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                <title>पीएम मोदी की अपील : सोच-विचार कर संवेदनशीलता से महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करें सांसद, आज होगी वोटिंग</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के लिए सभी सांसदों से एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने मतदान से पहले सांसदों से अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने और दशकों पुराने इस अधिकार को सुनिश्चित करने की अपील की। पीएम ने कहा कि यह इतिहास रचने और देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने का महान अवसर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modis-appeal-to-mps-to-vote-thoughtfully-and-sensitively/article-150805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi-maan-ki-baat.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के लिए चल रही चर्चा के बीच सांसदों से सोच-विचार करके पूरी संवेदनशीलता से निर्णय लेने तथा महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करने की अपील की है। लोकसभा में यह चर्चा गुरुवार को शुरू हुई थी और मैराथन चर्चा तथा इस पर जवाब के बाद शाम को मतदान होना निर्धारित है। पीएम मोदी ने कल इस चर्चा में हिस्सा लेते हुए सांसदों से राजनीति से ऊपर उठकर इसका समर्थन करने को कहा था। शुक्रवार को उन्होंने मतदान से पहले सभी सांसदों से सोशल मीडिया के माध्यम से अपील कर कहा, "संसद में इस समय नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर चर्चा चल रही है। कल रात भी एक बजे तक चर्चा चली है। जो भ्रम फैलाए गए, उनको दूर करने के लिए तर्कबद्ध जवाब दिया गया है। हर आशंका का समाधान किया गया है। जिन जानकारियों का अभाव था, वो जानकारियां भी हर सदस्य को दी गई हैं। किसी के मन में विरोध का जो कोई भी विषय था, उसका भी समाधान हुआ है। </p>
<p>महिला आरक्षण के इस विषय पर देश में चार दशक तक बहुत राजनीति कर ली गई है। अब समय है कि देश की आधी आबादी को उसके अधिकार अवश्य मिलें। आजादी के इतने दशकों बाद भी भारत की महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में इतना कम प्रतिनिधित्व रहे, ये ठीक नहीं। अब कुछ ही देर लोकसभा में मतदान होने वाला है। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं… अपील करता हूं...कृपया करके सोच-विचार करके पूरी संवेदनशीलता से निर्णय लें, महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करें। मैं देश की नारी शक्ति की तरफ से भी सभी सदस्यों से प्रार्थना करूंगा… कुछ भी ऐसा ना करें, जिनसे नारीशक्ति की भावनाएं आहत हों। देश की करोड़ों महिलाओं की दृष्टि हम सभी पर है, हमारी नीयत पर है, हमारे निर्णय पर है। कृपया करके नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का साथ दें।"</p>
<p>एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि यह सांसदों के लिए बड़ा अवसर है और वे अपनी मां , बहन, बेटी और पत्नी सभी का स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा के आधार पर निर्णय लें। उन्होंने कहा , "मैं सभी सांसदों से कहूंगा...आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए ...देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का ये बहुत बड़ा अवसर है। उन्हें नए अवसरों से वंचित नहीं करिए। ये संशोधन सर्वसम्मति से पारित होगा, तो देश की नारीशक्ति और सशक्त होगी… देश का लोकतंत्र और सशक्त होगा। आइए… हम मिलकर आज इतिहास रचें। भारत की नारी को… देश की आधी आबादी को उसका हक दें।" उल्लेखनीय है कि सरकार ने वर्ष 2023 में महिलाओं को विधायिका में 33 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित किया था। अब इस कानून को अमल में लाने के लिए संबंधित अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modis-appeal-to-mps-to-vote-thoughtfully-and-sensitively/article-150805</link>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:04:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सीएम ममता का दावा : सुरक्षा जांच के लिए रोका काफ़िला; चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कराई, टोल-फ्री हेल्पलाइन जारी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने काफिले को सुरक्षा जांच के लिए रोके जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि 'व्हाट्सऐप निर्देश' के जरिए पार्टी नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी ने इसे पक्षपातपूर्ण कार्रवाई और लोकतांत्रिक मर्यादा का उल्लंघन बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-mamata-claims-convoy-stopped-for-security-check-door-to-door-voting/article-150614"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/mamta-banarji.jpg" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को दावा किया कि सुरक्षा जांच के लिए उनके काफिले को रोका गया। इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत एक व्हाट्सऐप ग्रुप के ज़रिए कथित तौर पर जारी किए गए निर्देशों के बारे में है, जिसमें अधिकारियों को उसके (तृणमूल) नेताओं के वाहनों की तलाशी लेने का निर्देश दिया गया है। ममता बनर्जी ने कहा, "मुझे जांच से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उसका मकसद निष्पक्ष होना चाहिए।"</p>
