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                <title>economic impact - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>economic impact RSS Feed</description>
                
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                <title>शांति की कोशिश नाकाम : डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी घोषण ; हॉर्मुज़ ज़लड़मरूमध्य की नाकेबंदी के बाद तेल की कीमतों में आठ प्रतिशत की वृद्धि, ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार</title>
                                    <description><![CDATA[हॉर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नाकेबंदी के बाद वैश्विक तेल बाजार में भूचाल आ गया है। ब्रेंट क्रूड $102 के पार पहुंच गया, जबकि तेल की कीमतों में 8% का उछाल दर्ज किया गया। शांति वार्ता विफल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता का खतरा बढ़ा दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/peace-efforts-fail-donald-trumps-big-announcement-oil-prices-rise/article-150158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump--and-iran.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की घोषणा के बाद वैश्विक तेल की कीमतों में आठ प्रतिशत का उछाल आया और ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने सोमवार दोपहर (भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे) "ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने और वहां से निकलने वाले सभी समुद्री यातायात" की नाकेबंदी शुरू करने का संकल्प लिया। जून का ब्रेंट क्रूड वायदा रविवार रात (भारतीय समयानुसार सोमवार तड़के 3:31 बजे) तक पिछले बंद भाव से 7.76 प्रतिशत बढ़कर 102.59 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि मई का डब्ल्यू.टी.आई. वायदा 8.2 प्रतिशत बढ़कर 104.51 डॉलर पर पहुंच गया।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार रात को ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते की घोषणा की थी, जिसके बाद शनिवार को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हुई थी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने रविवार सुबह घोषणा की कि लंबी बातचीत के बाद भी दोनों देश किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहे हैं और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते के स्वदेश वापस लौट रहा है।</p>
<p>इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को ही घोषणा की कि अमेरिका हॉर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने और वहां से निकलने की कोशिश करने वाले सभी जहाजों की नाकेबंदी शुरू करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को उन सभी जहाजों पर नज़र रखने और उन्हें रोकने का भी निर्देश दिया जिन्होंने जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को भुगतान किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 16:56:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लाल निशान में बंद हुआ बाज़ार: अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने से शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट, सेंसेक्स 702 अंक की गिरावट के साथ 76,847 पर बंद</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी घेराबंदी और ईरान युद्ध की आशंका ने शेयर बाजार को हिला दिया है। सोमवार को सेंसेक्स 702 अंक और निफ्टी 0.86% गिरकर बंद हुए। ऑटो और आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली रही, जबकि मारुति और रिलायंस के शेयर सबसे अधिक टूटे। निवेशकों में वैश्विक अस्थिरता को लेकर गहरी निराशा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/market-closed-in-red-mark-heavy-fall-in-stock-markets/article-150247"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/share-market-fall-down.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से सोमवार को घरेलू शेयर बाजारों में बिकवाली लौट आयी और प्रमुख सूचकांक करीब एक प्रतिशत की गिरावट में बंद हुए। बीएसई का सेंसेक्स 702.68 अंक (0.91 प्रतिशत) गिरकर 76,847.57 अंक पर आ गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 207.95 अंक यानी 0.86 फीसदी नीचे 23,842.65 अंक पर रहा। अमेरिका और ईरान के बीच हार्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने इस महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग की घेराबंदी और अपनी शर्तों पर जहाजों को निकलने की अनुमति देने की घोषणा की है। इससे निवेशकों में ईरान युद्ध के स्थायी समाधान को लेकर निराशा बढ़ी है। मझौली और छोटी कंपनियों में भी बिकवाली का जोर देखा गया। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.77 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.46 प्रतिशत गिर गया।</p>
