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                <title>protest - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पेपर लीक मामला: केजरीवाल ने केंद्र सरकार को घेरा, जेन-जी से किया सड़कों पर उतरने का आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[अरविंद केजरीवाल ने नीट पेपर लीक पर युवाओं (Gen-Z) से संवाद कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की। उन्होंने भाजपा शासित राज्यों में बार-बार होते पेपर लीक पर सवाल उठाए और सीबीआई जांच को महज दिखावा बताया। केजरीवाल ने कहा कि जब पड़ोसी देशों के युवा सरकार बदल सकते हैं, तो भारत के युवा दोषियों को जेल क्यों नहीं भेज सकते?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/paper-leak-issue-kejriwal-cornered-the-central-government-and-called/article-153699"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/kejriwal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को कहा कि कि पेपर लीक जैसे घिनौने खेल को बंद करने के लिए देश के जेन-जी को सड़कों पर उतर कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना पड़ेगा। केजरीवाल ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर बुधवार को देश के युवाओं (जेन-जी) से सीधा वर्चुअल संवाद किया। उन्होंने जेन-जी का आह्वान करते हुए कहा कि बहुत हुआ पेपर लीक, अब इस घिनौने खेल को बंद करने के लिए देश के जेन-जी को सड़कों पर उतर कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना पड़ेगा। उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए युवाओं से कहा कि जब वहां जेन-जी अपनी सरकार बदल सकते हैं तो हमारे देश का जेन-जी पेपर लीक कराने में शामिल मंत्रियों-नेताओं को जेल क्यों नहीं भिजवा सकता? हर बार पेपर लीक की जांच सीबीआई को सौंप दी जाती है, लेकिन आजतक किसी को सजा नहीं मिली। इस बार भी कुछ नहीं होने वाला है।</p>
<p>उन्होंने सवाल किया कि ज्यादातर पेपर लीक भाजपा शासित राज्यों में क्यों होते हैं, कुछ लोग सिस्टम फेल होने की बात करते हैं, लेकिन वे लोग ऐसा कहकर अनजाने में पेपर लीक में शामिल टॉप पर बैठे व्यक्ति को बचा रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि यह देश युवाओं का है। इन नेताओं को इस देश में कोई दिलचस्पी नहीं। इनके बच्चे तो विदेशों में पढ़ते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि देश के एक बड़े नेता ने कभी कहा था कि जरूरत पड़ी तो झोला उठाकर चला जाऊंगा, लेकिन हम कहां जाएंगे? हमारा परिवार तो इसी देश में रहता है। इसलिए हमें और युवाओं को मिलकर ही इस देश को बचाना होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हर बार की तरह इस बार भी जांच सीबीआई को सौंप दी गई है, हर बार की तरह इस बार भी सीबीआई ने 10-15 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। हर बार की तरह इस बार भी सभी आरोपी तीन से चार महीने में जमानत पर बाहर आ जाएंगे और हर बार की तरह इस बार भी ये सारे जेल से छूटे हुए बदमाश फिर से अगले साल पेपर लीक करने की तैयारी शुरू कर देंगे। केजरीवाल ने कुछ उदाहरण देकर युवाओं को समझाते हुए कहा कि 2014 में जब से देश में केंद्र सरकार आई है, तब से लेकर अब तक 93 पेपर लीक हुए हैं। इसमें अधिकतर डबल और ट्रिपल इंजन की सरकारों में पेपर लीक हुए हैं। </p>
<p>इन 93 पेपर में देश के लगभग 6 करोड़ युवाओं का भविष्य बंद था। पेपर लीक होने से 6 करोड़ युवाओं का भविष्य बर्बाद हो गया। सबसे ज्यादा पेपर लीक राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में हुए हैं। इन चारों राज्यों में भाजपा शासित सरकार है। यह कोई इत्तेफाक नहीं है कि इन चारों राज्यों और केंद्र में भाजपा की सरकार है और पेपर लीक हो गया। अभी जो नीट का पेपर लीक हुआ है, उसका केंद्र भी राजस्थान है। पेपर लीक में जिन दो-चार लोगों पर संदेह की सुई गई है, वो भी भाजपा के नेता हैं।</p>
<p>आप नेता ने कहा कि अगर नेपाल और बांग्लादेश का जेन-जी सड़कों पर उतर कर अपनी सरकारों को बदल सकता है तो हमारे देश का जेन-जी पेपर लीक कराने वाले मंत्रियों को जेल नहीं भेज सकता? मुझे अपने देश के जेन-जी पर पूरा भरोसा है कि वह भी मंत्रियों को जेल भेज सकता है। यह देश युवाओं का है। इस देश के नेताओं को इस देश में कोई रूची नहीं है। इस देश के नेताओं के बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 18:23:10 +0530</pubDate>