<p>कोलकाता में तृणमूल ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई और चुनाव निकाय के "व्हाट्सऐप निर्देश" के कथित स्क्रीनशॉट साझा किए, जिसमें उसके नेताओं के वाहनों की तलाशी का आदेश दिया गया है। अपनी लिखित शिकायत में, सत्ताधारी पार्टी ने दावा किया कि यह कथित आदेश विशेष रूप से मुख्यमंत्री को छोड़कर तृणमूल के अन्य सभी नेताओं को निशाना बनाता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सांसद अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा नरूला बनर्जी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को भी जांच के लिए नामित किया गया है। इससे पहले, मंगलवार को पार्टी ने कथित व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट जारी किए थे, जिसमें ये निर्देश शामिल थे।</p>
<p>तृणमूल के अनुसार, इन संदेशों से यह संकेत मिलता है कि आयोग को संदेह है कि अभिषेक बनर्जी की पत्नी के माध्यम से पैसों का लेन-देन हो सकता है, और इसलिए उसने पार्टी नेताओं के वाहनों की "गहन जांच" करने का निर्देश दिया। पार्टी के दावे के अनुसार, स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि अधिकारियों को तृणमूल नेताओं और मंत्रियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों की (जिनमें सुरक्षा घेरे वाले वाहन भी शामिल हैं) विभिन्न चौकियों पर दिन भर जांच करने के निर्देश दिए गए है। कथित निर्देश में यह भी उल्लेख किया गया था कि पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) को चुनाव पर्यवेक्षकों की सहायता करनी चाहिए, जबकि एक कंट्रोल रूम ऐसी "अचानक" की जाने वाली जांचों पर नज़र रखेगा।</p>
<p>तृणमूल ने आरोप लगाया कि आयोग ने प्रभावी रूप से उसके नेतृत्व को निशाना बनाया है और जांच का दायरा परिवार के सदस्यों तक भी बढ़ा दिया है। पार्टी ने दावा किया कि चुनावों से पहले उसके जनसंपर्क कार्यक्रमों और चुनाव प्रचार से संबंधित गतिविधियों को निशाना बनाया जा रहा है। हालाँकि, इन स्क्रीनशॉट की प्रामाणिकता और स्पष्टता पर सवाल उठाए गए हैं। इसमें "अभिषेक" नाम अंग्रेजी में अलग-अलग वर्तनी में दिखाई देता है, जिसके साथ कोई उपनाम या पदनाम नहीं जुड़ा है। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि यह संदर्भ वास्तव में तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव के लिए ही है या नहीं।</p>
<p>इसी तरह, जहाँ कथित तौर पर चैट में उनकी पत्नी का ज़िक्र है, वहीं किसी नाम का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है। इन स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर चुनाव पर्यवेक्षकों के लिए व्यापक निर्देश भी शामिल हैं, जिनमें यह दावा भी किया गया है कि मेडिकल कैंपों की आड़ में पैसों का वितरण किया जा रहा है। नादिया, बसीरहाट, बनगाँव, कैनिंग, तेहट्टा, रानाघाट, काकद्वीप, मगराहाट-II, डायमंड हार्बर I और II, फलता और लालबाग जैसे विशिष्ट क्षेत्रों को कथित तौर पर जांच के लिए चिह्नित किया गया है।</p>
<p>चुनाव आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को कहा कि कोलकाता उत्तर की सभी विधानसभा सीटों पर 85 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, और दिव्यांग जनों के लिए घर से वोट डालने की सुविधा 16 अप्रैल से शुरू होगी। इस पहल का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पहुंच और समावेशिता को बेहतर बनाना है। आयोग के अनुसार 85 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग मतदाता और मतदाता सूची में चिह्नित दिव्यांग व्यक्ति पोस्टल बैलेट के माध्यम से अपना वोट डाल सकेंगे। </p>
<p>अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए ऐसे मतदाताओं को अधिसूचना जारी होने की तारीख से पांच दिनों के भीतर अपने संबंधित रिटर्निंग अधिकारी के पास आवेदन करना होगा। केंद्रीय बलों और पुलिस के साथ मतदान टीमें वोट लेने के लिए घर-घर जाएंगी। वोट जमा करने के लिए ईवीएम का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने मतदान अवधि के दौरान कानून-व्यवस्था से संबंधित शिकायतों के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन जारी की है। नागरिक 1800-345-008 पर कॉल करके अपनी चिंताएं बता सकते हैं। इस कदम से बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है, जिससे एक अधिक समावेशी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:51:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य मतदान की मांग वाली याचिका खारिज की : कहा-मतदान एक संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक कर्तव्य, किसी पर थोपा नहीं जा सकता</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने अनिवार्य मतदान लागू करने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में नागरिकों को वोट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और न ही सुविधाएं रोकी जा सकती हैं। पीठ के अनुसार, मतदान एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे जागरूकता से बढ़ावा देना चाहिए, दमनकारी नीतियों से नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-rejected-the-petition-demanding-compulsory-voting-and-said/article-150650"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को अनिवार्य मतदान लागू करने के निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने कहा था कि जो लोग मतदान करने से इनकार करते हैं, उन्हें सरकारी सुविधाओं से वंचित कर देना चाहिए और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। न्यायालय ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि चुनावों में भागीदारी को दमनकारी या बाध्यकारी उपायों से लागू नहीं कर सकते।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों से मताधिकार प्रयोग करने की अपेक्षा होती है, लेकिन राज्य किसी व्यक्ति को वोट देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। याचिकाकर्ता के वकील ने सुझाव दिया था कि अदालत चुनाव आयोग को अनिवार्य मतदान के लिए दिशानिर्देश बनाने और बिना वैध कारण वोट न देने वालों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि मताधिकार के प्रति जन जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए, लेकिन हम इसके लिए मजबूर नहीं कर सकते।</p>
