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                <title>water bills - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>water bills RSS Feed</description>
                
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                <title>सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपयों का पानी का बिल अब तक बकाया, मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद राजस्व वसूली का लक्ष्य अधूरा, विभाग 30 करोड़ राजस्व की ही कर सका वसूली।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-bills-worth-crores-remain-outstanding-against-government-departments/article-157017"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(4)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पानी की हर बूंद का हिसाब रखने वाला जलदाय विभाग खुद अपने ही राजस्व की रक्षा करने में नाकाम रहा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को 78 करोड़ रुपए राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन पूरे वर्ष की कवायद के बाद विभाग महज 30 करोड़ रुपए ही वसूल कर सका। नतीजतन, सरकार को करीब 48 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो गया। गंभीर बात यह है कि सरकारी विभागों, औद्योगिक संस्थानों और हजारों उपभोक्ताओं पर वर्षों से करोड़ों रुपए पानी के बिल बकाया हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी प्रभावी वसूली अभियान चलाने के बजाय नोटिस जारी करने की औपचारिकता निभाकर इतिश्री करते रहे। इस स्थिति ने विभागीय कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p><strong>कमजोर राजस्व प्रबंधन से सरकार को करोड़ों का नुकसान</strong><br />जलदाय विभाग की लापरवाही और कमजोर राजस्व प्रबंधन का खामियाजा सरकार को करोड़ों रुपए के नुकसान के रूप में भुगतना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही जल विभाग टारगेट हासिल करने में रुचि नहीं दिखाता, पूरे वर्ष कुंभकरणीय नींद की आगोश में रहता है, जैसे ही वित्तीय वर्ष समाप्त होने की कगार पर पहुंचता है तब अफसरों की नींद टूटती है और टारगेट पूरा करने के लिए अफसर दौड़ते हैं लेकिन चुनिंदा महीनों में करोड़ों का राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा होना तो दूर आधा भी हासिल नहीं कर पाते। इसी का नतीजा है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्ति के बाद भी विभाग केवल 30 करोड़ रुपए की ही वसूली कर पाया और 48 करोड़ रुपए का लक्ष्य अधूरा रह गया, जिससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान पहुंचा है।</p>
<p><strong>सरकारी विभागों व उपभोक्ताओं पर 48 करोड़ बकाया</strong><br />जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सरकारी विभागों, स्वायत्त संस्थाओं, औद्योगिक इकाइयों और बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर पानी के बिलों की करोड़ों रुपए की बकाया राशि वर्षों से बकाया चल रही है। इसके बावजूद जल अधिकारियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। जबकि, सबसे ज्यादा पानी का बिल सरकारी महकमों पर बकाया चल रहा है। फिर भी उनके खिलाफ न तो कनेक्शन काटने की कार्रवाई की गई और न ही बकाया वसूली के लिए कोई विशेष अभियान चलाया गया। परिणामस्वरूप बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है और हर साल विभाग का राजस्व लक्ष्य अधूरा रह जाता है।</p>
<p><strong>नगर निगम और केडीए पर 103 करोड़ का बकाया</strong><br />जल अधिकारियों का कहना है कि राजस्व वसूली की राह में सबसे बड़ा अडंगा सरकारी महकमा ही है, जो करोड़ों रुपए बकाया राशि पर कुंडली मार बैठा है। जिसकी वजह से जलदाय विभाग का टारगेट पूरा होना असंभव बना हुआ है। इनमें सबसे बड़े बकायदार नगर निगम व केडीए है। दोनों विभागों पर कई वर्षों का 103 करोड़ रुपए पानी का बिल बकाया चल रहा है। जबकि, हमने 16 फरवरी को नोटिस भी दे चुके हैं और हर सोमवार को कलक्टर की अध्यक्षता में होने वाली अंतरविभागीय बैठकोें में भी मामले को उठाते हैं, इसके बावजूद न तो नगर निगम और न ही केडीए द्वारा बकाया जमा करवाया गया। नगर निगम कोटा उत्तर-दक्षिण पर 63 करोड़ तो केडीए पर 40 करोड़ रुपए पानी का बिल वर्षों से लंबित चल रहा है।</p>
