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                <title>ताकि पिकनिक पैनिक न बनें, रील्स से बनाएं दूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ वन विभाग की चेतावनी: प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना अनुमति गए तो लगेगा 25 हजार का फटका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/don-t-let-a-picnic-turn-into-a-panic--steer-clear-of-making--reels/article-159323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)27.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून की पहली फुहारों के साथ ही कोटा और पूरे हाड़ौती अंचल के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों और पिकनिक प्रेमियों की भीड़ उमड़ने लगी है। हालांकि हाडौती में मानसून अभी पुरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है लेकिन लोग वीकेंड पर परिवार और दोस्तों के साथ प्रकृति के बीच समय बिताने और पिकनिक की तैयारियों में जुट गए हैं। इस मस्ती के बीच जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।अक्सर देखा जाता है कि लोग सेल्फी, इंस्टाग्राम रील्स और लाइव वीडियो बनाने के चक्कर में इतने मशगूल हो जाते हैं कि अपनी सुरक्षा और एहतियात पूरी तरह भूल बैठते हैं। रील्स का यह नशा हादसों का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।</p>
<p>सुरक्षा के लिहाज से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कई खतरनाक और संवेदनशील प्राकृतिक स्थलों को पूरी तरह से प्रतिबंधित (नो-एंट्री ज़ोन) घोषित कर दिया है। वन विभाग ने इस मानसून सीजन में अवैध एंट्री करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। किसी भी प्रतिबंधित वन क्षेत्र में बिना अनुमति अवैध प्रवेश करने पर 25 हजार तक का जुर्माना वसूला जाएगा। शाम 6 बजे के बाद या अंधेरा होने पर यदि कोई इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में घूमता हुआ पाया गया, तो उसे गिरफ्तार कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>'तीसरी आंख' (कैमरा ट्रैप) से निगरानी</strong><br />वन विभाग ने जंगल के संकरे और गुप्त रास्तों पर कैमरा ट्रैप और गश्ती दल तैनात किए हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति अवैध रूप से प्रवेश करता है, उसकी तस्वीर कैमरे में कैद हो जाती है।</p>
<p><strong>पूरी तरह प्रतिबंधित स्थल</strong><br />भंवरकुंज: वन विभाग ने यहाँ पौधारोपण कर इसे पूरी तरह बंद कर दिया है।<br />गेपरनाथ: यहाँ वन विभाग की चौकी है; यह आम दिनों में बंद रहता है और केवल सावन में दर्शनार्थियों के लिए सशर्त खोला जाता है।<br />नाहरसिंह माताजी: रावतभाटा रोड स्थित इस क्षेत्र में बाघों (टाइगर) का मूवमेंट होने और सुरक्षा कारणों से प्रवेश वर्जित है।</p>
<p><strong>इन पिकनिक स्थलों पर लौटेगी रौनक</strong><br /><strong>1. पाड़ाझर वॉटरफॉल (भैंसरोड़गढ़)</strong><br />कोटा से लगभग 65 किमी दूर स्थित भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य के जंगलों में स्थित 35 मीटर ऊँचा प्राकृतिक झरना और प्राचीन पाड़ाझर महादेव मंदिर जानेे के लिए भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य क्षेत्र होकर जाया जाता है। यह स्थान एडवेंचर और आउटरीच केम्पेन के लिये ज्यादा फैमस है। यहां केवल निजी साधन से ही पहुचां जा सकता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />यहाँ कोई दुकानें नहीं हैं, खाना-पानी साथ लाएँ। रास्ता कच्चा व फिसलन भरा है। यहां ज्यादा बरसात के दिनों मे रास्तें में बाईक खराब होने के अलावा छिपने की कोई जगह नहीं होना भी बड़ी परेशानी का कारण हो सकता है।<br />जंगली जानवरों का आवास होने से दिन के समय समूह में ही जाना सुरक्षित है।<br /><strong>2. चट्टानेश्वर महादेव</strong><br />कोटा से लगभग 25 किमी दूर केबलनगर के पास अरावली पहाड़ियों के बीच बहता झरने के पास स्थित है। प्राचीन शिव प्रतिमा और लगभग 3600 वर्ष पुराने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों काे देखने के लिये यहां वर्षपर्यन्त लोग आते है। लेकिन बरसात के मौसम में यह स्थल पुरी तरह पिकनिक स्पाॅट बन जाता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />एनीकट पर काई जमने से भारी फिसलन रहती है। यहाँ घुटनों तक दलदल व कीचड़ होने से हादसे होते हैं, इसलिए पानी में गहराई तक जाने से बचें।<br /><strong>3. आलनिया डैम</strong><br />कोटा-झालावाड़ रोड़ पर शहर से 25 किमी की दूरी पर शांत जलराशि, शानदार सूर्यास्त (सनसेट) और मानसून में बांध पर चलने वाली चादर प्रकृति प्रेमियाें के साथ साथ परिवार के साथ पिकनिक मनाने वाले लोगों के लिये मुफीद स्थान है।<br /><strong>4. बरधा बांध</strong><br />कोटा से बूंदी मार्ग पर स्थित लगभग 35 किमी की सडक दुरी पर स्थित 'हाड़ौती का मिनी गोवा' के नाम से जाने जाने वाला यह स्थल मानसून में हाडौती के लोगों के लिये किसी बीच से कम नहीं । बांध की 4 फीट चौड़ी दीवार पर चढ़कर लोग वहां से गिरते पानी के बीच खडे होकर फोटाे खिंचवाते है। 22 फीट की ऊंचाई से गिरते पानी के नीचे नहाने का आनन्द लेने की हाेड़ में उमडता लोगों का हुजुम किसी समुद्री किनारें जमा हुई भीड़ का नजारा बन जाता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानियां</strong><br />यहां आसपास गांव होने से खाने पीने की दुकाने मिल जाती है। दीवार पर फिसलन और कीचड़ के कारण बहने का खतरा रहता है। यहाँ सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात रहती है।<br /><strong>5. रामेश्वरम् महादेव (बूंदी)</strong><br />शहर से 60 कि. मी. दुर रामेश्वरम् महादेव पहाड़ों की कंदरा में स्थित प्राकृतिक गुफा मंदिर है। जहाँ स्वयंभू शिवलिंग पर निरंतर जलधारा से साक्षात जलाभिषेक होता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र। गुफा और सीढ़ियों में नमी व फिसलन से सतर्क रहें।</p>
<p><strong>आपात स्थिति में काम आएगा मोबाइल</strong><br />मानसून में पिकनिक पर जाते समय मोबाइल आपदा के समय मदद बुलाने में बहुत काम आता है, बशर्ते इसका इस्तेमाल रील्स बनाने की जगह सतर्कता के लिए किया जाए। हाड़ौती के अधिकांश पिकनिक स्पॉट्स घने जंगलों या घाटियों में स्थित हैं, जहाँ नेटवर्क गायब हो जाता है। ऐसे में पिकनिक पर निकलते समय अपने साथ इमरजेंसी किट और एहतियात अवश्य रखें। पिछले दिनों देखने में आया है कि लोग ऐसी जगहों पर जहां खड़े रहना तक मुश्किल हो वहां जाकर रील्स बना रहे है। फिसलन वाली जगहों पर या पीछे गहरा पानी, झरना, या बैकग्राउण्ड़ दिखानेे के चक्कर में लोगों ने खतरें को कई गुणा बढ़ा दिया था। रील्स बनाते समय व्यक्ति में एकाग्रता व संतुलन के साथ साथ सुरक्षा के प्रति भारी उपेक्षा ही हादसों का कारण बनती है।<br /><strong>-विष्णु श्रृंगी, गोताखाेर नगर निगम कोटा</strong></p>
