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                <title>kathmandu - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>भारत-नेपाल सीमा विवाद : केवल भारत ही नहीं ; नेपाल ने भी किया भारतीय जमीन पर कब्जा, बालेन्द्र ने कहा- कूटनीतिक वार्ता से निकाला जाएगा समाधान </title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में कहा कि केवल भारत ने ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा विवाद को इतिहासकारों और सर्वेक्षकों की संयुक्त टीम के साथ कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-nepal-border-dispute-not-only-india-but-nepal-also-occupied/article-155577"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/nepal-election.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने रविवार को संसद में एक विवादित बयान देते हुए कहा कि जैसे भारत ने नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण किया है, वैसे ही नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है। जानकारी के अनुसार, नेपाल के प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी के सीमा विवाद को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा। श्रम संस्कृति पार्टी के सांसद आरेन राय के संसद में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए शाह ने कहा, प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि न केवल भारत ने नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की भूमि पर अतिक्रमण किया है। </p>
<p><strong>सीमा विवाद सुलझाने को बनेगी संयुक्त टीम</strong></p>
<p>शाह ने बताया कि नेपाल इस संबंध में भारत को पहले ही एक आधिकारिक कूटनीतिक नोट भेज चुका है और वहां से जवाब भी मिल गया है। उन्होंने कहा, भारत से मिले जवाब में कहा गया है कि दोनों सरकारें इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और क्षेत्र के जानकारों को शामिल कर टीमें बनाएंगी और बातचीत के जरिए इसका समाधान तलाशेंगी।</p>
<p><strong>सीमा मुद्दे पर चीन और ब्रिटेन से भी बातचीत</strong></p>
<p>नेपाल के प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि नेपाल ने इस सीमा विवाद को लेकर चीन और ब्रिटेन के साथ भी कूटनीतिक चर्चा की है, क्योंकि यह मुद्दा उस समय का है, जब अंग्रेज इस क्षेत्र को छोड़कर गए थे, इसलिए ब्रिटेन को भी इसमें दिलचस्पी लेनी चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:18:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल में छिप नहीं पाएंगे भारतीय अपराधी, दोनों देशों में बड़ा समझौता, एफएटीएफ से काठमांडू को मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और नेपाल ने आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता के लिए ऐतिहासिक समझौता किया है। इससे जाली नोटों, आतंकवाद और संगठित अपराधों के खिलाफ जांच तथा साक्ष्य जुटाने में दोनों देशों को सीधी मदद मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/indian-criminals-will-not-be-able-to-hide-in-nepal/article-143874"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/nepal.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। भारत के अपराधी अक्सर अपराध करने के बाद नेपाल भाग जाते हैं। यही नहीं नेपाल के अंदर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का पूरा नेटवर्क है जो जाली नोटों के कारोबार को बढ़ावा देता है। इससे नेपाल भारत विरोधी तत्वों का अड्डा बन गया है। अब कई सालों की बातचीत के बाद नेपाल और भारत के बीच आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता समझौता हो गया है। इसे अब दोनों देश आपराधिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के मामले में एक-दूसरे की मदद करेंगे। इस समझौते पर काठमांडू में हस्ताक्षर किया गया। नेपाल इस समय फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के ग्रे लिस्ट में है और उसे उम्मीद है कि इस समझौते के बाद वह इससे निकल सकेगा। नेपाल ने इसी तरह का समझौता एक और पड़ोसी देश चीन के साथ भी किया हुआ है।</p>
<p><strong>आपराधिक जांच और कानूनी कार्रवाई में सहयोग </strong></p>
<p>नेपाल के विधि, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्रालय में आयोजित एक समारोह के दौरान मंगलवार को आपराधिक मामलों में परस्पर कानूनी सहायता पर समझौता पर हस्ताक्षर किए गए। मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों को आपराधिक जांच और कानूनी कार्रवाई में सहयोग करने में सक्षम बनाएगा। इसका उद्देश्य आपराधिक मामलों से संबंधित जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहयोग को मजबूत करना है।</p>
<p><strong>नेपाल और भारत के बीच नई प्रत्यर्पण संधि पर क्या है अपडेट?</strong></p>
