<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/people/tag-5406" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>people - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/5406/rss</link>
                <description>people RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कोटा रोज 70 क्विंटल गन्ना रस पी रहा, भीषण गर्मी में मीठी राहत का बना सहारा</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में चार दर्जन से अधिक मशीनें लगातार संचालित हो रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-consumes-70-quintals-of-sugarcane-daily/article-150645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी के तेवर अब तीखे होने लगे हैं। अप्रैल के मध्य में ही तेज धूप और बढ़ती तपन ने आमजन का जीना मुहाल कर दिया है। ऐसे में राहत की तलाश में लोग पारंपरिक और प्राकृतिक पेय पदार्थों की ओर रुख कर रहे हैं। इनमें गन्ने का रस सबसे आगे है। शहर में इन दिनों गन्ने के रस की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है और रोजाना करीब 70 क्विंटल गन्ना रस के रूप में खप रहा है। शहर के प्रमुख बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के आसपास, कॉलोनियों और मुख्य चौराहों पर गन्ने के रस के ठेले और दुकानें बड़ी संख्या में नजर आ रही हैं।</p>
<p><strong>दोपहर बाद ग्राहकों की अधिक भीड़</strong><br />एक अनुमान के अनुसार शहर में चार दर्जन से अधिक मशीनें लगातार संचालित हो रही हैं। इन मशीनों पर दिनभर गन्ना पिरोया जा रहा है और ग्राहकों को ताजा व ठंडा रस परोसा जा रहा है। सुबह के समय जहां ग्राहकों की संख्या सीमित रहती है, वहीं दोपहर बाद जैसे-जैसे तापमान चरम पर पहुंचता है, गन्ने के रस की दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगती है। कई स्थानों पर ग्राहकों को अपनी बारी का इंतजार भी करना पड़ रहा है। शाम के समय तो हालात ऐसे हो जाते हैं कि ठेलों के आसपास खड़े होने तक की जगह नहीं मिलती।</p>
<p><strong>मशीनों की बढ़ी संख्या, नए ठेले भी लगे</strong><br />गर्मी की बढ़ती मांग को देखते हुए कई नए विक्रेताओं ने भी गन्ने का रस बेचना शुरू कर दिया है। शहर में नई चरखियां लगाई गई हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है और ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिल रहे हैं। कुछ विक्रेता नींबू, अदरक और पुदीना मिलाकर स्वादिष्ट और हेल्दी रस भी परोस रहे हैं। शहर में बने आरओबी के नीचे काफी जगह होने व पर्याप्त छाया रहने से यहां कई छोटी मोटी दुकानों, थडिय़ों के साथ गन्ने की चरखियां भी आराम से चल रही हैं। इसके अलावा हाइवे पर जहां अंडरब्रिज व ओवरब्रिज हैं, उनके नीचे भी पर्याप्त छाया होने व वाहनों का स्टैण्ड होने या न होने पर गर्मी में बाइक, कारों व अन्य वाहनों से यात्रा करने वाले लोग कुछ पलों के लिए छांव में विश्राम के साथ गन्ने के रस से हलक तर कर लेते हैं।</p>
<p><strong>ग्राहकी से दुकानदारों के खिले चेहरे</strong><br />डीसीएम रोड स्थित गन्ने का ठेला लगाने वाली महिला दुकानदार सरोज व गोमती ने बताया कि यह सीजन उनके लिए सबसे ज्यादा कमाई का समय होता है। इस बार गर्मी जल्दी और तेज आई है, जिससे बिक्री भी उम्मीद से ज्यादा हो रही है। कई दुकानदार सुबह से लेकर देर रात तक लगातार काम कर रहे हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में गन्ने का रस न केवल प्यास बुझाने का साधन बना हुआ है, बल्कि शहरवासियों को ताजगी और ऊर्जा भी प्रदान कर रहा है। मीठी ठंडक के रूप में यह पारंपरिक पेय एक बार फिर लोगों की पहली पसंद बन गया है।</p>
<p><strong>यहां से हो रही गन्ना की आवक</strong><br />कोटा में गन्ने का उत्पादन बहुत बड़े स्तर पर नहीं होता, इसलिए यहां इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर गन्ना बाहर से मंगवाया जाता है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य होने के कारण कोटा में बड़ी मात्रा में गन्ना यहां के जिलों (जैसे सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ) से ट्रकों के जरिए आता है। महाराष्ट्र से भी कुछ व्यापारियों द्वारा गन्ना सप्लाई किया जाता है, हरियाणा और पंजाब सीमित मात्रा में, लेकिन सीजन के हिसाब से यहां से भी गन्ना आता है। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में कुछ हद तक गन्ना उत्पादन होता है, वहां से भी कोटा तक सप्लाई आती है। गन्ना आमतौर पर ट्रकों और पिकअप वाहनों के जरिए थोक मंडियों तक लाया जाता है। वहां से रस बेचने वाले दुकानदार और ठेले वाले इसे खरीदकर अपने-अपने क्षेत्रों में ले जाते हैं।</p>
<p>गन्ने का रस शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ ही डिहाइड्रेशन से बचाने में मददगार होता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा, खनिज और पानी की अच्छी मात्रा होती है। यही वजह है कि लोग कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड पेय की बजाय गन्ने के रस को प्राथमिकता देते हैं।<br /><strong>-डॉ. संजय शायर, सीनियर फिजिशियन</strong></p>
<p>शहर में इन दिनों गन्ने के रस की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है और रोजाना करीब 70 क्विंटल गन्ना रस के रूप में खप रहा है। गन्ना ट्रकों और पिकअप वाहनों के जरिए थोक मंडियों तक लाया जाता है। वहां से दुकानदार और ठेले वाले खरीदकर ले जाते हैं।<br /><strong>- विकास कुमार, गन्ना के थोक व्यापारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-consumes-70-quintals-of-sugarcane-daily/article-150645</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-consumes-70-quintals-of-sugarcane-daily/article-150645</guid>
                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:35:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/111200-x-600-px%29-%281%2913.png"                         length="1985154"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीढ़ियों से जंग : पेंशन की राशि लेने में हाफंते 38 सौ बुजुर्ग पेन्शनधारी, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[कोई तीन बार रूकी, सीढ़ियों पर ही पीया पानी, दृष्टिहीन-दो पैरों से विकलांग काट रहा चक्कर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-battle-of-the-stairs--3-800-elderly-pensioners-panting-to-receive-pension-amount/article-146225"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बुढ़ापे में जब कदम धीमे पड़ जाते हैं और घुटने जवाब देने लगते हैं, तब भी कई बुजुर्गों को अपनी पेंशन पाने के लिए सीढ़ियों की लंबी चढ़ाई तय करनी पड़ रही है। जिन लोगों ने अपनी जवानी के दिनों में नौकरी करते हुए बैंक खाते खुलवाए थे, वही लोग अब उम्र के आखिरी पड़ाव में पेंशन लेने के लिए हर बार कठिनाई का सामना कर रहे हैं। शहर के सिविल लाइंस स्थित राजभवन रोड पर मौजूद स्टेट बैंक आफ इंडिया में वर्तमान में करीब 3800 पेँशन खाते सक्रिय है। यहांं शाखा कार्यालय दूसरी मंजिल पर संचालित हो रहा है। यहां पेंशन लेने आने वाले बुजुर्गों को लगभग 18 सीढ़ियां चढ़कर ऊपर पहुंचना पड़ता है। जिन पैरों ने जिंदगी भर परिवार के लिए मेहनत की, वही पैर अब हर सीढ़ी पर थकान और दर्द का एहसास कराते हैं। कई बुजुर्ग बताते हैं कि पेंशन लेने के लिए उन्हें हर दो से तीन महीने में बैंक आना ही पड़ता है। सीढ़ियां चढ़ते समय उन्हें कई बार रुककर सांस लेना पड़ता है, लेकिन मजबूरी यह है कि बिना ऊपर पहुंचे उनका काम नहीं हो पाता।</p>