<p>सभी सेक्टरों में बिकवाली हावी रही। ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव देखा गया और उसका सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक टूट गया। एफएमसीजी, आईटी और तेल एवं गैस सेक्टरों के सूचकांक भी एक फीसदी से ज्यादा फिसल गये। सेंसेक्स की कंपनियों में मारुति सुजुकी का शेयर साढ़े चार प्रतिशत से अधिक टूट गया। बजाज फाइनेंस, इंडिगो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस और एचडीएफसी बैंक के शेयर दो से तीन प्रतिशत के बीच गिरे।</p>
<p>आईटीसी, इटरनल, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टाइटन, हिंदुस्तान यूनीलिवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंफोसिस और ट्रेंट के शेयर एक से दो प्रतिशत तक नीचे बंद हुए। बजाज फिनसर्व, अडानी पोर्ट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावरग्रिड, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, टेक महिंद्रा और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर भी लाल निशान में रहे। आईसीआईसीआई बैंक का शेयर दो प्रतिशत और एनटीपीसी का डेढ़ फीसदी से अधिक चढ़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 16:29:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>शेयर बाजार में गिरावट के बाद डॉलर के मुकाबले रुपया 55 पैसे हुआ कमजोर, 93.34 पर पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में 8% के उछाल ने भारतीय मुद्रा को बड़ा झटका दिया है। सोमवार को रुपया 55 पैसे टूटकर 93.34 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। ब्रेंट क्रूड के $102 पार जाने से आयात महंगा होने और महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/after-the-fall-in-the-stock-market-the-rupee-weakened/article-150169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rupee.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया सोमवार को 55 पैसे की गिरावट के साथ खुला, जिसके बाद रूपया 93.34 पर ट्रेंड कर रहा है। पिछले कारोबारी दिवस पर रुपया तीन पैसे की मजबूती के साथ 92.51 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, रूपए में आज दिन भर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।</p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की घोषणा के बाद वैश्विक तेल की कीमतों में आठ प्रतिशत का उछाल आया और ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 12:35:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अश्विनी वैष्णव का लोकसभा में जवाब: रेलवे ने 2025-26 में 167 करोड़ टन माल का किया परिवहन, वित्त वर्ष में पिछले 50 वर्षों में सबसे कम रेल दुर्घटनाएं दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि भारतीय रेलवे ने 167 करोड़ टन माल ढुलाई का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। उर्वरक और स्टील परिवहन में 13% की वृद्धि के साथ सुरक्षा में भी सुधार हुआ है। पिछले 50 वर्षों में सबसे कम रेल दुर्घटनाओं के साथ, रेलवे अब प्रतिदिन 25,000 ट्रेनें संचालित कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ashwini-vaishnavs-answer-in-lok-sabha-railways-transported-167-crore/article-148716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ashvini.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में माल परिवहन में एक नया रिकॉर्ड स्थापित करते हुए 167 करोड़ टन माल का परिवहन किया। यह जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए दी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में 3.25 प्रतिशत अधिक माल लदान के साथ रेलवे ने रिकॉर्ड 167 करोड़ टन माल का परिवहन किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने रेलवे क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व वित्तीय आवंटन की हैं, जिससे व्यापक विकास हुआ है। रेलवे में हुए सुधारों ने सभी सामाजिक-आर्थिक समूहों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है, विशेष रूप से गरीबों और मध्यम वर्ग पर। उन्होंने बताया कि उर्वरक, पिग आयरन और तैयार स्टील के परिवहन में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी, जिसने रेलवे को यह रिकॉर्ड बनाने में मदद की।</p>