<p>न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उठाए गए मुद्दे नीतिगत दायरे में आते हैं और इन पर उचित विधायी और कार्यकारी अधिकारियों (संसद और सरकार) द्वारा विचार किया जाना ही सबसे बेहतर है। पीठ ने दोहराया कि मतदान एक संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक कर्तव्य है, लेकिन इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:35:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘महिला आरक्षण’ को लेकर संसद में टकराव संभव : विशेष सत्र में सरकार-विपक्ष होंगे आमने-सामने, महिला आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना गलत </title>
                                    <description><![CDATA[संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और सीटों की संख्या बढ़ाकर 815 करने वाले विधेयकों पर घमासान तय है। मोदी सरकार जहाँ इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष और दक्षिण भारतीय राज्य परिसीमन के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। किरेन रिजिजू ने आश्वस्त किया है कि यह बदलाव संतुलित और आनुपातिक विकास सुनिश्चित करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/clash-possible-in-parliament-over-womens-reservation-government-opposition-will-face/article-150602"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)11.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद के 16 से 18 अप्रैल तक बुलाए गए विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर जोरदार सियासी टकराव देखने को मिल सकता है। मोदी सरकार जहां ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष ने इसके कई प्रावधानों पर कड़ा विरोध जताया है। विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना गलत है।</p>
<p>विशेष सत्र में मोदी सरकार तीन विवादास्पद विधायी प्रस्तावों को पारित कराने की कोशिश कर रही है, जिनके लिए संविधान संशोधन आवश्यक है, इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 815 करना, महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना और इस विस्तार के दायरे में केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल करना है। ये तीन विधेयक हैं, संविधान (131वां संशोधनद्ध विधेयक)परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक जिसे विपक्ष के रजामंदी के बिना संसद में पास करना मुमकिन नहीं है। कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विधेयक का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है और इससे संसदीय लोकतंत्र को नुकसान हो सकता है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत ठीक नहीं है। </p>
<p><strong>परिसीमन के मुद्दे पर कई गैर-बीजेपी मुख्यमंत्री खिलाफ</strong></p>
<p>वहीं, दक्षिण भारत के कई गैर-बीजेपी मुख्यमंत्रियों ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेतावनी दी कि यदि राज्य के हितों को नुकसान पहुंचा या उत्तरी राज्यों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ाया गया, तो तमिलनाडु में व्यापक आंदोलन होगा। </p>
<p><strong>किसी राज्य के साथ नहीं होगा अन्याय: रिजिजू </strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा सीटों के परिसीमन से दक्षिण के राज्यों को नुकसान होने की आशंका सिरे से खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 किए जाने से दक्षिणी राज्यों को लाभ होगा, क्योंकि निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या में आनुपातिक वृद्धि की जाएगी। संविधान संशोधन विधेयक पूरी तरह से संतुलित, सुविचारित है और प्रत्येक समुदाय, क्षेत्र और राज्य की आकांक्षाओं का ध्यान रखेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>महिला आरक्षण पर केंद्र सरकार की नीयत पर कांग्रेस ने उठाया सवाल : जातिगत जनगणना से बचने का लगाया आरोप, 16 अप्रैल से शुरू होगा संसद का विशेष सत्र</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ओबीसी चेयरमैन डॉ. अनिल जय हिंद ने महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग की है। उन्होंने सरकार पर जातिगत जनगणना से बचने का आरोप लगाया और कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण अधूरा है। जय हिंद ने राहुल गांधी की यात्रा के प्रभाव का जिक्र करते हुए ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटे पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-raised-questions-on-the-intention-of-the-central-government/article-150501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/congress1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ओबीसी विभाग के चेयरमैन डॉ अनिल जय हिंद ने कहा है कि लोक सभा और विधानसभाओं में महिला आरक्षण चर्चा का नहीं, बल्कि उसके तत्काल