<p><strong>यहां भी ऐसा ही हाल</strong><br />गुमानपुरा स्थित एसबीबीजे की शाखा भी बरसों से ही दुसरी मंजिल पर संचालित हो रही है। यहां पर भी 2 हजार के लगभग पेंशनर,बुजुर्गो के खाते है । ऐसे में यहां के खातेदारों को भी सीढ़ियों से ही बैंक में जाना पड़ता है। शहर के अन्य बैंको में भी कमोबेश ऐसे ही हालात है जहां वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगों के लिये कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी है।</p>
<p><strong>केस नं. 1-</strong> कोटड़ी क्षेत्र की एक महिला पिछले करीब 12 वर्षों से यहां पेंशन लेने आ रही हैं। उन्होंने बताया कि घुटनों की तकलीफ के कारण अब सीढ़ियां चढ़ना बेहद मुश्किल हो गया है। हर बार ऊपर पहुंचते-पहुंचते सांस फूल जाती है, फिर भी पेंशन लेने के लिए आना पड़ता है।</p>
<p><strong>केस नं. 2-</strong> जवाहर सागर बांध क्षेत्र से आई कांति बाई कहती हैं कि उम्र बढ़ने के साथ अब बैंक तक पहुंचना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सीढ़ियां चढ़ते समय उन्हें कई बार रुककर सांस लेना पड़ता है। गांव से किसी व्यक्ति को साथ लाना पड़ता है और उसके आने-जाने का खर्च भी देना पड़ता है।</p>
<p><strong>केस नं. 3-</strong> सिविल लाइंस निवासी राजू खंगार, जो दोनों पैरों से लाचार हैं और आंखों से भी ठीक से नहीं देख पाते, बताते हैं कि उन्होंने दिवाली के बाद अपनी संस्था के लिए बैंक में खाता खुलवाया था। खाते में करीब सात हजार रुपये जमा हैं, लेकिन कुछ कमियां पूरी करने के लिए उन्हें बार-बार बैंक आना पड़ रहा है। उनका कहना है कि उनके जैसे दिव्यांग व्यक्ति को आने के लिये एक अन्य साथी की जरूरत पड़ती है। इसलिए हर बार बैंक आना बेहद कठिन है।</p>
<p><strong>आखिर क्यूं आना पड़ता है बैंक</strong><br />-बैक आने वाले इन ग्राहकों में ज्यादातर को नये नियमों की जानकारीयां ही नहीं है।<br />-बात यो भी है कि बैक द्वारा ऐसी जरूरी बातें आगे होकर इन बुजुर्गो को बतायी ही नहीं गयी ।<br />-कई लोग अंगुठा निशानी का प्रयोग करते हे, ऐसे में पैसे निकलवाने के लिये मूल बैंक में आना ही पड़ता है।<br />-ग्रामीण क्षेत्रों में ई-मित्र या अन्य सहायक सुविधायें मंहगी होती है या फिर कम होती हे ।<br />-खाता स्थानान्तरण करने में बैंको द्वारा आनाकानी ।<br />-मोबाईल नहीं होना या चलाने की परेशानी भी इस उम्र ओंर दिव्यांगो के लिये सबसे बड़ा कारण है ।</p>
<p><strong>बुजुर्ग और दिव्यांगों के लिए डोरस्टेप बैंकिंग</strong><br />बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि आज डिजिटल बैंकिंग और आधार आधारित भुगतान जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनसे घर के पास ही पैसा निकाला जा सकता है। बैंक परिसर में रैंप, व्हीलचेयर और जरूरत पड़ने पर लिफ्ट जैसी व्यवस्था करना व बैंक शाखाओं में बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए अलग या प्राथमिकता काउंटर की व्यवस्था करना अनिवार्य है। 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को नकद जमा-निकासी व अन्य जरूरी सेवाएं घर पर उपलब्ध कराने की सुविधा।यदि कोई घर से आने में लाचार है तो बैक प्रबंधन घर पर भी पैसे देने के लिये किसी कार्मिक को भेजता है। साथ ही बैंक की जिम्मेदारी है कि वह अपने ग्राहकों को इन सुविधाओं के बारे में बताने के लिये आवश्यक सामग्री या जानकारी उपलब्ध करवायें।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शाखा की पुरानी इमारत को तोड़कर नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन है,और भविष्य में ऐसी सुविधाएं देने का प्रयास किया जाएगा, जिससे बुजुर्गों और दिव्यांगों को परेशानी न हो।<br /><strong>-शदेन्दु पाण्डेय, ब्रांच मैनेजर एसबीआई राजभवन रोड</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-battle-of-the-stairs--3-800-elderly-pensioners-panting-to-receive-pension-amount/article-146225</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-battle-of-the-stairs--3-800-elderly-pensioners-panting-to-receive-pension-amount/article-146225</guid>
                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 15:20:39 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/1200-x-60-px%29-%283%296.png"                         length="872795"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नहरें बन रही काल का गाल, हर महीने 3 से 4 लोगों की डूबने से हो रही मौत</title>
                                    <description><![CDATA[नहरों की चार दीवारी इतनी छोटी है कि कोई भी नहाने के लिए आसानी से पहुंच रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-becoming-death-traps--3-to-4-people-die-every-month-due-to-drowning/article-145616"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस एक : </strong>उद्योग नगर थाना क्षेत्र में डीसीएम स्थित नहर में नहाने गए दो युवक पानी के तेज बहाव में बह गए थे। जिनमें से एक को तो सुरक्षित निकाल लिया। जबकि दूसरे की डूबने से मौत हो गई। युवक की मौत से उसके परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा।</p>
<p><strong>केस दो:</strong> कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में गत दिनों नहर में नहाते समय एक युवक का पैर फिसल गया था। जिससे वह पानी के तेज बहाव में बह गया। सूचना पर पुलिस व निगम के गोताखोर पहुंचे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी है। युवक का शव तीन दिन बाद घटना स्थल से काफी दूर मिला।</p>
<p><strong>केस तीन: </strong>किशोरपुरा थाना क्षेत्र में गोविंद धाम के पास चम्बल नदी में हाथ-पैर धोने के लिए नदी किनारे गए युवक को झटका लगने से वह उसमें गिर गया। सूचना पर गोताखोर पहुंचे लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। बाद में तलाश करने पर उसका शव मिला।</p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं उन हालातों को बताने के लिए जिनका सामान शहर वासियों को रोजाना करना पड़ रहा है। स्मार्ट सिटी की श्रेणी में आए कोटा जैसे शहर में जो अब पर्यटन नगरी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाला है। उस शहर के बीच रिहायशी इलाकों से नहर निकल रही है। वह भी दांयी और बांयी मुख्य नहर। इन नहरों की चार दीवारी या तो इतनी छोटी है कि वहां से कोई भी नहाने के लिए आसानी से पहुंच रहा है या फिर नहरों की सुरक्षा दीवार ही कई जगह से टूटी हुई है। जिससे लोगों को नहाने की जगह आसानी से मिल रही है। ऐसे में हादसे अधिक हो रहे हैं।</p>
<p><strong>धुलंडी पर एक दिन की पाबंदी</strong><br />पिछले कुछ सालों में धुलंडी के दिन कई लोगों के नदी, तालाब व नहर में नहाने जाने के दौरान पैर फिसलने और पानी का बहाव तेज होने से लोगों के उनमें डूबने की घटनाएं हो चुकी है। कुछ समय पहले तो एक ही दिन में करीब आधा दर्जन लोगों की डूबने से मौत होगई थी। उसके बाद पुलिस व प्रशासन की ओर से धुलंडी के दिन नहर और नदी तालाब में नहाने जाने पर ही पाबंदी लगा दी है। लेकिन हालत यह है कि यह पाबंदी सिर्फ एक ही दिन के लिए हो रही है। उसके बाद फिर से वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति बन गई है।</p>
<p><strong>अभी भी नहा रहे नहर पर</strong><br />धुलंडी के दिन तो नहरों में पानी का बहाव भी कम कर दिया गया था। पुलिस व प्रशासन का पहरा व सख्ती भी दिखी। लेकिन उसके बाद इस पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। यही कारण है कि अभी भी शहर में कई जगह पर नहरों में लोग विशेष रूप से युवा और बच्चे नहा रहे हैं। जिससे फिर से कभी भी कोई बड़ा हादसा या लोगों के डूबने से मौत की घटना होने का खतरा बना हुआ है। हालांकि नवज्योति ने होली से पहले ही इस संबंध में चेताया था। उसके बाद भी हालातों में कोई सुधार नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>हर साल 35 से 40 की डूबने से हो रही मौत</strong><br />एक तरफ तो कोटा व हाड़ौती के लिए चम्बल नदी बरदान है। वहीं दूसरी तरफ यह जानलेवा भी साबित हो रही है। चम्बल नदी, नहर व तालाब में हर साल डूबने से करीब 35 से 40 लोगों की मौत हो रही है।नगर निगम के फायर अनुभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार हर महीने करीब 3 या उससे अधिक लोगों की यानि दसवें दिन एक व्यक्ति की डृबने से मौत हो रही है। हालांकि निगम के गोताखोरों की टीम ने कई डूबे हुए लोगों को सुरक्षित भी बाहर निकाला है।</p>