<p>रेल मंत्री ने बताया कि इस दौरान लौह अयस्क का परिवहन 6.73 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सीमेंट के परिहवन में 3.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रेलवे ने 76,352 विशेष ट्रेनें चलाईं। वर्तमान में रेलवे नेटवर्क पर प्रतिदिन लगभग 25,000 ट्रेनें चलती हैं। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस वित्त वर्ष में पिछले 50 वर्षों में सबसे कम गंभीर रेल दुर्घटनाएं हुईं। इस दौरान केवल 16 गंभीर दुर्घटनाएं हुईं, जो सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:13:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आम आदमी को बड़ा झटका: इंडियन ऑयल ने प्रीमियम डीजल किया महंगा,  ₹1.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट के बीच इंडियन ऑयल ने प्रीमियम डीजल (XG) की कीमत में ₹1.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। दिल्ली में अब यह ₹92.99 में मिलेगा। हालांकि, सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण प्रीमियम ईंधन श्रेणियों पर महंगाई का दबाव बढ़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/common-man-again-got-a-big-shock-premium-diesel-becomes/article-148734"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/petrol.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में तेज उछाल को देखते हुए देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने बुधवार को अपने प्रीमियम डीजल की कीमत में 1.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। दिल्ली में इंडियन ऑयल का प्रीमियम डीजल 'एक्सजी' आज से 92.99 रुपये प्रति लीटर का मिल रहा है। इससे पहले इसकी कीमत 91.49 रुपये प्रति लीटर थी। इस प्रकार इसमें डेढ़ रुपये की बढ़ोतरी की गयी है।</p>
<p>इससे पहले इंडियन ऑयल ने 20 मार्च को अपने प्रीमियम पेट्रोल एक्सपी95 के दाम में दो रुपये की वृद्धि की थी। उसके बाद, दिल्ली में एक्सपी95 101.89 रुपये प्रति लीटर का बिक रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में आज गैर-ब्रांडेड पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये और गैर-ब्रांडेड डीजल की 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रही। इनके दाम में 30 अक्टूबर 2024 के बाद से कोई बदलाव नहीं किया गया है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 103.54 रुपये, चेन्नई में 100.84 रुपये और कोलकाता में 105.45 रुपये प्रति लीटर है। डीजल मुंबई में 90.03 रुपये, चेन्नई में 92.39 रुपये और कोलकाता में 92.02 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 17:23:34 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट: यूरोपीय संघ का ईंधन आयात बिल 14.9 अरब डॉलर बढ़ा; ऊर्जा मंत्रियों की मंगलवार को अहम बैठक, इन मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण यूरोपीय संघ का ऊर्जा आयात बिल मात्र 28 दिनों में 13 अरब यूरो बढ़ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति ठप होने से जीवाश्म ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। रूसी गैस पर निर्भरता कम करने की कोशिशों के बीच यह संकट यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-crisis-eus-fuel-import-bill-increased-by-149/article-148567"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-power-crisis.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। यूरैक्टिव ने एक गोपनीय राजनयिक दस्तावेज के हवाले से कहा है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण यूरोपीय संघ को ऊर्जा आयात के बिल में 13 अरब यूरो (14.9 अरब डॉलर) की अतिरिक्त लागत चुकानी पड़ी है। ऊर्जा मंत्रियों की मंगलवार को होने वाली ऑनलाइन बैठक से पहले ब्रुसेल्स ने यूरोपीय संघ के देशों को भेजे दस्तावेज में कहा, "28 दिनों के संघर्ष ने संघ के जीवाश्म ईंधन आयात बिल में पहले ही 13 अरब यूरो जोड़ दिए हैं।"</p>
<p>अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए थे। ईरान इजरायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है। इस बीच, फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजारों में तेल और तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए एक प्रमुख मार्ग - होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाला नौपरिवहन प्रभावी रूप से ठप हो गया है। इस वजह से अधिकांश देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं। इस संघर्ष ने यूरोपीय संघ के देशों में ऊर्जा की कीमतों में भारी वृद्धि कर दी है, जो इसके साथ ही रूसी गैस और तेल का आयात बंद करने की तैयारी भी कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 16:34:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रुपये में ऐतिहासिक गिरावट जारी, 95.20 प्रति डॉलर के करीब पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मजबूत डॉलर इंडेक्स के कारण भारतीय रुपया सोमवार को ₹96.36 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। ब्रेंट क्रूड $111 प्रति बैरल के पार पहुंचने से घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ गया है। पिछले सत्र के मुकाबले रुपये में 20 पैसे की भारी गिरावट दर्ज की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/historical-decline-in-rupee-continues-close-to-9636-per-dollar/article-148373"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/dollar-vs-ruppee.