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                <title>ट्रेड डील पर फंसा बड़ा पेच : किसानों के लिए अमेरिका डाल रहा दबाव, वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं किसान</title>
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                        <![CDATA[वॉशिंगटन में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में अड़चन आ गई है। अमेरिका जीएम सोयाबीन और मक्का के आयात की मांग कर रहा है, जबकि भारत ने इसे अपनी ‘रेड लाइन’ बताते हुए साफ इनकार किया है। ट्रंप समर्थक किसान भारतीय बाजार खोलने का दबाव बना रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-is-putting-pressure-on-farmers-there-is-a-big/article-136089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/india-trade-america.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील को लेकर चल रही बातचीत में एक बड़ा पेच फंस गया है। अमेरिका ने दावा किया था कि उसे भारत की ओर से अब तक का सबसे अच्छा ऑफर मिला है। इसके बाद भी अब अमेरिका अपनी ऐसी शर्त मानने के लिए दबाव डाल रहा है जिसके लिए भारत किसी भी तरह से तैयार नहीं है। दरअसल, अमेरिका चाहता है कि भारत अमेरिकी किसानों के पैदा किए सोयाबीन और मक्का खरीदे। पिछले सप्ताह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने भारत के दौरे पर इसको लेकर काफी दबाव डाला था और द्विपक्षीय व्यापार में इसकी मंजूरी देने की मांग की थी। वह भी तब जब जेनेटिकली मोडिफाइड इन फसलों को भारत में गंभीर चिंता जताई गई है।</p>
<p><strong>भारतीय बाजार को खुलवाने के लिए भारी दबाव डाल रहे </strong></p>
<p>दरअसल, इस अमेरिकी दबाव के पीछे डोनाल्ड ट्रंप के एमएजीए समर्थक किसान हैं जो चुनाव में साथ देने के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति पर भारतीय बाजार को खुलवाने के लिए भारी दबाव डाल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन को भी लगता है कि भारत एक विशाल बाजार है। साथ ही मेक अमेरिका ग्रेट अगेन समर्थक किसानों के लिए यह एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक खरीददार देश हो सकता है। अमेरिका में इन जीएम फसलों का रेकॉर्ड उत्पादन हुआ है लेकिन अमेरिकी किसान इसे बेच नहीं पा रहे हैं। इससे जहां सोयाबीन और मक्का अमेरिका में जमा हो रहा है, वहीं अमेरिकी किसानों का वित्तीय संकट बढ़ता रहा है।</p>
<p><strong>भारत अमेरिकी दबाव के आगे अड़ा</strong></p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में किसान बंपर पैदावार से परेशान हैं। चीन के साथ अमेरिका के तनाव की वजह से वैश्विक बाजार में उथल पुथल चल रहा है। यही नहीं ब्राजील जैसे देशों से अमेरिकी किसानों को प्रतिस्पर्द्धा मिल रही है। यही वजह है कि अमेरिकी व्यापार वातार्कार सोयाबीन, मक्के और अन्य फसलों के लिए भारत पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं। इस अमेरिकी दबाव पर भारत ने अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार से साफ कह दिया है कि वह सोयाबीन और मक्के के आयात को मंजूरी नहीं दे सकता है। इसकी वजह यह है कि भारत में जीएम फसलें बैन हैं। भारत ने कहा है कि जीएम फसलें उसके लिए हमेशा रेड लाइन बनी रहेंगी।</p>
<p><strong>हमारी साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा </strong></p>
<p>इस बीच अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने हाउस डेमोक्रेट्स कॉकेस के उपाध्यक्ष टेड ल्यू से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रक्षा और सुरक्षा सहयोग, व्यापार और निवेश तथा जनसंपर्क से से जुड़ी साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा की। मुलाकात के बाद भारतीय राजनयिक क्वात्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, हाउस डेमोक्रेट्स कॉकस के वाइस चेयर, रिप्रेजेंटेटिव टेड लियू के साथ अच्छी बातचीत हुई। एआई, डिफेंस और सिक्योरिटी कोआॅपरेशन, व्यापार और निवेश, और लोगों के बीच संबंधों में नए विकास पर हमारी साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। आपसी हितों के मुद्दों पर लगातार सहयोग की उम्मीद है।</p>
