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                <title> rajasthan high court - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> rajasthan high court RSS Feed</description>
                
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                <title>धोखाधड़ी मामले में सुमित अग्रवाल को राजस्थान हाई कोर्ट से राहत : गिरफ्तारी पर रोक, पढ़ें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाई कोर्ट ने कलाइट इंजीनियरिंग एंड वर्कस के प्रोपराइटर गुवाहाटी निवासी सुमित अग्रवाल को राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर में उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/rajasthan-high-court-grants-relief-to-sumit-aggarwal-in-fraud/article-149032"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/hammer.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने कलाइट इंजीनियरिंग एंड वर्कस के प्रोपराइटर गुवाहाटी(असम) निवासी सुमित अग्रवाल को राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर में उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। न्यायाधीश बलजिंदर सिंह संधू की एकल पीठ ने यह आदेश सुमित अग्रवाल की ओर से दायर आपराधिक विविध याचिका पर सुनवाई के पश्चात दिया। सुमित की ओर से अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत एवं रेखा सांखला ने पैरवी की। याचिका में भीलवाड़ा के कोतवाली थाना में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई थी।</p>
<p>यह एफआईआर क्रेन सर्विस भीलवाड़ा के मालिक परिवादी गोविंद टांक ने सुमित के विरुद्ध धोखाधड़ी के आरोप में दर्ज करवाई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि डूंगलस सीमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के कार्य हेतु परिवादी को 700 एमटी क्रेन उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया, उक्त आदेश के अनुसार क्रेन की मोबिलाइजेशन एवं डी- मोबिलाइजेशन के लिए बीस लाख रुपयें एवं ढाई लाख रुपए प्रतिदिन किराया तय किया गया था, उसकी क्रेन 17 अगस्त 2025 को असम राज्य के पाठशाला नगर पहुंची, तत्पश्चात 18 अगस्त को कस्टम क्लीयरेंस के पश्चात क्रेन भूटान साइट पर पहुंचाई गई, कार्य के दौरान सुमित अग्रवाल ने परिवादी के स्टाफ एवं ऑपरेटर को निर्धारित क्षमता से अधिक भार उठाने हेतु धमकाया जिसके कारण क्रेन को गंभीर क्षति पहुंची, जिससे परिवादी को लाखों रुपयों का नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि सुमित ने परिवादी की क्रेन को अवैध रूप से रोक लिया हैं एवं उसके एक करोड़ चौरासी लाख छत्तीस हजार रुपए नहीं दिए। याचिका पर बहस करते हुए याची के अधिवक्ता सारस्वत ने तर्क दिया कि यह मामला पक्षकारों के</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:42:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान हाईकोर्ट ने समान मुद्दे पर नई अतिक्रमण याचिका की खारिज, पूर्व याचिका पर सुनवाई जारी रखने का निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने क्वींस रोड के अतिक्रमण मामले में लंबित याचिका के बावजूद समान मुद्दे पर नई याचिका दायर करने को गंभीर मानते हुए खारिज की। याचिकाकर्ताओं पर 20,000 रुपए का हर्जाना। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होने का भी उल्लेख।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-high-court-dismisses-new-encroachment-petition-on-the-same/article-146368"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajasthan-high-court-(2).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने अतिक्रमण को लेकर लंबित याचिका के बावजूद भी समान याचिकाकर्ता की ओर से उसी जगह के अतिक्रमण को नई याचिका के जरिए चुनौती देने को गंभीर माना है। इसके साथ ही अदालत ने इस याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर बीस हजार रुपए का हर्जाना लगा दिया है। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश विजय कुमार बोयत व तीन अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।</p>