<p><strong>आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू टीमें मुस्तैद</strong><br />सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को मानसून के दौरान भंवरकुंज, गेपरनाथ, अलनिया और बरधा डैम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मुस्तैद किया गया है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे केवल अधिकृत व सुरक्षित स्थानों पर ही पर्यटन का आनंद लें और मानसून की मस्ती में अपनी सुरक्षा का ध्यान प्राथमिकता से रखें।<br /><strong>- राकेश व्यास, उपायुक्त, नगर निगम</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हमारे द्वारा सभी संभावित खतरें वाले स्थानों काे चिन्हित करके वहां लगातार निगरानी की जाती है। पिकनिक सींजन में सभी एंट्री पर आधुनिक ट्रेकिंग सिस्टम एक्टिव रहता है। आमजन से अपील है कि केवल स्वीकृति प्राप्त स्थानों पर ही जायें व रील्स व आदि के लिये खतरे व पानी से दुरी बनाये रखें।<br /><strong>-मुथू एस, डीसीएफ मुकून्दरा हिल्स एण्ड़ टाईगर रिजर्व</strong></p>
<p>पिकनिक के दौरान बरसात या बाहर के पानी में नहाने से आपके शरीर को इन्फेक्शन हो सकता है। इसलिये घर पर आकर दौबारा से साफ पानी से नहायें ध्यान रहे पानी साफ ही पियें जिससे पानी जनित बिमारी न हो। मेडिकल फर्स्ट एड के अलावा जरूरी दवाईया अवश्य साथ रखें।<br /><strong>- डॉ. चन्द्रप्रकाश कलवार, चिकित्सा प्रभारी (क्रिटिकल केयर) सीएचसी कुन्हाड़ी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:15:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने 8 लोगों और संस्थाओं पर लगाया प्रतिबंध : एक भारतीय कंपनी भी शामिल, सूडान में गृहयुद्ध को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क से संबंध रखने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने सूडान गृहयुद्ध को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें भारतीय कंपनी एसबीएल एनर्जी लिमिटेड भी शामिल है, जिस पर सूडान को 200 से अधिक विस्फोटक खेप भेजने का आरोप है। अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत संपत्तियां फ्रीज होंगी, लेन-देन रुकेगा और युद्धविराम के लिए दबाव बढ़ाया जाएगा।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-imposes-sanctions-on-8-people-and-organizations-including-an/article-158255"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/american-flag.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">वाशिंगटन। अमेरिका ने सूडान में चल रहे गृहयुद्ध को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क से संबंध रखने का आरोप में 8 लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें एक भारतीय कंपनी भी शामिल है। ये नेटवर्क सूडानी सशस्त्र बलों (एसएएफ ) और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) दोनों के लिए हथियार खरीदने, लोगों की भर्ती करने और लॉजिस्टिकल सहयोग देने का काम करते हैं। अमेरिका के वित्त विभाग विभाग के अनुसार, ये नेटवर्क कई देशों में फैले हुए हैं और हथियार, विस्फोटक और विदेशी लड़ाकों की सप्लाई में शामिल हैं, जिससे दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक को बढ़ावा मिल रहा है। अमेरिका के विदेश विभाग और वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय(ओएफएसी ) द्वारा घोषित इस कार्रवाई का मकसद उन नेटवर्क को रोकना है, जिन्हें अधिकारियों ने सूडान के युद्ध को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क बताया है। ये नेटवर्क एसएएफ और आरएएफ दोनों को हथियार, विस्फोटक और लोगों की आपूर्ति करते हैं। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, सूडान में संघर्ष से फायदा उठाने वाले नेटवर्क उस मानवीय युद्धविराम की संभावनाओं को खतरे में डालते हैं, जिसकी सूडान के लोगों को बहुत ज्यादा जरूरत है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">अधिकारियों ने बताया कि ये प्रतिबंध कार्यकारी आदेश 14098 के तहत लगाए गए हैं। यह आदेश उन लोगों को निशाना बनाता है जो सूडान में अस्थिरता फैला रहे हैं और लोकतांत्रिक बदलाव की प्रक्रिया को कमजोर कर रहे हैं। ये प्रतिबंध दोनों पक्षों पर युद्धविराम के लिए सहमत होने का दबाव बनाने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा हैं। जिन लोगों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें वे शामिल हैं जो विस्फोटक और सैन्य उपकरण आपूर्ति<span>  </span>करने के काम से जुड़े हैं। ओएफएसी ने बताया कि सूडान की टारगेट मल्टी एक्टिविटीज कंपनी लिमिटेड (टीएमएसी) (जो रक्षा उद्योग प्रणाली (डीआईएस) के नियंत्रण में है) ने भारत की एसबीएल एनर्जी लिमिटेड से विस्फोटक मंगवाए थे। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">वित्त विभाग ने कहा कि भारतीय नागरिक आलोक चौधरी की अगुवाई वाली एसबीएल ने सूडान से जुड़ी संस्थाओं को'2024 से अब तक विस्फोटक और उससे जुड़ी सामग्री की 200 से ज्यादा खेपकी आपूर्ति की हैं। वित्त विभाग ने कहा, इन विस्फोटकों का इस्तेमाल बाद में एसएएफ द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बमों में किया जाता है। इन प्रतिबंधों में सूडान की सरकारी औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स कंपनियां भी शामिल हैं, जैसे पोट्र्स इंजीनियरिंग कंपनी'। अधिकारियों के मुताबिक इस कंपनी ने संघर्ष के दौरान विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से पोषाक और सैन्य सामान मंगवाया था। साथ ही अमेरिका ने कोलंबिया के एक भर्ती नेटवर्क के सदस्यों को भी प्रतिबंधित किया है। इन पर सशस्त्र समूहों की ओर से सूडान में लडऩे के लिए पूर्व सैनिकों को भेजने का आरोप है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;">विदेश विभाग ने कहा कि वह केमिकल एंड बायोलॉजिकल वेपन्स कंट्रोल एंड वॉरफेयर एलिमिनेशन एक्ट के तहत दूसरे दौर के उपाय भी लागू कर रहा है। इनमें निर्यात पर सख्त पाबंदियां और सूडान के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद का विरोध शामिल है। विदेश विभाग ने कहा, ट्रंप प्रशासन सूडान में स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध है। हम संघर्षरत पक्षों से मानवीय आधार पर युद्धविराम पर सहमत होने और उसका पालन करने की अपील करते हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन प्रतिबंधों के तहत प्रतिबंधित पक्षों की अमेरिका से जुड़ी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया जाएगा और अमेरिकी लोगों के साथ उनके लेन-देन पर रोक लगा दी जाएगी। साथ ही चेतावनी दी गई कि नियमों का उल्लंघन करने पर दीवानी या आपराधिक दंड लग सकती है। सूडान के सैन्य गुटों के बीच चल रहे संघर्ष ने 2023 से देश को तबाह कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे दुनिया का सबसे खराब मानवीय संकट करार दिया है और कहा है कि इसने चरमपंथी समूहों को इस इलाके में अपनी गतिविधियां बढ़ाने का मौका दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:Calibri, 'sans-serif';font-weight:normal;"> </span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 17:40:43 +0530</pubDate>
