</p>
<p><strong>पानी बंद होने पर सही करवाए जा रहे पम्प</strong><br />केडीए के सहायक अभियंता(विद्युत) ललित मीणा ने बताया कि चम्बल माता की मूर्ति में ऊपर तक पानी पहुंचाने के लिए जो मोटर व पम्प लगे हुए हैं वह चम्बल नदी में अंदर की तरफ है। हालांकि वहां चार दीवारी बनाई हुई है। लेकिन बरसात के समय में बैराज के गेट खोलने से पानी की आवक अधिक हो गई थी। जिससे वे पम्प पानी में अधिक डूब गए। पानी के साथ बहकर आई मिट्टी पम्प में जम गई थी। जिससे मोटर व पम्प बंद होने से मृूर्ति से जलधारा बंद हो गई थी। लेकिन अब गेट बंद होने व पानी कम होने से पम्प को निकालकर साफ कराया जा रहा है। शीघ्र ही फिर से जलधारा बहती नजर आएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 15:29:06 +0530</pubDate>
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                <title>दशहरा मेले में इस बार नहीं लगेगा महंगाई का तड़का, खाद्य पदार्थ और झूलों की नहीं बढ़ेगी रेट</title>
                                    <description><![CDATA[मेला समिति ने दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया है गत वर्ष के समान ही दुकानों का किराया लिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-dussehra-fair-will-not-be-affected-by-inflation-this-time--food-prices-and-swings-will-not-increase/article-127868"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(1)29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । एक ओर जहां महंगाई लगातार बढ़ रही है। वहीं उसका असर इस बार दशहरे मेले में नहीं दिखाई देगा। दशहरा मेले में महंगाई का तड़का नहीं लगेगा। विशेष रूप से खाद्य पदार्थ और झूलों पर। दशहरा मेले का विधिवत शुभारम्भ तो दो दिन पहले नवरात्र के दिन से हो गया है लेकिन अभी तक भी मेले में पूरी दुकानें नहीं लग पाई है। बाहर से आने वाले दुकानदार अभी तक बहुत कम संख्या में आए। हालांकि स्थानीय व्यापारी व दुकानदारों द्वारा अपने हिसाब से दुकानें तैयार की जा रही है। जिससे खाने-पीने की दुकानों के साथ ही झूले ही लग पाए हैं।  दशहरा मैदान के फेज एक में झूला मार्केट से लेकर मैदान में अन्य निर्धारित स्थानों पर हर साल लगने वाले परम्परागत झूले लग रहे है। वहीं नसीराबाद का कचौड़ा, पकौड़ी व सोफ्टी और फास्ड फूड की दुकानें लगना शुरु हो गई है।  दुकानदारों का कहना है कि इस बार मेले में खाद्य पदार्थ व झूलों की रेट नहीं बढ़ाई गई है। खाद्य पदार्थ के दुकानदार सुनील वैष्णव ने बताया कि नसीराबाद का कचौड़ा व गोभी के पकौड़े, गुलाब जामुन व अन्य खाद्य पदार्थों की कीमत इस बार भी वही है जो गत वर्ष थी।  सोफ्टी के  दुकानदार प्रमोद लोधा का कहना है कि मेला समिति ने दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया है। गत वर्ष के समान ही इस बार भी दुकानों का किराया लिया गया है। इस कारण से सोफ्टी की दरों में भी बढ़ोतरी नहीं की गई है। जिससे 30 से 50 रुपए के बीच ही सोफ्टी की रेट है। हालांकि कई दुकानदार 20 रुपए में भी बेचते हैं।  वहीं झूला संचालक जाकिर हुसैन ने बताया कि मेले में जहां परम्परागत रूप से जो झूले आते हैं उनकी संख्या पहले से भी अधिक हो गई है। करीब 60 से ज्यादा झूले लगेंगे। ऐसे में इस बार भी झूलों की रेट नहीं बढ़ाई गई है। जितनी रेट गत वर्ष थी उतनी ही रखी गई है। 30-40 रुपए से लेकर 80 रुपए तक ही रेट है। </p>
<p><strong>नए झृूलों की रेट अधिक है</strong><br />वहीं मेला समिति के अध्यक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि मेला समिति की ओर से इस बार मेले में आवंटित दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया गया है। इसका मकसद मेले में आने वाले व्यापारियों के साथ ही आमजन पर आर्थिक भार नहीं बढ़ाना है। इस बार भी झूला संचालकों से पुरानी दर पर ही झूले संचालित करने को कहा गया है।  उन्होंने बताया कि इस बार मेले में कई नए व आकर्षक झूले भी लगेंगे जो पहली बार आएंगे। ये झूले बड़े होने से इनकी रेट सामान्य झूलों से कुछ अधिक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Sep 2025 14:51:59 +0530</pubDate>
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                <title>आजादी के बाद भी सीसी सड़क न होने से ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा</title>
                                    <description><![CDATA[पंचायत जनप्रतिनिधियों से जब भी उक्त कार्य संबंधी चर्चा की जाती है तो एक ही बात कही जाती है कि प्रस्ताव लिया हुआ है लेकिन अब तक भी प्रस्ताव पर अमल नहीं हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/even-after-independence--due-to-lack-of-cc-road--the-villagers-have-to-bear-the-brunt/article-33732"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/aazadi-k-baad-bhi-cc-sadak-na-hone-se-gramino-ko-bhugatna-par-raha-khamiyaja...dablana-news..bundi..30.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p> दबलाना। कस्बे में पंचायत की अनदेखी से चारभुजा मंदिर से बाल्मीकि बस्ती तक आजादी के बाद अब  तक भी सीसी सड़क निर्माण नहीं हुआ। ऐसे में ग्रामीणों को आवाजाही में मुश्किल हो रही है। क्षतिग्रस्त नालियां भी टूटी फूटी होने गंदगी फैली रहती है। पूर्व पंच सीताबाई राठौर व जगदीश राठौर ने बताया कि राज्य सरकार के 3 नवंबर 21 को प्रशासन गांवों के संग अभियान के तहत आयोजित शिविर में जिला प्रमुख चंद्रावती कंवर की मौजूदगी में शिविर प्रभारी से उक्त  स्थान पर सीसी सड़क व क्षतिग्रस्त नाली की पुनर्निर्माण की समस्या से लिखित में अवगत कराया गया था। तत्कालीन तहसीलदार ने मौके पर ही ग्राम विकास अधिकारी को बुलाकर ऐसे कार्यों को प्राथमिकता से करने की बात कही थी। 1 वर्ष 3 माह गुजरने के बाद भी शिविर में बताई गई समस्या का समाधान नहीं हुआ। 11 नवंबर 21 को भवानीपुरा पंचायत मुख्यालय पर आयोजित शिविर में शिविर प्रभारी व जिला प्रमुख की मौजूदगी में तत्कालीन विकास अधिकारी को बताने  पर उन्होंने कहा कि मामला प्रोसीडिंग में चल रहा है जबकि 3 वर्ष पहले बाल्मीकि बस्ती के समीप सीसी सड़क निर्माण के लिए गिट्टी फैलाई गई थी उसे आधे घंटे बाद ही वापस उठा लिया गया । चारभुजा मंदिर के समीप भी 3 वर्ष पहले तीन बार सीसी सड़क निर्माण के लिए खुदाई शुरू हुई और हाथों हाथ बंद हो गई।</p>
