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                <title>womans day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>महिलाओं के हितों को लेकर समझ और आधुनिक सोच रखने वाली इंदिरा कहती हैं कि नारी के सम्मान से ही घर, समाज, देश और दुनिया  के विकास का रास्ता निकलता है</title>
                                    <description><![CDATA[गांवों में बच्चियां पढ़ लिखकर आगे बढ़ रही हैं लेकिन अभी भी घूंघट से पूरी तरह उन्हें निकालने की जरूरत दिखती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/indira-who-understands-the-interests-of-women-says-that-the/article-106855"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer44.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान की सियासत की धुरी विधानसभा में वासुदेव देवनानी भले की उच्चस्थ आसन पर विराजमान हों, सदन में सुप्रीमो हों लेकिन उनके घर में उनकी धर्मपत्नी इंदिरा देवनानी की ही व्यवस्थाएं और नियम-परम्पराएं चलती हैं। वे शादी होकर आई तब ही से देवनानी राजनीति में सक्रिय हैं। वे राजनीति पर अपडेट रहती हैं, लेकिन देवनानी के राजनीतिक फैसलों से दूर रहती हैं। महिलाओं के हितों को लेकर समझ और आधुनिक सोच रखने वाली इंदिरा कहती हैं कि नारी के सम्मान से ही घर, समाज, देश और दुनिया के विकास का रास्ता निकलता है। इसे महिलाएं साबित भी कर रही हैं। शिक्षिका रहीं इंदिरा महिलाओं कीआत्मनिर्भरता की बहुत पक्षधर और रूढ़िवाद व अंधविश्वास की धुर विरोधी हैं। उनका कहना है कि महिलाएं अब हर क्षेत्र में पुरुषों के समानान्तर खड़ी हो चुकी हैं। अब उन्हें रफ्तार पकड़नी है। उनसे आगे निकलना है। महिला दिवस पर उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश: </p>
<p><strong>सवाल: देवनानी विधानसभा अध्यक्ष हैं, राजनीति में कितनी रुचि रखती हैं? </strong><br />जवाब: राजनीतिक खबरों से अपडेट रहती हूं लेकिन उनकी राजनीति से दूर रहती हूं। विधानसभा कार्यवाही यू-ट्यूब पर देखती हूं। <br /><strong>सवाल: राजनीतिक फैसलों में क्या वे आपकी राय को अहमियत देते हैं? </strong><br />जवाब: उनके साथ 1974 में शादी हुई। तब वे उदयपुर में एबीवीपी में पदाधिकारी थे। चर्चा होती है लेकिन खुद के फैसले वे खुद करें, ऐसी मेरी सोच रही है। उनके काम में दखलदांजी नहीं करती। सोचती हूं आगे भी जरूरत नहीं पड़ेगी। मैं भी अपने हिस्से के फैसले खुद ही करती हूं। <br /><strong>सवाल: आप शिक्षिका रहीं। काम और परिवार में कैसे सामंजस्य बिठाती रहीं? अब दिनचर्या क्या रहती हैं?</strong><br />जवाब: देवनानी राजनीतिक कार्यों से व्यस्त रहते थे। स्कूल समय में शिक्षिका और इसके बाद घर में पत्नी-मां होने का जिम्मा निभाया। उनके पास हमारे लिए कम समय रहता था, लेकिन सामंजस्य टूटने नहीं दिया। आपसी समझ और समझौतों से जीवन चलता रहा। अब रिटायर हूं, पूरा समय घर रहती हूं। महिलाओं से जुड़ी मैंगजीन पढ़ना, टीवी, न्यूज चैनल और अखबार मेरे अच्छे दोस्त हैं। घर के फैसले मिलकर करते हैं। मुझे अकेले कहीं फैसले की जरूरत होती है तो खुद सक्षम हूं, उन्हें भी मेरे फैसलें सही होते हैं, इसका पूरा विश्वास रहता है।</p>
<p><strong>महिलाओं के किन मुद्दों पर बात रखना चाहेंगी?</strong><br />महिलाएं त्याग-समर्पण की पहचान रही हैं। शहरों में रूढ़ीवाद, अंधविश्वास और शोषण की स्थितियां कम ही रह गई हैं। गांवों में अभी इनसे उबरने की गुंजाइश है। गांवों में बच्चियां पढ़ लिखकर आगे बढ़ रही हैं लेकिन अभी भी घूंघट से पूरी तरह उन्हें निकालने की जरूरत दिखती है। यहां भी पुरूषों से कदम ताल मिलानी ही होगी। </p>
<p><strong>सवाल: महिलाओं के बारे में क्या कहेंगी?</strong><br />शास्त्रों में लिखा है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवों का निवास होता है। महिलाएं, पुरूषों से कहीं भी कमतर नहीं हैं। राष्टÑपति महिला हैं। प्रदेश की वित्त मंत्री महिला हैं। महिलाएं अंतरिक्ष तक पहुंच रही हैं। आधी दुनिया उनसे ही है। देश-दुनिया के विकास में उनकी भागीदार लगातार बढ़ रही है। आत्मनिर्भरता लगातार आ रही है। सफर पुरूषों के समानान्तर हो चला है, लेकिन रफ्तार अभी बाकी है।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 15:33:48 +0530</pubDate>