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                <title>ऑक्सीजोन व रिवर फ्रंट पर भी मिले मॉर्निंग वॉक की सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[ सुबह घूमने वालो को 100 रुपये का टिकट पड़ रहा भारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/morning-walk-facilities-sought-at-oxyzone-and-river-front/article-157348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)28.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मध्य हरियाली से आच्छादित ऑक्सीजोन पार्क में सुबह के समय ताजी हवा लेने और चम्बल नदी के किनारे बने विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल पर नदी की सुंदरता को निहारने की सुविधा सुबह के समय शहर में मॉर्निंमग वॉकर को भी मिलनी चाहिए। यह मांग है शहर के उन लोगों की जो सुबह के समय आस-पास के गार्डन में मॉर्निंग वॉक के लिए जाते हैं। विज्ञान नगर निवासी एडवोकेट अमजद खान ने बताया कि शहर के बीच पहले जहां आई एल कॉलोनी थी। वहां हरियाली व मोर अधिक थे। उसकी जगह पर अब ऑक्सीजोन सिटी पार्क बनाया गया है। यह नए कोटा में रहने वालों के लिए एक तरह से वरदान है। लेकिन यहां प्रवेश के लिए सौ रुपए का टिकट लगाया गया है। जिससे इस पार्क में मॉर्निंग वॉक करने जाने वालों को नि:शुल्क प्रवेश की सुविधा नहीं दी गई है। ऐसे में इसके आस-पास रहने वाले लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि सुबह दो से तीन घंटे यहां जो लोग मॉर्निंग वॉक करना चाहते हैं उन्हें सुविधा दी जानी चाहिए।</p>
<p>तलवंडी निवासी अजय कुशवाह का कहना है कि शहर में जिस तरह से चम्बल गार्डन व नयापुरा स्थित सीबी गार्डन में सुबह 9 बजे तक मॉर्निंग वॉक को नि:शुल्क प्रवेश देकर सैर करने की सुविधा दी हुई है। उसी तरह की सुविधा ऑक्सीजोन पार्क में भी दी जानी चाहिए। यह शहर के लिए ऑक्सीजोन के रूप में वरदान है लेकिन स्थानीय लोगों को इसमें जाने के लिए टिकट लेना पड़ रहा है। जबकि सुबह कुछ समय के लिए यहां नि:शुल्क सैर की सुविधा दी जानी चाहिए।</p>
<p><strong>नदी के किनारे व गार्डन का लाभ मिले</strong><br />वहीं पुराने शहर में रहने वाले लोगों का कहना है कि पहले लोग चम्बल नदी के किनारे घूम सकते थे। लेकिन रिवर फ्रंट बनने से वहां आमजन का प्रवेश बंद कर दिया गया है। रिवर फ्रंट पर गार्डन भी बनाए गए हैं। ऐसे में सुबह के समय दो से तीन घंटे के लिए जो लोग सैर करने जाना चाहते हैं उन्हें नि:शुल्क प्रवेश दिया जाए।</p>
<p>पाटनपोल निवासी अजय सक्सेना का कहना है कि शहर में रिवर फ्रंट जैसा पर्यटन स्थल कहीं नहीं है। लेकिन लोगों को सुबह के समय इसका नि:शुल्क लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि मॉर्निंग वॉकर के लिए भले ही मासिक पास जारी कर दिया जाए जिससे ही प्रवेश मिले लेकिन यह सुविधा शुरु की जानी चाहिए। कैथूनीपोल निवासी विवेक पाल का कहना है कि सुबह के समय बड़ी संख्या में लोग सैर के लिए गार्डन जाते हैं। लेकिन रिवर फ्रंट के भीतर बने गार्डन का लाभ मार्निंग वॉकर को नहीं मिल पा रहा है। जबकि केडीए को यहां सुबह के समय नि:शुल्क सुविधा दी जानी चाहिए।</p>
<p><strong>पौधों को पानी व सफाई में 4 घंटे का समय लगता</strong><br />ऑक्सीजोन पार्क का संचालन करने वालों का कहना है कि यह पार्क पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहां लाखों छोटे-बड़े पौधे लगाए गए हैं। ऐसे में इन पौधों को नियमत पानी देने व इनकी सार संभाल में सुबह 4 घंटे का समय लगता है। सुबह 6 से 10 बजे तक यह काम होता है। इस दौरान पूरा गा र्डन व इसके भीत की सड़कें गीली व मिट्टी से सनी रहती है़। ऐसे में वहां इस समय में लोगों को प्रवेश नहीं दिया जा सकता। सुबह 10 बजे बाद यह लोगों के लिए खोल दिया जाता है। यदि इसकी नियमित देखभाल नहीं होगी तो दिन में फिर नहीं हो सकती। उस समय गार्डन में लोग आने लगते हैं।</p>
<p><strong>निर्माण के समय प्रावधान ही नहीं किया</strong><br />इधर केडीए आयुक्त बचनेश कुमार अग्रवाल का कहना है कि लोगों की मांग तो जायज है। लेकिन इन दोनों ही स्थलों के निर्माण के समय यहां मॉर्निंग वॉकर के लिए नि:शुल्क प्रवेश का प्रावधान ही नहीं किया गया। जिससे अब ऐसा कर पाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि शहर में कई अन्य बड़े गार्डन हैं जहां हरियाली के साथ ही नदी के किनारे का भी नि:शुल्क आनंद लिया जा सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:15:27 +0530</pubDate>
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                <title>ग्राउंड रिपोर्ट: क्या हादसाें के बाद ही जागने की रीत कभी तोड़ी जाएगी</title>
                                    <description><![CDATA[ बिना जांच 'अवैध टैंकरों' से सप्लाई हो रहा हजारों लीटर पानी,नई कॉलोनियों में मंडराया संकट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ground-report--will-the-pattern-of-waking-up-only-after-a-tragedy-occurs-ever-be-broken/article-156433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)33.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी स्तर पर संकट से निपटने के लिए कोटा शहर में 12 हाइड्रेंट/बोरिंग पॉइंट्स अनुबंधित (पूरी तरह टेस्टेड) किए गए हैं। इसी तरह रामगंजमंडी में 16 कुएं और सांगोद में 3 से 4 ट्यूबवेल रिजर्व रखे गए हैं, जहां से पूरी तरह जांचा हुआ पानी ही टैंकरों में भरा जाता है।<br />शिक्षा नगरी कोटा में भीषण गर्मी के बीच एक बड़ा जल-संकट और छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। एक तरफ जहां जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की कोटा लैब सरकारी स्तर पर लक्ष्य से आगे बढ़कर पानी की जांच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शहर के पॉश और घने कोचिंग इलाकों सहित बाहरी कॉलोनियों में अवैध और बिना जांचे पानी के टैंकरों का धंधा धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। रोजाना हजारों छात्र और स्थानीय नागरिक इस अनियंत्रित पानी को पीने और इस्तेमाल करने को मजबूर हैं, जिससे किसी बड़ी महामारी के फैलने का अंदेशा पैदा हो गया है।</p>
<p><strong>जवाहर नगर हादसे' की याद हुई ताजा</strong><br />शहर में पानी की मॉनिटरिंग को लेकर बरती जा रही यह लापरवाही सीधे तौर पर मासूमों की जान से खिलवाड़ है। विज्ञान नगर इलाके में दुषित पानी की सप्लाई के बाद वर्तमान स्थिति को देखकर कुछ साल पहले जवाहर नगर क्षेत्र में एक साथ फैली उस महामारी की याद ताजा हो जाती है, जब दूषित पानी की समस्या के चलते 70 से अधिक कोचिंग छात्रों को गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती करवाना पड़ा था।<br /><strong>-मनू सोलंकी निवासी जवाहर नगर</strong></p>
<p><strong>निजी वाटर सप्लाई पर नहीं है कोई निगरानी</strong><br />उस बड़े हादसे के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी है। आज भी स्थिति यह है कि केवल कच्ची बस्तियां ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े कोचिंग इलाकों और हॉस्टल्स में भी पानी की मॉनिटरिंग या उसकी नियमित जांच करवाने की कोई कानूनी बाध्यता तय नहीं की गई है। आखिर पानी जैसी बेहद बुनियादी लेकिन सबसे जरूरी चीज के लिए कोटा में एक 'प्रोपर और जिम्मेदार' सिस्टम आज तक क्यों नहीं बन पाया?<br /><strong>-सीता प्रजापित निवासी कोरल पार्क</strong></p>
