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                <title> space - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अब प्रदूषण की गिरफ्त में इंसान ही नहीं अंतरिक्ष भी</title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया में प्रगति का अब कोई न तो मापदंड रहा है और न ही कोई मानदंड।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/now-not-only-humans-but-also-space-is-in-the/article-132903"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)-(19).png" alt=""></a><br /><p>दुनिया में प्रगति का अब कोई न तो मापदंड रहा है और न ही कोई मानदंड। इसका अहम कारण होड है, जो थमने का नाम नहीं ले रही। प्रगति और विभिन्न क्षेत्रों में सबसे पहले कामयाबी हासिल कर उन्नति के शिखर पर पहुंचने की होड ने ही खोज कहें या अनुसंधान की महती महत्वाकांक्षा ने इंसान को राकेटों - सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने हेतु प्रोत्साहित किया। अब तो अंतरिक्ष ही क्या, चंद्रमा और मंगल नामक ग्रह पर भी पहुंच बनाने में इंसान ने कामयाबी पा ली है। वह बात दीगर है कि उसके इन अभियानों से लाभ कितना होता है और हानि कितनी इसकी चिंता किसी को नहीं है। इंसान की कारगुजारी का ही दुष्परिणाम है कि उसने अपने ग्रह को तो प्रदूषित किया ही है,अब अंतरिक्ष को भी प्रदूषित कर डाला है। अंतरिक्ष में प्रदूषण इसका जीता-जागता सबूत है। हकीकत यह है कि इंसान, वायु, जल, धरती, नदी, मृदा, खान-पान की वस्तुएं ही क्या प्रदूषण की मार से अब कोई बचा नहीं है। यहां तक अंतरिक्ष भी प्रदूषण से अछूता नहीं रहा है।</p>
<p><strong>हालिया अध्ययन में : </strong></p>
<p>लंदन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपने हालिया अध्ययन में इस बात का खुलासा किया है कि अंतरिक्ष का यह प्रदूषण धरती के ऊपर वायुमंडल में 500 गुणा अधिक नकारात्मक असर छोड़ रहा है। इसमें धरती से छोड़े गये रॉकेटों और सैटेलाइट की अहम भूमिका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि राकेट और सैटेलाइट से पहले कभी इतना प्रदूषण वायुमंडल की ऊपरी परत में नहीं छोड़ा गया। यह परत ही लम्बे समय तक प्रदूषण को रोककर रखती है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया तो पृथ्वी के वायुमंडल में इसके गंभीर परिणाम होंगे। अध्ययन में यह स्पष्ट हो गया है कि स्पेसएक्स का स्टारलिंक, वनवेब जैसे बड़े सैटेलाइटों ने प्रदूषण को तीन गुणा बढ़ाने में अहम योगदान दिया है। इसका जीपीएस, संचार और मौसम के पूर्वानुमान सहित अंतरिक्ष आधारित तकनीकों पर निर्भर उद्योगों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।</p>
<p><strong>पर्यावरणवेत्ताओं की चिंता :</strong></p>
<p>यही नहीं उपग्रह डेटा का इस्तेमाल फसल उत्पादन व अनुमान, फसल की गहनता, सूखा आकलन, बंजर भूमि सूची, भूजल संभावित क्षेत्रों की पहचान, अंतर्देशीय जलीय चक्र और कृषि की उपयुक्तता, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, महासागरीय स्थिति की सूचना के साथ भूजल पुनर्भरण संभाव्यता आदि के लिए भी किया जाता है। लेकिन इसके लाभ के साथ साथ खतरे भी अनेक हैं। सबसे बड़ा खतरा तो इनके द्वारा छोड़े गये अनुपयुक्त या समय सीमा समाप्ति के बाद कबाड़ सामानों से अंतरिक्ष में हो रहे प्रदूषण का है, जिसने समूची दुनिया के वैज्ञानिकों और पर्यावरणवेत्ताओं की चिंता को और बढ़ा दिया है। ये पृथ्वी के भूमध्य रेखीय तल में पृथ्वी की सतह से लगभग 30,000 किलोमीटर ऊपर भूस्थिर कक्षा में हैं जो अधिकांशत: संचार और मौसम की जानकारी से संबंधित उपग्रह हैं। जहां तक भारत का सवाल है, केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार भारत ने इसरो के द्वारा अबतक 1975 से भारतीय मूल के 129 के अलावा 36 देशों के 342 विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं।</p>