क्रियान्वयन का मामला है। उन्होंने बताया कि सरकार 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुला रही है, जिसमें संविधान संशोधन लाने की तैयारी है। जय हिंद के अनुसार, पहले सरकार ने 2027 में जातिगत जनगणना, उसके बाद परिसीमन और फिर महिला आरक्षण लागू करने का रोडमैप बनाया था, लेकिन अब 2011 की जनगणना के आधार पर इसे लागू करने की बात कही जा रही है, जो मौजूदा जनसंख्या बदलावों के अनुरूप नहीं है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जातिगत जनगणना से बचना चाहती है। इस संदर्भ में 2021 में संसद दिये गये आश्वासन और उच्चतम न्यायालय में दिये गये हलफनामों का हवाला दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के बाद दबाव में सरकार ने रुख बदला। उन्होंने केंद्र सरकार पर ओबीसी महिलाओं को आरक्षण से वंचित रखने का आरोप लगाया और साथ ही याद दिलाया कि राजीव गांधी सरकार की ओर से लाये गये 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में ओबीसी आरक्षण का प्रावधान पहले से मौजूद है। जय हिंद ने कहा कि बड़े वर्ग को प्रतिनिधित्व से दूर रखना लोकतंत्र के खिलाफ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 18:28:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>संसद की तीन दिवसीय बैठक से पहले इंडिया गठबंधन के नेताओं अहम बैठक, इन अहम मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति फाइनल</title>
                                    <description><![CDATA[संसद के विशेष सत्र से पहले मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं ने अहम बैठक की। विपक्ष ने महिला आरक्षण और सीटों के विस्तार (परिसीमन) को संघीय ढांचे के लिए 'खतरनाक' बताया। राहुल गांधी और शरद पवार समेत दिग्गज नेताओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संयुक्त रणनीति तैयार की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/before-the-three-day-meeting-of-parliament-the-leaders-of-india/article-150566"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/india1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सांसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण तथा संसदीय सीटों के विस्तार के लिए संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए संसद की कल से शुरू हो रही तीन दिवसीय बैठक से पहले बुधवार को यहां विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई जिसमें संसद में सरकार को घेरने की रणनीति को लेकर विचार विमर्श किया गया। कांग्रेस अध्यक्ष तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के यहां स्थित आवास 10 राजाजी मार्ग पर हुई इस बैठक में इंडिया गठबंधन के घटक दलों के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में विपक्षी नेताओं ने महिला आरक्षण विधेयक और संसदीय सीटों के विस्तार को लेकर व्यापक विचार विमर्श किया।</p>
<p>बैठक को लेकर कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने बताया "संसद के कल से हो रहे विशेष सत्र की रणनीति पर चर्चा करने के लिए, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के यहां स्थित आवास पर विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने बैठक में भाग लिया। सरकार का परिसीमन कदम खतरनाक है और देश के लोकतांत्रिक ढांचे, विशेष रूप से राज्यों को केंद्र में उचित हिस्सेदारी देने वाले संघीय ढांचे पर इसके प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।</p>
<p>हमने कल से शुरू हो रही बैठक के लिए एक संयुक्त विपक्षी रणनीति तैयार करने के वास्ते बैठक की।" इस बैठक में श्री खरगे के अलावा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार, सुप्रिया सुले, शिवसेना उद्धव गुट के संजय राउत, द्रमुक के टी आर बालू, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन,राजद के तेजस्वी यादव तथा कपिल सिब्बल सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 17:53:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नारी शक्ति वंदन बिल पर सरकार की मंशा संदिग्ध, विपक्ष को मसौदा तक नहीं मिला : सतीश पौल मुंजनी</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड कांग्रेस के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी ने नारी शक्ति वंदन बिल की गोपनीयता पर केंद्र को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 16 अप्रैल से सत्र शुरू होने के बावजूद विपक्ष को विधेयक का मसौदा नहीं दिया गया। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए सरकार से राजनीतिक लाभ के बजाय स्वस्थ बहस की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/governments-intention-on-nari-shakti-vandan-bill-doubtful-opposition-did/article-150393"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/satish-paul.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी ने नारी शक्ति वंदन बिल (महिला आरक्षण बिल) को लेकर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुंजनी ने कहा कि 16 अप्रैल से शुरू हो रहे तीन दिवसीय विशेष सत्र में जिस महत्वपूर्ण बिल को पारित कराने की बात की जा रही है, उसका मसौदा आज 14 अप्रैल तक भी विपक्षी दलों को उपलब्ध नहीं कराया गया है। मुंजनी ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। इतना महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला विधेयक बिना पूर्व सूचना और बिना मसौदा साझा किए लाया जाना यह दर्शाता है कि सरकार स्वस्थ बहस और सार्थक विचार-विमर्श से बचना चाहती है। </p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल दिखावटी तरीके से महिला सशक्तिकरण का संदेश देना चाहती है, जबकि वास्तविकता में वह विपक्ष को बिना तैयारी के सदन में लाकर बहस को सीमित करना चाहती है। मुंजनी ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सभी दलों के बीच व्यापक चर्चा, सुझाव और सहमति आवश्यक है। लेकिन केंद्र सरकार की जल्दबाजी और गोपनीयता यह संकेत देती है कि उसकी प्राथमिकता पारदर्शिता नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ उठाना है।</p>
