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                <title>damage - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>त्रिपुरा में भीषण तूफान और बारिश का कहर : 1,534 घर क्षतिग्रस्त ; जनजीवन अस्त व्यस्त, बचाव और राहत कार्य जारी</title>
                                    <description><![CDATA[त्रिपुरा के आठ जिलों में भीषण तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचाई है, जिससे 1,534 घर क्षतिग्रस्त हो गए। बिजली के खंभे और पेड़ गिरने से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। ऊनाकोटि जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा। प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/severe-storm-and-rain-wreak-havoc-in-tripura-1534-houses/article-152065"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tripura.png" alt=""></a><br /><p>अगरतला। त्रिपुरा में पिछले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश और भीषण तूफान ने राज्य के सभी आठ जिलों में भारी तबाही मचाई है जिससे 1,534 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस प्राकृतिक आपदा में बिजली के कई पोल और पेड़ गिर गये हैं जिसके कारण सड़कों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल प्रभावित घरों में से 76 पूरी तरह नष्ट हो गए, 195 को गंभीर नुकसान पहुँचा और 1,263 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त, तूफान के कारण 129 बिजली के खंभे गिर गए और दो लोग घायल हुए हैं।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि पेड़ों के गिरने, तेज हवाओं और भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया और बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुँचा है। ऊनाकोटि जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहाँ 518 घर क्षतिग्रस्त हुए। इनमें 26 घर पूरी तरह नष्ट हो गए, 33 को गंभीर नुकसान हुआ और 459 घर आंशिक रूप से प्रभावित हुए। उत्तर त्रिपुरा में 136, धलाई में 272, सिपाहीजाला में 250 और दक्षिण त्रिपुरा में 236 घरों के क्षतिग्रस्त होने की खबर है।</p>
<p>खोवाई जिले में 85 और पश्चिम त्रिपुरा में 37 घर प्रभावित हुए। गोमती जिले में हालांकि घरों को कोई नुकसान नहीं पहुँचा, लेकिन वहां पेड़ गिरने से दो लोग घायल हो गए। तेज हवाओं के कारण कई पेड़ उखड़ गए, जिससे कई रास्ते बंद हो गए। अधिकारियों ने कुछ मार्गों को साफ कर दिया है, जबकि अन्य क्षेत्रों में बहाली का कार्य जारी है। भारी बारिश के बावजूद, अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि सभी नदियाँ खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। धलाई जिले के कमालपुर उपमंडल में सर्वाधिक 159 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। प्रशासन सक्रिय रूप से नुकसान का आकलन कर रहा है और राहत एवं बहाली कार्यों में जुटा है। इस बीच, भारत मौसम विभाग ने त्रिपुरा के लिए और अधिक अनिश्चित मौसम की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने एक मई तक गरज के साथ बारिश, तेज हवाएं और मानसून से पहले की भारी बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:59:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वाहनों की जगह जिंदगी पर लग सकता है ब्रेक,शहर में अधिकतर स्पीड ब्रेकर क्षतिग्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[छोटी-छोटी गलियों और मौहल्लों में जरा-जरा सी दूरी पर स्पीड ब्रेक बने हुए हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/instead-of-braking-vehicles--they-could-put-a-stop-to-lives--most-speed-breakers-in-the-city-are-damaged/article-149082"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मुख्य मार्गों से लेकर गली मौहल्लों तक में वाहनों की तेज गति को नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं। लेकिन अधिकतर ब्रेकर या तो क्षतिग्रस्त हो रहे हैं या बिना मानकों के बने हुए हैं। जिनसे हादसों का खतरा बना हुआ है। ऐसे में ये ब्रेकर वाहनों की गति पर ब्रेक लगाने की जगह व्यक्ति की जिंदगी पर ब्रेक लगा सकते हैं। वाहन चालक निर्धारित गति से वाहन चलाएं और मोड व स्कूल-कॉलेज के पास वाहनों की गति को नियंत्रित कर सकें। इसके लिए यातायात नियमों के तहत मुख्य मार्गों समेत कई जगह पर नगर निगम, कोटा विकास प्राधिकरण व सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं। नियमानुसार तो ये स्पीड ब्रेकर निर्धारित मानकों के अनुसार ही बनाए जाने चाहिए। जिसमें उनकी ऊंचाई लम्बाई व चौड़ाई सभी निर्धारित है। साथ ही हर स्पीड ब्रेकर पर सफे द पट्टी भी होनी चाहिए। जिससे दूर से ही वाहन चालकों को स्पीड ब्रेकर का पता चल सके और वे अपने वाहनों की गति को धीमा कर सके। लेकिन हालत यह है कि शहर में अधिकतर ब्रेकर बिना मानक के और लोगों की मनमर्जी से बने हुए हैं।</p>
<p><strong>अधिकतर ब्रेकर बीच से टूटे हुए</strong><br />शहर में मुख्य मार्गो पर जहां बड़े-बड़े स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं। वहीं छोटी-छोटी गलियों और मौहल्लों तक में जरा-जरा सी दूरी पर स्पीड ब्रेक बने हुए हैं। कई लोगों ने तो अपने घर के सामने, किसी ने अपनी दुकान के सामने, किसी ने शोरूम के सामने तो किसी ने बिना किसी कारण के स्पीड ब्रेकर बनाए हुए हैं। रबड़ वाले व डामर- गिट्टी के बने इन स्पीड ब्रेकर में अधिकतर बीच से टूटे हुए हैं। कई उबड़-खाबड़ हो रहे हैं। कई स्पीड ब्रेकर पर सफेद पट्टी भी नहीं हो रही है। जिससे उन स्पीड ब्रेकर से गुजरने वाले वाहनों विशेष रूप से दो पहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। वाहन चालकों के लिए ऐसे स्पीड ब्रेकर खतरा बने हुए हैं।<br /> <br /><strong>कुछ को तोड़ा तो कुछ हुए खराब</strong><br />जानकारों के अनुसार नगर निगम व केडीए की ओर से यातायात पुलिस की सलाह पर जो स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं वे तो नियमानुसार बने हैं। लेकिन कई स्पीड ब्रेकर लोगों ने अपनी मर्जी से या बिना किसी की जानकारी के बनाए हैं वे गलत तरीके से बने हुए हैं। उनमें से कुछ को तो लोगों ने ही तोड़ दिया है। वहीं डामर के स्पीड ब्रेकर बरसात व भारी वाहनों के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं।</p>