<p><strong>गत वर्ष 36 करोड़ की हुई थी राजस्व वसूली</strong><br />गत वित्तीय वर्ष में विभाग को राजस्व वसूली का लक्ष्य 73 करोड़ रुपए मिला था। जिसमें से अधिकारी केवल 36 करोड़ का ही राजस्व हासिल कर सके थे, जबकि, 37 करोड़ रुपए बकाया रह गए थे। इस वर्ष 48 करोड़ रुपए का राजस्व बकाया रह गया।</p>
<p><strong>नोटिसों तक सीमित रही कार्रवाई</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश मामलों में जलदाय विभाग केवल नोटिस जारी कर इतिश्री कर लेता है। इसका सबसे बड़ा उदारहण फरवरी माह का है, विभाग ने केडीए व नगर निगम को बकाया जमा करवाने का नोटिस जारी किया था लेकिन बकायादारों से वसूली सुनिश्चित करने के लिए न तो नियमित फॉलोअप किया जाता है और न ही जवाबदेही तय की जाती है। यही कारण है कि बड़े बकायादारों में भुगतान को लेकर किसी प्रकार का दबाव महसूस नहीं होता।</p>
<p><strong>मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल</strong><br />राजस्व वसूली विभाग की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक मानी जाती है, लेकिन लक्ष्य और उपलब्धि के बीच 48 करोड़ रुपए का अंतर विभागीय मॉनिटरिंग और जल अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। केडीए व नगर निगम के अलावा, पुलिस, शिक्षा विभाग सहित अन्य कई सरकारी विभाग शामिल हैं, जिनके लाखों से करोड़ों का बकाया चल रहा है।</p>
<p><strong>जवाबदेही तय हो तो रफ्तार पकड़े वसूली अभियान</strong><br />जानकारों का मानना है कि बकाया वसूली के लिए विशेष अभियान चलाने, बड़े बकायादारों की सूची सार्वजनिक करने और जिम्मेदारों के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने से ही स्थिति में सुधार संभव है। अन्यथा हर वर्ष सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ता रहेगा।</p>
<p>सरकार से मिलने वाला वित्तीय राजस्व लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा करने के हमारी ओर से लगातार प्रयास किए जाते हैं। सबसे बड़े बकायादार केडीए व नगर निगम है। जिन्हें बकाया पानी का बिल जमा करवाने के लिए हर साल नोटिस दिया जाता है ओर जिला कलक्टर के समक्ष भी मामला उठाते हैं। गत 16 फरवरी को भी हमने दोनों नगर निगम व केडीए को इस संबंध में नोटिस जारी किए थे।<br /><strong>-दीपक कुमार झा, एक्सीईएन जलदाय विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 14:15:08 +0530</pubDate>
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                <title>पुलिस से वन विभाग तक लाखों का पानी बिल बकाया, विभागों को नोटिस जारी होने के बाद भी जमा नहीं करवाए बिल राशि </title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग के राजस्व वसूली लक्ष्य में सरकारी विभाग सबसे बड़ा अडंगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-bills-worth-lakhs-are-pending--from-the-police-to-the-forest-department--despite-notices-issued-to-the-departments--the-bills-remain-unpaid/article-128058"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(3)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जलदाय विभाग को हर साल करोड़ों का राजस्व वसूली का लक्ष्य मिलता है लेकिन विभाग वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक भी पूरा नहीं कर पाता। नतीजन, 40% टारगेट अधूरा रह जाता है। जिसकी बड़ी वजह सरकारी डिपार्टमेंट है। जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, कोटा में सेंट्रल गवर्नमेंट व स्टेट गवर्नमेंट के डिपार्टमेंट को मिलाकर कुल 15.56 करोड़ रुपए बकाया चल रहा है। वहीं, जिले में 1.80 लाख उपभोक्ता है, जिन पर भी बड़ी संख्या में पुराना व नया बिल बकाया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि सरकारी विभाग बकाया बिल जमा करवा दे तो 90% टारगेट पूरा हो सकता है। </p>