<p><strong>बिना जांच सीधे पेट तक पहुंच रहा पानी</strong><br />आवासीय और कोचिंग जैसे बेहद संवेदनशील इलाकों में बिना किसी केमिकल या बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट के पानी की लगातार सप्लाई हो रही है, लेकिन इन टैंकरों पर विभाग की कोई मॉनिटरिंग नहीं है। यह पानी बस्ती वासियों के रोजमर्रा के काम से लेकर उनके पेट तक पहुंच रहा है। सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि न तो चिकित्सा विभाग (CMHO) के पास और न ही जलदाय विभाग के पास इन हॉस्टल्स और निजी स्रोतों की पूरी स्क्रीनिंग का कोई डेटा उपलब्ध है।</p>
<p><strong>हॉस्टल्स और घनी आबादी 'टैंकर माफिया' के भरोसे</strong><br />जिन क्षेत्रों में जलदाय विभाग की सीधी पाइपलाइन नहीं है, वहां निजी स्रोतों के नाम पर टैंकर माफियाओं का राज चल रहा है। शहर के सबसे संवेदनशील और वीआईपी माने जाने वाले कोचिंग हब इस समय पूरी तरह निजी टैंकरों के जाल में हैं। कोरल पार्क और लैंडमार्क सिटी जैसे अत्यधिक घनी आबादी वाले हॉस्टल क्षेत्रों में हजारों कोचिंग छात्र रह रहे हैं। यहां रोजाना बिना किसी शुद्धता जांच के धड़ल्ले से टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है।</p>
<p><strong>आवासीय बस्तियों व निजी कॉलोनियों मेेें बडा खेल</strong><br />नयागांव, आंवली, रोजड़ी, नांता के करणी नगर,बरड़ा, अनन्तपुरा के भीतरी इलाके,क्रेशर बस्ती, बृज धाम, मान सरोवर, प्रताप नगर पुनम कॉलोनी, श्री विहार, रायपुर की कॉलोनियां, रेलवे स्टेशन क्षेत्र, बूंदी रोड और बालिता की कॉलोनियां पूरी तरह इन निजी टैंकरों के भरोसे चल रही हैं। यहां निजी काॅलोनियां ताे विकसीत हो गयी लेकिन पानी जैसी बुनियादि जरूरत के लिये या तो घर के भीतर बने बोरिंग या फिर महंगे बोरिग सप्लाई के साथ टेन्करों की सप्लाई पर निर्भर है। यही नही इनके बदले पानी के इन सौदागरों की मोटी कमाई भी बडी है।</p>
<p><strong>पीएचईडी लाचार, गेंद सीएमएचओ के पाले में</strong><br />पीएचईडी के सीनियर केमिस्ट तरुण कुमार जैन ने बताया कि विभाग निजी स्रोतों और टैंकरों के पानी की जांच के लिए मात्र 297:रूपये की नॉमिनल फीस लेता है, जिसमें 48 घंटे में बैक्टीरियोलॉजिकल और केमिकल टेस्ट की रिपोर्ट आ जाती है। लेकिन सबसे बड़ा पेंच नियमों का है PHED लैब के पास प्राइवेट ट्यूबवेल या अवैध रूप से चल रहे टैंकर्स पर सीधे कानूनी कार्रवाई या जब्ती का अधिकार नहीं है। यदि पानी दूषित भी पाया जाता है, तो उस पर सीधे कार्रवाई करने का अधिकार केवल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के पास होता है। ऐसे में दोनों विभागों के बीच तालमेल की कमी का फायदा टैंकर संचालक उठा रहे हैं।</p>
<p><strong>हर 6 महीने में जांच है जरूरी</strong><br />जलदाय विभाग के जानकारों के अनुसार, आमतौर पर लोग एक बार पानी की जांच करवाकर निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन पानी की शुद्धता बनाए रखने के लिए हर 6 महीने में दोबारा जांच करवानी चाहिए। विशेषकर प्री-मानसून (बारिश से पहले) और पोस्ट-मानसून (बारिश के बाद) जांच अनिवार्य है, क्योंकि बारिश के दिनों में भूजल में खतरनाक बैक्टीरिया पनपने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।</p>
<p><strong>यह है कोटा में पानी की कहानी</strong><br />कोटा शहर में चंबल नदी से पानी लिफ्ट कर सकतपुर (130 व 70 MLD), अकेलगढ़ (64 MLD की 3 और 75 MLD की 1 यूनिट) तथा श्रीनाथपुरम (50 MLD) प्लांट्स से शुद्ध पानी सप्लाई किया जा रहा है। हमारे पास पानी की पयार्प्त व्यवस्था है। जहां कमी हो वहां टैंकर भेजते हैं।<br /><strong>-दीपक झा, अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता पीएचईडी</strong></p>
<p>यदि आपके क्षेत्र में नल से बदबूदार या गंदा पानी आ रहा है, तो बीमारी फैलने का इंतजार न करे। तुरंत संबंधित अधिकारीयों को सूचित करें। निजी स्रोतों का उपयोग करने वाले नागरिक बीमारी को न्योता न दें और नजदीकी पीएचईडी लैब में अपने पानी के सैंपल की जांच अवश्य करवाएं।<br /><strong>-तरूण कुमार जैन ,सीनीयर केमिस्ट पीएचईडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 14:14:20 +0530</pubDate>
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                <title>मायावती का राज्य सरकार पर निशाना : बिजली संकट पर जताई चिंता, बोली- आमजन को निजात दिलाने के लिए उचित कदम उठाए सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और भारी बिजली कटौती पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बिजली संकट से किसान, गरीब और छोटे व्यापारियों का जीवन कष्टदायी हो गया है। मायावती ने सरकार से तत्काल निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और नए बिजलीघर बनाने की अपील की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mayawati-targets-state-government-expresses-concern-over-power-crisis-says/article-154649"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/mayawati-759.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती पर चिंता जताते हुये कहा कि सरकार को बिजली संकट से आमजन को निजात दिलाने के त्वरित उपाय करने चाहिये। मायावती ने एक्स पर जारी संदेश में कहा कि बिजली संकट से गरीब, मध्यम वर्ग, किसान, छोटे व्यापारी और करोड़ों मेहनतकश लोगों का जीवन अति-कष्टदायी बन गया है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल आबादी वाले राज्य में भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली की कम आपूर्ति व कटौती आदि की आम शिकायतों व उसको लेकर विशेषकर गरीब, मध्यम वर्ग, किसान, छोटे व्यापारियों व अन्य करोड़ों मेहनतकश लोगों का जीवन अति-कष्टदायी बना हुआ है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इसको लेकर लोग विभिन्न रूपों में अपना आक्रोश भी प्रकट कर रहे हैं, जिसकी चर्चा समाचार माध्यमों में भी काफी व निरन्तर रहती है। सरकार से अपील है कि वह बिजली आपूर्ति सम्बंधी लोगों के कष्ट व परेशानियों को ध्यान में रखते हुये जरूरी उपाय तत्काल सुनिश्चित करे। साथ ही, नये बिजलीघर आदि के माध्यम से भी आगे के लिये बिजली आपूर्ति की स्थिति को सुधारने का प्रयास करे तो यह व्यापक जनहित में उचित होगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच कई जिलों से अघोषित बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं। विपक्ष लगातार बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:36:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला, बोले- देश में आने वाला है बड़ा आर्थिक संकट ! </title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रायबरेली दौरे के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चेतावनी दी कि देश का आर्थिक ढांचा बदलने से एक बड़ा आर्थिक तूफान आने वाला है। राहुल गांधी ने कहा कि इस गंभीर संकट का खामियाजा अडानी-अंबानी को नहीं, बल्कि देश की आम जनता को भुगतना पड़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-big-attack-on-the-central-government-said/article-154341"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gandhi2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि देश एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है और इसका सबसे ज्यादा असर आम जनता पर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान राहुल गांधी ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश का आर्थिक ढांचा पूरी तरह बदल दिया गया है, जिसके कारण एक बड़ा आर्थिक तूफान आने वाला है। उन्होंने कहा, "मैं पिछले कुछ दिनों से लगातार कह रहा हूं कि देश का आर्थिक ढांचा बदल गया है। एक बड़ा आर्थिक संकट आने वाला है। दुर्भाग्य से इसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ेगा। इस आर्थिक झटके का असर सिर्फ अडानी, अंबानी पर नहीं पड़ेगा, बल्कि देश के आम लोगों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।"</p>