<p><strong>शहर में हर जगह ऐसी स्थिति</strong><br />शहर में कोई भी जगह ऐसी नहीं हैं जहां स्पीड ब्रेकर पूरी तरह से सही हों। विज्ञान नगर पीएफ कार्यालय रोड, छावनी, स्माल स्केल इंडस्ट्रीयल एरिया, नयापुरा, बसंत विहार, बजरंग नगर,महावीर नगर, रंगबाड़ी रोड व दादाबाड़ी और वल्लभ नगर समेत सभी जगह पर ऐसी स्थिति हैं जहां जितने स्पीड ब्रेकर हैं उनमें से ज्यादातर टूटे हुए ही हैं। जिन पर आए दिन वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।</p>
<p><strong>जहां जरूरत हो वहीं बने ब्रेकर</strong><br />लोगों का कहना है कि स्पीड ब्रेकर की जहां जरूरत हो वहीं बनने चाहिए। साथ ही यातायात नियमों व मानकों के अनुसार ही बनाए जाएं।बजरंग नगर निवासी संजय साहू का कहना है कि जगह-जगह छोटी गलियों में बिना मानक के रबड़ वाले व डामर के छोटे ब्रेकर बनाना गलत है। उनसे वाहन तो रूकते नहीं हैं लोग दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। साथ ही इन ब्रेकर पर वाहन उछलने ने लोगों को कमर दर्द समेत कई तरह की बीमारियों का भी सामना करना पड़ रहा है।भीमगंजमंडी निवासी महेश लोधा का कहना है कि बिना मानक के बने व क्षतिग्रस्त ब्रेकर अधिक नुकसान दायक हैं। इनसे दुर्घटना का खतरा होने के साथ ही वाहनों को भी नुकसान हो रहा है। नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों को पूरे मानक के अनुसार ही ब्रेकर बनाए जाने चाहिए। गलत तरीके से ब्रेकर बनवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में स्पीड ब्रेकर तो वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं। जहां भी ब्रेकर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। उनका सर्वे कराया गया है। पूरे मानक के अनुसार और जिला सड़क सुरक्षा समिति के निर्देशानुसार ब्रेकर की मरम्मत व रखरखाव का कार्य कराया जा रहा है।<br />-<strong>मुकेश चौधरी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : बांडी खाली नाले पर उच्च क्षमता की नई पुलिया का निर्माण शुरू, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[लंबे समय तक बरसाती पानी बहने के कारण यह  पुलिया बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-report--construction-begins-on-new--high-capacity-culvert-over-the-bandi-khali-stream/article-147584"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)39.png" alt=""></a><br /><p>भंडेडा। क्षेत्र में बांसी-देई मुख्य मार्ग पर स्थित बांडी खाली नाले की क्षतिग्रस्त पुलिया के स्थान पर अब उच्च क्षमता की नई पुलिया का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। लंबे समय से खराब पड़ी इस पुलिया के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को खतरे के बीच आवागमन करना पड़ रहा था, लेकिन अब निर्माण कार्य शुरू होने से जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार भैरव बाबा के निकट स्थित इस पुलिया के ऊपर से लंबे समय तक बरसाती पानी बहने के कारण यह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बावजूद लोग जोखिम उठाकर यहां से गुजरने को मजबूर थे। कई बार वाहन चालक नाले में गिरकर घायल भी हो चुके थे और लगातार अनहोनी का डर बना रहता था। बरसात के दौरान पुलिया पर तीन-चार फीट तक पानी का बहाव रहता था, जिससे मार्ग भी कई दिनों तक बंद रहता था। पूर्व में इसी नाले में तेज बहाव के दौरान जेसीबी सहित तीन लोग बह गए थे, जिनमें एक मजदूर की मृत्यु हो गई थी। </p>
<p>इस गंभीर समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित विभाग का ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ। जनहित को देखते हुए विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए यहां उच्च क्षमता की पुलिया निर्माण कार्य शुरू करवा दिया है। पुलिया के निर्माण के बाद इस मुख्य मार्ग से आवागमन करने वाले राहगीरों, गणेश कॉलोनी एवं बांसी क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। स्थानीय लोगों ने समस्या उठाने पर आभार व्यक्त किया है।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:22:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> असर खबर का : फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू, खेतों में उतरी टीमें</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश से फसलों में नुकसान के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--survey-of-crop-damage-begins--teams-deployed-to-fields/article-147551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बेमौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान के बाद अब प्रशासन हरकत में आ गया है। जिलेभर में कृषि व राजस्व विभाग की टीमें सक्रिय होकर खेतों में पहुंचने लगी हैं और नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। शनिवार को कई गांवों में अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की और फसलों की स्थिति का आकलन किया। कृषि विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें गांव-गांव जाकर कटी व खड़ी फसलों का निरीक्षण कर रही हैं। पटवारी, गिरदावर और कृषि पर्यवेक्षक किसानों के साथ खेतों में जाकर नुकसान का आंकलन कर रहे हैं। कई जगहों पर टीमों ने फसल की नमी, गिरावट और पानी भराव की स्थिति का रिकॉर्ड भी तैयार किया।</p>