<p><strong>यह है स्थिति</strong><br />जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 में कोटा शहर में 33 लोगों की डूबने से मौत हुई जबकि 4 को जीवित व सुरक्षित बाहर निकाला गया। वर्ष 2021-22 में 38 लोगों की डूबने से मौत हुई और 136 को सुरक्षित निकाला गया। वर्ष 2022-23 में 44 लोगों की डूबने से मौत हुई और 222 को सुरक्षित निकाला गया। वर्ष 2023-24 में 30 की डूबने से मौत हुई व 1 को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वहीं वर्ष 2024-25 में 34 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है और 9 को सुरक्षित निकाला गया है। उसके बाद भी आए दिन लोगों के डूबने व मौत की घटनाएं हो रही हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर के बीच व रिहायशी इलाकों से नहर व चम्बल नदी गुजर रही है। नहरों की सुरक्षा दीवार इतनी छोटी है कि वहां से कोई भी नहाने के लिए जा सकता है। नहर में पानी का बहाव अधिक होने पर तैरने वाला जानकार भी कई बार बह जाता है। जिससे उसकी डूबने पर मौत हो जाती है। हालांकि किशोरपुरा से गुमानपुरा वाली नहर की सुरक्षा दीवार 8 फद्दीट करने से अब वहां घटनाएं कम हो रही है। सिचाई विभाग को चाहिए कि नहरों की सुरक्षा दीवार को इतना ऊंचा किया जाए या उन पर फेंसिंग की जाए कि लोग वहां से चढ़कर पानी तक नहीं जा सके। आत्म हत्या करने के अलावा हादसों के कारण भी लोगों की डूबने से मौत हो रही है। शहर में अधिकतर नहरों की सुरक्षा दीवार छोटी है। नगर निगम के पास पर्याप्त गोताखोर व स्कूबा डाइविंग सेट समेत नाव व अन्य संसाधन पर्याप्त हैं। लेकिन अधिकतर लोगों की मौत का कारण सूचना देरी से मिलना होता है। देर से सूचना मिलने पर बहे लोग काफी आगे निकल जाते हैं। नहर में झाड़ झंकार में फंस जाते हैं। जिससे उनकी तलाश में देरी होने पर मौत अधिक होती है। वैसे तुरंत सूचना मिलने पर कई लोगों को जीवित व सुरक्षित भी निकाला गया।<br /><strong>- विष्णु श्रृंगी, गोताखोर नगर निगम कोटा</strong></p>
<p>समय-समय पर नहरों में पानी का जल प्रवाह कम करते रहते हैं। हालांकि कई जगह पर नहरों की दीवार को ऊंचा भी कराया गया है। लेकिन जहां भी सुरक्षा दीवार टूटी हुई है या फेंसिंग की जरूरत होगी उसे भी सही करवाने का प्रयास किया जाएगा।<br /><strong>- संजय कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता सिंचाई वृत्त सीएडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-becoming-death-traps--3-to-4-people-die-every-month-due-to-drowning/article-145616</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-becoming-death-traps--3-to-4-people-die-every-month-due-to-drowning/article-145616</guid>
                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 15:46:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/200-x-60-px%29-%283%296.png"                         length="1428729"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जापान में रिकॉर्ड बर्फबारी से कई लोगों की मौत : करीब 600 लोग गंभीरता से घायल, दिखी दूसरी लहर</title>
                                    <description><![CDATA[आओमोरी प्रांत में बर्फ की गहराई 4.6 मीटर (15 फीट) से अधिक हो गई, जबकि होक्काइडो की राजधानी साप्पोरो में यह 1.1 मीटर (3.6 फीट) से अधिक हो गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/many-people-died-due-to-record-snowfall-in-japan-about/article-142229"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(10)2.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">टोक्यो। जापान में रिकॉर्ड बर्फबारी के कारण मरने वालों की संख्या 45 हो गई है, जबकि घायलों की संख्या 600 के करीब पहुंच रही है। देश की मुख्य अग्निशमन सेवा से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह जानकारी सामने आयी। 20 जनवरी से अब तक कुल 585 लोग अलग-अलग गंभीरता से घायल हुए हैं; इनमें से 187 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। कम से कम 45 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले सप्ताह उत्तरी जापान में रिकॉर्ड बर्फबारी की दूसरी लहर देखी गई। आओमोरी प्रांत में बर्फ की गहराई 4.6 मीटर (15 फीट) से अधिक हो गई, जबकि होक्काइडो की राजधानी साप्पोरो में यह 1.1 मीटर (3.6 फीट) से अधिक हो गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुख्य द्वीपों में सबसे उत्तरी द्वीप होक्काइडो में एक और हिमपात हुआ, जिसमें कुछ क्षेत्रों में हवा के झोंके 35 मीटर प्रति सेकंड (78 मील प्रति घंटे) तक पहुंच गए। होक्काइडो के अधिकांश हिस्सों के लिए तेज हवाओं, बर्फीले तूफान, ऊंची लहरों और भारी बर्फबारी की चेतावनी जारी की गई है। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/many-people-died-due-to-record-snowfall-in-japan-about/article-142229</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/many-people-died-due-to-record-snowfall-in-japan-about/article-142229</guid>
                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 15:27:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/%281200-x-600-px%29-%2810%292.png"                         length="484988"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सांसों पर संकट, थर्मल की बूढ़ी इकाइयां शहर को बना रही बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[चिमनियों से उठता धुआँ थर्मल प्लांट के 4-5 किमी क्षेत्र तक शहर की हवा को प्रदूषित कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/breathing-crisis--the-aging-thermal-power-plant-units-are-making-the-city-sick/article-142152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा नगरी के नाम से पहचाने जाने वाले कोटा की आबो-हवा अब जहरीली होती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह कोटा थर्मल पावर प्लांट की वे बूढ़ी इकाइयां हैं, जो अपनी तय उम्र पूरी कर चुकी हैं, लेकिन आज भी धड़ल्ले से चलाई जा रही हैं। 1983 में स्थापित थर्मल की यूनिट1 और यूनिट 2 अपनी निर्धारित अवधि से करीब 10 साल ज्यादा समय निकाल चुकी हैं । इसके बावजूद इनसे निकलने वाला धुआं, राख और गर्म पानी शहरवासियों की सांसों और चंबल नदी दोनों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। चंबल किनारे बसें लोगों का कहना है कि थर्मल से 4 से 5 किलोमीटर की परिधि तक सीधा असर दिख रहा है। हवा में घुले सूक्ष्म कण सांसों के जरिए शरीर में जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों ने सफेद कपड़े पहनना तक बंद कर दिया है,क्योंकि छत पर कपड़े सुखाने पर कुछ ही देर में उन पर राख जम जाती है। चिमनियों से उठता धुआं दिनभर शहर की हवा को दूषित कर रहा है।अवधी पार कर चुकी इकाइयों का असर अब युवाओं पर भी साफ दिखने लगा है।</p>