<p><strong>भारतीय राजदूत ने अमेरिका संग दोस्ती पर दिया जोर</strong></p>
<p>12 दिसंबर को क्वात्रा ने कहा कि उन्होंने भारत-अमेरिका मजबूत संबंधों की दृढ़ समर्थक और ब्लैक कॉकेस की अध्यक्ष यवेट क्लार्क के साथ उपयोगी बैठक की। उन्होंने एआई क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने, जिसमें डाटा गोपनीयता और डाटा सुरक्षा शामिल हैं पर उनके दृष्टिकोण की सराहना की। विनय क्वात्रा ने बताया कि उन्होंने भारत के एआई लक्ष्य और एआई इम्पैक्ट समिट में उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ एक दिलचस्प बातचीत की और अमेरिकी उद्योग को भारत की एआई जर्नी में अहम साझेदार बनने के लिए आमंत्रित किया। इस समिट का आयोजन अलब्राइट स्टोनब्रिज समूह की तरफ से किया गया था।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 11:57:01 +0530</pubDate>
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                <title>किसानों पर मौसम ने बरपा कहर : बेमौसम बारिश से सोयाबीन की 60 प्रतिशत फसल नष्ट, मुआवजे की आस बाकी</title>
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                        <![CDATA[क्षेत्र बेमौसम की बरसात से सोयाबीन, मूंग व उड़द की फसल हुई नष्ट ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/soybean-crops-are-suffering-a-double-blow--with-farmers-still-waiting-for-compensation/article-129376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/co5py-of-news.png" alt=""></a><br /><p> देईखेड़ा। इस बार क्षेत्र के किसानों पर मौसम ने कहर बरपा दिया है। लगातार हुई बेमौसम बारिश से सोयाबीन की करीब 60 प्रतिशत फसल पहले ही नष्ट हो चुकी थी, वहीं हाल की बारिश ने खेतों में खड़ी फसल को फिर से हरा कर किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। किसान अब मजबूरी में दवा डालकर फसल सुखाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे कटाई संभव हो सके। इस अतिरिक्त खर्च ने पहले से परेशान किसानों की आर्थिक स्थिति पर और बोझ डाल दिया है। किसानों का कहना है कि दोबारा हरियाली आने से फसल के दाने सिकुड़ने लगे हैं, जिससे उपज और वजन दोनों में कमी आने की आशंका है। </p>
<p>वहीं खेत खाली न होने से सरसों और गेहूं की बुवाई में भी देरी हो रही है। झपायता के किसान रामेश्वर नागर ने बताया कि फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन बारिश ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। अब दवा डालकर किसी तरह फसल को सुखाने की कोशिश कर रहे हैं। जिला परिषद सदस्य किशनचन्द्र वर्मा ने कहा कि सरकार की ओर से अब तक सोयाबीन, मूंग और उड़द की बर्बाद हुई फसलों के लिए मुआवजे की घोषणा नहीं की गई है। वहीं लबान क्षेत्र के किसान राजेन्द्र मीणा, महेश मीणा और रामावतार मीणा ने कहा कि ह्लन राम से राहत मिली, न राज से।ह्व किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र राहत की घोषणा नहीं की गई तो अगली फसल की तैयारी भी अधर में रह जाएगी।</p>
<p>क्षेत्र बेमौसम की बरसात से सोयाबीन मूंग व उड़द की फसल नष्ट हो चुकी है, जिसके नुकसान की रिपोर्ट भी सरकार को सम्बंधित विभाग भेज चुके है। परन्तु सरकार ने भी तक भी फसल खराबे के लिये मुवावजा वितरित कर किसानों को राहत पहुंचाने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की है, जिससे किसान अपनी आगामी फसल के लिये राहत महसूस करें।  <br /><strong>-दिनेश व्यास देईखेड़ा। </strong></p>