<p>राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार आर्थिक चुनौतियों का समाधान निकालने के बजाय लोगों को विदेश यात्रा न करने की सलाह दे रही है, उन्होंने कहा कि आने वाला समय देश के लिए कठिन हो सकता है और सरकार को समय रहते ठोस कदम उठाने चाहिए। गौरतलब है कि राहुल गांधी मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दौरे पर हैं, जहां वह कई कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। उनके कार्यक्रमों में बछरावां विधानसभा क्षेत्र में बारात घर का उद्घाटन और ग्राम विकास संवाद, हरचंदपुर विधानसभा में कार्यकर्ताओं को संबोधन, लालगंज के सरेनी क्षेत्र में महिला संवाद कार्यक्रम और वैभव नगर वार्ड नंबर-14 में सड़क उद्घाटन कार्यक्रम शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 16:42:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कोटा रोज 70 क्विंटल गन्ना रस पी रहा, भीषण गर्मी में मीठी राहत का बना सहारा</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में चार दर्जन से अधिक मशीनें लगातार संचालित हो रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-consumes-70-quintals-of-sugarcane-daily/article-150645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी के तेवर अब तीखे होने लगे हैं। अप्रैल के मध्य में ही तेज धूप और बढ़ती तपन ने आमजन का जीना मुहाल कर दिया है। ऐसे में राहत की तलाश में लोग पारंपरिक और प्राकृतिक पेय पदार्थों की ओर रुख कर रहे हैं। इनमें गन्ने का रस सबसे आगे है। शहर में इन दिनों गन्ने के रस की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है और रोजाना करीब 70 क्विंटल गन्ना रस के रूप में खप रहा है। शहर के प्रमुख बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के आसपास, कॉलोनियों और मुख्य चौराहों पर गन्ने के रस के ठेले और दुकानें बड़ी संख्या में नजर आ रही हैं।</p>
<p><strong>दोपहर बाद ग्राहकों की अधिक भीड़</strong><br />एक अनुमान के अनुसार शहर में चार दर्जन से अधिक मशीनें लगातार संचालित हो रही हैं। इन मशीनों पर दिनभर गन्ना पिरोया जा रहा है और ग्राहकों को ताजा व ठंडा रस परोसा जा रहा है। सुबह के समय जहां ग्राहकों की संख्या सीमित रहती है, वहीं दोपहर बाद जैसे-जैसे तापमान चरम पर पहुंचता है, गन्ने के रस की दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगती है। कई स्थानों पर ग्राहकों को अपनी बारी का इंतजार भी करना पड़ रहा है। शाम के समय तो हालात ऐसे हो जाते हैं कि ठेलों के आसपास खड़े होने तक की जगह नहीं मिलती।</p>
<p><strong>मशीनों की बढ़ी संख्या, नए ठेले भी लगे</strong><br />गर्मी की बढ़ती मांग को देखते हुए कई नए विक्रेताओं ने भी गन्ने का रस बेचना शुरू कर दिया है। शहर में नई चरखियां लगाई गई हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है और ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिल रहे हैं। कुछ विक्रेता नींबू, अदरक और पुदीना मिलाकर स्वादिष्ट और हेल्दी रस भी परोस रहे हैं। शहर में बने आरओबी के नीचे काफी जगह होने व पर्याप्त छाया रहने से यहां कई छोटी मोटी दुकानों, थडिय़ों के साथ गन्ने की चरखियां भी आराम से चल रही हैं। इसके अलावा हाइवे पर जहां अंडरब्रिज व ओवरब्रिज हैं, उनके नीचे भी पर्याप्त छाया होने व वाहनों का स्टैण्ड होने या न होने पर गर्मी में बाइक, कारों व अन्य वाहनों से यात्रा करने वाले लोग कुछ पलों के लिए छांव में विश्राम के साथ गन्ने के रस से हलक तर कर लेते हैं।</p>
<p><strong>ग्राहकी से दुकानदारों के खिले चेहरे</strong><br />डीसीएम रोड स्थित गन्ने का ठेला लगाने वाली महिला दुकानदार सरोज व गोमती ने बताया कि यह सीजन उनके लिए सबसे ज्यादा कमाई का समय होता है। इस बार गर्मी जल्दी और तेज आई है, जिससे बिक्री भी उम्मीद से ज्यादा हो रही है। कई दुकानदार सुबह से लेकर देर रात तक लगातार काम कर रहे हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में गन्ने का रस न केवल प्यास बुझाने का साधन बना हुआ है, बल्कि शहरवासियों को ताजगी और ऊर्जा भी प्रदान कर रहा है। मीठी ठंडक के रूप में यह पारंपरिक पेय एक बार फिर लोगों की पहली पसंद बन गया है।</p>
<p><strong>यहां से हो रही गन्ना की आवक</strong><br />कोटा में गन्ने का उत्पादन बहुत बड़े स्तर पर नहीं होता, इसलिए यहां इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर गन्ना बाहर से मंगवाया जाता है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य होने के कारण कोटा में बड़ी मात्रा में गन्ना यहां के जिलों (जैसे सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ) से ट्रकों के जरिए आता है। महाराष्ट्र से भी कुछ व्यापारियों द्वारा गन्ना सप्लाई किया जाता है, हरियाणा और पंजाब सीमित मात्रा में, लेकिन सीजन के हिसाब से यहां से भी गन्ना आता है। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में कुछ हद तक गन्ना उत्पादन होता है, वहां से भी कोटा तक सप्लाई आती है। गन्ना आमतौर पर ट्रकों और पिकअप वाहनों के जरिए थोक मंडियों तक लाया जाता है। वहां से रस बेचने वाले दुकानदार और ठेले वाले इसे खरीदकर अपने-अपने क्षेत्रों में ले जाते हैं।</p>
<p>गन्ने का रस शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ ही डिहाइड्रेशन से बचाने में मददगार होता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा, खनिज और पानी की अच्छी मात्रा होती है। यही वजह है कि लोग कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड पेय की बजाय गन्ने के रस को प्राथमिकता देते हैं।<br /><strong>-डॉ. संजय शायर, सीनियर फिजिशियन</strong></p>
<p>शहर में इन दिनों गन्ने के रस की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है और रोजाना करीब 70 क्विंटल गन्ना रस के रूप में खप रहा है। गन्ना ट्रकों और पिकअप वाहनों के जरिए थोक मंडियों तक लाया जाता है। वहां से दुकानदार और ठेले वाले खरीदकर ले जाते हैं।<br /><strong>- विकास कुमार, गन्ना के थोक व्यापारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:35:29 +0530</pubDate>