<p> इसी स्थान के निवासी हेमराज राठौर और नंदकिशोर राठौर ने बताया कि जब भी मौका आया। तब ही अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से सीसी सड़क निर्माण कार्य की मांग की जा रही है। शिविर में समस्या बताई जाने के बाद भी पंचायत की अनदेखी से सीसी  सड़क निर्माण कार्य की बात तो दूर है लेकिन क्षतिग्रस्त नालियों का पुनर्निर्माण भी नहीं हुआ। यह जगह प्रमुख मार्ग में शामिल होने से चौमुखा बाजार से जुड़ी हुई है। इस स्थान के चारों ओर सीसी सड़क बनी हुई है हालांकि कई जगह वह क्षतिग्रस्त हो रही है  तो कई जगह  नालियां भी टूटी फूटी है। पंचायत जनप्रतिनिधियों से जब भी उक्त कार्य संबंधी चर्चा की जाती है तो एक ही बात कही जाती है कि प्रस्ताव लिया हुआ है लेकिन अब तक भी प्रस्ताव पर अमल नहीं हुआ।</p>
<p> मौजूदा वार्ड पंच नसीम बानो ने कहा कि उक्त कार्य के लिए वार्ड सभा, ग्राम सभा, पंचायत कोरम  की बैठक में प्रस्ताव लिखवाने के साथ ही मौखिक रूप से भी कई बार सरपंच,ग्राम विकास अधिकारी से संबंधित कार्य को करने के लिए कहा गया है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />सीसी सड़क निर्माण और क्षतिग्रस्त नाली के पुनर्निर्माण कार्य को भी करवाएंगे। <br /><strong>- हरिओम शर्मा, ग्राम विकास अधिकारी, दबलाना ग्राम पंचायत</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Dec 2022 15:19:33 +0530</pubDate>
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                <title>एक साल बाद भी कागजों से बाहर नहीं आया जिला अस्पताल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने पिछले साल बजट में कोटा में नदी पार क्षेत्र में एक जिला अस्पताल खोलने की घोषणा की थी। स्वायत्त शासन मंत्री के निर्देश पर यूआईटी ने थर्मल कॉलोनी के सामने सकतपुरा में उस खाली जमीन को इसके लिए चिन्हित किया। जिसे हरी झंडी मिलने के बाद वहां नगर विकास न्यास ने जिला अस्पताल का बोर्ड भी लगा दिया है। बोर्ड लगने के बाद भी वहां अभी तक अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/district-hospital-did-not-come-out-of-paper-even-after-one-year/article-32238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/ek-saal-baad-bhi-kagazo-se-bahar-nahi-aaya-jila-asptaal..kota-news..13.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य सरकार द्वारा पिछले साल कोटा में नदी पार क्षेत्र में जिला अस्पताल बनाने की बजट में घोषणा तो कर दी थी। लेकिन अब दूसरा बजट आने वाला है। अभी तक तो यह धरातल पर नजर नहीं आया है। सिर्फ फाइलों में ही दौड़ रहा है। सरकारों द्वारा हर साल बजट में घोषणाएं तो कर दी जाती हैं। लेकिन उनमें से अधिकतर घोषणाओं को पूरा होने में कई -कई साल लग जाते हैं। एक साल में तो उस घोषणा पर काम तक शुरू नहीं हो पाता है। ऐसा ही एक मामला है जिला अस्पताल का। राज्य सरकार ने पिछले साल बजट में कोटा में नदी पार क्षेत्र में एक जिला अस्पताल खोलने की घोषणा की थी। यह जिला अस्पताल करीब 50 बैड का बनना है। बजट में घोषणा होने के बाद शहर के लोगों विशेष रूप से नदी पार क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल छा गया था। लोगों को उम्मीद लगी थी कि इस क्षेत्र में अस्पताल बनने से हजारों लोगों को लाभ होगा। लेकिन हालत यह है कि इस घोषणा को पूरा एक साल होने को है। नया बजट शीघ्र ही आने वाला है। इसके लिए मुख्यमंत्री द्वारा अलग-अलग वर्गों से चर्चा की जा रही है।  लेकिन एक साल पूरा होने के बाद अभी तक भी यह जिला अस्पताल जमीन पर नहीं उतर सका है। </p>
<p><strong>सकतपुरा में चिन्हित की जमीन</strong><br />नदी पार क्षेत्र में बनने वाले इस जिला अस्पताल के लिए बजट में घोषणा होने के साथ ही जमीन की तलाश शुरु हो गई थी। स्वायत्त शासन मंत्री के निर्देश पर यूआईटी ने थर्मल कॉलोनी के सामने सकतपुरा में उस खाली जमीन को इसके लिए चिन्हित किया। जिसे हरी झंडी मिलने के बाद वहां नगर विकास न्यास ने जिला अस्पताल का बोर्ड भी लगा दिया है। बोर्ड लगने के बाद भी वहां अभी तक अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। </p>
<p><strong>बजट व स्टाफ भी हुआ स्वीकृत</strong><br />बजट में घोषणा के बाद जिला अस्पताल के लिए बजट व स्टाफ भी स्वीकृत हो चुका है। करीब 57 करोड़ की लागत से अस्पताल का निर्माण किया जाना है। साथ ही डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ भी स्वीकृत कर दिया गया है। लेकिन वह  जिला अस्पताल तैयार होने के बाद ही कार्य कर पाएगा।</p>
<p><strong>सेटेलाइट व जिला अस्पताल</strong><br />अभी तक कोटा में  जिला अस्पताल के नाम पर रामपुरा स्थित सेटेलाइट अस्पताल ही है। पूर्व में यह सेटेलाइट अस्पताल था लेकिन अब इसे जिला अस्पताल घोषित कर दिया है। यह अस्पताल 100 बैड का स्वीकृत है। लेकिन फिलहाल यहां 50 बैड ही है। इस असपताल के विस्तार का काम शुरू हो गया है। इसके तैयार होने और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्रमाण पत्र मिलने के बाद यह 100 बैड का हो जाएगा। रामपुरा जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि रामपुरा स्थित सेटेलाइट  व जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज के अधीन है। जबकि नदी पार क्षेत्र में बनने वाला जिला अस्पताल सीएमएचओ के अधीन होगा। </p>
