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                <title> jagdeep dhankhar - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> jagdeep dhankhar RSS Feed</description>
                
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                <title>राजस्थान का पानी पीने वाला किसी के दबाव में काम नहीं करता : राजनीति में बढ़ रहा तापमान, धनखड़ बोले– न मैं झुकता हूं, न ओम बिड़ला</title>
                                    <description><![CDATA[उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने विपक्ष के दबाव में काम करने के आरोपों पर कहा कि राजस्थान का पानी पीने वालाकिसी के दबाव में काम नहीं कर सकता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-pressure-dhankar-ombirla-constitutionclub/article-118996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(4)31.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने विपक्ष के दबाव में काम करने के आरोपों पर कहा कि राजस्थान का पानी पीने वालाकिसी के दबाव में काम नहीं कर सकता है। धनखड़ सोमवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में राजस्थान प्रगतिशील मंच पूर्व विधायक संघ के स्नेह मिलन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। समारोह में धनखड़ सहित राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का भी सम्मान किया गया। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि राज्यपाल बागड़े की बातों में सटीकता है। राज्यपाल जब प्रान्त में होता है तो सब कुछ आसान नहीं होता। अब तो उपराष्ट्रपति भी इस दायरे में लाए जाते हैं। मैं किसी के दबाव में नहीं आता हूं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला भी दबाव में नहीं आ सकते। राजस्थान का पानी पीने वाला व्यक्ति कभी दबाव में आ ही नहीं सकता।</p>
<p>राजस्थान से बलराम जाखड़ के बाद ओम बिड़ला ऐसे दूसरे अध्यक्ष हैं, जिनको लगातार दूसरी बार अध्यक्ष बनने का मौका मिला है। प्रतिपक्ष का बहुत बड़ा योगदान रहता है। अभिव्यक्ति, वाद विवाद हो, लेकिन अभिव्यक्ति कुंठित हो जाती है तो वातावरण दूषित होता है। अभिव्यक्ति की पहल सार्थक होनी चाहिए। पूर्व विधायकों की मांगों को लेकर धनखड़ ने कहा कि 26 साल पहले बनी आचार समिति में इसके लिए नियम बने थे। जनसेवा से जुड़े रहने के कारण इनको सम्मान मिलना चाहिए। राजनीतिक वातावरण को लेकर कहा कि आज प्रजातंत्र के लिए चिंता और चिंतन का विषय है। भैरोसिंह शेखावत का कोई दुश्मन नहीं मिलेगा, क्योंकि हरिदेव जोशी और शेखावत जैसे नेता क्रोध की राजनीति की सीख नहीं देते थे। नेता इधर उधर पार्टियां बदलते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दुश्मनी हो जाये। आज राजनीति का तापमान बढ़ रहा है। हमारी 5 हजार साल की संस्कृति बेजोड़ है। आज विधानमण्डलों को सर्वश्रेष्ठ आचरण का पालन करना होगा। उम्मीद है कि हम सब इस ओर ध्यान देंगे। धनखड़ ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा कि हमारी मिसाइलों ने सटीक निशाना लगाकर आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया, जबकि आतंकियों के साथ वंहा की सरकार भी खड़ी थी। आज विश्व में लोगों को कितना पीड़ित होना पड़ रहा है। इजराइल-ईरान,यूक्रेन रसिया जैसे युद्ध चल रहे हैं, लेकिन गांधी के देश की कूटनीति अलग ही पहचान रखती है। युद्ध से अर्थव्यवस्था को चोट लगती है। हर कालखंड में व्यवस्थाएं बदलती हैं। आज भारत दुनिया की 4 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। पिछले 10 साल में भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था में रफ्तार वाला देश बना है। यह हमारे लिए बड़ी छलांग है। </p>
<p>राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि मैं भी पूर्व विधायक हूं। मज़ाकिया अंदाज में पूर्व विधायकों ने अपनी पेंशन को 35 हजार से बढ़ाकर 45 हजार करने की मांग की है। शायद राज्य सरकार केखजाने के बारे में सोचकर कम पैसे बढ़ाने के लिए मांग रखी है। अखबारों में खबरें छप रही हैं कि सीएम और राज्यपाल दबाव में काम कर रहे हैं। ऐसा कुछ नहीं है, हम तो केवल संविधान के दबाव में है। किसी के दबाव में आकर हम काम नहीं करेंगे। दबाव की बात करें तो पीओके लार्ड माउंट बेटन के दबाव में बना, जिसकी टीस हमको आज तक है। धारा 356 को लेकर भी राज्यपाल पर दबाव होने की बातें की जाती हैं। देश में 51 बार 356 का प्रयोग हुआ है। संविधान के प्रस्ताव में कभी बदलाव नहीं होता, लेकिन एक बार किया गया। बागड़े ने शिक्षा पर फोकस करने का आग्रह करते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों सहित सभी बच्चों को शिक्षा से जोड़ें तो राष्ट्र का विकास होगा।</p>