<p>सुनवाई के दौरान जेडीए की ओर से अधिवक्ता अमित कुड़ी ने कहा कि समान मुद्दे पर याचिकाकर्ता की जनहित याचिका लंबित चल रही है। ऐसे में नई याचिका में उन्हीं बिंदुओं को उठाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। इस पर अदालत ने कहा कि याचिका क्वींस रोड और उसके आसपास के इलाके में हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए दायर की गई है और पूर्व की याचिका में भी यह मामला उठाया गया था और उस पर सुनवाई चल रही है। ऐसे में समान मुद्दे पर नई याचिका दायर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 15:00:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नियमित सफाई और कॉलोनियों में बड़े कचरा पात्र लगाने के आदेश, हाईकोर्ट- आम रास्तों और नालियों से कचरा हटाने के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने नगर निगम को कहा है कि वह शहर से ठोस कचरा हटाने, सड़कों और आम रास्तों व नालियों की सफाई के लिए जरूरी कदम उठाए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/orders-for-regular-cleaning-and-installation-of-large-dustbins-in/article-146154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नगर निगम को कहा है कि वह शहर से ठोस कचरा हटाने, सड़कों और आम रास्तों व नालियों की सफाई के लिए जरूरी कदम उठाए। अदालत ने शहर की आवासीय कॉलोनियों में बड़े आकार के डपिंग बॉक्स लगाकर उन्हें रोज सुबह नियमित रूप से साफ करने को कहा है। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश विमल चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।</p>
<p><strong>समय सारणी तय करनी चाहिए : </strong>अदालत ने कहा है कि नगर निगम को हर आवासीय कॉलोनी से कचरा हटाने के लिए समय सारणी तय करनी चाहिए। बाजार में भी कूडे की सफाई तय समय पर होनी चाहिए और इस संबंध में एरिया के संबंधित निवासियों व दुकानदारों को इसकी पूरी जानकारी देनी चाहिए।</p>
<p><strong>नगर निगम के काम से खुश नहीं :</strong></p>
<p>अदालत ने यह भी कहा कि जो स्थानीय निवासी कचरा हटाने को लेकर अपनी ड्यूटी नहीं निभाते, उन पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए। अदालत ने नगर निगम को यह बताने को कहा है कि वार्ड वार काम कर रहे सफाई कर्मचारियों का ब्यौरा पेश किए जाए और यह भी बताया जाए कि कितने सफाई कर्मचारियों को सफाई के अलावा दूसरे काम दिए जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वह नगर निगम के काम से खुश नहीं हैं। याचिकाकर्ता अधिवक्ता विमल चौधरी और अधिवक्ता योगेश टेलर ने कहा कि नगर निगम ने करीब 8000 सफाई कर्मचारियों की भर्ती की है, लेकिन जमीनी स्तर पर बहुत कम सफाई कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। जिन कर्मचारियों की भर्ती की गई है, उनमें से ज्यादातर को या तो आॅफिस में लगाया जा रहा है या उनकी सेवा का इस्तेमाल सफाई के अलावा दूसरे काम के लिए किया जा रहा है। खंडपीठ ने नगर निगम को निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 18 मार्च को रखी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 09:36:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान हाईकोर्ट में एक बार फिर मिली बम की धमकी : ईमेल के जरिए दी गई धमकी, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट को एक बार फिर ईमेल के जरिए बम ब्लास्ट की धमकी मिली। इससे पहले भी 31 अक्टूबर से अब तक 10 बार धमकियां दी जा चुकी। सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। डॉग स्क्वाड और बम निरोधक दस्ते ने हाईकोर्ट परिसर में सघन तलाशी अभियान शुरू किया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bomb-threat-received-once-again-in-rajasthan-high-court-threat/article-144477"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rajasthan-high-court.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में एक बार फिर बम ब्लास्ट की धमकी दी गई है। हाईकोर्ट प्रशासन को ईमेल के जरिए परिसर में बम ब्लास्ट की धमकी दी गई है। इससे पूर्व अब तक 10 बार धमकी दी जा चुकी है। सबसे पहले 31 अक्टूबर को धमकी दी गई थी। फिर 5 दिसंबर के बाद लगातार चार दिन तक 8, 9, 10 और 11 दिसंबर को धमकी दी गई वहीं 6 फरवरी को ईमेल भेज कर बम ब्लास्ट की धमकी देने के बाद 17 फरवरी 19 फरवरी और 20 फरवरी को भी बम ब्लास्ट की धमकी दी जा चुकी है।</p>
<p>हाई कोर्ट प्रशासन को मेल मिलने के बाद पुलिस के उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई और मौके पर डॉग स्क्वाड और बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया है। हाईकोर्ट परिसर में जांच की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bomb-threat-received-once-again-in-rajasthan-high-court-threat/article-144477</link>