<p>नदी पार जिला अस्पताल अस्पताल की घोषणा पिछले साल बजट में हो गई थी। इसके बनने से इस क्षेत्र के हजारों लोगों को इसी क्षेत्र में बेहयतर चिकित्सा की सुविधा मिल सकेगी। हालांकि इसके लिए डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ स्वीकृत हो  चुका है। वह स्टाफ वर्तमान में कुन्हाड़ी हाउसिंग बोर्ड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कार्यरत है। जिला अस्पताल का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है।  <br /><strong>- अनिल सुवालका, पार्षद कुन्हाड़ी</strong></p>
<p>नदी पार सकतपुरा में जिला अस्पताल की पिछले साल बजट में घोषणा हो चुकी है। इसके लिए सकतपुरा में 17 हजार 790 वर्ग मीटर जमीन भो आवंटित हो गई है। उस जमीन का पट्टा बनाकर तैयार कर लिया है। यह पट्टा व इसके निर्माण से संबंधित दस्तावेज तैयार कर 15 दिन पहले ही नेशनल हैल्थ मिशन को सौंप दिया है। इसके लिए 57 करोड़ 82 लाख का बजट भी स्वीकृत हो गया है। नर्सिंग स्टाफ व डॉक्टर भी  स्वीकृत हो गया है। लेकिन जिला अस्पताल का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। यह कार्य टेंडर प्रक्रिया में है। <br /><strong>- डॉ. जगदीश सोनी, सीएमएचओ कोटा </strong></p>
<p>सकतपुरा में जिला अस्पताल का निर्माण नेशनल हैल्थ मिशन द्वारा किया जाएगा। अस्पताल निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने व सर्वे का काम निजी एजेंसियों द्वारा किया जा रहा है। यह काम पूरा होने के बाद उसके हिसाब से ही अस्पताल का निर्माण कार्य कराया जाएगा। अस्पताल की बिल्डिंग बनने में करीब एक से सवा साल का समय लगेगा। <br /><strong>- आशाराम मीणा, एक्सईएन, नेशनल हैल्थ मिशन कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Dec 2022 14:18:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>यह कैसा मर्ज है, अब दवाएं भी दे रही दर्द </title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस अस्पताल में भर्ती मरीजों को दवा नहीं मिलने पर 13 नंबर काउंटर दवा की सुविधा दे रखी है यहां दवाईयां नहीं मिलने पर बाहर से दवा लाने के लिए एनओसी जारी होती है। लेकिन विडंबना ये है कि इस काउंटर पर कोई फार्मास्टिट ही नहीं लगा रखा काउंटर कम्प्यूटर आॅपरेटरों के भरोसे चल रहा है । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-kind-of-a-merge-is-this-now-medicines-are-also-giving-pain/article-26306"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/yah-kaisa-marj-hai-,-ab-dawaye-bhi-de-rahi-dard...kota-news-12.10.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा मरीजों के जी का जंजाल बन रही है। सरकार की ओर से 864 नई दवाएं की स्वीकृति दी है। लेकिन अभी तक इन सप्लाई ड्रग हाउस में नहीं हुई जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है। डॉक्टर नई स्वीकृत दवाए पर्ची पर लिख रहे लेकिन अस्पताल में इसका स्टॉक नहीं होने से इसकी एनओसी देकर बाजार से दवा उपलब्ध कराई जा रही है। जिससे मरीजों को दवा के लिए घनचक्कर बनना पड़ रहा है। मौसमी बीमारियों की तादात बढ़ने से दवाओं की खपत बढ़ गई है। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल के हालात सुधारने का नाम ही नहीं ले रहे है। पहले मरीजों को डॉक्टर को दिखाने में मशक्कत करनी पड़ती है अब दवा का चक्कर मरीजों को मर्ज से ज्यादा दर्द दे रहा है। कहने को अस्पताल में मुख्यमंत्री दवा योजना के 10 से अधिक काउंटर हैं लेकिन इन काउंटरों के खुलने का समय और बंद होने का समय अलग होने से मरीजों को घंटों लाइन में खड़ा होना मजबूरी बनता जा रहा है। कई दवा काउंटर तो अस्पताल के बंद होने से पहले ही बंद हो जाते हैं ऐसे में खुले हुए दवा काउंटरों पर मरीजों तादात बढ़ जाती है जिससे मरीजों दवा लेने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।  सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क दवाओं की सुविधा तो कर दी लेकिन मरीजों को वहां दवा काउंटरों पर उपलब्ध ही नहीं हो रही है। एमबीएस में एक ही काउंटर पर दवा दी जा रही है वहां भी आधी दवाओं के लिए एनओसी जारी की जा रही है। जिसके लिए मरीजों व तीमारदारों को इधर से उधर चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सालभर में जिले में 8 से 10 लाख टैबलेट की खपत होती है, मौसमी बीमारियों के दौरान खपत बढ़ जाती थी। कोविड के में यह आंकड़ा दो साल में 16 लाख 80 हजार तक पहुंच गया था। मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर हाउस से अप्रैल 2020 से 2022  तक पेरासिटा मोल की 500 एमजी की 8 लाख 80 हजार और 250 एमजी की 8 लाख 80 हजार टैबलेट खपत हो चुकी है। मेडिकल व्यवसायियों अनुसार कोविड में 20 लाख टैबलेट की खपत हुई है। अभी पेरासिटा मोल, खांसी की दवाई और एजिथ्रोमाइसीन की डिमांड ज्यादा है।</p>