<p>विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि विधायकी का पद जनहित करने का एक अनुबंध है। हमारी जवाबदेही सिर्फ विधानसभा तक ही सीमित नहीं है। आज राजनीति विचारधारा की जगह आक्षेपों पर चल पड़ी है। इस दूषित राजनीति पर हम सबको ध्यान देना होगा। राजस्थान में विधानसभा के 15 सत्र में कई बार चुनौतियां मिली है। </p>
<p>नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि पूर्व विधायकों का अपने आप में एक अनुभव है। राजनीति में उगते को सलाम है मगर छिपते को कोई नहीं पूछता। पूर्व विधायकों का लोकतंत्र में बड़ा योगदान रहा है। आज सत्तापक्ष और विपक्ष के लोगों में लोकतांत्रिक मूल्यों की कमी सामने आ रही है। आज मंहगाई को देखते हुए पूर्व विधायकों की मांगों का समर्थन करता हूं। राजस्थान विधानसभा में जिम्मेदारों को इनकी मांगों पर विचार होना चाहिए। राजस्थान प्रगतिशील मंच के सरंक्षक विधायक हरिमोहन शर्मा ने मंच की मांगें रखते हुए कहा कि पूर्व विधायकों को प्रशासन कार्यक्रमों में नहीं बुलाते। पूर्व विधायकों के लिए केंद्र सरकार की गाइड लाइन की राज्य सरकारों को पालन करना चाहिए, ताकि पूर्व विधायकों को सम्मान मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Jun 2025 15:56:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>सनातन गर्व फिर से पुनर्निर्मित हो रहा,  जो खो गया था, वह अब और भी मजबूत संकल्प के साथ फिर से बनाया जा रहा है : धनखड़</title>
                                    <description><![CDATA[ पुडुचेरी विश्वविद्यालय में छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि सनातन गौरव पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sanatan-proud-again-being-rebuilt-which-was-lost-is-now/article-117690"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news41.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पुडुचेरी विश्वविद्यालय में छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि सनातन गौरव पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में है। जो कुछ खो गया था, उसे अब और दृढ़ संकल्प के साथ दोबारा खड़ा किया जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि “भारत की शैक्षणिक भूगोल और इतिहास, तक्षशिला, नालंदा, मिथिला, वल्लभी जैसे महान शिक्षा केंद्रों से सजे हुए थे। उस कालखंड में इन संस्थानों ने दुनिया के सामने भारत को परिभाषित किया। दुनिया भर के विद्वान यहां ज्ञान साझा करने और भारतीय दर्शन को समझने आते थे। परंतु, कुछ तो गलत हुआ। नालंदा की 9 मंजिला पुस्तकालय- सोचिए, 1300 साल पहले- धर्मगंज नामक वह पुस्तकालय खगोलशास्त्र, गणित और दर्शनशास्त्र के समृद्ध ग्रंथों से भरा था। दो चरणों की आक्रमण लहरों में- पहले इस्लामी आक्रमण और फिर ब्रिटिश उपनिवेशवाद- भारत की ज्ञान परंपरा को गहरी चोट पहुंची। लगभग 1190 के आसपास बख्तियार खिलजी ने अमानवीयता और बर्बरता का प्रदर्शन किया। उसने सिर्फ किताबें नहीं जलाईं, बल्कि भिक्षुओं की हत्या की, स्तूपों को नष्ट किया और भारत की आत्मा को रौंदने का प्रयास किया- यह जाने बिना कि भारत की आत्मा अविनाशी है। आग कई महीनों तक जलती रही। नौ लाख ग्रंथ और पांडुलिपियाँ जलकर भस्म हो गईं। नालंदा केवल एक विचार का केंद्र नहीं था, वह मानवता के लिए ज्ञान का जीवंत मंदिर था।”</p>
<p>राजनीतिक संवाद और संयम पर ज़ोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें राष्ट्रीय मानसिकता में भी बदलाव लाने की आवश्यकता है। राजनीतिक व्यवस्था की बात करें तो हम केवल मतभेद के लिए मतभेद करते हैं, समाधान के लिए नहीं। किसी और के द्वारा दी गई अच्छी बात भी हमें तभी गलत लगती है, क्योंकि वह हमारे विचार से नहीं आई। यह हमारे वेदांत के अनंतवाद की भावना के विपरीत है। हमें अभिव्यक्ति, वाद-विवाद और संवाद की दिशा में बढ़ना होगा। हम राजनीतिक तापमान बढ़ाने को आतुर हो गए हैं। जलवायु परिवर्तन तो वैसे भी तापमान बढ़ा ही रहा है। फिर हम क्यों अपने धैर्य के हिमखंडों को पिघलाएं? क्यों अधीर होकर अपनी सभ्यतागत और आध्यात्मिक आत्मा से दूर जाएं? मैं सभी राजनीतिक नेताओं से अपील करता हूं- राजनीति का तापमान घटाएं। टकराव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। संविधान सभा ने हमें विघटन और अवरोध का रास्ता नहीं सिखाया है। आज जब भारत उन्नति के मार्ग पर है और सारी दुनिया हमारी ओर देख रही है, ऐसे में हमें राष्ट्रीय हित और विकास की भावना से संवाद करना होगा।”</p>