<p><strong>किसानों से ली विस्तृत जानकारी</strong><br />टीमों के अधिकारियों ने किसानों से फसल की बुवाई, कटाई और बारिश के समय की स्थिति के बारे में जानकारी ली। किसानों ने भी खुले तौर पर अपनी समस्या रखते हुए बताया कि कटाई के दौरान हुई बारिश से उन्हें भारी नुकसान का डर है। कई किसानों ने भीगी हुई गेहूं और सरसों की फसल दिखाकर नुकसान का अंदेशा जताया। कुछ टीमों द्वारा सर्वे के दौरान मोबाइल ऐप के जरिए फोटो और लोकेशन के साथ डेटा अपलोड किया जा रहा है, ताकि वास्तविक स्थिति का सही आकलन हो सके और रिपोर्ट शीघ्र तैयार की जा सके। प्रशासन की सक्रियता से किसानों में मुआवजे की उम्मीद जगी है। अधिकारियों का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही नुकसान का आंकलन कर सरकार को भेजा जाएगा।</p>
<p><strong>सर्वे करवाकर शीघ्र रिपोर्ट भेजने के दिए निर्देश</strong><br />मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान पर संज्ञान लेते हुए सभी जिला कलक्टर्स को सर्वे करवाकर शीघ्र रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की हर परिस्थिति में सहायता के लिए पूर्ण संवेदनशीलता के साथ तत्पर है। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि किसानों की पीड़ा हमारी पीड़ा है। राजस्थान की समृद्धि का आधार हमारे अन्नदाता भाई-बहन हैं। संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूर्ण उत्तरदायित्व के साथ किसान भाइयों के साथ दृढ़तापूर्वक खड़ी है। प्रत्येक प्रभावित किसान को शीघ्र एवं समुचित सहायता उपलब्ध कराना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है, इसके लिए सरकार पूर्णत: प्रतिबद्ध है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश से फसलों में नुकसान के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में शनिवार को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि इन दिनों जिले में रबी फसलों की कटाई का कार्य जोरों पर चल रहा है। खेतों में गेहूं, सरसों और अन्य फसलें कटी हुई पड़ी हैं। ऐसे में बारिश होने से कटी फसलों के भीगने और खराब होने की आशंका बढ़ गई है। कई किसानों ने अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल और अन्य साधनों का सहारा लिया, लेकिन तेज हवा और बारिश के कारण उन्हें पूरी तरह बचा पाना मुश्किल साबित हुआ। ऐसे में उत्पादन और भाव दोनों पर असर पड़ने की आशंका से किसान चिंतित नजर आ रहे हैं।</p>
<p>सरकार के निर्देश पर बारिश से फसलों में हुए नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है। कुछ स्थानों पर कटी फसलों में खराबे की संभावना है। अभी सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर अधिकारियों को सौंपी जाएगी।<br /><strong>- राजेन्द्र मीणा, कृषि पर्यवेक्षक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:41:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : भूतल जल संग्राहक की टूटी छत को अस्थायी रूप से ढ़का, टैंक से 1 लाख से अधिक की आबादी को मिलता है पेयजल </title>
                                    <description><![CDATA[लापरवाही पर लीपापोती का पैबन्द, खबर के बाद आनन फानन में ढ़की, टूटी हुई छत ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--the-broken-roof-of-the-groundwater-reservoir-has-been-temporarily-covered/article-143492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस परिसर में बने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा शुद्ध पानी के स्टोरेज टेंक को विभाग ने ढकवा दिया है। एमबीएस मुर्दाघर के पास संचालित इस टेंक से नयापुरा से लेकर स्टेशन तक के घरों में पेयजल की सप्लाई की जाती है। दैनिक नवज्योंति के 13 फरवरी को कोटा सिटी अंक के पेज नम्बर 5 पर खतरा बैठा ग्राउंड वाटर टैंक में शीर्षक से टैंक के टूटे हुये ढ़कान से होने वाली संभावित हानियों की ओर सम्बन्धित विभाग व प्रशासन का ध्यान दिलाने की खबर को प्राथमिकता से प्रकाशित किया था।</p>
<p>जलदाय विभाग के अधकारियों को जैसे ही मामले की जानकारी लगी तो पूरे महकमें में हड़कम्प मच गया। खबर प्रकाशन के बाद छत के टूटे हुये हिस्से को लोहे की नालीदार चद्दरों से ढ़क दिया गया। हालांकि जानकार मानते है कि इससे भी पानी शुद्धता पर प्रभाव पड़ने की संभावनायें है। जानकार बताते है कि किसी भी पानी के स्त्रोत को प्लेन चद्दर से ही पूरी तरह ढ़ाका जाना चाहिये जिससे  इसमें किसी भी बाहरी चीज का प्रवेश ही ना हो सके तभी जल की शुद्धता बनी रह सकती है । इस तरह से टूटे हुये हिस्से को ढकान करने से पानी की पूरी तरह सुरक्षा नहीं हो पायेंगी ।</p>
<p><strong>क्यों था अहम</strong><br />21 लाख लीटर क्षमता वाला यह टेंक शहर के दो बड़े अस्पतालों एमबीएस जेके लोन के अलावा सम्पूर्ण नयापुरा,दोस्तपुरा गांवड़ी, खेड़ली फाटक, भीममण्ड़ी,सहित करीब 1 लाख से अधिक की आबादी के घरों तक पेयजल की उपलब्धता करवाने का साधन है । ऐसे में इसके ढ़कान का जर्जर होकर टुट जाने के इसमें रखा जल खुला हो गया था। उपर से जमींन के पास होने के कारण इसमें किसी भी जानवर या उपर से भी किसी प्रकार के बाहरी पदार्थ के गिरने की पूरी पूरी संभावना थी।</p>
<p><strong>खबर के बाद विभाग में मचा हडकम्प लोग सांसत में</strong><br />शहर के बड़े क्षेत्र को पानी की आपूर्ति करने वाले इस वाटर टेंक की हालात की खबर जैसे ही क्षेत्र में फैली लोगों के हलक सुख गये। अस्पताल परिसर के भीतर जलदाय विभाग के कर्मचारयों द्वारा इती बड़ी लापरवाही की खबर को पढ़ने के बाद लोगों ने इसे आम जन के जीवन से खिलवाड़ करने वाला संगीन मामला बताया।</p>
<p>लापरवाही का बड़ा मामला है, विभाग द्वारा जनता के स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे कार्यों पर विशेष निगरानी रखनी चाहिये।<br /><strong>-शुभम मेहरा, खेड़ली फाटक</strong></p>
<p>हमारें घरों तक आने वाला पानी शुद्ध् हो सरकारें इसके लियें प्रयासरत है,लेकिन सरकारी कर्मचारियों की अनदेखी का इतना बडा मामला सामने आने के बाद हमारे तो हलक से पानी उतरता भी मुश्किल हो गया।<br /><strong>- रोहित कुमार, दोस्तपुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 14:55:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सालभर में जर्जर हुआ पापड़ी ओवरब्रिज, भारी वाहनों की आवाजाही से पुल में कंपन</title>