<p><strong>कम उम्र  सांस, आंख और त्वचा की समस्याएं</strong><br />किशोरपुरा क्षेत्र की 35 वर्षीय रिंकू कंवर बताती हैं, सीढ़ियां चढ़ते ही सांस फूलने लगती है। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। डॉक्टर कहते हैं कि हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां कम उम्र के लोग भी सांस, आंख और त्वचा संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। थर्मल से निकलने वाला प्रदूषण केवल हवा तक सीमित नहीं है। संयंत्र से छोड़ा जा रहा गर्म और दूषित पानी सीधे चंबल नदी में मिलाया जा रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे नदी का तापमान बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर जलीय जीवों और चंबल की जैव विविधता पर पड़ रहा है। मगर प्रशासन और थर्मल प्रबंधन इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।</p>
<p><strong>बड़ा सवाल फ्लू गैस डी-सल्फराइजेशन (एफजीडी) प्लांट नहीं</strong><br />नियमों के अनुसार थर्मल में यह प्लांट लगना चाहिए था, ताकि सल्फर डाइआॅक्साइड जैसे जहरीले गैसों का उत्सर्जन कम हो सके। लेकिन आज तक यह प्लांट पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया। नतीजा यह है कि शहर की सांसों में जहर लगातार घुलता जा रहा है। किशोरपुरा, शिवपुरा, पाटनपोल, साबरमती कॉलोनी, केथूनीपोल, शक्ति नगर, दादाबादी, श्रीनाथपुरम से लेकर सकतपुरा और नांता तक राख का फैलाव देखा जा रहा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रात में खुले में सोना तो दूर, दिन में घरों की खिड़कियां खोलना भी मुश्किल है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।</p>
<p><strong>प्रभाव जो देखे जा रहे</strong><br />-5 किमी तक राख और धुएं का फैलाव।<br />-सफेद कपड़ों पर जम रही काली परत।<br />-आंख और स्वांस के रोगियों को बढ रही परेशानी।<br />-थर्मल के गर्म पानी को सीधे नदी में मिलाने से चंबल की जैव विविधता पर भी संकट बढ़ रहा है, थर्मल से डिस्चार्ज पानी के साथ आॅयल की मात्रा भी नदी में आती है, कुछ महीने पहले भी किशोरपुरा की तरफ काफी सारी मरी मछिलयां पानी पर पडी़ हुई देखी गई थी ।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong><br />थर्मल से निकलने वाले धुएं में कईं प्रकार के टॉक्सिस औैर पार्टिकल होते है दमा ,फेफड़ों से सम्बन्धित बिमारी वाले रोगियों में यह गम्भीर समस्याएं पैदा कर सकता है।<br /><strong>- डॉ. राजेश ताखर,  श्वास व एलर्जी रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p>अवधी पार कर चुकी थर्मल इकाइयों को चलाना बेहद खतरनाक है। बिना ट्रीटमेंन्ट प्लांट के सल्फर और पार्टिकुलेट मैटर सीधे हवा में जा रहे हैं। इससे श्वसन रोगों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। साथ ही गर्म पानी नदी में छोड़ने से पानी में आक्सीजन की कमी हो जाती है। जलीय जीवों के विकास में बाधा तो होती ही साथ ही कई अन्य बुरे प्रभाव भी जन्म लेने लगते है यह पर्यावरणीय अपराध की श्रेणी में आता है। कोटा की आबो-हवा और चंबल की सेहत अब निर्णायक मोड़ पर है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को चुकाना पड़ेगा।<br /><strong>-अनिल रावत, सेवानिवृत्त वैज्ञानिक, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</strong></p>
<p>हमारे यहां पर जिला प्रदूषण बोर्ड की टीम द्वारा समय समय पर सेम्पलिंग करवायी जाती है, जिसकी रिपोर्ट भी आगे जाती है।<br /><strong>-शिखा अग्रवाल, मुख्य अभियन्ता कोटा थर्मल</strong></p>
<p>चम्बल के पानी और हवा की सेम्पिलंग करने के लिये हमारी टीमें लगातार जाती रहती है। जिसकी अपडेट पोर्टल पर डाल दी जाती है ।<br /><strong>-योग्यता सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी जिला प्रदूषण बोर्ड, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/breathing-crisis--the-aging-thermal-power-plant-units-are-making-the-city-sick/article-142152</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/breathing-crisis--the-aging-thermal-power-plant-units-are-making-the-city-sick/article-142152</guid>
                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 14:54:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/%281200-x-600-px%29-%282%2910.png"                         length="141224"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्य मार्ग पर अधूरे सड़क निर्माण से लोगों को हो रही परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[नई सीसी सड़क होने और दूसरी तरफ गड्डों व कच्चे हिस्से के कारण वाहन असंतुलित हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/incomplete-road-construction-on-the-main-road-is-causing-problems-for-people/article-136631"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(4)8.png" alt=""></a><br /><p>मोड़क गांव। कस्बे के मुख्य मार्ग की हालत दिनों काफी खराब है। बरसात का सम नहीं होने के बावजूद सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। उखड़ी सतह के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ न पूर्व सड़क के एक हिस्से में सीसी ड़क का निर्माण कर दिया गया। लेकिन दूसरी ओर सड़क को जस का तस छोड़ दिया गया। आधा-अधूरा निर्माण होने से समस्या और भी गंभीर हो गई है। एक तरफ नई सीसी सड़क होने और दूसरी तरफ गड्डों व कच्चे हिस्से के कारण वाहन असंतुलित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>लोगों ने प्रशासन से लगाई गुहार</strong><br />निवासियों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पूरी सड़क का समुचित निर्माण कराया जाए। ताकि आमजन को राहत मिल सके और किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।</p>
<p><strong>पैदल राहगीरों को भी संभलकर चलना पड़ रहा</strong><br />दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग विशेष रूप से जोखिम भरा साबित हो रहा है। वहीं पैदल राहगीरों को भी संभलकर निकलना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि जब निर्माण कार्य शुरू किया गया था तो पूरी सड़क को दुरुस्त किया जाना चाहिए था।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इस रोड को अधूरा छोड़ने से विशेषकर स्कूली बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस रोड़ से बड़ी संख्या में वाहन निकलते हैं। जिससे हमेशा हादसों की आशंका बनी रहती है।<br /><strong>- ममता रेगर, जनप्रतिनिधि</strong></p>
<p>इस रोड़ पर ट्रैफिक का अधिक दबाव होने के कारण अभी सड़क को एक साइड से कंप्लीट किया जा रहा है। इसके कंप्लीट होने के बाद ट्रैफिक डायवर्ट कर 5 दिनों में दुबारा काम शुरू कर दिया जाएगा।<br /><strong>- राजकुमार राजोरिया, परियोजना निदेशक, आरएसआरडीसी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/incomplete-road-construction-on-the-main-road-is-causing-problems-for-people/article-136631</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/incomplete-road-construction-on-the-main-road-is-causing-problems-for-people/article-136631</guid>
                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 16:38:30 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/1200-x-600-px-%284%298.png"                         length="1923090"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब 2 से ज्यादा बच्चे वाले भी लड़ सकेंगे पंचायत और निकाय चुनाव : नियम में संशोधन के लिए विधि विभाग को भेजा अध्यादेश का ड्राफ्ट, मंजूरी के बाद कैबिनेट में होगा पेश </title>
                                    <description><![CDATA[विधि विभाग से मंजूरी के बाद इसे कैबिनेट में पेश किया जाएगा और कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद अध्यादेश जारी होगा। 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत की सरकार ने यह प्रावधान जोड़ा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/now-people-with-more-than-2-children-will-also-be/article-131631"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/election4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार पंचायत और निकाय चुनावों के लिए 30 साल पुराने कानून में बदलाव करने जा रही है। अब दो से ज्यादा बच्चे वाले उम्मीदवार भी सरपंच, पार्षद या चेयरमैन के चुनाव लड़ सकेंगे। सरकार ने इस नियम में संशोधन के लिए विधि विभाग को अध्यादेश का ड्राफ्ट भेज दिया है। पंचायतीराज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग ने इसके लिए अलग-अलग प्रस्ताव तैयार किए हैं।</p>