<p>शिक्षा के बाज़ारीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “एक समय था जब शिक्षा और स्वास्थ्य को समाज सेवा का माध्यम माना जाता था। जिनके पास संसाधन होते थे, वे समाज को लौटाने के लिए इन क्षेत्रों में योगदान देते थे, लाभ के लिए नहीं। यह हमारी प्राचीन परंपरा थी। आज शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती वाणिज्यिक सोच के चलते हमें मूल्यों की ओर लौटना होगा। हमारी शिक्षा व्यवस्था भारत के पारंपरिक गुरुकुल मॉडल से प्रेरित होनी चाहिए, जिसे भारतीय संविधान की 22 लघु चित्रों में स्थान मिला है। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति नहीं है, उसमें चरित्र निर्माण भी होना चाहिए। आज जो वाणिज्यिक मॉडल उभर रहा है, वह शिक्षा को सेवा के स्वरूप से दूर कर रहा है। मैं कॉरपोरेट जगत से अपील करता हूं- मानसिकता में बदलाव लाएं। भारत हमेशा से परोपकार की भूमि रहा है। अपने CSR संसाधनों को समाहित कर ग्लोबल उत्कृष्टता के संस्थान बनाएं- जो बैलेंस शीट से परे सोचें।”</p>
<p>पूर्व छात्रों के योगदान की महत्ता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि “अगर आप दुनिया के विकसित लोकतंत्रों को देखें तो पाएंगे कि वहां विश्वविद्यालयों के एंडोमेंट फंड अरबों डॉलर में हैं। एक विश्वविद्यालय का फंड 50 अरब डॉलर से अधिक है। माननीय कुलपति जी, शुरुआत कीजिए। इस विश्वविद्यालय के हर पूर्व छात्र से अपील करें कि वे इसमें योगदान दें। बच्चों, राशि का आकार महत्वपूर्ण नहीं है, भावना महत्वपूर्ण है। वर्षों में इसका प्रभाव आप देखेंगे, न केवल फंड बढ़ेगा, बल्कि पूर्व छात्रों में अपने संस्थान के प्रति लगाव भी गहराएगा। यह एक छोटा कदम हो सकता है, लेकिन जैसे नील आर्मस्ट्रांग ने चंद्रमा पर कदम रखते हुए कहा था यह एक छोटा कदम है, पर मानवता के लिए एक विशाल छलांग। वैसे ही यह एक छोटा प्रयास बड़ी उपलब्धि बन सकता है।”</p>
<p>भारतीय भाषाओं की समावेशिता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि “हम भाषाओं के आधार पर कैसे बंट सकते हैं? कोई देश भारत जितना भाषाई समृद्ध नहीं है। संस्कृत आज वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है- तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओड़िया, मराठी, पाली, प्राकृत, बंगाली, असमिया- ये 11 भाषाएं हमारी शास्त्रीय भाषाएं हैं। संसद में 22 भाषाओं में सदस्य संवाद कर सकते हैं। बच्चों, हमारी भाषाएं समावेशिता की प्रतीक हैं। सनातन धर्म हमें साथ रहने की, एकत्व की शिक्षा देता है। तो फिर यह समावेशिता कैसे विभाजन का कारण बन सकती है? मैं सभी से अपील करता हूं- आत्मचिंतन करें, गौरवमयी अतीत को देखें, बच्चों का भविष्य सोचें और इस तूफान से ऊपर उठें।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Jun 2025 17:59:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>भारत का विरोध करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था को सशक्त न बनाएं : इन देशों की यात्रा करने से बचे, जगदीप धनखड़ ने कहा-  प्रत्येक व्यक्ति को आर्थिक राष्ट्रवाद के बारे में गहराई से सोचना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[जगदीप धनखड़ ने लोगों से संकट के समय भारत के खिलाफ खड़े होने तथा भारत के हितों के विरूद्ध काम करने वाले देशों की यात्रा करने और उनसे सामान आयात करने से बचने को कहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/do-not-strengthen-the-economy-of-countries-opposing-india-jagdeep/article-114459"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(1)78.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने लोगों से संकट के समय भारत के खिलाफ खड़े होने तथा भारत के हितों के विरूद्ध काम करने वाले देशों की यात्रा करने और उनसे सामान आयात करने से बचने को कहा है। धनखड़ ने भारत मंडपम में ‘जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट’ के वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि क्या हम उन देशों को सशक्त बना सकते हैं, जो हमारे हितों के प्रतिकूल हैं? समय आ गया है, जब हम में से प्रत्येक को आर्थिक राष्ट्रवाद के बारे में गहराई से सोचना चाहिए। हम उन देशों की अर्थव्यवस्थाओं को सुधारने के लिए यात्रा या आयात के माध्यम से खर्च नहीं कर सकते जो संकट के समय  हमारे देश के खिलाफ खड़े हो जाते हैं।</p>