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                <title>अब महिला किरदार सहायक भूमिकाओं तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे कहानी का केंद्र भी बन रही हैं : माधुरी</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और यह बदलाव भविष्य के लिए उम्मीद जगाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/now-women-characters-are-not-limited-to-supporting-roles-but/article-106838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(1)33.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आईफा के सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन के तहत जयपुर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एक खास इवेंट हुआ। 'द जर्नी ऑफ वुमन इन सिनेमा' नाम के इस इवेंट में बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा माधुरी दीक्षित और ऑस्कर विजेता प्रोड्यूसर गुनीत मोंगा ने अपने अनुभव साझा किए। बातचीत को आईफा की वाइस प्रेसिडेंट नोरीन खान ने होस्ट किया। माधुरी दीक्षित ने अपने 39 साल के करियर के अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे महिलाओं के किरदार समय के साथ मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब महिला किरदार सिर्फ सहायक भूमिकाओं तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे कहानी का केंद्र भी बन रही हैं। वहीं, गुनीत मोंगा ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने संघर्ष, ऑस्कर जीतने के सफर और महिला नेतृत्व के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और यह बदलाव भविष्य के लिए उम्मीद जगाता है।</p>
<p>इस चर्चा में महिलाओं के बदलते किरदार, उनकी चुनौतियों और उनके बढ़ते प्रभाव पर बात हुई। दोनों ने अपने सफर की कहानियां साझा कीं, जिससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिली। नोरीन खान ने कहा, आईफा के 25 साल पूरे होने पर, हम सिनेमा और अन्य क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। द जर्नी ऑफ वुमन इन सिनेमा सिर्फ एक चर्चा नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। जब हम हिम्मत, रचनात्मकता और नेतृत्व की कहानियां साझा करते हैं, तो हम सिर्फ सफल महिलाओं का जश्न नहीं मनाते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते हैं। आईफा ऐसे मंच, इवेंट और साझेदारियों के जरिए बदलाव की दिशा में काम करता रहेगा, जहां हर आवाज सुनी जाए और मैं बदलाव ला सकती हूं का संकल्प एक सामूहिक शक्ति बने।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 12:36:28 +0530</pubDate>
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                <title>जो कुछ है, उसी में एंजॉय करो, किसी भी ऊंचे पद पर पहुंच जाओ लेकिन धरातल को कभी मत भूलो, लाइफ में खुशी होगी : छवि पंत</title>
                                    <description><![CDATA[महिलाएं वर्ग विशेष की नहीं, समाज की प्रेरणा है, उनका साहस कई लोगों को मुख्य धारा से जोड़ता हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/enjoy-whatever-is-there-reach-any-high-position-but-never/article-106804"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(6)9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सकारात्मक सोच के साथ जितना है, उसी में एंजॉय करो तो लाइफ में खुशी ही खुशी होगी। साथ ही जिन लोगों से निकलकर किसी भी ऊंचे पद तक पहुंच जाओ, लेकिन उस धरातल को कभी नहीं भूलना चाहिए, जहां से सबकुछ पाकर यहां तक पहुंचे हो। ये कहना है मुख्य सचिव सुधांश पंत की पत्नी छवि पंत का। अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर दैनिक नवज्योति से विशेष बातचीत के दौरान छवि पंत ने खुलकर सवालों के जवाब दिए। पति के प्रशासनिक जिम्मेदारी में व्यस्तता के चलते छवि पंत सामाजिक, पारिवारिक जिम्मेदारियों को बेखूबी से निभा रही हैं। उन्होंने महिला दिवस पर महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि आपकी प्रेरणा कब किसकी जिंदगी बदल देगी, यह आपको पता भी नहीं चलेगा। महिलाएं वर्ग विशेष की नहीं, समाज की प्रेरणा है, उनका साहस कई लोगों को मुख्य धारा से जोड़ता हैं।</p>