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                <title>सीएम सिद्दारमैया का केंद्र सरकार पर निशाना: एकल राष्ट्रीय-स्तरीय प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर उठाया सवाल, राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में सुधारों की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[नीट-यूजी 2026 रद्द होने पर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इसे युवाओं के साथ "विश्वासघात" बताया है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्र पर हमला बोलते हुए राज्यों को अपनी प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की स्वायत्तता देने की मांग की। कर्नाटक सरकार ने केंद्रीकृत प्रणाली पर सवाल उठाते हुए पारदर्शी जांच और जवाबदेही पर जोर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-siddaramaiah-targets-central-government-raises-questions-on-credibility-of/article-153713"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cm1.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। प्रश्न पत्र लीक और अनियमितताओं की रिपोर्टों के बीच राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी) 2026 के रद्द होने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए मांग की कि राज्यों को अपनी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने की अनुमति दी जाए। सिद्दारमैया ने इसे "युवाओं के साथ क्रूर विश्वासघात" करार दिया और कहा कि इसने देश भर में 22 लाख से अधिक मेडिकल उम्मीदवारों को "अनिश्चितता" में धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि लाखों विद्यार्थी महीनों की तैयारी और कोचिंग, यात्रा तथा संबंधित खर्चों पर परिवारों द्वारा किए गए भारी वित्तीय खर्च के बाद निराश रह गए हैं।</p>
<p>नीट के प्रति राज्य के लंबे समय से चले आ रहे विरोध को दोहराते हुए सिद्दारमैया ने कहा कि केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को नुकसान पहुंचाती है और पेशेवर प्रवेशों में राज्यों की भूमिका को कमजोर करती है। उन्होंने कथित लीक की पारदर्शी जांच, दोषियों के लिए कड़ी सजा और नई परीक्षा के लिए एक स्पष्ट कार्यक्रम की मांग की। शिवकुमार ने इस फैसले को "भारी शर्मिंदगी" बताया और आरोप लगाया कि इस अचानक उठाए गए कदम ने विद्यार्थियों का आत्मविश्वास हिला दिया है और वर्षों की तैयारी के बावजूद उम्मीदवारों को फिर से अनिश्चितता में धकेल दिया है। उन्होंने इस मुद्दे पर चुप्पी साधने के लिए भाजपा नेताओं की भी आलोचना की और पूर्व मंत्री सीएन अश्वथ नारायण के जवाब न देने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस रद्दीकरण ने उन छात्रों को प्रभावित किया है जिनके करियर के लक्ष्य स्पष्ट थे, और उन्होंने केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों से जवाबदेही की मांग की। उन्होंने छात्र-संबंधी मुद्दों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं में दोहरे मापदंडों का भी आरोप लगाया।</p>
<p>उच्च शिक्षा मंत्री एमसी सुधाकर, स्कूली शिक्षा मंत्री एस मधु बंगारप्पा और चिकित्सा शिक्षा मंत्री शरणप्रकाश आर पाटिल ने भी केंद्र की आलोचना की और एकल राष्ट्रीय-स्तरीय प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के लिए बेहतर रूप से सुसज्जित हैं और कर्नाटक द्वारा ऐसी परीक्षाओं की जिम्मेदारी लेने की तत्परता व्यक्त की। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों के तनाव को कम करने के लिए कक्षा 12 के अंकों को भी महत्व दिया जा सकता है। उन्होंने नीट विवाद को "सबसे बड़ा घोटाला" बताया और बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया, जबकि बंगारप्पा ने लाखों उम्मीदवारों को हुई मनोवैज्ञानिक पीड़ा को उजागर किया।<br />मंत्रियों ने सामूहिक रूप से केंद्र सरकार से पारदर्शिता बहाल करने, एक विश्वसनीय पुन: परीक्षा प्रक्रिया आयोजित करने और मेडिकल प्रवेशों के प्रबंधन में राज्यों को अधिक स्वायत्तता देने पर विचार करने का आग्रह किया। अपने बयानों के माध्यम से, कर्नाटक के नेताओं ने तत्काल सुधारात्मक उपायों, कथित पेपर लीक की गहन जांच और छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में सुधारों की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 16:40:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नीट पेपर लीक मामला: युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने की देशव्यापी आंदोलन की घोषण, जेपीसी जांच की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[युवा कांग्रेस और NSUI ने नीट पेपर लीक को "जघन्य अपराध" बताते हुए JPC जांच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने NTA को प्रतिबंधित करने और कोचिंग माफियाओं पर नकेल कसने पर जोर दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पेपर लीक को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/neet-paper-leak-issue-youth-congress-and-nsui-declare-nationwide/article-153661"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jakhar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। युवा कांग्रेस और कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के पेपर लीक मामले को गंभीर अपराध बताया है और इसकी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग की है। युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब तथा एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने बुधवार को यहां कांग्रेस मुख्यालय में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि भाजपा शासन में गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों का भविष्य अनिश्चित होता जा रहा है और नीट परीक्षा पेपर लीक की ताजा घटना ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है। उनका कहना था कि सरकार दूसरे देशों के बीच चल रहे युद्ध को रोकने जैसी बातें भी करती है लेकिन अपने देश में पेपर लीक जैसे अपराधिक घटनाओं को नहीं रोक पा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय कर कोचिंग संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।</p>
<p>चिब ने नीट पेपर लीक मामले की जांच जेपीसी से कराने की मांग की और कहा कि इस मामले में सबसे पहले जिम्मेदारी लेते हुए देश के शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा शासन में बार-बार बड़े स्तर पर पेपर लीक की घटनाएं क्यों हो रही हैं। उनका कहना था कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं हो और पेपर लीक जैसे जघन्य अपराध के दोषियों को सख्त सजा मिले।</p>
<p>उन्होंने परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को प्रतिबंधित करने की मांग करते हुए कहा कि परीक्षाओं का संचालन सरकार को स्वयं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि उनकी सरकार बनने पर पेपर लीक जैसे अपराधों को रोकने के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया जाएगा। विनोद जाखड़ ने कहा कि केवल परीक्षाएं रद्द करना समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और यह सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना था कि सरकार परीक्षाएं पारदर्शी ढंग से कराने में विफल रही है, जिससे युवाओं में निराशा बढ़ रही है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि कोचिंग संस्थानों के कर्मचारियों से पूछताछ के बाद राजनीतिक दबाव में उन्हें छोड़ दिया जाता है। उनका कहना था कि राजस्थान के सीकर, कोटा और जयपुर जैसे बड़े कोचिंग केंद्रों में संचालित कुछ संस्थानों के राजनीतिक संबंधों की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जयपुर ग्रामीण क्षेत्र की जमवारामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कथित पेपर लीक प्रकरण में शामिल कुछ लोगों के भाजपा युवा मोर्चा से संबंध हैं तथा इस मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कोचिंग संस्थानों पर सख्त शिकंजा कसने की कार्रवाई को ज़रूरी बताया और कहा कि पहले किसान आत्महत्या की घटनाएं चिंता का विषय थीं लेकिन अब बड़ी संख्या में छात्रों में भी निराशा बढ़ रही है। पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण छात्र भी अब आत्महत्या करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है और इस मुद्दे को लेकर उनका संगठन देशव्यापी आंदोलन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 16:07:40 +0530</pubDate>
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                <title>मुस्लिम युवक से मारपीट पर भोपाल में तनाव: पुलिस और भीड़ के बीच झड़प, चेहरे पर फेंका गोबर </title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में मुस्लिम युवक के साथ मारपीट और धार्मिक टिप्पणी के वीडियो ने तनाव पैदा कर दिया। विरोध में उतरी भीड़ और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। पुलिस ने धारा 144 लागू कर दो आरोपियों को हिरासत में लिया है और स्थिति अब नियंत्रण में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tension-in-bhopal-over-assault-on-muslim-youth-clash-between/article-153679"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bhopal.png" alt=""></a><br /><p>भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक मुस्लिम युवक से मारपीट और धार्मिक टिप्पणी के वायरल वीडियो को लेकर मंगलवार रात पुराने शहर में तनाव की स्थिति बन गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और भीड़ के बीच झड़प हुई तथा स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गौतम नगर क्षेत्र में नौ मई को एक होटल में हिंदू युवती के साथ मिले मुस्लिम युवक के साथ कुछ लोगों द्वारा मारपीट की गई थी। आरोप है कि युवक के चेहरे पर स्याही और गोबर लगाया गया तथा धार्मिक भावनाएं आहत करने वाली टिप्पणियां भी की गईं। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विरोध बढ़ गया।</p>