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई।आरबीआई के दखल के बावजूद सोमवार को रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 95 से नीचे आ गया, जो कि अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। वैश्विक कारणों और लगातार विदेशी बिकवाली के कारण दबाव बढ़ने से दिन में करेंसी 0.3% गिरकर 95.20 प्रति डॉलर पर आ गई।  पिछले कारोबारी दिवस पर यह 20 पैसे गिरकर 93.96 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में तेजी से भारतीय मुद्रा दबाव में रही।</p>
<p>लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा फिलहाल ढाई फीसदी से अधिक चढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल पर है। साथ ही दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं के बास्केट में डॉलर सूचकांक में रही तेजी का असर भी रुपये पर दिखा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 11:18:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान युद्ध ने बढ़ाई वैश्विक खाद्य सुरक्षा की चिंता: कृषि व्यापार नियमों को बदलने की कवायद तेज, विश्वजीत धर ने कहा-होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात संचालन में आई बाधा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान युद्ध ने वैश्विक खाद्य और उर्वरक आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से बढ़ती लागत को देखते हुए विशेषज्ञ अब WTO के पुराने नियमों को बदलने की वकालत कर रहे हैं। भारत सब्सिडी और नए विदेशी स्रोतों के जरिए यूरिया व डीएपी की आपूर्ति सुनिश्चित कर खाद्य सुरक्षा बचाने में जुटा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/america-iran-war-increased-the-concern-about-global-food-security-efforts/article-147996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/us-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका -इजरायल और ईरान के बीच हाल ही के युद्ध ने न केवल तेल बाजारों को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक खाद्य और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी बाधाएं उत्पन्न कर भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है। इस संकट को देखते हुए अर्थशास्त्री और विभिन्न सरकारें अब वैश्विक कृषि व्यापार नियमों को फिर से लिखने का प्रस्ताव तैयार कर रही हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के झटकों से निपटा जा सके।</p>
<p>भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के पूर्व डब्ल्यूटीओ चेयरमैन प्रोफेसर विश्वजीत धर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात संचालन में आई बाधा ने यह उजागर कर दिया है कि ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य प्रणालियां एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़ी हुई हैं। एलएनजी के प्रवाह में रुकावट और बढ़ती ऊर्जा लागत के कारण भारत जैसे देशों में उर्वरक उत्पादन और कीमतों पर सीधा असर पड़ा है। प्रमुख अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रस्तावित 'मॉडल ट्रीटी ऑन एग्रीकल्चरल ट्रेड' में तर्क दिया गया है कि विश्व व्यापार संगठन का मौजूदा ढांचा जलवायु परिवर्तन, महामारी और युद्ध जैसे झटकों से निपटने में अक्षम साबित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ढांचा शुरू से ही दोषपूर्ण था और अब इसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के तनाव परीक्षण में विफल पाया गया है।</p>
<p>भारत अपनी जरूरत का लगभग पांचवां हिस्सा यूरिया, आधा हिस्सा डीएपी और लगभग पूरी पोटाश मात्रा आयात करता है। खाड़ी देशों से होने वाली आपूर्ति और समुद्री मार्गों में बढ़ते जोखिमों के कारण बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिससे उर्वरकों की कीमतों में उछाल आया है। अधिकारियों के अनुसार, भारत सरकार ने फिलहाल इस झटके को किसानों तक पहुँचने से रोकने के लिए उच्च सब्सिडी के माध्यम से अवशोषित करने का निर्णय लिया है। यदि सरकार ऐसा नहीं करती, तो कृषि उत्पादन घटने और खाद्य कीमतों के बढ़ने का गंभीर जोखिम पैदा हो सकता था, जो एक बड़ा वित्तीय संकट बन सकता है।</p>