<p>विधि विभाग से मंजूरी के बाद इसे कैबिनेट में पेश किया जाएगा और कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद अध्यादेश जारी होगा। 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत की सरकार ने यह प्रावधान जोड़ा था कि दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्ति पंचायत या निकाय चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। अब इस नियम को बदलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। संभावना है कि अध्यादेश इसी महीने लागू हो जाएगा। इस निर्णय से स्थानीय राजनीति का समीकरण बदल सकता है। अब तीन या उससे अधिक बच्चों वाले कई नेता, जो अब तक अयोग्य माने जाते थे, चुनाव लड़ने के योग्य हो जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/now-people-with-more-than-2-children-will-also-be/article-131631</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/now-people-with-more-than-2-children-will-also-be/article-131631</guid>
                <pubDate>Fri, 07 Nov 2025 09:48:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-04/election4.png"                         length="366165"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रील के लिए मगरमच्छ से बैर ले रहे युवा, सोशल मीडिया पर वायरल होने की सनक में वन्यजीव संरक्षण कानून का कर रहे खुला उल्लंघन</title>
                                    <description><![CDATA[वन विभाग और प्रशासन को चाहिए कि वे जनजागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को समझाएं ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/young-people-are-antagonizing-crocodiles-for-social-media-reels--openly-violating-wildlife-protection-laws-in-their-craze-for-going-viral/article-130525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(2)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong> केस-1 : पैरों से मुंह दबाकर मगरमच्छ को दबोचा</strong><br />नया नोहरा इलाके में दीपावली से एक दिन पहले रविवार को सड़क पर 4 फीट लंबा मगरमच्छ आ गया था। लोगों को देख वह भागने लगा तो लोग भी उसके पीछे दौड़ने लगे। इस बीच एक युवक ने मगरमच्छ के मुंह को पैरों तले दबाकर रेस्क्यू किया। जिसे बाद में नहर में छोड़ा गया।  </p>
<p><strong>केस-2 : 80 किलो के मगर को कंधों पर उठाया</strong><br />इटावा के बंजारी गांव में एक घर में 8 फीट लंबा मगरमच्छ घुस गया था। जिसे रेस्क्यू करने पहुंचे हयात खान ने उसे पकड़ा और 80 किलो वजनी मगरमच्छ को कंधों पर उठाकर ले गया। जिसे बाद में चंबल नदी में छोड़ा गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। </p>
<p><strong>केस-3 : गोदी में मगर को उठाकर फोटोशूट करवाया</strong><br />देवली अरब क्षेत्र में शुक्रवार देर रात कुछ युवक मगरमच्छ  गोद में लेकर हंसी ठिठोली कर खेलते नजर आए। इसी तरह कोटड़ी क्षेत्र में आए मगरमच्छ को लोगों ने पकड़कर कंधों पर उठा लिया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए। लोग वन विभाग की टीम को सूचना देने के बजाए रील्स बनाने के लिए खुद ही रेस्क्यू कर रहे हैं।</p>
<p>शेड्यूल वन के वन्यजीवों के साथ रील्स बनाने का बढ़ता क्रेज युवाओं और जानवरों दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। सोशल मीडिया पर लाइक और फॉलोअर्स  बटोरने की होड़ में युवा, न केवल वन्यजीव संरक्षण अधिनियम कानून को ठेंगा दिखा रहे बल्कि अपनी जान भी दांव पर लगाने से नहीं चूक रहे। रील्स, मीम और लाइक-कमेंट की सनक में वन्यजीवों को उकसाते और उनके प्राकृतिक आवास में घुसपैठ करते हैं, जिससे इंसान व जानवरों के बीच संघर्ष के गंभीर खतरे पैदा हो रहे हैं। कोटा जिले में इन दिनों युवाओं का मगरमच्छ के साथ रील बनाने का खतरनाक शौक बन गया है। पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए, जिसमें कोई गोदी में लेकर मगरमच्छ के साथ खेल रहा तो कोई भारी-भरकम मगरमच्छ को कंधों पर उठाकर वाहवाही लूट रहा। वहीं, सड़कों पर मगरमच्छ के मुंह को पैरों तले दबाकर काबू करने का साहस दिखा रहे। इन हरकतों से युवा खुद के साथ न केवल वन्यजीव की जान खतरे में डाल रहे बल्कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम  का भी खुला उल्लंघन कर रहे हैं। </p>
<p><strong>3 से 7 साल की सजा का प्रावधान</strong><br />मगरमच्छ शेड्यूल वन का एनीमल है। इनको गोदी व कंधों पर उठाकर रील्स बनाना, इनके साथ मारपीट व हंसी ठिठोली करना अमानवीय व्यवहार की श्रेणी में आता है, जो वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 का खुला उल्लंघन है। जिसमें 3 से 7 साल की सजा का प्रावधान है। वहीं, 10 हजार से 1 लाख तक का जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है। </p>
<p><strong>अपने साथ मगर की जिंदगी भी खतरे में डाल रहे</strong><br />सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियों में युवा, मगरमच्छ को पकड़ते, मुंह पर टेप लगाते व दौड़ाकर रेस्क्यू करने का नाटक करते नजर आए हैं। वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सूचना देने के बजाय खुद हीरो  बनने की चाहत में न सिर्फ अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं बल्कि मगरमच्छों के जीवन के लिए भी बड़ा खतरा बन रहे हैं।</p>
<p><strong>कानून की अनदेखी और विभाग की चुप्पी</strong><br />वन विभाग की ओर से अब तक इस संबंध में न तो जागरूकता अभियान चलाया गया और न ही वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत सजा और जुर्माने की कार्रवाई की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ावा देती हैं और प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करती हैं।</p>
<p><strong>फॉलोअर्स की होड़ में उड़ाई जा रही कानून की धज्जियां</strong><br />युवाओं में सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाने और वायरल  होने की सनक इतनी हावी है कि वे वन्यजीवों के प्रति करुणा और कानून दोनों भूल बैठे हैं। फॉरेस्ट अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के मामलों में पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>वन्यजीवों को खतरा</strong><br /><strong>व्यवहार में बदलाव: </strong>रील्स के लिए वन्यजीवों को परेशान करने से उनका प्राकृतिक व्यवहार बदल सकता है। बार-बार होने वाली घुसपैठ से वे तनाव में आ सकते हैं, जिससे उनके खाने, शिकार करने और प्रजनन के तरीकों पर असर पड़ सकता है।<br /><strong>तनाव और चोट: </strong>वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में परेशान करने से उनमें तनाव पैदा होता है, जिससे वे बीमार पड़ सकते हैं या घायल हो सकते हैं।<br /><strong>हैबीटाट लॉस:</strong> इंसानों की मौजूदगी और रील्स की शूटिंग के दौरान होने वाली गतिविधियों से जानवरों के आवास को नुकसान पहुंचता है, जिससे उनकी संख्या में कमी आ सकती है।<br /><strong>मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि: </strong>जब जानवर इंसानों के साथ संघर्ष करते हैं, तो अक्सर इसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ता है। ऐसी घटनाएं वन्यजीवों के लिए खतरा बढ़ाती हैं। </p>