                                    <description><![CDATA[पुल पर तेज रफ्तार में चढ़ने वाले वाहन कमजोर हिस्सों को और नुकसान पहुंचा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/papri-overbridge-deteriorates-within-a-year--heavy-vehicle-traffic-causes-vibrations-in-the-bridge/article-138860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई रेलवे मार्ग पर कोटा-दौसा मेगा हाईवे स्थित पापड़ी गांव के समीप निर्मित ओवरब्रिज सालभर में ही बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। वाहनों का आवागमन शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद पुल की सीसी सतह में गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं। कई स्थानों पर डामर उखड़कर सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। एक्सप्रेसवे के भारी वाहनों की आवाजाही से पुल में कंपन महसूस किया जा रहा है, जिससे दरारें और टूट-फूट बढ़ती जा रही हैं। इससे ग्रामीणों में हादसे की आशंका को लेकर भय का माहौल है।</p>
<p><strong>भारी वाहनों से बढ़ा दबाव, जाम की स्थिति</strong><br />जिला परिषद सदस्य केसी वर्मा एवं सहकारी अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि रोजाना हजारों वाहन इस ओवरब्रिज से गुजरते हैं। क्षतिग्रस्त स्थिति के चलते कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। खरायता सरपंच बद्री लाल मीणा व लबान सरपंच बुद्धि प्रकाश मीणा ने बताया कि दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस वे के भारी वाहन भी इसी पुल से गुजर रहे हैं। तेज रफ्तार में चढ़ने वाले वाहन कमजोर हिस्सों को और नुकसान पहुंचा रहे हैं। पुल की एप्रोच सड़कें गहरे गड्ढों से भरी हैं, जिससे दुपहिया वाहन चालक रोज दुर्घटना से बाल-बाल बच रहे हैं।</p>
<p><strong>डिजाइन पर भी सवाल</strong><br />लबान निवासी रामावतार मीणा व गुहाटा निवासी रामहेत मीणा ने बताया कि एल-आकार की डिजाइन और तीखे घुमावों के कारण बड़े लोडिंग वाहन आसानी से मुड़ नहीं पाते, जिससे बार-बार जाम की स्थिति बनती है।</p>
<p><strong>निर्माण अवधि पर उठे सवाल</strong><br />जानकारी के अनुसार ओवरब्रिज का प्रस्ताव 2012 में स्वीकृत हुआ, 2018 में निर्माण शुरू हुआ और 2025 की शुरूआत में इसे जनता के लिए खोला गया, लेकिन छह माह में ही यह जर्जर होने लगा। ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन, पीडब्ल्यूडी व रेलवे विभाग से तत्काल मरम्मत और समाधान की मांग की है।</p>
<p> एक्सप्रेस-वे के ट्रैफिक को मेगा हाइवे से डायवर्ड करने के लिये उच्चाधिकारियों को लिखा जा चुका है,जल्द ही समाधान की उम्मीद है।<br /><strong> - राहुल पाटील, मैनेजर, रिडकोर मेगाहाइवे</strong></p>
<p>उच्च स्तर पर अधिकारों को समस्या की गम्भीरता से अवगत करवा रखा है। एक्सप्रेस के ट्रैफिक को डायवर्ड करने पर ही समस्या का समाधान होगा। समय-समय पर मरम्मत करवाई जाती है।<br /><strong> - एस के सिंघल, अधिशाषी अभियंता,लाखेरी</strong></p>
<p>समस्या के स्थायी समाधान के लिये एक्सप्रेस के दूसरे खण्ड के अधूरे निर्माण को त्वरित गति करवाया जा रहा है। मार्च महीने तक लबान से सवाईमाधोपुर के बीच एक्सप्रेस पर वाहनों का आवागमन शुरू करने के प्रयास है।<br /><strong> - संजीव अग्रवाल, प्रोजेक्ट मैनेजर, एक्सप्रेस-वे एनएचआई</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 15:44:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>सूरत की केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग, बचाव राहत कार्य जारी</title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात के सूरत में एक केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग लगने से लाखों रुपये का माल जलकर राख हो गया। सूचना पर दमकल की 10 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग लगने के कारणों की जांच जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/massive-fire-rescue-and-relief-work-continues-in-surats-chemical/article-136251"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/surat-camibal-factory-fire.png" alt=""></a><br /><p>सूरत। गुजरात के सूरत से बड़ी खबर सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यहां केमिकल की फैक्ट्री में भीषण आग लग गई,​ जिसके कारण लाखों का माल जलकर राख हो गया।</p>
<p>सूचना मिलते ही मौके पर दमकल की 10 गाडियां पहुंची और आग पर काबू पाने की लगातार कोशिश की जा रही है। फिलहाल, आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 14:16:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पानी में डूबी मेहनत, हर तरफ बर्बादी का मंजर</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती में एक हजार हैक्टेयर में हुआ खराबा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hard-work-drowned-in-water--scene-of-ruin-everywhere/article-126226"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। इस साल लगातार बारिश के दौर ने सब्जी उत्पादक किसानों को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। हाड़ौती क्षेत्र में खेतों में जलभराव से सब्जियों की फसलें खराब हो गई है। भारी बारिश के चलते अनाज, दलहन और तिलहन उगाने वाले किसानों को ही नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि सब्जी उत्पादक किसानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। यहां तक की बंैगन और भिंडी की फसल चौपट हो गई है। वहीं आगे आने वाली फसल में भी खेत तैयार नहीं होने की वजह से देरी हो रही है। इसकी वजह से किसानों की टमाटर, मिर्ची, गोभी और बैगन के पौधे खराब जैसी हो गई है। इससे किसानों को करोड़ो का नुकसान हुआ है। हाड़ौती में करीब 10 हजार हैक्टेयर में पूरे साल में सब्जी की फसल उगाई जाती है। इनमें से वर्तमान में करीब 1000 हैक्टेयर के आसपास में खराबा हुआ है। इस कारण त्यौहारी सीजन में सब्जियों के दामों में तेजी आ सकती है। </p>