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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 10:55:37 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>लगातार दूसरे दिन राजस्थान हाईकोर्ट में बम ब्लास्ट की धमकी, मुख्य बिल्डिंग की गहनता से जांच </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में बम ब्लास्ट करने को लेकर लगातार दूसरे दिन ईमेल से धमकी मिली। अब तब इस तरह की दस धमकियां मिल चुकी हैं। मेल मिलने के बाद हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से पुलिस उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bomb-blast-threat-in-rajasthan-high-court-for-second-consecutive/article-143893"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(4)8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में बम ब्लास्ट करने को लेकर लगातार दूसरे दिन ईमेल से धमकी मिली है। अब तब इस तरह की दस धमकियां मिल चुकी हैं। मेल मिलने के बाद हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से पुलिस उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी गई। वहीं मुकदमों की सुनवाई भी सुबह 10.30 बजे से करने के बजाए आधा घंटा देरी से सुबह 11 बजे से शुरू की गई।</p>
<p>इस पर दौरान जांच एजेंसियों ने हाईकोर्ट की मुख्य बिल्डिंग की गहनता से जांच की। जांच में कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिलने पर प्रशासन से राहत की सांस ली। गौरतलब है कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आज साइबर सुरक्षा को लेकर तीन दिवसीय कार्यषाला का आज से आयोजन किया जा रहा है। जिसका शुभारंभ सीजेआई सूर्यकांत करेंगे। ऐसे में लगातार धमकी भरा मेल मिलने के प्रशासन और अधिक गंभीर हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 12:30:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सांभर झील क्षेत्र : बिना अनुमति सोलर प्लांट के लिए एमओयू को हाईकोर्ट ने अवमानना मानकर अफसरों को किया तलब</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट सांभर झील क्षेत्र में सोलर प्लांट के लिए एमओयू करने और इसकी जानकारी अदालत में नहीं देने को अवमानना की श्रेणी में माना। इसके साथ ही अदालत ने हिंदुस्तान सॉल्ट्स के एमडी कमलेश कुमार, एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी सीईओ अजय कुमार सिंह और सांभर साल्ट के नए सीईओ के खिलाफ स्वप्रेरणा से अवमानना का प्रसंज्ञान लिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/high-court-considered-the-mou-for-solar-plant-without-permission/article-141002"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/hammer.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट सांभर झील क्षेत्र में सोलर प्लांट के लिए एमओयू करने और इसकी जानकारी अदालत में नहीं देने को अवमानना की श्रेणी में माना है। इसके साथ ही अदालत ने हिंदुस्तान सॉल्ट्स के एमडी कमलेश कुमार, एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी सीईओ अजय कुमार सिंह और सांभर साल्ट के नए सीईओ के खिलाफ स्वप्रेरणा से अवमानना का प्रसंज्ञान लिया है। अदालत ने इन अफसरों को 11 फरवरी को पेश होकर बताने को कहा है कि क्यों ना उन्हें अदालती आदेश की अवमानना के लिए दंडित किया जाए। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश दिनेश कुमावत व मामले में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान याचिका पर संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता आरबी माथुर ने अदालत को बताया कि अदालत ने सांभर झील में सोलर प्लांट लगाने पर अंतरिम रोक लगा रखी है।</p>
<p>हाल ही में पेश दिनेश कुमावत की जनहित याचिका में कहा गया है कि मौके पर जेसीबी, ट्रक, निर्माण सामग्री और मशीनें मौजूद हैं। ऐसे में यहां पक्का निर्माण की कोशिश की जा रही है। ऐसे में हाईकोर्ट ने गत 17 दिसंबर को स्थानीय थानाधिकारी व एसपी को निर्देश दिए थे कि वह इन सामानों को हटाकर रिपोर्ट पेश करे। इसके बावजूद हिंदुस्तान साल्टस लि. ने भारत सरकार की कंपनी की सहायक कंपनी एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी के साथ एक एमओयू किया है। इसके तहत यहां चरणबद्ध तरीके से सोलर प्लांट लगाकर उसका संचालन व रखरखाव किया जाएगा। अदालत के सामने आया कि कंपनी के एमडी कमलेश कुमार ने