<p>कृषि विभाग के साथ मिलकर क्षेत्र क्रॉफ कटिंग कर फसल के नुकासान का आंकलन कर रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है। फसल खराबे के लिये मुवावजा हेतु को दिशा निर्देश सरकार से प्राप्त नही हुए है। <br /><strong>-राजेन्द्र मीणा, तहसीलदार, इंदरगढ़।</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 11 Oct 2025 16:24:44 +0530</pubDate>
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                <title>हाड़ौती बने सोया हब तो किसानों की बदले तकदीर, सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिट व मार्केट की दरकार </title>
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                        <![CDATA[सोयाबीन से बने उत्पादों जैसे सोया दूध, टोफू, सोया आटा और पशु आहार की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और बिक्री की व्यवस्था हो जाए तो यहां के किसानों की तकदीर बदल सकती है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-hadoti-becomes-a-soy-hub--the-fortunes-of-farmers-could-change--soybean-processing-units-and-markets-are-needed/article-127688"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/111-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती क्षेत्र सोयाबीन उत्पादन के लिए पूरे देश में पहचान बना चुका है। हर साल यहां लाखों टन सोयाबीन का उत्पादन होता है, लेकिन किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इस बार भी बंपर उत्पादन के बावजूद किसान औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं। कृषि विशेषज्ञों और उद्यमियों का मानना है कि किसानों को इस स्थिति से उबारने के लिए अब हाड़ौती में सोयाबीन आधारित इंडस्ट्री स्थापित करना और स्थानीय स्तर पर मजबूत मार्केटिंग की व्यवस्था करना बेहद जरूरी हो गया है। यदि सोयाबीन से बने उत्पादों जैसे सोया दूध, टोफू, सोया आटा और पशु आहार की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और बिक्री की व्यवस्था हो जाए तो यहां के किसानों की तकदीर बदल सकती है। अब हाड़ौती को सोया हब बनाने की जरूरत है।</p>
<p><strong>खेती से सीधे जुड़ेगा आय का साधन:</strong> कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, सोया प्रसंस्करण को खेती के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है। किसान स्वयं या सहकारी समितियों के माध्यम से छोटे स्तर पर सोया दूध, टोफू और अन्य उत्पाद तैयार कर सकते हैं। इससे उन्हें कच्चे माल के बजाय तैयार उत्पाद बेचने का अवसर मिलेगा, जिससे लाभ कई गुना बढ़ सकता है। हाड़ौती में सोया आधारित लघु उद्योगों की स्थापना से न केवल किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। एक अनुमान के अनुसार, एक मध्यम आकार की टोफू यूनिट प्रतिदिन 500 लीटर सोया दूध प्रोसेस कर सकती है, जिससे 50-60 किलो टोफू तैयार होता है। बाजार में इसकी कीमत 200-300 रुपए प्रति किलो तक होती है।</p>
<p><strong>बाजार और ब्रांडिंग की जरूरत</strong><br />प्रगतिशील किसान लक्ष्मीचंद नागर व प्रमुख व्यापारी भूपेन्द्र कुमार का कहना है कि सोया उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय और आॅनलाइन बाजार की व्यवस्था आवश्यक है। किसान उत्पादक कंपनियां और सहकारी समितियां मिलकर ब्रांडिंग और पैकेजिंग कर सकती हैं। इससे उत्पादों को बेहतर पहचान मिलेगी और उपभोक्ताओं तक सीधे पहुंच बन सकेगी। हाड़ौती में सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिट्स की अपार संभावना है। छोटी यूनिट्स 2-5 करोड़ रुपए की लागत से लग सकती हैं। इसके लिए सरकार को निवेशकों को रियायती जमीन, सस्ती बिजली और बैंक लोन की सुविधा देनी होगी। उन्होंने कहा कि यूनिट्स लगाने से मंडियों पर दबाव कम होगा और किसानों को सीधे फैक्ट्री रेट मिलेगा।</p>