<p><strong>यह हो सकते हैं समाधान</strong><br /><strong>जन जागरूकता अभियान:</strong> सोशल मीडिया के जरिए वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना चाहिए। <br /><strong>सख्ती से लागू हो कानून:</strong> सरकार को वन्यजीवों को परेशान करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और कानूनों को सख्ती से लागू करना चाहिए।<br /><strong>शिक्षण और जागरूकता:</strong> स्कूलों और कॉलेजों में वन्यजीव संरक्षण की शिक्षा देना चाहिए ताकि युवा इसके प्रति जागरूक हो सकें। </p>
<p><strong>वन्य जीव प्रेमी बोले</strong><br />वन्यजीव को छेड़ना, पकड़ना, हंसी ठिठोली करना या वाइल्ड एनीमल्स के साथ रील बनाना न केवल गैरकानूनी है बल्कि उनके साथ अमानवीय व्यवहार भी है। जागरूकता की कमी और सोशल मीडिया की लालसा मिलकर एक गंभीर खतरा पैदा कर रही है। युवाओं को इससे बचना चाहिए। वन विभाग को जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। <br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर</strong></p>
<p>रील की कुछ सेकंड की लोकप्रियता पाने के लिए युवाओं की यह नादानी उन्हें कानूनी सजा, शारीरिक चोट या मौत के खतरे तक पहुंचा सकती है। वन विभाग और प्रशासन को चाहिए कि वे जनजागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को समझाएं कि वन्यजीव खिलौना नहीं बल्कि प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं।<br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, वन्यजीव प्रेमी</strong></p>
<p>मगरमच्छ शेड्यूल वन का एनीमल है। इसके साथ छेड़छाड़ करना वन्यजीव अधिनियम 1972 का खुला उल्लंघन है। वन विभाग को ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन, विभाग कार्रवाई नहीं करता क्योंकि यह लोग विभाग का काम कर देते हैं। कार्रवाई होगी तो रेस्क्यू के लिए वन विभाग को काम करना पड़ेगा, इसलिए जिम्मेदारी से बचने के लिए एक्शन नहीं करते। नतीजन, ऐसे मामलों की पुनरावृति बढ़ती है।<br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, वन्यजीव प्रेमी</strong></p>
<p>वाइल्ड लाइफ के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है। अवेयरनेस बढ़ाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। हाल ही में वाइल्ड लाइफ सप्ताह में भी स्कूल व कॉलेज में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक किया है।  वहीं, इस तरह की घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>
<p>वन्यजीवों के साथ रील्स बनाना, सोशल मीडिया पर फोटो वीडियो अपलोड करना गैर कानूनी है। इसमें सजा और जुर्माने का प्रावधान है। यदि, आबादी क्षेत्र में वन्यजीव नजर आए तो वन विभाग को सूचित किया जाना चाहिए, हमारी टीम तुरंत रेस्क्यू करने पहुंचेगी। <br /><strong>- सुगना राम जाट, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन्यजीव</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/young-people-are-antagonizing-crocodiles-for-social-media-reels--openly-violating-wildlife-protection-laws-in-their-craze-for-going-viral/article-130525</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/young-people-are-antagonizing-crocodiles-for-social-media-reels--openly-violating-wildlife-protection-laws-in-their-craze-for-going-viral/article-130525</guid>
                <pubDate>Sat, 25 Oct 2025 15:56:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-10/y-of-news-%282%2914.png"                         length="300152"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ई-मित्र प्लस मशीनें बनीं शो-पीस, देख-रेख के अभाव में ठप पड़ी हाइटेक सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[संचालन न होने के कारण अधिकांश मशीनें धूल फांक रही हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/e-mitra-plus-machines-have-become-showpieces--high-tech-facilities-stalled-due-to-lack-of-maintenance/article-129009"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(4)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के सरकारी कार्यालयों में लगी ई-मित्र प्लस मशीनें अब शो-पीस बनकर रह गई है। देखरेख के अभाव में अब मशीनें जाम व खराब हो रही है। प्रशासन की अनदेखी के चलते आमजन परेशान हो रहे है। आए दिन सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने के बावजूद भी काम नहीं हो पा रहे है। बता दें कि आमजन को आधुनिक तकनीक के माध्यम से एक ही स्थान पर करीब 400 प्रकार की सरकारी और निजी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई ई-मित्र प्लस मशीनें अब शो-पीस बन चुकी हैं। बड़े दावों और उम्मीदों के साथ इन मशीनों की शुरूआत हुई थी ताकि लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़े और सुविधा एक क्लिक पर मिल सके। लेकिन हकीकत यह है कि इनकी ठीक से देखरेख और संचालन न होने के कारण आज अधिकांश मशीनें धूल फांक रही हैं। शुरूआत के कुछ महीनों तक इनसे सेवाएं दी गईं, पर उसके बाद लापरवाही और तकनीकी खामियों के चलते ये ठप हो गईं। न तो नियमित अपडेट मिले और न ही जिम्मेदार विभाग ने इनकी निगरानी की। नतीजतन, आमजन की सुविधा के लिए शुरू की गई यह पहल आज केवल सरकारी दफ्तरों में एक शो-पीस की तरह खड़ी है, जो सिस्टम की उदासीनता और तकनीकी योजनाओं की असफलता को दशार्ती है।</p>
<p><strong>लोगों को लगाने पड़ रहे हैं दफ्तरों के चक्कर</strong><br />सरकारी दफ्तरों में जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कुछ सालों पहले ई-मित्र प्लस मशीनें लगाई गई थीं। उद्देश्य यह था कि आम आदमी को सरकारी सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और अधिकतर काम एक ही मशीन के माध्यम से आसानी से निपट सकें। यह सुविधा शुरू होते ही लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें लंबी कतारों और कर्मचारियों की मिन्नतों से छुटकारा मिलेगा। लेकिन अफसोस, शुरूआत के कुछ महीनों तक सुचारु रूप से चलने वाली यह सुविधा अब पूरी तरह से ठप हो गई है।</p>
<p><strong>ये सुविधा है ई-मित्र प्लस में</strong><br />ई-मित्र प्लम मशीन दिखने में एटीएम की तरह दिखाई देती इसमें एलईडी के साथ मॉनिटर डिवाइस, वेब कैमरा, डेरा असेप्टर, कार्ड रीडर, मिटलिक की बोर्ड, रसीद के लिए नार्मल प्रिंटर लेजर प्रिंटर आदि मोजूद है। </p>
<p><strong>नियमित मेंटेनेंस का अभाव</strong><br />सरकारी कार्यालयों के गलियारों में इन मशीनों की स्थिति अब बेहद दयनीय है। कई जगहों पर मशीनें धूल फांक रही हैं, तो कहीं इनके स्क्रीन खराब हो चुके हैं। देखरेख और नियमित मेंटेनेंस के अभाव में ये आधुनिक मशीनें अब शोपीस बनकर रह गई हैं। जिन उद्देश्यों के लिए इन्हें लगाया गया था, वे अब पूरी तरह अधूरे रह गए हैं। इन मशीनों पर करोड़ो खर्च करने के बजाय सरकार को शहर में लगे ठेका कर्मियों के मानदेय के बारे में सोचना चाहिए।<br /><strong>-दिलिप सिंगोर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नवज्योति टीम ने जब समस्या पर सम्बंधित अधिकारी से बात की तो उन्हें शहर में कितनी मशीनों लगी हुई है इसकी  सही संख्या तक नहीं बता सके। उन्होंने केवल इतना कहा कि शहर में कई स्थानों पर मशीनें लगी हैं, यदि समस्या आ रही है तो जांच कर समाधान किया जाएगा।<br /><strong>-महेन्दÑ पाल सिंह, एडिशनल डायरेक्टर डिओआईटी </strong></p>
<p><strong>नहीं मिल रहा सेवाओं का लाभ</strong><br />ई-मित्र प्लस मशीनों का मुख्य उद्देश्य लोगों को सरकारी सेवाएं जैसे—बिल जमा करना, प्रमाण पत्र लेना, सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना और विभिन्न प्रकार की आवेदन सेवाएं उपलब्ध कराना था। इसके अलावा निजी क्षेत्र की कुछ सुविधाएं भी इससे जोड़ी गई थीं, ताकि आम नागरिक को किसी भी सेवा के लिए अलग-अलग दफ्तर न भटकना पड़े। लेकिन आज हालत यह है कि नागरिकों को फिर से उन्हीं दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिनसे छुटकारा दिलाने के लिए यह योजना लाई गई थी।<br /><strong>-राहुल शर्मा</strong></p>