<p>नेपाली कानून मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपराधिक मामलों में कानूनी सहायता के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाना है, जिसमें साक्ष्य संग्रह, सूचना साझाकरण और जांच तथा अदालती कार्यवाही के दौरान सक्षम अधिकारियों के बीच समन्वय शामिल है। नेपाल और भारत के बीच साल 2005 में इसी तरह का आपसी कानूनी सहायता और प्रत्यर्पण समझौता हुआ था। हालांकि अब आपराधिक मामलों में समझौता हो गया है लेकिन नई प्रत्यर्पण संधि को लेकर अभी बातचीत जारी है।</p>
<p><strong>समझौते के बाद एक तंत्र विकसित किया जाएगा</strong></p>
<p>इस कानूनी समझौते का उद्देश्य जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े आपराधिक मामले में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाया जाएगा। भारत की ओर से नेपाल में राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते के बाद एक तंत्र विकसित किया जाएगा ताकि आपराधिक मामलों की जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को किया जा सके। इस समझौते की मदद से मानव तस्करी, ड्रग्स की तस्करी, वित्तीय अपराध, आतंकवाद से जुड़े अपराध और संगठित अपराध को रोकने में मदद मिलेगी। इसकी मदद से अधिकारी और जांच एजेंसियां इन विषयों की प्रभावी तरीके से जांच कर सकेंगी। भारत और नेपाल के बीच साल 1953 में इससे पहले प्रत्यर्पण संधि हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:49:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत और नेपाल के बीच होने जा रहा बड़ा समझौता: ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने के लिए म्युचुअल लीगल असिस्टेंस करार तैयार, चुनाव से पहले होंगे हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[भारत-नेपाल के बीच एमएलए समझौता जल्द साइन होगा। यह ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने, जांच, सबूत साझा करने और कानूनी सहयोग को मजबूत करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/a-big-agreement-is-going-to-be-signed-between-india/article-142401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(2)7.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। भारत और नेपाल के बीच कानूनी सहायता को लेकर एक बड़ा समझौता होने जा रहा है। करार तैयार हो चुका है अब दोनों देशों के अधिकारी समझौते पर साइन करने के लिए तारीख तय कर रहे हैं। इस कानून पर पिछले साल जुलाई में नई दिल्ली में गृह सचिव स्तर की बैठक के दौरान सहमति बनी थी। नेपाली मीडिया ने बताया है कि कई वर्षों की बातचीत के बाद इस समझौते पर दोनों देश पहुंचे हैं, जिससे पता चलता है कि ये समझौता कितना पेचीदा है। इस समझौते का नाम वी​वीक्यू है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने ट्रांसनेशनल अपराधों से निपटने और दोनों देशों की कानूनी संस्थाओं के बीच सूचना के आदान-प्रदान, जांच सबूतों को साझा करने, अभियोजन में सहयोग और आपराधिक जांच में कॉर्डिनेशन को आसान बनाने के लिए आपराधिक मामलों पर एमएलए पर साइन करने के साथ आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। यह समझौता दोनों पक्षों को ट्रांसनेशनल अपराधों की जांच करने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। चूंकी दोनों देशों के नागरिक बगैर वीजा के एक देश से दूसरे देश की यात्रा करते हैं, इसलिए ये कानून काफी अहम माना जा रहा है।</p>
<p><strong>भारत नेपाल के बीच बड़ा कानूनी सहायता समझौता </strong></p>
<p>भारत और नेपाल के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है, ऐसे में दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों को लंबे समय से अपराधियों को एक-दूसरे को सौंपने में कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली में गृह सचिव स्तर की बैठक के दौरान बातचीत से जुड़े एक अधिकारी ने काठमांडू पोस्ट को कहा है कि एमएलए में एक ऐसा समझौता शामिल है जो आतंकवाद, तस्करी, साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे ट्रांसनेशनल अपराधों का मुकाबला करने के लिए तेज, व्यवस्थित सहयोग को सक्षम बनाता है। इस समझौते पर साइन होने के बाद अपराधियों का पता लगाने, सबूत जमा करने, अपराधियों की संपत्ति को जब्त करने और एक दूसरे की जांच एजेंसियों को संदिग्धों के बयान को दर्ज करने का अधिकार देगी। </p>
<p><strong>भारत यात्रा के दौरान साइन की चर्चा</strong></p>
<p>काठमांडू पोस्ट ने बताया है कि फिलहाल मामला इस पेंच पर फंसा हुआ है कि इस समझौते को मार्च में नेपाल में होने वाले चुनाव से पहले साइन कर लिया जाए या चुनाव के बाद। नेपाल विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि हम इस पर चर्चा कर रहे हैं। इससे पहले विदेश मंत्री बालनंद शर्मा की फरवरी के पहले हफ्ते में भारत यात्रा के दौरान समझौते पर साइन करने की चर्चा हुई थी। लेकिन यात्रा स्थगित कर दी गई और अगर चुनाव से पहले समझौते पर साइन करने को लेकर सहमति बनती है, तो कानून मंत्री अनिल सिन्हा नेपाल सरकार की ओर से समझौते पर साइन कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:42:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>काठमांडू में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ उबाल : प्रदर्शनकारी संसद में घुसे, पुलिस बैरिकेड्स तोड़े</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ उठे आक्रोश ने सोमवार को बड़ा रूप ले लिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/police-barricades-broke-into-parliament-in-kathmandu-against-social-media/article-126222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design8.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल में भ्रष्टाचार के विरोध और सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी सोमवार को संघीय संसद परिसर में घुस गए। इस घटना के बाद मौके पर सेना को बुला लिया गया है।</p>