<p><strong>अस्पताल बंद होने के पहले ही सात दवा काउंटर हो जाते बंद</strong><br />अंता निवासी धनराज ने बताया कि अस्पताल में बने दवा काउंटर के खुलने और बंद होने के समय अलग अलग होने से मरीजों को परेशानी का समाना करना पड़ रहा है। सुबह अस्पताल खुलने के साथ ही सभी दवा काउंटर खुल जाते है लेकिन 2 बजे तक एक से लेकर सात काउंटर एक -एक कर बंद होने लगते है। दो बजे तक एनओसी व एक दवा काउंटर से चलता है। ऐसे में इमरजेंसी से लेकर 3 बजे तक डॉक्टरों दिखाने वाले मरीज दवा लेने के के लिए मशक्कत करते नजर आते है। ऐसा किसी एक दो मरीज के साथ नहीं होता है। कई मरीजों के साथ हुआ। जिससे मरीज परेशान होते रहे। कई मरीज तो गर्मी के कारण थक हार कर अस्पताल में जमीन पर ही बैठ गए। शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीज अधिक  परेशान हुए। मरीजों का कहना था कि सरकार ने दवा तो नि:शुल्क कर दी है। लेकिन व्यवस्था इतनी जटिल कर दी है कि उससे पार पाना मुश्किल हो रहा है। दवाई के लिए चक्कर घिन्नी होने से झुंझलाहट भी होने लगी। इन व्यवस्थाओं के चलते दवा काउंटर, आउटडोर में डॉक्टर को दिखाने और एनओसी जारी करवाने के लिए मरीजों व तीमारदारों की भीड़ लग गई। 2 बजे से 3 बजे तक काउंटर नंबर 9 व 10 ही खुले हुए थे जिसमें मरीजों की दवा लेने के लिए लंबी कतारे लगी हुई थी। </p>
<p><strong>लंबी कतार में घंटों खड़े रहने का दर्द अब आम हो गया</strong><br />शहर के कालातालाब निवासी 62 साल की वंदना ने बताया कि उसके सिर की नस में परेशानी होने से न्यूरोलॉजी विभाग में दिखाया वहां से दवा लेने के लिए काउंटर पर पहुंची तो एक घंटा लाइन में खड़ी रही उसके बाद मेरा नंबर आया छह दवा में दो दवा ही मिली चार दवा नहीं मिली। दवा काउंटर वाले ने बताया कि बाकी दवा की एनओसी लेकर बाहर से लेनी पड़ेगी अभी सप्लाई नहीं आ रही है। एमबीएस में नि:शुल्क दवा लेना आसान काम नहीं है। </p>
<p><strong>इंडोर मरीजों के लिए 13 नंबर काउंटर बना परेशानी का सबब</strong><br />एमबीएस अस्पताल में भर्ती मरीजों को दवा नहीं मिलने पर 13 नंबर काउंटर दवा की सुविधा दे रखी है यहां दवाईयां नहीं मिलने पर बाहर से दवा लाने के लिए एनओसी जारी होती है। लेकिन विडंबना ये है कि इस काउंटर पर कोई फार्मास्टिट ही नहीं लगा रखा काउंटर कम्प्यूटर ऑपरेटरों के भरोसे चल रहा है । ऐसे में यहां दो बजे बाद मरीजों की दवा और एनओसी लेने के लिए लंबी कतारे लगी रहना आम बात है। </p>
<p><strong>एनओसी लेना नहीं है आसान</strong><br />रोटेडा निवासी 86 वर्षीय शमशुद्दीन ने बताया वो बीपी, शुगर और थाइराईड की दवा लेने के लिए एक घंटे तक दवा की लाइन में लगा लेकिन सात दवाओं में तीन दवाए ही मिली। चार दवाओं के लिए एनओसी बनाने के लिए इधर उधर चक्कर काटने में समय पूरा हो गया । ऐसे ही कई मामले मंगलवार को एमबीएस अस्पताल में देखने को मिले। मंगलवार को बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। पहले पर्ची बनवाने की कतार में इंतजार व मशक्कत, उसके बाद आउटडोर में डॉक्टर को दिखाने की कतार में जैसे-तैसे नम्बर आ  गया। उसके बाद डॉक्टर द्वारा पर्ची पर लिखी गई दवाई लेने के लिए जब मरीज व तीमारदार दवा काउंटर पर गए तो उन्हें 13 नम्बर काउंटर पर भेजा गया। वहां जाने पर आधी ही दवा उपलब्ध थी। जबकि आधी दवा के लिए उन्हें एनओसी जारी की जा रही है। लेकिन एनओसी के लिए पहले उसी डॉक्टर से हस्ताक्षर करवाने, उप अधीक्षक के हस्ताक्षर करवाने और फिर उस पर्ची की दो जेरोक्स करवाकर लाने की मशक्कत करनी पड़ रही है। </p>
<p>सरकार की ओर से 864 दवाए स्वीकृत कर रखी है। अभी नई स्वीकृत दवाओं का स्टॉक नहीं आया है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अस्पताल में एनओसी काटकर मरीजों को दवाए उपलब्ध कराई जा रही है। मौसमी बीमारियों के मरीज बढ़ने से दवाओं की खपत बढ गई है। पुरानी स्वीकृत दवाओं की सप्लाई नियमित हो रही है लेकिन खपत ज्यादा होने से बहुत सी दवाओं का स्टॉक खत्म हो गया है। नई दवाओं का स्टॉक आने में अभी एक माह लगेगा। <br /><strong>- सुशील सोनी, प्रभारी औषधी भंडार कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Oct 2022 14:39:22 +0530</pubDate>
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                <title>अपने लक्ष्य की ओर भाला फेंक रहे खिलाड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा में भाला फेंक के खिलाड़ी सुविधाओं के अभाव में तैयार हो रहे है और आगे बढ़ रहे है। यह खिलाड़ी नीरज चौपड़ा को अपना रोल मॉडल मानते है। खिलाड़ी उन्ही की तरह भाला फेंकने की तैयारी कर रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/kota-players-throwing-javelin-towards-their-target/article-21348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/46546545.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। इनके पास न तो जेवलिन है और न ही ढ़ग के जूते। इसके बावजूद भी यह खिलाड़ी 40 से 50 मीटर तक भाला फेंक देते है। अपने इसी जज्बे और कड़ी मेहनत के कारण कोटा के भाला फेंकने वाले नेशनल प्रतियोगिता में जा पहुचें और गोल्ड मेडल में भी जीत लिए। अब यही जुनूनी खिलाड़ी इंडिया के लिए खेलने की तैयारी में जुटे हुए है। ये खिलाड़ी रोजाना जेके पवेलियन अंतरराष्टÑीय खेल मैदान में रोजाना पसीना बहा रहे है। कोटा के यह खिलाड़ी नीरज चौपड़ा को अपना रोल मॉडल आर्दश मानते है। खिलाड़ियों ने नीरज की डीपी भी अपने फोन में लगा रखी है। इसके साथ ही इन खिलाड़ियों ने नीरज की अनेक फोटो से अपना घर सजाया हुआ है। यह खिलाड़ी उन्ही की तरह भाला फेंकने की तैयारी कर रहे है। </p>
<p><strong>सुविधाओं का अभाव,फिर भी तैयार हो रहे खिलाड़ी</strong><br />कोटा में भाला फेंक के खिलाड़ी सुविधाओं के अभाव में तैयार हो रहे है और आगे बढ़ रहे है। खिलाड़ियों के पास जेवलिन तक नहीं है। खिलाड़ियों का कहना है की कोटा में भाला फेंक खेल के लिए कोई मैदान भी नहीं है। खिलाड़ियों को मजबूरी में जेके पवेलियन खेल मैदान के एक कोने में इसका अभ्यास करना पड़ रहा है। इसके साथ ही खिलाड़ियों को किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नहीं मिल रही। इसको लेकर खिलाड़ियों में निराशा देखने को मिलती है।</p>