<p><strong>अंतरिक्ष में बढ़ता कचरा :</strong></p>
<p>सबसे अहम सवाल तो अंतरिक्ष में दिनोंदिन बढ़ रहे कचरे का है।अक्सर उच्चतर कक्षाओं, चंद्रमा या अन्य ग्रहों तक पहुंचने के लिए अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की निम्न कक्षा से ही गुजरना पड़ता है। यहां मलबा सबसे ज्यादा और सघन मात्रा में होता है, जहां कक्षीय वेग सबसे ज्यादा होता है। यही वह अहम कारण है कि अंतरिक्ष का यह कचरा या मलबा कहें, लियो में मौजूद अंतरिक्ष यान के लिए ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष यात्रा के सभी रूपों के लिए बड़ा खतरा है। अंतरिक्ष का कचरा परिचालन अंतरिक्ष यान पर प्रभाव डाल सकता है। इससे सभी आकारों का और भी अधिक मलबा पैदा हो सकता है, जिससे जोखिम का असर और बढ़ सकता है जिसे केप्लर सिंड्रोम कहते हैं। यहां सबसे बड़ी चिंता तो निष्क्रिय उपग्रहों और रॉकेटों के मलबे को लेकर है, जो इस क्षेत्र में फैले हुए हैं और जो अंतरिक्ष में अव्यवस्था फैला रहे हैं। 1957 में जब सबसे पहले अंतरिक्ष में स्पूतनिक पहुंचा, तभी से अंतरिक्ष में मलबा जमा होना शुरू हुआ है।</p>
<p><strong>खतरे की चेतावनी :</strong></p>
<p>ऐसी स्थिति में अंतरिक्ष यान और कक्षीय मलबे की दूसरी वस्तुओं से टकराने की संभावना बढ़ जाती है। नतीजतन लियो का उपयोग दशकों तक असंभव हो जाता है, जो भयावह खतरे की चेतावनी है। इसमें दो राय नहीं है कि अंतरिक्ष में प्रदूषण के लिए खासतौर से विभिन्न देशों की सरकारें तो जिम्मेदार हैं ही, अंतरिक्ष ऐजेंसियां और निजी कंपनियां भी काफी हदतक जिम्मेदार हैं। यह प्रदूषण मुख्यत: उपग्रहों व राकेटों के हिस्सों और प्रक्षेपणों के दौरान पैदा हुए मलबे के रूप में होता है। इसके लिए स्पेसएक्स, एरियान के साथ लाकहीड व मार्टीन जैसी कंपनियों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। कुछ दिनों से केन्या सहित दूसरी जगहों से वहां अंतरिक्ष से मलबा गिरने की खबरें आ रहीं हैं। स्वाभाविक है कि अंतरिक्ष में भी मलबा जमा होने की सीमा है। जाहिर है इससे अंतरिक्ष में मलबे की समस्या और भयावह रूप अख्तियार करेगी। इसमें दो राय नहीं।</p>
<p><strong>-ज्ञानेन्द्र रावत</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 11:58:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरिक्ष में 5 नवंबर को दिखेगा सुपरमून का दिलचस्प नजारा, धरती के सबसे करीब आ रहा चांद</title>
                                    <description><![CDATA[5 नवंबर को आसमान में साल का सबसे नजदीकी और चमकीला सुपरमून दिखाई देगा। इस दौरान चांद पृथ्वी से करीब 3.57 लाख किमी दूर होगा और सामान्य से 14% बड़ा व 30% ज्यादा चमकीला दिखेगा। खगोलशास्त्रियों के अनुसार, सुपरमून के समय समुद्र में ज्वार थोड़ा बढ़ सकता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/an-interesting-sight-of-supermoon-will-be-seen-in-space/article-131281"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। खगोलविज्ञानियों और अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वालों को जल्द ही बेहद शानदार नजारे का दीदार होने वाला है। 5 नवम्बर को आसमान में चांद थोड़ा और बड़ा और चमकीला दिखाई देगा। ऐसा सुपरमून की वजह से हो रहा है। सुपरमून तब होता है जब पूर्णिमा का चांद अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे ज्यादा नजदीक होता है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का कहना है कि इस वजह से चांद साल के सबसे धुंधले चांद की तुलना में 30% ज्यादा चमकीला और 14% बड़ा दिखाई देता है। दरअसल, चंद्रमा पृथ्वी चक्कर लगाता है लेकिन यह कक्षा पूर्ण वृत्ताकार नहीं है। इसलिए जैसे-जैसे यह परिक्रमा करता है, नजदीक और दूर होता जाता है। 5 नवम्बर को होने वाला सुपरमून इस साल के तीन सुपरमून में से दूसरा और सबसे नजदीकी है। इस दौरान चांद पृथ्वी से लगभग 357000 किलोमीटर की दूरी पर होगा।</p>