<p><strong>दादाबाड़ी पुलिस थाने पर 14 लाख बकाया</strong><br />जलदाय विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, दादाबाड़ी पुलिस थाने पर 14 लाख रुपए का पानी का बिल बकाया चल रहा है, जो कई वर्षों से जमा नहीं करवाया गया। वहीं, किशोरपुरा पुलिस थाने पर 2 लाख रुपए बकाया चल रहा है। विभाग द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद बकाया बिल जमा नहीं हुए।</p>
<p><strong>60% से कम टारगेट तो जेईईएन-एईईएन को नोटिस </strong><br />नाम न छापने की शर्त पर जल अधिकारियों ने बताया कि जिले में 6 सब डिवीजन कार्यालय है। प्रत्येक सब डिजीवन पर एक एईएन होता है। जिनके अधीन करीब 2-2 जेईएन होते हैं। लेकिन वर्तमान में जेईएन के पद रिक्त होने से अधिकतर सब डिवीजन में 1-1 ही जेईएन कार्यरत हैं। ऐसे में राजस्व वसूली  लक्ष्य के अनुरूप कर पाना चूनौतिपूर्ण हो जाता है। यदि, 60% से कम वसूली होने पर उच्चाधिकारियों द्वारा प्रत्येक एईएन व जेईएन को कारण बताओ नोटिस थमा दिया जाता है। दिन-रात दौड़ने के बावजूद नोटिस के रूप में तनाव झेलना पड़ता है। </p>
<p><strong>सरकारी विभागों ने नहीं भरा 15.56 करोड़ का बिल</strong><br />जिले में सरकारी विभागों पर वर्तमान में 15 करोड़ 56 लाख रुपए का बिल बकाया चल रहा है। इनमें केंद्रीय विभागों पर 56 लाख तथा राज्य सरकार के विभागों पर 15 करोड़ रुपए पानी का बिल कई वर्षों से पेडिंग चल रहा है। केंद्रीय विभागों में नारकोटिक्स डिपार्टमेंट, प्रोजेक्ट इंजीनियर इंस्टूमेंशन, मैनेजर सेंट्रल हाउस, नेशनल सीड्स कॉपरेशन, रीको सहित कई विभागों पर बकाया है। </p>
<p><strong>बिल जमा करवाने में एमबीएस अव्वल</strong><br />जानकारी के अनुसार, जिले के बड़े सरकारी अस्पतालों में बकाया पानी के बिल जमा करवाने के मामले में महाराव भीम सिंह अस्पातल अव्वल रहा है। एमबीएस का वर्तमान में मात्र 1500 रुपए का बिल बकाया चल रहा है। जबकि, राजकीय जिला अस्पताल रामपुरा पर 66 हजार और जेकेलोन चिकित्सालय पर 24 हजार 178 रुपए बकाया चल रहा है। </p>
<p><strong>1.80 लाख उपभोक्ता </strong><br />जल अधिकारियों ने बताया कि कोटा जिले में कुल 1 लाख 80 हजार उपभोक्ता हैं। इनमें से अधिकतर उपभोक्ताओं पर भी बड़ी संख्या में बिल राशि बकाया चल रही है।  हालांकि, हर दो माह में बिल भेजा जाता है। जिसे वसूलने के  लिए कर्मचारी घर-घर दस्तक दे रहे हैं। वहीं, आॅनलाइन प्लेटफार्म भी उपलब्ध करवा रखा है। </p>
<p>सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपए का पानी का बिल बकाया चल रहा है। जिसे वसूलने के लिए नोटिस भेज दिए गए हैं। पहले भी भेजे गए थे। शत-प्रतिशत वसूली के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>- जीवनधर राठौर, एक्सईएन जलदाय विभाग खंड प्रथम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 16:21:58 +0530</pubDate>
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                <title>पेयजल संकट बरकरार, मनमर्जी के थौपे पानी बिल</title>
                                    <description><![CDATA[विभाग ने चौमहला को शहरी क्षेत्र में ले रखा है, लेकिन सुविधा ग्रामीण क्षेत्र से भी खराब है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/drinking-water-crisis-continues--water-bills-imposed-as-per-their-wish/article-108503"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/peyjal-sankat-barkarar,-manmrzi-k-thope-pani-bill...chaumhela,-jhalawar-news-24-05-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>चौमहला। यूं तो ग्रामीण क्षेत्रो में नल के बिल माफ कर रखे है, उपभोक्ताओं को नि:शुल्क शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है लेकिन यह दावा यहां थोथा साबित हो रहा है। चौमहला ग्राम पंचायत मुख्यालय होने के बाद भी जलदाय विभाग द्वारा  नल के बिल जारी किए जा रहे है। मार्च माह में जारी उपभोक्ताओं को किसी को एक लाख छ हजार किसी को तीस, पैंतीस हजार तक के बिल जारी किए गए। जबकि चौमहला के समीप ही तहसील मुख्यालय गंगधार,पंचायत समिति मुख्यालय डग में उपभोक्ताओं को नि:शुल्क