<p><strong>भाला फेंक पसंदीदा खेल</strong><br />भाला फेंक कोटा के युवाओं का पसंंदीदा खेल बन रहा। खिलाड़ियों का कहना है की पहले भाला फेंक को कोई नहीं जानता था। लेकिन जब से नीरज चौपड़ा ने गोल्ड मेडल जीता है तब से युवाओं में इसको लेकर रुझान देखने को मिल रहा है। कोटा में भाला फेंक के करीब एक सौ से अधिक खिलाड़ी इसकी ट्रेनिग ले रहे है। इसके साथ ही इस खेल में कोटा की युवतियां भी आगे निकलकर आ रही है। भाला फेंक में कोटा के दलजीत सिंह ने 60 मिटर तक भाला फेंककर नेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाई है। इसके साथ ही भुवनेश कुमावत, राधे मीणा, शिवम भी नेशनल लेवल पर खेल चुके है। </p>
<p>कोटा के खिलाड़ियों को अगर दूसरे खेलों की तरह सुविधाएं मिले तो यह खिलाड़ी देश के लिए गोल्ड मेडल ला सकते है। पर विडबंना यह है की सुविधाएं तो बाद में लेकिन अभी खिलाड़ियों के पास अभ्यास करने के लिए मैदान तक नहीं है। ऐसे में इन खिलाड़ियों को दूसरे खेल के मैदानों में जाकर अभ्यास करना पड़ता है। सरकार को व खेल विभाग को इसकी ओर ध्यान देना चाहिए।         <br /><strong>-श्याम बिहारी नाहर, कोच</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Sep 2022 13:01:02 +0530</pubDate>
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                <title>आग जनित घटना होने पर बचाव के नहीं हैं पुख्ता इंतजाम</title>
                                    <description><![CDATA[शहर की बहुमंजिला इमारतों, आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में फायर उपकरणों की जांच कर एनओसी जारी करने वाले नगर निगम के दशहरा मैदान में ही आग से बचाव के पूरे इंतजाम नहीं हैं। यहां सीमित जगह पर ही फायर उपकरण लगे हुए हैं। जबकि दशहरा मेले के अवसर पर मैदान में लाखों की भीड़ जुटती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-are-no-adequate-arrangements-for-rescue-in-case-of-fire-incident/article-19965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/aag-janit-ghatna-hone-par-bachaav-ke-nahi-intajaam..kota-news-22.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर की बहुमंजिला इमारतों, आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में फायर उपकरणों की जांच कर एनओसी जारी करने वाले नगर निगम के दशहरा मैदान में ही आग से बचाव के पूरे इंतजाम नहीं हैं। यहां सीमित जगह पर ही फायर उपकरण लगे हुए हैं। जबकि दशहरा मेले के अवसर पर मैदान में लाखों की भीड़ जुटती है। कोरोना काल के दो साल बाद इस बार दशहरा मेले का आयोजन किया जा रहा है। नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण द्वारा संयुक्त रूप से मेले का आयोजन किया जाएगा। दो साल बाद मेला भरने से इस बार मेले में अधिक लोगों के आने की भी संभावना है। आमतौर पर रावण दहन, सिने संध्या और समापन के अवसर पर एक ही दिन में लाखों लोग एक साथ मैदान में रहते हैं। जबकि अन्य दिनों में भी यह संख्या हजारों में रहती है। नगर निगम कार्यालय के पास स्थित दशहरा मैदान में जहां हर साल मेले का आयोजन किया जाता है। वहां आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम तक नहीं हैं। कोटा दक्षिण महापौर ने उठाया था मुद्दा नगर निगम की मेला समिति की गत दिनों हुई बैठक में कोटा दक्षिण के महापौर व मेला समिति सदस्य राजीव अग्रवाल ने दशहरा मैदान में आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि मैदान के हिसाब से वहां आग से बचाव के जितने इंतजाम होने चाहए वे नहीं है। साथ ही जिस जगह पर फायर उपकरण व हाइडेंट लगे हुए हैं वे चौड़े रास्ते और सिर्फ सीमित स्थान पर ही लगे हुए हैं। जिससे पूरे मैदान को कवर नहीं किया जा सकता। इस पर उन्होंने सुझाव दिया कि मेले से पहले ही लाइन को बढ़ाया जाए। जिसे मैदान के आखिरी छोर तक पहुंचाया जाए। जिससे कभी भी जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग किया जा सके और किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सके। इन स्थानों पर ही लगे फायर उपकरण स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 80 करोड़ की लागत से बने इस मैदान में श्रीराम रंगमंच और विजयश्री रंगमंच के आस-पास ही फायर हाइडेंट लगे हुए हैं। जिससे मैदान में आग जनित घटना होने पर एक सीमित स्थान तक ही आग बुझाई जा सकती है। जबकि मैदान में चाहे झूला मार्केट हो या खिलौना बाजार, वहां आग बुझाने के लिए किसी तरह के फायर उपकरण लगे हुए हैं। हालांकि दशहरा मेले के दौरान नगर निगम की ओर से मैदान में दमकलों की व्यवस्था की जाती है। लेकिन मैदान में भीड़ अधिक होने पर दमकल भी नहीं निकल पाएगी। दशहरा मेला दो साल बाद भर रहा है। इसमें लोगों की भीड़ इस बार काफी अधिक रहेगी। ऐसे में मेले में आने वाले लोगों और दुकानदारों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा। इसके लिए सुझाव दिया है कि मैदान में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम हों। फायर हाउडेंट के पाइप बढ़ाने व उपकरणों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। वर्तमान में लगे उपकरणों से सीमित जगह पर ही आग बुझाई जा सकती है। पूरे मैदान को कवर करते हुए आग से बचाव के इंतजाम किए जाएंगे। - राजीव अग्रवाल, महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण मेला समिति की पहली बैठक हुई है। उसमें जो सुझाव व कमियां सामने आई हैं उन पर विचार कर सुधार भी किया जाएगा। शीघ्र ही दोबारा बैठक होगी। मैदान में फायर उपकरणों की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए दोनों निगमों के फायर आॅफिसर को निर्देशित कर दिया है। -मंजू मेहरा, महापौर नगर निगम कोटा उत्तर</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Aug 2022 16:42:27 +0530</pubDate>