<p><strong>बम्पर उत्पादन फिर भी किसानों को घाटा</strong><br />हाड़ौती में सोयाबीन का उत्पादन हर साल रिकॉर्ड स्तर पर होता है, लेकिन किसानों को उनकी मेहनत का लाभ नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों, व्यापारियों और किसानों की राय एक ही दिशा में इशारा कर रही है कि यदि स्थानीय स्तर पर इंडस्ट्री और मार्केट उपलब्ध कराए जाएं तो हाड़ौती देश का सबसे बड़ा सोयाबीन प्रोसेसिंग हब बन सकता है और किसानों की आय दोगुनी हो सकती है। यहां हर साल यहां लाखों हैक्टेयर में सोयाबीन बोई जाती है और उत्पादन भी लाखों टन तक पहुंच जाता है। इसके बावजूद किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिलता। इस बार भी समर्थन मूल्य करीब 4,600 रुपए प्रति क्विंटल है, लेकिन मंडियों में सोयाबीन 3,800 से 4,000 रुपए में बिक रही है। किसानों का कहना है कि बंपर उत्पादन के बावजूद कम दाम से उनकी आर्थिक हालत बिगड़ रही है।</p>
<p><strong>सोयाबीन से बनने वाले उत्पाद</strong><br />- सोयाबीन तेल: खाद्य उपयोग का सबसे बड़ा बाजार।<br />- सोया नगेट्स (चंक्स) : शाकाहारी प्रोटीन का सस्ता और लोकप्रिय स्रोत।<br />- सोया दूध व टोफू : स्वास्थ्य व डायट फूड इंडस्ट्री में बढ़ती मांग।<br />- सोया आटा व बेकरी उत्पाद : बिस्किट, ब्रेड व स्नैक्स इंडस्ट्री।<br />- पशु आहार (डी-आॅयल्ड केक) : पोल्ट्री और डेयरी उद्योग के लिए अहम।<br />- न्यूट्रास्यूटिकल्स व प्रोटीन पाउडर : जिम, फिटनेस व फार्मा बाजार में उपयोगी</p>
<p>सोयाबीन उगाने में लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन मंडियों में दाम लागत से भी कम मिलते हैं। हमें मजबूरी में फसल बेचनी पड़ती है। अगर हाड़ौती  में सोयाबीन की इंडस्ट्री लगेगी तो हमें सीधे खरीदार मिलेंगे और फायदा होगा।<br /><strong>-रामलाल मीणा, किसान</strong></p>
<p>हाड़ौती क्षेत्र में सोयाबीन से बने उत्पाद जैसे तेल, सोया चंक्स, पशु आहार और प्रोटीन पाउडर के उत्पादन की बड़ी संभावना है। अगर यहां प्रोसेसिंग यूनिट्स लग जाएं तो न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि युवाओं को भी रोजगार मिलेगा।<br /><strong>- डॉ. ए.के. शर्मा, कृषि विशेषज्ञ </strong></p>
<p> अभी सोयाबीन को बाहर की फैक्ट्रियों में भेजना पड़ता है। यहां स्थानीय प्रोसेसिंग नहीं होने से किसानों को सही दाम नहीं मिल पाते है। यदि इंडस्ट्री हाड़ौती में ही लग जाए तो परिवहन खर्च बचेगा और किसानों को लाभ मिलेगा<br /><strong>- दिनेश अग्रवाल, मंडी व्यापारी  </strong></p>
<p>सरकार यदि इंडस्ट्री पॉलिसी के तहत टैक्स में छूट और सब्सिडी दे तो यहां सोया आधारित बड़ी-बड़ी यूनिट्स खड़ी हो सकती हैं। इससे कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां सभी जिलों को फायदा होगा। <br /><strong>- पंकज गुप्ता, उद्यमी </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Sep 2025 16:43:15 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - किसानों को राहत, सोयाबीन खरीद के बदले नियम</title>
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                        <![CDATA[अब 15 प्रतिशत नमी वाली सोयाबीन की होगी खरीद।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---relief-to-farmers--rules-changed-for-soybean-purchase/article-95363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer-(1).