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                <title>mutual cooperation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जयपुर में 69,400 करोड़ रुपये का एयूएम, राजस्थान के 1.64 लाख करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड एसेट्स में 42% की हिस्सेदारी </title>
                                    <description><![CDATA[एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया ने आज राजस्थान के म्यूचुअल फंड इकोसिस्टम में जयपुर की अहम भूमिका पर जोर दिया और शहर के निवेशकों को म्यूचुअल फंड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बढ़ावा दिया, ताकि यह एक अनुशासित, लंबे समय तक पैसा बनाने का जरिया बन सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipurs-aum-of-rs-69400-crore-rajasthans-share-of-42/article-150402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(11).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) ने आज राजस्थान के म्यूचुअल फंड इकोसिस्टम में जयपुर की अहम भूमिका पर जोर दिया और शहर के निवेशकों को म्यूचुअल फंड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बढ़ावा दिया, ताकि यह एक अनुशासित, लंबे समय तक पैसा बनाने का जरिया बन सके। ए एम एफ आई के सीईओ वेंकट चेल्सानी ने बताया कि एएमएफआई के अनुसार, फरवरी 2026 तक राजस्थान में कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) 1,64,425 करोड़ रुपये हैं, जो भारत के कुल म्यूचुअल फंड एयूएम का लगभग 2% है। राज्य में निवेशकों का आधार लगातार बढ़ रहा है और यहां 1.10 करोड़ से अधिक म्यूचुअल फंड फोलियो हैं।</p>
<p>राज्य के भीतर जयपुर सबसे बड़ा म्यूचुअल फंड हब बनकर उभरा है, जहां 69,400 करोड़ रुपये का एयूएम है, जो राजस्थान के कुल एयूएम का 42% है—जो राज्य के सभी शहरों में सबसे अधिक योगदान है। शहर में 30.17 लाख से अधिक म्यूचुअल फंड फोलियो हैं, जो खुदरा निवेशकों की मजबूत और बढ़ती भागीदारी को दर्शाते हैं। अन्य शहर जैसे उदयपुर (15,725 करोड़ रुपये) और जोधपुर (13,119 करोड़ रुपये) भी राज्य के म्यूचुअल फंड परिदृश्य में योगदान देते हैं, हालांकि एयूएम और निवेशकों की संख्या के मामले में जयपुर स्पष्ट रूप से सबसे आगे है। राज्य स्तर पर, राजस्थान भारत के कुल म्यूचुअल फंड फोलियो में लगभग 4% का योगदान देता है, जो राष्ट्रीय निवेश पारिस्थितिकी तंत्र में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 16:17:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>भारत और नेपाल के बीच होने जा रहा बड़ा समझौता: ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने के लिए म्युचुअल लीगल असिस्टेंस करार तैयार, चुनाव से पहले होंगे हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[भारत-नेपाल के बीच एमएलए समझौता जल्द साइन होगा। यह ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने, जांच, सबूत साझा करने और कानूनी सहयोग को मजबूत करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/a-big-agreement-is-going-to-be-signed-between-india/article-142401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(2)7.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। भारत और नेपाल के बीच कानूनी सहायता को लेकर एक बड़ा समझौता होने जा रहा है। करार तैयार हो चुका है अब दोनों देशों के अधिकारी समझौते पर साइन करने के लिए तारीख तय कर रहे हैं। इस कानून पर पिछले साल जुलाई में नई दिल्ली में गृह सचिव स्तर की बैठक के दौरान सहमति बनी थी। नेपाली मीडिया ने बताया है कि कई वर्षों की बातचीत के बाद इस समझौते पर दोनों देश पहुंचे हैं, जिससे पता चलता है कि ये समझौता कितना पेचीदा है। इस समझौते का नाम वी​वीक्यू है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने और दोनों देशों की कानूनी संस्थाओं के बीच सूचना के आदान-प्रदान, जांच सबूतों को साझा करने, अभियोजन में सहयोग और आपराधिक जांच में कॉर्डिनेशन को आसान बनाने के लिए आपराधिक मामलों पर एमएलए पर साइन करने के साथ आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। यह समझौता दोनों पक्षों को ट्रांसनेशनल अपराधों की जांच करने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। चूंकी दोनों देशों के नागरिक बगैर वीजा के एक देश से दूसरे देश की यात्रा करते हैं, इसलिए ये कानून काफी अहम माना जा रहा है।</p>
<p><strong>भारत नेपाल के बीच बड़ा कानूनी सहायता समझौता </strong></p>