<p><strong>पौध तैयार, लेकिन नहीं हो पाई रोपाई</strong><br />उद्यानिकी विभाग के संयुक्त निदेशक आरके जैन बताया कि सब्जी की फसल का उत्पादन करने वाले किसानों को भी लगातार बारिश के कारण अच्छा खासा नुकसान पहुंचा है। खेतों में जाकर हालत देखे तो सामने आया कि बैगन और भिंडी की फसल खेत में पानी भर जाने के चलते गल गई है. वहीं, रबी के सीजन के लिए किसानों ने बैगन, फूल गोभी और पत्ता गोभी की पौध तैयार कर रखी थी, लेकिन वह भी पानी की वजह से वह खराब हो गई। कई खेतों में किसान की पौध ही लगातार बड़ी होती जा रही है. वह उसको खेत में रोप नहीं पा रहे हैं, क्योंकि बारिश थमने का नाम नहीं ले रही है. इससे खेत पूरी तरह से गिले हैं। उनमें पौध रोपाई करना संभव नहीं हो पा रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2 महीने की देरी हो जाएगी। दूसरी तरफ अगली रबी की फसल में भी नुकसान होगा।</p>
<p><strong>खेतों से नहीं निकल पा रहा पानी</strong><br />उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार 15 जून से लगातार बारिश हो रही है और खेत सूख नहीं पा रहे हैं। अगले रबी सीजन में आने वाली सब्जियां के लिए किसान यहां पर अगस्त के अंत और सितंबर में पौध की तैयारी कर लेते हैं और रोपाई भी शुरू हो जाती है। पत्ता गोभी, फूल गोभी, टमाटर, मिर्च की पौध किसानों ने तैयार कर ली है, लेकिन खेतों में पानी है, यह पौध भी बड़ी होती जा रही है, फिर भी वे रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। कुछ समय बाद यह पौध रोपाई करने लायक भी नहीं रहेगी। वहीं खुले में पौध तैयार करने वाले किसानो को नुकसान भी हुआ है। बारिश से पौध खेत में ही गलकर खराब हो गई है या पनप ही नहीं पाई है।</p>
<p><strong>धान लगाया, अब उत्पादन में होगी देरी </strong><br />किसानों के अनुसार खरीफ के सीजन में 15 जून से ही भारी बारिश हो रही थी, ऐसे में सोयाबीन, मूंग, उड़द और मक्का की फसल को किसान नहीं कर पाए थे, जिसके बाद अधिकांश किसानों ने इधर-उधर से धान के पौधे लेकर खेत में रोप दी थी। अब इस धान का उत्पादन नवंबर तक होगा, ऐसे में जहां पर सब्जी को बोने का समय ही अगस्त अंतिम सप्ताह से लेकर सितंबर तक होता है, इसमें देरी हो जाएगी और फसल का उत्पादन भी इन किसानों को देरी से मिलेगा। यह उत्पादन दिसम्बर के माह में आएगा। भारी बारिश के चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों के खेत अभी पानी से भरे हैं, जब खेत खाली होंगे तब तक उनको और नुकसान हो जाएगा।</p>
<p><strong>सब्जियो के दामों में आ सकती है तेजी</strong><br />सब्जी उत्पादक किसान रामभरोस और जानकीलाल ने बताया कि लगातार बारिश के कारण सब्जी का प्रोडक्शन आने में एक माह की देरी होगी, यह बढ़ भी सकती है। सब्जी के प्रोडक्शन में गैप आएगा, हालांकि दूसरे राज्यों से सब्जी की आपूर्ति हो जाएगी, लेकिन पूरे राजस्थान में ही फसल खराब है, इसलिए दाम भी बढ़ना तय है। सवा महीने पहले ही पत्ता गोभी उत्पादन के लिए कवर्ड एरिया तैयार नर्सरी लगाई है। खेत में रोपाई के लिए पौध तैयार भी है, लेकिन पौध में कचरा हो गया है और बारिश के चलते हुए उसमें प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ खेत भी अब तैयार नहीं है, इसलिए रोपाई भी नहीं कर पा रहे हैं। अगर बारिश नहीं रुकती है तो वह रोपाई नहीं कर पाएंगे। उनकी लगाई हुई भिंडी और बैगन भी खराब हो गए हैं।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />- 10000 हैक्टेयर में हाड़ौती में सब्जी की खेती<br />- 1000 हैक्टेयर में सब्जियों को पहुंचा नुकसान<br />- बंैगन और भिंडी की फसल में अधिक खराबा<br />- अब सब्जियों के दामों में तेजी की संभावना</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />भारी बारिश के चलते सब्जी उत्पादक किसानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। यहां तक की बंैगन और भिंडी की फसल चौपट हो गई है। वहीं आगे आने वाली फसल में भी खेत तैयार नहीं होने की वजह से देरी हो रही है।  टमाटर, मिर्ची, गोभी और बैगन के पौधे भी खराब हो गए हैं।<br /><strong>- लक्ष्मीचंद नागर, सब्जी उत्पादक किसान</strong></p>
<p>बैगन और भिंडी की फसल खेत में पानी भर जाने के चलते गल गई है. वहीं, रबी के सीजन के लिए किसानों ने बैगन, फूल गोभी और पत्ता गोभी की पौध तैयार कर रखी थी, लेकिन वह भी पानी की वजह से वह खराब हो गई। अरबी की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है।<br /><strong>- आरके जैन, संयुक्त निदेशक, उद्यानिकी विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 17:00:25 +0530</pubDate>
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                <title>गांव से बदतर हुई शहर की सड़कें</title>
                                    <description><![CDATA[ई रिक्शा व दो पहिया वाहनों पर मंडरा रहा हादसों का खतरा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/city-roads-have-become-worse-than-villages/article-125573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(630-x-400-px)-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । प्रदेश में इस बार हुई भारी बारिश से जहां फसलों व स्कूलों व जर्जर भवनों को तो नुकसान हुआ ही है,वहीं सड़कों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। शहर की सड़कें गांव से भी बदतर हो गई है। छावनी में तो सड़क कम रह गई और गड्ढ़े अधिक हो गए हैं। जिससे यहां से गुजरने वाले ई रिक् खा और दो पहिया वाहन चालकों क पर हादसों का खतरा हमेशा मंडरा रहा है। इस बार जून से ही बरसात का दौर शुरु हो गया था जो अभी भी जारी है। अगले करीब एक सप्ताह तक तो भारी से अति भारी बारिश होने का अनुमान है। बरसात में सबसे अधिक डामर की सड़कों को नुकसान हुआ है। शहर में जहां-जहां भी डामर की सड़कें हैं वे इन दिनों चलने लायक ही नहीं बची है।  