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा सहित प्रदेशभर में सरकारी केन्द्रों पर सोयाबीन खरीद की धीमी रफ्तार हो रही है। प्रदेश में लाखों क्विंटल सोयाबीन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन खरीद के नियमों के चलते किसानों ने खरीद केन्द्रों से दूरी बना रखी है। ऐसे में अब केन्द्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर सोयाबीन खरीद के नियमों में बदलाव कर दिया है। अब सरकारी केन्द्रों पर15 प्रतिशत नमी वाली सोयाबीन की खरीद की जाएगी। पूर्व में सोयाबीन में नमी की सीमा 12 प्रतिशत थी, जिसे अब तीन प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा अब  प्रत्येक किसान के लिए सोयाबीन खरीद की मात्रा भी बढ़ा दी गई। सरकारी केन्द्रों पर प्रत्येक किसान 40 क्विंटल तक सोयाबीन बेच सकेगा। पहले यह मात्रा 25 क्विंटल तक ही थी। जिसे अब 15 क्विंटल बढ़ा दिया है। सरकार द्वारा नियमों में बदलाव करने से किसानों को काफी राहत मिलेगी।</p>
<p><strong>पर्याप्त खरीद नहीं हुई तो जारी किए निर्देश</strong><br />केन्द्र सरकार के निर्देश पर 15 अक्टूबर से सोयाबीन और उड़द खरीद के लिए पंजीयन शुरू किया गया था। इसी के साथ विभिन्न स्थानों पर केन्द्र खोलकर  खरीद शुरू कर दी गई थी। कोटा संभाग की बात करें तो एक माह की अवधि में यहां पर केवल 15 हजार क्विंटल सोयाबीन की खरीद हो पाई है। इससे खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा था। यहीं राजस्थान प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों की थी। अधिकांश खरीद केन्द्रों पर सन्नाटा पसर रहा था। इसका प्रमुख कारण यह था कि 12 प्रतिशत से अधिक नमी वाली सोयाबीन को नापास किया जा रहा था। इससे किसानों निराश होकर लौटना पड़ रहा था। एक माह बाद भी सरकारी केन्द्रों पर सोयाबीन खरीद का ग्राफ नहीं बढ़ा तो सरकार ने नियमोंं में बदलाव करते हुए नए निर्देश जारी किए, ताकि सोयाबीन खरीद ज्यादा हो सके।</p>
<p><strong>इधर लिमिट बढ़ने से किसानों को होगा फायदा</strong><br />वर्तमान में समर्थन मूल्य केन्द्रों पर 4892 रुपए प्रति क्विंटल की दर से सोयाबीन की खरीद की जा रही है। जबकि बाजार में औसतन भाव 4200 रुपए प्रति क्विंटल तक ही चल रहे हैं। यानि किसानों को कृषि मंडियों में फसल बेचने से काफी नुकसान हो रहा था। इधर सरकारी केन्द्रों पर 25 क्विंटल सोयाबीन बेचने पर 17500 तक का मुनाफा हो रहा था। अब लिमिट बढ़ने से किसान 25 के बजाय 40 क्विंटल तक सोयाबीन समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे। इससे किसानों को अब 40 क्विंटल पर 28000 तक फायदा होगा। जिले में 9 केन्द्रों पर अब तक 1002 किसानों  ने पंजीयन करवाया है। इसमें अब तक 184 किसान सोयाबीन बेच चुके हैं। अब खरीद की लिमिट बढ़ाने से शेष किसानों को काफी फायदा होगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला  </strong><br />कोटा संभाग में सोयाबीन खरीद काफी कम रहने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 16 नवंबर के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि कोटा संभाग में समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की खरीद शुरू हो गई, लेकिन नियमों की पेचीदगियों के चलते सरकारी खरीद अभी तक नगण्य है। एक माह की अवधि में अब तक केवल 15 हजार क्विंटल ही सोयाबीन की खरीद हो पाई है। राजफैड के लिए इस सीजन में 10 लाख क्विंटल खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसकी तुलना में अभी तक मात्र 10 प्रतिशत ही खरीद हो पाई है। ऐसे में खरीद का लक्ष्य पूर्ण होना दूर की कौड़ी साबित हो रहा है। नियमों के कारण ज्यादा किसान सरकारी केन्द्रों पर फसल बेचने नहीं पहुंच रहे हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />इस साल बारिश के कारण सोयाबीन फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो गई। सरकारी केन्द्रों पर ज्यादा नमी वाली सोयाबीन की खरीद नहीं की जा रही थी। इससे किसानों को नुकसान हो रहा था। अब नमी की मात्रा 15 प्रतिशत और खरीद की लिमिट 40 क्विंटल करने से काफी राहत मिलेगी।<br /><strong>- भरोसीलाल जाटव, किसान</strong></p>
