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                <title>hindu temples - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>धार्मिक स्थलों को तोड़ना सभ्य व्यवस्था के खिलाफ, पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाए सरकार: शंकराचार्य</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान में प्राचीन हिंदू मंदिरों को नुकसान पहुंचाने पर शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज ने गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाने की अपील की ताकि अल्पसंख्यकों के धर्मस्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और वैश्विक स्तर पर मानवीय सौहार्द बना रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/government-should-put-diplomatic-pressure-on-pakistan-against-civilized-system/article-164562"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/शंकराचार्य-स्वामी-अधोक्षजानंद.png" alt=""></a><br /><p>मथुरा। पाकिस्तान में प्राचीन हिंदू मंदिरों को नुकसान पहुंचाये जाने की घटनाओं पर रोष जताते हुये शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज ने कहा कि मंदिर चाहे 100 साल पुराना हो या हाल ही में बना हो, वह ईश्वर का घर होता है और दुनिया के किसी भी कोने में किसी भी धर्मस्थल का अनादर अत्यंत निंदनीय है। मथुरा में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि भारत सरकार इस मामले का संज्ञान ले रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह पाकिस्तान सरकार पर कूटनीतिक दबाव बनाए ताकि ऐसी घटनाओं पर तुरंत रोक लग सके और अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p>स्वामी अधोक्षजानंद ने वैश्विक सौहार्द और मानवीय व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा, "यदि पाकिस्तान में मंदिर तोड़े जाएंगे, फिर प्रतिक्रियास्वरूप हिंदुस्तान में मस्जिदें तोड़ी जायें या किसी अन्य देश में चर्च तोड़े जायें, तो यह किसी भी सभ्य और मानवीय व्यवस्था का आधार नहीं हो सकता।" उन्होंने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानूनों और वैश्विक व्यवस्था का पालन करने का आह्वान किया। शंकराचार्य जी ने कहा कि हर देश को अपने यहाँ मौजूद सभी धर्मस्थलों का सम्मान और उनकी सुरक्षा करनी चाहिए। उन्होंने बल दिया कि दुनिया भर में विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोगों की धार्मिक भावनाओं का आदर और संरक्षण करना ही सच्ची मानवीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून-कायदों का मूल आधार है, जिसका पालन सभी राष्ट्रों को अनिवार्य रूप से करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 12:35:32 +0530</pubDate>
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                <title>बांग्लादेश में महाअष्टमी और पुण्य स्नान के लिए जुटे हजारों हिंदू, मंदिरों के बाहर सेना तैनात</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश में महाअष्टमी, बसंत पूजा और पुण्यस्नान पर शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सेना ने कमान संभाली है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/army-deployed-outside-thousands-of-hindu-temples-gathered-for-mahashtami/article-109922"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news14.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में महाअष्टमी, बसंत पूजा और पुण्यस्नान पर शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सेना ने कमान संभाली है। बांग्लादेशी सेना की मीडिया विंग ने बताया कि हजारों की संख्या में सुरक्षाकर्मी पूजा पंडालों, स्नान घाटों और धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा बनाए रखने के लिए तैनात किए गए हैं। देश की राजधानी ढाका समेत कई शहरों में हजारों की तादाद में हिंदू श्रद्धालु अपने अनुष्ठानों के लिए जुट रहे हैं और शांतिपूर्वक इनको निपटा रहे हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं के त्यौहारों पर सुरक्षा के लिए सेना की तैनाती इसलिए अहम है क्योंकि देश में हालिया समय में अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले हुए हैं। बांग्लादेश में बीते साल अगस्त के बाद से धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों के लिए मोहम्मद यूनुस सरकार लगातार आलोचना का शिकार हुई है। भारत ने भी बांग्लादेश के सामने इस मुद्दे को उठाया है। इसका असर मोहम्मद यूनुस सरकार पर होता दिख रहा है।</p>
<p><strong>मंदिरों के बाहर सेना तैनात</strong><br />बांग्लादेश के लंगलबंध में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे देश और विदेश से लाखों तीर्थयात्री पहुंचे हैं। महाअष्टमी पुण्यस्नान दो दिन तक चलेगा। रविवार को हजारों तीर्थयात्री लंगलबंध के 19 घाटों पर स्नान करेंगे। उत्तरी कुरीग्राम जिले के चिलमारी में भी ब्रह्मपुत्र नदी में भी हजारों लोगों स्नान के लिए जुटे हैं। भारत, श्रीलंका और नेपाल से भी तीर्थयात्री बांग्लादेश पहुंचे हैं। बांग्लादेशी सेना के अपने बयान में कहा है कि देशभर में महाअष्टमी, बसंती पूजा और पुण्यस्नान का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। सेना के जवान सभी अहम जगहों पर गश्त कर रही है और नजर रख रही है। सेना ट्रैफिक को भी संभाल रही है और चेक पोस्ट के माध्यम से ट्रैफिक को संभालने में मदद कर रही है। सेना के नेतृत्व में पूजा समितियों और पुजारियों के साथ बातचीत करते हुए विश्वास का माहौल बनाने की कोशिश की है।</p>
<p><strong>महाअष्टमी और बसंती पूजा </strong><br />बांग्लादेश में कई जगह पर पूजा पंडालों में महाअष्टमी और बसंती पूजा हो रही है। चिट्टगांव शहर में धलेश्वरी नदी के किनारे वार्षिक मैत्री महामानवित पूजा होगी। इसके अलावा, रामू, नागापुर, गारैल और भुइयानपुर में भी पूजा होगी। गौरा नदी में श्रीश्री बर्धी मंदिर और झालकाती में कोनाबारी ठाकुरबारी मंदिर में पूजा होगी। कुमिला और चांदपुर के मंडपों और राय बाजार के दुर्गा मंदिर में भी बहुत से लोग पूजा के लिए आए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Apr 2025 13:21:19 +0530</pubDate>
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