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                <title>हाड़ौती के सात कॉलेजों में नहीं होंगे छात्रसंघ चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के 7 नए महाविद्यालयों में इस बार छात्रसंघ चुनाव नहीं होंगे। हालांकि, कक्षा प्रतिनिधि चुने जाएंगे। इनमें 5 राजकीय कन्या आर्ट्स व 2 कृषि महाविद्यालय शामिल हैं, जो 1 कोटा और 6 कॉलेज बारां जिले में संचालित हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/student-union-elections-will-not-be-held-in-seven-colleges-of-hadoti/article-19707"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/hadoti-k-7-colleges-mei-nahi-honge-chunav..kota-news-20.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा यूनिवर्सिटी सहित 34 कॉलेजों में जहां एक ओर छात्रसंघ चुनाव का उत्साह चरम पर है। छात्रों की रौनक से कैम्पस गुलजार है वहीं, कुछ महाविद्यालयों में सन्नाटा पसरा है। दरअसल, हाड़ौती के 7 नए महाविद्यालयों में इस बार छात्रसंघ चुनाव नहीं होंगे। हालांकि, कक्षा प्रतिनिधि चुने जाएंगे। इनमें 5 राजकीय कन्या आर्ट्स व 2 कृषि महाविद्यालय शामिल हैं, जो 1 कोटा और 6 कॉलेज बारां जिले में संचालित हैं। सातों महाविद्यालयों को मिलाकर कुल 1120 सीटें हैं। एक कोटा में तो बारां में खुले छह नए कॉलेज बजट सत्र 2022 व 23 में सरकार ने प्रदेश में कुल 163 नए कन्या महाविद्यालय खोले हैं। जिसमें से हाड़ौती को 5 कॉलेज मिले हैं। इनमें 1 कोटा में तथा 4 बारां जिले में संचालित हो रहे हैं। इसके कुछ दिनों बाद ही बारां जिले में 2 कृषि कॉलेज भी खोल दिए। वर्तमान में सभी 5 कॉलेजों में प्रथम वर्ष के छात्रों को एडमिशन दिया गया है। वहीं, कृषि महाविद्यालयों में जेट एंटेंÑस एग्जाम के बाद ही एडमिशन दिए जाएंगे। इसलिए नहीं होंगे चुनाव कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के सहायक निदेशक डॉ. रघुराज परिहार ने बताया कि संभाग के सभी नवीन महाविद्यालय अभी शुरुआती चरण में हैं। लिंगदोह कमेटी की सिफारिश के मुताबिक नए कॉलेजों के संचालन को एक साल पूरा होने के बाद ही छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसमें भी केवल संयुक्त सचिव व उपाध्यक्ष पद के लिए ही चुनाव का आयोजन किया जाएगा। वहीं, कॉलेज के तीन साल पूरे होने पर पूर्ण रूप से छात्रसंघ चुनाव करवाएं जा सकेंगे और अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, संयुक्त सचिव, महासचिव पद के लिए उम्मीदवार चुनाव लड़ सकेंगे। वहीं, बारां जिले में खुले 2 नवीन कृषि महाविद्यालय बारां शहर व शाहबाद में खुले हैं, जिनमें अभी प्रथम वर्ष के लिए एडमिशन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। यहां जेट के माध्यम से इंट्रेंस एग्जाम शुरू होंगे। जिसमें सफल होने के बाद ही विद्यार्थियों को प्रवेश मिल सकेगा। कक्षा प्रतिनिधि चुनाव में छात्र नहीं दिखाते रुचि कॉलेजों में कम से कम 30 व अधिकतम 40 विद्यार्थियों पर एक कक्षा प्रतिनिधि चुना जाता है। कक्षा प्रतिनिधि को छात्र जीवन में दो बार चुनाव लड़ने का मौका दिया जाता है। इसके बावजूद छात्र कक्षा प्रतिनिधि चुनाव में रुची नहीं दिखाते। इसकी वजह यह है कि स्टूडेंट्स छात्रसंघ अध्यक्ष, महासचिव व उपाध्यक्ष व संयुक्त सचिव के लिए ही चुनाव लड़ना पसंद करते हैं। ऐसे में वे कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव लड़कर अवसर नहीं खोना चाहते। पांचों नवीन महाविद्यालयों में चुने जाएंगे कक्षा प्रतिनिधि संभाग में खुले 7 नवीन महाविद्यालयों में से 1 रामपुरा कन्या आर्ट्स कोटा में संचालित हो रहा है। जबकि, बारां जिले में कुल 6 नए कॉलेज खोले गए हैं, जिनमें 4 आर्ट्स कॉलेज हैं, उसमें राजकीय कन्या महाविद्यालय नाहरगढ़, छबड़ा, अटरू व राजकीय कन्या महाविद्यालय केलवाड़ा शामिल हैं। वर्तमान में इन कॉलेजों में प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया है। यहां इस बार छात्रसंघ चुनाव नहीं होंगे लेकिन कक्षा प्रतिनिधि चुने जाएंगे। इसमें भी दो आॅप्शन है, पहला-कक्षा प्रतिनिधि निर्विरोध चुन लिया जाए, दूसरा- कक्षा में एक से अधिक कक्षा प्रतिनिधि उम्मीदवार हो तो फिर चुनाव करवाए जाएंगे। एक साल पूरा होना जरूरी है कोटा व बारां में खुले नवीन महाविद्यालयों में इस वर्ष छात्रसंघ चुनाव नहीं होंगे। लेकिन, छात्र प्रतिनिधि चुने जाएंगे। लिंगदोह कमेटी की सिफारिश के मुताबिक छात्रसंघ चुनाव करवाने के लिए संबंधित कॉलेज को संचालित हुए एक साल पूरा होना जरूरी है। दूसरे साल में चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिसमें उम्मीदवार केवल उपाध्यक्ष व संयुक्त सचिव पद के लिए ही चुनाव लड़ सकता है। कॉलेज का तीसरा साल पूरा होने पर ही पूर्ण छात्रसंघ चुनाव का आयोजन किया जा सकता है और छात्र अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव व संयुक्त सचिव पद के लिए चुनाव लड़ सकता है। - डॉ. रघुराज सिंह परिहार, सहायक निदेशक कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/student-union-elections-will-not-be-held-in-seven-colleges-of-hadoti/article-19707</link>
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                <pubDate>Sat, 20 Aug 2022 15:59:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अध्यापिका के नदारद रहने से नहीं खुला स्कूल </title>