<p>केन्द्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर सोयाबीन खरीद के नियमों में बदलाव कर दिया है। अब सरकारी केन्द्रों पर15 प्रतिशत नमी वाली सोयाबीन की खरीद की जाएगी। इसके अलावा अब प्रत्येक किसान 40 क्विंटल तक सोयाबीन बेच सकेगा। पहले यह मात्रा 25 क्विंटल तक ही थी। <br /><strong>- विष्णुदत्त शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, राजफैड</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Nov 2024 12:54:59 +0530</pubDate>
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                <title>कम बारिश से फसलों का उत्पादन हुआ कम, नहीं निकल रही लागत</title>
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                        <![CDATA[किसानों का कहना हैं कि खेती करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। खाद बीज के बढ़ते कीमतों से किसान परेशान है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/crop-production-reduced-due-to-less-rain--costs-not-covered/article-59946"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/kam-baarish-s-fasalo-ka-utpadn-hua-kam...rajpur,-baran-news-19-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>राजपुर। आदिवासी अंचल क्षेत्र में कम बारिश होने के कारण किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं। तहसील क्षेत्र में सोयाबीन उपज निकलना शुरू हो गई है। किसान एक हफ्ते से मजदूर और थ्रेशर व हार्वेस्टर मशीन लगाकर उपज निकाल रहे हैं। इस वर्ष अंचल क्षेत्र  में अल्प वर्षा के कारण प्रति बीघा में दो से ढाई  क्विंटल तक सोयाबीन मक्का का उत्पादन हो रहा है। साथ ही बाजार में उपज के भाव कम मिलने से किसान परेशान हो रहे हैं। किसानों के अनुसार सोयाबीन उपज का भाव चार से साढ़े चार हजार रुपए क्विंटल ही मिल रहा है। एक बीघा में सोयाबीन फसल लगाने और उपज तैयार होने तक 15 हजार रुपए तक खर्च आता है। इतने कम भाव में तो लागत निकलना भी मुश्किल हो रहा है। साथ ही इलाके में कम बारिश होने के कारण उत्पादन भी प्रभावित होने के कारण  किसानों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना हैं कि सोयाबीन उपज के भाव कम से कम सात से आठ हजार रुपए प्रति क्विंटल मिलना चाहिए।</p>
<p><strong>किसानों ने कहा- खेती घाटे का सौदा साबित</strong><br />किसानों का कहना हैं कि खेती करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। खाद बीज के बढ़ते कीमतों से किसान परेशान है। एक तो कभी बाढ़, कभी कोरोना महामारी तो कभी अल्प वर्षा से किसान त्रस्त है। एक तो किसानों को सरकार द्वारा तय किए गए फसलों की कीमतों का लाभ नहीं मिल पाता है। दूसरी और खाद बीज के कीमत काफी बढ़ रहा है, तथा किसानों के फसलों का उचित कीमत नहीं मिल पा रही है। सैंकड़ों किसानों ने विभिन्न बैंकों से केसीसी लोन लिया हुआ है। वहीं 30 प्रतिशत किसान, साहूकार या फिर अन्य स्रोतों से कर्ज लिए हुए हैं। फसल के ठीक नहीं होने के कारण ऐसे किसान समय पर बैंक या साहूकार को कर्ज की राशि समय पर नहीं जमा करा पाते हैं।</p>
<p>किसानों के लिए सोयाबीन की फसल की खेती काफी महंगी है। इसकी बुआई से लेकर कटाई तक काफी खर्च किसानों को लगता है, परंतु मंडी में फसल का दाम भी काफी कम हैं। ऐसे हालात में किसान कैसे खेती को लाभ का व्यवसाय बना पाएंगे। जहां फिलहाल में मंडी में सोयाबीन के जो दाम है व चार से साढ़े चार हजार के बीच हैं। किसान पवन नागर, सोनू मेहता, ओमप्रकाश, कल्याण सिंह जगदीश ने बताया ने बताया कि वास्तव में यह खेती काफी महंगी हैं। जिसका उत्पादन एक बीघा में 2 से दाई क्विंटल सोयाबीन निकल रहा हैं। लागत निकलना भी मुश्किल हो रहा हैं।</p>
<p>इस बार कम बारिश के चलते पैदावार और साल की अपेक्षा कम हुई है। ऐसे में किसानों की लागत ठीक तरीके से नहीं निकल पा रही है। महंगाई की खेती हो गई है।<br /><strong>- खेरुलाल जाटव, किसान, राजपुर।</strong></p>