<p>सरकार की मंशा महिलाओं की हित में है तो तुरंत इस बिल का विस्तृत मसौदा सभी विपक्षी दलों को उपलब्ध कराए, ताकि सदन में सार्थक और ठोस बहस हो सके और देश की महिलाओं के हित में एक मजबूत और प्रभावी कानून बनाया जा सके। मुंजनी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी महत्वपूर्ण कानून को बिना चर्चा और तैयारी के पारित करना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 17:25:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दशकों की प्रतीक्षा खत्म : नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर पीएम मोदी ने कहा-विधायिका में महिलाओं को आरक्षण 21वीं सदी का सबसे बड़ा निर्णय</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल से शुरू हो रहा विशेष सत्र पंचायतों से संसद तक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। यह अधिनियम 2029 तक लागू होगा, जिससे स्टार्टअप से लेकर राजनीति तक भारतीय महिलाओं के सपनों को नई उड़ान मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-biggest-decision-of-the-21st-century-pm-modi-said/article-150273"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण देने से संबंधित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए लाये जाने वाले संशोधन विधेयक को 21 वीं सदी का सबसे बड़ा निर्णय करार देते हुए कहा कि यह पूरी तरह से नारी शक्ति को समर्पित है। प्रधानमंत्री ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि देश की संसद एक नया इतिहास रचने के निकट है जो अतीत की परिकल्पना और भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा।</p>
<p>पीएम मोदी ने गुरुवार को संसद में लाये जाने वाले इस संशोधन विधेयक से पहले सोमवार को यहां विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक लेने जा रहा है, एक ऐसा निर्णय जो नारी शक्ति को समर्पित है।" उन्होंने इस क्षण को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देश की संसद एक नया इतिहास रचने के निकट है जो अतीत की परिकल्पना और भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा। सामाजिक न्याय के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि देश एक समतावादी भारत की कल्पना करता है जहां सामाजिक न्याय केवल एक नारा नहीं बल्कि कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग है। प्रधानमंत्री ने कहा, "राज्य विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक, दशकों की प्रतीक्षा अब समाप्त होने वाली है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2023 में नए संसद भवन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सर्वसम्मति से पारित किया गया था और सभी दलों ने इस बात पर सहमति जताई थी कि इसे हर हाल में 2029 तक क्रियान्वित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को समय पर लागू किया जाना चाहिए ताकि महिलाओं की भागीदारी से लोकतंत्र सुदृढ़ हो। इसके लिए संसद के बजट सत्र का विशेष सत्र 16 अप्रैल से आरंभ होगा। उन्होंने कहा, "हमारा प्रयास और प्राथमिकता यह है कि यह कार्य संवाद, सहयोग और भागीदारी के माध्यम से पूरा किया जाए, जिससे संसद की गरिमा बढ़ेगी।"</p>
<p>इस मुद्दे पर महिलाओं के बीच व्याप्त राष्ट्रव्यापी उत्साह की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश भर की महिलाएं विधानसभाओं और लोकसभा तक पहुंचने की अपनी आकांक्षाओं को व्यक्त कर रही हैं। उनके सपनों को नई उड़ान मिली है और देश में सकारात्मक माहौल का निर्माण हुआ है। प्रधानमंत्री ने सभी महिलाओं से इस पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी बनाए रखने और अपने सांसदों से मिलकर अपने विचार और अपेक्षाएं साझा करने का आग्रह किया।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान सभा तक महिलाओं के योगदान का उल्लेख करते हुए स्वतंत्र भारत की नींव रखने में नारी शक्ति की असीम भूमिका पर प्रकाश डाला। महिलाओं ने राष्ट्र के लिए हर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है और देश में राष्ट्रपति से लेकर वित्त मंत्री तक, महिलाएं इतने महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं। उन्होंंने कहा, "राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक, जहां भी महिलाएं रही हैं, उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।"</p>
<p>पीएम मोदी ने पंचायती राज संस्थाओं को महिला नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा, "राजनीति और सामाजिक जीवन में लाखों महिलाओं की यह सक्रिय भागीदारी विश्व के अग्रणी नेताओं और राजनीतिक विशेषज्ञों को भी आश्चर्यचकित करती है और भारत के गौरव को बढ़ाती है।" प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि स्थानीय निकायों और संस्थानों में वर्षों से कार्यरत लाखों महिलाओं के पास व्यापक अनुभव है और वे बड़ी भूमिकाओं के लिए तैयार और उत्सुक हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का कार्यान्वयन इन सभी महिलाओं के जीवन में एक बड़ा अवसर साबित होगा। प्रधानमंत्री ने कहा, "पंचायत से संसद तक की यात्रा सुगम होने वाली है।"</p>