<p>नेपाल के समाचारपत्र हिमालयन टाइम्स की खबर के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़कर और गेट फांदकर संघीय संसद परिसर में धावा बोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने पहले शांतिपूर्ण रहने की बात कही थी, पर मौके पर हालात बिगड़ गए। पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। नाजुक स्थिति को देखते हुए सेना को हालात पर काबू पाने के लिए बुला लिया गया है। प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बंद करने के सरकार के फैसले के खिलाफ काठमांडू, पोखरा, बुटवल, विराटनगर और अन्य शहरों में प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए।</p>
<p>स्थिति बिगड़ने के बाद काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय ने न्यू बानेश्वर के आसपास के प्रमुख इलाकों में रात 10 बजे तक के लिए कर्फ्यू लगा दिया है। इन प्रदर्शनकारियों को जेनरेशन जेड के नाम से जाना जा रहा है। जेनरेशन ज़ेड पीढ़ी यानी वे लोग जिनका जन्म वर्ष 1997 से वर्ष 2012 के बीच हुआ है। ये लोग देश में सोशल मीडिया फेसबुक, टि्वटर आदि पर प्रतिबंध लगाये जाने से नाराज हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 14:45:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल में राजशाही की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन : काठमांडू में कर्फ्यू, एक की मौत </title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह नेपाल के पर्यटन स्थल पोखरा में 2 महीने के प्रवास के बाद 9 मार्च को काठमांडू लौटे थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/curfew-one-killed-in-kathmandu-support-of-monarchy-in-nepal/article-108984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2)60.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल में राजशाही की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू के तिनकुने में एक इमारत में तोड़फोड़ की और उसे आग के हवाले कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर भी फेंके, जिसके जवाब में सुरक्षाकर्मियों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस घटना में एक युवक की मौत भी हो गई। प्रशासन ने काठमांडू में कर्फ्यू लागू कर दिया है और सेना की तैनाती कर दी है। इस आंदोलन में 40 से ज्यादा नेपाली संगठन शामिल हुए। प्रदर्शनकारी राजा आओ देश बचाओ, भ्रष्ट सरकार मुदार्बाद और हमें राजशाही वापस चाहिए, जैसे नारे लगा रहे थे। उन्होंने सरकार को एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि अगर उनकी मांगों पर एक्शन नहीं लिया गया तो और ज्यादा उग्र विरोध प्रदर्शन होगा। नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने 19 फरवरी को प्रजातंत्र दिवस के अवसर पर लोगों से समर्थन मांगा था। इसके बाद से ही देश में राजा लाओ, देश बचाओ आंदोलन को लेकर तैयारियां चल रही थीं।</p>
<p><strong>किंग ज्ञानेंद्र पर परिवार के नरसंहार के आरोप</strong><br />नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर 1 जून, 2001 को हुए नारायणहिति हत्याकांड में अपने परिवार के सदस्यों की हत्या का आरोप लगा है। इस घटना में राजा वीरेंद्र, रानी ऐश्वर्या सहित शाही परिवार के 9 लोगों की मौत हुई थी। पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह नेपाल के पर्यटन स्थल पोखरा में 2 महीने के प्रवास के बाद 9 मार्च को काठमांडू लौटे थे। तब उनका हजारों लोगों ने स्वागत किया था।</p>
<p><strong>87 साल के नवराज कर रहे आंदोलन का नेतृत्व</strong><br />आंदोलन का नेतृत्व नवराज सुवेदी कर रहे हैं। वे राज संस्था पुनर्स्थापना आंदोलन से जुड़े हुए हैं। इसका मकसद नेपाल में राजशाही को बहाल करना है। नेपाल में साल 2006 में राजशाही के खिलाफ विद्रोह तेज हो गया था। कई हफ्तों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद तत्कालीन राजा ज्ञानेंद्र को शासन छोड़कर सभी ताकत संसद को सौंपनी पड़ी। लेकिन अब नेपाल की जनता देश में फैले भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बार-बार सत्ता परिवर्तन से परेशान हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 29 Mar 2025 09:18:24 +0530</pubDate>
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