सीईओ अजय कुमार सिंह ने जरिए यह एमओयू किया है। इस पर अदालत इसे अवमानना मानते हुए अफसरों को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:26:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : नाबालिग की भूलें आजीविका में बाधा नहीं बनेंगी, कहा- किशोरावस्था की गलतियों को आजीवन कलंक की तरह नहीं देखा जाना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने एक संवेदनशील फैसला देते हुए स्पष्ट किया है कि नाबालिग अवस्था में हुए मामूली अपराधों के आधार पर किसी व्यक्ति की नौकरी नहीं छीनी जा सकती। अदालत ने कहा कि किशोरावस्था की गलतियों को आजीवन कलंक की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। खासकर तब जब उन अपराधों का पद की प्रकृति, नैतिक अधमता या सार्वजनिक सुरक्षा से कोई सीधा संबंध न हो। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/big-decision-of-rajasthan-high-court-mistakes-of-minor-will/article-139729"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/hammer.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक संवेदनशील फैसला देते हुए स्पष्ट किया है कि नाबालिग अवस्था में हुए मामूली अपराधों के आधार पर किसी व्यक्ति की नौकरी नहीं छीनी जा सकती। अदालत ने कहा कि किशोरावस्था की गलतियों को आजीवन कलंक की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। खासकर तब जब उन अपराधों का पद की प्रकृति, नैतिक अधमता या सार्वजनिक सुरक्षा से कोई सीधा संबंध न हो। डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने नगर पालिका रावतसर, जिला हनुमानगढ़ में सफाईकर्मी पद पर नियुक्त एक दिव्यांग युवक की सेवा समाप्ति को रद्द करते हुए उसकी नौकरी बहाल करने का आदेश दिया। साथ ही एकलपीठ के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया गया। अधिवक्ता दुर्गेश खत्री ने बताया कि हनुमानगढ़ निवासी श्रवण का चयन नगर पालिका रावतसर में सफाईकर्मी पद पर हुआ था। वह 70 प्रतिशत स्थायी बौनेपन से पीड़ित है। चयन के बाद 14 जुलाई, 2018 को उसे नियुक्ति आदेश जारी हुआ, जिसमें पुलिस सत्यापन संतोषजनक होने की शर्त थी। सत्यापन के दौरान सामने आया कि उसके खिलाफ पूर्व में चार आपराधिक मामले दर्ज रहे थे।</p>
<p>इनमें तीन मामलों में राजस्थान सार्वजनिक जुआ अधिनियम के तहत दोषसिद्धि और एक मामले में आबकारी अधिनियम के तहत बरी किया जाना शामिल था। इन्हीं आधारों पर 24 अगस्त 2018 को उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सभी मामले नाबालिग अवस्था के थे और अत्यंत तुच्छ प्रकृति के थे। जिनका नौकरी से कोई सीधा संबंध नहीं था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के अवतारसिंह बनाम भारत संघ (2016) के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि मामूली अपराधों में तथ्यों के दमन मात्र से नियुक्ति स्वत: रद्द नहीं की जा सकती। अदालत ने रेखांकित किया कि अपीलकर्ता एक दिव्यांग व्यक्ति है और उसके लिए नौकरी सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन है। किशोर न्याय अधिनियम, 2000 की धारा 19 का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि नाबालिग द्वारा किए गए अपराध भविष्य में अयोग्यता का कारण नहीं बनने चाहिए। अदालत ने नियुक्ति बहाल करने का आदेश दिया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 11:20:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षकों की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट की रोक : सुनवाई तक सेवाएं सुरक्षित, 9 विशेष अपीलों में हाईकोर्ट का बड़ा हस्तक्षेप </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने शिक्षक सेवा समाप्ति से जुड़े मामलों में बड़ा आदेश पारित किया। न्यायालय ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक कार्यरत शिक्षकों की सेवाओं को समाप्त नहीं किया जाएगा। यह आदेश आज सूचीबद्ध 9 विशेष अपीलों के संयुक्त समूह में पारित किया गया, जिसमें पूजा जैन की ओर से दायर अपील सहित अन्य अपीलें शामिल थीं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/high-courts-stay-on-dismissal-of-teachers-services-safe-till/article-136587"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/hammer.