<p>प्रस्तावित नई संधि का उद्देश्य व्यापार के बजाय खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और समानता को प्राथमिकता देना है। प्रोफेसर धर के अनुसार, यह संधि सरकारों को घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और आवश्यकता पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करने का कानूनी अधिकार देने की वकालत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्षविराम होने के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार में युद्ध जोखिम प्रीमियम स्थायी रूप से जुड़ सकता है। इसका मतलब है कि भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा और उर्वरक की लागत संरचनात्मक रूप से हमेशा के लिए ऊंची बनी रह सकती है।</p>
<p>बदलते हालातों को देखते हुए भारत अब पोटाश और फॉस्फेट के लिए नए स्रोतों की तलाश कर रहा है और विदेशी खनिज संपत्तियों में निवेश बढ़ा रहा है। इसके साथ ही, घरेलू यूरिया उत्पादन विस्तार और खाड़ी क्षेत्र के बाहर से लंबी अवधि के एलएनजी अनुबंधों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि बाहरी झटकों को कम किया जा सके। वर्तमान संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब आपूर्ति श्रृंखलाएं अत्यधिक केंद्रित होती हैं, तो झटके केवल स्थानीय नहीं रहते बल्कि वैश्विक स्तर पर फैल जाते हैं। नई संधि इन संरचनात्मक कमजोरियों को दूर करने और बड़े कृषि व्यवसायों पर लगाम लगाने का आह्वान करती है ताकि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके।</p>
<p>प्रस्ताव में खाद्य सुरक्षा को "मानवता की साझा चिंता" के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके तहत राज्यों को यह अधिकार और दायित्व होगा कि वे व्यापार को प्रतिबंधित करके भी अपने नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करें, जो मौजूदा उदारीकरण समर्थक डब्ल्यूटीओ नियमों से एक बड़ा बदलाव होगा। अमेरिका-ईरान युद्ध ने साबित कर दिया है कि वैश्विक व्यापार की वर्तमान संरचना अब पुरानी पड़ चुकी मान्यताओं पर टिकी है। बर्लिन और बर्न विश्वविद्यालय जैसे वैश्विक संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा समर्थित यह पहल आने वाली डब्ल्यूटीओ मंत्रीस्तरीय वार्ता में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनने वाली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 15:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया तनाव के बीच USD के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा: 93.84 प्रति डॉलर के पार</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम एशिया संकट और डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय रुपया सोमवार को 33 पैसे टूट गया। यह $93.89$ के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक तनाव का असर घरेलू मुद्रा पर साफ दिख रहा है। मुद्रा बाजार में रुपये की गिरती कीमत से आयात और निवेश पर दबाव बढ़ने की आशंका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rupee-falls-by-almost-33-paise-to-cross-9386-per/article-147472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/delloar-and-ruppe.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच सोमवार को भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा गया, क्योंकि एनर्जी सप्लाई में लगातार रुकावट के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिससे एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.84 पर आ गया, जो शुक्रवार को 93.7350 के अपने पिछले निचले स्तर से भी ज़्यादा है।</p>
<p>BofA ग्लोबल रिसर्च को उम्मीद है कि जून 2026 तक रुपया 94 पर ट्रेड करेगा, जबकि पहले इसका अनुमान 89 था, यह मानते हुए कि मौजूदा संकट कुछ हफ़्तों में हल हो जाएगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 10:45:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस ने ईरानी बंदरगाह पर हमलों की दी चेतावनी: क्षेत्रीय तनाव बढ़ने का खतरा जताया, अमेरिका-इजरायल &quot;गठबंधन&quot; पर तनाव को बढ़ावा देने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[रूस ने ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हवाई हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने आगाह किया कि बंदर-ए अंजली बंदरगाह जैसे व्यापारिक केंद्रों को निशाना बनाने से रूस के आर्थिक हित और खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो रहे हैं। इस संघर्ष से समूचे कैस्पियन क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा पैदा हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-warned-of-attacks-on-iranian-ports-expressed-the-danger/article-147327"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/russia1.png" alt=""></a><br /><p>माॅस्को। रूस ने ईरान पर हाल ही में हुए हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि इन हमलों से संघर्ष के और अधिक फैलने का जोखिम है, जिससे रूस के अपने आर्थिक हित भी प्रभावित हो सकते हैं। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा कि माॅस्को ईरान भर में इज़राइल और अमेरिका द्वारा किए जा रहे हवाई हमलों के बढ़ते अभियान को "गहरी चिंता" के साथ देख रहा है।</p>