<p>धनखड़ ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र की सुरक्षा में मदद करने का अधिकार है। हर व्यक्ति व्यापार, व्यवसाय, वाणिज्य और उद्योग विशेष रूप से सुरक्षा के मुद्दों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा- मेरा द्दढ़ विश्वास है कि हमें हमेशा एक बात ध्यान में रखनी चाहिए और वह है राष्ट्र पहले। हर चीज को गहरी प्रतिबद्धता, अटूट प्रतिबद्धता, राष्ट्रवाद के प्रति समर्पण के आधार पर माना जाना चाहिए। और यह मानसिकता हमें अपने बच्चों को पहले दिन से ही सिखानी चाहिए।</p>
<p>उप राष्ट्रपति ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना की और सशस्त्र बलों को बधाई दी। इस ऑपरेशन को पहलगाम बर्बर हमले का मुंहतोड़ जवाब बताया। भारत की सभ्यतागत विशिष्टता का उल्लेख करते हुए धनखड़ ने कहा कि हम एक राष्ट्र के रूप में अद्वितीय हैं। दुनिया का कोई भी राष्ट्र 5,000 साल पुरानी सभ्यतागत परंपराओं पर गर्व नहीं कर सकता। हमें पूर्व और पश्चिम के बीच की खाई को पाटने की जरूरत है, न कि उसे तोडऩे की। राष्ट्र विरोधी आख्यानों पर गंभीर ङ्क्षचता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि हम राष्ट्र-विरोधी आख्यानों को कैसे स्वीकार या अनदेखा कर सकते हैं? विदेशी विश्वविद्यालयों का हमारे देश में आना ऐसी चीज है जिसपर ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए गहन चिंतन की जरूरत है। यह ऐसी चीज है जिसके बारे में हमें बेहद सावधान रहना होगा।</p>
<p>धनखड़ ने शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में बढते व्यावसायीकरण के खिलाफ चेतावनी दी। उन्हेांने कहा कि 'यह देश शिक्षा के व्यावसायीकरण को बर्दाश्त नहीं कर सकता। यह निर्विवाद है कि हमारी सभ्यता के अनुसार शिक्षा और स्वास्थ्य पैसा कमाने के क्षेत्र नहीं हैं। ये समाज को वापस देने के क्षेत्र हैं। हमें समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करना होगा। उन्होंने उद्योग जगत से शोध के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को पूरी तरह से कॉर्पोरेट द्वारा वित्त पोषित किया जाना चाहिए। सीएसआर फंड को प्राथमिकता दी जानी चाहिए क्योंकि शोध में निवेश मौलिक है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 May 2025 16:27:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जगदीप धनखड़ की तबीयत बिगड़ी : एम्स में भर्ती, मोदी ने एम्स पहुंचकर ली स्वास्थ्य की जानकारी </title>
                                    <description><![CDATA[तड़के बेचैनी और सीने में दर्द के बाद उपराष्ट्रपति को यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स) में भर्ती कराया गया,जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jagdeep-dhankhars-health-deteriorated-modi-admitted-to-aiims-and-reached/article-106965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/jagdeep-dhankar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की तबीयत अचानक खराब हो गई। तड़के बेचैनी और सीने में दर्द के बाद उपराष्ट्रपति को यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स) में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एम्स में धनखड़ के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। </p>
<p>मोदी ने कहा कि एम्स पहुंचकर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य और शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य और शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ। धनखड़ को तड़के करीब 2 बजे अस्पताल ले जाया गया। धनखड़ को एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. राजीव नारंग की देखरेख में क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) में भर्ती कराया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 15:53:13 +0530</pubDate>
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