                                    <description><![CDATA[आवर क्षेत्र की ग्राम पंचायत गुराडिया कलां के हात्या गौड़ गांव में विद्यालय में 9 बजे तक अध्यापक नहीं पहुंचे। जिससे विद्यालय में गांव के लोग इकट्ठे हो गए।  विद्यालय में कार्यरत प्रधानाध्यापक 6 दिन की ट्रेनिंग में भवानीमंडी उपस्थित है तथा स्थानीय विद्यालय में प्रतिनियुक्ति पर लगाई गई अध्यापिका  बिना सूचना के विद्यालय से नदारद रहने से विद्यालय नहीं खुल सका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/the-school-did-not-open-due-to-the-absence-of-the-teacher/article-14324"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/adhyapika.jpg" alt=""></a><br /><p>आवर। आवर क्षेत्र की ग्राम पंचायत गुराडिया कलां के हात्या गौड़ गांव में विद्यालय में 9 बजे तक अध्यापक नहीं पहुंचे। जिससे विद्यालय में गांव के लोग इकट्ठे हो गए। विद्यालय में कार्यरत प्रधानाध्यापक शेरू निशा 6 दिन की ट्रेनिंग में भवानीमंडी उपस्थित है तथा स्थानीय विद्यालय में प्रतिनियुक्ति पर लगाई गई अध्यापिका मानवेंद्र मीणा बिना सूचना के विद्यालय से नदारद रहने से विद्यालय नहीं खुल सका। जिस पर विद्यालय में उपस्थित ग्रामीणों ने बताया कि मानवेंद्र मीणा अक्सर विद्यालय में देर से आती है और रोजाना गुराडिया कलां विद्यालय में जाने का बहाना बनाकर जल्दी चली जाती है और अधिकांश समय विद्यालय में रहते हुए भी फ ोन पर बातें करती रहती है। बच्चों को नहीं पढ़ाती। बच्चों का भविष्य अंधकार में हो रहा है। वही 3 वर्ष पूर्व स्थानीय विद्यालय में पूजा मीणा अध्यापिका की स्थाई नियुक्ति हुई थी। मगर वह भी 3 वर्षों से भवानी में प्रतिनियुक्ति पर लगा रखी अधिकारी को शिकायत करने पर ग्रामीणों को समझाकर वापस भेज दिया जाता है। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों के द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।<br /><br /> 3 वर्ष से पूजा मीणा अध्यापिका की प्रतिनियुक्ति की जानकारी मिली जिस पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी निर्मला मेहरा के फ ोन लगाया गया मगर फ ोन स्विच आॅफ होने के कारण कोई जानकारी नहीं मिल सकी।<br /><strong>- निर्मला मेहरा, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी भवानीमंडी।</strong> <br /><br />मैं बीमार होने के कारण छुट्टी पर हूं। हत्यागौड विद्यालय बंद होने की जानकारी मिली। मैंने फ ोन पर बात कर विद्यालय में अध्यापक भेज दिया गया। बिना सूचना के विद्यालय से नदारद रहने वालों के खिलाफ  उचित कार्यवाही की जाएगी।<br /><strong>- पीरुलाल हरोकी, पीईओ, गुराडिया कलां। </strong><br /><br /> सुबह 9 बजे तक विद्यालय न खुलने के कारण बच्चे विद्यालय के बाहर खेलते नजर आए। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों द्वारा विद्यालय ना खोलने की शिकायत की। जिस पर तुरंत अधिकारियों से संपर्क कर विद्यालय में अध्यापक लगाने एवं बिना बताए विद्यालय से नदारद रहने वालों के खिलाफ  सख्त कार्यवाही की मांग की गई।  <br /><strong>- भागवत भाई, सरपंच, ग्राम पंचायत गुराडिया कलां। </strong><br /><br /> मेरे द्वारा आॅनलाइन छुट्टी ली गई है। इसके अलावा मैंने पीईओ कार्यालय में छुट्टी के लिए एप्लीकेशन दी है।  <strong>- मानवेंद्र मीणा, अध्यापिका। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jul 2022 16:40:45 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title> 'मैं रहूं या न रहूं ये देश रहना चाहिए- अटल' बड़े पर्दे पर आएगी नजर, पंकज त्रिपाठी निभायेंगे अटल बिहारी वाजपेयी का किरदार</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी सिल्वर स्क्रीन पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का किरदार निभते नजर आ सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/whether-i-stay-or-not--this-country-should-remain--atal-will-be-seen-on-the-big-screen--pankaj-tripathi-will-play-the-character-of-atal-bihari-vajpayee/article-13916"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/att.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी सिल्वर स्क्रीन पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का किरदार निभते नजर आ सकते हैं।<br /><br />पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर एक फिल्म बनायी जा रही है,जिसका टाइटल 'मैं रहूं या न रहूं ये देश रहना चाहिए- अटल' है। अटल बिहारी वाजपेयी के ऊपर बन रही फिल्म के लिए मेकर्स ऐसे चेहरे को तलाश रहे थे कि जो बिल्कुल उनके रोल में फिट बैठ सके। चर्चा है कि पंकज त्रिपाठी , इस फिल्म में अटल बिहारी वाजपेयी का रोल करेंगे। अटल बिहारी वाजपेयी की इस फिल्म को विनोद भानुशाली, संदीप सिंह, सैम खान, कमलेश भानुशाली और विशाल गुरनानी को प्रोड्यूस करेंगे। यह फिल्म अटल बिहारी वाजपेयी पर लिखी गई किताब 'द अनटोल्ड वाजपेयी' पर आधारित होगी। यह एक पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म है, जिसकी शूटिंग अगले साल की शुरुआत में शुरू की जाएगी।इस फिल्म को अगले साल अटल बिहारी वाजपेयी की 99वीं जयंती 25 दिसंबर के मौके पर रिलीज किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jul 2022 17:07:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश में इंग्लिश मीडियम स्कूलों की संख्या बढ़ी, नहीं मिल रहे शिक्षक</title>