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                <title>सीढ़ियों से जंग : पेंशन की राशि लेने में हाफंते 38 सौ बुजुर्ग पेन्शनधारी, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[कोई तीन बार रूकी, सीढ़ियों पर ही पीया पानी, दृष्टिहीन-दो पैरों से विकलांग काट रहा चक्कर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-battle-of-the-stairs--3-800-elderly-pensioners-panting-to-receive-pension-amount/article-146225"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बुढ़ापे में जब कदम धीमे पड़ जाते हैं और घुटने जवाब देने लगते हैं, तब भी कई बुजुर्गों को अपनी पेंशन पाने के लिए सीढ़ियों की लंबी चढ़ाई तय करनी पड़ रही है। जिन लोगों ने अपनी जवानी के दिनों में नौकरी करते हुए बैंक खाते खुलवाए थे, वही लोग अब उम्र के आखिरी पड़ाव में पेंशन लेने के लिए हर बार कठिनाई का सामना कर रहे हैं। शहर के सिविल लाइंस स्थित राजभवन रोड पर मौजूद स्टेट बैंक आफ इंडिया में वर्तमान में करीब 3800 पेँशन खाते सक्रिय है। यहांं शाखा कार्यालय दूसरी मंजिल पर संचालित हो रहा है। यहां पेंशन लेने आने वाले बुजुर्गों को लगभग 18 सीढ़ियां चढ़कर ऊपर पहुंचना पड़ता है। जिन पैरों ने जिंदगी भर परिवार के लिए मेहनत की, वही पैर अब हर सीढ़ी पर थकान और दर्द का एहसास कराते हैं। कई बुजुर्ग बताते हैं कि पेंशन लेने के लिए उन्हें हर दो से तीन महीने में बैंक आना ही पड़ता है। सीढ़ियां चढ़ते समय उन्हें कई बार रुककर सांस लेना पड़ता है, लेकिन मजबूरी यह है कि बिना ऊपर पहुंचे उनका काम नहीं हो पाता।</p>
<p><strong>यहां भी ऐसा ही हाल</strong><br />गुमानपुरा स्थित एसबीबीजे की शाखा भी बरसों से ही दुसरी मंजिल पर संचालित हो रही है। यहां पर भी 2 हजार के लगभग पेंशनर,बुजुर्गो के खाते है । ऐसे में यहां के खातेदारों को भी सीढ़ियों से ही बैंक में जाना पड़ता है। शहर के अन्य बैंको में भी कमोबेश ऐसे ही हालात है जहां वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगों के लिये कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी है।</p>
<p><strong>केस नं. 1-</strong> कोटड़ी क्षेत्र की एक महिला पिछले करीब 12 वर्षों से यहां पेंशन लेने आ रही हैं। उन्होंने बताया कि घुटनों की तकलीफ के कारण अब सीढ़ियां चढ़ना बेहद मुश्किल हो गया है। हर बार ऊपर पहुंचते-पहुंचते सांस फूल जाती है, फिर भी पेंशन लेने के लिए आना पड़ता है।</p>
<p><strong>केस नं. 2-</strong> जवाहर सागर बांध क्षेत्र से आई कांति बाई कहती हैं कि उम्र बढ़ने के साथ अब बैंक तक पहुंचना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सीढ़ियां चढ़ते समय उन्हें कई बार रुककर सांस लेना पड़ता है। गांव से किसी व्यक्ति को साथ लाना पड़ता है और उसके आने-जाने का खर्च भी देना पड़ता है।</p>
<p><strong>केस नं. 3-</strong> सिविल लाइंस निवासी राजू खंगार, जो दोनों पैरों से लाचार हैं और आंखों से भी ठीक से नहीं देख पाते, बताते हैं कि उन्होंने दिवाली के बाद अपनी संस्था के लिए बैंक में खाता खुलवाया था। खाते में करीब सात हजार रुपये जमा हैं, लेकिन कुछ कमियां पूरी करने के लिए उन्हें बार-बार बैंक आना पड़ रहा है। उनका कहना है कि उनके जैसे दिव्यांग व्यक्ति को आने के लिये एक अन्य साथी की जरूरत पड़ती है। इसलिए हर बार बैंक आना बेहद कठिन है।</p>
<p><strong>आखिर क्यूं आना पड़ता है बैंक</strong><br />-बैक आने वाले इन ग्राहकों में ज्यादातर को नये नियमों की जानकारीयां ही नहीं है।<br />-बात यो भी है कि बैक द्वारा ऐसी जरूरी बातें आगे होकर इन बुजुर्गो को बतायी ही नहीं गयी ।<br />-कई लोग अंगुठा निशानी का प्रयोग करते हे, ऐसे में पैसे निकलवाने के लिये मूल बैंक में आना ही पड़ता है।<br />-ग्रामीण क्षेत्रों में ई-मित्र या अन्य सहायक सुविधायें मंहगी होती है या फिर कम होती हे ।<br />-खाता स्थानान्तरण करने में बैंको द्वारा आनाकानी ।<br />-मोबाईल नहीं होना या चलाने की परेशानी भी इस उम्र ओंर दिव्यांगो के लिये सबसे बड़ा कारण है ।</p>
<p><strong>बुजुर्ग और दिव्यांगों के लिए डोरस्टेप बैंकिंग</strong><br />बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि आज डिजिटल बैंकिंग और आधार आधारित भुगतान जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनसे घर के पास ही पैसा निकाला जा सकता है। बैंक परिसर में रैंप, व्हीलचेयर और जरूरत पड़ने पर लिफ्ट जैसी व्यवस्था करना व बैंक शाखाओं में बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए अलग या प्राथमिकता काउंटर की व्यवस्था करना अनिवार्य है। 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को नकद जमा-निकासी व अन्य जरूरी सेवाएं घर पर उपलब्ध कराने की सुविधा।यदि कोई घर से आने में लाचार है तो बैक प्रबंधन घर पर भी पैसे देने के लिये किसी कार्मिक को भेजता है। साथ ही बैंक की जिम्मेदारी है कि वह अपने ग्राहकों को इन सुविधाओं के बारे में बताने के लिये आवश्यक सामग्री या जानकारी उपलब्ध करवायें।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शाखा की पुरानी इमारत को तोड़कर नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन है,और भविष्य में ऐसी सुविधाएं देने का प्रयास किया जाएगा, जिससे बुजुर्गों और दिव्यांगों को परेशानी न हो।<br /><strong>-शदेन्दु पाण्डेय, ब्रांच मैनेजर एसबीआई राजभवन रोड</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 15:20:39 +0530</pubDate>
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                <title>नहरें बन रही काल का गाल, हर महीने 3 से 4 लोगों की डूबने से हो रही मौत</title>
                                    <description><![CDATA[नहरों की चार दीवारी इतनी छोटी है कि कोई भी नहाने के लिए आसानी से पहुंच रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-becoming-death-traps--3-to-4-people-die-every-month-due-to-drowning/article-145616"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस एक : </strong>उद्योग नगर थाना क्षेत्र में डीसीएम स्थित नहर में नहाने गए दो युवक पानी के तेज बहाव में बह गए थे। जिनमें से एक को तो सुरक्षित निकाल लिया। जबकि दूसरे की डूबने से मौत हो गई। युवक की मौत से उसके परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा।</p>
<p><strong>केस दो:</strong> कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में गत दिनों नहर में नहाते समय एक युवक का पैर फिसल गया था। जिससे वह पानी के तेज बहाव में बह गया। सूचना पर पुलिस व निगम के गोताखोर पहुंचे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी है। युवक का शव तीन दिन बाद घटना स्थल से काफी दूर मिला।</p>
<p><strong>केस तीन: </strong>किशोरपुरा थाना क्षेत्र में गोविंद धाम के पास चम्बल नदी में हाथ-पैर धोने के लिए नदी किनारे गए युवक को झटका लगने से वह उसमें गिर गया। सूचना पर गोताखोर पहुंचे लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। बाद में तलाश करने पर उसका शव मिला।</p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं उन हालातों को बताने के लिए जिनका सामान शहर वासियों को रोजाना करना पड़ रहा है। स्मार्ट सिटी की श्रेणी में आए कोटा जैसे शहर में जो अब पर्यटन नगरी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाला है। उस शहर के बीच रिहायशी इलाकों से नहर निकल रही है। वह भी दांयी और बांयी मुख्य नहर। इन नहरों की चार दीवारी या तो इतनी छोटी है कि वहां से कोई भी नहाने के लिए आसानी से पहुंच रहा है या फिर नहरों की सुरक्षा दीवार ही कई जगह से टूटी हुई है। जिससे लोगों को नहाने की जगह आसानी से मिल रही है। ऐसे में हादसे अधिक हो रहे हैं।</p>