<p>विकसित भारत की यात्रा में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि उनकी सरकार ने 2014 से महिलाओं के जीवन चक्र के हर चरण के लिए योजनाएं बनाई हैं। महिला सशक्तिकरण के लिए उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हर निर्णय और योजना में महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी गई है जिसके परिणामस्वरूप महिलाएं आर्थिक तौर पर ज्यादा मजबूत हुई हैं। प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप क्रांति में महिलाओं के नेतृत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पंजीकृत स्टार्टअप में से 45 प्रतिशत से अधिक में कम से कम एक महिला निदेशक के रूप में कार्यरत है। उन्होंने कहा, "वर्षों पहले शुरू किए गए स्किल इंडिया मिशन के परिणाम अब हजारों ड्रोन दीदियों के माध्यम से दिखाई दे रहे हैं, जो प्रौद्योगिकी के माध्यम से आधुनिक खेती सिखाकर कृषि में क्रांति ला रही हैं।"</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि महिला-केंद्रित विकास विजन ने पुरानी सोच को चुनौती दी है और महिलाएं आज उन सेक्टरों में भी ऊंचाइयों को छू रही हैं जिन्हें कभी पुरुषों का गढ़ माना जाता था। भारतीय बेटियां लड़ाकू पायलट बन रही हैं और आसमान को छू रही हैं। पीएम मोदी ने कहा, "विश्व के किसी भी देश की तुलना में भारत में महिला पायलटों का प्रतिशत सबसे अधिक है।" पीएम मोदी ने देश की हर मां, बहन और बेटी को आश्वस्त किया कि राष्ट्र उनकी आकांक्षाओं को समझता है और उनके सपनों को साकार करने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रहा है। देश की नारी शक्ति ने कड़ी मेहनत, साहस और आत्मविश्वास के बल पर नई ऊंचाइयों को छुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा, "हमें सामूहिक रूप से इस शक्ति को नई ऊर्जा प्रदान करनी चाहिए और उनके लिए अवसरों का विस्तार करना चाहिए।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने एक विशेष अपील के माध्यम से महिलाओं से आग्रह किया कि वे नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम की चर्चा को व्यक्तिगत मुलाकातों और सोशल मीडिया के माध्यम से देश के हर गांव तक पहुंचाएं। देश को इस महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में हर महिला को जागरूक करना होगा ताकि वे इसकी शक्ति को समझ सकें, अपनी भूमिका को जान सकें और आने वाले समय में राज्यों से लेकर देश की संसद तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का स्पष्ट रूप से सपना देख सकें। उन्होंने निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को उज्जवल भविष्य की गारंटी बताते हुए कहा, "आइए हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि नारी शक्ति को उनके अधिकार प्राप्त हों और वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में पूर्ण भागीदार बनें - यही हमारे उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है।"</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:13:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>संविधान निर्माण में डॉ. अम्बेडकर की भूमिका है अतुल्य : वासुदेव देवनानी</title>
                                    <description><![CDATA[विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए 'संविधान का मुख्य वास्तुकार' बताया। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान न केवल लोकतांत्रिक नींव है, बल्कि इसमें भारतीय संस्कृति और महापुरुषों के स्वाभिमान की झलक भी समाहित है। देवनानी ने बाबा साहेब के सामाजिक न्याय और समानता के विचारों को आज भी प्रासंगिक बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dr-ambedkars-role-in-the-making-of-the-constitution-is/article-150282"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/vasudev-devnani.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर को उनकी जयंती पर नमन किया है। देवनानी ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज के जरूरतमंद, पिछडे, उपेक्षित और निर्बल वर्गा को उन्नत करने में लगाया। डॉ. अम्बेडकर ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वतन्त्र भारत को एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाने के लिए संविधान निर्माण में उन्होंने अतुल्य भूमिका निभाई। बाबा साहेब ने पिछड़े और कमजोर वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। डॉ. अम्बेडकर के सामाजिक स‌द्भाव, समानता, सामाजिक न्याय के विचार आज भी प्रासंगिक</p>