<p>पैदावार ठीक नहीं निकलने से इस बार किसान मायूस है। दीपावली भी ठीक तरीके से नहीं मन पाएगी, क्योंकि जो फसल बेचकर पैसा आया। वह अब जो फसल बोएंगे। उसमें लग जाएगा। ऐसे में किसान की आमदनी अच्छी नहीं हुई है और खेती को इस साल घाटे का सौदा बता रहे है।<br /><strong>-  मनकाराम किराड़, किसान, किराड़ पहाड़ी।    </strong></p>
<p>इस बार बारिश कम हुई है लेकिन जितना किसान बता रहे हैं। उतना उनको नुकसान नहीं है। हाइब्रिड बीज आने लगा है। जिससे कम पानी में जल्दी फसल पककर तैयार होती है।<br /><strong>- नीरज शर्मा, सहायक कृषि अधिकारी, शाहाबाद।</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Oct 2023 18:13:01 +0530</pubDate>
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                <title>चित्तौड़, बारां, बूंदी, भीलवाड़ा सहित कई जिलों में... हर साल 11.50 लाख मैट्रिक टन की पैदावार, फिर भी एमएसपी पर सोयाबीन की खरीद शून्य</title>
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                        <![CDATA[खरीद-2021-22 में सोयाबीन की उपज बेचान के लिए आठ किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन वे भी खरीद केन्द्र तक नहीं पहुंच सके।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-many-districts-including-chittor--baran--bundi--bhilwara-----yields-11-50-lakh-metric-tons-every-year--yet-the-purchase-of-soybean-at-msp-is-zero/article-4638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/dale.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। किसानों से एमएसपी पर उपज खरीद की गारंटी को लेकर भले ही देश में एक नई मुहिम चल रही हो, लेकिन जिन फसलों की खरीद के लिए एमएसपी तय है, उससे भी धीरे-धीरे किसान दूर होते जा रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजस्थान में गत दो साल से एमएसपी पर सोयाबीन की खरीद का आंकड़ा शून्य है। अर्थात चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बूंदी, बारां सहित कई जिलों में सोयाबीन का भारी उत्पादन होने के बाद भी सरकारी खरीद नहीं हो सकी है। खरीद-2021-22 में सोयाबीन की उपज बेचान के लिए आठ किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन वे भी खरीद केन्द्र तक नहीं पहुंच सके।<br /><br /><strong>यूं हुई थी खरीद शुरू</strong><br />खरीफ सीजन 2021-22 में समर्थन मूल्य पर किसानों से मूंग, उड़द, सोयाबीन की खरीद एक नवंबर-21 से तथा मूंगफली की आवक देरी से होने, अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में भी राज्य में वर्षा जारी रहने, प्रारंभ में नमी की मात्रा अधिक होने एवं दीपावली पर श्रमिकों की अनुपलब्धता से मूंगफली की खरीद 18 नवंबर, 2021 से आरंभ  की गई थी।<br /><br /><strong>उड़द भी लक्ष्य से नीचे</strong><br />राज्य में एमएसपी पर उदड़ की खरीद भी ज्यादा नहीं हो सकी है। केवल 40 मै. टन ही उड़द खरीदी जा सकी है, जो 25 लाख किसानों से खरीद है। इसका समर्थन मूल्य 6300 रुपए प्रति क्विंटल तय था। इसके साथ ही मूंग की 57,260 मै. टन खरीद हुई है, यह 29,615 किसानों से 416.57 करोड़ की 29 जनवरी, 2022 तक खरीद की गई है। इसी तरह मूंगफली की 55,059 मै. टन खरीद हुई है। यह खरीद 24,330 किसानों से 305.58 करोड़ की हुई है। इसकी खरीद का समय 15 फरवरी, 2022 को पूरा हो चुका है।