शहर में किसी भी मुख्य मार्ग पर हो या गली मौहल्ले की सड़कें। उन से गुजरना मतलब जान जोखिम में डालने से कम नहीं है। स्टेशन से महावीर नगर व रंगबाड़ी से दादाबाड़ी तक। नयापुरा से रामपुरा हो या गुमानपुरा से छावनी की सड़क। सभी जगह एक जैसी स्थिति है। डीसीएम मेन रोड से लेकर सीएडी रोड तक पर इतने बड़े-बड़े और खतरनाक गड्ढ़े हो रहे हैं कि इन रास्तों से गुजरने वाले वाहन चालकों को पता ही नहीं चल रहा है कि वे सड़क पर चल रहे है। ऐसा लग रहा है मानो गड्ढ़ों के बीच सड़क को तलाशते हुए आगे बढ़ रहे हैं। एक गड्ढ़े से बचने का प्रयास करते हैं उतने में दूसरा गड्डा आ जाता है। उससे बचते हैं तो पूरी गाड़ी ही गड्ढ़े में कूद पड़ती  है। ऐसे में पीछे से आने वाले वाहनों से टकराने व हादसों का तो खतरा बना हुआ है। वहीं गड्ढ़ों के कारण हल्के व दो पहिया वाहनों का तो दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा हमेशा मंडरा रहा है।   </p>
<p><strong>सबसे अधिक ई रिक् शा सवारियों को खतरा</strong><br />शहर में इन दिनों सवारी वाहन के रूप में सबसे अधिक इ रिक्शा व आॅटो चल रहे है। छावनी चौराहे से रामचंद्रपुरा तक अधिकतर लोग ई रिक् शा से ही आवागमन कर रहे है। ये हल्के होने से इनके गड्ढ़ों के कारण हादसों का शिकार होने का खतरा हमेशा बना हुआ है।  चौराहे से मुख्य बाजार से होते हुए पुलिस चौकी से लेकर आगे तक पूरी सड़क इतनी जर्जर हो रही है कि उसमें सड़क तलाशने पड़ रही है। </p>
<p><strong>लाखों लोगों का आवागमन</strong><br />छावनी में नगर निगम कोटा दक्षिण के 5 वार्ड है। इन वार्डों में तो करेब एक लाख से अधिक की आबादी रहती है। इनके अलावा सूर सागर, थेगड़ा, कंसुआ, डीसीएम व जयश्री विहार और रायपुरा तक के लोग छावनी बाजार व सब्जीमंडी में खरीदारी करने आ रहे है। ऐसे में लाखों लोगों के  लिए गड्ढ़े परेशानी के साथ ही हादसों का भी कारण बने हुए हैं। </p>
<p><strong>जिम्मेदार बेखबर</strong><br />छावनी निवासी महेश जोशी का कहना है कि चौराहे से रामचंद्रपुरा तक का मुख्य मार्ग इतना अधिक जर्जर हो रहा है कि उससे गुजरना जान जोखिम में डालना है। परिवार के लोग ई रिक्शा से आते-जाते हैं कई बार गड्ढ़ों के कारण रिक् शा पटलते  हुए बचा। सड़क की हालत सही करने के बारे में जिम्मेदार विभागों के अधिकारी बेखबर हैं। जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। छावनी फ्लाई ओवर से लेकर स्लीप लेन तक पर इतने अधिक गड्ढ़े हैं कि यह वाहन चालकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। </p>
<p><strong>विरोध प्रदर्शन तक कर चुके</strong><br />छावनी के कांग्रेस पार्षद मोहम्मद इसरार का कहना है कि छावनी मेन रोड की सड़क का काम नगर निगम कोटा दक्षिण को करना है। इस संबंध में अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। कांग्रेस पार्षद तो छावनी में विरोध प्रदर्शन तक कर चुके हैं लेकिन अभी तक भी सड़कों को सही नहीं किया जा रहा है। जिससे लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों को चाहिए कि बड़े गड्ढ़ों को तो सही करवा दिया जाए।</p>
<p>छावनी समेत नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र के वार्डों में बरसात से खराब हुई सड़कों की मरम्मत के लिए टेंडर जारी हो चुका है। लेकिन अभी भी बरसात जारी होने से डामर का पेचवर्क नहीं किया जा सकता। बरसात थमने के बाद ही काम होगा। बरसात रूकते ही सबसे पहले छावनी की सड़कों को सुधारा जाएगा। <br /><strong>-ए.क्यू कुरैशी, अधिशाषी अभियंता नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 16:34:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 77- जिन जनप्रतिनिधियों को हमने चुना वो निकले बेपरवाह</title>
                                    <description><![CDATA[सड़कों पर सीवरेज चैम्बर बाहर निकलने से वाहन चालक हो रहे चोटिल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-77--the-public-representatives-we-elected-turned-out-to-be-careless/article-123740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/ndndd.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के कोटा दक्षिण वार्ड 77 में जनप्रतिनिधियों की अनेदखी के चलते समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। कॉलोनियों की खोदी सड़कें, पेचवर्क सही नहीं करना तथा तेजाजी पार्क से झूले क्षतिग्रस्त होना जैसी समस्या से रहवासियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। वार्डवासियसों ने बताया कि सेक्टर 4 में स्थित तेजाजी पार्क में लगे झूले क्षतिग्रस्त तथा झूलों की केवल स्टैंण्ड ही बची हैं। पार्क में घूमने आने वाले लोगों को बड़ी घास में जहरीली जीवों का डर लगा रहता है। पार्क में खेलने आने वाले बच्चों को खेलने में परेशानी होती हैं। कॉलोनी की नालियों में पानी की निकासी व्यवस्था सही नहीं है। नालियां चोक होने से दुर्गंध आती रहती है। वहां निकलने वाले राहगीरों को काफी परेशानी होती है। वार्ड की मुख्य सड़क पर डाली गई सीवरेज लाइन में पेचवर्क नहीं होने व चैम्बर सही ढंग से नहीं लगाने से राहगीरों को आवाजाही में परेशानी होती है। वहीं कुम्हारों के मोहल्लों में स्थित सुविधा घर में पानी की व्यवस्था नहीं होने व टॉयलेट व बाथरूम के दरवाजे भी जगह-जगह से टूटे हुए है।</p>
<p><strong>तेजाजी पार्क में दिन में लगा रहता हैं ताला</strong><br />पार्क के पास रहने वालों ने बताया कि दिन में ही अधिकतर पार्क में ताला ही लगा रहता हैं। दिन के समय में बच्चों को खेलने के लिए इधर -उधर जाना पड़ता हैं। वहीं पार्क में घास बड़ी होने तथा जलभराव के कारण जलीय जंतुओं से भी हादसे का अंदेशा बना रहता हैं। पार्क में लगे झूलों क्षतिग्रस्त हैं केवल झूलों की स्टैंण्ड बची हैं। </p>