<p>मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग ताजुल मस्जिद, पीरगेट, इमामीगेट और मोती मस्जिद क्षेत्र में एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर नारेबाजी की। रात करीब एक बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झूमाझटकी हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इस दौरान मोती मस्जिद क्षेत्र में पथराव की घटना भी सामने आई, जिसमें पुलिस का एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। हालात पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद पुराने शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और धारा 144 लागू की गई।</p>
<p>मामले को लेकर शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, विधायक आरिफ मसूद और विधायक अतीक अकील ने पुलिस कमिश्नर संजय सिंह से मुलाकात कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। गोविंदपुरा थाना प्रभारी अवधेश सिंह तोमर ने बताया कि धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस ने दो आरोपियों को अभिरक्षा में लिया है तथा वीडियो फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है। एक आरोपी नाबालिग बताया गया है। इधर पूछताछ के दौरान युवती ने पुलिस को बताया कि वह पिछले लगभग पांच वर्षों से युवक आरिफ खान के साथ लिव-इन संबंध में रह रही है और उसने युवक के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई की मांग नहीं की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार गश्त की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 15:11:20 +0530</pubDate>
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                <title>महोबा में सियासी संग्राम: सपा सांसद लोधी पर मुकदमा दर्ज, पीएम मोदी पर की थी अमर्यादित टिप्पणी</title>
                                    <description><![CDATA[महोबा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करने पर सपा सांसद अजेंद्र लोधी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। उन पर बिना अनुमति प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने का आरोप है। सांसद द्वारा पीएम को "देश विरोधी" कहने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुतला फूंककर कड़ा विरोध जताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/political-battle-in-mahoba-case-filed-against-sp-mp-lodhi/article-153516"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/sp-mp.png" alt=""></a><br /><p>महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणी करने के आरोप में समाजवादी पार्टी (सपा) सांसद अजेंद्र लोधी पर मुकदमा दर्ज किया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक वंदना सिंह ने मंगलवार को बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिला मीडिया प्रभारी सत्येंद्र गुप्ता की तहरीर पर सदर कोतवाली में सांसद अजेंद्र लोधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 132, 189(2), 352 तथा 196(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। तहरीर में आरोप लगाया गया है कि सांसद ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया तथा बिना अनुमति प्रदर्शन कर सड़क पर अवरोध उत्पन्न करते हुए यातायात और कानून-व्यवस्था को प्रभावित किया।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि सोमवार को समाजवादी पार्टी द्वारा बिजली के स्मार्ट मीटर समेत 11 सूत्रीय मांगों को लेकर महोबा में प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिसमें क्षेत्रीय सांसद अजेंद्र सिंह लोधी भी शामिल हुए थे। प्रदर्शन के बाद उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बाद मीडिया से बातचीत में सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। </p>
<p>सांसद का बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर बयान की व्यापक आलोचना हुई। इसके विरोध में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष मोहन लाल कुशवाहा के नेतृत्व में महोबा नगर में प्रदर्शन किया और सांसद का पुतला फूंका। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सांसद की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे अक्षम्य बताया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:02:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>खड़गे का केंद्र पर तीखा हमला: मजदूर विरोधी लेबर कोड लागू कर सरकार ने श्रमिकों के अधिकारों का किया खनन, बोले-सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 केवल कागजी औपचारिकता</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार द्वारा 'चुपके से' लागू किए गए चार लेबर कोड की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे 'हायर एंड फायर' वाली उद्योगपति-हितैषी नीति बताते हुए कहा कि इससे करोड़ों मजदूरों के हड़ताल और यूनियन अधिकारों का हनन होगा। कांग्रेस ने न्यूनतम मजदूरी ₹400 करने और श्रमिक न्याय का संकल्प दोहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kharges-sharp-attack-on-the-center-said-that-the-government/article-153374"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/kharge.png-2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को