<p><strong>पति की प्रशासनिक लाइफ को कैसे सपोर्ट करती हैं</strong><br />सवाल: क्या आप सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं?<br />जवाब: बिल्कुल, जहां भी सामाजिक कार्यों में भागीदारी की जरूरत होती है, तो मैं उन्हें पूरा निभाती हूं।<br />सवाल: पति की व्यस्तता में मानसिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करती हैं?<br />जवाब: वे तो हमेशा ही कहते हैं, हम तो ऑफिस तक ही काम करते हैं। आपका तो हमेशा ही दिमाग काम में व्यस्त रहता है। <br />सवाल: लोगों के बीच आप अपनी पहचान कैसे बनाती हैं?<br />जवाब: वैसे तो मेरी लोगों के बीच जाने या पब्लिसिटी में रुचि नहीं रहती है, अगर कहीं जाती भी हूं तो अपनी सामान्य पहचान ही रखती हूं।<br />सवाल: क्या आप सामाजिक कार्यों, एनजीओ, शिक्षा, कला या अन्य क्षेत्रों में सक्रिय हैं?<br />जवाब: कभी कभार किसी फंक्शन में चली जाती हूं, लेकिन अतिथि के तौर पर नहीं।<br />सवाल: पति के ऑफिस तनाव को कम करने के लिए घर का माहौल कैसे बनाए रखती हैं?<br />जवाब: घर की तरफ से उनको कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। मेरी हमेशा ये ही कोशिश रहती है।</p>
<p><strong>आपकी दिनचर्या क्या रहती है...?</strong><br />मेरी सुबह जल्दी उठने की आदत है, उसके बाद वॉक करना, एक्सरवाइज करना। वॉक के लिए सेंट्रल पार्क जाती हूं, क्योंकि वहां पर मंदिर है। घर में फार्मिंग और पेड़-पौधों का शौक है। कई बार जेकेके में जो मेले लगते हैं, उनमें जाना, सहकार मेले में जाना मुझे पसंद है।</p>
<p><strong>चुनौतियां और प्रेरणा </strong><br />सवाल: आपने कभी पति के इस भूमिका में आने की कल्पना की थी?<br />जवाब: नहीं, ऐसी मैंने कल्पना नहीं की थी कि वे इस भूमिका में होंगे। ये (सीएस बनना) तो अचानक हुआ।<br />सवाल: आपके अनुसार प्रशासनिक अधिकारियों की पत्नियों की समाज में क्या भूमिका होनी चाहिए?<br />जवाब: इसमें दो तरह की परिस्थितियां होती हैं। अगर दोनों ही सर्विस में हैं तो अलग होगी, लेकिन अगर पति ही प्रशासनिक सेवाओं में है तो पत्नी को ही अन्य सारी जिम्मेदारियां बेखूबी निभानी चाहिए।<br />सवाल: जब आपकी सामाजिक पहचान सिर्फ सीएस की पत्नी के रूप में हो तो आप क्या मानती हैं?<br />जवाब: आप किसी भी स्तर पर रहो, लेकिन लोगों में ये अहसास नहीं कराना चाहिए, मैं मानती हूं वे ज्यादा खुश रहते हैं।<br />सवाल: पति की पहले और अब की घर की दिनचर्या में कोई फर्क?<br />जवाब: ज्यादातर ऑफिस ऑफ के बाद घर आ जाते हैं, लेकिन अब तो घर आने के बाद भी आॅनलाइन फाइलों के क्लियरेंस में व्यस्त रहते हैं। अब उनकी व्यस्तता बढ़ गई। </p>
<p><strong>क्या आप सामान्य जीवन जीने में विश्वास करती हैं...?</strong><br />हां, लोगों के बीच में अपने बारे में ज्यादा बताना पंसद नहीं है। बड़ी गाड़ी में चलना और लोगों के बीच जाकर शोबाजी करना पसंद नहींं है। कुछ ही लोग होते हैं, जो हमें जानते हैं। रिश्तेदारों के बीच जाकर यही कोशिश करते हैं कि उन्हें हमारे बडे होने का एहसास नहीं हो। मुझे पढ़ाई-लिखाई करना और पेड़-पौधों का बहुत शोक है। घर में भी इसमें व्यस्त रहती हूं।</p>
<p><strong>पति के प्रशासनिक व्यवस्थाओं में बदलाव का असर...?</strong><br />हां, ये जरूर होता है, कभी जयपुर आ गए, कुछ समय बाद दिल्ली चले गए, पहले कभी कहीं पर पोस्टिंग रही तो, वहां पर चले गए। जयपुर-दिल्ली के बीच तो ये हमेशा ही चलता रहा। अभी भी दोनों बेटियां दिल्ली में ही हैं तो मेरा दिल्ली आना-जाना तो लगा रहता हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 10:15:01 +0530</pubDate>
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