<p><strong>सीवरेज के लिए खोदी सड़क बनी मुसीबत</strong><br />वार्डवासियों ने बताया कि बारिश से पहले वार्ड में सीवरेज डालने के लिए सड़क की खुदाई की गई थी। लेकिन सीवरेज लाइन डालने के बाद ठेकेदार ने सड़क का पेचवर्क व मरमत कार्य सही रूप से नहीं किया। राहगीरों को सड़कों का लेवल सही नहीं होने के कारण गिरकर चोट लगने की भी संभावना बनी रहती है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br /> वार्ड में राजपूत सेक्टर, कुम्हारों का मोहल्ला, रामजानकी मंदिर, तेजाजी पार्क, केशवपुरा सेक्टर 04 का क्षेत्र शामिल है। </p>
<p><strong>इनका कहना </strong><br />कुछ दिनों पहले वार्ड में सीवरेज लाइन डालने के लिए सड़क खोदी थी। सीवरेज लाइन डालने के बाद सड़क पर पेचवर्क ढंग से नहीं होने से सीवरेज के चैम्बर बाहर निकाल रहे हैं। जिससे राहगीरों व वाहन चालकों को चोटिल होने का डर बना रहता है।<br /><strong>-सुरेश कुमार </strong></p>
<p>बारिश से पहले सड़क की खुदाई की गई थी। सड़क की मरम्मत अभी तक नहीं हुई है।<br /><strong>-राधेश्याम </strong></p>
<p>वार्ड में कचरा गाड़ी तो प्रतिदिन आती हैं पर कचरा गाड़ी का टाइम फिक्स नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।    <br /><strong> -सुनील अग्रवाल </strong></p>
<p>वार्ड में स्थित सुविधाघर को तोड़कर नया बनाएंगे। सीवरेज के चैंबर का कार्य ठेकेदार की ओर से सही किए जा रहे है। <br /><strong>- नन्द कंवर सिंह हाड़ा, पार्षद 77 बीजेपी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Aug 2025 14:03:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - खरीफ फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश </title>
                                    <description><![CDATA[कलक्टर के निर्देश के बाद तीन विभागों की टीमें शुक्रवार को खेतों में जाकर नुकसान का सर्वे करने में जुट गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---instructions-to-survey-the-damage-caused-to-kharif-crops/article-122366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । मानसून की लगातार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेत पानी से भरे हुए हैं। समय रहते पानी की निकासी नहीं हो पाने से  सोयाबीन व उड़द की फसलें खराब हो गई हैं। कोटा जिले सहित हाड़ौती में सबसे ज्यादा सोयाबीन की बुवाई होती है। ऐसे में लगातार बारिश के कारण इस फसल को अधिक नुकसान पहुंचा है। जिला कलक्टर ने शुक्रवार को खरीफ फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कम्पनियों के प्रतिनिधियों की टीम बनाई गई, जो खेतों में जाकर फसलों में हुए नुकसान का आंकलन करेगी। जिला कलक्टर ने सर्वे की रिपोर्ट तैयार कर सात दिन में प्रशासन को सौंपने के निर्देश जारी किए है। कलक्टर के निर्देश के बाद तीन विभागों की टीमें शुक्रवार को खेतों में जाकर नुकसान का सर्वे करने में जुट गई है।  </p>
<p><strong>निर्देश मिलते ही खेतों में पहुंची टीमें</strong><br />जिला कलक्टर ने शुक्रवार से फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए थे। ऐसे में राजस्व विभाग से पटवारी, कृषि विभाग से पर्यवेक्षक और बीमा कम्पनी के प्रतिनिधियों की अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। शुक्रवार को बारिश नहीं होने के कारण तीनों विभागों की संयुक्त टीमें खेतों में पहुंची और फसलों में नुकसान का आंकलन शुरू कर दिया गया। जिले के सुल्तानपुर और इटावा क्षेत्र के खेतों में जलभराव होने से फसलों को अधिक नुकसान पहुंचा हैं। किसानों के अनुसार लगातार बारिश के कारण यहां पर खेत तालाब में बन गए हैँ। पानी की निकासी नहीं हो पाई है। इस कारण बीज गल चुके हैं। वहीं अब सोयाबीन और उड़द की बुवाई का समय भी निकल चुका है। ऐसे में अब इन क्षेत्रों में अधिकांश खेत खाली ही रहेंगे। </p>
<p><strong>कृषि विभाग ने हाड़ौती में माना 30 फीसदी खराबा</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस साल हाड़ौती क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई का लक्ष्य 12 लाख हैक्टेयर से अधिक निर्धारित किया गया था। इस बार जून माह में ही मानसून का आगाज और फिर लगातार बारिश होने से बुवाई का रकबा 10 लाख हैक्टेयर रह गया यानी लगभग दो लाख हैक्टेयर में बुवाई नहीं हो पाई। इसके बाद भी मूसलाधार बारिश से खेतों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। ऐसे में कृषि विभाग ने फसलों में नुकसान में प्रारम्भिक सर्वे किया था, जिसमें हाड़ौती क्षेत्र में फसलों में 30 फीसदी खराबा होना माना गया है। बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान सोयाबीन की फसल को पहुंचा है।  खेतों में पानी भरने से फसलें गल गई और बीज अंकुरित नहीं हो पाए। इस कारण किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा। </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाई थी किसानों की पीड़ा</strong><br />जुलाई माह में लगातार बारिश होने से फसलों में नुकसान होने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 30 जुलाई को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि मानसून की लगातार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेत पानी से भरे हुए हैं। समय रहते पानी की निकासी नहीं हो पाने से  सोयाबीन व उड़द की फसलें खराब हो गई हैं। कोटा जिले सहित हाड़ौती में सबसे ज्यादा सोयाबीन की बुवाई होती है। ऐसे में लगातार बारिश के कारण अधिक नुकसान सोयाबीन को पहुंचा है। इस बार कई किसान तो दो-दो बार सोयाबीन की बुवाई कर चुके हैं।  खेतों में पानी भरने से फसलें गल गई हैं। </p>
<p>तेज बारिश के कारण खेतों में पानी का भराव होने से सोयाबीन की फसल तो पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। बड़ी मुश्किल से बीज लेकर खेतों में बुवाई की थी। अब तो सब कुछ बर्बाद हो चुका है। अब समझ नहीं आ रहा कि क्या करें।<br /><strong>- नेमीचंद नागर, किसान </strong></p>
<p>जिला कलक्टर ने शुक्रवार को खरीफ फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कम्पनियों के प्रतिनिधियों की टीम बनाई गई, जो खेतों में जाकर फसलों में हुए नुकसान का आंकलन करने में जुट गई है। <br /><strong>- अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Aug 2025 14:24:41 +0530</pubDate>