<p><strong>योजना धराशायी</strong><br />मशीनें शुरू होते समय काफी उपयोगी साबित हो रही थीं। कई लोग छोटे-छोटे काम कुछ ही मिनटों में निपटा लेते थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, तकनीकी खराबी आई और उसकी मरम्मत नहीं हुई। न ही कर्मचारियों को इसके सही संचालन की जिम्मेदारी दी गई। परिणामस्वरूप यह योजना धराशायी हो गई।<br /><strong>-एड. बीटा स्वामी</strong></p>
<p><strong>जनता के विश्वास से खिलवाड़</strong><br /> इन मशीनों की नियमित सर्विसिंग और तकनीकी सुधार किया जाता, तो आज भी यह जनता के लिए बड़ी राहत बन सकती थीं। परंतु सरकारी लापरवाही और जिम्मेदार विभागों की अनदेखी ने इस सुविधा को पूरी तरह से बेकार कर दिया। आज के डिजिटल युग में जब सरकार "डिजिटल इंडिया" और "ई-गवर्नेंस" की बात करती है, तब ऐसी तकनीकी सुविधाओं का बंद हो जाना सवाल खड़े करता है। यह सिर्फ सरकारी धन की बबार्दी नहीं बल्कि जनता के विश्वास से भी खिलवाड़ है। सरकार को चाहिए कि इन मशीनों की फिर से मरम्मत कराकर इन्हें चालू किया जाए और संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी जाए। <br /><strong>-शादाब खान</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/e-mitra-plus-machines-have-become-showpieces--high-tech-facilities-stalled-due-to-lack-of-maintenance/article-129009</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/e-mitra-plus-machines-have-become-showpieces--high-tech-facilities-stalled-due-to-lack-of-maintenance/article-129009</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 16:11:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-10/copy-of-news-%284%2912.png"                         length="284304"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कॉलोनियों के बीच खाली प्लॉट बने क्रोकोडाइल प्वाइंट, वर्द्धमान कॉलोनी के प्लॉटों में भरा 4 से 7 फीट पानी </title>
                                    <description><![CDATA[शाम ढलते ही कॉलोनियों में सन्नाटा, दहशत में कट रही  क्षेत्र के बाशिंदों की रात]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vacant-plots-between-colonies-have-become-crocodile-hotspots--and-vardhaman-colony-s-plots-are-filled-with-4-to-7-feet-of-water/article-127217"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कुन्हाड़ी व बोरखेड़ा क्षेत्र की कॉलोनियों के बाशिंदे इन दिनों मगरमच्छ के आतंक से दहशत में हैं।  इन इलाकों में बड़ी संख्या में खाली प्लॉट पड़े हैं, जिनमें 4 से 6 फीट तक बरसात का पानी भरा हुआ है। निकासी नहीं होने से मगरमच्छों का अड्डा बन गए। बीच-बीच में पानी से बाहर निकल धूप सेंकते नजर आ रहे हैं। रात को शिकार की तलाश में कॉलोनियों की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। हालात यह हो गए, शाम ढलते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए। बच्चों को खेलना व बुजुर्गों का टहलना बंद हो गया।  क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से मगरमच्छों का रेस्क्यू करने की गुहार लगाई लेकिन साधन संसाधनों से वंचित वनकर्मियों ने पानी में मगर से बैर लेने में असमर्थता जताई। ऐसे में रहवासी  दहशत के बीच रहने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>दहशत में कट रही रात </strong><br />पार्षद बलविंदर सिंह बिल्लू ने बताया कि कुन्हाड़ी क्षेत्र की वर्द्धमान कॉलोनी के आसपास बड़ी संख्या में खाली प्लॉट पड़े हैं। इनमें 4 से 6 फीट पानी भरा हुआ है, जो मगरमच्छ  छिपे हुए हैं। दोपहर को नजर आते हैं फिर वापस पानी में चले जाते हैं। रात में सड़कों पर दौड़ते हैं। शाम ढलते ही लोग घरों में कैद हो जाते हैं। रोड लाइटें खराब होने से कॉलोनी में अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में मगरमच्छ के घरों में घुसने व राहगीरों पर हमले का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>सुबह से रात तक चलाया पम्पसेट, 2 फीट पानी निकाला</strong><br />पार्षद बिल्लू ने बताया कि खाली प्लॉटों में कमर तक पानी भरा हुआ है। जिसे निकालने के लिए एक बड़ा मड पम्प लगाया है।  सुबह 10 से रात 8 बजे तक लगातार चलाकर पानी बाहर निकाला गया। जब तक पूरा पानी नहीं निकलेगा तब तक मगरमच्छ का रेस्क्यू संभव नहीं होगा। हालांकि, क्षेत्रवासियों की सूचना पर  मंगलवार देर रात फोरेस्ट की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची थी। लेकिन मगरमच्छ के वापस पानी में चले जाने से रेस्क्यू नहीं हो सका। हालात यह हैं, पिछले 6 दिन से लोग दहशत में हैं। </p>
<p><strong>इधर, डीसीएम क्षेत्र में युवकों ने पकड़ा 5 फीट लंबा मगरमच्छ</strong><br />डीसीएम इलाके के सूर्य नगर की सड़क पर 5 फीट लंबा मगरमच्छ आ गया, जिसे स्थानीय व्यक्तियों ने पकड़कर बोरखण्डी के नाले में छोड़ दिया। घटना तड़के 4 बजे की है। रेस्क्यू के बाद एक व्यक्ति ने मगरमच्छ को कंधे पर उठाकर वीडियो-फोटो खिंचवाया। फिर नाले में रिलीज किया। व्यक्ति का फोटो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मगरमच्छ सड़क पर दौड़ता हुआ कार के टायर के पास चला गया। मौके पर मौजूद व्यक्तियों ने मगरमच्छ की आंख पर बोरी फेंककर उसे काबू किया। लाडपुरा रेंजर इंद्रेश सिंह ने बताया कि टीम ने कैथून इलाके में मगरमच्छ पकड़ा है। सूर्य नगर में मगरमच्छ आने की जानकारी नहीं है। जिस व्यक्ति ने सूर्य नगर में मगरमच्छ पकड़ा उसने विभाग को सूचना नहीं दी। उसके बारे में पता किया जा रहा है।</p>
<p><strong>बोरखेड़ा : पार्वती कॉलोनी में भी दहशत </strong><br />पार्वती कॉलोनी निवासी अरबाज ने बताया कि कॉलोनी में  खाली प्लॉटों में 3 से 4 फीट पानी भरा हुआ है। जिनमें मगरमच्छ पनप रहे हैं। रात को घर की छत से टॉर्च लगाकर देखा तो भारी-भरकम मगरमच्छ पानी से बाहर निकल सड़क पर जाता नजर आया। हाल ही में सड़क पर दौड़ता नजर आया था। इसी तरह देवली अरब, काला तलाब, नम्रता आवास सहित अन्य कॉलोनियों में आए दिन मगरमच्छ आने की घटनाएं हो रही है। </p>
<p><strong>अलग-अलग प्लॉटों में छिपे मगरमच्छ</strong><br />स्थानीय निवासी सुरेंद्र सिंह, उपेंद्र यादव, सार्थक नागर ने बताया कि वर्द्धमान कॉलोनी में ही सड़क के दोनों तरफ खाली पड़े प्लॉट पानी से लबालब हैं। यहां तीन से चार मगरमच्छ नजर आए हैं। रोड लाइटें भी खराब है, अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में घर से बाहर निकले के दौरान मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। जिसकी वजह से बच्चों का खेलना भी छूट गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vacant-plots-between-colonies-have-become-crocodile-hotspots--and-vardhaman-colony-s-plots-are-filled-with-4-to-7-feet-of-water/article-127217</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vacant-plots-between-colonies-have-become-crocodile-hotspots--and-vardhaman-colony-s-plots-are-filled-with-4-to-7-feet-of-water/article-127217</guid>
                <pubDate>Thu, 18 Sep 2025 14:56:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/_4500-px%29-%282%298.png"                         length="575177"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लापरवाही : खानपुर के कई वार्डों में रोडलाइटें नहीं, चोरी व हादसे का खतरा, सड़क किनारे लगी रोडलाइटें बंद</title>