<p>भारत और नेपाल के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है, ऐसे में दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों को लंबे समय से अपराधियों को एक-दूसरे को सौंपने में कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली में गृह सचिव स्तर की बैठक के दौरान बातचीत से जुड़े एक अधिकारी ने काठमांडू पोस्ट को कहा है कि एमएलए में एक ऐसा समझौता शामिल है जो आतंकवाद, तस्करी, साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे ट्रांसनेशनल अपराधों का मुकाबला करने के लिए तेज, व्यवस्थित सहयोग को सक्षम बनाता है। इस समझौते पर साइन होने के बाद अपराधियों का पता लगाने, सबूत जमा करने, अपराधियों की संपत्ति को जब्त करने और एक दूसरे की जांच एजेंसियों को संदिग्धों के बयान को दर्ज करने का अधिकार देगी। </p>
<p><strong>भारत यात्रा के दौरान साइन की चर्चा</strong></p>
<p>काठमांडू पोस्ट ने बताया है कि फिलहाल मामला इस पेंच पर फंसा हुआ है कि इस समझौते को मार्च में नेपाल में होने वाले चुनाव से पहले साइन कर लिया जाए या चुनाव के बाद। नेपाल विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि हम इस पर चर्चा कर रहे हैं। इससे पहले विदेश मंत्री बालनंद शर्मा की फरवरी के पहले हफ्ते में भारत यात्रा के दौरान समझौते पर साइन करने की चर्चा हुई थी। लेकिन यात्रा स्थगित कर दी गई और अगर चुनाव से पहले समझौते पर साइन करने को लेकर सहमति बनती है, तो कानून मंत्री अनिल सिन्हा नेपाल सरकार की ओर से समझौते पर साइन कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:42:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुरक्षा एजेन्सियों के बीच परस्पर सहयोग जरूरी : आंतरिक सुरक्षा और बाह्य सुरक्षा दोनों अलग-अलग नहीं, ये एक ही सिक्के के दो पहलू; बोले राजनाथ</title>
                                    <description><![CDATA[मैं आशा करता हूँ कि आप इस ²ष्टिकोण को भी ध्यान में रखकर, इस सम्मेलन में विचार विमर्श करेंगे।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mutual-cooperation-between-security-agencies-is-necessary-both-internal-security/article-106364"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/2517rtrer-(3).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि सुरक्षा से संबंधित मौजूदा जटिल परिद्दश्य की चुनौतियों को देखते हुए आंतरिक और बाहरी सुरक्षा से निपटने वाली सुरक्षा एजेन्सियों के बीच परस्पर सहयोग और तालमेल बेहद जरूरी है। सिंह ने यहां आंतरिक सुरक्षा के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी पर गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि आंतरिक सुरक्षा और बाह्य सुरक्षा दोनों अलग-अलग नहीं है। इन दोनों को अलग-अलग करके, नहीं देखा जा सकता है। ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने कहा कि जरूरी यह है कि आंतरिक और बाह्य चुनौतियों के बदलते स्वरूप को देखते हुए हम सुरक्षा नीतियों को भी उसी प्रकार से ढालें। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि उपलब्ध संसाधनों का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाये और संस्थाएं अकेले नहीं बल्कि एक दूसरे के साथ सहयोग के द्दष्टिकोण से काम करें। उन्होंने कहा कि अभी हाइब्रिड वारफेयर, साइबर और अंतरिक्ष आधारित चुनौतियों जैसे गैर पारंपरिक खतरे सामने आ रहे हैं और इनके कारण सुरक्षा संबंधी परिदृश्य इतना जटिल हो गया है कि इससे निपटने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), केन्द्रीय पुलिस बलों और अन्य संस्थाओं के बीच सहयोग जरूरी बन गया है।</p>
<p>सुरक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के विकास के शांति और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में इस्तेमाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आपदाओं के समय इससे जान माल की भी रक्षा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आज, समूचे विश्व में, प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप देखा जा रहा है। भारत भी इनसे अछूता नहीं है। चक्रवात, हिमस्खलन , भूकंप, बाढ और बादल फटने की आपदाएँ, हमारे देश में भी देखी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अभी उत्तराखंड के माणा में हिमस्खलन के दौरान बचाव अभियान में उन्नत प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से अनेक बहुमूल्य जानें बचायी गयी। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यदि हम प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक उपयोग, अन्य सेक्टर में भी करेंगे, तो जान-माल के नुकसान को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। मैं आशा करता हूँ कि आप इस ²ष्टिकोण को भी ध्यान में रखकर, इस सम्मेलन में विचार विमर्श करेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Mar 2025 15:59:42 +0530</pubDate>
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