<p>देवनानी ने कहा कि संविधान के बाईस भागों के मुख पृष्ठ पर भारत की संस्कृति और स्वाभिमान को दिखाती हुई तस्वीरें है। उन्होंने कहा कि इन तस्वीरों में भारत की प्राचीन सभ्यता मोहेंजोदडो से लेकर महाभारत में कुरुक्षेत्र और कृष्ण द्वारा दिए गए गीता के ज्ञान, भगवान श्री राम की लंका विजय, भगवान बुद्ध का जीवन चरित्र, महान सम्राट अशोक, उज्जैन के न्यायप्रिय महाराज विक्रमादित्य के राजदरबार, प्राचीन वैदिक गुरुकुल, नालंदा विश्ववि‌द्यालय, भगवान नटराज, रामभक्त हनुमान के साथ ही झांसी की रानी लक्ष्मी बाई, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, छत्रपति वीर शिवाजी और गुरु गोविन्द सिंह को प्रदर्शित किया गया है। देवनानी ने कहा कि भारत का संविधान विश्व का सबसे लम्बा और लिखित संविधान है। यह हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की नींव है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत के संविधान का इतिहास उन लाखों भारतीयों के संघर्षों और स्वतंत्र होने की आशाओं में निहित है जो स्वतंत्रता, न्याय एवं समानता के लिए तरस रहे थे। महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, बाबा साहब अम्बेडकर, वीर सावरकर जैसे महापुरुषों के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ने एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक भारत के लिए आशा की चिंगारी जलाई थी। कहा कि डॉ. बी. आर. अम्बेडकर, जिन्हें संविधान के मुख्य वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान अ‌द्भुत तार्किकता, दूरदर्शिता, संवेदनशीलता से युक्त एक ऐसा दस्तावेज है जिसमें विश्व के विभिन्न संविधानों के सर्वोतम तत्वों को शामिल किया गया था, साथ ही यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और दार्शनिक परम्पराओं का प्रतिनिधित्व करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:11:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हमारी सरकार ने महिलाओं के जीवन चक्र के हर पड़ाव के लिए बनाई योजनाएं, उन्हें सफलतापूर्वक किया लागू : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' में महिलाओं के जीवन चक्र हेतु विशेष योजनाओं पर जोर दिया। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी लोकतंत्र को नई ऊंचाइयां देगी। पीएम ने सांसदों से समर्थन जुटाने और इस बदलाव को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/our-government-has-made-plans-for-every-stage-of-the/article-150193"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि सरकार महिलाओं के सही मायने में सशक्तिकरण के लिए जीवन चक्र के हर पड़ाव के लिए विशेष योजनाएं बना रही है और उन्हें सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है। पीएम मोदी ने गुरुवार को संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित किये जाने से पहले उसकी पृष्ठभूमिका में यहां आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "हमारी सरकार ने महिलाओं के जीवन चक्र के हर पड़ाव के लिए योजनाएं बनाई, उन्हें सफलतापूर्वक लागू किया है।" उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई से लेकर संविधान सभा के निर्णयों तक स्वतंत्र भारत की नींव रखने में भारत की नारीशक्ति ने असीमित योगदान दिया है और देश में महिला नेतृत्व का एक बेहतरीन उदाहरण पंचायती राज संस्थाएं हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार प्रगतिशील समाज की अवधारणा को साकार करने के उद्देश्य से अनेक छोटे बड़े कदमों से महिलाओं को सशक्त बना रही है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक के जरिये महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में भी एक तिहाई आरक्षण देकर अब देश महिलाओं को सशक्त बनाकर लोकतंत्र को भी नये तरह से सशक्त बनाने जा रहा है। उन्होंने कहा, "आज महिलाएं उन क्षेत्रों में भी बुलंदियों को छू रही हैं जहां कभी पुरूषों का एकाधिकार माना जाता था। देश की नारीशक्ति ने अपने परिश्रम, साहस और आत्मविश्वास से नई ऊंचाइयों को छुआ है। अब हमें मिलकर इस शक्ति को नयी ऊर्जा देनी है उसके लिए अवसरों का विस्तार करना है।"</p>
<p>पीएम मोदी ने सम्मेलन में मौजूद नारी शक्ति को विश्वास दिलाया कि सरकार उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। उन्होंने कहा, "मैं सबको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि देश उनकी आकांक्षाओं को समझता है और उन्हें पूरा करने के लिए कदम उठा रहा है।" पीएम मोदी ने महिलाओं से अपील की कि वे महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के लिए सभी सांसदों को विश्वास में लें और उन्हें इसके समर्थन में तैयार करें। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में हुई चर्चा को भी देश के कोने कोने तक हर महिला तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "महिलाएं सांसदों से मिलकर अपना पक्ष रखें और अपनी आकांक्षा रखें ।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि वह सभी मां और बहनों से अपील करते हैं कि वे जिस दिन यह विधेयक संसद में आये उस दिन सांसदों को फूल मालाओं के साथ विदा करें जिससे वह इस सकारात्मक निर्णय में भागीदार बनें। उन्होंने कहा कि आज के दिन सभी संकल्प लें कि नारी शक्ति के पास अधिकार भी रहेंगी और वह निर्णय शक्ति में भागीदार भी बनेगी। पीएम मोदी ने कहा कि वैसे तो यह लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति का अधिकार है लेकिन वह चाहते हैं कि इस विधेयक के दौरान संसद की दर्शक दीर्घा महिलाओं से ही भरी रहे। उन्होंने कहा कि इससे देश में उत्सव का माहौल बनेगा। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि का सारा श्रेय देश की मातृशक्ति, संसद और सभी दलों को जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:49:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोनिया गांधी का सरकार पर निशाना : असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन, राजनीतिक लाभ लेने की मंशा का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला करते हुए प्रस्तावित परिसीमन को "संविधान पर हमला" करार दिया। उन्होंने लेख के जरिए चेतावनी दी कि जनगणना में देरी और महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना लोकतांत्रिक संतुलन बिगाड़ सकता है। सोनिया ने जातिगत जनगणना और पारदर्शिता की मांग दोहराई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sonia-gandhis-target-on-the-government-is-that-the-real/article-150190"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/sonia-gandhi-issued-notice.