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                <title>ग्लेशियरों के पिघलने से बिगड़ा जलचक्र</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया में ग्लेशियरों का पिघलना समूचे प्राणी जगत के लिए संकट का सबब बन गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/glaciers-spoiled-due-to-melting/article-111203"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer97.png" alt=""></a><br /><p>दुनिया में ग्लेशियरों का पिघलना समूचे प्राणी जगत के लिए संकट का सबब बन गया है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनेस्को की विश्व जल विकास रिपोर्ट 2025 में दुनिया में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि यदि ग्लेशियरों के पिघलने की मौजूदा दर इसी तरह जारी रही, तो इस संकट के परिणाम अभूतपूर्व और विनाशकारी होंगे। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगा तो दुनिया की कुल 8.2 अरब आबादी में से दो अरब से भी ज्यादा लोग पानी और भोजन की गंभीर समस्या का सामना करने को विवश होंगे। गौरतलब है कि ग्लेशियरों की धरती पर जल चक्र बरकरार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका है। ग्लेशियरों का पानी ही नदियों के जरिए हमारे जीवन की धारा को आगे बढाता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के पिघलने कहें या सिकुड़ने से नदियों पर संकट दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। हकीकत यह है कि जलवायु परिवर्तन के चलते ग्लेशियरों के सिकुड़ने और पर्वतीय क्षेत्रों में दिनोंदिन घटती बर्फबारी के कारण दुनिया की दो तिहाई खेती योग्य जमीन के प्रभावित होने की प्रबल आशंका है। </p>
<p>समूची दुनिया में तकरीब 2.75 लाख से भी ज्यादा ग्लेशियर सात लाख से अधिक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करते हैं, जो जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पिघल रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की मानें तो दुनिया के सभी 19 ग्लेशियर क्षेत्रों में लगातार तीसरे वर्ष यानी 2022, 2023 और 2024 में अभूतपूर्व नुकसान देखा गया है। इस बारे में यदि विश्व मौसम विज्ञान संगठन की मानें तो इसमें नार्वे, स्वीडन और स्वालबार्ड सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र हैं। यही नहीं अमेरिका की कोलोराडो नदी तो 2020 में ही सूख चुकी है। यूनेस्को के डायरेक्टर जनरल आंड्रे एंजुले का कहना है कि ग्लेशियर और पर्वतीय जल स्रोतों पर हम पूरी तरह निर्भर हैं। क्योंकि दुनिया में पेयजल का 70 फीसदी हिस्सा इन्हीं ग्लेशियरों में संरक्षित है। जलवायु परिवर्तन के चलते इनके तेजी से पिघलने से पेयजल के इन सबसे बड़े स्रोतों के अस्तित्व पर संकट है। इसलिए इन्हें बचाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। क्योंकि ग्लेशियर हैं तो जल है, जल है तो जीवन है और जीवन है तो हम हैं। </p>
<p>अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और नेशनल स्रो एण्ड आइस डेटा सेंटर के शोध से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि वर्ष 2010 के पहले आर्कटिक और अंटार्कटिका में जो बर्फ की चादर बिछी होती थी, उसमें अब लाखों वर्ग किलोमीटर की कमी हो गई है। वहां अब मात्र 143 लाख वर्ग किलोमीटर बर्फ बची है। यह 2017 के 144 लाख वर्ग किलोमीटर के पिछले निम्नतम स्तर से भी नीचे चली गई है। 2000 और 2023 के बीच ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका के ग्लेशियरों ने हर साल लगभग 270 अरब टन बर्फ को खो दिया है। एक वर्ष में 270 अरब टन बर्फ का नुकसान पूरी वैश्विक आबादी द्वारा 30 वर्ष में खपत किए जाने वाले पानी के बराबर है। इस बारे में मैरीलैंड के ग्रीनबेल में नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के वैज्ञानिक लिनेन बोइसवर्ट का कहना है कि अगली गर्मियों के मौसम में हमारे पास बहुत कम बर्फ बचेगी। इसमें मानवीय गतिविधियों, मुख्यत जीवाश्म ईंधन के जलने से हुई तापमान में बढ़ोतरी अहम है। जहां तक हिमालयी ग्लेशियरों का सवाल है, सरकार की ओर से 2023 में संसद में पेश रिपोर्ट में बताया गया था कि हिमालय के ग्लेशियर अलग-अलग दर से तेजी से पिघल रहे हैं। भारत,  नेपाल, भूटान, चीन और पाकिस्तान तक फैली हिमालयी पर्वत श्रृंखला में लगभग 9,575 ग्लेशियर हैं। बीते तीन दशकों के दौरान ये ग्लेशियर 20 से 30 फीसदी पिघले हैं।</p>
<p>जलवायु परिवर्तन का परिणाम है कि बीते 40 सालों में हिमालय से 440 अरब टन बर्फ  पिघल चुकी है। जी बी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान के निदेशक प्रो.सुनील नौटियाल की मानें तो अकेले 2010 में ही 20 अरब टन हिमालय के ग्लेशियरों से पिघली है। अगर ऐसा ही रहा तो इसके गंभीर दुष्परिणाम सामने आएंगे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस की चिंता का सबब भी यही है। वे वैज्ञानिकों की इस चेतावनी से भी बेहद चिंतित हैं कि इस सदी के अंत तक हिंदूकुश हिमालयी क्षेत्र के 75 फीसदी ग्लेशियर नष्ट हो जाएंगे। इसीलिए उन्होंने जीवाश्म ईंधन के युग को समाप्त करने पर बल दिया है। ऐसी विषम स्थिति में ग्लेशियरों को बचाना महज बर्फ को बचाना नहीं है बल्कि अपने भविष्य को बचाना है। यह याद रखना होगा कि ग्लेशियर मात्र बर्फीले शिखर ही नहीं हैं, वे हमारे भविष्य की जड़ें हैं। इसलिए हमें अपनी जीवनशैली में बदलाव के साथ-साथ हिमालय क्षेत्र में मानवीय दखलंदाजी पर अंकुश, जलवायु परिवर्तन के दानव और कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगानी ही होगी, तभी कुछ बदलाव की उम्मीद की जा सकती है। </p>
<p><strong>-ज्ञानेन्द्र रावत</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 18 Apr 2025 12:16:49 +0530</pubDate>
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