<p><strong>समुद्र में उठ सकता है ज्वार :</strong></p>
<p>लोवेल ऑब्जर्वेटरी के खगोलशास्त्री लॉरेंस वासरमैन का कहना है कि सुपरमून के दौरान समुद्र में ज्वार थोड़ा ज्यादा हो सकता है, क्योंकि चांद पृथ्वी के ज्यादा नजदीक होगा। हालांकि, यह अंतर ज्यादा दिखाई नहीं देगा। अगर आसमान साफ हो तो सुपरमून देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती।</p>
<p><strong>कैसे दिखाई देगा सुपरमून ?</strong></p>
<p>अगर आसमान साफ हो तो सुपरमून देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती। हालांकि, चंद्रमा के आकार में परिवर्तन को नंगी आंखों से देख पाना कठिन हो सकता है। खगोल विज्ञानियों का कहना है कि यह अंतर अन्य तस्वीरों या अवलोकनों की तुलना में सबसे साफ होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Nov 2025 12:05:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसने ने अंतरिक्ष में रचा एक और इतिहास, 2 स्पैडेक्स उपग्रहों को किया सफलतापूर्वक अनडॉक</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और इतिहास रचते हुए गुरुवार को स्पैडेक्स डॉकिंग प्रायोगिक मिशन के अंतर्गत प्रक्षेपित किए गए दो उपग्रहों को सफलतापूर्वक अनडॉक किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/it-made-another-history-in-space-and-successfully-ignore-2/article-107458"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/isro.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और इतिहास रचते हुए गुरुवार को स्पैडेक्स डॉकिंग प्रायोगिक मिशन के अंतर्गत प्रक्षेपित किए गए दो उपग्रहों को सफलतापूर्वक अनडॉक किया। इसरो ने आज एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि स्पेडेक्स अनडॉकिंग सफल। इस उपलब्धि पर भारत को बधाई!घटनाओं का मुख्य क्रम इस प्रकार रहा: एसडीएक्स-2 का विस्तार सफल रहा; कैप्चर लीवर 3 को योजना के अनुसार छोड़ा गया; एसडीएक्स-2 में कैप्चर लीवर को हटा दिया गया तथा एसडीएक्स-1 और एसडीएक्स-2 में डिकैप्चर कमांड जारी किया गया। अंतत:, सफल अनडॉकिंग! बधाई हो, टीम इसरो!</p>
<p>इस बीच केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस घटना को अविश्वसनीय करार दिया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निरंतर संरक्षण से उत्साह बढ़ता जा रहा है।उन्होंने कहा कि इस सफल अनडॉकिंग से भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्रयान 4 और गगनयान मिशन सहित भविष्य के महत्वाकांक्षी मिशनों के सुचारू संचालन होने का मार्ग प्रशस्त होगा।</p>
<p>सिंह ने एक्स पर लिखा कि इसरो टीम को बधाई। हर भारतीय के लिए खुशी की बात है। स्पैडेक्स उपग्रहों ने अविश्वसनीय डी-डॉङ्क्षकग को पूरा किया। इससे भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्रयान 4 और गगनयान सहित भविष्य के महत्वाकांक्षी मिशनों के सुचारू संचालन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र का निरंतर संरक्षण उत्साह को बढ़ाता जा रहा है। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 15:49:43 +0530</pubDate>
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