                                    <description><![CDATA[खानपुर नगर पालिका घोषित होने के बाद भी अभी संपूर्ण रूप से नगर पालिका नहीं बन पाई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--there-are-no-road-lights-in-many-wards-of-khanpur--there-is-a-risk-of-theft-and-accidents/article-127018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(5)4.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर नगर पालिका घोषित होने के बाद भी अभी संपूर्ण रूप से नगर पालिका नहीं बन पाई है। यहां पर बहुत से वार्डों में रोड लाइटें सुचारू रूप से नहीं जलती है यहां तक की कई जगहों पर तो रोड लाइटें ही नहीं लगी है। जानकारी अनुसार खानपुर क्षेत्र में सड़क किनारे लगी रोडलाइटें नहीं जल रही है और कई वार्डों में तो रोड लाइटें ही नहीं लगी है , जिस कारण रात्रि के समय में सड़कों पर अंधेरा रहता है। रात के समय में अंधेरा होने के कारण कभी भी सड़कों पर हादसा हो सकता है। यहां तक की गलियों में रोड लाइटें  नहीं होने के कारण रात के समय में चोर और स्मैकची सक्रिय रहते है जो चोरी व लूट की वारदातों को अंजाम दे सकते है । कई बार सड़कों पर रात्रि के समय में मवेशी बैठे रहते है जो रोड लाइटों के अभाव में नहीं दिखाई देते जिस कारण भी हादसा हो सकता है। कस्बेवासियों ने मांग की है कि जल्द से जल्द खानपुर क्षेत्र में जिस भी जगह रोड लाइटें लगी हुई उन्हें ठीक करवाया जाए तथा जहां पर सड़कों पर रोडलाइटेंं नहीं है वहां पर रोड लाइटें लगाई जाए। पुराना बड़ा बाजार में जैन मंदिर, गुदरी के चौराहे, पुराना स्टेट बैंक चौराहे पर भी रोड लाइटों की समस्या बनी हुई है। </p>
<p>खानपुर को नगर पालिका घोषित हुए बहुत समय हो गया है अभी भी खानपुर नगर पालिका नजर नहीं आ रही है दिन हो या रात लेकिन नगर पालिका जैसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा है । <br /><strong>-पवन पंचोली, कस्बेवासी </strong></p>
<p>अभी 22 सितंबर से नवरात्र प्रारंभ हो जाएंगे और नवरात्र पर जगह-जगह पर डांडिया गरबा नृत्य होंगे तो रोड लाइटों के अभाव में परेशानी होगी। <br /><strong>- मुकेश मालव, कस्बेवासी </strong></p>
<p>रात्रि के समय में रोड लाइट नहीं जलने से राहगीरों को हादसे का भय बना रहता है।<br /><strong>-रमेश शर्मा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>सड़कों पर अंधेरा रहता है कभी भी चोरी जैसी वारदात हो सकती है। <br /><strong>-राजेंद्र मेरोठा, कस्बेवासी </strong><br /> <br />खानपुर में मुख्य मार्ग को छोड़कर गलियों में भी अंधेरा हो रहा है, वार्ड नंबर 20 वार्ड नंबर 21 पर तो लाइट व्यवस्था ही नहीं है, लाइट लगाई जाए। <br /><strong>-रामस्वरूप योगी, कस्बेवासी </strong></p>
<p> सड़कों पर रात्रि के समय मवेशी बैठ रहते है रात में रोड लाइटें नहीं जलने से हादसे की आशंका बनी रहती है। <br /><strong>- राम सिंह यादव, कस्बेवासी</strong></p>
<p>नवरात्रा के पहले ही रोड लाइटें जो भी खराब है उन्हें ठीक करवा दिया जाएगा और जहां भी सड़कों के किनारे रोड लाइटें नहीं है वहां पर रोड लाइटें लगवा दी जाएगी।  <br /><strong>-पुखराज मीणा नगर पालिका आयुक्त खानपुर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--there-are-no-road-lights-in-many-wards-of-khanpur--there-is-a-risk-of-theft-and-accidents/article-127018</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--there-are-no-road-lights-in-many-wards-of-khanpur--there-is-a-risk-of-theft-and-accidents/article-127018</guid>
                <pubDate>Tue, 16 Sep 2025 16:06:48 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/copy-of-news-%285%294.png"                         length="301432"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 12 - अंतिम सफर की राह भी आसान नहीं, मरम्मत को तरस रहे श्मशान घाट</title>
                                    <description><![CDATA[कई बार शिकायत करने के बावजूद निगम की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-12---the-path-of-the-last-journey-is-also-not-easy--the-cremation-ground-is-yearning-for-repair/article-126755"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/11-(5)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। उत्तर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड 12 की स्थिति दिनों-दिन बदहाल होती जा रही है। स्थानीय निवासियों की बुनियादी समस्याओं पर न तो प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही जिम्मेदार अधिकारी। वार्ड में स्थित श्मशान घाट, सुलभ कॉम्प्लेक्स और नालियों की हालत खस्ताहाल है, या यूं कहे कि अंतिम सफर की राह भी आसान नहीं है। नागरिकों की सुविधाओं के रखरखाव में भारी लापरवाही बरती जा रही है। वार्डवासियों ने कई बार निगम अधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। वार्डवासियों का कहना है कि श्मशान घाट की मरम्मत कर पानी व लाइट की व्यवस्था की जाए। साथ ही नालियों की नियमित सफाई करवाई जाए, ताकि लोगों को मूलभूत सुविधाओं में राहत मिल सके।</p>
<p><strong>श्मशान व कंसुआ घाट की दुर्दशा</strong><br />प्रसिद्ध कंसुआ घाट, अब धीरे-धीरे कचरा घाट में तब्दील होता जा रहा है। घाट पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिनसे उठने वाली बदबू से आस-पास के लोगों और वहां आने वालों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि स्वच्छता को लेकर कई बार शिकायत करने के बावजूद निगम की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। वहीं वार्ड में बने श्मशान घाट जर्जर अवस्था में है, जो अंतिम संस्कार के लिए महत्वपूर्ण स्थान है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />शमशान, बापू नगर, पीएचडी कार्यालय, बॉम्बे योजना का एबीसीडी ब्लॉक, पेट्रोल पम्प, लुहार बस्ती एंव सूरसागर का आंशिक भाग तक का क्षेत्र शामिल है।<br /><strong>- सुलभ कॉम्प्लैक्स जर्जर </strong></p>
<p>सुलभ कॉम्प्लेक्स की हालत भी खराब है। यहां पर न तो पानी की उचित व्यवस्था है और न ही लाइट की। रात के समय कॉम्प्लेक्स का उपयोग करना लोगों के लिए जोखिम भरा हो जाता है। इतना ही नहीं, कॉम्प्लेक्स के दरवाजे टूटे हुए हैं जिससे महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक दिक्कत होती है।<br /><strong>- विमला, वार्डवासी </strong></p>
<p><strong>नालियों की सफाई नहीं</strong><br />नालियां भी समय पर साफ नहीं होतीं। जगह-जगह गंदा पानी जमा हो जाता है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगता है। बरसात के दिनों में स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है। पानी भरने से सड़कें कीचड़युक्त हो जाती हैं जिससे बच्चों और बुजुर्गों को आवाजाही में दिक्कत आती है। यही नहीं, गंदगी के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।<br /><strong>- टिनू चौहान, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड की सभी समस्याओं के बारे में अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। शीघ्र ही अधूरे कार्य पूरे कराकर क्षेत्रवासियों को राहत दिलाई जाएगी।<br /><strong>- फतेह बहादुर सिंह, पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-12---the-path-of-the-last-journey-is-also-not-easy--the-cremation-ground-is-yearning-for-repair/article-126755</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-12---the-path-of-the-last-journey-is-also-not-easy--the-cremation-ground-is-yearning-for-repair/article-126755</guid>
                <pubDate>Sat, 13 Sep 2025 16:25:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/11-%285%293.png"                         length="468372"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        