<p>मारिया जखारोवा ने विशेष रूप से कैस्पियन सागर पर स्थित बंदर-ए अंजली बंदरगाह पर 18 मार्च को हुए हमले का उल्लेख किया। उन्होंने इसे रूसी-ईरानी वाणिज्य, विशेष रूप से खाद्य शिपमेंट के लिए उपयोग किया जाने वाला एक प्रमुख व्यापारिक और रसद केंद्र बताया। उन्होंने अमेरिका-इजरायल "गठबंधन" पर तनाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि उनकी कार्रवाइयों से कैस्पियन देशों के भी इस व्यापक संघर्ष में खिंचने का खतरा पैदा हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 15:02:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मल्लिकार्जुन खड़गे का आरोप : रसोई गैस की कमी कूटनीतिक विफलता, केंद्र सरकार की नाकामी का खामियाजा 140 करोड़ लोग भुगतने को मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में रसोई गैस की भारी कमी को केंद्र की कूटनीतिक विफलता बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब जनता कतारों में खड़ी है और उद्योग ठप हैं, तब सरकार चुनावी दौरों में व्यस्त है। खड़गे ने ऊर्जा प्रबंधन में नाकामी को 140 करोड़ लोगों के लिए बड़ी मुसीबत करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mallikarjun-kharges-allegation-lpg-shortage-diplomatic-failure-140-crore-people/article-146211"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/kharge1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर कूटनीतिक रूप से विफल होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि देश रसोई गैस की कमी के संकट से जूझ रहा है और केंद्र सरकार इस विफलता पर ध्यान देने की बजाय चुनावी दौरों में व्यस्त हैं।</p>
<p>खड़गे ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में गुरुवार को कहा, “जब देश भारी संकट से जूझ रहा होता है तो केंद्र सरकार के कुछ दिग्गज नेता चुनावी दौरों में मशगूल होते हैं।” उन्होंने कहा कि देशभर में एलपीजी की भारी कमी है और लोग कतारों में खड़े हैं। कितने सारे छोटे-बड़े उद्योग केंद्र सरकार की विफलता का ख़ामियाज़ा भुगतने पर मजबूर हैं। पर सरकार के पास केवल झूठे दावे के अलावा कोई जवाब नहीं।</p>
<p>खड़गे ने एलपीजी संकट को सरकार की कूटनीतिक विफलता बताया और कहा “कूटनीति की विफलता” गंभीर मुद्दा है और ऊर्जा प्रबंधन की नाकामी का नतीजा आज देश की 140 करोड़ जनता भुगत रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 13:21:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>रुपये में गिरावट: रुपया 16 पैसे टूटा; फिर 92 प्रति डॉलर के पार, निवेशकों के बिकवाल रहने से भारतीय मुद्रा पर दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मजबूत डॉलर के कारण भारतीय रुपया 16 पैसे लुढ़ककर 92.01 के स्तर पर बंद हुआ। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव ने घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ाया। पिछले सत्र की रिकवरी के बाद रुपये का फिर से कमजोर होना पूंजी बाजार के लिए चिंता का विषय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rupee-falls-by-16-paise-then-crosses-92-per-dollar/article-146189"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/today-dollar-and-rupee.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया 16 पैसे टूट गया और कारोबार की समाप्ति पर एक डॉलर 92.01 रुपये का बोला गया। पिछले कारोबारी दिवस पर भारतीय मुद्रा 36 पैसे की मजबूती के साथ ऐतिहासिक निचले स्तर से उबरकर 91.85 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई थी।</p>
<p>रुपया आज 7.50 पैसे टूटकर 91.92 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। बीच कारोबार में यह ऊपर 91.85 रुपये और नीचे 92.06 रुपये प्रति डॉलर तक गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल में ढाई फीसदी से अधिक की मजबूती और दुनिया की अन्य प्रमुख मद्राओं के मुकाबले डॉलर सूचकांक में तेजी से रुपये पर दबाव रहा। भारतीय पूंजी बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों के बिकवाल रहने से भी भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 11:50:05 +0530</pubDate>
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