लागू करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने “कायरतापूर्ण तरीके” से 8 और 9 मई 2026 को गजट अधिसूचनाओं के जरिए इन श्रमिक विरोधी कानूनों को लागू किया। खड़गे ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि ये कानून करोड़ों मजदूरों के लिए “हायर एंड फायर”, रोजगार और यूनियन अधिकारों में कटौती का रास्ता खोलते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बिना किसी व्यापक चर्चा और श्रमिक संगठनों से सलाह-मशविरा किए इन कानूनों को लागू किया। उन्होंने कहा कि 2015 के बाद से भारतीय श्रम सम्मेलन तक नहीं बुलाया गया और ये श्रम संहिताएं केवल केंद्र सरकार के “उद्योगपति मित्रों” को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वेतन संहिता, 2019 के तहत न्यूनतम मजदूरी तय करने के पुराने मानकों को खत्म कर दिया गया है, जिससे मजदूरों की मजदूरी मनमाने तरीके से तय हो सकेगी। साथ ही नई व्यवस्था में कर्मचारियों की वेतन घटने का खतरा पैदा हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि “व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता, 2020” कार्यस्थल सुरक्षा को कमजोर करता है और गंभीर दुर्घटनाओं में भी कंपनियों को सिर्फ जुर्माना देकर बच निकलने का रास्ता देता है। वहीं महिलाओं की सुरक्षा और श्रमिकों के अधिकारों को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि “सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020” असंगठित क्षेत्र के 90 प्रतिशत श्रमिकों के लिए केवल “कागजी औपचारिकता” बनकर रह गया है, जबकि गिग वर्कर्स के लिए भी ठोस सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं दी गई। खड़गे ने आरोप लगाया कि “औद्योगिक संबंध संहिता, 2020” के जरिए 300 कर्मचारियों तक वाली कंपनियों को बिना सरकारी अनुमति कर्मचारियों की छंटनी की छूट दे दी गई है और हड़ताल के अधिकार को भी लगभग खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी “श्रमिक न्याय” एजेंडा के तहत मनरेगा का विस्तार, 400 रुपये प्रतिदिन राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा, असंगठित मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सरकारी कार्यों में ठेका प्रथा समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 11:47:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अभिषेक बनर्जी का राज्य सरकार पर हमला: ममता के नेतृत्व में बिना डरे अपनी लड़ाई जारी रखेगी टीएमसी, चुनाव आयोग पर लगाया पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने बंगाल चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मतदाता सूची से 30 लाख नाम हटाने और ईवीएम में गड़बड़ी का दावा करते हुए संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। बनर्जी ने कार्यकर्ताओं को सुरक्षा का भरोसा देते हुए दिल्ली से बंगाल तक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/abhishek-banerjees-attack-on-the-state-government-tmc-will-continue/article-153250"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/abhishek-banerjeee.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को कहा कि पार्टी सुश्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में ''बिना डरे और बिना किसी समझौते के'' अपनी लड़ाई जारी रखेगी। अभिषेक ने अपने व्हाॅटसऐप चैनल पर एक पोस्ट में पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया की तीखी आलोचना करते हुए बड़े पैमाने पर मतदाताओं को वोट देने से रोकने, संवैधानिक अधिकारियों के पक्षपातपूर्ण व्यवहार तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ चुनाव के बाद हिंसा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा लगभग ''30 लाख असली मतदाताओं'' को कथित तौर पर मतदाता सूची से हटा दिया गया था, जिसे उन्होंने ''बहुत मुश्किल चुनाव'' बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत चुनाव आयोग के साथ-साथ कई सरकारी एजेंसियों ने पूरे चुनाव के दौरान ''बहुत ज़्यादा पक्षपातपूर्ण व्यवहार'' दिखाया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "लोकतांत्रिक संस्थाएं जो निष्पक्ष रूप से काम करने के लिए हैं, वे समझौता करती हुई दिखीं, जिससे पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा हुईं।" उन्होंने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ईवीएम को संभालने और उनकी मूवमेंट और जिसे उन्होंने "कंट्रोल यूनिट्स का मिसमैच" कहा, उससे जुड़े आरोपों का ज़िक्र किया। उन्होंने मतगणना केन्द्रों से सीसीटीवी फुटेज तुरंत जारी करने तथा लोगों के सामने सच्चाई लाने के लिए वीवीपेट पर्चियों की पारदर्शी गिनती की मांग की।</p>