<br /><br /><strong>एमएसपी की दर 3950 और बाजार में 6000 प्रति क्विंटल तक बिकी</strong><br />केन्द्र सरकार ने सोयाबीन की खरीद के लिए एमएसपी 3950 रुपए प्रति क्विटल तय की। इसकी खरीद की आखिरी तारीख 29 जनवरी, 2022 को समाप्त हो चुकी है। हालांकि शुरुआत में सोयाबीन बेचान के लिए आठ किसानों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया, जिसमें बारां के दो, भीलवाड़ा के तीन, बूंदी के दो और चित्तौड़ का एक किसान शामिल है। बाजार में 5500 से 6000 रुपए प्रति क्विंटल का भाव होने के कारण किसानों ने खरीद केन्द्रों की बजाय निजी बाजार में अपनी उपज का बेचान किया। <br /><br />सरकार की एमएसपी पर एक तरह से यह सवालियां निशान है कि एमएसपी पर दो साल से राज्य में सोयाबीन की खरीद नहीं हो सकी। इससे यह साबित हो गया है कि एमएसपी केवल दिखावे के लिए हैं। -<strong>रामपाल जाट, अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान महापंचायत </strong><br /><br />एमएसपी से बाजार भाव ज्यादा होता है, जिसके कारण किसान सोयाबीन को बाजार में बेच देते हैं। इस बार शुरुआत में तो कुछ किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन वे भी उपज बेचने नहीं आए। इस कारण एमएसपी पर सोयाबीन की कोई खरीद नहीं हो सकी है। -<strong>सुषमा अरोड़ा, एमडी, राजफैड </strong><br /><br /><strong>इन जिलों में सोयाबीन की पैदावार</strong><br />राज्य के करीब एक दर्जन जिलों में सोयाबीन की खेती होती है अर्थात सालाना सोयाबीन का 11.50 लाख मै. टन तक उत्पादन होता है। यह कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़, सवाई माधोपुर, चित्तौड़ जिलों में खास तौर पर उत्पादित होती है।<br /><br /><strong>वर्ष 2021-22 में यह था खरीद लक्ष्य</strong><br />मूंग    3,61,282 मै. टन<br />उड़द    61,807 मै. टन<br />मूंगफली    4,27,000 मै. टन<br />सोयाबीन    2,93,000 मै. टन</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Feb 2022 12:18:27 +0530</pubDate>
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                <title>किसानों से जुड़ी बड़ी खबर : समर्थन मूल्य पर मूंग, उड़द, सोयाबीन की 1 नवम्बर से एवं मूंगफली की 18 नवम्बर से खरीद</title>
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                        <![CDATA[ऑनलाइन पंजीयन 20 अक्टूबर से होगा प्रारम्भ, 868 केन्द्रों पर होगी खरीद]]>
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<p>सहकारिता मंत्री उदय लाल आंजना ने बताया कि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था ई-मित्र एवं खरीद केन्द्रों पर प्रातः 9 बजे से सायं 7 बजे तक की गई है। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार को मूंग की 3.61 लाख मीट्रिक टन, उडद 61807 मीट्रिक टन, सोयाबीन 2.93 लाख तथा मूंगफली 4.27 लाख मीट्रिक टन की खरीद  के लक्ष्य की स्वीकृति भारत सरकार ने दी है। पंजीकरण के अभाव में किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीद संभव नहीं होगी।</p>
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<p>आंजना ने बताया कि वर्ष 2021-22 के लिए मूंग के लिए 7275 रुपये एवं उड़द के लिए 6300 रुपये, मूंगफली के लिए 5500 रुपये एवं सोयाबीन के लिए 3950 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य घोषित किया है। किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए खरीद केन्द्रों पर आवश्यकतानुसार तौल-कांटें लगाये जायेंगे एवं पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध कराया जाएगा।</p>
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<p>प्रमुख शासन सचिव सहकारिता दिनेश कुमार ने बताया कि किसान को  जनआधार कार्ड नम्बर, खसरा गिरदावरी की प्रति एवं बैंक पासबुक की प्रति पंजीयन फार्म के साथ अपलोड करनी होगी। जिस किसान द्वारा बिना गिरदावरी के अपना पंजीयन करवाया जायेगा, उसका पंजीयन समर्थन मूल्य पर खरीद के लिये मान्य नहीं होगा। यदि ई-मित्र द्वारा गलत पंजीयन किये जाते या तहसील के बाहर पंजीकरण किये जाते है तो ऐसे ई-मित्रों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Oct 2021 16:15:12 +0530</pubDate>
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