                                    <description><![CDATA[ जयपुर। प्रदेश में 559 महात्मा गांधी अंग्रेजी मीडियम सरकारी स्कूल खुले हुए हैं। इस सत्र में प्रदेश के 211 और सरकारी स्कूलों को महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में परिवर्तित किया गया है, जिन में प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के साथ नौ जुलाई से इनका संचालन शुरू होगा, लेकिन समस्या ये है कि जहां पहले से संचालित 559 अंग्रेजी स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/number-of-english-medium-schools-increased-in-the-state--teachers-are-not-available/article-13902"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/school.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। प्रदेश में 559 महात्मा गांधी अंग्रेजी मीडियम सरकारी स्कूल खुले हुए हैं। इस सत्र में प्रदेश के 211 और सरकारी स्कूलों को महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में परिवर्तित किया गया है, जिन में प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के साथ नौ जुलाई से इनका संचालन शुरू होगा, लेकिन समस्या ये है कि जहां पहले से संचालित 559 अंग्रेजी स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। वहीं नएा खुले स्कूलों में अभी तक एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं हो पाई है, जिस कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। ये परिस्थितियां राज्य सरकार की बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को ठेंगा दिखा रही हैं। <br /><br /><strong>770 तक हुए विद्यालय</strong> <br />इस सत्र खुले नए अंग्रेजी मीडियम स्कूलों के खुलने से इनकी संख्या 770 तक पहुंच गई है। शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला ने कहा कि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में जल्द शिक्षक लगाए जाएंगे। उन्होंने 10 हजार शिक्षकों को लगाने की बात कही हैं। ऐसे में जहां 559 स्कूलों में सत्र की शुरुआत हो चुकी है और 211 स्कूलों में नौ जुलाई से क्लासेज शुरू होंगी। ऐसी स्थिति में बिना शिक्षकों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।<br /><br /><strong>स्कूलों में 20 से 40 फीसदी शिक्षकों के पद खाली</strong><br />शिक्षक नेताओं का कहना है कि शुरुआती दौर में खुले अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में अनुभवी शिक्षकों को साक्षात्कार की व्यवस्था के बाद नियुक्ति दी गई। हालांकि अगले कुछ चरणों तक खुले स्कूलों में ये व्यवस्था काफी सही रही, लेकिन शिक्षा विभाग अब बिना किसी तैयारी के लगातार इन स्कूलों की संख्या बढ़ाता जा रहा है। पिछले दिनों खुले इन स्कूलों में करीब 20 से 40 फीसदी  शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। वहीं शिक्षा विभाग जल्द ही 10 हजार पदों पर साक्षात्कार की बात करीब दो महीनों से दोहरा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jul 2022 15:09:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नहीं बच पाई शिंजो आबे की जान, नारा शहर में भाषण के दौरान मारी गई गोली </title>
                                    <description><![CDATA[टोक्यो। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे पर हमले के बाद इलाज के दौरान उनका निधन हो गया है। डॉक्टर्स लगातार उनकी रिकवरी के लिए प्रयास कर रहे थे। शिंजो आबे को गोली लगने के बाद उन्हें हार्ट अटैक आया था। इलाज के लिए उन्हें हेलिकॉप्टर से अस्पताल ले जाया गया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/shinzo-abe-s-life-could-not-be-saved--shot-during-speech-in-nara-city/article-13898"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/tt1.jpg" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे पर हमले के बाद इलाज के दौरान उनका निधन हो गया है। डॉक्टर्स लगातार उनकी रिकवरी के लिए प्रयास कर रहे थे। शिंजो आबे को गोली लगने के बाद उन्हें हार्ट अटैक आया था। इलाज के लिए उन्हें हेलिकॉप्टर से अस्पताल ले जाया गया था। हालांकि आबे को जब अस्पताल ले जाया गया था तब उस समय आबे की, जो हालत है। उसमें जीवन के कोई लक्षण नजर नहीं आ रहे थे। उन्हें गोली लगने से कार्डियक अरेस्ट हुआ था।</p>
<p>जापान के पूर्व प्रधानमंत्री  शिंजो आबे की शुक्रवार को यहां एक अधेड़ उम्र के पूर्व नौसैनिक ने गोली मार कर हत्या कर दी। क्योतो के निकट नारा शहर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते समय 41 वर्षीय हमलावर ने बंदूक से आबे को नजदीक से गोली मार दी जिससे वह नीचे गिर गये। बाद में सुरक्षा अधिकारियों को पता चला कि उन्हें गोली मारी गयी है। हालांकि इस पूरे मामले में पुलिस ने यमातोसैदाईजी स्टेशन के पास एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। वहीं गोली लगने से लहुलूहान आबे को तत्काल निकट के अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार  आबे के शरीर में जीवन के लक्षण नहीं दिख रहे थे लेकिन करीब छह घंटे तक उन्हें जीवित करने की कोशिशें जारी रहीं।<br /><br />देश के प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा अपने सरकारी कार्यक्रम रद्द करके तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और आबे के उपचार की पल-पल की जानकारी लेते रहे। उन्हें भारी मन से राष्ट्र को इस बारे में अवगत भी कराया। जापान टाइम्स के अनुसार छह घंटे की जद्दोजहद के बाद डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिये और अधिकारियों ने आबे के निधन की पुष्टि कर दी।</p>
<p><strong>शिंजो आबे के निधन पर भारत में कल राष्ट्रीय शोक</strong><br />जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी सहित कई गणमान्यों ने शोक जताया है। भारत में शिंजो आबे के निधन पर कल शनिवार को एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 08 Jul 2022 14:33:17 +0530</pubDate>
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