<p>उन्होंने कहा, "कई परेशान करने वाली घटनाओं ने लाखों लोगों को यह सवाल करने पर मजबूर कर दिया है कि क्या लोगों के असली जनादेश का सम्मान किया गया है। लोकतंत्र तभी बच सकता है जब चुनावी संस्थाएं नागरिकों के बीच भरोसा और विश्वास पैदा करें।" उन्होंने चुनाव के बाद हिंसा और टीएमसी के कार्यालयों और कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों की खबरों पर भी चिंता जताई। इन घटनाओं को "बहुत चिंताजनक और एक लोकतांत्रिक समाज में मंज़ूर नहीं" बताते हुए उन्होंने दावा किया कि कई पार्टी कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर धमकाया गया और उन्हें अपने घर छोड़ने पर मजबूर किया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता को कभी भी अपनी सुरक्षा और अपनी राजनीतिक सोच के बीच चुनना नहीं चाहिए।" उन्होंने चुनावी हार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल के लोगों के साथ मज़बूती से खड़ी रहेगी और "दिल्ली और पश्चिम बंगाल दोनों में एक मज़बूत, मुखर और बिना किसी समझौते वाला विपक्ष" बनी रहेगी।</p>
<p>उन्होंने दोहराया कि "लाेकतंत्र , संवैधानिक मूल्यों और लोगों के अधिकारों और सम्मान" के लिए पार्टी की लड़ाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने पार्टी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वे धमकी या हिंसा का सामना करते हुए सीधे उनसे संपर्क करें और किसी भी धमकी या हमले की जानकारी साझा करें। उन्होंने कहा, "मैं उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार सब कुछ करूँगा और हर उपलब्ध कानूनी और लोकतांत्रिक उपाय अपनाऊँगा।" उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि वह आगे की राजनीतिक लड़ाई में उनके साथ "कंधे से कंधा मिलाकर" खड़े रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 15:41:49 +0530</pubDate>
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                <title>रामचन्द्र राव का बड़ा हमला: टीएमसी और कांग्रेस पर संविधान-लोकतंत्र का अपमान करने का लगाया आरोप, ममता बनर्जी के समर्थन को लेकर राहुल पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने को लोकतंत्र का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल जनादेश के बाद भी सत्ता में बने रहना असंवैधानिक है। राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्होंने विपक्ष को 'सीट चोरी' का दोषी ठहराया और जनता से 10 मई को पीएम मोदी की जनसभा में जुड़ने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ramchandra-raos-big-attack-on-tmc-and-congress-accused-of/article-152843"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/n-ramchandra-rao.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमों ममता बनर्जी और कांग्रेस पर संविधान-लोकतंत्र का अपमान करने का आरोप लगाया। राव ने यहां लालपेट में एक दीवार लेखन अभियान में भाग लेते हुए विपक्षी दलों पर यह तीखा हमला बोला। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 10 मई को परेड ग्राउंड में होने वाली जनसभा की तैयारियों के तहत चलाया गया। उन्होंने ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव हारने के बावजूद पद पर बने रहना लोकतंत्र और संविधान का अपमान है। संविधान के अनुच्छेद 172 का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद और प्रतिकूल जनादेश के बावजूद सत्ता में बने रहना संवैधानिक भावना के विरुद्ध है।</p>
<p>राव ने दावा किया कि सात मई के बाद सुश्री बनर्जी का मुख्यमंत्री बने रहना असंवैधानिक होगा और उन्होंने कहा कि संवैधानिक मानदंड और जनता का जनमत बहुमत वाली पार्टी द्वारा नई सरकार के गठन के पक्ष में है। भाजपा नेता ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए टिप्पणी की कि कांग्रेस सांसद अक्सर संविधान की एक प्रति अपने साथ रखते हैं लेकिन उन्हें इसकी समझ नहीं है। उन्होंने कांग्रेस की इस बात के लिए आलोचना की कि उसने ममता बनर्जी का समर्थन किया, जबकि पहले कथित तौर पर दूसरों पर "वोट चोरी" का आरोप लगाया था और अब "सीट चोरी" की बात कर रही है जिसे उन्होंने राजनीतिक दिवालियापन बताया। उन्होंने कहा कि किसी को भी जनता के जनादेश या संविधान का अनादर करने का अधिकार नहीं है।</p>
<p>राव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की भारी जीत, साथ ही असम और पुडुचेरी में मिली जीत पूरे देश की जनता के मिजाज को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के मतदाताओं ने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच मतभेद उत्पन्न करने की कोशिश करके विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देने वाली पार्टियों को खारिज कर दिया है और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि तेलंगाना में भी भाजपा समर्थक भावना बढ़ रही है। उन्होंने लोगों से अपील किया कि वे बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री मोदी की परेड ग्राउंड में होने वाली जनसभा में शामिल हों और तेलंगाना में राजनीतिक परिवर्तन का समर्थन करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 16:46:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमित यादव का केंद्र पर प्रहार: सरकार कर रही मजदूरों के अधिकारों का हनन, आंदोलन में गिरफ्तार वर्करों और नेताओं को रिहा करने की अपील </title>