<p><strong>धुलंडी पर एक दिन की पाबंदी</strong><br />पिछले कुछ सालों में धुलंडी के दिन कई लोगों के नदी, तालाब व नहर में नहाने जाने के दौरान पैर फिसलने और पानी का बहाव तेज होने से लोगों के उनमें डूबने की घटनाएं हो चुकी है। कुछ समय पहले तो एक ही दिन में करीब आधा दर्जन लोगों की डूबने से मौत होगई थी। उसके बाद पुलिस व प्रशासन की ओर से धुलंडी के दिन नहर और नदी तालाब में नहाने जाने पर ही पाबंदी लगा दी है। लेकिन हालत यह है कि यह पाबंदी सिर्फ एक ही दिन के लिए हो रही है। उसके बाद फिर से वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति बन गई है।</p>
<p><strong>अभी भी नहा रहे नहर पर</strong><br />धुलंडी के दिन तो नहरों में पानी का बहाव भी कम कर दिया गया था। पुलिस व प्रशासन का पहरा व सख्ती भी दिखी। लेकिन उसके बाद इस पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। यही कारण है कि अभी भी शहर में कई जगह पर नहरों में लोग विशेष रूप से युवा और बच्चे नहा रहे हैं। जिससे फिर से कभी भी कोई बड़ा हादसा या लोगों के डूबने से मौत की घटना होने का खतरा बना हुआ है। हालांकि नवज्योति ने होली से पहले ही इस संबंध में चेताया था। उसके बाद भी हालातों में कोई सुधार नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>हर साल 35 से 40 की डूबने से हो रही मौत</strong><br />एक तरफ तो कोटा व हाड़ौती के लिए चम्बल नदी बरदान है। वहीं दूसरी तरफ यह जानलेवा भी साबित हो रही है। चम्बल नदी, नहर व तालाब में हर साल डूबने से करीब 35 से 40 लोगों की मौत हो रही है।नगर निगम के फायर अनुभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार हर महीने करीब 3 या उससे अधिक लोगों की यानि दसवें दिन एक व्यक्ति की डृबने से मौत हो रही है। हालांकि निगम के गोताखोरों की टीम ने कई डूबे हुए लोगों को सुरक्षित भी बाहर निकाला है।</p>
<p><strong>यह है स्थिति</strong><br />जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 में कोटा शहर में 33 लोगों की डूबने से मौत हुई जबकि 4 को जीवित व सुरक्षित बाहर निकाला गया। वर्ष 2021-22 में 38 लोगों की डूबने से मौत हुई और 136 को सुरक्षित निकाला गया। वर्ष 2022-23 में 44 लोगों की डूबने से मौत हुई और 222 को सुरक्षित निकाला गया। वर्ष 2023-24 में 30 की डूबने से मौत हुई व 1 को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वहीं वर्ष 2024-25 में 34 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है और 9 को सुरक्षित निकाला गया है। उसके बाद भी आए दिन लोगों के डूबने व मौत की घटनाएं हो रही हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर के बीच व रिहायशी इलाकों से नहर व चम्बल नदी गुजर रही है। नहरों की सुरक्षा दीवार इतनी छोटी है कि वहां से कोई भी नहाने के लिए जा सकता है। नहर में पानी का बहाव अधिक होने पर तैरने वाला जानकार भी कई बार बह जाता है। जिससे उसकी डूबने पर मौत हो जाती है। हालांकि किशोरपुरा से गुमानपुरा वाली नहर की सुरक्षा दीवार 8 फद्दीट करने से अब वहां घटनाएं कम हो रही है। सिचाई विभाग को चाहिए कि नहरों की सुरक्षा दीवार को इतना ऊंचा किया जाए या उन पर फेंसिंग की जाए कि लोग वहां से चढ़कर पानी तक नहीं जा सके। आत्म हत्या करने के अलावा हादसों के कारण भी लोगों की डूबने से मौत हो रही है। शहर में अधिकतर नहरों की सुरक्षा दीवार छोटी है। नगर निगम के पास पर्याप्त गोताखोर व स्कूबा डाइविंग सेट समेत नाव व अन्य संसाधन पर्याप्त हैं। लेकिन अधिकतर लोगों की मौत का कारण सूचना देरी से मिलना होता है। देर से सूचना मिलने पर बहे लोग काफी आगे निकल जाते हैं। नहर में झाड़ झंकार में फंस जाते हैं। जिससे उनकी तलाश में देरी होने पर मौत अधिक होती है। वैसे तुरंत सूचना मिलने पर कई लोगों को जीवित व सुरक्षित भी निकाला गया।<br /><strong>- विष्णु श्रृंगी, गोताखोर नगर निगम कोटा</strong></p>
<p>समय-समय पर नहरों में पानी का जल प्रवाह कम करते रहते हैं। हालांकि कई जगह पर नहरों की दीवार को ऊंचा भी कराया गया है। लेकिन जहां भी सुरक्षा दीवार टूटी हुई है या फेंसिंग की जरूरत होगी उसे भी सही करवाने का प्रयास किया जाएगा।<br /><strong>- संजय कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता सिंचाई वृत्त सीएडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 15:46:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जापान में रिकॉर्ड बर्फबारी से कई लोगों की मौत : करीब 600 लोग गंभीरता से घायल, दिखी दूसरी लहर</title>
                                    <description><![CDATA[आओमोरी प्रांत में बर्फ की गहराई 4.6 मीटर (15 फीट) से अधिक हो गई, जबकि होक्काइडो की राजधानी साप्पोरो में यह 1.1 मीटर (3.6 फीट) से अधिक हो गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/many-people-died-due-to-record-snowfall-in-japan-about/article-142229"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(10)2.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">टोक्यो। जापान में रिकॉर्ड बर्फबारी के कारण मरने वालों की संख्या 45 हो गई है, जबकि घायलों की संख्या 600 के करीब पहुंच रही है। देश की मुख्य अग्निशमन सेवा से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह जानकारी सामने आयी। 20 जनवरी से अब तक कुल 585 लोग अलग-अलग गंभीरता से घायल हुए हैं; इनमें से 187 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। कम से कम 45 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले सप्ताह उत्तरी जापान में रिकॉर्ड बर्फबारी की दूसरी लहर देखी गई। आओमोरी प्रांत में बर्फ की गहराई 4.6 मीटर (15 फीट) से अधिक हो गई, जबकि होक्काइडो की राजधानी साप्पोरो में यह 1.1 मीटर (3.6 फीट) से अधिक हो गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुख्य द्वीपों में सबसे उत्तरी द्वीप होक्काइडो में एक और हिमपात हुआ, जिसमें कुछ क्षेत्रों में हवा के झोंके 35 मीटर प्रति सेकंड (78 मील प्रति घंटे) तक पहुंच गए। होक्काइडो के अधिकांश हिस्सों के लिए तेज हवाओं, बर्फीले तूफान, ऊंची लहरों और भारी बर्फबारी की चेतावनी जारी की गई है। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 15:27:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>सांसों पर संकट, थर्मल की बूढ़ी इकाइयां शहर को बना रही बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[चिमनियों से उठता धुआँ थर्मल प्लांट के 4-5 किमी क्षेत्र तक शहर की हवा को प्रदूषित कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/breathing-crisis--the-aging-thermal-power-plant-units-are-making-the-city-sick/article-142152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा नगरी के नाम से पहचाने जाने वाले कोटा की आबो-हवा अब जहरीली होती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह कोटा थर्मल पावर प्लांट की वे बूढ़ी इकाइयां हैं, जो अपनी तय उम्र पूरी कर चुकी हैं, लेकिन आज भी धड़ल्ले से चलाई जा रही हैं। 1983 में स्थापित थर्मल की यूनिट1 और यूनिट 2 अपनी निर्धारित अवधि से करीब 10 साल ज्यादा समय निकाल चुकी हैं । इसके बावजूद इनसे निकलने वाला धुआं, राख और गर्म पानी शहरवासियों की सांसों और चंबल नदी दोनों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। चंबल किनारे बसें लोगों का कहना है कि थर्मल से 4 से 5 किलोमीटर की परिधि तक सीधा असर दिख रहा है। हवा में घुले सूक्ष्म कण सांसों के जरिए शरीर में जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों ने सफेद कपड़े पहनना तक बंद कर दिया है,क्योंकि छत पर कपड़े सुखाने पर कुछ ही देर में उन पर राख जम जाती है। चिमनियों से उठता धुआं दिनभर शहर की हवा को दूषित कर रहा है।अवधी पार कर चुकी इकाइयों का असर अब युवाओं पर भी साफ दिखने लगा है।</p>