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने शिक्षक सेवा समाप्ति से जुड़े मामलों में बड़ा आदेश पारित किया है। न्यायालय ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक कार्यरत शिक्षकों की सेवाओं को समाप्त नहीं किया जाएगा। यह आदेश आज सूचीबद्ध 9 विशेष अपीलों के संयुक्त समूह में पारित किया गया, जिसमें पूजा जैन की ओर से दायर अपील सहित अन्य अपीलें शामिल थीं। सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमन महेश्वरी ने तर्क रखा कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा सिफारिश वापस लिए जाने के बाद प्राथमिक शिक्षा विभाग ने 28.11. 2025 को 75 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दीं। ये शिक्षक नियमित रूप से एक वर्ष से अधिक समय से सेवा दे रहे थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उस समय हुईए जब संबंधित याचिकाएं हाईकोर्ट में विचाराधीन थीं।न्यायालय के समक्ष यह भी प्रस्तुत किया गया कि पहले ही कई शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं।  न्यायालय ने इन तकोंर् को गंभीरता से लेते हुए यह स्पष्ट किया कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों की सेवाएं अगली सुनवाई तक समाप्त नहीं की जाएंगी। आदेश से उन शिक्षकों को राहत मिली है जिनकी सेवाएं अभी समाप्त नहीं हुई हैं और जिन पर भविष्य में कार्रवाई की आशंका बनी थी। हालांकि जिन शिक्षकों की सेवाएं पहले समाप्त हो चुकी हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 12:03:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के नगरीय विकास विभाग को कहा- एनएफएसयू को जमीन देने के लिए अपना रुख स्पष्ट करें राज्य सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के नगरीय विकास विभाग को कहा है कि वह नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी को कैंपस स्थापित करने के लिए जमीन देने के संबंध में अपना रुख स्पष्ट करे। साथ ही अदालत ने प्रताप नगर में चल रहे विवि के अस्थाई कैंपस के संसाधनों और कोर्स आदि की जानकारी भी फरवरी के प्रथम सप्ताह तक पेश करने को कहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-high-court-told-the-urban-development-department-of-the/article-136331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/hammer.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के नगरीय विकास विभाग को कहा है कि वह नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी को कैंपस स्थापित करने के लिए जमीन देने के संबंध में अपना रुख स्पष्ट करे। साथ ही अदालत ने प्रताप नगर में चल रहे विवि के अस्थाई कैंपस के संसाधनों और कोर्स आदि की जानकारी भी फरवरी के प्रथम सप्ताह तक पेश करने को कहा है। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं में संसाधनों की कमी को लेकर लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने आया कि जेडीए ने दौलतपुरा में विवि को 12.47 हेक्टेयर जमीन आवंटित की है और इसके बदले 63 करोड रुपए से अधिक राशि लेने की बात कह रहा है। जबकि विवि कह चुका है कि वह देशभर में 12 कैंपस और दो अकादमी संचालित करती है। संबंधित राज्यों ने उन्हें फ्री जमीन दी है।</p>
<p>ऐसे में उन्हें अधिकतम 2 करोड़ रुपए में चालीस से पचास एकड़ जमीन चाहिए। न्यायमित्र अधिवक्ता पंकज गुप्ता ने जेडीए और विवि के बीच जमीन के आकार और राशि का तालमेल नहीं होने के कारण यहां विवि का कैंपस स्थापित नहीं हो पा रहा है। नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी को फिलहाल प्रताप नगर के कोचिंग हब में दो साल के लिए अस्थाई कैंपस दिया गया है। जहां वह कोर्स संचालित कर रही है। ऐसे में राज्य सरकार के दखल के बिना विवि के कैंपस की स्थापना संभव नहीं है। न्यायमित्र की ओर से कहा गया कि यहां विवि का कैंपस समय की जरूरत है। इसके अभाव में विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इस पर अदालत ने यूडीएच विभाग को कहा है कि वह विवि को जमीन देने के संबंध में अपना रुख स्पष्ट करे। अदालत ने विवि के अस्थाई कैंपस में चल रहे कोर्स और स्टाफ आदि की जानकारी भी मांगी है। हाईकोर्ट ने विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं में स्टाफ सहित अन्य संसाधनों की कमी और डीएनए सहित अन्य नमूनों के परीक्षण में देरी होने पर स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान ले रखा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 11:40:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>1985 में दर्ज मुकदमे में अब मिली राहत, विदेश भेजने के नाम पर ठगी का मामला</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर के एक पुराने आपराधिक मामले में दोषियों की सजा बढ़ाने की सरकार व परिवादी की अपील को खारिज कर दिया है। जस्टिस फ रजंद अली की एकलपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर आपराधिक अपील और परिवादी द्वारा दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दोनों को निरस्त करते हुए ट्रायल कोर्ट की ओर से दी गई सजा को बरकरार रखा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/now-relief-in-the-case-registered-in-1985-case-of/article-136068"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/hammer.