                                    <description><![CDATA[समाजवादी मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव अमित यादव ने मजदूर दिवस पर भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने 12 घंटे कार्य के कानून को शोषण बताते हुए मजदूरों के अधिकारों के हनन का आरोप लगाया। सपा ने गिरफ्तार मजदूर नेताओं की रिहाई और महिला श्रमिकों के लिए आरक्षण की पुरजोर मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/amit-yadavs-attack-on-the-center-appeals-to-release-the/article-152338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/amit-yadav.png" alt=""></a><br /><p>जौनपुर। समाजवादी मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव अमित यादव ने शुक्रवार को कहा कि मोदी सरकार ने उद्योगपतियों के हित का ध्यान रखते हुए मजदूरों से 12 घंटे काम लेने का कानून बनाकर उनके अधिकारों का हनन कर रही है। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर श्री यादव ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी की सोच है कि समाज के हर वर्ग को समान भागीदारी मिले। इसी क्रम में ईट भट्ठों पर कार्य करने वाली महिला श्रमिक को भी संसद तक पहुंचाने के उद्देश्य से ओबीसी, एससी, एसटी एवं अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उठाई गई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आज मजदूर दिवस के दिन समाजवादी मजदूर सभा की मांग हैं कि कुछ दिनों पूर्व हुए मजदूर आंदोलन में गिरफ्तार हुए मजदूरों और मजदूर नेताओं को जल्द से जल्द रिहा किया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 16:52:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमित शाह के लद्दाख दौरे पर कांग्रेस का निशाना: ऐतिहासिक बौद्ध अवशेषों का किया जिक्र, भूमि एवं रोजगार की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गृह मंत्री अमित शाह के लद्दाख दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे बौद्ध अवशेषों के प्रदर्शन में व्यस्त हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की राज्य का दर्जा और रोजगार की मांगों पर चुप हैं। उन्होंने नेहरू के ऐतिहासिक दौरों का जिक्र करते हुए सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-targets-amit-shahs-visit-to-ladakh-mentions-historical-buddhist/article-152322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh-333.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस संचार विभाग प्रभारी जयराम रमेश ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लद्दाख दौरे को लेकर प्रतिक्रिया में कहा कि अमित शाह शुक्रवार को पिपरहवा के बौद्ध अवशेषों की "महिमा" में व्यस्त हैं, जबकि लद्दाख के लोगों की राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची का दर्जा और भूमि एवं रोजगार की सुरक्षा जैसी अहम मांगों पर चुप्पी साधे हुए हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि लद्दाख में इस तरह के धार्मिक और ऐतिहासिक प्रदर्शनों का एक लंबा इतिहास रहा है, जिससे गृह मंत्री शायद अनभिज्ञ हैं। उन्होंने 14 जनवरी 1949 की एक ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उस दिन भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों सारिपुत्र और महा मोग्गलान के पवित्र अवशेष, जिन्हें 1851 में विक्टोरिया और अलबर्ट संग्रहालय ले गए थे, उन्हें वापस भारत लाया गया था। इन अवशेषों को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने प्राप्त कर महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया को कोलकाता में सौंपा था।</p>
<p>कांग्रेस नेता के अनुसार, 1949 में ही नेहरू ने लद्दाख का चार दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान प्रतिष्ठित बौद्ध नेता कुशोक बकुला रिनपोछे ने उनसे आग्रह किया था कि इन अवशेषों को लद्दाख भी लाया जाए। उन्होंने कहा कि यह पहल मई 1950 में साकार हुई, जब इन पवित्र अवशेषों को 79 दिनों तक पूरे लद्दाख में प्रदर्शित किया गया। इसके बाद इन्हें यांगून, कोलंबो और सांची में स्थापित किया गया। जयराम रमेश ने कहा कि इतिहास गवाह है कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि लोगों के साथ संवाद और उनकी भावनाओं का सम्मान भी होता था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 13:22:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कोलकाता में स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर टीएमसी का धरना : बैलट बॉक्स से छेड़खानी का आरोप, चुनाव आयोग ने दी सफाई </title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में टीएमसी नेताओं ने ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरना शुरू कर दिया है। कुणाल घोष ने पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए बिना प्रतिनिधियों के काम करने का आरोप लगाया। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल पोस्टल बैलट की छंटनी हो रही थी और सभी ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित और लॉक हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tmcs-protest-outside-the-strong-room-in-kolkata-election-commission/article-152269"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(4).png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के नेता गुरुवार शाम से कोलकाता में ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका आरोप है कि बैलट बॉक्स उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना खोले जा रहे हैं। पार्टी ने एक्स पर एक वीडियो भी पोस्ट किया। स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरने पर बैठे टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि चुनाव आयोग के लाइवस्ट्रीम में अंदर कुछ लोग काम करते दिख रहे हैं, लेकिन टीएमसी के किसी प्रतिनिधि को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा। पांजा ने कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी तरह का मैनिपुलेशन नहीं होनी चाहिए। </p>
<p>चुनाव आयोग ने भी मामले पर सफाई दी है। आयोग ने कहा कि पोस्टल बैलट के लिए अलग स्ट्रॉन्ग रूम बनाया गया है, जहां बैलट की छंटनी की जा रही थी। इस प्रक्रिया की जानकारी पहले ही सभी राजनीतिक दलों को दे दी गई थी। ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित और लॉक हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 10:27:03 +0530</pubDate>
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                <title>कर्मचारी महासंघ ने 7 दिन में भुगतान की मांग की, आंदोलन की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में 700 निजी अस्पतालों का करोड़ों का भुगतान बकाया होने से RGHS कैशलेस सुविधा बंद हो गई है। लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी इलाज के लिए भटक रहे हैं। कर्मचारी महासंघ ने सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है और तुरंत बकाया राशि जारी करने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/employees-federation-demands-payment-in-7-days-warns-of-agitation/article-151994"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rghs.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर । RGHS में कैशलेस इलाज ठप, लाखों कर्मचारी-पेंशनभोगी संकट में -कर्मचारी महासंघ ने 7 दिन में भुगतान की मांग की, आंदोलन की चेतावनी राजस्थान में RGHS (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) के तहत कैशलेस इलाज की व्यवस्था ठप होने से प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनके आश्रित गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। निजी अस्पतालों द्वारा कैशलेस OPD, IPD और दवा सेवाएं बंद किए जाने से मरीजों को मजबूरन जेब से खर्च कर इलाज कराना पड़ रहा है।</p>
<p>कर्मचारी महासंघ (एकीकृत) के प्रदेशाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि प्रदेश के करीब 700 निजी अस्पतालों ने पिछले 8-9 महीनों से लंबित भुगतान के कारण सेवाएं बंद कर दी हैं। अस्पतालों का करोड़ों रुपये बकाया होने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है, जो अब मार्च-अप्रैल 2026 में विकराल रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार के दावों के विपरीत जमीनी हकीकत यह है कि RGHS कार्डधारक अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं और उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। कैशलेस सुविधा बंद होने से OPD, IPD और दवाओं का पूरा खर्च मरीजों को खुद उठाना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ गया है।</p>
<p>महासंघ के अनुसार, हाल ही में एक चिकित्सक की गिरफ्तारी के विरोध में भी कई अस्पतालों ने सेवाएं रोक दी हैं, जिससे हालात और अधिक बिगड़ गए हैं। डॉक्टरों में भी इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बनी हुई है। कर्मचारी महासंघ (एकीकृत) ने सरकार से मांग की है कि निजी अस्पतालों का समस्त बकाया भुगतान 7 दिनों के भीतर किया जाए। साथ ही RGHS पोर्टल की तकनीकी खामियों को दूर कर व्यवस्था को सुचारू बनाया जाए। डॉक्टरों के साथ संवाद स्थापित कर गतिरोध समाप्</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:45:24 +0530</pubDate>
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