<p><strong>कम उम्र  सांस, आंख और त्वचा की समस्याएं</strong><br />किशोरपुरा क्षेत्र की 35 वर्षीय रिंकू कंवर बताती हैं, सीढ़ियां चढ़ते ही सांस फूलने लगती है। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। डॉक्टर कहते हैं कि हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां कम उम्र के लोग भी सांस, आंख और त्वचा संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। थर्मल से निकलने वाला प्रदूषण केवल हवा तक सीमित नहीं है। संयंत्र से छोड़ा जा रहा गर्म और दूषित पानी सीधे चंबल नदी में मिलाया जा रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे नदी का तापमान बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर जलीय जीवों और चंबल की जैव विविधता पर पड़ रहा है। मगर प्रशासन और थर्मल प्रबंधन इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।</p>
<p><strong>बड़ा सवाल फ्लू गैस डी-सल्फराइजेशन (एफजीडी) प्लांट नहीं</strong><br />नियमों के अनुसार थर्मल में यह प्लांट लगना चाहिए था, ताकि सल्फर डाइआॅक्साइड जैसे जहरीले गैसों का उत्सर्जन कम हो सके। लेकिन आज तक यह प्लांट पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया। नतीजा यह है कि शहर की सांसों में जहर लगातार घुलता जा रहा है। किशोरपुरा, शिवपुरा, पाटनपोल, साबरमती कॉलोनी, केथूनीपोल, शक्ति नगर, दादाबादी, श्रीनाथपुरम से लेकर सकतपुरा और नांता तक राख का फैलाव देखा जा रहा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रात में खुले में सोना तो दूर, दिन में घरों की खिड़कियां खोलना भी मुश्किल है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।</p>
<p><strong>प्रभाव जो देखे जा रहे</strong><br />-5 किमी तक राख और धुएं का फैलाव।<br />-सफेद कपड़ों पर जम रही काली परत।<br />-आंख और स्वांस के रोगियों को बढ रही परेशानी।<br />-थर्मल के गर्म पानी को सीधे नदी में मिलाने से चंबल की जैव विविधता पर भी संकट बढ़ रहा है, थर्मल से डिस्चार्ज पानी के साथ आॅयल की मात्रा भी नदी में आती है, कुछ महीने पहले भी किशोरपुरा की तरफ काफी सारी मरी मछिलयां पानी पर पडी़ हुई देखी गई थी ।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong><br />थर्मल से निकलने वाले धुएं में कईं प्रकार के टॉक्सिस औैर पार्टिकल होते है दमा ,फेफड़ों से सम्बन्धित बिमारी वाले रोगियों में यह गम्भीर समस्याएं पैदा कर सकता है।<br /><strong>- डॉ. राजेश ताखर,  श्वास व एलर्जी रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p>अवधी पार कर चुकी थर्मल इकाइयों को चलाना बेहद खतरनाक है। बिना ट्रीटमेंन्ट प्लांट के सल्फर और पार्टिकुलेट मैटर सीधे हवा में जा रहे हैं। इससे श्वसन रोगों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। साथ ही गर्म पानी नदी में छोड़ने से पानी में आक्सीजन की कमी हो जाती है। जलीय जीवों के विकास में बाधा तो होती ही साथ ही कई अन्य बुरे प्रभाव भी जन्म लेने लगते है यह पर्यावरणीय अपराध की श्रेणी में आता है। कोटा की आबो-हवा और चंबल की सेहत अब निर्णायक मोड़ पर है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को चुकाना पड़ेगा।<br /><strong>-अनिल रावत, सेवानिवृत्त वैज्ञानिक, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</strong></p>
<p>हमारे यहां पर जिला प्रदूषण बोर्ड की टीम द्वारा समय समय पर सेम्पलिंग करवायी जाती है, जिसकी रिपोर्ट भी आगे जाती है।<br /><strong>-शिखा अग्रवाल, मुख्य अभियन्ता कोटा थर्मल</strong></p>
<p>चम्बल के पानी और हवा की सेम्पिलंग करने के लिये हमारी टीमें लगातार जाती रहती है। जिसकी अपडेट पोर्टल पर डाल दी जाती है ।<br /><strong>-योग्यता सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी जिला प्रदूषण बोर्ड, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 14:54:17 +0530</pubDate>
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                <title>मुख्य मार्ग पर अधूरे सड़क निर्माण से लोगों को हो रही परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[नई सीसी सड़क होने और दूसरी तरफ गड्डों व कच्चे हिस्से के कारण वाहन असंतुलित हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/incomplete-road-construction-on-the-main-road-is-causing-problems-for-people/article-136631"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(4)8.png" alt=""></a><br /><p>मोड़क गांव। कस्बे के मुख्य मार्ग की हालत दिनों काफी खराब है। बरसात का सम नहीं होने के बावजूद सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। उखड़ी सतह के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ न पूर्व सड़क के एक हिस्से में सीसी ड़क का निर्माण कर दिया गया। लेकिन दूसरी ओर सड़क को जस का तस छोड़ दिया गया। आधा-अधूरा निर्माण होने से समस्या और भी गंभीर हो गई है। एक तरफ नई सीसी सड़क होने और दूसरी तरफ गड्डों व कच्चे हिस्से के कारण वाहन असंतुलित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>लोगों ने प्रशासन से लगाई गुहार</strong><br />निवासियों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पूरी सड़क का समुचित निर्माण कराया जाए। ताकि आमजन को राहत मिल सके और किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।</p>
<p><strong>पैदल राहगीरों को भी संभलकर चलना पड़ रहा</strong><br />दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग विशेष रूप से जोखिम भरा साबित हो रहा है। वहीं पैदल राहगीरों को भी संभलकर निकलना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि जब निर्माण कार्य शुरू किया गया था तो पूरी सड़क को दुरुस्त किया जाना चाहिए था।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इस रोड को अधूरा छोड़ने से विशेषकर स्कूली बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस रोड़ से बड़ी संख्या में वाहन निकलते हैं। जिससे हमेशा हादसों की आशंका बनी रहती है।<br /><strong>- ममता रेगर, जनप्रतिनिधि</strong></p>
<p>इस रोड़ पर ट्रैफिक का अधिक दबाव होने के कारण अभी सड़क को एक साइड से कंप्लीट किया जा रहा है। इसके कंप्लीट होने के बाद ट्रैफिक डायवर्ट कर 5 दिनों में दुबारा काम शुरू कर दिया जाएगा।<br /><strong>- राजकुमार राजोरिया, परियोजना निदेशक, आरएसआरडीसी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 16:38:30 +0530</pubDate>
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