पानी उपलब्ध किया जा रहा है। विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को लगातार बिल जारी किए जा रहे है। बिल की राशि देख कर उपभोक्ताओं के होश उड़ रहे है। उपभोक्ताओं को एक लाख रुपए से अधिक तक के बिल जारी हो रहे है। नि:शुल्क जल योजना का चौमहला कस्बे के उपभोक्ताओं को लाभ नहीं मिल नहीं मिल रहा है। चौमहला ग्राम पंचायत मुख्यालय होने के बाद भी नल के बिल जारी किए जा रहे है, जिससे लोगो में रोष है। पूर्व में ग्रामीण क्षेत्रों में नल के बिल माफ करने की घोषणा के बाद से लोगों ने नल के बिल जमा करना बंद कर दिया था,जन स्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग द्वारा मार्च माह में जारी बिल  देख कर उपभोक्ताओं के होश उड़ रहे है। स्टेशन रोड निवासी दौलतराम को एक लाख छ हजार सत्तर रुपए का  मिला। इसी तरह किसी उपभोक्ता को 30 हजार किसी को 35 हजार रु  के बिल जारी किए गए ,बकाया बिलो में  जब से बिल जमा नहीं हुए तब से पेलंटी ब्याज भी जोड़ा गया है। उपभोक्ताओं को जारी किए बिलों में 3 माह का जल उपभोग प्रति बिल 75000 लीटर अंकित किया गया, यानी प्रतिमाह 25000 लीटर पानी दिया जाना बताया गया,जबकि किसी भी नल कनेक्शन पर मीटर नहीं लगा रखा है।</p>
<p><strong>कस्बेवासी निरंतर संघर्ष कर रहे</strong><br />चौमहला ग्राम पंचायत होने के बाद भी विभाग ने इसे शहरी क्षेत्र में ले रखा है। इस कारण नलों के बिल जारी हो रहे है। इस योजना की घोषणा होने के बाद से कस्बेवासियों द्वारा लगातार इसके प्रयास किए जा रहे है, यहां भी नलों के बिल माफ हो स्थानीय नागरिकों, व्यापार संघ ने कई बार उच्च अधिकारियों से इस बारे में अवगत कराया। पूर्व में भी स्थानीय प्रतिनिधि मंडल ने जलदाय विभाग के मंत्री से मिल कर इस समस्या से अवगत कराया था,उन्होंने भी इसे विभाग की गलती माना था तथा इसके सुधार के आदेश जारी किए थे लेकिन आज तक सुधार नहीं हो सका,विभाग की गलती का खामियाजा जनता भुगत रही है। कस्बे वासियों द्वारा जिला कलेक्टर ,उपखंड अधिकारी की जनसुनवाई, प्रशासन गांव के संघ शिविर में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से रखा लेकिन अभी तक इसका समाधान नहीं हो सका।</p>
<p><strong>सालों से एकांतरे जलापूर्ति</strong><br />विभाग ने चौमहला को शहरी क्षेत्र में ले रखा है, लेकिन सुविधा ग्रामीण क्षेत्र से भी खराब है। मुख्य पेयजल स्त्रोत छोटी काली सिंध नदी में पर्याप्त पानी होने के बाद भी कई सालों से एकांतरे एक दिन छोड़ एक दिन जलापूर्ति की जाती है, लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। हर साल गर्मी के दिनों में पेयजल संकट गहराता है। लोगों को पानी के लिए निजी ट्यूबवेल पर इधर उधर भटकना पड़ता है। कई बार मोटर खराब होने,लाइन लीकेज होने पर चार चार दिन में आपूर्ति होती है।</p>
<p>चौमहला ग्राम पंचायत मुख्यालय है, जलदाय विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्र की सुविधा दी जा रही है। एक दिन छोड़ एक दिन जलापूर्ति की जाती है,नल के बिल माफ होने चाहिए। <br /><strong>- पवन पिछोलिया, अध्यक्ष किराना व्यापार संघ</strong></p>
<p>सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में नि:शुल्क जलापूर्ति की जा रही है जो चौमहला क्यों बिल जारी हो रहे , यहां भी बिल माफ हो। <br /><strong>- गुलजार अली बोहरा, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>चौमहला की पेयजल योजना शहरी क्षेत्र के नाम से स्वीकृत है, जब 2006 में यह योजना बनी थी तब से यह शहरी क्षेत्र में ही है इसलिए इसे ग्रामीण क्षेत्र में नहीं मान सकते। <br /><strong>- मोहनलाल मीणा, सहायक अभियंता जन स्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग चौमहला</strong></p>
<p>इस विषय को लेकर विभाग के अधिकारियों से चर्चा की है,जलदाय विभाग के मंत्री से मुलाकात कर इसका समाधान करने का प्रयास किए जाएंगे। <br /><strong>- कालूराम मेघवाल, विधायक डग विधान सभा क्षेत्र</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Mar 2025 16:52:17 +0530</pubDate>
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