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक निजी अखबार में लिखे अपने लेख के जरिए केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे को लेकर हमला बोला है। सोनिया गांधी ने सोमवार को यहां स्पष्ट तौर पर कहा कि मौजूदा समय में असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन है, जिसे उन्होंने "बेहद खतरनाक" और "संविधान पर हमला" करार दिया। अपने लेख में उन्होंने चेतावनी दी कि संसद के विशेष सत्र में जिस तरह परिसीमन का मुद्दा सामने आ रहा है, वह लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जल्दबाजी में इस विषय को आगे बढ़ा रही है, जिसके पीछे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा हो सकती है।</p>
<p>उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष से समर्थन तो मांगा जा रहा है लेकिन इस अहम मुद्दे पर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से सर्वदलीय बैठक की मांग को लगातार नजरअंदाज किया गया है। सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी है।</p>
<p>उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार 2029 से महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो यह निर्णय पहले क्यों नहीं लिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का फैसला केवल गणितीय आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर होना चाहिए, ताकि जनसंख्या नियंत्रण में आगे रहे राज्यों को नुकसान न हो। इसके अलावा उन्होंने जातिगत जनगणना में देरी पर भी सरकार की आलोचना की और कहा कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने कम समय में सर्वे कर यह साबित कर दिया है कि यह कार्य संभव है।</p>
<p>अंत में उन्होंने 2021 की जनगणना टालने के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गये। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों पर जल्दबाजी के बजाय विपक्ष के साथ व्यापक चर्चा की जाय और पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाया जाया। गौरतलब है कि महिला आरक्षण पर 16-18 अप्रैल तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:36:37 +0530</pubDate>
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                <title>चुनाव के आंकड़ों में देरी से केरल में मचा विवाद : वी.डी. सतीशान ने लगाया मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप, आंकड़े तुरंत प्रकाशित करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशान ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर 9 अप्रैल को हुए मतदान के आंकड़ों में देरी पर चिंता जताई है। उन्होंने निर्वाचन क्षेत्रवार प्रतिशत और डाक मतपत्रों की जानकारी सार्वजनिक न होने को पारदर्शिता के खिलाफ बताया। सतीशान ने लोकतांत्रिक विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सटीक डेटा तत्काल जारी करने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/controversy-created-in-kerala-due-to-delay-in-election-data/article-150154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/vd-satishnan.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशान ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता पर गंभीर चिंता जताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर 9 अप्रैल, 2026 को हुए केरल विधानसभा चुनावों से संबंधित आधिकारिक आंकड़ों के प्रकाशन में हो रही देरी को उजागर किया है। अपने पत्र में सतीशान ने इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाया है कि मतदान समाप्त होने के तीन दिन बीत जाने के बावजूद, विस्तृत और प्रामाणिक चुनावी आंकड़े अभी तक भारतीय चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।</p>
<p>उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि निर्वाचन क्षेत्रवार मतदान आंकड़े, निर्वाचन क्षेत्रवार मतदान प्रतिशत और डाक मतपत्रों के आंकड़े जैसी महत्वपूर्ण जानकारी अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। पारदर्शिता के महत्व पर बल देते हुए सतीशान ने कहा कि इस तरह के व्यापक आंकड़ों का शीघ्र प्रकाशन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सत्यापित जानकारी की समय पर उपलब्धता से जनता को जांच-पड़ताल करने में मदद मिलती है और चुनावों की विश्वसनीयता बढ़ती है।</p>
<p>तत्काल कार्रवाई का आग्रह करते हुए सतीशान ने चुनाव आयोग से बिना किसी देरी के संपूर्ण चुनाव आंकड़ों को प्रकाशित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि आम जनता, शोधकर्ताओं और राजनीतिक प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों के लिए सटीक और प्रामाणिक आंकड़ों तक पहुंच आवश्यक है। यह मुद्दा अब राजनीतिक महत्व का हो गया है, क्योंकि 2026 के केरल विधानसभा चुनावों के संचालन और पारदर्शिता पर चल रही चर्चाओं के बीच इस देरी ने सबका ध्यान आकर्षित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:07:38 +0530</pubDate>
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