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                <title>  holika dahan - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>  holika dahan RSS Feed</description>
                
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                <title>होलिका दहन के लिए मिलेगा मात्र 12 मिनट का शुभ मुहूर्त, चंद्र ग्रहण के साये में मनाई जाएगी होली</title>
                                    <description><![CDATA[इस वर्ष होली पर्व पर ज्योतिषीय दृष्टि से दुर्लभ संयोग बन रहा। फाल्गुन पूर्णिमा पर भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण के कारण लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई। हालांकि ज्योतिषाचार्यों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि इस बार होलिका दहन 2 मार्च 2026 को तथा धुलंडी 3 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/only-12-minutes-auspicious-time-will-be-available-for-holika/article-142182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)15.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। इस वर्ष होली पर्व पर ज्योतिषीय दृष्टि से दुर्लभ संयोग बन रहा है। फाल्गुन पूर्णिमा पर भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण के कारण लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि ज्योतिषाचार्यों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि इस बार होलिका दहन 2 मार्च 2026 को तथा धुलंडी 3 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। खास बात यह है कि होलिका दहन के लिए केवल 12 मिनट का ही श्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध रहेगा।<br />पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक, भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि इस वर्ष होली पर्व 2 और 3 मार्च को मनाया जाएगा। सोमवार 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा, जबकि मंगलवार 3 मार्च को धुलंडी पर रंगोत्सव मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 2 मार्च को शाम 5:56 बजे पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो 3 मार्च को शाम 5:07 बजे तक रहेगी।<br />डॉ. व्यास के अनुसार 2 मार्च को शाम 5:55 बजे से भद्रा काल प्रारंभ होकर 3 मार्च सुबह 4:28 बजे तक रहेगा। इस वर्ष भद्रा भूमिलोक एवं सिंह राशि में मानी जा रही है, जिसे शास्त्रों में अशुभ बताया गया है।</p>
<p>शास्त्रों के अनुसार भद्रा में होलिका दहन वर्जित होता है, विशेषकर भद्रा मुख काल में। मुहूर्तचिंतामणि ग्रंथ में भी स्पष्ट उल्लेख है कि भद्रा में श्रावणी (रक्षाबंधन) और फाल्गुनी (होलिका दहन) नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि धर्मसिंधु ग्रंथ के प्रमाणानुसार फाल्गुन शुक्ल प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में भद्रा रहित समय में होलिका दहन श्रेष्ठ माना गया है। इस वर्ष यह दुर्लभ संयोग बन रहा है कि 2 मार्च को सायं 6:24 बजे से 6:36 बजे तक मात्र 12 मिनट का प्रदोषकालीन श्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध है। इसी अवधि में होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत और अत्यंत शुभ रहेगा।डॉ. व्यास ने यह भी बताया कि मध्यरात्रि में भद्रा पुच्छ काल 1:23 से 2:34 बजे तक रहेगा, जिसमें परंपरानुसार कुछ स्थानों पर होलिका दहन किया जा सकता है, लेकिन भद्रा समाप्ति के बाद होलिका दहन नहीं करना चाहिए। इस वर्ष होली पर्व पर एक और विशेष संयोग यह है कि 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण रहेगा।</p>
<p>चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे प्रारंभ होकर शाम 6:48 बजे समाप्त होगा। जयपुर में चंद्र उदय शाम 6:29 बजे होगा, जिससे ग्रहण काल मात्र 18 मिनट का ही रहेगा। ग्रहण का सूतक काल मंगलवार सुबह 6:20 बजे से लागू होगा। ज्योतिषाचार्य ने स्पष्ट किया कि चंद्र ग्रहण का धुलंडी पर कोई विशेष नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि ग्रहण का प्रभाव सीमित समय के लिए ही रहेगा। अतः रंगों का त्योहार धुलंडी 3 मार्च को पूरे उल्लास और परंपरा के साथ मनाया जा सकेगा। निष्कर्ष रूप में ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने कहा कि इस वर्ष भद्रा और चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन का समय अत्यंत सीमित है, इसलिए श्रद्धालुओं को 2 मार्च को सायं 6:24 से 6:36 बजे के बीच ही होलिका दहन करना चाहिए, ताकि पर्व का पूर्ण पुण्य और फल प्राप्त हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 18:05:32 +0530</pubDate>
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                <title>होली का पर्व : भद्रा समाप्ति के बाद होगा होलिका दहन, धुलंडी के अवसर पर रंग और गुलाल से खेली जाएगी होली</title>
                                    <description><![CDATA[ राज्य में होली का दो दिवसीय लोक पर्व गुरुवार से शुरू होगा, पहले दिन गुरुवार को होलिका दहन किया जाएगा और अगले दिन शुक्रवार को धुलंडी के अवसर पर रंग और गुलाल से होली खेली जाएगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/holi-festival-will-be-played-after-bhadra-ends-holika-dahan/article-107356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news13.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में होली का दो दिवसीय लोक पर्व गुरुवार से शुरू होगा। पहले दिन गुरुवार को होलिका दहन किया जाएगा और अगले दिन शुक्रवार को धुलंडी के अवसर पर रंग और गुलाल से होली खेली जाएगी। होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व है, जिसमें भद्रा रहित काल को सर्वोत्तम माना गया है। इस वर्ष होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 11:30 बजे से 12:30 बजे तक का रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, भद्रा लगने के कारण होलिका दहन रात को ही किया जाएगा। भद्रा समाप्ति के बाद करीब एक घंटे का समय मिलेगा, जिसमें होलिका दहन करना शुभ माना गया है।</p>
<p>शहर और गांवों में होलिका दहन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। लोग परंपरागत रूप से होलिका सजाकर दहन करेंगे और बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाएंगे। होलिका दहन के बाद अगले दिन धुलंडी पर लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली का आनंद लेंगे।<br />इस बार होली को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजारों में रंग, गुलाल और पिचकारियों की खूब खरीदारी हो रही है। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने भी कड़े इंतजाम किए हैं। होली का पर्व मिल-जुलकर मनाने और प्रेम-सद्भाव बनाए रखने का संदेश देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Mar 2025 18:54:45 +0530</pubDate>
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