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर के एक पुराने आपराधिक मामले में दोषियों की सजा बढ़ाने की सरकार व परिवादी की अपील को खारिज कर दिया है। जस्टिस फ रजंद अली की एकलपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर आपराधिक अपील और परिवादी द्वारा दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दोनों को निरस्त करते हुए ट्रायल कोर्ट की ओर से दी गई सजा को बरकरार रखा। मामला वर्ष 1985 का है, जिसमें परिवादी अजीज अली ने आरोप लगाया था कि अभियुक्तों चंद्र अवतार और अब्दुल सलीम ने उसे विदेश भेजने, पासपोर्ट व वीजा बनवाने का झांसा देकर 13,000 की राशि ठगी। एफ आईआर के अनुसार इसी प्रकार 13 अन्य लोगों से भी धनराशि ली गई थी। आरोप था कि वादा किया गया कार्य पूरा नहीं हुआ और ली गई रकम वापस नहीं की गई। कुछ आरोपों में जबरन राशि व सामान लेने की बात भी कही गई थी।</p>
<p>पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 26 गवाह पेश किए और कई दस्तावेज प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष की ओर से भी साक्ष्य दिए गए। विचारण उपरांतए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नागौर ने 8 नवंबर 1988 को निर्णय पारित करते हुए अभियुक्तों को कुछ धाराओं में दोषी ठहराया और कुछ गंभीर धाराओं से बरी कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि हिरासत में बिताई अवधि का लाभ आरोपियों को मिलेगा। इस सजा को अपर्याप्त बताते हुए राज्य सरकार ने 1993 में सजा बढ़ाने के लिए अपील दायर की, जबकि परिवादी ने 1989 में हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। दोनों ही मामलों की सुनवाई एक साथ की गई। कोर्ट ने पाया कि जिन धाराओं में दोषसिद्धि हुई उनमें न्यूनतम सजा का प्रावधान नहीं है और ट्रायल कोर्ट ने कानून के दायरे में रहते हुए सजा दी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 10:21:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>42 करोड़ रुपए के फिल्म प्रोजेक्ट कॉन्ट्रैक्ट विवाद का मामला : विक्रम भट्ट की गिरफ्तारी, हाईकोर्ट ने पुलिस कार्यवाही पर उठाए गंभीर सवाल </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने विक्रम भट्ट और अन्य के खिलाफ गिरफ्तारी पर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। कोर्ट ने 42 करोड़ रुपए के फिल्म प्रोजेक्ट विवाद में उदयपुर पुलिस अधिकारियों को 15 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पेश होने का आदेश दिया। भट्ट पक्ष ने इसे सिविल मामला बताते हुए जल्दबाजी में गिरफ्तारी को कानून का दुरुपयोग बताया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/case-of-rs-42-crore-film-project-contract-dispute-arrest/article-135816"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जस्टिस समीर जैन की बेंच ने फिल्म निमार्ता, निर्देशक विक्रम प्रवीण भट्ट, उनकी पत्नी और सहकर्मियों की गिरफ्तारी के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट ने मामले की पूरी जांच प्रक्रिया पर स्पष्टता लाने के लिए पुलिस महानिरीक्षक उदयपुर और पुलिस अधीक्षक उदयपुर को 15 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का आदेश दिया है। मामला 42 करोड़ रुपए के फिल्म प्रोजेक्ट से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट विवाद का है, जिसे लेकर उदयपुर निवासी डॉ अजय मुरडिया ने विक्रम भट्ट और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि फिल्म निर्माण के दौरान अत्यधिक और मनगढ़ंत खर्च दिखाए गए, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ। वहीं भट्ट व अन्य की ओर से अधिवक्ता डीएस घडसाना,अधिवक्ता महेन्द्र गोदारा व अन्य ने पैरवी करते कहा कि यह विवाद पूरी तरह सिविल प्रकृति का है और इसे आपराधिक रंग देना कानून का दुरुपयोग है।</p>
<p>अधिवक्ताओं ने कहा कि याची भट्ट फिल्म उद्योग के सम्मानित निर्देशक-निमार्ता हैं। कॉन्ट्रैक्ट के तहत बनी दोनों फिल्में पहले ही रिलीज हो चुकी हैं। लगभग डेढ़ वर्ष तक कॉन्ट्रैक्ट बिना विवाद के चला और उसे पूरी तरह निभाया गया। अचानक बढ़े हुए खर्चों को लेकर शिकायत की गई और 7 दिसंबर 2025 (रविवार) को पुलिस ने जल्दबाजी में गिरफ्तारी कर ली। न तो आवश्यक प्रारंभिक जांच की गई और न ही मामले में कोई ऐसा तत्व है जो इसे आपराधिक बनाता हो।अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार, दिल्ली रेस क्लब बनाम उत्तर प्रदेश (2024) और भजनलाल केस का हवाला देते कहा कि इस तरह के मामलों में एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच जरूरी है और दो परस्पर विरोधी धाराओं में एक साथ मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Dec 2025 14:34:49 +0530</pubDate>
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                <title>विवाह योग्य उम्र नहीं रखने वाले बालिग भी रह सकते हैं साथ : अदालत ने कहा- लिव इन संबंध न तो अवैध हैं और ना ही बिना विवाह साथ रहना अपराध </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने एक प्रेमी युवक को सुरक्षा देने से जुड़े मामले में कहा है कि विवाह योग्य उम्र नहीं रखने वाले बालिग युवक-युवती अपनी मर्जी से साथ रह सकते हैं। वहीं अदालत ने नोडल अधिकारी को कहा है कि वह याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अभ्यावेदन को विधि अनुसार तय करें और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षा मुहैया कराए। जस्टिस अनूप कुमार ने यह आदेश 18 वर्षीय युवती और 19 वर्षीय युवक की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/adults-who-are-not-of-marriageable-age-can-also-live/article-134781"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/hammer.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक प्रेमी युवक को सुरक्षा देने से जुड़े मामले में कहा है कि विवाह योग्य उम्र नहीं रखने वाले बालिग युवक-युवती अपनी मर्जी से साथ रह सकते हैं। वहीं अदालत ने नोडल अधिकारी को कहा है कि वह याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अभ्यावेदन को विधि अनुसार तय करें और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षा मुहैया कराए। जस्टिस अनूप कुमार ने यह आदेश 18 वर्षीय युवती और 19 वर्षीय युवक की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि लिव इन संबंध न तो अवैध हैं और ना ही बिना विवाह साथ रहना अपराध माना गया है। यह राज्य सरकार का दायित्व है कि वह हर नागरिक के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करे। अदालत ने कहा कि मानव जीवन का अधिकार व्यक्ति के बालिग या नाबालिग होने से ऊपर है। याचिकाकर्ताओं की विवाह योग्य उम्र नहीं होने के कारण उन्हें उनके मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों को सीमित नहीं कर सकत। </p>
<p><strong>लिव इन रिलेशनशिप एग्रीमेंट भी बनाया</strong><br />याचिका में अधिवक्ता सत्यम खंडेलवाल ने अदालत को बताया कि 18 वर्षीय याचिकाकर्ता युवती और 19 वर्षीय युवक आपस में विवाह करना चाहते हैं, लेकिन अभी युवक की विवाह योग्य उम्र नहीं हुई है। ऐसे में विवाह योग्य उम्र होने तक वे एक साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने गत 27 अक्टूबर को लिव इन रिलेशनशिप एग्रीमेंट भी बनाया है। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता युवती के परिजन इसके खिलाफ हैं और उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इस पर वे नोडल अधिकारी कुनाडी थानाधिकारी, कोटा के समक्ष गत 13 और 17 नवंबर को जाकर अभ्यावेदन पेश कर सुरक्षा मांगी, लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाए। जिसका विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता विवेक चौधरी ने कहा कि कानून में लड़का-लड़की की विवाह योग्य उम्र 21 और 18 साल है। मामले में याचिकाकर्ता युवक 19 साल का ही है। ऐसे में न तो वे अभी विवाह कर सकते हैं और ना ही लिव इन में रह सकते हैं। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने नोडल अधिकारी को निर्देश दिए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Dec 2025 13:05:39 +0530</pubDate>
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